हमारी प्रतिदिन की रोटी

उसका अद्भुत चेहरा

मेरा चार वर्षीय बेटा जिज्ञासु है और निरंतर बातें करता है l मुझे उससे बातें करना पसंद है, किन्तु वह अपनी पीठ मेरी ओर करके बातें करने की खेदजनक आदत बना ली है l मैं अक्सर कहती हूँ, “मैं तुम्हारी सुन नहीं सकती-कृपया मेरी ओर देखकर बातें करो l”

कभी-कभी परमेश्वर हमसे भी यही कहता है-इसलिए नहीं कि वह सुन नहीं सकता, किन्तु हम वास्तव में “उसे देखे बिना” उससे बातचीत करना चाहते हैं l हम प्रार्थना करते समय अपने प्रश्नों में उलझकर और स्वकेन्द्रित रहकर, भूल जाते हैं किससे प्रार्थना कर रहे हैं l मेरे बेटे की तरह, हम उसकी ओर केन्द्रित हुए बिना प्रश्न करते हैं जिससे हम बातचीत कर रहे हैं l

हम, परमेश्वर कौन है और उसने क्या किया है, के विषय खुद को याद दिलाकर अपने अनेक चिंताओं को संबोधित कर सकते हैं l केवल पुनः केन्द्रित होकर, ही हम उसके चरित्र को जानकर सुख पाते हैं : कि वह प्रेमी, क्षमाशील, प्रभु, और अनुग्रहकारी है l

भजनकार का विश्वास था कि हम परमेश्वर का मुख निरंतर निहारें (भजन 105:4) l  दाऊद द्वारा अगुओं को उपासना और प्रार्थना के लिए नियुक्ति पर, उसने लोगों को परमेश्वर के चरित्र की प्रशंसा करने और उसके पूर्व विश्वासयोग्यता की चर्चा करने को उत्साहित किया (1 इतिहास 16:8-27) l

परमेश्वर का खूबसूरत चेहरा निहारने पर, हम सामर्थ्य और सुख पाते हैं जो हमें हमारे अनुत्तरित प्रश्नों के मध्य भी संभालता हैं l

सुख का पलना

मेरी सहेली ने मुझे अपने चार दिन की बेटी को गोद में लेने का सौभाग्य दिया l बच्चावह मेरे गोद में आने के बाद ही हलचल करने लगा l मैंने उसे दुलारा, अपने गाल उसके सिर से लगाया, और उसे चुप करने के लिए हिलाते हुए एक गीत गुनगुनाने लगी l इन प्रयासों के साथ, दस वर्षों के अपने लालन-पालन अनुभव के बाद भी, मैं उसे शांत न कर सकी l मैंने उसे उसकी अधीर माँ के बाहों में डालने तक वह अत्यंत परेशान रही l तुरन ही वह शांत हो गई; उसका रोना बंद हो गया और उसकी बेचैनी उसके भरोसेमंद सुरक्षा में तब्दील हो गई l  मेरी सहेली अपनी बेटी को गोद लेना और उसकी परेशानी दूर करना जानती थी l

परमेश्वर अपने बच्चों को माता की तरह सुख देता है : कोमल, भरोसेमंद, और बच्चे को शांत करने में चिन्ताशील l हमारे थकित अथवा परेशान होने पर, वह हमें अपनी बाहों में उठाता है l हमारा पिता और सृष्टिकर्ता होकर, वह हमें निकटता से जानता है l “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (यशा. 26:3) l

जब हमें संसार का भारी बोझ दबाए, हम इस ज्ञान में सुख पाते हैं कि वह प्रेमी अभिभावक की तरह हमें अर्थात् अपने बच्चों को सुरक्षित रखता और उनके लिए लड़ता है l

आप किस लिए याद किये जाएंगे?

चीन के एक बंदी शिविर के प्रांगन में एक पूर्व जापानी का स्मारक पत्थर खड़ा है जहाँ 1945 में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी l उस पर लिखा है, “एरिक लिडल स्कॉटलैंड वासी माता-पिता से 1902 में तियानजिन में जन्म लिया l उसने 1924 के ओलिंपिक खेलों में 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी जीविका के चरम पर पहुँचा l वह तियानजिन में शिक्षक बनने चीन लौटा ... उसने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव की बेहतरी हेतु सर्वोत्तम सहयोग देने के लिए युवा लोगों को उत्साहित करता रहा l”

अनेक लोगों की दृष्टि में, एरिक की महानतम उपलब्धि स्पोर्ट्स के क्षेत्र में था l किन्तु चीन में तियानजिन, अर्थात् जिस देश में वह जन्म लिया और जिससे वह प्रेम करता था, के युवाओं के प्रति सहयोग के लिए भी जाना जाता है l उसने विश्वास से जीवन बिताया और सेवा की l

हम किस लिए याद किये जाएंगे? हम शैक्षिक उपलब्धियां, काम की पदवी, अथवा आर्थिक सफलता के लिए याद किये जा सकते हैं l किन्तु लोगों के जीवनों में शांति से किये गए कार्य ही होंगे जो हमारे जाने के बाद भी याद रहेंगे l

मूसा को बाइबिल के विश्वास अध्याय में याद किया गया है l इब्रानियों 11, जहाँ उसने मिस्र के भंडार से बड़ा धन परमेश्वर के लोगों का साथ देना समझा (पद.26) l उसने विश्वास से परमेश्वर के लोगों का मार्गदर्शन और उनकी सेवा की l

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It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

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