दुर्घटना में एक सड़क-निर्माण अग्रजन की मृत्यु बाद, उसके प्रेम के कारण परिवार, सहकर्मी, और समाज ने अभिभूत करनेवाली हानि महसूस की l उसके कलीसिया ने शोकाकुल मित्रों और परिजनों की भीड़ के लिए अंतिम संस्कार अन्य स्थान में आयोजित की l सन्देश स्पष्ट था : टिम ने अनोखे अंदाज़ में जीवनों को छुआ था l इसलिए अनेक लोग उसकी भलाई, हास्यभाव, और जीवन के उमंग की कमी महसूस करनेवाले थे l

अंत्येष्टि बाद मैंने राजा यहोराम का जीवन याद किया l कितना अंतर! उसके आतंक का अल्पकालीन शासन 2 इतिहास में है l उसने अपने ही भाइयों और दूसरे अगुओं की हत्या की (पद .4) l यहूदा से मूर्तिपूजा करवाया l अभिलेखानुसार, “वह … सब को अप्रिय होकर जाता रहा” (पद.20) l यहोराम ने सोचा कि क्रूर बल उसके विरासत को निश्चित करेगा l वचन सदा के लिए उसे एक बुरे व्यक्ति और आत्मकेंद्रित अगुआ के रूप में याद करता है l

यीशु राजा होकर भी पृथ्वी पर सेवक होकर आया l भलाई करते हुए उसने ताकतवर लोगों की घृणा सही l सेवक-राजा ने अपना जीवन बलिदान किया l

आज, यीशु अपनी विरासत अनुकूल जीवित है l इस विरासत में शामिल लोग जानते हैं कि जीवन केवल खुद के विषय नहीं है l यह यीशु के विषय है, जो अपनी ताकतवर भुजाएँ, क्षमाशील बाहें हर एक विश्वासी के चारों ओर लपेटता है l