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Articles by विन्न कॉलियर

गलतियों के बोझ को वहन करना

जनवरी 30, 2018 को अपने लगभग तीस साल के कारावास के पश्चात मल्कोम एलेक्जेंडर एक आज़ाद व्यक्ति के रूप में कारावास से बाहर निकले। डीएनए के प्रमाणों ने एलेक्जेंडर को मुक्त करवा दिया, जिसने कोर्ट की असंख्य कार्यवाहियों, जो बुरी तरह से अन्ययापूर्ण थीं, के दौरान उनकी निर्दोषता को बनाए रखा। एक अयोग्य सुरक्षा अधिकारी (जिसे बाद में उसके पद से हटा दिया गया) नकली प्रमाणों, और सन्देहात्मक जाँच ने एक निर्दोष व्यक्ति को लगभग चार दशकों तक कारावास में रखवा दिया था। अंततः जब उन्हें छोड़ा गया, फिर भी एलेक्जेंडर ने अत्यधिक दया दिखाई। “आप क्रोधित नहीं हो सकते,” उन्होंने कहा। “क्रोधित होने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं है।”  

एलेक्जेंडर के शब्द बहुत ही गहन अनुग्रह का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। यदि अन्याय ने हमारे जीवन के अड़तीस वर्षों को लूट लिया और हमारी प्रसिद्धि को बर्बाद कर दिया, तो हमारा क्रोध से जल उठना सम्भव है। परन्तु एलेक्जेंडर ने दिल को तोड़ देने वाले वर्ष गलतियों के उस बोझ को वहन करते हुए बिताए, जो उनपर डाला गया था, परन्तु वह बुराई के द्वारा परास्त नहीं किए गए थे। प्रतिशोध लेने के लिए अपनी उर्जा लगाने के स्थान पर उन्होंने वह अपनाया जिसका निर्देश हमें पतरस देता है: “बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो” (1 पतरस 3:9)।

पवित्रशास्त्र एक कदम आगे जाता है: प्रतिशोध लेने के स्थान पर, प्रेरित पतरस हमें बताता है कि हम आशीष देने के लिए हैं (पद 9) । हम उन लोगों के लिए क्षमा और भलाई की आशा प्रदान करते हैं, जिन्होंने अन्यायपूर्ण रीति से हमारे साथ गलत किया है। उनके बुरे कामों का बहाना बनाए बिना, हम उनके साथ परमेश्वर की चौंका देने वाली दया के साथ मिल सकते हैं। यीशु ने क्रूस पर हमारी गलतियों का बोझ उठा लिया, ताकि हम अनुग्रह प्राप्त कर सकें और इसे दूसरों को भी दिखा सकें-यहाँ तक कि उन्हें भी जिन्होंने हमारे साथ गलत किया है।   

साहस के साथ स्थिर रहना

जबकि (जर्मनी) कलीसिया के अनेक अगुवों ने हिटलर के सामने हार मान ली थी, थियोलौजियन(धर्मशास्त्री) और पासबान मार्टिन निमोल्लर उन बहादुर आत्माओं में से एक थे, जिन्होंने नाज़ी दुष्टता का विरोध किया था। मैंने एक घटना पढ़ी थी जिसमें 1970 में वृद्ध जर्मन लोगों का एक समूह एक बड़े होटल के बाहर खड़ा है, जबकि एक युवक उस समूह के सामान के साथ दौड़-धूप कर रहा है। किसी ने पूछा कि वह समूह किन लोगों का था। उत्तर आया “जर्मन पासबान” । “और वह युवक कौन था?” वह मार्टिन निमोल्लर थे-वह अस्सी वर्ष के थे। वह जवान बने रहे क्योंकि वह अभीत थे।”

निमोल्लर इसलिए भय का विरोध करने के योग्य नहीं थे क्योंकि उनमें भय से उनकी प्रतिरक्षा करने के लिए कुछ दिव्य वस्तु विद्यमान थी, परन्तु वह परमेश्वर के अनुग्रह के कारण ऐसे थे। वास्तव में एक समय में तो वह यहूदी विरोधी दृष्टिकोण तक रखते थे। परन्तु उन्होंने पश्चाताप किया और परमेश्वर ने उन्हें सम्भाला और परमेश्वर ने उन्हें आवाज़ उठाने और सत्य के लिए जीने में सहायता की।

मूसा ने इस्राएलियों को भय का विरोध करने और सत्य में परमेश्वर के पीछे चलने के लिए प्रोत्साहित किया। यह जानने के पश्चात कि मूसा को शीघ्र ही उनसे ले लिए जाएगा, वे भयभीत हो गए, तब उस अगुवे (में) बिना डरे उनके लिए ये शब्द थे: “तू हियाव बाँध और दृढ़ हो, उनसे न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलनेवाला तेरा परमेश्‍वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।” (व्यवस्थाविवरण 31:6) । मात्र एक ही कारण से एक अनिश्चित भविष्य के सामने काँपने का कोई भी कारण नहीं था: क्योंकि परमेश्वर उनके साथ था।  

चाहे कैसा भी अँधेरा आप पर हावी हो, चाहे कैसे भी खतरे आप पर हमला करें-परमेश्वर आपके साथ है। परमेश्वर की दया के द्वारा आप इस ज्ञान के साथ अपने भय का सामना कर सकते हैं कि “वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।” (पद 6, 8) ।

गलत सूचना के साथ कार्य करना

हाल ही में न्यूयार्क के एक भ्रमण पर मेरी पत्नी और मैं एक बर्फीली शाम को बाहर जाना और तीन मील दूर एक क्यूबन रेस्तरां में जाने के लिए एक टैक्सी लेना चाहते थे। टैक्सी सर्विस ऐप में समस्त विवरण देने के बाद मेरी साँस ही अटक गई जब मैंने हमारे छोटे से सफर के लिए स्क्रीन पर आए 1,547.26 के बिल को देखा। इस झटके से उबरने के बाद मैंने देखा कि मैंने कई मील दूर अपने घर के लिए गलती से टैक्सी की याचना कर दी थी!    

यदि आप गलत सूचना के साथ कार्य कर रहे हैं, तो आपको विनाशकारी परिणाम मिल सकते हैं। हमेशा। इसीलिए नीतिवचन हमें “अपना हृदय शिक्षा की ओर, और अपने कान ज्ञान की बातों की ओर लगाने”-परमेश्वर की बुद्धि की ओर लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है (नीतिवचन 23:12)। इसके स्थान पर यदि हम उन लोगों से परामर्श ले लेते हैं, जो मूर्ख हैं, वे जो ऐसा दिखाते हैं कि बहुत कुछ जानते हैं, परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है और जिन्होंने परमेश्वर की ओर पीठ मोड़ ली है, तो हम कठिनाई में पड़ जाएँगे। वे “बुद्धि के वचनों को तुच्छ...” जानते हैं और हमें असहायक, गलत दिशा वाली या धोखे से भरी हुई सलाह के साथ बर्बादी की ओर ले जा सकते हैं (पद 9) ।

इसके स्थान पर हम “अपने कान ज्ञान की बातों की ओर” लगा सकते हैं (पद 12) । हम अपने दिल को खोल और परमेश्वर की आज़ाद करने वाले निर्देशों, स्पष्टता और आशा के वचनों को प्राप्त कर सकते हैं। जब हम उन लोगों की सुनते हैं, जो परमेश्वर के गहरे मार्गों को जानते हैं, तो वे हमें परमेश्वर की बुद्धि को प्राप्त करने और उस पर चलने में सहायता करते हैं। और परमेश्वर की बुद्धि हमें कभी विनाश की ओर नहीं ले जाएगी परन्तु हमें सर्वदा जीवन और पूर्णता की ओर ले कर जाती और इसके लिए प्रोत्साहित करती है। 

अनुग्रह में डूबना

अंततः, जनवरी 8, 1964 में सत्रह साल के रैंडी गार्डनर (ने) वह किया जो उसने ग्यारह दिन और पच्चीस मिनट से नहीं किया था : वह सो गया। वह गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड का रिकार्ड तोड़ना चाहता था कि मानव शरीर कितने समय तक जागता रह सकता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने और बास्केटबाल कोर्ट में खेलने और बॉलिंग ऐली- एक विशेष प्रकार का खेल खेलने के द्वारा नींद को डेढ़ सप्ताह तक रोक दिया था। आखिरकार (एकाएक) गिरने से पहले, उसके चखने, सूँघने और सुनने की सम्वेदना गड़बड़ा गई थीं। दशकों बाद, वेवह) अनेक बार अनिद्रा रोग से पीड़ित हुआ। उसने रिकॉर्ड तो बना दिया था परन्तु यह साफ़ कर दिया: नींद बहुत जरूरी है।      

हम में से अनेक रात के अच्छे आराम के लिए संघर्ष करते हैं। गार्डनर से हटकर, जिसने जानबूझकर स्वयं को नीदं से वंचित किया, हम भी कुछ कारणों से अनिद्रा से पीड़ित हो सकते हैं-जिसमें चिन्ताओं के पहाड़, जो हम प्राप्त करना चाहते हैं (उसका भय), दूसरों की अपेक्षाओं का भय और उन्मत्त हो कर जीने की कठिनाई शामिल है। कई बार हमारे लिए भय को छोड़ देना और आराम से रहना कठिन हो जाता है।

भजनकार हमें बताता है कि “यदि घर को यहोवा न बनाए,” तो हम व्यर्थ में ही परिश्रम करते हैं (भजन संहिता 127:1)। यदि जो कुछ हमें चाहिए, परमेश्वर उपलब्ध न करवाए, तो हमारा परिश्रम और हमारे भरसक प्रयास व्यर्थ हैं। धन्यवादित हों, कि परमेश्वर वह उपलब्ध करवाता है, जिसकी हमें आवश्यकता होती है। “वह अपने प्रियों को योंही नींद प्रदान करता है” (पद 2) । और परमेश्वर का प्रेम हम सभी के लिए है। वह हमें अपनी चिन्ताओं को उस पर डाल देने और उसके विश्राम और उसके अनुग्रह में डूब जाने का आमन्त्रण देता है।

आकाश को फाड़ दो

हाल ही में हुए एक वार्तालाप में मेरी एक मित्र ने मुझे बताया कि उसने अपने विश्वास को त्याग दिया है, मैंने एक जानी-पहचानी शिकायत सुनी: मैं एक ऐसे परमेश्वर पर कैसे विशवास कर सकती हूँ, जो कुछ करता हुआ ही प्रतीत नहीं होता है? हिला देने वाला यह प्रश्न हम में से सभी के सामने कभी न कभी अवश्य आता है, जब हम समाचारों में हिंसा के बारे में पढ़ते हैं, जब हम अपने ही दुःख को लिए फिरते हैं। मेरी दोस्त के दुःख ने उसकी परमेश्वर की उसके लिए कार्य करने गहन आवश्यकता को प्रदर्शित किया, यह एक ऐसी लालसा है, जिसे लगभग हम सभी महसूस करते हैं।  

इस्राएल इस मार्ग को अच्छी रीति से जानता था। बेबीलोन के साम्राज्य ने उसे बर्बाद कर दिया था, उन्हें लोहे के घूंसे से चूर-चूर कर दिया था और यरूशलेम को धूआं देते हुए एक ढेर में बदल दिया था। नबी यशायाह लोगों की गहन शंका के ये शब्द डालता है: वह परमेश्वर कहाँ है जिसे हमें बचाना था? (यशायाह 63:11-15) । और ठीक इसी स्थान से यशायाह एक साहसपूर्ण प्रार्थना करता है: “भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए” (64:1)। यशायाह की पीड़ा और दुःख उसे परमेश्वर दूर नहीं ले गए, अपितु उसे खोजने और उसके समीप आने की ओर ले कर गए।

हमारे संदेह और संघर्ष हमें यह अनोखा उपहार देते हैं: यह दिखाते हैं कि हम कितने खोए हुए हैं और हमें कितनी आवश्यकता है कि परमेश्वर हमारी तरफ आए। हम एक अनूठी और असम्भव घटना को देखते हैं। यीशु में, परमेश्वर ने वास्तव में आकाश को फाड़ा और हमारे पास आ गया। मसीह ने अपनी फाड़ दी गई और टूटी हुई देह दे दी ताकि वह हमें अपने प्रेम से अभिभूत कर सके। यीशु में परमेश्वर अति निकट है।  

हमारा स्वागत करने वाला परमेश्वर

हमारी कलीसिया एक पुराने प्राथमिक विद्यालय में इकठ्ठी होती है, जो स्कूल यूएस न्यायालय के एक आदेश (अफ्रीकी अमरीकी विद्यार्थियों को उस स्कूल में आने देने का था, जिसमें पहले मात्र अमेरीकी विद्यार्थी ही आते थे) को न मानने के कारण 1958 में बन्द हो गया थाl अगले वर्ष, स्कूल दोबारा खुला और एल्वा, हमारी कलीसिया की एक सदस्य, उन अश्वेत विद्यार्थियों में से एक थी, जिन्हें एक श्वेत संसार में धकेल दिया गया थाl “मुझे मेरे सुरक्षित समुदाय के साथ-साथ उन शिक्षकों, जो मेरे जीवन का एक हिस्सा थे, से बाहर निकाल कर केवल एक अन्य अश्वेत विद्यार्थी के साथ एक कक्षा के भयावह वातावरण में डाल दिया” एल्वा स्मरण करती हैl एल्वा ने कष्ट उठाया, क्योंकि वह भिन्न थी, परन्तु वह साहस, विशवास और क्षमा करने वाली एक महिला बनीl   

उसकी गवाही अत्यन्त गम्भीर है, क्योंकि उसने समाज के कुछ सदस्यों के हाथों बहुत बुराई को सहन किया, जिस समाज ने इस सत्य को अस्वीकार कर दिया था कि प्रत्येक मनुष्य को, नस्ल और विरासत पर ध्यान दिए बिना, परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया जाता हैl आरम्भिक कलीसिया के कुछ स्स्दस्यों ने इसी सत्य के साथ संघर्ष किया, उन्होंने इस बात पर विश्वास किया कि कुछ लोगों को जन्म के कारण ही परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया जाता है, जबकि दूसरों को अस्वीकार कर दिया जाता हैl एक दिव्य प्रकाशन प्राप्त होने के पश्चात, पतरस ने सभी को हैरान कर दिया, जिसने उसके इस चौंका देने वाले प्रकाशन को सुना: “अब मुझे निश्‍चय हुआ कि परमेश्‍वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन् हर जाति में जो उससे डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है (प्रेरितों के काम 10:34-35)l

परमेश्वर अपने प्रेम को प्रत्येक व्यक्ति की ओर बढ़ाने के लिए अपनी बाहें फैलाता हैl प्रभु करे कि उसकी सामर्थ्य में होकर हम भी वैसा ही करेंl