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Articles by माँरविन विलियम्स

अपनी चौकसी करो

एक व्यक्ति और अनेक मित्र स्की रिसोर्ट गेट से अन्दर गए जिस पर हिमस्खलन (Avalanche) के चेतावनी संकेत होने के बावजूद स्नोबोर्डिंग(बर्फ पर फिसलना) करने लगे l दूसरी बार नीचे आते समय, कोई चिल्लाया, “हिमस्खलन!” लेकिन वह व्यक्ति बच न सका और गिरती हुए बर्फ में दब कर मर गया l कुछ ने उसे नौसिखिया बताते हुए उसकी आलोचना की l लेकिन वह नौसिखिया नहीं था; वह एक “हिमस्खलन-प्रमाणित गाइड(Avalanche-certified guide)” था l एक शोधकर्ता ने कहा कि अक्सर सबसे अधिक हिमस्खलन प्रशिक्षण वाले स्कीयर(skiers) और स्नोबोर्डर्स (snowboarders) में ही दोषपूर्ण तर्क देने की सम्भावना देखने को मिलती है l “स्नोबोर्डर(snowboarder) की मृत्यु इसलिए हुयी क्योंकि उसने अपनी सतर्कता को हलके में लिया l 

जैसे ही इस्राएल प्रतिज्ञात देश में जाने की तैयारी करने लगा, परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग अपनी चौकसी करें—सावधान और सचेत रहें l इसलिए उसने उन्हें उसके सभी “विधि और नियम” मानने की आज्ञा दी (व्यवस्थाविवरण 4:1-2) और अतीत में अनाज्ञाकारियों पर उसके दंड को स्मरण रखें (पद.3-4) l उन्हें स्वयं की जाँच करने और अपने आंतरिक जीवन पर नज़र रखने के लिए “चौकसी” करनी थी (पद.9) l इससे उन्हें बाहर से आध्यात्मिक खतरों और भीतर से आध्यात्मिक उदासीनता से बचने में मदद मिलती l 

हमारे लिए अपनी चौकसी छोड़ना और उदासीनता और आत्म-धोखे में पड़ना आसान है l लेकिन परमेश्वर हमें  जीवन में गिरने से बचने की शक्ति दे सकता है और जब हम गिरते हैं तो उसके अनुग्रह से क्षमा मिलती हैं l  उसका अनुसरण करके और उसकी बुद्धि और प्रावधान में आराम करके, हम अपने बचाव को बनाए रख सकते हैं और अच्छे निर्णय ले सकते हैं !

परमेश्वर ने कहा

1876 ​​में, आविष्कारक अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीफोन पर सबसे पहले शब्द बोले। उसने अपने सहायक थॉमस वाटसन को यह कहते हुए बुलाया, "वॉटसन, यहाँ आओ। मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ।" कर्कश और अस्पष्ट, लेकिन समझ में आने लायक, वाटसन ने सुना कि बेल ने क्या कहा था। एक फोन लाइन पर बेल द्वारा बोले गए पहले शब्दों ने साबित कर दिया कि मानव संचार के लिए एक नया दिन आ गया है।

पहले दिन के “बेडौल और सुनसान” पृथ्वी में भोर स्थापित करते हुए (उत्पत्ति 1:2), परमेश्वर ने पवित्रशास्त्र में लिखे अपने पहले शब्द बोले: " उजियाला हो," (पद 3)। ये शब्द रचनात्मक शक्ति से भरे हुए थे। उन्होंने बोला, और जो कुछ उन्होंने कहा वह अस्तित्व में आ गया  (भजन संहिता 33:6, 9)। परमेश्वर ने कहा, " उजियाला हो" और ऐसा ही हुआ। उनके शब्दों ने तुरंत विजय उत्पन्न की क्योंकि अंधकार और अव्यवस्था ने प्रकाश और अनुक्रम की चमक को  मार्ग दिया। अंधकार के प्रभुत्व के लिए प्रकाश परमेश्वर का उत्तर था। और जब उसने ज्योति की रचना की, तो उसने देखा कि वह "अच्छा है " (उत्पत्ति 1:4 )।

यीशु में विश्वासियों के जीवन में परमेश्वर के पहले शब्द शक्तिशाली बने हुए हैं। प्रत्येक नए दिन के उदय के साथ, ऐसा लगता है जैसे परमेश्वर हमारे जीवन में अपने बोले गए वचनों को पुन: स्थापित कर रहा है। जब अंधकार—शाब्दिक और लाक्षणिक रूप से—उसके प्रकाश की चमक का मार्ग प्रशस्त करता है, तो हम उसकी स्तुति करें और स्वीकार करें कि उसने हमें बुलाया है और वास्तव में हमें देखता है।

दिल के बाहर

"ऑपरेशन नूह की जहाज" नामक एक बचाव अभियान पशु प्रेमियों को मजाक लग सकता है, लेकिन यह अमेरिका में एक पशु कल्याण समाज के लिए एक बुरा सपना था। एक निश्चित घर से आने वाले शोर और भयानक बदबू के बारे में शिकायत प्राप्त करने के बाद, श्रमिकों ने घर में प्रवेश किया चार सौ से अधिक पशुओं को उनकी उपेक्षित स्थिति में पाया (और बाद में हटा दिया)। हम सैकड़ों जानवरों को गंदी परिस्थितियों में नहीं रखे होंगे, लेकिन यीशु ने कहा हो सकता है कि हम बुरे और पापी विचारों और हमारे दिलों में कार्य को पनाह दे रहे हों जिन्हें उजागर करने और हटाने की आवश्यकता है।

अपने चेलों को की एक व्यक्ति को क्या शुद्ध और अशुद्ध करता है के बारे में सिखाने में, यीशु ने कहा, यह गंदे हाथ या “ जो कुछ मुँह में जाता ...है,” (15:17-19) जो एक व्यक्ति को अशुद्ध करता है, लेकिन एक बुरा हृदय। हमारे दिल की बदबू आखिरकार हमारे जीवन से निकल जाएगी। फिर यीशु ने बुरे विचार और कर्मों का उद्धारण दिया जो “मन ही से निकलती है।”(19)। कोई भी बाहरी धार्मिक क्रियाकलाप और अनुष्ठान उन्हें शुद्ध नहीं कर सकता। हमें अपने दिलों को बदलने के लिए परमेश्वर की जरूरत है।

अपने दिल की गंदगी तक पहुँच प्रदान करने और जो बदबू पैदा कर रहा है उसे बाहर निकालने की अनुमति देने के द्वारा हम यीशु को अंदर-बाहर की नैतिकता का अभ्यास कर सकते हैं। जैसे मसीह हमारे हृदय से आने वाली बातों को उजागर करता है, वह हमारे शब्दों और कर्मों को उसकी इच्छाओं के अनुरूप बनाने में मदद करेगा, और हमारे जीवन की सुगन्ध उसे प्रसन्न करेगी।

दो घर

घरों की स्थिरता का परीक्षण करने के लिए, इंजीनियरों ने तीन प्रकार की इमारतों पर ८ तीव्रता के भूकंप का अनुकरण किया। मिट्टी की दीवारों से बने कच्चे घर पूरी तरह से नष्ट हो गए। मिट्टी के मोर्टार के साथ ईंट की दीवारों का उपयोग करके निर्मित चिनाई वाली इमारतें हिल गईं और अंततः ढह गईं। लेकिन अच्छे सीमेंट मोर्टार का उपयोग करके बनाई गयी इमारतों में केवल भारी दरारें आयी। इंजीनियरों में से एक ने यह पूछकर परीक्षण को सारांशित किया, "आप किस घर में रहना पसंद करेंगे?"

परमेश्वर के राज्य के अनुसार जीवन जीने के महत्व पर अपनी शिक्षा को समाप्त करते हुए, यीशु ने कहा, "जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन पर चलता है, वह उस बुद्धिमान मनुष्य के समान है, जिस ने अपना घर चट्टान पर बनाया" (मत्ती ७:२४)। तेज हवाएं चलीं, लेकिन घर स्थिर बना रहा। इसके विपरीत, वह व्यक्ति जो सुनता है और फिर भी नहीं मानता, "मूर्ख के समान है जिसने अपना घर बालू पर बनाया" (पद २६)। तेज हवाएँ चलीं, और तूफान की तीव्रता में घर ढह गया। यीशु ने अपने सुनने वालों के सामने दो विकल्प प्रस्तुत किये: उसके प्रति आज्ञाकारिता की ठोस नींव पर या अपने स्वयं के तरीकों की अस्थिर रेत पर अपने जीवन का निर्माण करें।

हमें भी चुनाव करना है। क्या हम यीशु पर अपने जीवन का निर्माण करेंगे और उसके वचनों का पालन करेंगे या उसके निर्देश की अवज्ञा करेंगे? पवित्र आत्मा की सहायता से, हम मसीह पर अपने जीवन का निर्माण करना चुन सकते हैं।

एक करुणामय पिता

आठ साल के गैब्रियल के मस्तिष्क से एक ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी के बाद, यह उसके सिर के किनारे पर एक दिखने वाला निशान छोड़ गया। जब लड़के ने कहा कि वह एक राक्षस की तरह महसूस करता है, तो उसके पिता, जोश के पास एक विचार आया: यह प्रदर्शित करते हुए कि वह अपने बेटे से कितना प्रेम करता है, उसने गैब्रियल के निशान के आकार की तरह अपने सर के कोने में एक टैटू गुँधवा लिया। 

भजनकार के अनुसार, यह उस प्रकार का सहानुभूतिपूर्ण और करुणामय प्रेम है जो परमेश्वर का "अपने बच्चों" के लिए है (भजन संहिता १०३:१३)। मानव जीवन से एक रूपक का उपयोग करते हुए, दाऊद ने परमेश्वर के प्रेम को चित्रित किया। उसने कहा कि यह ऐसा कोमल है जैसे एक अच्छे पिता की अपने बच्चों के लिए देखभाल (पद १७)। जैसे एक मानव पिता अपने बच्चों पर दया करता है, वैसे ही परमेश्वर, हमारे स्वर्गीय पिता, उन लोगों के प्रति प्रेम और परवाह दिखाते हैं जो उसका भय मानते हैं। वह एक दयालु पिता है, जो अपने लोगों के साथ सहानुभूति रखता है।

जब हम कमजोर होते हैं और ऐसा महसूस करते हैं कि हमसे कोई प्रेम नहीं कर सकता हमारे जीवन की चोटों के निशान के कारण , तो हम विश्वास के द्वारा, हमारे प्रति हमारे स्वर्गीय पिता के प्रेम को प्राप्त कर सकते हैं। उसने अपने पुत्र को हमारे उद्धार के लिए "हमारे लिए अपना जीवन" (१ यूहन्ना ३:१६) देने के लिए भेजकर अपनी करुणा का प्रदर्शन किया। इस एक कार्य से, हम न केवल अपने लिए परमेश्वर के प्रेम का अनुभव कर सकते हैं, बल्कि हम क्रूस की ओर दृष्टि करके इसे देख भी सकते हैं। क्या आप यह जानकार आनंदित नहीं हैं कि हमारे पास एक महायाजक है जो " हमारी निर्मलताओं में हमारे साथ दुःखी होता है " (इब्रानियों ४:१५)? इसे साबित करने के लिए उसके पास वे निशान हैं।

अनचाहे मेहमान

शिल्पा और अजय ने एक आकर्षक लोकेशन में शानदार हनीमून मनाया। जब वे घर लौटे तो उन्होंने पाया कि अजय के पैरों में अजीब, खुजलीदार दाने हो गए थे। दंपति को एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ के पास भेजा गया था। उसने उन्हें बताया कि छोटे परजीवियों ने अजय के पैरों में उनके नए फ्लिप फ्लॉप जूतों के कारण हुये फफोले के माध्यम से संक्रमण पैदा कर दिया था। एक सपने की छुट्टी के रूप में जो शुरू हुआ वह “अनचाहे मेहमानों”  के साथ एक चुनौतीपूर्ण संघर्ष में समाप्त हुआ।

दाऊद जानता था कि यदि पाप से लड़ने के लिए उसने परमेश्वर से मदद नहीं मांगी, तो परमेश्वर के सामने एक सुखद जीवन जीने का उसका सपना पाप और विद्रोह के अनचाहे मेहमानों के साथ युद्ध में बदल जाएगा। यह घोषित करने के बाद कि प्राकृतिक संसार में परमेश्वर कैसे प्रकट होता है (भजन संहिता19:1–6) और उसका ज्ञान उसके निर्देश में पाया गया (पद 7–10),  दाऊद ने परमेश्वर से अनजाने, अभिमानी, और जानबूझकर की गई अवज्ञा से उसकी रक्षा करने के लिए कहा। “मेरे छिपे हुए दोषों को क्षमा करें। अपने दास को जानबूझ कर किए गए पापों से बचाए रखना (पद 12–13)। उसने माना कि पाप की संक्रामक बीमारी को उसे प्रभावित करने से रोकने के लिए उसके पास मानव संसाधन नहीं थे। इसलिए, उसने बुद्धिमानी से परमेश्वर से मदद मांगी।

हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि परमेश्वर का सम्मान करने वाले तरीके से जीने का हमारा सपना पाप द्वारा अपहरण न हो जाए? आइए हम अपनी नज़रें उस पर रखें, अपने पापों का अंगीकार और पश्चाताप करें, और अनचाहे आध्यात्मिक परजीवियों को हमारे जीवन में घुसने से रोकने के लिए ईश्वरीय सहायता प्राप्त करें।

तुम कर सकते हो

प्रोत्साहन ऑक्सीजन की तरह है—हम इसके बिना नहीं रह सकते। यह तेरह वर्षीय कुतराल रमेश के लिए सच था, जिसे कुतरालेश्वरन के नाम से जाना जाता था। इस लड़के ने विश्व रिकॉर्ड तब हासिल किया जब वह इंग्लिश चैनल को पार करने वाले सबसे कम उम्र का भारतीय तैराक बन गया। लेकिन यह उनके कोच के•                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 एस• इलांगोवन के बिना सम्भव नहीं था जिन्होंने ग्रीष्मकालीन तैराकी शिविर में उसकी प्रतिभा देखी। जैसे ही उन्होंने इंग्लिश चैनल के अस्थिर, ठंडे पानी में इस कार्य को पूरा करने का अभ्यास किया, कई लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया और उन्हें भारत वापस जाने के लिए कहा। पर, उनके कोच और पिता द्वारा दिए गए प्रोत्साहन ने उन्हें अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन दिया।

जब दुख के अस्थिर, ठंडे पानी ने यीशु में विश्वास करने वालों में छोड़ने की इच्छा पैदा की तो पौलुस और बरनबास ने उन्हें अपनी यात्रा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रेरितों द्वारा दिरबे शहर में सुसमाचार का प्रचार करने के बाद, “वे लुस्त्रा, इकुनियुम और अन्ताकिया में लौट आए और चेलों को दृढ़ किया और उन्हें विश्वास के प्रति सच्चे बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया” प्रेरितों के काम 14:21–22। उन्होंने विश्वासियों को यीशु में अपने विश्वास में दृढ़ रहने में मदद की। मुसीबतों ने उन्हें कमजोर कर दिया था, लेकिन प्रोत्साहन के शब्दों ने मसीह के लिए जीने के उनके संकल्प को मजबूत किया। परमेश्वर की शक्ति में, उन्होंने महसूस किया कि वे आगे बढ़ते रह सकते हैं। अंत में, पौलुस और बरनबास ने उन्हें यह समझने में मदद की कि वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के लिए बहुत सी कठिनाइयों से गुज़रेंगे (पद22)।

यीशु के लिए जीना एक चुनौतीपूर्ण, कठिन “तैरना” हो सकता है। हम कभी–कभी छोड़ने के लिये बहकाये जाते हैं। सौभाग्य से, यीशु और उसके साथी विश्वासी वह प्रोत्साहन प्रदान कर सकते हैं जिसकी हमें निरंतर आवश्यकता है। उसके साथ, हम यह कर सकते हैं!

 

परमेश्वर हमारे लिए लड़ते है

एक माँ ने साबित कर दिया कि वह अपने बच्चे की रक्षा के लिए किसी भी चीज़ से नहीं रुकेगी। उसका पांच साल का बेटा बाहर खेल रहा था जब उसने उसकी चीख सुनी। वह बाहर भागी और उसने अत्यंत भय से उसने देखा कि उसके बेटे के पास एक अप्रत्याशित "खेलने का साथी" था - एक बाघ। बड़ी बिल्ली उसके बेटे के ऊपर थी, उसका सिर उसके मुंह में था। मां ने बाघ से लड़ने के लिए अपनी आंतरिक शक्ति को जगाया और अपने बेटे को बचाने के लिए उसके जबड़े खोल दिए। इस माँ के वीर कार्य हमें याद दिलाते हैं कि कैसे पवित्रशास्त्र में मातृत्व का उपयोग परमेश्वर के अपने बच्चों के लिए दृढ़ प्रेम और सुरक्षा को दर्शाने के लिए किया है।

परमेश्वर ने कोमलता से अपने लोगों की देखभाल की और उन्हें सांत्वना दी जैसे उकाब अपने बच्चों की देखभाल करती है (व्यवस्थाविवरण 32:10-11; यशायाह 66:13)। साथ ही, एक माँ की तरह जो एक दूध पिलाने वाले बच्चे को कभी नहीं भूल सकती जिसके साथ वह एक अटूट बंधन बनाती है, परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं भूलेगा और न ही हमेशा के लिए उन पर दया करना छोड़ेगा (यशायाह 54:7-8)। अंत में, एक माता पक्षी की तरह, जो अपने बच्चों को अपने पंखों के नीचे सुरक्षा प्रदान करती है, परमेश्वर "[अपने लोगों को] अपने पंखों की आड़ में ले लेगा" और "उसकी सच्चाई [उनकी] ढाल और झिलम ठहरेगी" (भजन 91:4)।

कभी-कभी हम महसूस करते हैं कि हम अकेले हैं, भूले हुए हैं, और सभी प्रकार के आत्मिक शिकारियों के चंगुल में फंसे हुए हैं। परमेश्वर हमें यह याद रखने में मदद करें कि वह करुणा से भरकर हमारी परवाह करता, हमे शांति देता और हमारे लिए लड़ता है।

उसकी लालसा करो

ऐसा क्यों है कि जब हम कहते है यह आखिरी आलू चिप्स है जो मैं खाने जा रहा हूँ। और पांच मिनट बाद हम और खोज रहे होते हैं? माइकल मोस इस सवाल का जवाब अपने किताब साल्ट सुगर फैट में देते हैं। वह बताते है कि कैसे अमेरिका का सबसे बड़ा नाश्ता उत्पादक लोगों को जंकफ़ूड की लालसा पैदा करने में “मदद” करना जानता है। वास्तव में, एक लोकप्रिय कंपनी ने एक वर्ष में $30 मिलियन (लगभग ₹222 करोड़) खर्च किए और उपभोक्ताओं के लिए आनंद की स्थिति निर्धारित करने के लिए “लालसा सलाहकार” को काम पर रखा ताकि  हमारे भोजन की लालसा का फायदा उठा सके।

उस कम्पनी के विपरीत यीशु हमें असली खाने की लालसा पैदा करने के लिए मदद करता है—आत्मिक भोजन—जो हमारी आत्माओं को संतुष्टि लाता है। उसने कहा “जीवन की रोटी मैं हूं जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगाए वह कभी प्यासा न होगा।” (यूहन्ना 6:35)। यह दावा करके उन्होंने दो महत्वपूर्ण बातों को बताया— पहला, जिस रोटी की उन्होंने बात की वह एक व्यक्ति है, न की वस्तु (पद 32)। दूसरा, जब लोग पापों के क्षमा के लिए अपना भरोसा यीशु पर डालते है, वे उसके साथ एक सही रिश्ते में प्रवेश करते है और अपनी आत्मा की हर लालसा की भरपूरी पाते है। यह रोटी चिरस्थायी है, आत्मिक भोजन जो संतुष्टि और जीवन की ओर ले जाता है।

जब हम अपना भरोसा यीशु, स्वर्ग की सच्ची रोटी, पर डालते है, हम उसकी लालसा करेंगे, वह हमें शक्तिशाली बनाएगा और हमारे जीवनों को परिवर्तित करेगा।