हमारी प्रतिदिन की रोटी

हमारा सुरक्षित स्थान

मेरी पहली नौकरी एक फास्टफूड रेस्टोरेंट में थी l शनिवार की शाम को, एक व्यक्ति मेरे लिए इंतज़ार करते हुए मुझसे पूछता था कि मैं काम से कब छुट्टी पाऊँगी l इससे मैं असहज महसूस करती थी l विलम्ब होने पर वह चिप्स आर्डर करता था, फिर कोई पेय, ताकि होटल का प्रबंधक उस से बाहर जाने को न कह दे l यद्यपि मेरा घर निकट ही था, फिर भी मैं कुछ पार्किंग स्थलों से और एक रेतीले मैदान से होकर निकलने से डरती थी l आख़िरकार, मध्यरात्रि में, मैंने ऑफिस के अन्दर जाकर फ़ोन किया l

और जिस व्यक्ति ने फोन का उत्तर दिया वह थे मेरे पिता, जिन्होंने बिना दोबारा सोचे अपने गरम बिस्तर से उठकर पांच मिनट के अंतराल में मुझे घर ले जाने आ गए l

उस रात मेरे पिता का आकर मेरी मदद करने की निश्चयता मुझे भजन 91 में वर्णित आश्वासन की याद दिलाता है l हमारे भ्रमित, भयभीत अथवा ज़रूरत में होने पर हमारे स्वर्गिक पिता हमेशा हमारे साथ रहते हैं l वे कहते हैं : “जब वह मुझ को पुकारेंगे, तब मैं उनकी सुनूँगा” (भजन 91:15) l वह केवल एक स्थान  नहीं है जहाँ हम सुरक्षा के लिए जाते हैं l वह हमारा आश्रय है (पद.1) l वह हमारा गढ़ है जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं (पद.2) l

भय, खतरा, अथवा अनिश्चितता में, हम परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर भरोसा कर सकते हैं कि जब हम उसे पुकारेंगे, वह हमारी सुनकर हमारी परेशानियों में हमारे साथ रहेगा (पद.14-15) l परमेश्वर हमारा सुरक्षित स्थान है l

जैसे विज्ञापित किया गया

छुट्टियों में, हम दोनों पति-पत्नी ने जॉर्जिया के शाताहुची नदी में रबर के बने नौका से सैर करने का फैसला किया l सैर की तैयारी में सैंडल, ग्रीष्मकालीन कपड़े, और एक चौड़ी टोपी पहनने के बाद हमनें पाया कि विज्ञापन के विपरीत हमारे सैर में थोड़ी गति से नौकायन करना भी शामिल था l यह तो भला था कि हम झागदार पानी में एक अनुभवी जोड़े के साथ नौकायन कर सके l उन्होंने मेरे पति को चप्पु चलाने की मूल बातें सिखाई और गंतव्य तक सुरक्षित पहुँचाने का वादा किया l मैं अपने जीवन रक्षक जैकेट के लिए धन्यवाद देती हूँ l नदी के निचले भाग के दलदली तट पर पहुँचने तक मैं चिल्लाती रही और नौका के प्लास्टिक हैंडल को जोर से पकड़ी रही l मैं नौका से तट पर उतरकर अपने थैले से पानी निचोड़ती रही और मेरे पति ने मेरे गीले कपड़ों को निचोड़ने में सहायता की l हम दोनों खूब खुश हुए, यद्यपि हमारा सैर विज्ञापन के विपरीत था l

उस सैर के विज्ञापन के विपरीत, जिसमें सैर के विषय ख़ास जानकारी नहीं थी, यीशु ने स्पष्ट रूप से अपने शिष्यों को बता दिया था कि भविष्य में कठिन दिन आएँगे l उसने उनसे कह दिया था कि वे सताए जाएंगे और शहीद भी होंगे और कि वह मृत्यु सहकर जी उठेगा l उसने अपनी विश्वसनीयता की गारन्टी देकर उन्हें आश्वस्त भी किया था कि वह निर्विवाद विजय और अनंत आशा की ओर उनकी अगुवाई करेगा (यूहन्ना 16:16-33) l

काश यीशु का अनुकरण करते समय जीवन सरल होता, किन्तु उसने स्पष्ट कर दिया था कि उसके शिष्य समस्याओं का सामना करेंगे l किन्तु उसने उनके साथ रहने का वादा किया है l परीक्षाएं हमारी सीमाओं को परिभाषित नहीं करेंगी, अथवा हमारे लिए परमेश्वर की योजना को नष्ट नहीं करेंगी, क्योंकि यीशु के पुनरुत्थान ने हमें अनंत विजय में पहुँचा दिया है l

“मनभावन!”

“मनभावन!”

एक सुबह मेरी बेटी तैयार होते समय उपरोक्त विस्मयबोधक शब्द कहे l मैं नहीं जानता वह क्या कहना चाहती थी l उसके बाद उसने अपने चचेरे भाई से मिली शर्ट को थपथपाया l उस शर्ट के सामने “मनभावन” शब्द अंकित था l मैंने उसे गले लगाया, और वह पवित्र प्रेम से मुस्करा दी l “तुम मनभावन हो!” मैंने दोहराया l उसकी मुस्कराहट और बड़ी हो गयी होती, और अगर ऐसा संभव होता, और वह उन शब्दों को दोहराते हुए कूदती हुयी चली गयी l

मैं एक सिद्ध पिता नहीं हूँ l किन्तु वह क्षण सिद्ध था l उस स्वाभाविक, खूबसूरत बातचीत में, मैंने अपनी बेटी के दीप्तिमान चेहरे में शर्तहीन प्रेम को परिभाषित देखा l वह ख़ुशी की छवि थी l उसे मालूम था कि उसके शर्ट पर अंकित शब्द उसके विषय उसके पिता की भावना से पूरी तरह मेल खा रहा था l

हममें से कितनों को गहराई से मालूम है कि हमारे स्वर्गिक पिता हमसे असीमित प्रेम करते हैं? कभी-कभी हम सच्चाई से संघर्ष करते हैं l इस्राएली संघर्ष करते थे l उनकी सोच थी कि उनकी परीक्षा का अर्थ था कि अब परमेश्वर उनसे प्रेम नहीं करता है l किन्तु यिर्मयाह 31:3 में, नबी, अतीत में परमेश्वर द्वारा कही गयी बातें याद दिलाता है : “मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ l” हमें भी ऐसा शर्तहीन प्रेम चाहिए l फिर भी चोट, निराशाएँ, और गलतियां हमें मनभावन महसूस होने नहीं देती l किन्तु सिद्ध परमेश्वर अपनी बाहें फैलाकर हमें अपने प्रेम का अनुभव करने और उसमें विश्राम करने को आमंत्रित करता है l

United States

Our Story Isn't About Us.

It all started in 1938 with a small radio program called Detroit Bible Class. With his gravelly voice, Dr. M. R. DeHaan quickly captured the attention of listeners in the Detroit area, and eventually the nation. Since then, our audience has grown to millions of people around the world who use our Bible-based resources.

Over the…

हमारा उद्देष्य

हमारा मिशन बाइबिल के जीवन परिवर्तन करनेवाली बुद्धि/ज्ञान को समझने योग्य एवं सुगम्य बनाना है।

हमारा दर्शन

हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।