हमारी प्रतिदिन की रोटी

चुभनेवाला काँटा

काँटा मेरी तर्जनी(Index finger) में चुभ गया, जिससे खून निकल आया l मैं जोर से चिल्लाया और फिर कराहते हुए सहज-ज्ञान से अपनी उँगली पीछे खींच ली l किन्तु मुझे चकित होना नहीं चाहिए था : जो कुछ हुआ वह बाग़बानी दास्तान पहने बगैर एक कटीली झाड़ी को काटने का परिणाम था l
मेरी उँगली में दर्द और उसमें से खून बहना की ओर ध्यान देना ज़रूरी था l और पट्टी खोजते समय, मैं अचानक अपने उद्धारकर्ता के विषय सोचने लगा l आखिरकार, सिपाहियों ने यीशु को काँटों का एक मुकुट पहनने को विवश किया (यूहन्ना 19:1-3) l अगर एक काँटे से इतनी तकलीफ़ होती है, मैंने सोचा, तो पूरे काँटों के एक ताज से कितना दर्द हुआ होगा? और यह शारीरिक दुःख का केवल एक छोटा सा भाग था l उसकी पीठ पर कोड़े मारे गए l कीलें उसकी हथेली और पैरों में ठोंके गए l एक भाला उसके पंजर में बेधा गया l
किन्तु यीशु आत्मिक दुःख भी सहा l यशायाह 53 का पद 5 हमसे कहता है, “परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के कारण कुचला गया; हमारी ही शांति के लिए उस पर ताड़ना पड़ी l ”जिस “शांति” की बात यशायाह यहाँ करता है वह क्षमा ही है l यीशु ने खुद को बेधने दिया-एक तलवार से, कीलों से, काँटों के ताज से-ताकि हम परमेश्वर की ओर से आत्मिक शांति पा सकें l वह बलिदान, हमारे पक्ष में उसके मरने की इच्छा, पिता के साथ सम्बन्ध बनाने का मार्ग तैयार कर दिया l और वचन कहता है कि उसने ऐसा किया मेरे लिए, आपके लिए l

प्रार्थना

मैंअपनी आंटी ग्लैडिस की बेबाक़ स्वाभाव का आदर करती हूँ यद्यपि कभी-कभी वह मेरे विषय होता है l आंटी ने ई-मेल भेजा, “कल मैंने अखरोट का पेड़ काट दिया” जिससे मैं चिंतित हुयी l
प्रार्थना का सदैव उपयोग करनेवाली मेरी आंटी छिहत्तर वर्ष की हैं! अखरोट का वह पेड़ उनके गेराज के पीछे उग गया था l जब उसके जड़ से गेराज की कंक्रीट के फटने का डर उत्पन्न हो गया, उन्होंने उसे काटने का निर्णय किया l किन्तु उन्होंने हमें बताया, “मैं उस तरह का काम करने से पूर्व प्रार्थना करती हूँ l”
इस्राएल के निर्वासन के समय फारस के राजा का पियाऊ होकर सेवा करते हुए, नहेम्याह को  यरूशलेम लौट आए लोगों के विषय खबर मिली l कुछ काम होना ज़रूरी था l “यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुयी, और उसके फाटक जले हुए हैं” (नहेम्याह 1:3) l टूटी दीवारों के कारण वे दुश्मनों के आक्रमण की संभावनाओं से असुरक्षित थे l नहेम्याह अपने लोगों पर तरह खाकर भागीदारी करने का मन बनाया l किन्तु प्रार्थना प्राथमिक बात थी, क्योंकि नए राजा ने पत्र भेजकर यरूशलेम के निर्माण प्रयास को रोकना चाहा था (देखें एज्रा 4) l नहेम्याह ने अपने लोगों के लिए प्रार्थना की(नहेम्याह 1:5-10), और राजा से अनुमति माँगने से पूर्व परमेश्वर से सहायता मांगी (पद.11) l
क्या प्रार्थना आपका प्रतिउत्तर है? जीवन में किसी कार्य या परीक्षा का सामना करते समय यह हमेशा सबसे अच्छा तरीका है l

भयानक और खूबसूरत बातें

भय हमें स्तंभित कर सकता है l हम सब भयभीत होने के कारण जानते हैं-सबकुछ जिसने अतीत में हमें हानि पहुंचायी है, और सबकुछ जो आसानी से पुनः हमें नुक्सान पहुँचा सकती है l इसलिए कभी-कभी हम अटक जाते हैं-लौटने में असमर्थ, आगे बढ़ने में अत्यधिक भयभीत l मैं बिलकुल असमर्थ हूँ l मैं इतना तीव्र बुद्धि वाला नहीं हूँ, इतना ताकतवर नहीं हूँ, अथवा मैं पुनः इस तरह की हानि को नहीं संभाल सकता हूँ l
लेखक फ्रेडरिक बुएच्नेर जिस प्रकार परमेश्वर के अनुग्रह का वर्णन करते हैं उससे मैं मुग्द हूँ :
“एक धीमी आवाज़ जो कहती है, “यहाँ यह संसार है l भयानक और खूबसूरत बातें होंगी l भयभीत न होना l मैं तुम्हारे साथ हूँ l”
भयानक बातें होंगीं l  हमारे संसार में, चोटिल लोग दूसरों को चोट पहुंचाते हैं, कभी-कभी अत्यधिक चोट l भजनकार दाऊद की तरह, हमारे चारोंओर की बुराइयों की हमारी अपनी कहानियाँ हैं, जब, “सिंहों,” की तरह अन्य लोग हमें हानि पहुंचाते हैं (भजन 57:4) l और इसलिए हम दुखित होते हैं; हम पुकारते हैं (पद.1-2) l
किन्तु इसलिए कि परमेश्वर हमारे साथ है, हमारे साथ खूबसूरत बातें भी होंगी l जब हम अपनी चोट और भय के साथ उसके निकट जाते हैं, हम खुद को ऐसे महान प्रेम से घिरा हुआ  पाते हैं जहां कोई भी ताकत हमारी हानि नहीं कर सकती(पद.1-3), ऐसी करुणा जो स्वर्ग तक है (पद.10) l विनाश के हमारे चारों ओर होने के बावजूद, उसका प्रेम हमारे हृदयों के लिए स्थिर आश्रय है (पद.1,7) l उस दिन तक जब हम नूतन साहस प्राप्त करके, उसकी विश्वासयोग्यता का गीत गाकर उस दिन का स्वागत करेंगे (पद.8-10) l

United States

Our Story Isn't About Us.

It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

Over the…

हमारा उद्देष्य

हमारा मिशन बाइबिल के जीवन परिवर्तन करनेवाली बुद्धि/ज्ञान को समझने योग्य एवं सुगम्य बनाना है।

हमारा दर्शन

हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।