Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by विन्न कॉलियर

परमेश्वर पर केन्द्रित दृष्

उन्नीसवीं सदी के स्कॉटिश पास्टर थॉमस चामर् ने एक बार पहाड़ी क्षेत्र में घोड़ा गाड़ी में सवारी करने की कहानी सुनाई थी, जो एक डरावनी खड़ी चट्टान के साथ एक संकीर्ण पहाड़ी के कगार से जुड़ी हुई थी। दोनों घोड़ों में से एक घोड़ा चौंक गया था, गाड़ी हांकने वाले को यह डर था कि कहीं वे (घोड़े) घबरा कर गिरकर मर न जाएँ, वह बार-बार अपना चाबुक चलाता रहा। ख़तरे को पार कर लेने के बाद चामर् ने गाड़ी हांकने वाले से पूछा कि उसने इतने ज़ोर से चाबुक का इस्तेमाल क्यों किया। उसने कहा, "मुझे घोड़ों को सोचने के लिए कुछ और देने की ज़रूरत थी।" "मुझे उनका ध्यान अपनी ओर खींचने की ज़रूरत थी।"

हमारे चारों ओर आशंकाओं और खतरों से भरी दुनिया में, हम सभी को अपना ध्यान केन्द्रित करने के लिए किसी और चीज़ की आवश्यकता है। हालाँकि, हमें केवल मानसिक विकर्षण से कहीं अधिक की आवश्यकता है -- एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक तरकीब। हमें जिस चीज़ की सबसे अधिक आवश्यकता है, वह यह है कि अपने दिमाग को अपने सभी प्रकार के भय से अधिक शक्तिशाली वास्तविकता पर केंद्रित करना। जैसा कि यशायाह ने यहूदिया में परमेश्वर के लोगों से कहा, हमें वास्तव में अपने मन को परमेश्वर पर केंद्रित करने की आवश्यकता है। यशायाह वादा करता है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है (यशायाह 26:3)। और हम प्रभु पर सदैव भरोसा रख सकते हैं, क्योंकि "प्रभु परमेश्वर सनातन चट्टान है" (पद-4)।

शांति—यह उन सभी के लिए उपहार है जो अपनी दृष्टी परमेश्वर पर केंद्रित करते हैं। और उनकी शांति हमारे बुरे विचारों को दूर रखने की एक तकनीक से कहीं अधिक प्रदान करती है। जो लोग अपने भविष्य, अपनी आशाओं और अपनी चिंताओं को त्याग देंगे, उनके लिए पवित्र आत्मा जीवन जीने का एक बिल्कुल नया तरीका संभव बनाता है। विन्न कोलियर

सेन्ट (संत) निक

स व्यक्ति को हम संत निकोलस (संत निक/Saint Nick) के नाम से जानते हैं उनका जन्म ई. सन् 270 के आसपास एक धनी यूनानी (प्राचीन ग्रीस से संबंधित) परिवार में हुआ था। दुर्भाग्य से, जब वह छोटा था तब ही उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई, और वह अपने चाचा के साथ रहता था जो उससे प्यार करते थे और परमेश्वर का अनुसरण करना सिखाते थे। जब निकोलस एक युवा व्यक्ति थे, तो कहते है कि उन्होंने तीन बहनों के बारे में सुना, जिनके पास शादी के लिए दहेज नहीं था और वे जल्द ही बेसहारा हो जाएँगी। जरूरतमंदों को देने के बारे में यीशु की शिक्षा का पालन करना चाहते हुए, उन्होंने अपनी विरासत ली और प्रत्येक बहन को सोने के सिक्कों से भरा एक बैग दिया। वर्षों से, निकोलस ने अपने बाकी पैसे गरीबों को खिलाने और दूसरों की देखभाल करने में खर्च कर दिए। आगामी शताब्दियों में, निकोलस को उनकी उदार उदारता के लिए सम्मानित किया गया, और उन्होंने एक चरित्र को प्रेरित किया जिसे हम सांता क्लॉज़ के रूप में जानते हैं। 
 
जबकि क्रिसमस के समय  की चकाचौंध और विज्ञापन हमारे उत्सवों को खतरे में डाल सकता हैं, उपहार देने की परंपरा निकोलस से जुड़ा है। और उसकी उदारता यीशु के प्रति उसके भक्ति पर आधारित थी। निकोलस को पता था कि मसीह ने अकल्पनीय उदारता प्रदर्शित करके, मन को अत्‍यधिक प्रभावित करने वाला उपहार लाया : परमेश्वर। यीशु “परमेश्‍वर हमारे साथ” है (मत्ती 1:23)। और उसने हमें जीवन का उपहार दिया। मृत्यु की दुनिया में, वह "अपने लोगों को उनके पापों से बचाता है" ( पद 21) जब हम यीशु पर विश्वास करते हैं, तो बलिदान की उदारता सामने आती है। हम दूसरों की ज़रूरतों को पूरा करते हैं, और हम खुशी-खुशी उनकी ज़रूरतें पूरी करते हैं, जैसे परमेश्वर हमारी ज़रूरतें पूरी करता है। यह संत निक की कहानी है; लेकिन इससे भी बढ़कर, यह परमेश्वर की कहानी है 
 
—विन कॉलियर

सेन्ट (संत) निक

जिस व्यक्ति को हम संत निकोलस (संत निक/Saint Nick) के नाम से जानते हैं उनका जन्म ई. सन् 270 के आसपास एक धनी यूनानी (प्राचीन ग्रीस से संबंधित) परिवार में हुआ था। दुर्भाग्य से, जब वह छोटा था तब ही उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई, और वह अपने चाचा के साथ रहता था जो उससे प्यार करते थे और परमेश्वर का अनुसरण करना सिखाते थे। जब निकोलस एक युवा व्यक्ति थे, तो कहते है कि उन्होंने तीन बहनों के बारे में सुना, जिनके पास शादी के लिए दहेज नहीं था और वे जल्द ही बेसहारा हो जाएँगी। जरूरतमंदों को देने के बारे में यीशु की शिक्षा का पालन करना चाहते हुए, उन्होंने अपनी विरासत ली और प्रत्येक बहन को सोने के सिक्कों से भरा एक बैग दिया। वर्षों से, निकोलस ने अपने बाकी पैसे गरीबों को खिलाने और दूसरों की देखभाल करने में खर्च कर दिए। आगामी शताब्दियों में, निकोलस को उनकी उदार उदारता के लिए सम्मानित किया गया, और उन्होंने एक चरित्र को प्रेरित किया जिसे हम सांता क्लॉज़ के रूप में जानते हैं।

जबकि क्रिसमस के समय  की चकाचौंध और विज्ञापन हमारे उत्सवों को खतरे में डाल सकता हैं, उपहार देने की परंपरा निकोलस से जुड़ा है। और उसकी उदारता यीशु के प्रति उसके भक्ति पर आधारित थी। निकोलस को पता था कि मसीह ने अकल्पनीय उदारता प्रदर्शित करके, मन को अत्‍यधिक प्रभावित करने वाला उपहार लाया : परमेश्वर। यीशु “परमेश्‍वर हमारे साथ” है (मत्ती 1:23)। और उसने हमें जीवन का उपहार दिया। मृत्यु की दुनिया में, वह "अपने लोगों को उनके पापों से बचाता है" ( पद 21) जब हम यीशु पर विश्वास करते हैं, तो बलिदान की उदारता सामने आती है। हम दूसरों की ज़रूरतों को पूरा करते हैं, और हम खुशी-खुशी उनकी ज़रूरतें पूरी करते हैं, जैसे परमेश्वर हमारी ज़रूरतें पूरी करता है। यह संत निक की कहानी है; लेकिन इससे भी बढ़कर, यह परमेश्वर की कहानी है 

—विन कॉलियर

चरवाहे की आवाज को पहचानना

 
जब मैं टेनेसी में एक खेत पर रहता था, तो मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ घूमते हुए शानदार दोपहरें बिताता था। हम जंगल में जाते थे, टट्टू (छोटा घोड़ा) की सवारी करते थे, रोडियो एरिना जाते थे, और चरवाहों को घोड़ों पर काम करते देखने के लिए खलिहान में जाते थे। लेकिन जब भी मुझे अपने पिता की सीटी सुनाई देती थी - हवा और बाकी सभी शोरगुल के बीच से आती हुई वह स्पष्ट आवाज़ - तो मैं तुरंत जो कुछ भी कर रहा होता था उसे तुरंत छोड़ देता था और घर की ओर चल देता था। संकेत स्पष्ट था, और मुझे पता था कि मुझे मेरे पिता बुला रहे हैं। दशकों बाद, मैं अभी भी उस सीटी को पहचानता हूँ। 
 
यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि वह चरवाहा था, और वे भेड़ें थीं। "भेड़ें उसका[चरवाहा] शब्द सुनती हैं", उन्होंने कहा," वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।" (यूहन्ना 10:3) ऐसे समय में जब कई धर्मगुरु और शिक्षकों ने अपने अधिकार का दावा करके मसीह के शिष्यों को भ्रमित करने की कोशिश की, उन्होंने घोषणा की कि उनकी प्रेमपूर्ण आवाज अभी भी स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है, अन्य सभी से अधिक स्पष्ट। "भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं।"(पद 4) 
 
आइए हम यीशु की आवाज़ सुनते समय सावधान रहें और इसे मूर्खतापूर्ण ढंग से अनदेखा करने से बचें, क्योंकि सच तो यह है: चरवाहा स्पष्ट बोलता है, और उसकी भेड़ें उसकी आवाज़ सुनती हैं। शायद बाइबल के पद के माध्यम से, किसी विश्वासी मित्र के शब्दों के माध्यम से, या आत्मा की प्रेरणा के माध्यम से—यीशु बात करता हैं, और हम सुनते हैं। 
 
-विन कोलियर 
 

बिना सोचे समझे खतरे की ओर आगे बढ़ना

1892 में, हैजा से पीड़ित एक निवासी ने गलती से यह बीमारी एल्बे नदी के माध्यम से जर्मनी की संपूर्ण जल आपूर्ति हैम्बर्ग तक फैला दी। कुछ ही हफ्तों में दस हजार नागरिक मर गये। आठ साल पहले, जर्मन सूक्ष्म जीवविज्ञानी (microbiologist) रॉबर्ट कॉख ने एक खोज की थी: हैजा पानी से होने वाली बीमारी है जो तेजी से फैलती है। कॉख के इस प्रकटन ने बड़े यूरोपीय शहरों के अधिकारियों को अपने पानी की सुरक्षा के लिए फिल्ट्रेशन प्रणाली (पानी साफ करने की एक विधि) में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। हालाँकि, हैम्बर्ग के अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। लागतों का हवाला देते हुए और संदेहपूर्ण विज्ञान का आरोप लगाते हुए, उन्होंने स्पष्ट चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया, जबकि उनका शहर तबाही की ओर अग्रसर था। 
नीतिवचन की किताब हममें से उन लोगों के बारे में बहुत कुछ कहती है जो मुसीबत देखते हैं फिर भी कोई कदम उठाने या काम करने से इनकार कर देते हैं। "बुद्धिमान व्यक्ति खतरे को पहले से ही भांप लेता है और सावधानी बरतता है।” (27:12)। जब परमेश्वर हमें आगे आने वाले खतरे को देखने में मदद करता है, तो खतरे को दूर करने के लिए कोई कदम उठाना या काम करना सही समझ है। हम समझदारी से रास्ता बदलते हैं। या हम उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली उचित सावधानियों के साथ स्वयं को तैयार करते हैं। लेकिन हम कुछ तो अवश्य ही करते हैं I कुछ न करना पूर्णतया पागलपन है। हालाँकि, हम सभी चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ करने में विफल हो सकते हैं और आपदा की ओर बढ़ सकते हैं। "भोले लोग आगे बढ़े चले जाते और हानि उठाते है” (पद-12)। 
पवित्रशास्त्र में और यीशु के जीवन के द्वारा, परमेश्वर हमें अनुसरण करने का मार्ग दिखाते हैं और हमें निश्चित रूप से आने वाली मुसीबतों के बारे में चेतावनी देते हैं। यदि हम मूर्ख हैं, तो हम बिना सोचे समझे खतरे की ओर आगे बढ़ सकते है या इसके बजाय, जब वह अपनी कृपा से हमारा नेतृत्व करता है, तो क्या हम उसकी बुद्धि पर ध्यान दे सकते हैं और अपना रास्ता बदल सकते हैं।  
-विन्न कोल्लियर 

हमें जिस बुद्धि की आवश्यकता है

अपनी याद रहने वाली (अति महान)  पुस्तक द ग्रेट इन्फ्लुएंजा (The Great Influenza) में, जॉन एम. बैरी ने 1918 फ्लू महामारी की कहानी का वर्णन किया है। बैरी बताते हैं कि कैसे स्वास्थ्य अधिकारियों ने बिना किसी तैयारी के इस महामारी का पूर्वानुमान लगाया। उन्हें डर था कि प्रथम विश्व युद्ध में सैकड़ों हज़ारों सैनिकों को खाइयों में ठूंस दिया जाएगा और सीमा पार भेजा जाएगा, जिससे नए वायरस फैलेंगे। लेकिन तबाही रोकने के लिए ये ज्ञान बेकार था. शक्तिशाली नेता युद्ध पर ज़ोर देते हुये बिना सोचे समझे हिंसा की ओर अग्रसर हो गये। और महामारी विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि महामारी में पांच करोड़ लोग मारे गए थे, जो युद्ध के नरसंहार में मारे गए लगभग दो करोड़ लोगों को और जोड़ते हैं। 
हमने बार-बार साबित किया है कि हमारा मानवीय ज्ञान हमें बुराई से बचाने के लिए कभी भी पर्याप्त नहीं होगा (नीतिवचन 4:14-16)। हालाँकि हमने अपार ज्ञान अर्जित किया है और उल्लेखनीय अंतर्दृष्टियाँ (insights) प्रस्तुत की हैं, फिर भी हम एक-दूसरे को पहुँचाने वाली पीढ़ा को रोक नहीं सकते हैं। हम "दुष्टों के मार्ग" को नहीं रोक सकते, यह मूर्खतापूर्ण, दोहराने वाला मार्ग जो "गहन अंधकार" की ओर ले जाता है। हमारे सर्वोत्तम ज्ञान के बावजूद, हमें वास्तव में यह पता नहीं है कि "हम किस से ठोकर खाते है” (पद-19)। 
इसलिए हमें "बुद्धि प्राप्त करनी चाहिए, समझ प्राप्त करनी चाहिए" (पद-5)। बुद्धि हमें सिखाती है कि ज्ञान के साथ क्या करना है। और सच्ची बुद्धि, यह बुद्धि जिसकी हमें अत्यंत आवश्यकता है, परमेश्वर से आती है। हमारा ज्ञान हमेशा कम पड़ता है, लेकिन उसकी बुद्धि वह प्रदान करती है जिसकी हमें आवश्यकता है। 
-विन्न कोल्लियर 

सुंदर बहाली (पुनरुद्धार)

अपनी अद्भुत पुस्तक आर्ट + फेथ: ए थियोलॉजी ऑफ़ मेकिंग में, प्रसिद्ध कलाकार मकोतो फुजीमुरा ने किंत्सुगी के प्राचीन जापानी कला रूप का वर्णन किया है। इसमें, कलाकार टूटे हुए मिट्टी के बर्तन (मूल रूप से चाय के बर्तन) लेता है और उनके टुकड़ों को लाख की मदद से वापस जोड़ता है, दरारों में सोना पिरोता है। फुजीमुरा बताते हैं, "किंत्सुगी," "केवल टूटे हुए बर्तन को 'ठीक' या मरम्मत नहीं करता है; बल्कि, यह तकनीक टूटे हुए बर्तन को मूल से भी अधिक सुंदर बनाती है।" किंत्सुगी, पहली बार सदियों पहले लागू की गई थी जब एक सेनापति का पसंदीदा कप टूट गया था और फिर जिसे खूबसूरती से बहाल किया गया था, और तब से यह एक कला बन गई जो अत्यधिक बेशकीमती और चाहने योग्य है। 
यशायाह ने परमेश्वर द्वारा संसार के साथ इस प्रकार की बहाली को कुशलतापूर्वक क्रियान्वित करने का वर्णन किया है। यद्यपि हम अपने विद्रोह के कारण बरबाद हो गए हैं और अपने स्वार्थ के कारण टूट गए हैं, परमेश्वर “नया आकाश और नई पृथ्वी” बनाने का वादा करता है (65:17)। वह न केवल पुरानी दुनिया की मरम्मत करने की योजना बना रहा है बल्कि इसे पूरी तरह से नया बनाने के लिए हमारी बर्बादी (खंडहरों)  को हटाकर एक ताज़ी सुंदरता से झिलमिलाती दुनिया को बनाने की योजना बना रहा है। यह नई रचना इतनी आश्चर्यजनक और शोभायमान होगी कि “पिछला कष्ट दूर हो जायेगा और पिछली बातें याद नहीं रहेंगी” (पद 16–17)। इस नई रचना के साथ, परमेश्वर हमारी गलतियों को छिपाने के लिए संघर्ष नहीं करेंगे, बल्कि अपनी रचनात्मक शक्ति को प्रकट करेंगे – शक्ति जिससे  बदसूरत चीजें सुंदर बन जाती हैं और मृत चीजें नए सिरे से सांस लेती हैं। 
जब हम अपने टूटे हुए जीवन का निरीक्षण करते हैं, तो निराशा की कोई आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर अपनी सुंदर बहाली का कार्य कर रहा है। 
विन्न कोल्लियर 

परमेश्वर की महान कथा

लाइफ मैगज़ीन के 12 जुलाई, 1968 के मुखपृष्ठ पर बियाफ्रा (नाइजीरिया में गृहयुद्ध के दौरान) के भूख से मर रहे बच्चों की भयानक तस्वीर प्रकाशित की गई थी। एक जवान लड़के ने परेशान होकर उस मैगज़ीन की एक प्रतिलिपि (कॉपी) पास्टर के पास ले जाकर पूछा, “क्या परमेश्वर को इस बारे में मालूम है?” उस पास्टर ने उत्तर दिया, “मैं जानता हूँ कि तुम इस बात को नहीं समझ सकते, परन्तु, हाँ, परमेश्वर को इस बारे में मालूम है।” इस पर वह लड़का यह कहते हुए बाहर चला गया कि उसे ऐसे परमेश्वर में कोई दिलचस्पी नहीं है। ऐसे प्रश्न केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि हम सभी को परेशान करते हैं। परमेश्वर के रहस्यमयी ज्ञान की पुष्टि के साथ-साथ, मैं इस बात की आशा करता हूँ कि काश उस लड़के ने उस महान गाथा के बारे में सुना होता जिसे परमेश्वर ने लिखना जारी रखा   है यहाँ तक कि बियाफ्रा जैसे स्थानों में भी। 
यीशु ने अपने उन अनुयायियों के लिए इस कहानी को प्रकट किया, जिन्होंने यह मान लिया था कि कठिनाई से वह उनकी रक्षा करेगा। इसके बजाय मसीह ने उनसे कहा कि “इस संसार में तुम्हें क्लेश होता है।” हालाँकि, यीशु ने जिस बात की पेशकश की, वह उसकी यह प्रतिज्ञा थी कि ये बुराइयाँ अंत नहीं हैं। वास्तव में, उसने पहले से ही “संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33)। और परमेश्वर के अंतिम अध्याय में, हर एक अन्याय को मिटा दिया जाएगा, हर एक दुःख ठीक हो जाएगा। 
उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक की पुस्तकें हर अकल्पनीय बुराई को नष्ट करने, हर गलत बात को सही करने की परमेश्वर की कहानी को याद दिलाती  हैं। यह कहानी उस प्रेम करने वाले व्यक्ति को प्रस्तुत करती है जिसकी हममें अविवादित रुचि है। यीशु ने अपने चेलों से कहा कि “मैंने ये बातें तुम से इसलिए कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शांति मिले” (पद 33)।  आज  हम उसकी शांति और उपस्थिति में विश्राम करें। 
—विन्न कोल्लियर 

यीशु हमारा भाई

 
ब्रिजर वॉकर सिर्फ़ छह साल का था जब एक ख़तरनाक कुत्ते ने उसकी छोटी बहन पर हमला किया। सहज रूप से, कुत्ते के क्रूर हमले से उसे बचाते हुए ब्रिजर उसके सामने कूद गया, कुत्ते के क्रूर हमले से उसे बचाते हुए। आपातकालीन देखभाल और चेहरे पर नब्बे टांके लगने के बाद, ब्रिजर ने अपनी हरकतों के बारे में बताया। "अगर किसी को मरना ही था, तो मुझे लगा कि वह मैं ही हूँ।" शुक्र है कि प्लास्टिक सर्जनों ने ब्रिजर के चेहरे को ठीक करने में मदद की है। लेकिन हाल ही में आई तस्वीरों में जहाँ वह अपनी बहन को गले लगाते हुए दिखाई दे रहा है, उसका भाईचारा प्यार हमेशा की तरह मज़बूत बना हुआ है। 
आदर्श रूप से, परिवार के सदस्य हमारी देखभाल करते हैं । सच्चे भाई तब आगे आते हैं जब हम मुसीबत में होते हैं और जब हम डरे हुए या अकेले होते हैं तो हमारे साथ खड़े होते हैं। वास्तव में, हमारे सबसे अच्छे भाई भी अपूर्ण हैं; कुछ तो हमें चोट भी पहुँचाते हैं। हालाँकि, हमारा एक भाई है, जो हमेशा हमारे साथ रहता है, यीशु। इब्रानियों हमें बताता है कि मसीह, विनम्र प्रेम के एक कार्य के रूप में, मानव परिवार में शामिल हो गया, हमारे “मांस और लहू” को साझा किया और, “सब बातों में अपने भाइयों के समान [बना]” (2:14,17) l परिणामस्वरूप, यीशु हमारा सबसे सच्चा भाई है, और वह हमें अपना “भाई [और बहन]” कहकर प्रसन्न होता है (पद.11) l  
हम यीशु को अपने उद्धारकर्ता, मित्र और राजा के रूप में संदर्भित करते हैं—और इनमें से हर एक सत्य है l हालाँकि, यीशु हमारा भाई भी है जिसने हर मानवीय भय और प्रलोभन, हर निराशा या उदासी का अनुभव किया है l हमारा भाई हमेशा हमारे साथ खड़ा है l  
—विन कोलियर