घर की सफाई
हाल ही में मुझे अपना कमरा बदलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा, क्योंकि मुझे एक सम्पूर्ण नया और सुव्यवस्थित आरंभ चाहिए था l पुराने कमरे की घंटों सफाई और छंटाई के बाद, सामान भरे हुए थैले फेंकने, बांटने, या पुनर्चक्रण के लिए मेरे दरवाजे पर थे l किन्तु इस थकाऊ प्रक्रिया के अंत में मेरे रहने के लिए एक सुन्दर कमरा था l
मुझे घर साफ़ करने की योजना से 1 पतरस 2:1 पढ़ते समय एक नूतन दृष्टिकोण प्राप्त हुआ, जैसे द मेसेज (बाइबिल) में सरल ढंग से लिखा गया है : “इसलिए, घर साफ़ करें! बैरभाव और छल, डाह और निंदा को पूरी तौर से हटाएँ l” रुचिकर बात यह है, नए जीवन के आनंददायक अंगीकार के बाद (1:1-12) पतरस मसीह में उनसे हानिकारक व्यवहार हटाने को कहता है (1:13-2:3) l जब परमेश्वर के साथ हमारी चाल अव्यवस्थित और दूसरों के लिए हमारा प्रेम अस्वाभाविक लगे, यह हमारे उद्धार पर प्रश्न न उठाए l हम बचेंगे के लिए नहीं किन्तु हम बचे हुए हैं के कारण अपना जीवन बदलते हैं (1:23) l
मसीह में नए जीवन की वास्तविकता की तरह, हमारे बुरे आचरण रातों रात गायब नहीं होते l हमें प्रति दिन “घर की सफाई” करनी है, दूसरों को प्रेम करने से रोकनेवाली(1:22) और उन्नति में बाधक(2:2) बातों को हटाना है l तब, उस नए स्थान में, हम मसीह की सामर्थ्य और जीवन द्वारा नूतन निर्माण (पद.5) का आश्चर्य अनुभव करेंगे l
कोई भरोसेमंद व्यक्ति
मेरी सहेली आँसुओं से बोली, “कोई भरोसेमंद नहीं है l भरोसा करने पर, वे हर समय मुझे दुःख देते हैं l” मैं उसकी कहानी से क्रोधित हुयी-एक भरोसेमंद पूर्व मित्र, ने उनके बीच सम्बन्ध टूटने पर अफ़वाहें फैलाने लगा l पीड़ादायक बचपन के बाद पुनः भरोसा करने हेतु प्रयासरत, यह धोखा मात्र एक और पुष्टिकरण था कि लोग भरोसेमंद नहीं हैं l
मुझे सुखकर शब्द नहीं मिला l एक बात मैं न कह सकी कि उसका यह ख्याल गलत था कि पूर्ण भरोसेमंद व्यक्ति खोजना कठिन है, अर्थात् अधिकतर लोग पूर्ण दयालु और भरोसेमंद हैं l उसकी कहानी दर्दनाक थी, और मैंने अपने जीवन में अनपेक्षित धोखे के क्षण याद किये l वस्तुतः, वचन मानवीय स्वभाव के विषय बहुत निष्पक्ष है l नीतिवचन 20:6 में, लेखक भी मेरी सहेली की तरह धोखे के दर्द को हमेशा याद करके विलाप करता है l
मैं यह कह सकती हूँ कि दूसरों की क्रूरता कहानी का केवल एक हिस्सा है l यद्यपि दूसरों का दिया हुआ घाव वास्तविक और पीड़ादायक है, यीशु ने सच्चा प्रेम सम्भव किया है l यूहन्ना 13:35 में, यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि संसार उनके प्रेम से जानेगा कि वह उसके शिष्य हैं l यद्यपि कुछ लोग हमें दुःख देंगे, यीशु के कारण हमेशा ऐसे लोग होंगे जो, खुलकर उसका प्रेम बाँटकर, हमें शर्तहीन सहयोग देकर देखभाल करेंगे l उसके अक्षय प्रेम में विश्राम करते हुए, चंगाई, संगति, और उसकी तरह प्रेम करने का साहस प्राप्त करें l