मैत्रीपूर्ण महत्वाकांक्षा
नाज़ियानज़स के ग्रिगरी(Gregory of Nazianzus) और कैसरिया के बेसिल(Basil of Caesarea) चौथी शताब्दी के चर्च में प्रसिद्ध अगुआ और करीबी मित्र थे l वे पहली बार दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के रूप में मिले थे, और ग्रिगरी ने बाद में कहा कि वे “एक आत्मा वाले दो शरीर” की तरह बन गए l
उनके आजीविका पथ(career paths) इतने समान होने के कारण, ग्रिगरी और बेसिल के बीच प्रतिद्वंद्विता पैदा हो सकती थी l लेकिन ग्रिगरी ने समझाया कि उन्होंने विश्वास, आशा और अच्छे कर्मों के जीवन को अपनी “एकल महत्वाकांक्षा/single ambition” बनाकर एक दूसरे को इस प्रलोभन से बचा लिया, फिर व्यक्तिगत रूप से इस लक्ष्य में दूसरे को अपने से अधिक सफल बनाने के लिए “एक-दूसरे को प्रेरित किया l” परिणामस्वरूप, दोनों में विश्वास बढ़ा और बिना प्रतिद्वंद्विता के नेतृत्व के उच्च सत्र तक पहुँच गए l
इब्रानियों की पुस्तक हमें विश्वास में मजबूत बने रहने में मदद करने के लिए लिखी गयी है(इब्रानियों 2:1), जो हमें “अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे [रहने]” और “प्रेम, और भले कामों में उस्काने के लिए एक दूसरे की चिंता [करने के लिए]” प्रोत्साहित करती है(इब्रानियों 10:23-24) l जबकि यह आदेश एक मण्डली के सन्दर्भ में दिया गया है(पद.25), इसे अपनी मित्रता पर लागू करके, ग्रिगरी और बेसिल ने दिखाया कि कैसे मित्र एक-दूसरे को बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और किसी भी “कड़वी जड़” से बच सकते हैं, जैसे कि प्रतिद्वंद्विता जो उनके बीच बढ़ सकती है(12:15) l
क्या होगा यदि हमने विश्वास, आशा और अच्छे कर्मों को अपनी मित्रता की महत्वाकांक्षा बना लिया, फिर अपने मित्रों को इस लक्ष्य में व्यक्तिगत रूप से हमसे अधिक सफल होने के लिए प्रोत्साहित किया? पवित्र आत्मा हम दोनों को करने में मदद करने के लिए तैयार है l
जो आप हैं
फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी में अपने कॉलेज के दिनों में, चार्ली वार्ड दो-खेल के छात्र एथलीट थे l 1993 में, इस युवा क्वार्टरबैक/quarterback(खेल में एक स्थान) ने देश के सवर्श्रेष्ठ कॉलेज अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में हेज़मैन ट्रॉफी(Heisman Trophy) जीती, और वे बास्केटबॉल टीम में भी सर्वोत्तम रहे l
एक दिन खेल से पहले बातचीत में, उनके बास्केटबॉल कोच ने अपने खिलाड़ियों से बातचीत में कुछ अभद्र भाषा उपयोग किया l उन्होंने देखा कि चार्ली “आरामदायक नहीं था,” और कहा, “चार्ली, क्या चल रहा है?” वार्ड ने कहा, “कोच, आप जानते हैं, कोच बोडेन {फुटबॉल कोच] उस तरह की भाषा का उपयोग नहीं करते हैं, और वह हमें बहुत कठिन खेल खिलाते हैं l”
चार्ली के मसीह जैसे चरित्र ने उसे इस मुद्दे पर अपने बास्केटबॉल कोच से धीरे से बात करने की अनुमति दी l जब कोच ने चार्ली से बात की तो वास्तव में, उन्होंने एक रिपोर्टर से कहा : “यह लगभग ऐसा है जैसे कोई स्वर्गदूत आपको देख रहा है l”
अविश्वासियों के साथ एक नेकनामी और मसीह का एक विश्वासयोग्य साक्षी होना कठिन है l लेकिन साथ ही, यीशु में विश्वास करने वाले उसके जैसे बन सकते हैं क्योंकि वह हमारी सहायता और हमारा मार्गदर्शन करता है l तीतुस 2 में, युवा पुरुषों, और विस्तार से सभी विश्वासियों को, बुलाया गया है कि वे “संयमी”(पद.6) और “[उनके] उपदेश में . . . ऐसी खराई [हो] . . . कि कोई . . . दोष लगाने का अवसर न पा [सके]”(पद.7-8) l
जब हम इस तरह मसीह की सामर्थ्य में जीते हैं, तो हम न केवल उसका आदर करेंगे बल्कि एक अच्छा नाम भी निर्मित करेंगे l फिर चूँकि परमेश्वर हमें आवश्यक बुद्धि प्रदान करता है, लोगों के पास हमें सुनने का कारण होगा l
मेरे संग चलें
राष्ट्रीय धन्यवाद दिवस(Thanksgiving holiday) के आसपास, अमेरिकी राष्ट्रपति दो टर्की(पक्षी) को राष्ट्रपति क्षमादान देने से पहले वाइट हाउस में उनका स्वागत करते हैं l पारंपरिक थैंक्सगिविंग(Thanksgiving) भोजन के मुख्य व्यंजन के रूप में परोसे जाने के बजाय, टर्की(पक्षी) अपना शेष जीवन सुरक्षित रूप से एक खेत में बिताते हैं l हालाँकि टर्की(पक्षी) उस स्वतंत्रता को नहीं समझ सकते जो उन्हें दी गयी है, असामान्य वार्षिक परम्परा क्षमा का जीवन देनेवाली सामर्थ्य को उजागर करती है l
नबी मीका को क्षमा का महत्व तब समझ में आया जब उसने अभी भी यरूशलेम में रह रहे इस्राएलियों को कड़ी चेतावनी लिखी l कानूनी शिकायत के समान, मीका ने परमेश्वर को बुराई की इच्छा करने और लालच, बेईमानी और हिंसा में लिप्त होने(6:10-15) के लिए राष्ट्र के विरुद्ध साक्षी देते हुए रिकॉर्ड किया(मीका 1:2) l
इन विरोधी कार्यों के बावजूद, मीका(पुस्तक) इस वादे में निहित आशा के साथ समाप्त होता है कि परमेश्वर हमेशा क्रोधित नहीं रहता बल्कि इसके बजाय “अधर्म को क्षमा [करता है] . . . और अपराध को ढांप [देता है]”7:18) l सृष्टिकर्ता और सबके ऊपर न्यायधीश होने के कारण, वह आधिकारिक तौर पर घोषणा कर सकता है कि वह अब्राहम से किये गए अपने वादे(पद.20) के कारण हमारे कार्यों को हमारे विरुद्ध नहीं रखेगा—जो अंततः यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान में पूरा हुआ l
उन सभी तरीकों से क्षमा किया जाना, जिनसे हम परमेश्वर के मानकों के अनुरूप जीवन जीने में विफल रहते हैं, एक अनुपयुक्त उपहार है जो अपार आशीष लाता है l जैसे-जैसे हम उसकी पूर्ण क्षमा के अधिक से अधिक लाभों को समझते हैं, आइये प्रशंसा और धन्यवाद की प्रतिक्रिया दें l
आनंद की गति
आनंद की गति से चलो l यह वाक्यांश मेरे दिमाग में आया जब एक सुबह मैंने प्रार्थनापूर्वक आने वाले वर्ष पर विचार किया, और यह उपयुक्त लगा l मुझ में अत्यधिक काम करने का झुकाव था, जिससे अक्सर मेरा आनंद ख़त्म हो जाता था l इसलिए, इस मार्गदर्शन का पालन करते हुए, मैंने खुद को आने वाले वर्ष में आनंददायक गति से काम करने, मित्रों और आनंददायक गतिविधियों के लिए जगह बनाने के लिए प्रतिबद्ध किया l
यह योजना काम कर गयी . . . मार्च तक! फिर मैंने खुद के द्वारा विकसित किये जा रहे पाठ्यक्रम के परीक्षण की देखरेख के लिए एक विश्वविद्यालय के साथ साझेदारी की l विद्यार्थियों के नामांकन और अध्यापन के साथ-साथ, मैं जल्द ही लम्बे समय तक काम करने लगा l अब मैं आनंद की गति से कैसे जा सकता था?
यीशु उन लोगों को ख़ुशी का वादा करता है जो उस पर विश्वास करते हैं, वह हमें बताता है कि यह उसके प्रेम में बने रहने(यूहन्ना 15:9) और प्रार्थनापूर्वक अपनी ज़रूरतों को उसके पास लाने से आता है(16:24) l वह कहता है, “मैं ने ये बातें तुम से इसलिए कही हैं, कि मेरा आनंद तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनंद पूरा हो जाए”(15:11) l यह ख़ुशी उसकी आत्मा के द्वारा एक उपहार के रूप में आती है, जिसके साथ हमें कदम से कदम मिलाकर चलना है(गलातियों 5:22-25) l मैंने पाया कि मैं अपने व्यस्त समय के दौरान केवल तभी आनंद बनाए रख सकता था जब मैं हर रात आराम से, भरोसेमंद प्रार्थना में समय बिताता था l
चूँकि आनंद बहुत विशेष है, इसलिए इसे अपने समय-सारणी में प्राथमिकता देना उचित है l लेकिन चूँकि जीवन कभी भी पूरी तरह से हमारे नियंत्रण में नहीं होता है, मुझे ख़ुशी है कि ख़ुशी का एक और श्रोत—आत्मा—हमारे लिए उपलब्ध है l मेरे लिए, आनंद की गति से जाने का अर्थ अब प्रार्थना की गति से जाना है—आनंद देने वाले से प्राप्त करने के लिए समय निकालना l
शाही वापसी
दुनिया भर में अरबों दर्शकों की संख्या के साथ, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार संभवतः इतिहास में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला प्रसारण था। उस दिन दस लाख लोग लंदन की सड़कों पर खड़े थे, और 250,000 लोग उस सप्ताह रानी के शव-पेटिका को देखने के लिए घंटों कतार में खड़े थे। ऐतिहासिक रूप से पाँच सौ राजा, रानियाँ, राष्ट्रपति और अन्य राष्ट्राध्यक्ष, अपनी ताकत और चरित्र के लिए जानी जाने वाली महिला को श्रद्धांजलि देने आए।
जहाँ दुनिया ने ग्रेट ब्रिटेन और उसकी दिवंगत रानी की ओर अपनी निगाहों को लगाया हुआ था, मेरे विचार किसी और घटना की ओर मुड़ गए - एक शाही वापसी। हमें बताया गया है कि एक दिन आ रहा है, जब राष्ट्र कहीं अधिक महान राजा को पहचानने के लिए एकत्रित होंगे (यशायाह 45:20-22)। ताकत और चरित्र का अगुवा (पद 24), उसके सामने "हर घुटना झुकेगा" और उसके द्वारा "हर जीभ शपथ खाएगी" (पद 23), (प्रकाशितवाक्य 21:24, 26)। हालांकि हर कोई इस राजा के आगमन का स्वागत नहीं करेंगे, लेकिन जो लोग ऐसा करेंगे वे हमेशा के लिए उसके शासनकाल का आनंद लेंगे (यशायाह 45:24-25)।
जिस तरह दुनिया एक रानी को जाते हुए देखने के लिए इकट्ठा हुई, उसी तरह एक दिन वह अपने परम राजा को वापस आते हुए देखेगी। वह कैसा दिन होगा - जब स्वर्ग और पृथ्वी पर सभी लोग यीशु मसीह के सामने झुकेंगे और उसे प्रभु के रूप में पहचानेंगे (फिलिप्पियों 2:10-11)।
राज्य के आकार का कार्यस्थल
विक्टोरियन इंग्लैंड की फ़ैक्टरियाँ अँधेरे स्थान थे। जहाँ कई जाने जाती थी, और मज़दूर अक्सर गरीबी में रहते थे। जॉर्ज कैडबरी ने पूछा, "एक काम करने वाला आदमी एक आदर्श चीज़ को कैसे विकसित कर सकता है, जब उसका खुद का घर एक झुग्गी हो?" और इसलिए उन्होंने अपने विस्तारित चॉकलेट व्यवसाय के लिए एक नई तरह की फैक्ट्री बनाई, जिससे उनके मज़दूरों को लाभ हुआ। इसका नतीजा था बॉर्नविले - एक गांव जहाँ तीन सौ से अधिक घर थे जिसमें कैडबरी के मज़दूरों और उनके परिवारों के लिए खेल के मैदान, स्कूल और चर्च थे। मज़दूरों को अच्छा वेतन दिया गया और चिकित्सा स्थलों की सुविधा भी दी गयी, यह सब इसलिए था क्योंकि कैडबरी का विश्वास यीशु मसीह पर था।
यीशु हमें परमेश्वर की इच्छा "जैसे स्वर्ग में पूरी होती है वैसे पृथ्वी पर" पूरी करने के लिए प्रार्थना करना सिखाते हैं (मत्ती 6:10)। यह प्रार्थना हमें कल्पना करने में मदद कर सकती है, जैसा कि कैडबरी की, कि परमेश्वर के राज्य में हमारे कार्यस्थल कैसे होंगे, जहां हमारी "प्रतिदिन की रोटी" कमाई जाती है और हमारे "कर्ज़दारों" को माफ कर दिया जाता है (पद 11-12)। एक काम करनेवाले के रूप में, इसका अर्थ है "पूरे मन से काम करना . . प्रभु के लिये” (कुलुस्सियों 3:23)। एक स्वामी के रूप में, इसका अर्थ है कर्मचारियों को वह देना जो "सही और निष्पक्ष" हो (4:1)। हमारी भूमिका जो भी हो, चाहे वेतन कमाने वाले हो या स्वयंसेवी हो, इसका मतलब उन लोगों की भलाई के लिए प्रयास करना है जिनकी हम सेवा करते हैं।
जॉर्ज कैडबरी की तरह, आइए कल्पना करें कि अगर परमेश्वर हमारे पड़ोस और कार्यस्थलों को चलाने वाला हो तो चीजें कैसे भिन्न होंगी। क्योंकि जहाँ वो होता है, वहाँ लोग फलते-फूलते हैं।
नम्रतापूर्वक मदद माँगना
जैसे-जैसे हमारी पार्टी का दिन नजदीक आ रहा था, मैं और मेरी पत्नी योजना बनाने लगे। बहुत सारे लोगों को आना था, क्या हमें खाना बनाने के लिए केटरर को बुलाना चाहिए? यदि हम खुद ही खाना पकाते हैं तो क्या हमें एक बड़ा चूल्हा खरीदना चाहिए? उस दिन बारिश की थोड़ी संभावना भी हो सकती है, क्या हमें तंबू भी लगाना चाहिए? जल्द ही हमारी पार्टी महँगी होने लगी, और थोड़ी असामाजिक भी। स्वयं सब कुछ प्रदान करने का प्रयास करके, हम दूसरों की सहायता प्राप्त करने का अवसर गँवा रहे थे ।
समुदाय के बारे में बाइबल का दृष्टिकोण है, देना और प्राप्त करना। पतन से पहले, आदम को एक सहायक की ज़रूरत थी (उत्पत्ति 2:18), हमें दूसरों की सलाह की ज़रूरत है (नीतिवचन 15:22) और अपना बोझ एक दूसरे के साथ बाटना है(गलातियों 6:2)। शुरुआती कलीसिया में "सब वस्तुएँ साझा" की जाती थी , जिससे वें एक-दूसरे की "संपत्ति और सामान" से लाभ उठाते थे (प्रेरितों 2:44-45)। स्वतंत्र रूप से जीने के बजाय, उन्होंने सुंदर परस्पर निर्भरता में साझा किया, उधार लिया, दिया और प्राप्त किया। ।
आख़िरकार हमने मेहमानों से हमारी पार्टी में कोई भी व्यंजन या कुछ भी मीठा लाने के लिए कहा। हमारे पड़ोसी अपना बड़ा स्टोव लेकर आए, और एक दोस्त ने अपना तंबू लगाया। मदद मांगने से हमें करीबी रिश्ते बनाने में मदद मिली और लोगों द्वारा पकाए और लाए गए अलग-अलग भोजन, पार्टी में खाने के कई विविधता (किस्म) और ख़ुशी लाए। हमारे जैसे युग में आत्मनिर्भर होना, घमंड का स्रोत भी हो सकता है। परन्तु “परमेश्वर दीनों पर अनुग्रह करता है।" (याकूब 4:6), जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो विनम्रतापूर्वक मदद मांगते हैं।
-शेरिडन वोयसी
बुद्धिमान देखभाल
यह दृश्य शोकाकुल था l पचपन पायलट व्हेलों(व्हेल की एक प्रजाति) का एक झुण्ड स्कॉटिश समुद्र तट पर फंस गया था l स्वयंसेवकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन अंततः उनकी मृत्यु हो गयी l कोई नहीं जानता कि इस तरह बड़े पैमाने पर फंसना क्यों होता है, लेकिन यह व्हेल के मजबूत सामाजिक बन्धनों के कारण हो सकता है l जब एक परेशानी में पड़ता है, तो बाकी मदद के लिए आते हैं—एक देखभाल करने वाली प्रवृत्ति जो प्रतिकूल रूप से नुकसान पहुँचा सकती है l
बाइबल स्पष्ट रूप से हमें दूसरों की मदद करने के लिए कहती है, लेकिन ऐसा करने में हमें बुद्धिमान भी होना चाहिए l उदाहरण के लिए, जब हम किसी ऐसे व्यक्ति को पुनर्स्थापित/बहाल करने में मदद करते हैं जो पाप में फंस गया है, तो हमें सावधान रहना चाहिए कि हम स्वयं उस पाप में न घसीटे जाएँ (गलतियों 6:1), और जब हमें अपने पड़ोसियों से प्रेम करना है, स्वयं से भी प्रेम करें (मत्ती 22:39) l नीतिवचन 22:3 कहता है, “चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़कर दण्ड भोगते हैं l” यह एक अच्छा अनुस्मारक है जब दूसरों की मदद करने से हमें नुकसान होने लगता है l
कुछ वर्ष पहले, दो बहुत आवश्यकतामंद लोग हमारे चर्च में आने लगे l जल्द ही, मण्डली के देखभाल करने वाले उनकी मांग को पूरा करने में थकने लगे l इसका समाधान उस पति-पत्नी को दूर करना नहीं था, बल्कि सीमाएं तय करना था ताकि सहायता करनेवालों को हानि न पहुंचे l यीशु, सर्वश्रेष्ठ सहायक, ने आराम के लिए समय लिया (मरकुस 4:38), और उसने सुनिश्चित किया कि उसके शिष्यों की ज़रूरतें दूसरों की ज़रूरतों का स्थान न ले ले(6:31) l बुद्धिमान देखभाल उसके उदाहरण का अनुसरण करती है l अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देकर, हम दीर्घकाल में अधिक देखभाल कर सकेंगे l
सबसे पहले आराधना करें
मैंने वयस्क मित्रता के बारे में एक गैर-लाभकारी संगठन शुरू करने की कभी योजना नहीं बनाई थी, और जब मुझे ऐसा करने के लिए बुलाया गया, तो मेरे पास बहुत सारे प्रश्न थे। दान का आर्थिक प्रबंधन कैसे किया जाएगा और इसे बनाने में मेरी मदद कौन करेगा? इन मामलों पर मेरी सबसे बड़ी मदद किसी व्यावसायिक किताब से नहीं, बल्कि बाइबिल से मिली।
परमेश्वर द्वारा कुछ निर्माण करने के लिए बुलाए गए किसी भी व्यक्ति के लिए एज्रा की पुस्तक पढ़ना आवश्यक है। यह याद करते हुए कि यहूदियों ने अपने देश निकाला के बाद यरूशलेम का पुनर्निर्माण कैसे किया, यह दर्शाता है कि कैसे परमेश्वर ने सार्वजनिक दान और सरकारी अनुदान के माध्यम से धन प्रदान किया (एज्रा 1:4-11; 6:8-10), और स्वयंसेवकों और ठेकेदारों दोनों ने कैसे काम किया (1:5) ; 3:7) । यह तैयारी के समय के महत्व को दर्शाता है, पुनर्निर्माण यहूदियों की वापसी के दूसरे वर्ष तक शुरू नहीं होता है (3:8)। यह दर्शाता है कि विरोध कैसे आ सकता है (अध्याय 4)। लेकिन कहानी में एक बात विशेष रूप से मेरे सामने आई। किसी भी निर्माण के शुरू होने से पूरे एक साल पहले, यहूदियों ने वेदी बनाई (3:1-6)। लोगों ने आराधना की "हालाँकि अभी तक यहोवा के मन्दिर की नींव नहीं रखी गई थी" (पद 6)। आराधना सबसे पहले आई।
क्या परमेश्वर आपको कुछ नया शुरू करने के लिए बुला रहे हैं? चाहे आप कोई दान, बाइबल अध्ययन, कोई रचनात्मक परियोजना, या कार्यस्थल पर कोई नया कार्य शुरू कर रहे हों, एज्रा का सिद्धांत मार्मिक है। यहां तक कि परमेश्वर द्वारा दिया गया प्रोजेक्ट (परियोजना) भी हमारा ध्यान उससे दूर ले जा सकती है, इसलिए आइए पहले परमेश्वर पर ध्यान केंद्रित करें। हम काम करने से पहले आराधना करते हैं।