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Articles by सोचितल डिक्सॉन

परमेश्वर का महान प्रेम चक्र

तीस वर्ष की उम्र में यीशु में एक नए विश्वासी के रूप में, अपना जीवन उन्हें समर्पित करने के बाद मेरे पास बहुत सारे प्रश्न थे l जब मैंने बाइबल पढ़ना आरम्भ किया, तो मेरे पास और भी अधिक प्रश्न थे l मैं एक सहेली के पास गयी l “मैं संभवतः: परमेश्वर की सभी आज्ञाओं का पालन कैसे कर सकती हूँ? मैं आज सुबह ही अपने पति पर चिल्लायी हूँ!”

“बस अपनी बाइबल पढ़ती रहो,” उसने का, “और पवित्र आत्मा से तुम्हें सहायता करने के लिए कहो जैसे यीशु तुमसे प्यार करता है l

परमेश्वर की संतान के रूप में बीस वर्षों से अधिक जीवन जीने के बाद, वह सरल लेकिन गहन सत्य अभी भी मुझे उनके महान प्रेम चक्र में तीन चरणों को अपनाने में मदद करता है : सबसे पहले, प्रेरित पौलुस ने पुष्टि की कि प्रेम यीशु में विश्वास करने वाले के जीवन में प्रमुख है l दूसरा, “एक दूसरे से प्रेम करने का ऋण” चुकाते रहने से, मसीह के अनुयायी आज्ञाकारिता में चलेंगे, “क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है” (रोमियों 13:8) l अंत में, हम व्यवस्था को पूरी करते हैं क्योंकि “प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता” (पद.10) l

जब हम अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम की गहराई का अनुभव करते हैं, जिसे क्रूस पर मसीह के बलिदान के द्वारा सर्वोत्तम रूप से प्रदर्शित किया गया है, हम कृतज्ञता के साथ प्रतिक्रिया दे सकते हैं l यीशु के प्रति हमारी कृतज्ञ भक्ति हमें अपने शब्दों, कार्यों और व्यवहारों से दूसरों से प्रेम करने की ओर ले जाती है l सच्चा प्रेम एक सच्चे परमेश्वर से प्रवाहित होता है जो प्रेम है (1 यूहन्ना 4:16,19) l

प्रिय परमेश्वर, हमें आपके महान प्रेम चक्र में जकड़ जाने में सहायता करें! सोचिल डिक्सन

 

इच्छुक उद्धारकर्ता

देर रात गाड़ी चलाते समय निकोलस ने देखा कि एक घर में आग लगी हुई है। उसने रास्ते में गाड़ी पार्क की, जलते हुए घर में घुस गया और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर ले आया। जब बच्चों की किशोरी दाई को एहसास हुआ कि भाई-बहनों में से एक अभी भी अंदर है, तो उसने निकोलस को बताया। बिना किसी हिचकिचाहट के, वह आग में फिर से गया। छह साल की बच्ची के साथ दूसरी मंजिल पर फंसे निकोलस ने खिड़की तोड़ दी। जैसे ही आपातकालीन टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, वह बच्चे को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान पर कूद गया। खुद से ज्यादा दूसरों की चिंता करते हुए उसने सभी बच्चों को बचा लिया।

दूसरों की खातिर अपनी सुरक्षा का त्याग करने की इच्छा से निकोलस ने वीरता का प्रदर्शन किया। प्रेम का यह शक्तिशाली कार्य एक अन्य इच्छुक बचानेवाले—यीशु—द्वारा दिखाए गए त्यागपूर्ण प्रेम को दर्शाता है, जिसने हमें पाप और मृत्यु से बचाने के लिए अपना जीवन दे दिया। "क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।" (रोमियों 5:6)। प्रेरित पौलुस ने इस बात पर जोर दिया कि यीशु—जो देह में पूर्ण रूप से परमेश्वर और पूर्ण रूप से मनुष्य है—ने अपना जीवन देकर हमारे पापों की कीमत चुकाने का चुनाव किया, एक ऐसी कीमत जिसे हम कभी भी अपने आप से नहीं चुका सकते थे। "परमेश्वर हम पर अपने प्रेम कि भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी हि थे तभी मसीह हमारे लिए मारा" (पद.8)।

जब हम अपने इच्छुक उद्धारकर्ता, यीशु को धन्यवाद देते हैं और उस पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें अपने शब्दों और कार्यों से दूसरों से त्यागपूर्ण प्रेम करने के लिए सशक्त बना सकता है। सोचिल डिक्सन

आशा पाना

समुद्र विज्ञानी सिल्विया अर्ल ने मूँगा-चट्टान को नष्ट होते प्रत्यक्ष रूप से देखा है। उन्होंने मिशन ब्लू की स्थापना की, जो विश्वव्यापी "होप स्पॉट्स" के विकास के लिए समर्पित एक संगठन है। दुनिया भर में ये विशेष स्थान "समुद्र के संकटमय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण" हैं, जो पृथ्वी पर हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इन क्षेत्रों की साभिप्राय देखभाल के द्वारा, वैज्ञानिकों ने पानी के भीतर समुदायों के संबंधों को बहाल होते और विलोप होने वाली प्रजातियों के जीवन को संरक्षित होते देखा है।

भजन संहिता संहिता 33 में, भजन संहिताकार स्वीकार करता है कि यहोवा के वचन से सब कुछ बना और यह सुनिश्चित किया कि उसने जो कुछ बनाया वह स्थिर रहेगा (पद.6-9)। चूँकि परमेश्वर पीढ़ी से पीढ़ी तक और राष्ट्रों पर शासन करता है (पद.11-19), वह अकेले ही रिश्तों को बहाल करता है, जीवन बचाता है,और आशा को पुनर्जीवित करता है। हालाँकि, परमेश्वर हमें दुनिया और उसके द्वारा बनाए गए लोगों की देखभाल में उसके साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।

हर बार जब हम बादलों, धूसर आकाश में बिखरे इंद्रधनुष की दमक या चट्टानी तट से टकराती समुद्र की चमकदार लहरों के लिए परमेश्वर की स्तुति करते हैं, तो हम उसके "अचूक प्रेम" और उपस्थिति की घोषणा कर सकते हैं क्योंकि उस पर "हमारी आशा है" (पद 22)lजब हम दुनिया की वर्तमान स्थिति पर विचार करते हुए निराशा या भय की ओर प्रलोभित होते हैं, तो हम यह मानना शुरू कर सकते हैं कि हम कोई फर्क नहीं डाल सकते। हालाँकि, जब हम परमेश्वर की देखभाल करने वाली टीम के सदस्यों के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं, तो हम उसे सृष्टिकर्ता के रूप में सम्मान दे सकते हैं और दूसरों को आशा खोजने में मदद कर सकते हैं क्योंकि वे यीशु पर अपना भरोसा रखते हैं। 

- सोचिल डिक्सन

आशा की किरण

मेरी माँ का चमकीला लाल क्रॉस, कैंसर केयर सेंटर में उनके बिस्तर के बगल में लटका होना चाहिए था। और मुझे उनके निर्धारित उपचारों के बीच छुट्टियों के दौरे की तैयारी करनी चाहिए थी। मैं क्रिसमस पर बस यही चाहता था कि मेरी माँ के साथ एक और दिन बिताऊँ। इसके बजाय, मैं घर पर था... एक नकली पेड़ पर उनका क्रॉस लटका रहा था।

जब मेरे बेटे जेवियर ने लाइटें लगाईं, तो मैंने धीरे से कहा, "धन्यवाद।" उसने कहा, " कोई बात नहीं।" मेरे बेटे को नहीं पता था कि टिमटिमाते बल्बों का उपयोग करके मेरी आँखों को आशा की चिरस्थायी रोशनी—यीशु—की ओर मोड़ने के लिए मैं परमेश्वर को धन्यवाद दे रहा था ।

भजन संहिता 42 के लेखक ने परमेश्वर के प्रति अपनी वास्तविक भावनाओं को व्यक्त किया (पद.1-4) पाठकों को प्रोत्साहित करने से पहले उन्होंने अपनी “निराश” और “अशांत” आत्मा को स्वीकार किया: “ परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।” (पद 5)। हालाँकि वह दुःख और पीड़ा की लहरों से अभिभूत था, लेकिन भजनकार की आशा परमेश्वर की पिछली वफ़ादारी की याद के माध्यम से चमक उठी ( पद 6-10)। उन्होंने अपने संदेहों पर सवाल उठाते हुए और अपने परिष्कृत विश्वास की सामर्थ्य; की पुष्टि करते हुए समाप्त किया: “हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा। ” ( पद 11)।

हममें से कई लोगों के लिए, क्रिसमस का मौसम खुशी और दुख दोनों को जगाता है। शुक्र है, इन मिश्रित भावनाओं को भी आशा के सच्चे प्रकाश-यीशु के वादों के माध्यम से समेटा  (मेल-मिलाप कराना) और छुड़ाया जा सकता है ।     

—सोचिल डिक्सन

परमेश्वर की सांत्वनादायक प्रतिबद्धता

कई साल पहले, हमारा परिवार फोर कॉर्नर गया था, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में एकमात्र स्थान है जहाँ चार राज्य एक स्थान पर मिलते हैं। मेरे पति एरिजोना में  थे। हमारा सबसे बड़ा बेटा, ए.जे., यूटा गया। हमारे सबसे छोटे बेटे, जेवियर ने कोलोराडो में कदम रखते ही मेरा हाथ थाम लिया। जब मैं न्यू मैक्सिको में घुसी, तो जेवियर ने कहा, "माँ, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि आपने मुझे कोलोराडो में छोड़ दिया!" हम एक साथ और अलग थे क्योंकि हमारी हँसी चार अलग-अलग राज्यों में सुनी गई थी। अब जब हमारे बड़े बेटे घर छोड़ चुके हैं, अब जबकि हमारे बड़े बेटे घर छोड़ चुके हैं, मैं ईश्वर के इस वादे की गहरी सराहना करती हूं कि उसके सभी लोग जहां भी जाएं, वह उनके करीब रहेगा।।

मूसा की मृत्यु के बाद, परमेश्वर ने जब इस्राएलियों के क्षेत्र का विस्तार किया तब यहोशू को नेतृत्व के लिए बुलाया और अपनी उपस्थिति का आश्वासन दिया (यहोशू 1:1-4)। परमेश्वर ने कहा, “जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूँगा, और न तुझको छोड़ूँगा। (पद. 5)। यह जानते हुए कि यहोशू अपने लोगों के नए अगुवे के रूप में सन्देह और भय से संघर्ष करेगा, परमेश्वर ने इन वचनों पर आशा की एक नींव डाली : “क्या मैंने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बाँधकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहाँ जहाँ तू जाएगा वहाँ वहाँ तेरा परमेश्‍वर यहोवा तेरे संग रहेगा "(पद.9) ।
परमेश्वर भले ही हमें या हमारे प्रियजनों को कहीं भी ले जाए, कठिन समय में भी, उसका सबसे सांत्वनादायक वायदा हमें आश्वस्त करता है कि वह हमेशा मौजूद हैं।

—सोचिल डिक्सन

पुत्र के प्रकाश को प्रतिबिंबित करना

 
मेरी मां से मेरा झगड़ा होने के बाद, उन्होंने मुझे घर से 1 घंटे की दूरी पर मिलने को सहमत हुई । जब मैं वहां पहुंचा, तो पता चला कि वह मेरे पहुंचने से पहले ही वहां से जा चुकी थी। मैंने गुस्से में, उन्हें एक संदेश लिखा। लेकिन जब मुझे लगा कि प्रभु मुझे प्यार से जवाब देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं तो मैंने इसमें संशोधन किया। । जब मेरी मां ने वह भिन्न तरीके से लिखा हुआ संदेश पढ़ा तो उन्होंने मुझे फोन किया। उन्होंने कहा, "तू बदल गया है" । परमेश्वर ने मेरे संदेश का इस्तेमाल मेरी माँ को यीशु के बारे में पूछने और अंततः उसे अपने निजी उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रेरित करने के लिए किया। 
 
मत्ती 5 में यीशु ने अपने चेलों को जगत की ज्योति कहा (पद 14) फिर उसने कहा कि, “उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।”(पद16) जैसे ही हम यीशु को अपना उद्धारकर्ता करके स्वीकारते हैं तभी हम पवित्र आत्मा की सामर्थ्य को पा लेते हैं। वह हमें बदल देता है ताकि हम जहां भी जाएं, परमेश्वर की सच्चाई और प्रेम के चमकदार गवाह बन सकें।। 
 
पवित्र आत्मा की सामर्थ्य द्वारा हम आशा और शांति की आनंदमय ज्योति बन कर चमक सके जो प्रतिदिन यीशु के प्रतिरूप में बदलता जाता है। ऐसे में हम जो भी भला काम करते हैं - वह धन्यवाद स्वरूप आराधना में बदलता जाता है जो दूसरों को आकर्षक लगती है और जीवंत विश्वास के रूप में देखी जा सकती है। पवित्र आत्मा को समर्पित होकर - पुत्र यीशु की ज्योति को प्रतिबिंबित करते हुए हम पिता को आदर पहुंचा सकते हैं। 
 
सोचिल डिक्सन 
 

मेरे मन की आँखे खोलो

2001 में, क्रिस्टोफर डफ़ल नाम के, समय से पहले जन्मे एक बच्चे ने जीवित बचकर डॉक्टरों को आश्चर्यचकित कर दिया। पाँच महीने की उम्र में, उसे पालक देखभाल व्यवस्था (foster care system) में भेज दिया गया जब तक कि उसकी मौसी के परिवार ने उसे गोद नहीं लिया। एक शिक्षक को एहसास हुआ कि चार वर्षीय क्रिस्टोफर, हालांकि अंधा था और ऑटिज्म से पीड़ित था, लेकिन उसकी आवाज़ का उतार- चढ़ाव एकदम सही था। छह साल के बाद, क्रिस्टोफर ने चर्च के मंच पर खड़े होकर गाया, "ओपन द आईज़ ऑफ़ माय हार्ट।" (मेरे मन की आँखे खोलो) यह वीडियो लाखों लोगों तक ऑनलाइन पहुंचा। 2020 में, क्रिस्टोफर ने विकलांगता वकील के रूप में सेवा करने के अपने लक्ष्यों को साझा किया। वह यह साबित करना जारी रखता है कि परमेश्वर की योजना के प्रति उसके  मन  की आँखें खुली होने से संभावनाएँ असीमित हो जाती हैं । 
प्रेरित पौलुस ने इफिसुस में कलीसिया की उनके साहसिक विश्वास के लिए सराहना की (1:15-16)। उन्होंने परमेश्वर से उन्हें “ज्ञान और प्रकाश की आत्मा” देने के लिए कहा, ताकि वे "उसे बेहतर जान सकें" (पद 17)। उन्होंने प्रार्थना की कि उनकी आंखें " ज्योतिमान " हो जाएं या खुल जाएं, ताकि वे उस आशा और विरासत को समझ सकें जिसका वादा परमेश्वर ने अपने लोगों से किया था (पद 18)। 
जब हम परमेश्वर से स्वयं को हमारे सामने प्रकट करने के लिए कहते हैं, हम उसे और अधिक जान सकते हैं और विश्वास के साथ उसके नाम, शक्ति और अधिकार की घोषणा कर सकते हैं (पद 19-23)। यीशु में विश्वास और परमेश्वर के सभी लोगों के प्रति प्रेम के साथ, परमेशवर से हमारे मन की आँखें खुली रखने के लिए कहते हुये हम उन तरीकों से जी सकते हैं जो उसकी असीमित संभावनाओं को प्रमाणित करते हैं, । 
-सोचील डिक्सन 

मैं आपको देख सकता हूं!

ऑप्टोमेट्रिस्ट (नेत्र दृष्टि की जाँच करने वाला)  ने तीन वर्षीय एंड्रियास को उसके पहले चश्मे को ठीक से पहनने में उसकी मदद की। "आईने में देखो," उसने कहा। एंड्रियास ने अपने आप को आइने में देखाफिर एक आनंद और प्यार भरी मुस्कान के साथ अपने पिता की ओर मुड़ा। तब एंड्रियास के पिता ने धीरे से अपने बेटे के गालों पर गिरे आँसू पोंछे और उससे पूछा, "क्या हुआ?" एंड्रियास ने अपनी बाहें अपने पिता की गर्दन के चारों ओर लपेट दीं। "मैं आपको देख सकता हूं।" वह पीछे हट गया, अपना सिर झुकाया और अपने पिता की आँखों में देखा। "मैं आपको देख सकता हूं!" 
जैसे ही हम प्रार्थनापूर्वक बाइबल का अध्ययन करते हैं, पवित्र आत्मा हमें यीशु को देखने के लिए आँखें देता है, जो "अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप" है (कुलुस्सियों 1:15)। हालाँकि, पवित्रशास्त्र के माध्यम से ज्ञान में वृद्धि के साथ-साथ आत्मा द्वारा हमारी दृष्टि साफ़ होने पर भी, हम अभी भी अनंत काल के इस तरफ परमेश्वर की अनंत विशालता की एक झलक ही देख सकते हैं। जब पृथ्वी पर हमारा समय पूरा हो जाएगा या जब यीशु वापस लौटने का अपना वादा पूरा करेगा, तो हम उसे स्पष्ट रूप से देखेंगे (1 कुरिन्थियों 13:12)। 
हमें उस आनंद भरे क्षण में विशेष चश्मे की आवश्यकता नहीं होगी जब हम मसीह को आमने-सामने देखेंगे और उसे जानेंगे जैसे वह हम में से प्रत्येक को, मसीह की देह के प्रिय सदस्यों को – जो कि कलीसिया है- जानता है। पवित्र आत्मा हमें विश्वास, आशा और प्रेम से भर देगा, जिसकी हमें तब तक दृढ़ता से खड़े रहने के लिए आवश्यकता है, जब तक कि हम अपने प्यारे और जीवित उद्धारकर्ता की ओर न देखें और कहें, “मैं आपको देख सकता हूँ, यीशु। मैं आपको देख सकता हूं!" 
-सोचील डिक्सन 

एक दाता का दिल

 
हमारे पुराने घर में हमारे आखिरी दिन, मेरी दोस्त अपनी चार साल की बेटी किंसली को अलविदा कहने के लिए लाई। “मैं नहीं चाहती कि आप यहां से जायें” किंसली ने कहा। मैंने उसे गले लगाया और उसे अपनी जमा करी हुई चीजों में से एक कैनवास,  हाथ से पेंट किया हुआ पंखा दिया था। जब तुम्हें मेरी याद आये तो इस पंखे का उपयोग करो और याद रखो कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ। किंसली ने पूछा कि “क्या वह कोई दूसरा पंखा ले सकती है, एक कागज वाला।” “ओह वह तो टूटा हुआ है”,  मैंने कहा। मैं चाहता हूं कि तुम्हारे पास मेरा सबसे अच्छा पंखा हो। मुझे किंस्ली को अपना पसंदीदा पंखा देने का कोई अफसोस नहीं था। उसे खुश देखकर मुझे और खुशी हुई। बाद में, किंसली ने अपनी माँ को बताया कि वह दुखी थी क्योंकि मैंने टूटा हुआ पंखा रख लिया था। उन्होंने मुझे एक बिल्कुल नया, सुन्दर बैंगनी रंग का पंखा भेजा। मुझे उदारतापूर्वक देने के बाद किंस्ली को फिर से खुशी महसूस हुई। मैं भी खुश हुआ। 
ऐसी दुनिया में जो आत्म–संतोष और आत्म–रक्षा को बढ़ावा देती है, हम देने वाले दिल के साथ जीने के बजाय जमाखोरी करने के लिए प्रलोभित हो सकते हैं। हालाँकि बाइबल कहती है कि “ऐसे हैं, जो छितरा देते हैं, तौभी उनकी बढ़ती ही होती है; और ऐसे भी हैं जो यर्थाथ से कम देते हैं, और इस से उनकी घटती ही होती है।” (नीतिवचन 11:24)। हमारी संस्कृति समृद्धि को अधिक से अधिक प्राप्त करने के रूप में परिभाषित करती है, लेकिन बाइबल कहती है कि “उदार प्राणी हृष्ट पुष्ट हो जाता है, और जो औरों की खेती सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी।” (पद 25)।  परमेश्वर का असीमित और बिना शर्त प्यार और उदारता लगातार हमारी पूर्ति करता है। हममें से प्रत्येक के पास एक दाता का दिल हो सकता है और हम कभी न खत्म होने वाला देने का चक्र बना सकते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि परमेश्वर  सभी अच्छी चीजों का दाता है जो बहुतायत से देने में कभी नहीं थकता। 
-सोची डिक्सन