हमारी प्रतिदिन की रोटी

सर्वोत्तम उपहार

 

जब मैं लन्दन, घर जाने के लिए सामन पैक कर रही थी, मेरी माँ मेरे लिए एक उपहार लेकर आई – उनकी एक अंगूठी जो मुझे बहुत पसंद थी l चकित होकर, मैंने पूछा, “यह किस लिए?” उन्होंने उत्तर दिया, “मेरे विचार से अब तुम इसको पहनने का आनंद लो l मेरी मृत्यु तक इंतज़ार करने की क्या ज़रूरत है? कैसे भी यह मेरी ऊँगली में आती भी नहीं है l” मुस्कराकर मैंने उनका अनापेक्षित उपहार प्राप्त किया, आरंभिक विरासत जो मेरे लिए आनंद का कारण है l

मेरी माँ ने मुझे एक भौतिक उपहार दी, किन्तु यीशु की प्रतिज्ञा है कि उसका पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा देगा (लूका 11:13) l यदि पाप के साथ जन्में माता-पिता अपने बच्चों की ज़रूरतें(जैसे भोजन) पूरी करते हैं, तो हमारा स्वर्गिक पिता अपने वच्चों को और भी अधिक देगा l पवित्र आत्मा के वरदान के द्वारा(यूहन्ना 16:13), हम परेशानी के समय आशा, प्रेम, आनंद, और शांति का अनुभव कर सकते हैं और हम इन वरदानों को दूसरों के साथ बाँट सकते हैं l

उम्र में बढ़ते हुए, शायद हमारे माता-पिता पूरी तौर से हमसे प्रेम नहीं कर सके और हमारी देखभाल नहीं कर सके l अथवा हमारे माता-पिता बलिदानी प्रेम के प्रशिद्ध नमूना थे l अथवा हमारा अनुभव इन दोनों के बीच था l जो भी हमने अपने सांसारिक माता-पिता के विषय जाना है, हम इस प्रतिज्ञा को थामे रह सकते हैं कि हमारा स्वर्गिक पिता हमसे अत्यधिक प्रेम करता है l उसने अपने बच्चों को पवित्र आत्मा का उपहार दिया है l

अपनी पीड़ा को छिपाना

 

मैंएक स्थानीय चर्च में अतिथि-उपदेशक होकर परमेश्वर के समक्ष अपना टूटापन रखकर उसके द्वारा दी जानेवाली उस चंगाई को प्राप्त करने के विषय एक सच्चा उपदेश दे रहा था l अंतिम प्रार्थना से पहले, पास्टर ने वीच के गलियारे में खड़े होकर अपनी मंडली की आँखों में देखते हुए बोले, “आपका पास्टर होने के कारण मैं आपसे सप्ताह के मध्य मिलूँगा और आपके हृदय के टूटेपन की कहानियाँ सुनना चाहूँगा l उसके बाद सप्ताह के अंत की आराधनाओं में, आप अपना दुःख छिपाएंगे और मुझे दुखित होकर यह सब देखना होगा l”

मेरा हृदय उन छिपी हुई पीड़ाओं को देखकर रोया जिसे परमेश्वर दूर कर सकता था l इब्रानियों का लेखक परमेश्वर के वचन को जीवित और क्रियाशील बताता है l कितनों ने इस “वचन” को बाइबल समझा है, किन्तु यह तो उससे कहीं अधिक है l यीशु परमेश्वर का जीवित  वचन है l वह हमें प्यार करते हुए हमारे विचारों और व्यवहार को जांचता है l

यीशु बलिदान हुआ कि हमें सदैव परमेश्वर की उपस्थिति तक पहुँच मिल जाए l और जबकि हमें ज्ञात है कि सभी के साथ सब बातें बांटना बुद्धिमानी नहीं है, हम यह भी जानते हैं कि  परमेश्वर चाहता है कि कलीसिया वह स्थान बने जहां हम ग्लानी के बगैर मसीह के टूटे और क्षमा प्राप्त अनुयायी की तरह जीवन जी सकें l कलीसिया को वह स्थान बनना है जहां हम “एक दूसरे का भार” उठाते हैं (गलातियों 6:2) l
आज आप दूसरों से क्या छिपा रहें हैं? और आप किस प्रकार परमेश्वर से भी छिपा रहे हैं? परमेश्वर यीशु के द्वारा हमें देखता है l और वह अभी भी हमें प्यार करता है l क्या हम उसे प्यार करने की अनुमति देंगे?

वह हमें जानता है

क्यापरमेश्वर जानता था कि मैं रात में गाड़ी चलाकर 100 मील दूर अपने गाँव जा रहा था? मैं जिस स्थिति में था, वह बताना सरल नहीं है l मुझे तेज़ बुखार था और मेरे सर में दर्द l मैंने प्रार्थना की, “प्रभु, मैं जानता हूँ कि आप मेरे साथ हैं, किन्तु मैं पीड़ा में हूँ!”

थका हुआ और कमज़ोर, मैंने अपनी गाड़ी एक छोटे गाँव के निकट सड़क के किनारे खड़ी कर दी l दस मिनट के बाद, मैंने एक आवाज़ सुनी l “हेल्लो, क्या आपको कोई मदद चाहिए?” एक व्यक्ति मित्रों के साथ उस गाँव से आकर बोला l उनकी उपस्थिति अच्छी लगी l मैं उनसे उनके गाँव का नाम ना मी न्याला(अर्थात्, “राजा मेरे विषय जानता है!”), सुनकर चकित हुआ l मैं बगैर रुके इस गाँव से कई बार गुज़रा था l इस बार, प्रभु ने मुझे याद दिलाने के लिए इस गाँव के नाम का उपयोग किया कि, वास्तव में, सड़क पर मेरी पीड़ादायक स्थिति में राजा मेरे साथ था l उत्साहित होकर, मैं निकट के दवाखाना की ओर आगे बढ़ गया l

हमारी परिस्थिति के बावजूद, हमारे दैनिक कामों में जो हम अलग-अलग स्थानों और स्थितियों में करते हैं, परमेश्वर हमें पूरी तरह जानता है (भजन 139:1-4, 7-12) l वह हमें न छोड़ता है न भूलता है; न ही वह इतना व्यस्त है कि हमारा परवाह न करे l परेशानी में या कठिन स्थितियों में अर्थात “रात” और “दिन” (पद 11-12), हम उसकी उपस्थिति से छिपे हुए नहीं हैं l यह सच्चाई हमें इतनी आशा और निश्चयता देती है कि हम प्रभु की प्रसंशा कर सकते हैं जिसने हमें सावधानी से रचा है और सम्पूर्ण जीवन में अगुवाई करता है (पद.14) l

United States

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It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

Over the…

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हमारा मिशन बाइबिल के जीवन परिवर्तन करनेवाली बुद्धि/ज्ञान को समझने योग्य एवं सुगम्य बनाना है।

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हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।