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Articles by टॉम फेल्टेन

व्यवस्था का परमेश्वर

सुरेश ने दवा कैबिनेट में मिली सभी दवाएँ ले लीं। टूटे और अव्यवस्था से भरे परिवार में पले-बढ़े उसका जीवन अस्त-व्यस्त था। उसके पिता द्वारा उसकी माँ के साथ नियमित रूप से दुर्व्यवहार किया जाता था जब तक कि उसके पिता ने अपनी जान नहीं ले ली। अब सुरेश स्वयं को “ख़त्म” कर लेना चाहता था। लेकिन फिर मन में ख्याल आया, मरने के बाद मैं कहां जाऊंगा? परमेश्वर की कृपा से, सुरेश की उस दिन मृत्यु नहीं हुई। और समय के साथ, एक मित्र के साथ बाइबल का अध्ययन करने के बाद, उसने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया। जिस चीज़ ने सुरेश को परमेश्वर की ओर आकर्षित किया वह सृष्टि में सुंदरता और व्यवस्था को देखना था। उसने कहा, ‘’मैं. . . ऐसी चीज़ें देखता हूँ जो बहुत सुंदर है। यह सब किसी ने बनाया है।”

उत्पत्ति 1 में, हम उस परमेश्वर के बारे में पढ़ते हैं जिसने वास्तव में सभी चीज़ों की रचना की। और यद्यपि “पृथ्वी पूरी तरह से अस्त-व्यस्त थी” (पद 2), वह अव्यवस्था से व्यवस्था लाया। उसने “उजाले को अंधकार से अलग किया” (पद 4), समुद्र के बीच भूमि स्थापित की (पद 10), और पौधों और प्राणियों को उनकी “जाति” के अनुसार बनाया (पद 11-12, 21, 24-25), वह जिसने “आकाश और पृथ्वी की रचना की और सब कुछ अपनी जगह पर रखा” (यशायाह 45:18 ) जैसा कि सुरेश ने पाया, कि मसीह के प्रति समर्पित जीवन में शांति और व्यवस्था है।

जीवन अव्यवस्थित और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। परमेश्वर की स्तुति करो कि वह “अव्यवस्था का नहीं, परन्तु शान्ति का परमेश्वर है” (1 कुरिन्थियों 14:33)। आइए आज उसे पुकारें और उससे उस सुंदरता और व्यवस्था को खोजने में हमारी मदद करने के लिए कहें जो वह अकेले प्रदान करता है। टॉम फेल्टन

 

मीठी नींद

सैल के दिमाग में बुरी यादें और आरोप लगाने वाले सन्देश भर गए l नींद उससे दूर थी क्योंकि उसके हृदय में डर भर गया था और उसकी त्वचा पर पसीना आ गया था l यह उसके बप्तिस्में से पहले की रात थी, और वह दुष्ट विचारों के आक्रमण को रोक नहीं सका l सैल को यीशु से मुक्ति मिल गयी थी और वह जानता था कि उसके पाप माफ़ कर दिए गए हैं, लेकिन आत्मिक लड़ाई जारी रही l तभी उसकी पत्नी ने उसका हाथ थाम लिया और उसके लिए प्रार्थना की l कुछ क्षण बाद, सैल के दिल में डर की जगह शांति ने ले ली l वह उठा और उसने वे शब्द लिखे जो वह बप्तिस्मा लेने से पहले साझा करेगा—कुछ ऐसा जो वह करने में सक्षम नहीं था l इसके बाद उसे मीठी नींद का अनुभव हुआ l

राजा दाऊद भी जानता था कि एक बेचैन रात कैसी महसूस होती है l अपने बेटे अबशालोम से भागना जो उसका सिंहासन चुराना चाहता था (2 शमुएल 15-17), वह जानता था कि “दस हज़ार मनुष्य . . . [उसके] विरुद्ध चारों ओर पांति बांधे खड़े” थे (भजन संहिता 3:6) l दाऊद ने विलाप करते हुए कहा, “मेरे सतानेवाले . . . बहुत हैं” (पद.1) l हालाँकि डर औए संदेह पर जीत हासिल की जा सकती थी, फिर भी उसने अपने “ढाल” यानि परमेश्वर को पुकारा (पद.3) l बाद में, उसने पाया कि वह “लेट सकता है और सो सकता है . . . क्योंकि यहोवा [उसे] संभालता है” (पद.5) l

जब भय और संघर्ष हमारे मन को जकड़ लेते हैं और आराम की जगह बेचैनी ले लेती है, तो परमेश्वर से प्रार्थना करने पर आशा मिलती है l हालाँकि हमें सैल और दाऊद की तरह तत्काल मीठी नींद का अनुभव नहीं हो सकता है, “शांति से [हम] लेट सकते हैं और . . .निश्चित [रह सकते हैं]”(4:8) l क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमारा विश्राम होगा l टॉम फेल्टन

 

अजीब स्थान

हे परमेश्वर, यह क्या हो रहा है? क्या हमारे लिए आपकी योजना यही है?

जब मैं, पति और छोटे बच्चों का पिता होकर, एक गंभीर कैंसर से जूझ रहा था, तो ये प्रश्न और भी अधिक मेरे दिमाग में घूमने लगे। इसके अलावा, हमारे परिवार ने हाल ही में एक मिशन टीम के साथ काम किया था, जिसने कई बच्चों को यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करते देखा था। परमेश्वर स्पष्ट परिणाम लाता रहा है। उस समय बहुत खुशी हुई और अब ये?

एक प्रेमी घर से निकाले जाने और एक अजीब नई दुनिया में धकेल दिए जाने के बाद एस्तेर ने संभवतः परमेश्वर से प्रश्न और प्रार्थनाएँ कीं (एस्तेर 2:8)। उसके चचेरे भाई मोर्दकै ने उसे अनाथ होने के बाद अपनी बेटी के रूप में पाला था (पद.7)। लेकिन फिर उसे राजा के महल में रखा गया और अंततः उसको रानी के रूप में ऊंचा किया गया (पद.17)। मोर्दकै को स्वाभाविक रूप से इस बात की चिंता थी कि एस्तेर के साथ "क्या हो रहा है" (पद.11)। लेकिन समय के साथ, दोनों को एहसास हुआ कि परमेश्वर ने उसे "ऐसे समय के लिए" महान शक्ति के स्थान पर रहने के लिए बुलाया था (4:14)—एक ऐसा स्थान जिसने उसके लोगों को विनाश से बचाने की अनुमति दी (अध्याय 7-8).

यह स्पष्ट है कि परमेश्वर ने अपनी संपूर्ण योजना के तहत एस्तेर को एक अजीब जगह पर रखा था। उसने मेरे साथ भी ऐसा ही किया l चूंकि मैंने कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ी, इसलिए मुझे कई रोगियों और देखभाल करने वालों के साथ अपना विश्वास साझा करने का सौभाग्य मिला। वह आपको किस अजीब जगह पर ले गया है? उस पर यकीन करें l वह अच्छा है, और उसकी योजनाएँ भी अच्छी हैं (रोमियों 11:33-36)।

टॉम फेल्टन

दीवारें दीवारें ढह गईं, एकता मिली

1961 से ही बर्लिन की दीवार ने परिवारों और दोस्तों को अलग कर दिया था। उस साल पूर्वी जर्मन सरकार द्वारा बनाई गई इस दीवार ने अपने नागरिकों को पश्चिम जर्मनी भागने से रोक दिया था। वास्तव में, 1949 से लेकर जिस दिन यह संरचना बनाई गई थी, अनुमान है कि 2.5 मिलियन से अधिक पूर्वी जर्मन पश्चिम की ओर भाग गए थे। 1987 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन दीवार के पास खड़े थे और उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा, "इस दीवार को गिरा दो।" उनके शब्दों में परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही थी, जिसका समापन 1989 में दीवार के ढहने के साथ हुआ - जिसके परिणामस्वरूप जर्मनी का हर्षोल्लासपूर्ण पुनर्मिलन हुआ।

इफिसियों 2:14 में, पौलुस ने यीशु द्वारा गिराई गई “शत्रुता की दीवार” के बारे में लिखा। यह दीवार यहूदियों (परमेश्वर के चुने हुए लोग) और अन्यजातियों (अन्य सभी लोगों) के बीच मौजूद थी। और इसका प्रतीक यरूशलेम में हेरोदेस महान द्वारा बनाए गए प्राचीन धार्मिक स्थान में विभाजनकारी दीवार (सोरेग/soreg ) थी। इसने अन्यजातियों को धार्मिक स्थान के बाहरी आँगन से आगे प्रवेश करने से रोक दिया, हालाँकि वे आंतरिक आँगन को देख सकते थे। लेकिन यीशु ने यहूदियों और अन्यजातियों के बीच और परमेश्वर और सभी लोगों के बीच “शांति” और मेल-मिलाप लाया। उसने ऐसा “उस दीवार को तोड़कर” किया जो हमें अलग करती थी” “क्रूस पर अपनी मृत्यु” ( पद 14, 16 ) के द्वारा। “शांति के शुभ समाचार” ने सभी के लिए मसीह में विश्वास के द्वारा एकजुट होना संभव बनाया ( पद 17–18 )। आज, कई चीजें हमें विभाजित कर सकती हैं। जैसे परमेश्वर हमें वह प्रदान करता है जिसकी हमें आवश्यकता है, वैसे ही आइए हम यीशु में पाई जाने वाली शांति और एकता को जीने का प्रयास करें (पद 19-22)। 

—टॉम फेल्टेन

प्यार में सामना करना

उसने कई काम अच्छे से किए, लेकिन एक समस्या थी। हर कोई इसे देखता था। फिर भी क्योंकि वह अपनी भूमिका को पूरा करने में बहुत प्रभावी था, उसके गुस्से के मुद्दे को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया। उसका कभी भी वास्तव में सामना नहीं किया गया। दुख की बात है कि इसके परिणामस्वरूप कई लोगों को वर्षों तक दुख पहुंचा। और, अंत में, इसने उस करियर को समय से पहले ही समाप्त कर दिया जो मसीह में इस भाई के लिए बहुत कुछ हो सकता था। काश मैंने बहुत पहले ही प्यार से उसका सामना करने का फैसला कर लिया होता।  
 
उत्पत्ति 4 में, परमेश्वर ने प्रेम में किसी के पाप का सामना करने का क्या अर्थ है, इसकी सही तस्वीर प्रदान की है। कैन क्रोधित हो गया। एक किसान होने के नाते, उसने "प्रभु को भेंट के रूप में भूमि के कुछ फल" भेंट किए ( पद 3)। लेकिन परमेश्वर ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह जो लाया है वह स्वीकार्य नहीं है। कैन की भेंट अस्वीकार कर दी गई, और वह "बहुत क्रोधित हुआ, और उसका चेहरा उदास था" ( पद 5)। इसलिए, परमेश्वर ने उसका सामना किया और कहा, "तुम क्रोधित क्यों हो?" (पद 6)। फिर उसने कैन से कहा कि वह अपने पाप से दूर हो जाए और जो अच्छा और सही है उसका पीछा करे। दुख की बात है कि कैन ने परमेश्वर के शब्दों को अनदेखा किया और एक भयानक कार्य किया (पद 8)।  
 
हालाँकि हम दूसरों को पापपूर्ण व्यवहार से दूर होने के लिए मजबूर नहीं कर सकते, लेकिन हम करुणापूर्वक उनका सामना कर सकते हैं। हम "प्रेम में सच्‍चाई" बोल सकते हैं ताकि हम दोनों " मसीह में बढ़ते जाएँ"( इफिसियों 4:15) और, जैसे परमेश्वर हमें सुनने के लिए कान देते हैं, हम दूसरों से सत्य के कठिन शब्द भी स्वीकार कर सकते हैं। 
 
— टॉम फेल्टेन 
 

जानना और प्रेम करना

खेल लेखक जोनाथन जार्क्स ने अपने सशक्त लेख "क्या मेरा बेटा तुम्हें जानता है?" में टर्मिनल (अंतिम चरण का)  कैंसर से अपनी लड़ाई, और दूसरों द्वारा अपनी पत्नी और छोटे बेटे की अच्छी देखभाल करने की इच्छा के बारे में लिखा। चौंतीस वर्षीय व्यक्ति ने यह लेख अपनी मृत्यु से ठीक छह महीने पहले लिखा था। जार्क्स, यीशु में विश्वास करने वाले, जार्क्स जिसके पिता की मृत्यु तब हो गई थी जब वह एक युवा वयस्क थे, उन्होंने पवित्रशास्त्र से कुछ वचन साझा किये जो विधवाओं और अनाथों की देखभाल के बारे में बताते है (निर्गमन 22:22; यशायाह 1:17; जेम्स 1:27)। और अपने दोस्तों को निर्देश देते हुए उन्होंने लिखा कि, "जब मैं तुम्हें स्वर्ग में देखूंगा, तो केवल एक ही चीज पूछूंगा- क्या तुमने मेरे बेटे और मेरी पत्नी की अच्छी तरह देखभाल करी ? . . . क्या मेरा बेटा तुम्हें जानता है?”  
राजा दाऊद ने सोचा कि “क्या शाऊल के घराने में से कोई अब तक बचा है जिसको मैं [अपने प्रिय मित्र] योनातन के कारण प्रीति दिखाऊँ" (2 शमूएल 9:1)। योनातन का बेटा, मपीबोशेत, जो एक दुर्घटना के कारण "दोनों पैरों से लंगड़ा" था (पद- 3) (देखें 4:4), को राजा के पास लाया गया। दाऊद ने उस से कहा, तेरे पिता योनातान के कारण मैं निश्चय तुझको प्रीति दिखाऊंगा। और तेरे दादा शाऊल की सारी भूमि तुझे फेर दूंगा, और तू मेरी मेज पर नित्य भोजन किया कर” (9:7)। दाऊद ने मपीबोशेत की प्रेमपूर्ण देखभाल दिखाई, और यह संभव है कि समय के साथ वह वास्तव में उसे जान भी गया होगा (देखें 19:24-30)। 
यीशु ने हमें दूसरों से वैसे ही प्रेम करने के लिए बुलाया है जैसे वह हमसे प्रेम करता है (यूहन्ना 13:34)।और जिस तरह वह हमारे अंदर और हमारे माध्यम से कार्य करता है, उसी तरह हम भी दूसरों को सही मायने में अच्छी तरह से जानें और उनसे प्रेम करें। 
-टॉम फेल्टन 

अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना

2021 में, इतिहास में किसी से भी ज़्यादा दूर तीर चलाने की महत्वाकांक्षा रखने वाले एक इंजीनियर ने 2,028 फ़ीट की दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया। नमक के मैदान पर पीठ के बल लेटते हुए, उसने अपने व्यक्तिगत रूप से डिज़ाइन किए गए पैर के धनुष की डोरी को पीछे खींचा और निशाना लगाने के लिए तैयार हो गया। उसे उम्मीद थी कि एक मील (5,280 फ़ीट) से ज़्यादा की नई रिकॉर्ड दूरी होगी। एक गहरी साँस लेते हुए, उसने तीर को उड़ने दिया। यह एक मील भी नहीं चला। वास्तव में, यह एक फ़ीट से भी कम दूरी तय कर पाया - उसके पैर में जा लगा और ओह! काफ़ी नुकसान पहुँचा। 
कभी–कभी हम गलत महत्वकांक्षा के साथ लाक्षणिक (प्रतीकात्मक) रूप से अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार सकते हैं (अपना नुकसान कर सकते हैं)। याकूब और यूहन्ना जानते थे कि महत्वाकांक्षी रूप से कुछ अच्छा चाहने का क्या मतलब होता है,लेकिन गलत कारणों (उद्देश्य) के लिए। उन्होंने यीशु से माँगा, कि “तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे।” (मरकुस 10:37)। यीशु ने शिष्यों से कहा था कि वे “बारह सिंहासनों पर बैठकर इस्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करेंगे।” (मत्ती 19:28)  इसलिए यह देखना आसान है कि उन्होंने यह अनुरोध क्यों किया। समस्या ? वे स्वार्थी रूप से मसीह की महिमा में अपना ऊंचा दर्जा और शक्ति की तलाश कर रहे थे। यीशु ने उनसे कहा कि उनकी महत्वाकांक्षा गलत है (मरकुस 10:38) बरन “जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने।” (पद 43)। जब हम मसीह के लिए अच्छे और महान कार्य करने का लक्ष्य रखते हैं, तो क्या हम उसकी बुद्धि और मार्गदर्शन की तलाश कर सकते हैं — विनम्रतापूर्वक दूसरों की सेवा करें जिस प्रकार मसीह ने बहुत ही अच्छी तरह से किया (पद 45)। 
-टॉम फेल्टेन 

खुले स्थान ढूँढना

अपनी पुस्तक मार्जिन (Margin) में, डॉ. रिचर्ड स्वेन्सन लिखते हैं, “हमारे पास सांस लेने के लिए थोड़ी जगह होनी चाहिए l हमें सोचने के लिए स्वतंत्रता और चंगा करने के लिए अनुमति चाहिए l हमारे रिश्ते गति से नष्ट हो रहे, हमारे बच्चे धरती पर घायल हैं, हमारे उच्च गति वाले नेक इरादों से कुचले जा रहे हैं l क्या ईश्वर अब थकान का समर्थक है? क्या वह अब लोगों को शांत पानी के किनारे नहीं ले जाता? अतीत की उन खुली जगहों को किसने लूटा, और हम उन्हें वापस कैसे पा सकते हैं?" स्वेनसन कहते हैं कि हमें जीवन में कुछ शांत, उपजाऊ "भूमि" की आवश्यकता है जहाँ हम ईश्वर में आराम कर सकें और उनसे मिल सकें।   
क्या यह प्रतिध्वनित गूंजता प्रतिध्वनित है? खुली जगहों की तलाश करना मूसा अच्छी तरह से जानता था l “हठीले” लोगों की अगुवाई करते हुए (निर्गमन 33:5), वह अक्सर परमेश्वर की उपस्थिति में विश्राम और मार्गदर्शन के लिए अलग जाता था l अपने “मिलापवाले तम्बू” (पद.7) में “यहोवा मूसा से इस प्रकार आमने-सामने बातें करता था, जिस प्रकार कोई अपने भाई से” (पद.11) l यीशु भी “जंगलों में अलग जाकर प्रार्थना किया करता था” (लूका 5:16) l दोनों ने पिता के साथ अकेले समय बिताने के महत्व को समझा l  
हमें भी अपने जीवन में गुंजाइश बनाना चाहिए, कुछ विस्तृत और खुली जगहें, जो आराम और ईश्वर की मौजूदगी में बिताई जाएँ। उनके साथ समय बिताने से हमें बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी - हमारे जीवन में स्वस्थ दूरी और सीमाएँ बनाना ताकि हमारे पास उनसे और दूसरों से प्यार करने के लिए बैंडविड्थ (चौड़ाई) उपलब्ध हो। आइए आज खुली जगहों में ईश्वर की तलाश करें।  
आइए आज हम खुले स्थानों में ईश्वर की खोज करें l  
—टॉम फेल्टन 

व्यक्तिगत जिम्मेदारी

मैं जो महसूस कर रहा था मेरे मित्र के आँखों ने प्रकट किया —डर! हम दो किशोरों ने बुरा व्यवहार किया था और अब हम शिविर निदेशक के सामने डर रहे थे। वह व्यक्ति, जो हमारे पिताओं को अच्छी तरह से जानते थे, उन्होंने प्यार से लेकिन स्पष्ट रूप से बताया कि हमारे पिता बहुत निराश होंगे। हम अपने अपराध के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी का भार महसूस करते हुए-हम मेज़ के नीचे छुपना चाहते थे। 
परमेश्वर ने सपन्याह को यहूदा के लोगों के लिए एक संदेश दिया जिसमें पाप के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी के बारे में शक्तिशाली वचन थे (सपन्याह 1:1, 6-7)। यहूदा के शत्रुओं पर अपना न्याय वर्णित करने के पश्चात (अध्याय 2), उसने अपने दोषी, बंधक लोगों पर अपनी नजरें घुमाईं (अध्याय 3)। परमेश्वर कहता है, “हाय बलवा करनेवाली और अशुद्ध और अन्धेर से भरी हुई नगरी!" (3:1)। "वे अब भी सब प्रकार के बुरे बुरे काम करने के लिए यत्न करते है।" (व. 7)। 
उसने अपने लोगों के ठंडे ह्रदय देखे थे - उनकी आत्मिक बेपरवाही, सामाजिक अन्याय और बदसूरत लालच - और वह प्रेम सहित अनुशासन ला रहा था। और फिर वह व्यक्ति चाहे कोई भी क्यों न हो "अगुवें," "न्यायी," "नबी" (वव. 3-4) - हर कोई उसके सामने दोषी था। 
प्रेरित पौलुस ने यीशु में उन विश्वासियों को जो पाप में लगे रहे, यह लिखा, “तुम अपने लिए भयानक दण्ड इकट्ठा कर रहे हो। 
[परमेश्वर] हर एक का न्याय उनके कामों के अनुसार करेगा” (रोमियों 2:5-6 )। तो, यीशु की शक्ति में, आइए ऐसे तरीके से जिएं जिससे हमारे पवित्र, प्रेमी पिता का सम्मान हो और हमें कोई पछतावा न हो।