Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by विन्न कॉलियर

एक दुखद कहानी

यह दुखद है, एक ख़ास बुराई जो लम्बे समय से लोगों से छिपाया जाता रहा है – अनेक स्त्रियों का उन पुरुषों द्वारा यौन शोषण जो उनपर अधिकार रखते थे – अब उजागर हो गया है l एक के बाद एक स्थायी हैडलाइन, दो लोग जिनका मैं प्रशंसक था के विषय शोषण करने का सबुत सुनकर मेरा हृदय बैठ गया l चर्च इन मामलों के विषय प्रभावशून्य(immune) नहीं रही है l

राजा दाऊद ने अपने हिसाब किताब का सामना किया l शमूएल हमें बताता है कि एक दिन दोपहर के समय, दाऊद को “ एक स्त्री . . . नहाती हुए देख पड़ी” (2 शमूएल 11:2) l और दाऊद ने उसकी अभिलाषा की l यद्यपि बतशेबा उसके एक वफादार सिपाही(ऊरिय्याह) की पत्नी थी, बावजूद इसके दाऊद ने उसे ले लिया l बेतशेबा के दाऊद को बताने पर कि वह गर्भवती है, वह घबरा गया l और दाऊद ने धोखे के एक घृणित कार्य के अंतर्गत, योआब द्वारा ऊरिय्याह को युद्ध में ही मरवा दिया l

दाऊद का बेतशेबा और ऊरिय्याह के विरुद्ध अपने अधिकार का दुरूपयोग किसी भी प्रकार से छिपा हुआ नहीं है l शमूएल निश्चित तौर से चाहता है कि हम इस पूरी घटना को जानें l हमें अपने पाप से पेश आना होगा l

और, हमें इन कहानियों को सुनना भी होगा क्योंकि यह हमें हमारे समय में अधिकार के दुरूपयोग के प्रति चिताते हैं l यह दाऊद था, “एक मनुष्य [परमेश्वर] के मन के अनुसार” (प्रेरितों 13:22), परन्तु एक ऐसा व्यक्ति भी जिसे उसके कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना ज़रूरी था l हम भी प्रार्थनापूर्वक अगुओं को उनके अधिकार के उपयोग या दुरूपयोग के लिए जिम्मेदार ठहरा सकें l

परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा, छुटकारा संभव है l यदि हम आगे पढ़ें, हम दाऊद के गंभीर पश्चाताप का सामना करते हैं (2 शमूएल 12:13) l हम धन्यवादित हों, कि आज भी हृदय मृत्यु से जीवन को ओर मुड़ सकते हैं l

चीजों को सम्पूर्ण बनाना

एक डाक्यूमेंट्री(दस्तावेज़ी फिल्म) लुक एंड सी : वेन्डेल बेरी का चित्र(Look & See: A Portrait of Wendell Berry), में रचयिता बेरी कहते हैं कि किस तरह तलाक हमारे संसार की स्थिति की व्याख्या करता है l हम एक दूसरे से,  हमारे इतिहास से, देश से, अलग किये जाते हैं l चीजें जिन्हें सम्पूर्ण रहना चाहिए था खंडित की जाती हैं l जब हमसे पुछा जाता है कि इस दुखद सच्चाई के विषय हमें क्या करना चाहिए, बेरी ने कहा, “हम सभी बातों को पुनः सम्पूर्ण नहीं बना सकते हैं l हम केवल दो चीजों को लेते हैं और उन्हें एक कर देते हैं l” हम दो खंडित चीजें को लेकर उन्हें एक बना देते हैं l

“धन्य हैं वे, जो मेल करानेवाले हैं,” यीशु ने हमसे कहा (मत्ती 5:9) l मेल कराने का अर्थ है शालोम लाना l और शालोम का सन्दर्भ संसार को सही करना है l एक धर्मवैज्ञानिक शालोम को इस प्रकार चित्रित करता है “विश्वव्यापी खुशहाली, सम्पूर्णता और सुख . . . l [यह] वैसा है जैसे चीजों को होना चाहिए l” शालोम खंडित को लेकर सम्पूर्ण बनाना है l यीशु के मार्गदर्शन अनुसार, हम भी चीजों को सही करने का प्रयत्न करें l वह हमें मेल करानेवाले, “पृथ्वी का नमक” और “जगत की ज्योति” बनने की चुनौती देता है (पद.13-14) l

संसार में मेल करानेवाले बनने के बहुत तरीके हैं, प्रतिदिन हम टूटेपन से संघर्ष करें न कि उसके आगे हार मान लें l परमेश्वर की सामर्थ्य में, हम किसी मित्रता को नहीं टूटने देने या संघर्ष कर रहे किसी पड़ोस को कमजोर न होने देने, या बेपरवाही और अकेलापन का चुनाव न करें l टूटे स्थानों को ढूंढें, भरोसा करते हुए कि परमेश्वर उनको पुनः सम्पूर्ण बनाने में हमें बुद्धि और कौशल देगा l

परमेश्वर अधिक सामर्थी है

एक दक्षिण अफ़्रीकी आखेट निरीक्षक, गाइल्स केल्मैनसन, एक अविश्वसनीय दृश्य का वर्णन करता है : दो बिज्जू (Honey badgers) छः शेरों के समूह का सामना कर रहे थे l संख्या में कम होने के बावजूद, बिज्जू हिंसक परभक्षी शरों से पीछे नहीं हटे जो उनसे आकर में दस गुना बड़े थे l शेरों ने सोचा था शिकार आसान होगा, परन्तु विडिओ फुटेज में बिज्जू कुछ चीज़ को लेकर इठलाते हुए जाते दिखायी दिए l 

दाऊद और गोलियात इससे भी अधिक असम्भव कहानी पेश करते हैं l युवा, अनुभवहीन दाऊद भयंकर पलिस्ती गोलियात का सामना करता हैं l इस युवा योद्धा से अत्यंत प्रचंड, गोलियात के पास शारीरिक शक्ति और बेमिसाल हथियार थे – काँस्य का कवच और घातक, धारदार बरची/भाला (1 शमूएल 17:5-6) l दाऊद, एक अनुभवहीन चरवाहा, के पास केवल एक गोफन था जब वह अपने भाइयों के लिए रोटी और पनीर की टिकियाँ लेकर युद्ध के मैदान में पहुँचा (पद.17-18) l

गोलियात ने इस्राएल को लड़ने के लिए ललकारा, परन्तु कोई भी लड़ने के लिए तैयार नहीं था l राजा शाऊल और “और समस्त [इस्राएली] . . . अत्यंत डर गए” (पद.11) l उस दहशत की कल्पना करें जब दाऊद युद्ध में शामिल हुआ l किस ने उसे वह साहस दीया जो किसी भी इस्राएली योद्धा के पास नहीं था? ज्यादातर सभी के लिए, गोलियात उनकी सोच पर हावी था l हालांकि, दाऊद ने परमेश्वर को देखा l वह दृढ़ता से बोला, “यहोवा [गोलियात] को मेरे हाथ में कर देगा” (पद.46) l जबकि बाकी सभी लोग को भरोसा था कि इस कहानी पर गोलियात का नियंत्रण था, उसका विश्वास था कि परमेश्वर अधिक सामर्थी है l और, दाऊद उस भीमकाय व्यक्ति के माथे पर पत्थर से ऐसा मारा कि वह भीतर घुस गया l इस तरह दाऊद का विश्वास सच्चा साबित हुआ l

हमारे पास यह विश्वास करने की परीक्षा आती है कि “गोलियात” (हमारी परेशानियां) कहानी को संचालित करती हैं l परन्तु, परमेश्वर सामर्थी है l वह हमारे जीवनों की कहानी पर प्रभुत्व करता है l

पर्दा/आवरण हटाना

एक क्रूर कार एक्सीडेंट ने मैरी ऐन फ्रैंको को तबाह कर दिया l यद्यपि वह बच गयी, चोट ने पूरी तौर से उसकी दृष्टि छीन ली l “फ्रैंको ने समझाया, “मैं केवल अंधकार को देख सकती थी l” इक्कीस वर्ष बाद, गिरने के कारण उसकी पीठ को चोट पहुंची l सर्जरी से होश आने पर (जिसका उसके आँखों से कोई लेना-देना नहीं था), आश्चर्यजनक रूप से, उसकी दृष्टि लौट आई! दो दशकों से अधिक समय में पहली बार, फ्रैंको ने अपनी बेटी का चेहरा देखा l न्यूरोसर्जन ने दृढ़ता से कहा कि उसकी दृष्टि के लौटने के लिए कोई वैगानिक स्पष्टीकरण नहीं है l वह अंधकार जो अंतिम दिखाई देता था ने खूबसूरती और ज्योति को रास्ता दिया l

बाइबल, के साथ हमारा अनुभव भी, हमें बताते हैं कि अज्ञानता और बुराई का पर्दा संसार को ढांके हुए है, हम सब को परमेश्वर के प्रेम के प्रति अँधा कर दिया है (यशायाह 25:7) l स्वार्थ और लालच, हमारी आत्मनिर्भरता, शक्ति या पद के लिए हमारी लालसा – ये सब विवशताओं ने हमारी दृष्टि को धुंधली कर दी है, जिससे हम उस परमेश्वर को स्पष्ट से देखने में असमर्थ है जिसने “आश्चर्यकर्म किये हैं” (पद.1) l

बाइबल का एक अनुवाद दृष्टिहीन करनेवाले इस परदे को “निराशा का पर्दा” कहता है(NLT l हम अपने आप में, केवल अन्धकार, भ्रम, और निराशा का अनुभव करते हैं l हम अक्सर खुद को फंसे हुए – अँधेरे में टटोलते और गिरते हुए पाते हैं, अपने आगे के मार्ग को देखने में असमर्थ हैं l धन्यवाद हो, यशायाह प्रतिज्ञा देता है कि “जो पर्दा सब देशों के लोगों पर पड़ा है, उसे” परमेश्वर आख़िरकार “नष्ट करेगा” (पद.7) l

परमेश्वर हमें आशाहीन नहीं छोड़ेगा l उसका दीप्तिमान प्रेम हमें दृष्टिहीन करनेवाली सब बैटन को हटाता है, हमें अच्छे जीवन और बहुतायत के अनुग्रह की खुबसूरत दृष्टि से चकित करता है l

साहस के प्रति आह्वान

लन्दन के पार्लियामेंट स्क्वायर में प्रदर्शित पुरुष प्रतिमाओं (नेल्सन मंडेला, विंस्टन चर्चिल, महात्मा गाँधी, और अन्य) के मध्य, एक अकेली महिला की भी प्रतिमा है l यह अकेली महिला मिल्लिसेंट फॉसेट है, जिसने स्त्रियों के वोट देने के अधिकार के लिए संघर्ष किया था l उसे ताम्बे/कांस्य में अमर कर दिया गया है – एक बैनर को थामी हुयी जिसपर उनके वे शब्द प्रदर्शित हैं जो उन्होंने श्रधांजलि के रूप में सह नारीमतार्थी(स्त्रियों के लिए राजनैतिक मताधिकार का समर्थक) को पेश किया था : “साहस हर जगह साहस का आह्वान करता है l” फॉसेट ने ज़ोर दिया कि एक व्यक्ति का साहस दूसरों को साहसी बनाता है – भीरु आत्माओं को क्रिया करने के लिए आह्वान करता है l

जब दाऊद ने अपने पुत्र सुलेमान को अपनी राजगद्दी देने की तैयारी की, उसने उन उत्तरदायित्वों को समझाया जो शीघ्र ही उसके कांधों पर भारी पड़ने वाले थे l हो सकता है सुलेमान ने जिनका सामना किया वह उस भार के तहत परेशान हुआ होगा अर्थात् परमेश्वर के निर्देशों को मानने के लिए इस्राएल का नेतृत्व करना, परमेश्वर द्वारा सुपुर्द देश की सुरक्षा करना, और मंदिर के बड़े निर्माण कार्य का प्रबंध एवं निरीक्षण करना (1 इतिहास 28:8-10) l

सुलेमान के घबराए हुए हृदय के विषय जानकार, दाऊद ने अपने पुत्र को ये सामर्थी शब्द दिए : “हियाव बाँध और दृढ़ [हो जा] . . . मत डर, और तेरा मन कच्चा न हो, क्योंकि यहोवा परमेश्वर जो मेरा परमेश्वर है, वह तेरे संग है” (पद.20) l वास्तविक सामर्थ्य कभी भी सुलेमान की अपनी कुशलता या भरोसे से नहीं आनेवाली थी परन्तु इसके बदले परमेश्वर की उपस्थिति और सामर्थ्य पर भरोसा करके l परमेश्वर ने सुलेमान को उसके ज़रूरत के अनुसार साहस दिया l

जब हम कठिनाई का सामना करते हैं, तो हम अक्सर साहस का ढोल पीटने की कोशिश करते हैं या खुद बहादुरी की बात करते हैं। हालाँकि, परमेश्वर, ही है जो हमारे विश्वास को नूतन करता है l वह हमारे साथ रहेगा l और उसकी उपस्थिति साहस के प्रति हमारा आह्वान करती रहेगी l

अनापेक्षित विजेता

शायद 2018 शरद् ओलंपिक में सबसे अद्भुत, मंत्रमुग्ध करने वाला क्षण वह था जब चेक गणराज्य की विश्व विजेता स्नोबोर्डेर(बर्फ की ढाल पर पट्टी पर खड़े होकर फिसलने वाली) एस्टर लेडेका ने बिलकुल भिन्न स्पोर्ट्[खेल-कूद] : स्कीइंग में जीत हासिल की l और उसने प्रथम-स्थान स्वर्ण पदक जीत लिया यद्यपि उसके पास स्कीइंग का अनभिलाषित 26वाँ स्थान  था - उपलब्धि जिसे बुनियादी रूप से असंभव माना जाता है l

आश्चर्यजनक रूप से, लेडेका महिलाओं का सूपर-G दौड़ - एक प्रतियोगिता जिसमें ढलान पर स्की करने के साथ स्लालोम कोर्स(सर्पिलाकार रास्ते पर स्की दौड़) सम्मिलित होता है - के लिए अहर्ता प्राप्त कर ली l वह उधार ली हुयी स्की द्वारा एक सेकंड के 0.1 भाग से जीत गयी, वह उतनी ही चकित थी जितना मीडिया और दूसरे प्रतियोगी थे जिन्होंने किसी सर्वोत्तम स्की करनेवाला के विजेता होने का अनुमान लगाया था l

संसार इसी प्रकार कार्य करता है l हम विजेताओं के निरंतर जीतने का आंकलन लगाते हैं जबकि दूसरे सभी हारेंगे l उस समय भी वह एक झटका था, जब शिष्यों ने यीशु को कहते हुए सुना “धनवान का स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करना [कितना] कठिन है” मत्ती 19:२३) l यीशु ने सबकुछ उल्टा कर दिया l किस तरह धनवान (एक विजेता) होना रुकावट हो सकता है? प्रत्यक्ष रूप से, यदि हम उन चीजों में भरोसा करते हैं जो हमारे पास हैं (जो हम कर सकते हैं, जो हम हैं), तब यह न केवल कठिन परन्तु वास्तव में परमेश्वर पर भरोसा करना असंभव बना देता है l

परमेश्वर के राज्य में हमारे नियम कानून नहीं चलते हैं l यीशु कहते हैं, “बहुत से जो पहले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, पहले होंगे” (पद.30) l और, चाहे आप पहले हैं या अंतिम, हम सबकुछ केवल अनुग्रह से प्राप्त करते हैं-परमेश्वर की कृपा से जिसके लिए हमने कीमत नहीं चुकाई है l

गलतियों के बोझ को वहन करना

जनवरी 30, 2018 को अपने लगभग तीस साल के कारावास के पश्चात मल्कोम एलेक्जेंडर एक आज़ाद व्यक्ति के रूप में कारावास से बाहर निकले। डीएनए के प्रमाणों ने एलेक्जेंडर को मुक्त करवा दिया, जिसने कोर्ट की असंख्य कार्यवाहियों, जो बुरी तरह से अन्ययापूर्ण थीं, के दौरान उनकी निर्दोषता को बनाए रखा। एक अयोग्य सुरक्षा अधिकारी (जिसे बाद में उसके पद से हटा दिया गया) नकली प्रमाणों, और सन्देहात्मक जाँच ने एक निर्दोष व्यक्ति को लगभग चार दशकों तक कारावास में रखवा दिया था। अंततः जब उन्हें छोड़ा गया, फिर भी एलेक्जेंडर ने अत्यधिक दया दिखाई। “आप क्रोधित नहीं हो सकते,” उन्होंने कहा। “क्रोधित होने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं है।”  

एलेक्जेंडर के शब्द बहुत ही गहन अनुग्रह का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। यदि अन्याय ने हमारे जीवन के अड़तीस वर्षों को लूट लिया और हमारी प्रसिद्धि को बर्बाद कर दिया, तो हमारा क्रोध से जल उठना सम्भव है। परन्तु एलेक्जेंडर ने दिल को तोड़ देने वाले वर्ष गलतियों के उस बोझ को वहन करते हुए बिताए, जो उनपर डाला गया था, परन्तु वह बुराई के द्वारा परास्त नहीं किए गए थे। प्रतिशोध लेने के लिए अपनी उर्जा लगाने के स्थान पर उन्होंने वह अपनाया जिसका निर्देश हमें पतरस देता है: “बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो” (1 पतरस 3:9)।

पवित्रशास्त्र एक कदम आगे जाता है: प्रतिशोध लेने के स्थान पर, प्रेरित पतरस हमें बताता है कि हम आशीष देने के लिए हैं (पद 9) । हम उन लोगों के लिए क्षमा और भलाई की आशा प्रदान करते हैं, जिन्होंने अन्यायपूर्ण रीति से हमारे साथ गलत किया है। उनके बुरे कामों का बहाना बनाए बिना, हम उनके साथ परमेश्वर की चौंका देने वाली दया के साथ मिल सकते हैं। यीशु ने क्रूस पर हमारी गलतियों का बोझ उठा लिया, ताकि हम अनुग्रह प्राप्त कर सकें और इसे दूसरों को भी दिखा सकें-यहाँ तक कि उन्हें भी जिन्होंने हमारे साथ गलत किया है।   

साहस के साथ स्थिर रहना

जबकि (जर्मनी) कलीसिया के अनेक अगुवों ने हिटलर के सामने हार मान ली थी, थियोलौजियन(धर्मशास्त्री) और पासबान मार्टिन निमोल्लर उन बहादुर आत्माओं में से एक थे, जिन्होंने नाज़ी दुष्टता का विरोध किया था। मैंने एक घटना पढ़ी थी जिसमें 1970 में वृद्ध जर्मन लोगों का एक समूह एक बड़े होटल के बाहर खड़ा है, जबकि एक युवक उस समूह के सामान के साथ दौड़-धूप कर रहा है। किसी ने पूछा कि वह समूह किन लोगों का था। उत्तर आया “जर्मन पासबान” । “और वह युवक कौन था?” वह मार्टिन निमोल्लर थे-वह अस्सी वर्ष के थे। वह जवान बने रहे क्योंकि वह अभीत थे।”

निमोल्लर इसलिए भय का विरोध करने के योग्य नहीं थे क्योंकि उनमें भय से उनकी प्रतिरक्षा करने के लिए कुछ दिव्य वस्तु विद्यमान थी, परन्तु वह परमेश्वर के अनुग्रह के कारण ऐसे थे। वास्तव में एक समय में तो वह यहूदी विरोधी दृष्टिकोण तक रखते थे। परन्तु उन्होंने पश्चाताप किया और परमेश्वर ने उन्हें सम्भाला और परमेश्वर ने उन्हें आवाज़ उठाने और सत्य के लिए जीने में सहायता की।

मूसा ने इस्राएलियों को भय का विरोध करने और सत्य में परमेश्वर के पीछे चलने के लिए प्रोत्साहित किया। यह जानने के पश्चात कि मूसा को शीघ्र ही उनसे ले लिए जाएगा, वे भयभीत हो गए, तब उस अगुवे (में) बिना डरे उनके लिए ये शब्द थे: “तू हियाव बाँध और दृढ़ हो, उनसे न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलनेवाला तेरा परमेश्‍वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।” (व्यवस्थाविवरण 31:6) । मात्र एक ही कारण से एक अनिश्चित भविष्य के सामने काँपने का कोई भी कारण नहीं था: क्योंकि परमेश्वर उनके साथ था।  

चाहे कैसा भी अँधेरा आप पर हावी हो, चाहे कैसे भी खतरे आप पर हमला करें-परमेश्वर आपके साथ है। परमेश्वर की दया के द्वारा आप इस ज्ञान के साथ अपने भय का सामना कर सकते हैं कि “वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा।” (पद 6, 8) ।

गलत सूचना के साथ कार्य करना

हाल ही में न्यूयार्क के एक भ्रमण पर मेरी पत्नी और मैं एक बर्फीली शाम को बाहर जाना और तीन मील दूर एक क्यूबन रेस्तरां में जाने के लिए एक टैक्सी लेना चाहते थे। टैक्सी सर्विस ऐप में समस्त विवरण देने के बाद मेरी साँस ही अटक गई जब मैंने हमारे छोटे से सफर के लिए स्क्रीन पर आए 1,547.26 के बिल को देखा। इस झटके से उबरने के बाद मैंने देखा कि मैंने कई मील दूर अपने घर के लिए गलती से टैक्सी की याचना कर दी थी!    

यदि आप गलत सूचना के साथ कार्य कर रहे हैं, तो आपको विनाशकारी परिणाम मिल सकते हैं। हमेशा। इसीलिए नीतिवचन हमें “अपना हृदय शिक्षा की ओर, और अपने कान ज्ञान की बातों की ओर लगाने”-परमेश्वर की बुद्धि की ओर लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है (नीतिवचन 23:12)। इसके स्थान पर यदि हम उन लोगों से परामर्श ले लेते हैं, जो मूर्ख हैं, वे जो ऐसा दिखाते हैं कि बहुत कुछ जानते हैं, परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है और जिन्होंने परमेश्वर की ओर पीठ मोड़ ली है, तो हम कठिनाई में पड़ जाएँगे। वे “बुद्धि के वचनों को तुच्छ...” जानते हैं और हमें असहायक, गलत दिशा वाली या धोखे से भरी हुई सलाह के साथ बर्बादी की ओर ले जा सकते हैं (पद 9) ।

इसके स्थान पर हम “अपने कान ज्ञान की बातों की ओर” लगा सकते हैं (पद 12) । हम अपने दिल को खोल और परमेश्वर की आज़ाद करने वाले निर्देशों, स्पष्टता और आशा के वचनों को प्राप्त कर सकते हैं। जब हम उन लोगों की सुनते हैं, जो परमेश्वर के गहरे मार्गों को जानते हैं, तो वे हमें परमेश्वर की बुद्धि को प्राप्त करने और उस पर चलने में सहायता करते हैं। और परमेश्वर की बुद्धि हमें कभी विनाश की ओर नहीं ले जाएगी परन्तु हमें सर्वदा जीवन और पूर्णता की ओर ले कर जाती और इसके लिए प्रोत्साहित करती है।