Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by माँरविन विलियम्स

आगे बढ़ते रहें

द अमेजिंग रेस  मेरा एक पसंदीदा टेलेविज़न कार्यक्रम है l इस रियलिटी शो में, दस जोड़ों को एक दूसरे देश में भेजा जाता है जहाँ उनको रेल, बस, कार, बाइक, और पैदल चलकर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक अगली चुनौती के लिए पहुंचना होता है l समापन बिंदु पर पहले पहुँचने वाले जोड़े को दस लाख डॉलर पुरस्कार मिलता है l

प्रेरित पौलुस मसीही जीवन की तुलना एक दौड़ से करके समापन रेखा तक नहीं पहुंचना स्वीकारता है l “उसने कहा, “हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ; परन्तु केवल यह एक काम करता हूँ कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर चौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊं” (फ़िलि. 3:13-14) l पौलुस मुड़कर पीछे नहीं देखा और अपने पिछले पराजयों को उसे दोष की भावना से दबाने नहीं दिया, न ही अपने वर्तमान सफलताओं से खुद को प्रयासशीन बनने दिया l वह यीशु की तरह और भी बनने के लिए लक्ष्य की ओर दौड़ता गया l

हम भी दौड़ में हैं l हमारी पिछली असफलताओं अथवा सफलताओं के बावजूद, हम आगे यीशु की तरह बनने के अपने अंतिम लक्ष्य की ओर दौड़ते रहें l हम किसी सांसारिक इनाम के लिए नहीं दौड़ रहे, किन्तु हमेशा उसका आनंद लेने के अंतिम लक्ष्य के लिए l

मिलकर कार्य करें

मेरी पत्नी शकरकंद, अजवाइन के पत्ते, मशरूम, गाजर, और प्याज को मिलाकर, धीमी आंच पर दम किया हुआ बेहतरीन माँसाहारी भोजन बनाती है l छः या साथ घंटे बाद घर खुशबु से भर जाता है, और पहला स्वाद बेहतरीन होता है l मेरे लिए यह फाएदेमंद है जब धीमी आंच पर समस्त सामग्री से ऐसा लाभ मिलता है जो अकेले प्राप्त नहीं किया जा सकता था l

जब पौलुस ने दुःख के सन्दर्भ में “सब ... मिलकर” वाक्यांश उपयोग किया, उसने उस शब्द का उपयोग किया जिससे शब्द सहक्रियता  मिलता है l उसने लिखा, “हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं : अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं” (रोमियों 8:28) l वह रोमियों को जताना चाहता था कि परमेश्वर उनके दुःख का कारण नहीं है, वह उनकी सर्वश्रेष्ठ भलाई के लिए, उनकी हर परिस्थिति को अपने दिव्य योजना के साथ सहयोग करने देगा l पौलुस द्वारा बताई गई भलाई स्वास्थ्य, धन, प्रसस्ती, या सफलता के अस्थायी आशीष नहीं थे, किन्तु “उसके पुत्र के  स्वरुप में” में बनना था (पद.29) l

हम धीरज धरें और भरोसा रखें क्योंकि हमारा स्वर्गिक पिता सब दुःख, बिमारी, बुराई को अपनी महिमा और हमारे आत्मिक भलाई के लिए उपयोग करेगा l वह हमें यीशु के समान बनाना चाहता है l

खुबसूरत एकता

तीन बड़े हिंसक पशुओं का आपस में लिपटना और खेलना अति असामान्य है l किन्तु प्रतिदिन जोर्जिया के पशु शरणस्थल में बिलकुल यही होता है l 2001 में उपेक्षा और दुर्व्यवहार पश्चात, एक शेर, बंगाल का एक बाघ, एक काले  भालू को नोआह आर्क पशु शरणस्थल ने बचाया l “हम उनको अलग रख सकते थे,” उपनिदेशक ने कहा l “किन्तु इसलिए कि वे एक परिवार की तरह आए थे, हमने उनको एक साथ रखे l” तीनों ने दुर्व्यवहार के समय  एक दूसरे में सुख पाया, और, उनकी भिन्नता के बावजूद, वे शांति से एक दूसरे के साथ रहते हैं l

एकता खुबसूरत बात है l किन्तु जिस एकता के विषय पौलुस इफिसुस के विश्वासियों को लिखता है, अनूठा है l पौलुस इफिसियों को मसीह में एक देह के अंग की तरह अपनी बुलाहट के अनुकूल जीवन जीने को कहता है (इफि. 4:4-5) l पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से एकता में रहकर उन्होंने दीनता, नम्रता, और धीरज विकसित की l इस तरह का आचरण हमें प्रेमपूर्वक मसीह यीशु में सामान्य आधार द्वारा “एक दूसरे को सह[ने] (4:2) की अनुमति देता है l

हमारी भिन्नताओं के बावजूद, परमेश्वर के परिवार के सदस्य के रूप में उसने हमारा मेल हमारे उद्धारकर्ता की मृत्यु द्वारा किया और हमारे जीवनों में पवित्र आत्मा के कार्य द्वारा परस्पर मेल कराया l

चेतावनी!

निम्नलिखित चेतावनियाँ उपभोगता उत्पादों पर लिखी मिलीं :

 

“लपेटने से पूर्व बच्चे को हटाएँ l” (बच्चे को घुमानेवाली गाड़ी)

“ओक्सीजन नहीं देता l” (धूल मुखौटा)

“गाड़ी चलाते समय स्पीकर-फोन उपयोग न करें l” (“ड्राइव ‘एन’ टॉक” हैंड्स फ्री सेल फोन उत्पाद)

“यह उत्पाद उपयोग करने पर चलती है l” (स्कूटर)

नाबाल के लिए यह चेतावनी उचित है, “मूढ़ से…

आराधना के फाटक

विश्व के कुछ बड़े शहरों में प्रवेश करते समय, आपका सामना प्रसिद्ध फाटकों से होगा जैसे ब्रेंडेनबर्ग गेट (बर्लिन), जाफा गेट (यरूशलेम), और डाउनिंग स्ट्रीट के गेट (लन्दन) l चाहे ये फाटक बचाव अथवा उत्सव के उद्देश्य से थे, वे शहर के किसी क्षेत्र के बाहर या अन्दर होना दर्शाते हैं l कुछ खुले होते हैं; कुछ थोड़े लोगों को…

सादृश्य जुनून

हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के प्रख्याता, थॉमस जे. डीलॉन्ग ने अपने विद्यार्थियों और सहयोगियों के बीच एक परेशान करनेवाला प्रवृति देखा है - एक सादृश्य जुनून l” पहले से कहीं अधिक ... बिज़नेस प्रबंधक, वाल स्ट्रीट विश्लेषक, वकील, डॉक्टर्स, और दूरे व्यावसायिक परस्पर उपलब्धियों की तुलना करने की धुन में हैं l जब आप भीतरी मानदंड की अपेक्षा बाहरी पर सफलता…

आरोहण करते रहें

रिचर्ड को प्रेरणा की ज़रूरत थी, और उसे मिल गई l वह अपने मित्र केविन के साथ पहाड़ पर चढ़ रहा था l केविन रस्सी को मजबूती से पकड़ने वाला था l थकित और हार मानने के लिए तैयार, रिचर्ड ने केविन से उसे भूमि पर उतारने को कहा l किन्तु केविन ने उसे उत्साहित किया, अब वह बहुत ऊपर…

आत्मा छुटकारा देता है

हाल ही में, ग्रामीण आयरलैंड के अनेक शहर घर संख्या या पिन कोड उपयोग नहीं करते थे l इसलिए यदि एक शहर में तीन पेट्रिक मर्फी होते थे, सबसे हाल के निवासी को तब तक अपना डाक नहीं मिलता था जब तक अन्य दो पेट्रिक मर्फी लोगों को नहीं दिखा दिया जाता था जो पहले से वहाँ रहते थे l…

मेरे पीछे हो ले

वजन कम करनेवालों और स्वास्थ्य चाहनेवालों के लिए स्वास्थ्य क्लब विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तावित करते हैं l हमारा स्वस्थता केंद्र कम से कम 50 पौंड कम करने और स्वस्थ जीवनशैली चाहनेवालों के लिए सेवा देती है l एक सदस्य ने पूर्व स्वास्थ्य क्लब को त्यागा क्योंकि स्वस्थ लोग उसे बेडौल मानते थे l अब वह अच्छे वातावरण में सप्ताह में 5…

सम्बन्धित शीर्षक

> odb

आप नहीं हैं

दाऊद ने योजना बनायी, फर्नीचर अभिकल्पित किया, सामग्री इकट्ठा किया, समस्त प्रबंध किया (देखें 1 इतिहास 28:11-19) l किन्तु यरूशलेम का प्रथम मंदिर दाऊद का नहीं, सुलेमान का मंदिर कहलाता है l

क्योंकि परमेश्वर ने कहा था, “तू घर बनवाने न पाएगा” (1 इतिहास 17:4) l परमेश्वर दाऊद के पुत्र सुलेमान को मंदिर बनाने के लिए चुना था, इस इनकार का प्रतिउत्तर अनुकरणीय था l वह परमेश्वर के कार्य पर केन्द्रित रहा (पद.16-25) l उसकी आत्मा धन्वादित थी l उसने सम्पूर्ण प्रयास किया और मंदिर बनाने में योग्य लोगों से सुलेमान की मदद करवायी (देखें 1 इतिहास 22) l

बाइबिल टीकाकार जे. जी, मेक्कोन्विल ने लिखा : “अक्सर हमें स्वीकार करना होगा कि मसीही सेवा के रूप में जो कार्य हम करना पसंद करेंगे, वो नहीं है जिसके लिए हम योग्य हैं, और जिसके लिए परमेश्वर हमें बुलाया है l यह दाऊद की तरह हो सकता है, कार्य का आरंभ, जो भविष्य में और भी भव्य होगा l

दाऊद ने अपनी नहीं, परमेश्वर की महिमा खोजी l उसने परमेश्वर के मंदिर के लिए विश्वासयोग्यता से सब कुछ किया, उसके लिए एक मजबूत नींव डाला जो उसके बाद कार्य को संपन्न करनेवाला था l काश हम भी, उसी तरह, परमेश्वर का चुना हुआ कार्य धन्यवादी हृदय से करें! जाहिर है कि हमारा प्रेमी परमेश्वर  “अधिक भव्य” ही करेगा l

उसका अद्भुत चेहरा

मेरा चार वर्षीय बेटा जिज्ञासु है और निरंतर बातें करता है l मुझे उससे बातें करना पसंद है, किन्तु वह अपनी पीठ मेरी ओर करके बातें करने की खेदजनक आदत बना ली है l मैं अक्सर कहती हूँ, “मैं तुम्हारी सुन नहीं सकती-कृपया मेरी ओर देखकर बातें करो l”

कभी-कभी परमेश्वर हमसे भी यही कहता है-इसलिए नहीं कि वह सुन नहीं सकता, किन्तु हम वास्तव में “उसे देखे बिना” उससे बातचीत करना चाहते हैं l हम प्रार्थना करते समय अपने प्रश्नों में उलझकर और स्वकेन्द्रित रहकर, भूल जाते हैं किससे प्रार्थना कर रहे हैं l मेरे बेटे की तरह, हम उसकी ओर केन्द्रित हुए बिना प्रश्न करते हैं जिससे हम बातचीत कर रहे हैं l

हम, परमेश्वर कौन है और उसने क्या किया है, के विषय खुद को याद दिलाकर अपने अनेक चिंताओं को संबोधित कर सकते हैं l केवल पुनः केन्द्रित होकर, ही हम उसके चरित्र को जानकर सुख पाते हैं : कि वह प्रेमी, क्षमाशील, प्रभु, और अनुग्रहकारी है l

भजनकार का विश्वास था कि हम परमेश्वर का मुख निरंतर निहारें (भजन 105:4) l  दाऊद द्वारा अगुओं को उपासना और प्रार्थना के लिए नियुक्ति पर, उसने लोगों को परमेश्वर के चरित्र की प्रशंसा करने और उसके पूर्व विश्वासयोग्यता की चर्चा करने को उत्साहित किया (1 इतिहास 16:8-27) l

परमेश्वर का खूबसूरत चेहरा निहारने पर, हम सामर्थ्य और सुख पाते हैं जो हमें हमारे अनुत्तरित प्रश्नों के मध्य भी संभालता हैं l

सुख का पलना

मेरी सहेली ने मुझे अपने चार दिन की बेटी को गोद में लेने का सौभाग्य दिया l बच्चावह मेरे गोद में आने के बाद ही हलचल करने लगा l मैंने उसे दुलारा, अपने गाल उसके सिर से लगाया, और उसे चुप करने के लिए हिलाते हुए एक गीत गुनगुनाने लगी l इन प्रयासों के साथ, दस वर्षों के अपने लालन-पालन अनुभव के बाद भी, मैं उसे शांत न कर सकी l मैंने उसे उसकी अधीर माँ के बाहों में डालने तक वह अत्यंत परेशान रही l तुरन ही वह शांत हो गई; उसका रोना बंद हो गया और उसकी बेचैनी उसके भरोसेमंद सुरक्षा में तब्दील हो गई l  मेरी सहेली अपनी बेटी को गोद लेना और उसकी परेशानी दूर करना जानती थी l

परमेश्वर अपने बच्चों को माता की तरह सुख देता है : कोमल, भरोसेमंद, और बच्चे को शांत करने में चिन्ताशील l हमारे थकित अथवा परेशान होने पर, वह हमें अपनी बाहों में उठाता है l हमारा पिता और सृष्टिकर्ता होकर, वह हमें निकटता से जानता है l “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (यशा. 26:3) l

जब हमें संसार का भारी बोझ दबाए, हम इस ज्ञान में सुख पाते हैं कि वह प्रेमी अभिभावक की तरह हमें अर्थात् अपने बच्चों को सुरक्षित रखता और उनके लिए लड़ता है l