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Articles by शेरिडन योयता

दीवारों पर स्वर्गदूत

जब वॉलेस और मेरी ब्राउन एक मरते हुए चर्च में पास्टर बनने के लिए इंग्लैंड के एक गरीब हिस्से में गए, तो उन्हें नहीं पता था कि एक गिरोग ने उनके चर्च और घर के परिसर को अपना मुख्यालय बना लिया है l दंपत्ति की खिड़कियों पर ईंटें फेंकी गयीं, उनके बाड़ों में आग लगा दी गयी और उनके बच्चों को धमकाया गया l दुर्व्यवहार महीनों तक जारी रहा; पुलिस इसे रोक न सकी l

नहेम्याह की किताब बताती है कि कैसे इस्राएलियों ने यरूशलेम की टूटी हुयी दीवारों का पुनःनिर्माण किया l जब स्थानीय लोग “गड़बड़ी [डालने]” के लिए निकले, हिंसा की धमकी दी (नहेम्याह 4:8), तो इस्राएलियों ने “परमेश्वर से प्रार्थना की, और . . . पहरुए ठहरा दिए” (पद.9) l यह महसूस करते हुए कि परमेश्वर ने इस परिच्छेद द्वारा उनको निर्देशित किया है, ब्राउन, उनके बच्चे और कुछ अन्य लोग अपने चर्च की दीवारों के चारों ओर घूमकर, प्रार्थना की कि वह उनकी रक्षा के लिए स्वर्गदूतों को रक्षक के रूप में स्थापित करेगा l गिरोह ने मज़ाक उड़ाया, लेकिन अगले दिन, उनमें से केवल आधे ही आये l उसके अगले दिन, वहाँ केवल पांच थे, और उसके अगले दिन, कोई नहीं आया l ब्राउन लोगों को बाद में पता चला कि गिरोह ने लोगों को आतंकित करना छोड़ दिया है l

प्रार्थना का यह चमत्कारी उत्तर हमारी अपनी सुरक्षा का कोई सूत्र नहीं है, बल्कि यह एक अनुस्मारक है कि परमेश्वर के कार्य का विरोध होगा और प्रार्थना के हथियार से उससे लड़ा जाना चाहिए l नहेम्याह ने इस्राएलियों से कहा, “प्रभु जो महान् और भय्योग्य है, उसी को स्मरण” करना (पद.14) l वह हिंसक दिलों को भी आजाद कर सकता है l शेरिडैन वोयसे

 

मसीह में गहरी मित्रता

ख्राइस्ट कॉलेज, कैंब्रिज, इंग्लैंड के चैपल में एक स्मारक है, जो सत्रहवीं शताब्दी के दो चिकित्सकों, जॉन फिंच और थॉमस बेन्स को समर्पित है l “घनिष्ठ मित्र” के रूप में प्रसिद्ध फिंच और बेन्स ने चिकित्सा अनुसन्धान पर सहयोग किया और साथ में राजनयिक यात्राएँ की l 1680 में बेन्स की मृत्यु पर फिंच ने उनकी “आत्माओं के टूटे विवाह” पर जो छतीस वर्षों तक चला था शोक व्यक्त किया l उनकी मित्रता स्नेह, निष्ठा और प्रतिबद्धता की थी l 

राजा दाऊद और योनातान भी उतने ही घनिष्ठ मित्र थे l उन्होंने गहरा आपसी स्नेह साझा किया (1 शमुएल 20:41), यहाँ तक कि एक-दूसरे के प्रति वचनबद्धता की शपथ भी ली (पद.8-17, 42) l उनकी दोस्ती अत्यधिक विश्वासयोग्यता से चिन्हित थी (1 शमुएल 19:1-2; 20:13), योनातान ने सिंहासन पर अपना अधिकार भी त्याग दिया ताकि दाऊद राजा बन सके (20:30-31; 23:15-18 देखें) l योनातान की मृत्यु पर, दाऊद ने शोक व्यक्त किया कि योनातान का उसके प्रति प्रेम “स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था” (2 शमुएल 1:26) l 

आज हम मित्रता की तुलना विवाह से करने में असहज महसूस कर सकते हैं, लेकिन शायद फिंच और बेन्स और दाऊद और योनातान जैसी मित्रता हमारी अपनी मित्रता को अधिक गहराई तक पहुँचने में मदद कर सकती हैं l यीशु ने अपने मित्रों का उसकी ओर झुकने का स्वागत किया (यूहन्ना 13:23-25) और वह स्नेह, निष्ठा और प्रतिबद्धता जो वह हमें दिखाता है वह हमारे द्वारा एक साथ बनायी जाने वाली गहरी मित्रता का आधार हो सकता है l

 

- शेरिडैन वोयसे

क्रिसमस के बाद का दिन

क्रिसमस के दिन की सारी खुशियों के बाद, अगला दिन निराशाजनक सा महसूस हुआ। हम दोस्तों के साथ रात भर रुके लेकिन ठीक से सो नहीं पाए। जब हम घर जा रहे थे तो हमारी कार खराब हो गई। फिर जब हम घर जा रहे थे तो हमारी कार खराब हो गई। फिर बर्फबारी शुरू हो गई। हमने कार छोड़ दी और बर्फ और ओले में टैक्सी से घर की ओर चल पड़े।

हम अकेले नहीं हैं जो क्रिसमस के दिन के बाद उदास महसूस करते हैं। चाहे वह अत्यधिक खाने से हो, रेडियो से कैरल के अचानक गायब हो जाने से हो, या यह तथ्य कि पिछले सप्ताह हमने जो उपहार खरीदे थे वे अब आधी कीमत पर बिक रहे हैं, क्रिसमस के दिन का जादू जल्दी ही खत्म हो सकता है!

 बाइबल हमें यीशु के जन्म के बाद के दिन के बारे में कभी नहीं बताती। लेकिन हम कल्पना कर सकते हैं कि बेथलहम तक चलने, रहने की जगह की तलाश करने, बच्चे को जन्म देने में मरियम के दर्द और चरवाहों के अचानक आ जाने (लूका 2:4–18) के बाद, मरियम और यूसुफ़ थक गए थे। फिर भी जब मरियम ने अपने नवजात शिशु को गोद में लिया, तो मैं कल्पना कर सकता हूँ कि वह अपने स्वर्गदूतों के आने (1:30–33), एलिज़ाबेथ के आशीर्वाद (पद 42–45) और अपने बच्चे के भाग्य के बारे में अपने अहसास ( पद 46–55) पर विचार कर रही होगी। मरियम ने अपने दिल में ऐसी बातों पर “विचार” किया (2:19), जिसने उस दिन की थकान और शारीरिक दर्द को हल्का कर दिया होगा।

 हम सब के पास "निरर्थक वचन" के दिन होते हैं, शायद क्रिसमस के अगले दिन भी। आइए मरियम के तरह, उस व्यक्ति पर विचार करके उनका सामना करें जो हमारे दुनिया में आया, अपनी उपस्थिति से इसे हमेशा के लिए रोशन कर दिया।

 —शेरिडन वोयसी

 

क्रिसमस दुविधा

डेविड और एंजी को लगा कि उन्हें विदेश जाने के लिए बुलाया गया है, और उसके बाद जो फलदायी मंत्रालय हुआ, उससे यह पुष्टि होती दिखी। लेकिन उनके इस कदम का एक नकारात्मक पहलू भी था। डेविड के बुज़ुर्ग माता-पिता अब क्रिसमस अकेले बिताएंगे। डेविड और एंजी ने क्रिसमस के दिन अपने माता-पिता के अकेलेपन को कम करने के लिए पहले से ही उपहार भेजकर और क्रिसमस की सुबह फोन करके कोशिश की। लेकिन उसके माता-पिता वास्तव में उन्हें चाहते थे। डेविड की आय के कारण वे कभी-कभार ही घर जा पाते थे, तो वे और क्या कर सकते थे? डेविड को बुद्धि की ज़रूरत थी।

नीतिवचन 3 बुद्धि-प्राप्ति का एक क्रैश कोर्स  (तीव्र और गहन अध्ययन)  है, जो हमें यह दिखाता है कि हम अपनी परिस्थितियों को परमेश्वर के पास ले जाकर इसे प्राप्त कैसे करें (पद.5-6), इसके विभिन्न गुणों जैसे प्रेम और विश्वासयोग्यता (पद. 3-4, 7-12), और शांति और दीर्घायु के रूप में इसके लाभ का वर्णन करता है (पद. 13-18)। एक  हृदयस्‍पर्शी (दिल को छू लेने वाला) टिप्पणी में, यह कहा गया है कि परमेश्वर हमें "अपने विश्वास में" लेकर ऐसी बुद्धि देता है (पद. 32)। वह अपना समाधान उन लोगों को धीरे धीरे बोलते हैं जो उसके करीब हैं।

एक रात अपनी समस्या के बारे में प्रार्थना करते हुए, डेविड को एक विचार आया। अगले क्रिसमस के दिन, उसने और एंजी ने अपने सबसे अच्छे कपड़े पहने, मेज को टिनसेल (चमकीले रंगीन काग़ज़ के लंबे फ़ीते (tinsel)) से सजाया, और भुना हुआ रात्रिभोज लाए। डेविड के माता-पिता ने भी ऐसा ही किया। फिर, प्रत्येक टेबल पर एक लैपटॉप रखकर, उन्होंने वीडियो लिंक के द्वारा एक साथ भोजन किया। लगभग ऐसा महसूस हुआ जैसे वे एक ही कमरे में हैं। तब से यह एक पारिवारिक परंपरा बन गई है।

परमेश्वर ने दाऊद को अपने भरोसे में लिया और उसे बुद्धि दी। वह हमारे समस्याओं का रचनात्मक समाधान फुसफुसा कर सुनाना पसंद करता है।

—शेरिडन वोयसी

चमकते सितारे

 
शहर के बारे में सबसे पहली चीज़ जो मैंने देखी, वह थी इसके जुए के अड्डे। इसके बाद, इसकी भांग की दुकानें, "वयस्क" स्टोर, और दूसरों के दुर्भाग्य से पैसे कमाने वाले अवसरवादी वकीलों के विशाल विज्ञापन  (बिलबोर्ड)। हालाँकि मैंने पहले भी कई अवैध और अनैतिकता से भरे शहरों का दौरा किया था, लेकिन यह एक नए निम्न स्तर पर पहुँच गया। हालाँकि, जब मैंने अगली सुबह एक टैक्सी ड्राइवर से बात की, तो मेरा मूड ठीक हो गया। "मैं हर दिन परमेश्वर से उन लोगों को भेजने के लिए प्रार्थना करता हूं जिन्हें वह चाहते है कि मैं मदद करूँ।" उसने कहा। "जुआ खेलने वाले, वेश्याएँ, टूटे-फूटे घरों के लोग मुझे आँसू बहाते हुए अपनी समस्याएँ बताते हैं। मैं कार रोक देता हूँ। मैं सुनता हूँ। मैं उनके लिए प्रार्थना करता हूँ। यह मेरी सेवकाई   है।"   
 
यीशु के हमारे पतित संसार में उतरने का वर्णन करने के बाद (फिलिप्पियों 2:5–8), प्रेरित पौलुस मसीह में विश्वासियों को एक आह्वान देता है। जब हम परमेश्वर की इच्छा का अनुसरण करते हैं ( पद 13) और “जीवन के वचन”—सुसमाचार (वचन 16) को थामे रहते हैं—तो हम “टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्‍वर के निष्कलंक सन्तान ” होंगे जो “आकाश में तारों की तरह चमकेंगे” ( पद 15)। उस टैक्सी ड्राइवर की तरह, हमें यीशु के प्रकाश को अंधकार में लाना है।  
 
इतिहासकार क्रिस्टोफर डॉसन ने कहा कि मसीह में विश्वास करने वाले को दुनिया को बदलने के लिए केवल ईमानदारी से जीना है, क्योंकि जीने के उसी कार्य में “ईश्वरीय जीवन का सारा रहस्य समाहित है।” आइए हम परमेश्वर की आत्मा से प्रार्थना करें कि वह हमें यीशु के लोगों के रूप में ईमानदारी से जीने के लिए सशक्त बनाए, दुनिया के सबसे अंधेरे स्थानों में उसका प्रकाश चमकाए।    
 
—-शेरिडन वोयसी 
 

प्रत्येक जन आराधना करता है

 
मैंने हाल ही में एथेंस, ग्रीस का दौरा किया। इसके प्राचीन अगोरा में घूमते हुए - वह बाज़ार जहाँ दार्शनिक पढ़ाते थे और एथेंस के लोग आराधना करते थे - मैंने अपोलो और ज़ीउस की वेदियाँ देखीं, जो सभी एक्रोपोलिस की छाया में थीं, जहाँ कभी देवी एथेना की एक मूर्ति खड़ी थी। 
 
आज हम अपोलो या ज़ीउस के सामने नतमस्तक नहीं हो सकते, लेकिन समाज भी उतना ही धार्मिक है। उपन्यासकार डेविड फोस्टर वालेस ने कहा, "हर कोई पूजा करता है," और साथ ही चेतावनी दी: "अगर आप पैसे और चीज़ों की पूजा करते हैं... तो आपके पास कभी भी पर्याप्त नहीं होगा... अपने शरीर और सुंदरता की पूजा करें... और आप हमेशा बदसूरत महसूस करेंगे... अपनी बुद्धि की पूजा करें... [और] आप बेवकूफ़ महसूस करेंगे।" हमारे धर्मनिरपेक्ष युग के अपने देवता हैं, और वे अच्छे नहीं हैं । 
 
“एथेंस के निवासियों!” पौलुस ने अगोरा का दौरा करते हुए कहा, मैं देखता हूँ कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो (प्रेरितों 17:22)। प्रेरित ने सच्चे परमेश्वर को एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर के रूप में बताया है(पद 24-26) जो अपने आप को प्रकट करना चाहता है (पद 27) और उसने यीशु मसीह के पुनरुत्थान  द्वारा स्वयं को प्रकट किया(पद 31), यह परमेश्वर अपोलो और ज़ीउस  की तरह मानव रचित नहीं है । पैसे, सुंदरता या बुद्धि के विपरीत, उसकी आराधना करने से हम बर्बाद नहीं होंगे। 
हमारा "परमेश्वर" वह है जिस पर हम हमें उद्देश्य और सुरक्षा देने के लिए भरोसा रखते हैं। शुक्र है, जब हर सांसारिक परमेश्वर हमें विफल कर देता है, एकमात्र सच्चा परमेश्वर हमें मिलने के लिए तैयार होता है। (पद 27) 
 
-शेरीडेन वोईसे 
 

स्मार्टफोन करुणा

क्या ड्राइवर ने आपके भोजन में देर कर दी थी? आप उसे वन-स्टार रेटिंग (one star rating) देने के लिए अपने फ़ोन का उपयोग कर सकते हैं। क्या दुकानदार ने आपके साथ रूखा व्यवहार किया? आप उसकी आलोचनात्मक समीक्षा लिख ​​सकते हैं। जबकि स्मार्टफ़ोन हमें खरीदारी करने, दोस्तों के साथ रहने और बहुत कुछ करने में सक्षम बनाते हैं, उन्होंने हमें सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे को रेट (मूल्यांकन) करने की शक्ति भी दी है। और यह एक समस्या हो सकती है. 
इस तरह से एक-दूसरे को रेटिंग देना (मूल्यांकन करना) समस्याग्रस्त है क्योंकि बिना संदर्भ (परिस्थितियाँ जाने बिना )के भी न्याय किया जा सकता है। परिस्थितियाँ उसके नियंत्रण से बाहर होने के कारण देर से डिलीवरी के लिए ड्राइवर को खराब रेटिंग दी जाती है। जब एक दुकानदार को नकारात्मक समीक्षा मिल जाती है हालांकि वह बीमार बच्चे के साथ पूरी रात जागी थी। हम इस तरह दूसरों को अनुचित रेटिंग देने से कैसे बच सकते हैं? 
परमेश्वर के चरित्र का अनुकरण करके I निर्गमन 34:6-7 में, परमेश्वर स्वयं को "दयालु और करुणामय" के रूप में वर्णित करता है - जिसका अर्थ है कि वह संदर्भ के बिना हमारी विफलताओं का न्याय नहीं करेगा; "क्रोध करने में धीमा" - जिसका अर्थ है कि वह एक बुरे अनुभव के बाद नकारात्मक समीक्षा सबके साथ साझा नहीं करेगा; "प्रेम से भरपूर" - जिसका अर्थ है कि उसके सुधार हमारी भलाई के लिए हैं, बदला लेने के लिए नहीं; और "पाप को क्षमा करना" - जिसका अर्थ है कि हमारे जीवन को हमारे वन-स्टार (one star) दिनों से परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। चूँकि परमेश्वर का चरित्र हमारा आधार है (मत्ती 6:33), हम उसका [परमेश्वर] अनुकरण करके अपने स्मार्टफ़ोन द्वारा उपयोग की जाने वाली कठोरता से बच सकते हैं। 
ऑनलाइन युग में, हम सभी दूसरों को कठोर रेटिंग दे सकते हैं। पवित्र आत्मा हमें आज थोड़ी सी करुणा लाने के लिए सशक्त करे। 
-शेरिडेन वोयसी 

परदेशियों का स्वागत

 
जैसे ही हजारों यूक्रेनी महिलाएं और बच्चे युद्ध से भागकर बर्लिन के रेलवे स्टेशन पर पहुंचे उन्हें यह देखकर  आश्चर्य हुआ कि जर्मन परिवार अपने घरों में शरणार्थियों को शरण देने के लिये अपने हाथों से बने विज्ञापन लेकर खड़े थे । एक में लिखा था “दो लोगों को रख सकते हैं।” दूसरे में था  “एक बड़ा कमरा उपलब्ध है।” एक महिला से यह पूछे जाने पर कि उसने अजनबियों को ऐसा अतिथि सत्कार (मेहमानदारी) क्यों दिया, उस महिला ने कहा कि उसकी माँ को नाज़ियों से भागते समय शरण की आवश्यकता पड़ी थी और अब वह भी ऐसी ज़रूरत में पड़े दूसरों लोगों की मदद करना चाहती थी। 
 
व्यवस्थाविवरण की पुस्तक में परमेश्वर इस्राएलियों को अपने देश से दूर रहने वालों की देखभाल करने के लिए कहता है। क्यों? क्योंकि वह अनाथों, विधवाओं, और परदेशियों का रक्षक है (10:18), और क्योंकि इस्राएली जानते थे कि इस तरह के असुरक्षित और खतरनाक हालातों में होने से क्या महसूस होता है:“क्योंकि तुम भी मिस्र में परदेशी थे” (पद 19)। सहानुभूति उनकी देखभाल को प्रेरित करने के लिए थी। 
 
लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है। जब सारपत की विधवा ने परदेशी एलिय्याह का अपने घर में स्वागत किया तो वह आशीषित हुई  (1 राजा 17:9–24), ठीक वैसे ही जैसे इब्राहीम को तीन परदेशी आगंतुकों ने आशीष दी थी (उत्पत्ति 18:1–15)। परमेश्वर अक्सर मेहमानदारी का उपयोग मेजबान को आशीर्वाद देने के लिए करते हैं, केवल मेहमान को नहीं।  
अपने घर में अजनबियों का स्वागत करना कठिन है, पर हो सकता है कि वे जर्मन परिवार वास्तविक लाभार्थी हैं। जब हम भी परमेश्वर की सहानुभूति के साथ कमजोरों के प्रति सहानुभूति दिखाते हैं तो हम उन वरदानों से चकित हो सकते हैं जो वह हमें उनके द्वारा देता है। 
शेरिडेन वोयसी 
 

कौन सा ज्ञान?

ईस्टर 2018 से ठीक पहले, एक आतंकवादी ने बाजार में प्रवेश किया, दो लोगों की हत्या कर दी और एक तीसरी महिला को बंधक बना लिया। जब महिला को मुक्त करने के प्रयास विफल हो गए, तो एक पुलिसकर्मी ने आतंकवादी को एक प्रस्ताव दिया: महिला को छोड़ दो और उसकी जगह उसे ले जाओ। यह प्रस्ताव चौंकाने वाला था क्योंकि यह लोकप्रिय ज्ञान के खिलाफ था। आप हमेशा किसी संस्कृति की "बुद्धिमत्ता" को उसके द्वारा मनाए जाने वाले कथनों से पहचान सकते हैं, जैसे कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने वाले सेलिब्रिटी उद्धरण। एक लोकप्रिय उद्धरण में लिखा है, "सबसे बड़ा साहसिक कार्य जो आप कर सकते हैं वह है अपने सपनों का जीवन जीना।" एक और कहता है, "सबसे पहले खुद से प्यार करो और बाकी सब अपने आप हो जाएगा।" एक तीसरा कहता है, "जो तुम्हें करना है, वह अपने लिए करो।" अगर पुलिस अधिकारी ने ऐसी सलाह मानी होती, तो वह खुद को पहले रखता और भाग जाता। 
याकूब प्रेरित कहता है कि इस संसार में दो प्रकार की बुद्धि है: एक “सांसारिक” है, और दूसरी “स्वर्गीय” है। पहले वाली को स्वार्थी महत्वाकांक्षा और गड़बड़ी (विकार) द्वारा चिन्हित किया गया है (याकूब 3:14-16); तो दूसरी को नम्रता, अधीनता और मेल-मिलाप के द्वारा चिन्हित किया गया है (पद 13, 17-18)। सांसारिक ज्ञान स्वयं को सबसे पहले रखता है। स्वर्गीय ज्ञान दूसरों का पक्ष लेता है, जो विनम्र कर्मों के जीवन की ओर अगुवाई करता है (पद 13)। उस आतंकवादी ने पुलिस अधिकारी के उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, और उस बंधक को स्वतंत्र करके पुलिसकर्मी को गोली मार दी, और उस ईस्टर पर संसार ने एक निर्दोष व्यक्ति को किसी दूसरे के लिए मरते हुए देखा। स्वर्गीय ज्ञान विनम्र कार्यों की ओर अगुवाई इसलिए करता है क्योंकि यह परमेश्वर को स्वयं से ऊपर रखता है (नीतिवचन 9:10)। आज आप किस ज्ञान का अनुसरण कर रहे हैं? 
—शेरिडेन वोयसी