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Articles by सोचितल डिक्सॉन

स्थायी आशा

मैं एक साथी लेखिका को फॉलो कर रही हूँ और उसके लिए प्रार्थना कर रही हूँ जो अपनी कैंसर यात्रा के बारे में ऑनलाइन पोस्ट कर रही है l वह बारी-बारी से अपने शारीरिक दर्द और चुनौतियों के बारे में अपडेट साझा करती है और पवित्रशास्त्र और परमेश्वर की स्तुति के साथ प्रार्थना अनुरोध साझा करती है l उसकी साहसी मुस्कान देखना सुन्दर है चाहे वह अस्पताल में इलाज का इंतजार कर रही हो या घर पर बनडाना(bandana-चमकीला रंगीन कपड़े का रुमाल जो गले या सिर में पहना जाता है) पहनी हुए हो क्योंकि उसके बाल झड़ रहे हैं l प्रत्येक चुनौती के साथ, वह दूसरों को आजमाइशों के दौरान परमेश्वर पर भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित करने से कभी नहीं चूकती l 

जब हम कठिनाइयों से गुज़र रहे होते हैं, तो आभारी होने और परमेश्वर की स्तुति करने का कारण ढूढ़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है l हालाँकि, भजन सहिंता 100 हमें हमारी परिस्थितियों के बावजूद खुश होने और परमेश्वर की स्तुति करने का कारण देता है l भजनकार कहता है : “निश्चय जानो कि यहोवा ही परमेश्वर है ! उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं”(पद.3) l वह आगे कहता है, “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करुणा सदा के लिए, और उसकी सच्चाई पीढ़ी पीढ़ी तक बनी रहती है”(पद.5) l 

हमारी आजमाइश चाहे जो भी हो, हम यह जानकार आराम पा सकते हैं कि परमेश्वर हमारे टूटे हुए हृदयों के निकट है(34:18) l जितना अधिक समय हम परमेश्वर के साथ प्रार्थना और बाइबल पढ़ने में बिताएंगे, उतना ही अधिक हम “फाटकों से धन्यवाद, और उसके आँगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश [कर सकेंगे]” और “उसका धन्यवाद [कर सकेंगे], और उसके नाम को धन्य [कह सकेंगे]”(100:4) l हम “यहोवा का जयजयकार” कर सकते हैं(पद.1) यहाँ तक कि और शायद विशेष रूप से तब जब हम किसी कठिन समय में हों क्योंकि हमारा परमेश्वर विश्वासयोग्य है l 

हमारे विश्वासयोग्य पिता

मेरे छह फुट तीन इंच के ज़ेवियर ने अपने खिलखिलाते बच्चे ज़ेरियन को आसानी से हवा में उठा लिया l उसने अपने बड़े हाथ से अपने बेटे के छोटे-छोटे पैरों को थामा और उसे अपनी हथेली में मजबूती से पकड़ लिया l अपनी लम्बी भुजा फैलाकर, उसने अपने बेटे को स्वयं संतुलन बनाने के लिए उत्साहित किया, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर उसे पकड़ने के लिए अपना खाली हाथ भी तैयार रखा l ज़ेरियन ने अपने पैर सीधे किये और खड़ा हो गया l अपनी चौड़ी मुस्कराहट और अपनी भुजाएं बगल में रखते हुए, उसकी आँखें अपने पिता की ओर टिकी हुयी थीं l 

नबी यशायाह ने हमारे स्वर्गिक पिता पर ध्यान केन्द्रित करने के लाभों की घोषणा की : जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है”(यशायाह 26:3) l उसने परमेश्वर के लोगों को पवित्रशास्त्र में उसकी तलाश करने के लिए समर्पित होने और प्रार्थना और उपासना के द्वारा उससे जुड़ने के लिए उत्साहित किया l उन विश्वासयोग्य लोगों को पिता के साथ अपनी स्थापित संगति के द्वारा निर्मित एक भरोसेमंद विश्वास का अनुभव होगा l 

परमेश्वर के प्यारे बच्चों के रूप में, हम साहस के साथ दोहाई दे सकते हैं : “यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है”(पद.4) l क्यों? क्योंकि हमारा स्वर्गिक पिता विश्वासयोग्य है l वह और पवित्रशास्त्र कभी नहीं बदलते l 

जैसे ही हम अपनी निगाहें अपने स्वर्गिक पिता पर टिकाएंगे, वह हमारे पैरों को अपने हाथों में मजबूती से रखेगा l हम उस पर भरोसा कर सकते हैं कि वह सदैव प्रेमपूर्ण, विश्वासयोग्य और अच्छा बना रहेगा!

परमेश्वर हमारी कहानियों का उपयोग करता है

मैंने मेमोरी बॉक्स(memory box) खोली और एक छोटा, चांदी का ब्रोच(broach) निकाली, जो दस सप्ताह के अजन्मे बच्चे के पैरों के बिलकुल नाप और आकार का था l दस नन्हे पैर की उँगलियों को सहलाते हुए, मुझे अपनी पहली गर्भावस्था के नुकसान की याद आई और जो लोग कहते थे कि मैं “भाग्यशाली” थी, मैं “आशा से परे” थी l मुझे दुःख हुआ था, यह जानकार कि मेरे बच्चे के पैर उतने ही असली थे जितना कि एक समय मेरे गर्भ में धड़कने वाला हृदय l मैंने ईश्वर को मुझे निराशा से मुक्त करने और अपनी कहानी का उपयोग उन लोगों को सांत्वना देने के लिए किया जो एक बच्चे को खोने के बाद दुखी थे l मेरे गर्भपात के दो दशक से भी अधिक समय बाद, मेरे पति और मैंने उस खोए हुए बच्चे का नाम काई(Kai) रखा, जिसका कुछ भाषाओं में अर्थ है “आनंदित होना l” यद्यपि मैं अभी भी अपने नुकसान से दुखी हूँ, मैं अपने दिल को ठीक करने और दूसरों की मदद करने के लिए अपनी कहानी का उपयोग करने के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देती हूँ l 

भजन 107 का लेखक परमेश्वर के स्थायी चरित्र पर आनंदित हुआ और उसने गाया : “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!”(पद.1) l उसने “यहोवा के छुड़ाए [हुओं]” से “ऐसा ही (अपनी कहानी कहने)” का निवेदन करता है, “उन कर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिए करता है, उसका धन्यवाद” करने को कहता है(पद.8) l उसने इस प्रतिज्ञा के साथ आशा की पेशकश की कि केवल ईश्वर ही “अभिलाषी जीव को संतुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है” (पद.9) l 

कोई भी दुःख या कष्ट से बच नहीं सकता, यहाँ तक कि वे भी जिन्हें क्रूस पर मसीह के बलिदान के द्वारा छुटकारा मिला है l हम ईश्वर की दया का अनुभव कर सकते हैं जब वह हमारी कहानियों का उपयोग दूसरों को अपने उद्धारक प्रेम की ओर इशारा करने के लिए करता है l

परमेश्वर हमें सुनता है

पहली कक्षा के छात्र ने आपातकालीन स्थिति के लिए नंबर पर कॉल किया। आपातकालीन ऑपरेटर ने उत्तर दिया। "मुझे मदद की ज़रूरत है," लड़के ने कहा। "मुझे टेक-अवे करना है।" ऑपरेटर सहायता के लिए आगे बढ़ता, उससे पहले उसने एक महिला को कमरे में प्रवेश करते और यह कहते हुए सुना, "जॉनी, तुम क्या कर रहे हो?" जॉनी ने बताया कि वह अपना गणित का होमवर्क नहीं कर पा रहा है, इसलिए जब उसे मदद की ज़रूरत पड़ी तो उसने वही किया जो उसकी माँ ने उसे सिखाया था। उसने आपातकालीन नंबर पर कॉल किया। जॉनी के लिए, उसकी वर्तमान आवश्यकता आपातकाल के समान थी। दयालु ऑपरेटर के लिए, उस पल में छोटे लड़के को उसके होमवर्क में मदद करना सर्वोच्च प्राथमिकता थी।

जब भजनकार  दाऊद को सहायता की आवश्यकता पड़ी, तो उसने कहा, “हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं” (भजन संहिता 39:4)। उसने कहा, "मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है" (पद 7)। इसलिए, उसने उससे उसकी "मदद की पुकार" सुनने और उसका उत्तर देने की विनती की (पद 12)। फिर, अजीब तरह से, उसने परमेश्वर से "उससे दूर देखने" के लिए कहा (पद 13)। हालाँकि दाऊद की ज़रूरतें अनकही हैं, पूरे पवित्रशास्त्र में उसने यही बात कही कि परमेश्वर हमेशा उसके साथ रहेगा, उसकी प्रार्थनाएँ सुनेगा और उनका उत्तर देगा। 

परमेश्वर की नियमितता में हमारा विश्वास हमें अपनी चंचल भावनाओं को संसाधित करने में सहायता करता है, यह पुष्टि करते हुए कि न बदलने वाले परमेश्वर के लिए कोई भी विनती बहुत बड़ी या बहुत छोटी नहीं है। वह हमें सुनता है, हमारी परवाह करता है और हमारी हर प्रार्थना का उत्तर देता है।

और अधिक यीशु की तरह दिखाई दें

ईश्वर ने बड़े भूरे उल्लू(great gray own) को छिपने में निपूर्ण होने के लिए बनाया है l इसके सिल्वर-ग्रे पंखों में रंग का एक सामूहिक नमूना होता है जो इसे पेड़ों पर बैठने पर छिपने में घुलने-मिलने की अनुमति देता है l जब उल्लू अदृश्य रहना चाहते हैं, तो वे सादे दृश्य में छिप जाते हैं, अपने पंखों वाला छिपने की सहायता से अपने वातावरण में मिल जाते हैं l 

परमेश्वर के लोग अक्सर बड़े भूरे उल्लू की तरह होते हैं l हम आसानी से संसार में घुलमिल सकते हैं और जानबूझकर या अनजाने में मसीह में विश्वासियों के रूप में पहचाने नहीं जा सकते l यीशु ने अपने शिष्यों के लिए प्रार्थना की—जिन्हें पिता ने उसे “जगत में से उसे दिया था,” जिन्होंने उसके वचन को “मान लिया था” (यूहन्ना 17:6) l परमेश्वर पुत्र ने पिता परमेश्वर से उसके जाने के बाद उनकी रक्षा करने और उन्हें पवित्रता और निरंतर आनंद में रहने के लिए सशक्त बनाने के लिए कहा (पद.7-13) l उसने कहा, “मैं यह विनती नहीं करता कि तू उन्हें जगत से उठा ले; परन्तु यह कि तू उन्हें उस दुष्ट से बचाए रख” (पद.15) l यीशु जानता था कि उसके शिष्यों को पवित्र बनाने और अलग करने की ज़रूरत है ताकि वे उस उद्देश्य को पूरा कर सकें जिसे पूरा करने के लिए उसने उन्हें भेजा था (पद.16-19) l 

पवित्र आत्मा हमें लालच से निकालकर संसार में घुलने-मिलने वाले छद्मवेशों का स्वामी(masters of camouflage) बनने में मदद कर सकता है l जब हम प्रतिदिन उसके प्रति समर्पण करते है, तो हम यीशु की तरह अधिक दिख सकते हैं l जब हम एकता और प्रेम में रहते हैं, वह अपनी सारी महिमा में दूसरों को मसीह की ओर आकर्षित करेगा l

व्यवहार में प्रेम

अकेली माँ पांच वर्ष से अधिक समय तक वृद्ध सज्जन के पड़ोस में रहती थी l एक दिन, उसकी भलाई के लिए चिंतित होकर, उसने उसके दरवाजे की घंटी बजाई l उन्होंने कहा, “मैंने आपको लगभग एक सप्ताह से नहीं देखा है l मैं बस यह जानने का प्रयास कर रहा था कि आप ठीक हैं या नहीं l” उनकी “स्वास्थ्य जांच” ने उन्हें प्रोत्साहित किया l कम उम्र में अपने पिता को खोने के बाद, वह उस दयालु व्यक्ति की सराहना करती थी जो उसका और उसके परिवार का ख्याल रखता था l 

जब मुफ्त में देने(free-to-give) और पाने में अनमोल(priceless-to-receive) दयालुता का उपहार सिर्फ अच्छा होने से आगे बढ़ जाता है, तो हम दूसरों के साथ मसीह का प्यार साझा करके उनकी सेवा कर रहे होते हैं l इब्रानियों के लेखक ने कहा कि यीशु में विश्वास करने वालों “स्तुति रूपी बलिदान , अर्थात् उन होठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर को सर्वदा चढ़ाया करें” (इब्रानियों 13:15) l फिर, लेखक ने उन्हें अपने विश्वास को जीने की आज्ञा देते हुए कहा, “भलाई करना और उदारता दिखाना न भूलो, क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्न होता है” (पद.16) l 

यीशु के नाम का दावा करके यीशु की उपासना करना एक ख़ुशी और विशेषाधिकार है l लेकिन जब हम यीशु की तरह प्रेम करते हैं तो हम परमेश्वर की तरह सच्चा प्रेम व्यक्त करते हैं l हम पवित्र आत्मा से हमें अवसरों के बारे में जागरूक करने और हमें अपने परिवार के भीतर और बाहर दूसरों से अच्छे से  प्यार करने के लिए सशक्त बनाने के लिए कह सकते हैं l उन सेवकाई के क्षणों के द्वारा, हम क्रिया/व्यवहार में प्रेम के शक्तिशाली सन्देश के द्वारा यीशु को साझा कर सकेंगे l 

परमेश्वर का जीवन बदलने वाला उपहार

जब मेरे पति और मैंने बाइबलें बांटीं तो मैंने हमारे युवा समूह का अभिवादन किया। "परमेश्वर आपके जीवन को बदलने के लिए इन अमूल्य उपहारों का उपयोग करेंगे," मैंने कहा। उस रात, कुछ छात्रों ने एक साथ यूहन्ना के सुसमाचार को पढ़ने का संकल्प लिया। हम समूह को घर पर बाइबिल पढ़ने के लिए आमंत्रित करते रहे और अपनी साप्ताहिक बैठकों के दौरान उन्हें पढ़ाते रहे। एक दशक से भी अधिक समय के बाद, मैंने हमारे एक छात्र को देखा। उसने कहा, "आपने मुझे जो बाइबल दी थी, मैं अब भी उसका उपयोग करती हूँ।" मैंने उसके विश्वास से भरे जीवन में इसका प्रमाण देखा। परमेश्वर अपने लोगों को पढ़ने, सुनाने और यह याद रखने से परे जाने की शक्ति देता है कि बाइबल की आयतें कहाँ मिलेंगी। वह हमें "पवित्रशास्त्र के अनुसार" जीवन जीने के द्वारा "शुद्धता के मार्ग पर बने रहने" में सक्षम बनाता है (भजन 119:9)। परमेश्वर चाहता है कि हम उसे खोजें और उसकी आज्ञा मानें क्योंकि वह हमें पाप से मुक्त करने और हमें बदलने के लिए अपने अपरिवर्तनीय सत्य का उपयोग करता है (पद  10-11)। हम प्रतिदिन परमेश्वर से उसे जानने और बाइबिल में वह जो कहता है उसे समझने में मदद करने के लिए कह सकते हैं (पद  12-13)। जब हम परमेश्वर के तरीके से जीने के अनमोल मूल्य को पहचानते हैं, तो हम उनके निर्देश में "आनन्दित" हो सकते हैं  “मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं " (पद  14-15)। भजनकार की तरह, हम गा सकते हैं, “मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।” (पद 16)। जैसे ही हम पवित्र आत्मा को हमें सशक्त बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, हम प्रार्थनापूर्वक बाइबल पढ़ने में बिताए गए हर पल का आनंद ले सकते हैं - जो हमारे लिए परमेश्वर का जीवन बदलने वाला उपहार है। 

 

हम क्षण मायने रखता है

जब अप्रैल 1912 में टाइटैनिक एक हिमखंड से टकराया, तो पास्टर जॉन हार्पर ने सिमित संख्या में उपस्थित लाइफबोट में से एक में अपनी छह वर्षीय बेटी के लिए जगह सुरक्षित कर ली l उन्होंने एक सहयात्री को अपना जीवन-रक्षक(life-vest) वस्त्र दिया और जो कोई भी सुनना चाहता था, उनके साथ सुसमाचार साझा किया l जब जहाज डूब रहा था और सैकड़ों लोग अप्रत्याशित बचाव की प्रतीक्षा कर रहे थे, हार्पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास तैरकर गया और कहा, “प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करें, और आप बच जाएंगे” (प्रेरितों 16:31) l 

कनाडा के ओंटारियो में टाइटैनिक के जीवित बचे लोगों के लिए एक बैठक के दौरान, एक व्यक्ति ने खुद को “जॉन हार्पर का अंतिम विश्वासी बताया l हार्पर के पहले निमंत्रण को अस्वीकार करने के बाद, जब उपदेशक ने उससे दोबारा पूछा तो उस व्यक्ति ने मसीह को स्वीकार कर लिए l उन्होंने देखा कि हैपोथर्मिया(hypothermia-एक बीमारी) का शिकार होने और बर्फीले पानी में डूबने से पहले हार्पर ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों को यीशु के साथ साझा करने के लिए समर्पित कर दिया था l 

तीमुथियुस को दिए गए अपने निर्देश में, प्रेरित पौलुस निःस्वार्थ प्रचार के लिए समान तत्परता और समर्पण को प्रोत्साहित करता है l परमेश्वर की निरंतर उपस्थिति और यीशु की निश्चित वापसी की पुष्टि करते हुए, पौलुस ने तीमुथियुस पर धीरज और सटीकता के साथ प्रचार करने का निर्देश दिया (2 तीमुथियुस 4:1-2) l प्रेरित युवा उपदेशक को ध्यान केन्द्रित रखने की याद दिलाता है, हालाँकि कुछ लोग यीशु को अस्वीकार कर देंगे (पद.3-5) l 

हमारे दिन सिमित हैं, इसलिए हर पल मायने रखता है l हम भरोसा रख सकते हैं, कि हमारे पिता ने स्वर्ग में हमारा स्थान सुरक्षित कर दिया है जब हम घोषणा करते हैं, “यीशु बचाता है!”

 

प्रेमपूर्ण आज्ञाकारिता

हमारे विवाह समारोह के दौरान, हमारे पादरी ने मुझसे कहा, "क्या आप वादा करती है कि जब तक मृत्यु अलग न करे आप अपने पति से प्रेम करेंगी, उनका सम्मान करेंगी और उनकी आज्ञा मानेंगी?" अपने मंगेतर की ओर देखते हुए, मैं फुसफुसाई, "आज्ञा मानूंगी?" हमने अपना रिश्ता प्रेम और सम्मान पर बनाया है - अंध आज्ञाकारिता पर नहीं, जैसा की शादी की कसमे जता रहीं है। मेरे पति के पिता ने उस विस्मयकारी क्षण को फिल्म में कैद कर लिया जब मैंने आज्ञापालन शब्द को संसाधित किया और कहा, "मैं मानूंगी।"

इन वर्षों में, परमेश्वर ने मुझे दिखाया है कि आज्ञापालन शब्द के प्रति मेरे प्रतिरोध का, पति और पत्नी के बीच जो अविश्वसनीय रूप से पेचीदा रिश्ता है उससे कोई लेना-देना नहीं है। मेरी समझ से आज्ञापालन का अर्थ "वशीभूत" या "जबरन समर्पण" था, जिसका समर्थन पवित्रशास्त्र नहीं करता। बल्कि, बाइबल में आज्ञापालन शब्द उन कई तरीकों को व्यक्त करता है जिनसे हम परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं। जैसा कि मेरे पति और मैं अब शादी के तीस साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, पवित्र आत्मा की शक्ति के द्वारा से हम अभी भी यीशु और एक-दूसरे से प्रेम करना सीख रहे हैं।

जब यीशु ने कहा, "जो मेरी आज्ञाओं को मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है" (यूहन्ना 14:15), उन्होंने हमें दिखाया कि पवित्रशास्त्र का पालन करना उनके साथ निरंतर प्रेमपूर्ण और घनिष्ठ संबंध का परिणाम होगा (पद 16-21) । 

यीशु का प्रेम निःस्वार्थ, बिना शर्त है और कभी भी जबरदस्ती या अपमानजनक नहीं है। जैसे ही हम अपने सभी रिश्तों में उसका अनुसरण करते हैं और उसका सम्मान करते हैं, पवित्र आत्मा हमें उसके प्रति हमारी आज्ञाकारिता को विश्वास और आराधना के एक बुद्धिमान और प्रेमपूर्ण कार्य के रूप में देखने में मदद कर सकता है।