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Articles by माँरविन विलियम्स

एक नया नाम

मार्क लैबरटन ने अपने लेख “Leading by Naming” में नाम की ताकत बताया l  उसने कहा, “केवल एक संगीतप्रेमी मित्र ने मुझे ‘संगीतप्रेमी’ पुकारा था जिसका प्रभाव अभी भी मुझ में है l मैंने वाद्य कभी नहीं बजाया और एकल गायक नहीं था l फिर भी .... मैंने महसूस किया कि लोग मुझे जानते हैं और मुझसे प्रेम करते हैं ... [उसने] मुझे देखकर पुष्टि की, और मेरे विषय सच्ची बात को सराहा l”

यीशु द्वारा शमौन को नया नाम देने पर संभवतः उसने भी ऐसा ही महसूस किया होगा l अन्द्रियास यीशु को मसीह मानकर, अपने भाई शमौन को  उसके पास लाया (यूहन्ना 1:41-42) l यीशु ने शमौन के भीतर गहरी सच्चाई को प्रमाणित कर सराहा l वास्तव में, यीशु ने उसके लिए परेशानी बनने वाली पराजय और जल्दबाज़ स्वभाव भी देखा l किन्तु उससे अधिक उसने शमौन को कलीसिया का संभावित अगुआ देखा l यीशु ने उसे कैफा अर्थात् चट्टान कहा-पतरस का आरामी नाम (यूहन्ना 1:42; देखें मत्ती 16:18) l

हमारे साथ भी ऐसा ही है l परमेश्वर हमारे अहंकार, क्रोध, और दूसरों के प्रति हममें प्रेमाभाव देखता है, किन्तु यह भी जानता है कि हम मसीह में हैं l वह हमें धर्मी और परमेश्वर से अपना मेल किये हुए (रोमियों 5:9-10); क्षमा प्राप्त, पवित्र, और प्रिय (कुलु. 2:13; 3:12); चुने हुए और विश्वासी (प्रका. 17:14) लोग पुकारता है l स्मरण रखें परमेश्वर हमें कैसे देखता है, और वह नाम हमें कैसे परिभाषित करता है l

आगे बढ़ते रहें

द अमेजिंग रेस  मेरा एक पसंदीदा टेलेविज़न कार्यक्रम है l इस रियलिटी शो में, दस जोड़ों को एक दूसरे देश में भेजा जाता है जहाँ उनको रेल, बस, कार, बाइक, और पैदल चलकर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक अगली चुनौती के लिए पहुंचना होता है l समापन बिंदु पर पहले पहुँचने वाले जोड़े को दस लाख डॉलर पुरस्कार मिलता है l

प्रेरित पौलुस मसीही जीवन की तुलना एक दौड़ से करके समापन रेखा तक नहीं पहुंचना स्वीकारता है l “उसने कहा, “हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ; परन्तु केवल यह एक काम करता हूँ कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर चौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊं” (फ़िलि. 3:13-14) l पौलुस मुड़कर पीछे नहीं देखा और अपने पिछले पराजयों को उसे दोष की भावना से दबाने नहीं दिया, न ही अपने वर्तमान सफलताओं से खुद को प्रयासशीन बनने दिया l वह यीशु की तरह और भी बनने के लिए लक्ष्य की ओर दौड़ता गया l

हम भी दौड़ में हैं l हमारी पिछली असफलताओं अथवा सफलताओं के बावजूद, हम आगे यीशु की तरह बनने के अपने अंतिम लक्ष्य की ओर दौड़ते रहें l हम किसी सांसारिक इनाम के लिए नहीं दौड़ रहे, किन्तु हमेशा उसका आनंद लेने के अंतिम लक्ष्य के लिए l

मिलकर कार्य करें

मेरी पत्नी शकरकंद, अजवाइन के पत्ते, मशरूम, गाजर, और प्याज को मिलाकर, धीमी आंच पर दम किया हुआ बेहतरीन माँसाहारी भोजन बनाती है l छः या साथ घंटे बाद घर खुशबु से भर जाता है, और पहला स्वाद बेहतरीन होता है l मेरे लिए यह फाएदेमंद है जब धीमी आंच पर समस्त सामग्री से ऐसा लाभ मिलता है जो अकेले प्राप्त नहीं किया जा सकता था l

जब पौलुस ने दुःख के सन्दर्भ में “सब ... मिलकर” वाक्यांश उपयोग किया, उसने उस शब्द का उपयोग किया जिससे शब्द सहक्रियता  मिलता है l उसने लिखा, “हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं : अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं” (रोमियों 8:28) l वह रोमियों को जताना चाहता था कि परमेश्वर उनके दुःख का कारण नहीं है, वह उनकी सर्वश्रेष्ठ भलाई के लिए, उनकी हर परिस्थिति को अपने दिव्य योजना के साथ सहयोग करने देगा l पौलुस द्वारा बताई गई भलाई स्वास्थ्य, धन, प्रसस्ती, या सफलता के अस्थायी आशीष नहीं थे, किन्तु “उसके पुत्र के  स्वरुप में” में बनना था (पद.29) l

हम धीरज धरें और भरोसा रखें क्योंकि हमारा स्वर्गिक पिता सब दुःख, बिमारी, बुराई को अपनी महिमा और हमारे आत्मिक भलाई के लिए उपयोग करेगा l वह हमें यीशु के समान बनाना चाहता है l

खुबसूरत एकता

तीन बड़े हिंसक पशुओं का आपस में लिपटना और खेलना अति असामान्य है l किन्तु प्रतिदिन जोर्जिया के पशु शरणस्थल में बिलकुल यही होता है l 2001 में उपेक्षा और दुर्व्यवहार पश्चात, एक शेर, बंगाल का एक बाघ, एक काले  भालू को नोआह आर्क पशु शरणस्थल ने बचाया l “हम उनको अलग रख सकते थे,” उपनिदेशक ने कहा l “किन्तु इसलिए कि वे एक परिवार की तरह आए थे, हमने उनको एक साथ रखे l” तीनों ने दुर्व्यवहार के समय  एक दूसरे में सुख पाया, और, उनकी भिन्नता के बावजूद, वे शांति से एक दूसरे के साथ रहते हैं l

एकता खुबसूरत बात है l किन्तु जिस एकता के विषय पौलुस इफिसुस के विश्वासियों को लिखता है, अनूठा है l पौलुस इफिसियों को मसीह में एक देह के अंग की तरह अपनी बुलाहट के अनुकूल जीवन जीने को कहता है (इफि. 4:4-5) l पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से एकता में रहकर उन्होंने दीनता, नम्रता, और धीरज विकसित की l इस तरह का आचरण हमें प्रेमपूर्वक मसीह यीशु में सामान्य आधार द्वारा “एक दूसरे को सह[ने] (4:2) की अनुमति देता है l

हमारी भिन्नताओं के बावजूद, परमेश्वर के परिवार के सदस्य के रूप में उसने हमारा मेल हमारे उद्धारकर्ता की मृत्यु द्वारा किया और हमारे जीवनों में पवित्र आत्मा के कार्य द्वारा परस्पर मेल कराया l

चेतावनी!

निम्नलिखित चेतावनियाँ उपभोगता उत्पादों पर लिखी मिलीं :

 

“लपेटने से पूर्व बच्चे को हटाएँ l” (बच्चे को घुमानेवाली गाड़ी)

“ओक्सीजन नहीं देता l” (धूल मुखौटा)

“गाड़ी चलाते समय स्पीकर-फोन उपयोग न करें l” (“ड्राइव ‘एन’ टॉक” हैंड्स फ्री सेल फोन उत्पाद)

“यह उत्पाद उपयोग करने पर चलती है l” (स्कूटर)

नाबाल के लिए यह चेतावनी उचित है, “मूढ़ से…

आराधना के फाटक

विश्व के कुछ बड़े शहरों में प्रवेश करते समय, आपका सामना प्रसिद्ध फाटकों से होगा जैसे ब्रेंडेनबर्ग गेट (बर्लिन), जाफा गेट (यरूशलेम), और डाउनिंग स्ट्रीट के गेट (लन्दन) l चाहे ये फाटक बचाव अथवा उत्सव के उद्देश्य से थे, वे शहर के किसी क्षेत्र के बाहर या अन्दर होना दर्शाते हैं l कुछ खुले होते हैं; कुछ थोड़े लोगों को…

सादृश्य जुनून

हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल के प्रख्याता, थॉमस जे. डीलॉन्ग ने अपने विद्यार्थियों और सहयोगियों के बीच एक परेशान करनेवाला प्रवृति देखा है - एक सादृश्य जुनून l” पहले से कहीं अधिक ... बिज़नेस प्रबंधक, वाल स्ट्रीट विश्लेषक, वकील, डॉक्टर्स, और दूरे व्यावसायिक परस्पर उपलब्धियों की तुलना करने की धुन में हैं l जब आप भीतरी मानदंड की अपेक्षा बाहरी पर सफलता…

आरोहण करते रहें

रिचर्ड को प्रेरणा की ज़रूरत थी, और उसे मिल गई l वह अपने मित्र केविन के साथ पहाड़ पर चढ़ रहा था l केविन रस्सी को मजबूती से पकड़ने वाला था l थकित और हार मानने के लिए तैयार, रिचर्ड ने केविन से उसे भूमि पर उतारने को कहा l किन्तु केविन ने उसे उत्साहित किया, अब वह बहुत ऊपर…

आत्मा छुटकारा देता है

हाल ही में, ग्रामीण आयरलैंड के अनेक शहर घर संख्या या पिन कोड उपयोग नहीं करते थे l इसलिए यदि एक शहर में तीन पेट्रिक मर्फी होते थे, सबसे हाल के निवासी को तब तक अपना डाक नहीं मिलता था जब तक अन्य दो पेट्रिक मर्फी लोगों को नहीं दिखा दिया जाता था जो पहले से वहाँ रहते थे l…

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आपका सुरक्षित स्थान

मेरी बेटी और मैं एक बड़े पारिवारिक उत्सव के लिए तैयारी कर रहे थे l इसलिए कि वह उत्सव के विषय घबरायी हुई थी मैंने कहा कि मैं गाड़ी ड्राइव करुँगी l “ठीक है l किन्तु मैं अपनी कार में सुरक्षित महसूस करती हूँ l क्या आप चलाएंगी?” उसने पुछा l यह महसूस करके कि उसे मेरी गाड़ी छोटी लगती है, मैंने पूछा कि क्या मेरी गाड़ी बहुत छोटी थी l उसका उत्तर था, “नहीं, बस मेरी गाड़ी मुझे सुरक्षित लगती है l पता नहीं क्यों, मैं अपनी गाड़ी में आरामदायक महसूस करती हूँ l”

उसकी टिप्पणी ने मुझे मेरे “सुरक्षित स्थान” के सम्बन्ध में मुझे सोचने की चुनौती दी l तुरंत ही मैंने नीतिवचन 18:10 के विषय सोची, “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है, धर्मी उसमें भागकर सब दुर्घटनाओं से बचता है l” पुराने नियम के काल में, दीवारें और पहरे की मीनार लोगों को बाहरी खतरों की चेतावनी के साथ-साथ उनकी रक्षा भी करती थीं l लेखक बताना चाहता है कि परमेश्वर का नाम, जो उसका चरित्र है, व्यक्तित्व और सब कुछ है जो वह है, उसके लोगों को वास्तविक सुरक्षा देती है l

ख़ास भौतिक स्थान खतरनाक क्षणों में इच्छित सुरक्षा देने का वादा करते हैं l तूफ़ान के मध्य एक मजबूत छत l चिकित्सीय सहायता देनेवाला एक हॉस्पिटल l एक प्रिय का गले लगाना l

आपका “सुरक्षित स्थान” क्या है? हम जहाँ भी सुरक्षा खोजते हैं, उस स्थान पर हमारे साथ परमेश्वर की उपस्थिति ही है जो हमारी ज़रूरत में हमें ताकत और सुरक्षा देती है l

जब खूबसूरती ख़त्म नहीं होती

मुझे ग्रैंड घाटी देखना पसंद है l जब मैं घाटी के किनारे खड़ा होता हूँ, मैं परमेश्वर की चौंकानेवाली कृति देखता हूँ l 

यद्यपि वह भूमि में एक (बहुत बड़ा) “गड्ढा” है, ग्रैंड घाटी मुझे स्वर्ग पर विचार करने हेतु विवश करता है l एक बारह वर्षीय ईमानदार युवक ने एक बार मुझ से पूछा, “क्या स्वर्ग अरुचिकर नहीं होगा? क्या आप नहीं सोचते कि हम हमेशा परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए थक जाएंगे?” किन्तु यदि भूमि में एक “गड्ढा” इतना जबरदस्त खुबसूरत है और हम उसे देखते नहीं थकते हैं, हम खूबसूरती के श्रोत-हमारे प्रेमी सृष्टिकर्ता-को नयी सृष्टि के सम्पूर्ण असली आश्चर्य में एक दिन देखने की कल्पना ही कर सकते हैं l

“एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ,” (भजन 27:4) दाऊद ने इन शब्दों को लिखते हुए यह इच्छा प्रगट की l परमेश्वर की उपस्थिति से सुन्दर कुछ नहीं, जो इस पृथ्वी पर हमारे निकट आती है जब हम भविष्य में उसका चेहरा आमने-सामने देखने की चाह में उसे विश्वास से खोजते हैं l

उस दिन हम अपने अद्भुत प्रभु की प्रशंसा करते हुए नहीं थकेंगे, क्योंकि हम उसकी उत्तम भलाई और उसके हाथों के कार्य के आश्चर्य की तरोताज़गी, और नयी खोज के अंत में कभी नहीं पहुंचेंगे l उसकी उपस्थिति उसकी खूबसूरती और उसके प्रेम का असाधारण प्रकाशन प्रगट करेगी l

हमारे पास सामर्थ्य है

कड़कड़ाहट की आवाज़ ने मुझे चौंका दिया l मैं आवाज़ को पहचानकर रसोई की ओर भागी l मैंने भूल से कॉफ़ी बनाने वाला बिजली का उपकरण ऑन कर दिया था l मैंने उपकरण का प्लग हटाकर, उसके तले को छूकर देखना चाही कि टाइल का काउंटर पैर रखने लायक बहुत गर्म तो नहीं है l उसके चिकने भाग से मेरी उंगलियाँ जल गयीं, और मेरे कोमल पैरों में छाले हो गए l

मेरे पति द्वारा मेरे घाव में दावा लगाते समय मैंने अपना सिर हिलाया l मैं जानती थी कि कांच गरम होगा l “मैं ईमानदारी से कहती हूँ, मुझे नहीं मालुम मैंने उसे क्यों छू दिया,” मैं बोली l

मेरी गलती ने मुझे वचन में एक गंभीर विषय, पाप के स्वभाव के विषय पौलुस का प्रतिउत्तर याद दिलाया l

प्रेरित स्वीकारता है कि जो वह करता है उस को नहीं जानता; क्योंकि जो वह चाहता है वह नहीं करता (रोमि. 7:15) l स्वीकार करते हुए कि वचन सही और गलत को निश्चित करता है (पद.7), वह पाप के विरुद्ध शरीर और आत्मा के बीच निरंतर चलनेवाली जटिल और वास्तविक युद्ध को पहचानता है (पद.15-23) l वह अपनी दुर्बलता स्वीकारते हुए, वर्तमान और सर्वदा की विजय की आशा प्रस्तुत करता है (पद.24-25) l

जब हम मसीह को अपना जीवन समर्पित करते हैं, वह हमें पवित्र आत्मा देता है जो हमें सही करने के लिए सामर्थी बनाता है (8:8-10) l जब वह हमें परमेश्वर का वचन मानने के लिए आज्ञाकारी बनाता है, हम झुलसाने वाले पाप से दूर हो सकते हैं जो हमें उस बहुतायत के जीवन से दूर करता है जो परमेश्वर अपने प्रेम करनेवाले को देने की प्रतिज्ञा की है l