हमारी प्रतिदिन की रोटी

विधवा का विश्वास

आह-पाई सुबह तड़के उठ जाती है। बाकि लोग भी जल्दी उठकर रबड़ के बागानों में जाएँगे। रबड़ की फ़सल चीन के हांगझुआंग गांव-वासियों की आय का मुख्य स्रोत है। अधिक रबर इकट्ठा करने लिए सुबह से पेड़ों से क्षीर निकाला जाता है। आह-पाई भी उनमें शामिल होगी,  परंतु पहले वह परमेश्वर के साथ समय बिताएगी।

आह-पाई के पिता, पति, और पुत्र का निधन हो चुका है। वह अपनी बुजुर्ग मां और दो पोतों को पालने के लिए मेहनत करती है। उसकी कहानी मुझे बाइबिल में एक विधवा की याद दिलाती है। जिसका पति कर्जा छोड़ कर मर गया (2राजा 4:1)। संकट में मदद पाने के लिए वह परमेश्वर के दास एलीशा के पास गई। उसे विश्वास था कि उसकी स्थिति में परमेश्वर ही कुछ कर सकते हैं। परमेश्वर ने किया। आश्चर्यकर्मों से उन्होंने विधवा की जरूरतों को पूरा किया (पद 5- 6)। परमेश्वर आह-पाई की जरूरतों को भी पूरा करते हैं-भले ही कम आश्चर्यकर्मों से-वह ऐसा उसकी मेहनत, भूमि की उपज और लोगों के उपहारों के माध्यम से करते हैं।

जीवन हमसे चाहे कई मांगे करे, हम सामर्थ सदा परमेश्वर से पा सकते हैं। अपनी चिंताओं को उन्हें सौंप कर हम जो संभव हो वह करें। और उन्हें वह करने का अवसर दें जो हमें अंततः आश्चर्यचकित कर देगा।

भूलने की बीमारी

कैरल्सबाड, कैलिफोर्निया में आपातकालीन सेवा ने ऑस्ट्रेलियाई लहज़े में बोलने वाली एक महिला को बचाया जिसे याद नहीं था कि वह कौन थी। 

उसे भूलने की बीमारी थी और उसका कोई पहचान पत्र नहीं था। डॉक्टरों और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की मदद से उसकी हालत सुधरी, उसकी कहानी प्रसारित हुई और अंततः वह अपने परिवार से पुनः मिल पाई।

बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर भी यह भूल गया था कि वह कौन था और कहां से आया था। हालांकि उसकी भूलने की बीमारी आध्यात्मिक थी। जो राज्य उसे मिला था उसका श्रेय स्वयं लेकर वह यह बात भूल गया था कि परमेश्वर राजाओं के राजा हैं और उसके पास जो कुछ भी था वह उन्हीं का दिया हुआ था( दानिय्येल 4:17, 28-30)।

परमेश्वर ने राजा के दिमाग की दशा को नाटकीय बना दिया जिससे वह खेतों में जंगली जानवरों के साथ रहने और गाय की तरह घास चरने लगाI आखिरकार 7वर्षों बाद उसने आंखें स्वर्ग की ओर उठाईं, और उसकी बुद्धि ज्यों की त्यों हो गईI तब उसने कहा, “अब मैं नेबूदुकनेस्सर...” (37) I 

हमारे बारे में क्या?  हमारी दृष्टि में हम कौन हैं? हम कहां से आए?  क्योंकि हम भूल जाने की प्रवृति रखते हैं इसलिए याद करने के लिए राजाओं के राजा के अलावा हम किसकी ओर देख सकते हैं?

प्रतीक्षा का स्थान

"प्रतीक्षा चाहे मछली के जाल में फंसने की, पतंगबाजी में हवा के रुख की या शुक्रवार शाम की हो....हर कोई प्रतीक्षा कर रहा है"-बाल-पुस्तक लेखक डॉक्टर सिउस।

जीवन का बड़ा भाग प्रतीक्षा के बारे में है,परंतु परमेश्वर उतावले नहीं होते। कहावत है, “परमेश्वर का अपना अवसर और अपना विलम्ब होता है”। इसलिए हम प्रतीक्षा करें।

प्रतीक्षा कठिन बात है। हम अंगूठा मोड़ते, पैर बदलते, उबासी को दबाते, लंबी आहें भरते, और हताश होकर चिंतित होते हैं। इतने अजीब व्यक्ति के साथ क्यों रहूं, इतना कठिन कार्य, इतना उलझन भरा व्यवहार, इतनी लाइलाज बीमारी!  परमेश्वर कुछ करते क्यों नही?  परमेश्वर का उत्तर:"थोड़ा ठहर और देख मैं क्या करूंगा"।

प्रतीक्षा जीवन की शिक्षिका है, इसमें हम...प्रतीक्षा के गुण को सीखते हैं-जब परमेश्वर हममें और हमारे लिए कार्य करते हैं तो प्रतीक्षा करें। प्रतीक्षा हमारे धीरज और परमेश्वर की भलाई और करुणा पर भरोसा करने की क्षमता को बढ़ाते हैं, भले ही बातें हमारे अनुरूप ना हों (भजन संहिता 70: 5)।

परंतु प्रतीक्षा का अर्थ उदासीन होना या दांत पीसना नहीं। प्रतीक्षा करते हुए हम “हर्षित और [उनमें] अनन्दित हो सकते हैं (पद 4)। हम इस आशा में प्रतीक्षा करते हैं कि परमेश्वर हमें उचित समय में छुड़ा लेंगे-इस जीवन में या अगले मेंI परमेश्वर उतावली नही करते वरन वो सदा समय पर होते हैं।

United States

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It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

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हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।