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परमेश्वर के परिवार में जोड़े गए

कुछ साल पहले मैं अपने  पिता के साथ उनके प्रिय शहर गई थी और उस पारिवारिक खेत का दौरा किया जहाँ वह पले-बढ़े थे। मैंने अजीब पेड़ों का एक समूह देखा। मेरे पिताजी ने समझाया कि जब बचपन में उन्हें शरारत करने की सूझती, तो वह एक फल के पेड़ से एक टूटी हुई शाखा लेते, एक अलग प्रकार के फल के पेड़ में चीरा लगाते, और टूटी हुई शाखा को तने से बाँध देते थे, जैसा की उन्होंने बड़ो को करते देखा था। उनकी शरारतों पर तब तक ध्यान नहीं गया जब तक कि उन पेड़ों पर उम्मीद से अलग फल लगने नहीं लगे। 

जैसे ही मेरे पिताजी ने ग्राफ्टिंग की प्रक्रिया का वर्णन किया(जिसमे दो अलग-अलग पौधों के तनों को एक साथ जोड़ा जाता है, और वें एक ही पौधे के रूप में विक्सित होने लगते है), मुझे एक तस्वीर दिखी यह दर्शाते हुए कि परमेश्वर के परिवार में जोड़े जाने का हमारे लिए क्या मतलब है। मैं जानती हूँ कि मेरे दिवंगत पिता अब स्वर्ग में हैं क्योंकि यीशु में विश्वास के द्वारा उन्हें परमेश्वर के परिवार में जोड़ा गया था।

अंततः हमें भी स्वर्ग में होने का आश्वासन मिला है। प्रेरित पौलुस ने रोम में विश्वासियों को समझाया कि परमेश्वर ने अन्यजातियों, या गैर-यहूदियों के लिए एक मार्ग बनाया है जिससे परमेश्वर और उनका मेल-मिलाप हो सके: " उनकी जगह पर कलम लगाये गये और जैतून के रस के भागीदार बने  हुए।” (रोमियों 11:17)। जब हम मसीह में अपना विश्वास रखते हैं, तो हम उसके साथ जुड़ जाते हैं और परमेश्वर के परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। "यदि तुम मुझ में बने रहो और मैं तुम में, तो तुम बहुत फल फलोगे" (यूहन्ना 15:5)।

जोड़े गए पेड़ों के समान, जब हम मसीह पर भरोसा करते हैं, तो हम एक नई रचना बन जाते हैं और बहुत फल पैदा कर सकते हैं।

आपके हाथ में क्या है?

उद्धार प्राप्त करने और अपना जीवन परमेश्वर को समर्पित करने के कुछ वर्षों के बाद, मैंने महसूस किया कि वह मुझे अपनी पत्रकारिता आजीविका(journalism career) त्यागने का निर्देश दे रहा है l जैसे ही मैंने अपनी कलम रखी और मेरी लेखनी छुप गयी, मैं यह महसूस किए बिना नहीं रह सका कि एक दिन परमेश्वर मुझे अपनी महिमा के लिए लिखने के लिए बुलाएगा l अपने व्यक्तिगत जंगल/सुनसान प्रदेश में भटकने के वर्षों के दौरान मुझे निर्गमन 4 में मूसा और उसकी लाठी की कहानी से प्रोत्साहन मिला l 

मूसा, जो फिरौन के महल में पला-बढ़ा था और जिसका भविष्य आशाजनक था, मिस्र से भाग गया और एक चरवाहे के रूप में गुमनामी में रह रहा था जब परमेश्वर ने उसे बुलाया l मूसा ने सोचा होगा कि उसके पास परमेश्वर को देने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन उसने सिखा कि वह अपने महिमा के लिए किसी को भी और किसी भी चीज़ का उपयोग कर सकता है l 

“तुम्हारे हाथ में वह क्या है?” परमेश्वर ने पूछा l मूसा ने उत्तर दिया, “एक लाठी l” परमेश्वर ने कहा, “इसे भूमि पर फेंक दे” (निर्गमन 4:2-3) l मूसा की साधारण लाठी सांप बन गयी l जब उसने सांप को पकड़ लिया, तो परमेश्वर ने उसे वापस लाठी में बदल दिया (पद.3-4) l यह चिन्ह इसलिए दिया गया था ताकि इस्राएली विशवास करें कि “यहोवा, उनके पूर्वजों का परमेश्वर—अब्राहम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर और याकूब का परमेश्वर—उनके सामने प्रकट हुआ है” (पद.5) l जैसे ही मूसा ने अपने लाठी को नीचे फेंका और उसे फिर से उठाया, मैंने परमेश्वर की आज्ञाकारिता में एक पत्रकार के रूप में अपनी आजीविका/career उसके समक्ष रख दी l बाद में, उसने मुझे फिर से कलम उठाने के लिए निर्देशित किया और अब मैं उसके लिए लिख रहा हूँ l 

हमें परमेश्वर द्वारा उपयोग किये जाने के लिए बहुत कुछ की ज़रूरत नहीं है l हम बस उन प्रतिभाओं से उसकी सेवा कर सकते हैं जो उन्होंने हमें दी है l निश्चित नहीं हैं कि कहाँ से आरम्भ की जाए? आपके हाथ में क्या है?

एक सार्थक हाइफ़न

जैसे ही मैं अपनी माँ की जीवन सेवा के उत्सव की तैयारी कर रहा था, मैंने उनके "हाइफ़न वर्ष" - उनके जन्म और मृत्यु के बीच के वर्षों - का वर्णन करने के लिए सही शब्दों के लिए प्रार्थना की। मैंने हमारे रिश्ते के अच्छे और बुरे समय पर विचार किया। मैंने उस दिन के लिए परमेश्वर की स्तुति की, जब मेरी माँ ने यीशु को मुझे "बदलते" हुए देखकर उसे अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया था। मैंने उन्हें एक साथ विश्वास में बढ़ने में मदद करने के लिए और उन लोगों के लिए धन्यवाद दिया, जिन्होंने बताया कि कैसे मेरी माँ ने उन्हें प्रोत्साहित किया और उन पर दया करते हुए उनके लिए प्रार्थना की। मेरी अपूर्ण माँ ने एक सार्थक हाइफ़न का आनंद लिया - यीशु के लिए एक अच्छा जीवन जीया।

यीशु में विश्वास करने वाला कोई भी व्यक्ति सिद्ध नहीं है। हालाँकि, पवित्र आत्मा हमें "प्रभु के योग्य जीवन जीने और उसे हर तरह से प्रसन्न करने" में सक्षम कर सकता है (कुलुस्सियों 1:10)। प्रेरित पौलुस के अनुसार, कुलुस्से का चर्च अपने विश्वास और प्रेम के लिए जाना जाता था (पद. 3-6)। पवित्र आत्मा ने उन्हें "बुद्धि और समझ" दी और उन्हें "परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ते हुए, हर अच्छे काम में फल देने" का अधिकार दिया (पद. 9-10)। जैसे ही पौलुस ने उन विश्वासियों के लिए प्रार्थना की और उनकी प्रशंसा की, उन्होंने यीशु के नाम की घोषणा की, "जिसमें हमें मुक्ति, पापों की क्षमा मिलती है" (पद 14)।

जब हम पवित्र आत्मा के प्रति समर्पण करते हैं, तो हम भी परमेश्वर के बारे में अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकते हैं, उनसे और लोगों से प्यार कर सकते हैं, सुसमाचार फैला सकते हैं, और एक सार्थक हाइफ़न का आनंद ले सकते हैं - यीशु के लिए एक अच्छा जीवन।

 

एक सार्थक हाइफ़न

जैसे ही मैं अपनी माँ की जीवन सेवा के उत्सव की तैयारी कर रहा था, मैंने उनके "हाइफ़न वर्ष" - उनके जन्म और मृत्यु के बीच के वर्षों - का वर्णन करने के लिए सही शब्दों के लिए प्रार्थना की। मैंने हमारे रिश्ते के अच्छे और बुरे समय पर विचार किया। मैंने उस दिन के लिए परमेश्वर की स्तुति की, जब मेरी माँ ने यीशु को मुझे "बदलते" हुए देखकर उसे अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया था। मैंने उन्हें एक साथ विश्वास में बढ़ने में मदद करने के लिए और उन लोगों के लिए धन्यवाद दिया, जिन्होंने बताया कि कैसे मेरी माँ ने उन्हें प्रोत्साहित किया और उन पर दया करते हुए उनके लिए प्रार्थना की। मेरी अपूर्ण माँ ने एक सार्थक हाइफ़न का आनंद लिया - यीशु के लिए एक अच्छा जीवन जीया।

यीशु में विश्वास करने वाला कोई भी व्यक्ति सिद्ध नहीं है। हालाँकि, पवित्र आत्मा हमें "प्रभु के योग्य जीवन जीने और उसे हर तरह से प्रसन्न करने" में सक्षम कर सकता है (कुलुस्सियों 1:10)। प्रेरित पौलुस के अनुसार, कुलुस्से का चर्च अपने विश्वास और प्रेम के लिए जाना जाता था (पद. 3-6)। पवित्र आत्मा ने उन्हें "बुद्धि और समझ" दी और उन्हें "परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ते हुए, हर अच्छे काम में फल देने" का अधिकार दिया (पद. 9-10)। जैसे ही पौलुस ने उन विश्वासियों के लिए प्रार्थना की और उनकी प्रशंसा की, उन्होंने यीशु के नाम की घोषणा की, "जिसमें हमें मुक्ति, पापों की क्षमा मिलती है" (पद 14)।

जब हम पवित्र आत्मा के प्रति समर्पण करते हैं, तो हम भी परमेश्वर के बारे में अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकते हैं, उनसे और लोगों से प्यार कर सकते हैं, सुसमाचार फैला सकते हैं, और एक सार्थक हाइफ़न का आनंद ले सकते हैं - यीशु के लिए एक अच्छा जीवन।

 

बढ़ती उम्र (उम्र बढ़ना)

टेक्सास की दो दादी हाल ही में इक्यासी साल की उम्र में अस्सी दिनों में दुनिया भर की यात्रा पूरी करने के लिए मीडिया  के लिए सनसनी (हलचल) बन गईं। तेईस वर्षों से विश्व भ्रमण कर रहे सबसे अच्छे मित्रों ने सभी सात महाद्वीपों की यात्रा की।उन्होंने अंटार्कटिका में शुरुआत की, अर्जेंटीना में अर्जेंटीना में घूमे , मिस्र में ऊँट की सवारी की, और उत्तरी ध्रुव पर स्लेज की सवारी की। उन्होंने जाम्बिया, भारत, नेपाल, बाली, जापान और रोम सहित अठारह देशों का दौरा किया और ऑस्ट्रेलिया में अपनी यात्रा समाप्त की। दोनों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे आने वाली पीढ़ियों को दुनिया की यात्रा का आनंद लेने के लिए प्रेरित करेंगे, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो।

निर्गमन में, हम दो अस्सी वर्ष के लोगों के बारे में पढ़ते हैं जिन्हें परमेश्वर ने जीवन भर के एक अलग तरह के साहसिक कार्य के लिए भर्ती किया था। उसने मूसा को फिरौन के पास जाने और उससे परमेश्वर के लोगों को बंधन से मुक्त करने की माँग करने के लिए बुलाया। परमेश्वर ने मूसा के बड़े भाई हारून को सहायता के लिए भेजा। "जब उन्होंने फिरौन से बातें की तब मूसा अस्सी वर्ष का और हारून तिरासी वर्ष का था" (निर्गमन 7:7)।

यह अनुरोध किसी भी उम्र में कठिन लगेगा, लेकिन परमेश्वर ने इन भाइयों को इस कार्य के लिए चुना था, और उन्होंने उसके निर्देशों का पालन किया। " इसलिए मूसा और हारून फ़िरौन के पास गए और यहोवा की आज्ञा का पालन किया। " (पद 10)।

मूसा और हारून को यह देखने का सम्मान मिला कि परमेश्वर ने अपने लोगों को चार सौ से अधिक वर्षों की दासता से मुक्ति दिलाई। ये लोग प्रदर्शित करते हैं कि वह किसी भी उम्र में हमारा उपयोग कर सकता है। चाहे हम युवा हों या वृद्ध, आइए जहाँ भी वह नेतृत्व करे, उसका अनुसरण करें।

 

हे प्रभु, मेरे हृदय को जांच

भोजन की बर्बादी को कम करने के लिए, सिंगापुर में एक सुपरमार्केट श्रृंखला थोड़े दागदार फल और सब्जियाँ कम कीमतों पर बेचती है। एक वर्ष में, इस पहल से 850 टन (778,000 किलोग्राम) से अधिक उपज की बचत हुई, जिसे पहले सुंदरता मानकों को पूरा न करने के कारण फेंक दिया जाता था। दुकानदारों को जल्द ही पता चला कि बाहरी दिखावे- निशान और विचित्र आकार, स्वाद और पोषण मूल्य को प्रभावित नहीं करते हैं। बाहर क्या है यह हमेशा यह निर्धारित नहीं करता कि अंदर क्या है।

भविष्यवक्ता शमूएल ने भी यह सबक  सीखा जब उसे परमेश्वर द्वारा इस्राएल के अगले राजा का अभिषेक करने के लिए भेजा गया था (1 शमूएल 16:1)। जब उसने यिशै के ज्येष्ठ पुत्र एलीआब को देखा, तो शमूएल ने सोचा कि वह चुना हुआ है। परन्तु परमेश्‍वर ने कहा: “  न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।" ( पद 7)। यिशै के आठ पुत्रों में से, परमेश्वर ने सबसे छोटे पुत्र दाऊद को, जो अपने पिता की भेड़ों की देखभाल कर रहा था (पद 11) को अगला राजा चुना।  

यहोवा को बाहरी रूप की तुलना में हमारे मनों  की अधिक चिंता है - हमने किस स्कूल में पढ़ाई की, हम क्या कमाते हैं, या हम कितनी स्वेच्छा से काम करते हैं। यीशु ने अपने शिष्यों को अपने मनों को स्वार्थी और बुरे विचारों से शुद्ध करने पर ध्यान केंद्रित करना सिखाया क्योंकि "जो मनुष्य से निकलता है वही उसे अशुद्ध करता है" (मरकुस 7:20)। जैसे शमूएल ने बाहरी दिखावे पर विचार न करना सीखा, यहोवा की सहायता से, क्या हम, ईश्वर की सहायता से, जो कुछ भी करते हैं उसमें अपने मनों , अपने विचारों और इरादों की जाँच कर सकते हैं । 

 

उदार विश्वास

कुछ साल पहले, हमारे चर्च को राजनितिक नेतृत्व में उथल-पुथल भरे बदलाव के बाद अपने देश से भाग रहे शरणार्थियों के अतिथि-सत्कार के लिए आमंत्रित किया गया था l कई परिवार केवल उतना ही लेकर आए जितना वे एक छोटे बैग में रख सकते थे l हमारे कई चर्च परिवारों ने उनके लिए अपने घर दिए, जिनमें कुछ ऐसे भी थे जिनके पास बहुत कम जगह थी l 

जब वे प्रतिज्ञात देश में प्रवेश किये तो उनका दयालु आतिथ्य इस्राएलियों को दिए गए परमेश्वर के तिगुना आदेश को दर्शाता है (व्यवस्थाविवरण 24:19-21) l एक कृषक समाज के रूप में, वे फसल का महत्व समझते थे l अगले वर्ष तक के लिए फसलें प्राप्त करना आवश्यक था l यह परमेश्वर की आज्ञा को “परदेशी, अनाथ, और विधवा” के लिए [कुछ] छोड़ने” (पद.19) को उस पर भरोसा करने का एक अनुरोध भी बनाता है l इस्राएलियों को उदारता का अभ्यास न केवल तब देना था जब वे जानते थे कि उनके पास पर्याप्त है, बल्कि ऐसे हृदय से देना जो परमेश्वर के प्रबंध पर भरोसा करता हो l ऐसा आतिथ्य एक अनुस्मारक भी था “कि [वे] मिस्र में दास थे” (पद.18,22) l वे एक समय उत्पीडित और निराश्रित थे l उनकी उदारता उन्हें बंधन से मुक्त करने में परमेश्वर की दयालुता की याद दिलाती थी l 

यीशु में विश्वास करने वालों से भी इसी तरह उदार होने का आग्रह किया जाता है l पौलुस हमें याद दिलाता है, “वह [मसीह]धनी होकर भी तुम्हारे लिए कंगाल बन गया, ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ” (2 कुरिन्थियों 8:9) l हम देते हैं क्योंकि उसने हमें दिया है l 

 

मसीह द्वरा साफ़ किया गया

मेरा पहला थोड़े समय का मिशन, यात्रा ओडिशा के जंगल में नदी के किनारे एक चर्च बनाने में सहायता करने के लिए थी l एक दोपहर, हम उस क्षेत्र के कुछ घरों में से एक में गए जहाँ पानी का फ़िल्टर था l जब हमारे मेजबान ने कुंए का गन्दा पानी फ़िल्टर के ऊपर डाला, तो कुछ ही मिनटों में सारी गन्दगी दूर हो गयी और साफ़. स्वच्छ पीने का पानी दिखाई देने लगा l वहीँ उस आदमी के बैठक कक्ष(living-room) में, मैंने इस बात का आभास हुआ कि मसीह द्वारा  शुद्ध किये जाने का क्या अर्थ है l 

जब हम पहली बार अपने दोष और शर्म के साथ यीशु के पास आते हैं और उससे हमें क्षमा  करने के लिए कहते हैं और हम उन्हें अपने उद्धारकर्ता के रूप में मान लेते हैं, तो वह हमारे पापों से शुद्ध करता है और हमें नया बनाता है l हम ठीक वैसे ही शुद्ध हो जाते हैं जैसे गंदा पानी साफ़ फीने के पानी में बदल गया था l यह जानना कितनी ख़ुशी की बात है कि यीशु के बलिदान के कारण हम परमेश्वर के साथ सही स्थिति में हैं (2 कुरिन्थियों 5:21) और यह जानना कि परमेश्वर हमारे पापों को उतनी ही दूर कर देता है जितना पूर्व पश्चिम से है (भजन 103:12) l

लेकिन प्रेरित यूहन्ना हमें याद दिलाता है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हम फिर कभी पाप नहीं करेंगे l जब हम पाप करते हैं तो हम पानी के फ़िल्टर की छवि से सुनिश्चित हो सकते हैं और यह जानकर सांत्वना पा सकते हैं कि “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l

आइये यह जानकार आत्मविश्वास से जीएं कि हम लगातार मसीह द्वारा शुद्ध किए जा रहे हैं l 

 

बिना तैयारी किए हुए स्तुति करना

इथियोपिया की एक अल्पकालिक मिशन यात्रा के दौरान, हमारी टीम एक स्थानीय मंत्रालय की एक अन्य टीम के साथ उन युवाओं के एक समूह तक पहुंच रही थी, जो कठिन समय से जूझ रहे थे और वस्तुतः कबाड़खाने में झोंपड़ियों में रह रहे थे। कैसा अद्भुत आनंद था उनसे मिलना! हमने एक साथ अपनी गवाहियाँ, प्रोत्साहन के शब्द और प्रार्थनाएँ साझा कीं। उस शाम मेरे पसंदीदा क्षणों में से एक वह था जब एक स्थानीय टीम के सदस्य ने अपना गिटार बजाया और हमें रोशन चाँद के नीचे अपने नए दोस्तों के साथ आराधना करने का मौका मिला। कितना पवित्र क्षण! अपनी निराशाजनक स्थिति के बावजूद, इन लोगों के पास आशा और खुशी थी जो केवल यीशु में ही पाई जा सकती है।

प्रेरितों के काम 16 में, हम एक और अचानक रूप से की गयी प्रशंसा के समय के बारे में पढ़ते हैं। यह फिलिप्पी शहर की एक जेल में हुआ। यीशु की सेवा करते समय पौलुस और सीलास को गिरफ्तार कर लिया गया, पीटा गया, कोड़े मारे गए और कैद में डाला गया। निराशा में पड़ने के बजाय, उन्होंने जेल की कोठरी में "प्रार्थना और गायन" करके परमेश्वर की आराधना की। "अचानक इतना भयंकर भूकंप आया कि जेल की नींव हिल गई। एक ही बार में सभी जेल के दरवाजे खुल गए, और सभी की जंजीरें खुल गईं” (पद 25-26)।

जेलर का पहला विचार अपना जीवन समाप्त करने का आया, लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि कैदी भागे नहीं, उसमे परमेश्वर के प्रति भयपूर्वक आदर उत्पन हुआ, और उसके परिवार में उद्धार आया(पद 27-34)।

परमेश्वर प्रसन्न होता है जब हमें उसकी स्तुति करते है। आइए जीवन के उतार-चढ़ाव दोनों के दौरान उसकी आराधना करें।