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Articles by टिम गस्तफसन

ऑफिसर मिग्लियो का हृदय

पीछे वहाँ पुलिस थाने में, थके हुए ऑफिसर मिग्लियो दीवार से टिक गए l एक घरेलु हिंसा के निबटारे में उनकी ड्यूटी का आधा समय निकल चुका था l उस घटना के परिणामस्वरूप एक प्रेमी(बॉयफ्रेंड) हिरासत में, और एक जवान लड़की आपातकालीन कक्ष में थी, और एक विचलित माँ सोच रही थी कि यह सब कैसे हो गया l ऑफिसर को इस मामले को सुलझाने में बहुत समय देना था l

उनके सार्जेंट ने उनसे सहानुभूति से बोला, “विक, आप कुछ नहीं कर सकते थे l” लेकिन उनके शब्द खाली गए l कुछ ऑफिसर अपनी ड्यूटी को ड्यूटी के समय ही पूरा करते हैं किन्तु विक मिग्लियो ऐसा कभी नहीं करते थे l और ऐसे कठिन मामले तो बिल्कुल नहीं l

ऑफिसर मिग्लियो यीशु मसीह की तरस को दर्शाते हैं l मसीह के शिष्य अभी-अभी उसके पास एक प्रश्न लेकर आए थे : “स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है?” (मत्ती 18:1) l एक बालक को अपने बीच खड़ा करके, उसने अपने शिष्यों से कहा, “जब तक तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तुम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे” (पद.3) l तत्पश्चात उसने बच्चों को हानि पहुंचानेवालों को एक सख्त चेतावनी दी (पद.6) l वास्तव में बच्चे यीशु के लिए इतने विशेष थे कि यीशु ने हमसे कहा, “स्वर्ग में उनके दूत मेरे स्वर्गीय पिता का मुँह सदा देखते हैं” (पद.10) l

तब, यह कितना सुखद है, कि बच्चों के लिए यीशु का प्रेम हमारे लिए उसके प्रेम से सम्बंधित है l इसी कारण वह हमें बच्चों की तरह विश्वास रखते हुए अपने पुत्र और पुत्री बनने के लिए बुलाता है l

समय में दब जाना

सुलह पर वार्ता के दौरान, किसी बुद्धिमान ने कहा, "लोगों को समय में मत रोको" उसने कहा कि लोगों की गलतियां याद रखने की प्रवृति उनसे सुधरने का अवसर छीन लेती है।

कई बार परमेश्वर पतरस को समय में रोक सकते थे। परन्तु उन्होंने ऐसा नहीं किया।I पतरस, यीशु को “सुधारने” की कोशिश करने वाला-एक आवेगी शिष्य-जिसने प्रभु की डांट भी खायी (मत्ती 16:21-23)। उसने पहले मसीह का इंकार किया (यूहन्ना 18:15-27) फिर अपनी गलती सुधार ली (21:15-19)। उसके कारण कलीसिया में जातीय मतभेद भी खड़ा हुआ था।

पतरस (कैफ़ा) उन अन्यजातियों से अलग हो गया था (गलातियों 2:11-12) जिनके साथ पहले मेलजोल रखता था, उसने कुछ यहूदियों के यह कहने पर कि विश्वासियों का खतना आवश्यक था, खतनारहित अन्यजातियों से दूरी बना ली। यह मूसा की व्यवस्था में लौटने की खतरे की घंटी थी। पौलुस ने पतरस के व्यवहार को "पाखंड" बताकर (पद 13) निर्भीकता से उसका विरोध किया जिससे इस मुद्दे का समाधान हो पाया। जिस एकता की इच्छा परमेश्वर हमसे रखते हैं उसमें पतरस उनकी सेवा में फिर लग गया।

अपने बुरे समय में रुकने की किसी को आवश्यकता नहीं। परमेश्वर के अनुग्रह में हम एक-दूसरे को अपना सकते हैं, सीख सकते हैं, और आवश्यकता पड़ने पर विरोध कर सकते हैं, और मिलकर बढ़ सकते हैं।

प्रेम करने के लिए समर्पित

यीशू मसीह के चेले बनने के बाद से, नबील कुरैशी ने अपने पाठकों को उस विश्वास के लोगों के बारे में समझाने के लिए पुस्तकें लिखी जिसे वो छोड़ आए थे। अपने सम्मान जनक शब्दों के साथ कुरैशी सर्वदा अपने लोगों के लिए अपने प्रेम का प्रदर्शन करते हैं।

उन्होंने अपनी पुस्तकों में से एक अपनी उस बहन को समर्पित की, जिसने उस समय तक यीशु को ग्रहण नहीं किया था। समर्पण संक्षिप्त परन्तु प्रभावशाली है। उन्होंने लिखा, "मैं परमेश्वर से उस दिन के लिए प्रार्थना कर रहा हूं जब हम मिलकर उनकी आराधना करेंगे।"

प्रेम ऐसा का भाव हमें रोम की कलीसिया को लिखे पौलुस के पत्र को पढ़ने से मिलता है। उसने कहा, "मुझे बड़ा शोक है...(रोमियो 9:2-3 )।

पौलुस यहूदियों से इतना प्रेम करता था यदि वे यीशु को स्वीकार कर लेते तो बदले में स्वयं   वह परमेश्वर से वंचित रहने को भी तैयार हो जाता । वह जानता था कि यीशु का त्याग करके, उसके लोग एक सच्चे परमेश्वर का इन्कार कर रहे थे। इसी बात ने उसे प्रेरित किया कि अपने पाठकों से यीशु का सुसमाचार हर किसी के साथ बाँटने की अपील करे (10:14-15)।

आज, हम प्रार्थनापूर्वक स्वयं को ऐसे प्रेम के प्रति समर्पित करें जिसमें उन लोगों के लिए दर्द हो जो हमारे निकट हैं!

मैं कर ही नहीं सकता हूँ

उदास विद्यार्थी दुखी होकर बोला, “मैं कर ही नहीं सकता हूँ l” पन्ने पर उसे केवल छोटे अक्षर, कठिन विचार, और बेरहम निर्धारित तिथि दिखाई दे रही थी l उसे अपने शिक्षक की सहायता की ज़रूरत थी l

यीशु का पहाड़ी उपदेश “अपने शत्रु से प्रेम करो” (मत्ती 5:44) पढ़कर हमें भी उसी प्रकार का अनुभव हो सकता है l  क्रोध एक बुरा हत्यारा है (पद.22) कुदृष्टि व्यभिचार के बराबर है (पद.28) l और अगर हम इन मानकों पर जीवन बिताने की हिम्मत करते हैं, तो हमारा सामना इससे होता है : तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वर्गिक पिता सिद्ध है” (पद.48) l

ऑस्वाल्ड चेम्बर्स कहते हैं, “पहाड़ी उपदेश निराशा उत्पन्न करता है” l किन्तु उन्होंने इसे अच्छा पाया, क्योंकि “निराशा के समय हम कंगाल की तरह [यीशु] के पास आकर उसे स्वीकार करना चाहते हैं l”

परमेश्वर अक्सर सहजज्ञान से हटकर कार्य करता है l जिन्हें मालुम है कि वे अपने ऊपर भरोसा करके नहीं कर सकते हैं, वे ही पमेश्वर का अनुग्रह स्वीकार करते हैं l जिस तरह प्रेरित पौलुस कहते हैं, “अपने बुलाए जाने को तो सोचो कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान . . . परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है कि ज्ञानवानों को लजित करे” (1 कुरिन्थियों 1:26-27) l

परमेश्वर की बुद्धिमत्ता में, सिद्ध शिक्षक हमारा उद्धारकर्ता भी है l जब हम विश्वास से उसके पास आते हैं, उसके पवित्र आत्मा के द्वारा हम [उसकी धार्मिकता], और पवित्रता, और छुटकारा” का आनंद लेते हैं (पद.30), और उसके लिए जीने के लिए अनुग्रह और सामर्थ्य भी पाते हैं l इसीलिए वह कह सकता था, “धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है” (मत्ती 5:3) l

गहराई का परमेश्वर

जीवविज्ञानी वार्ड एप्पलटन्स कहते है, “जब आप गहरे समुद्र में जाते हैं, और हर बार जब आप नमूना इकठ्ठा करते हैं, आपको नयी प्रजाति मिलेगी l हाल ही के एक वर्ष में,  विज्ञानियों ने समुद्र के सतह के नीचे के जीवन में 1,451 नयी प्रजातियों को पहचाना l हम समुद्र के नीचे के आधे संसार को नहीं जानते हैं l

अय्यूब 38-40 में, परमेश्वर ने अय्यूब के लाभ के लिए अपनी सृष्टि की समीक्षा की l तीन काव्यात्मक अध्यायों में, परमेश्वर ने मौसम के आश्चर्य को, कायनात की विशालता को, और अपने-अपने निवास में रहनेवाले विविध प्राणियों के विषय समझाया l ये वे वस्तुएं हैं जिनको हम ध्यान से देख सकते हैं l उसके बाद परमेश्वर ने एक पूरे अध्याय में अद्भुत लिव्यातान के विषय बताया l लिव्यातान एक भिन्न प्राणी है जिसका कवच चारों ओर के आक्रमण को विफल कर सकता है (अय्यूब 41:7,13), आकर्षक शक्ति वाला (पद.12), और उसके दांत चारों ओर से डरावने हैं (पद.14) l उसके मुँह से जलते हुए पलीते निकलते हैं, और . . . उसके नथुनों से . . . धुआँ निकलता है (पद.19-20) l “धरती पर उसके तुल्य और कोई नहीं है (पद.33) l

बिलकुल ठीक, तो परमेश्वर एक विशालकाय जंतु के विषय बातचीत करता है जिसे हम सबों ने नहीं देखा है l क्या अय्यूब 41 की मुख्य  बात यही है?
नहीं! अय्यूब 41 परमेश्वर के आश्चर्जनक चरित्र सम्बन्धी हमारी समझ को विस्तार देता है l भजनकार ने यह लिखते हुए इसे और विस्तारित किया, “. . . समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, . . . और लिव्यातान भी जिसे तू ने वहां खेलने के लिए बनाया है” (भजन 104:25-26) l  लिव्यातान का उल्लास l

हमारे पास समुद्र में खोज करने के लिए वर्तमान है l हमारे पास महाप्रतापी, रहस्मय, उल्लासित परमेश्वर के विषय जानने के लिए अनंत काल होगा l

किसी के होने का भाव

पिछली रात मैं देर तक बाहर था, जिस तरह मैं शनिवार की रात को रहता था l मैं 20 वर्ष का था, और अत्यधिक गति से परमेश्वर से दूर भाग रहा था l किन्तु अचानक, विचित्र रूप से, मैं उस चर्च में जाने को विवश हुआ जिसमें मेरे पिता पासवान थे l मैंने अपनी बदरंग जींस, पुरानी शर्ट, और खुले फीतों वाली घुटने तक की जूतियाँ पहनकर अपनी गाड़ी से चर्च गया l

मुझे अपने पिता का धर्मोपदेश याद नहीं जो उन्होंने उस दिन दिया था, किन्तु यह मुझे याद है कि वह मुझे देखकर कितना खुश हुए थे l अपनी बाहें मेरे कन्धों पर रखते हुए, उन्होंने मेरा परिचय सभी लोगों से कराया था l उन्होंने गर्व से कहा था, “यह मेरा बेटा है l” उनका आनंद परमेश्वर के प्रेम की छवि बन गयी जो पिछले कई दशकों से मेरे साथ है l

एक प्रेमी पिता के रूप में परमेश्वर की छवि पूरी बाइबल में दिखाई देती है l यशायाह 44 में, नबी पारिवारिक प्रेम के विषय परमेश्वर का सन्देश घोषित करने के लिए श्रृंखलाबद्ध चेतावनियाँ देता है l “हे मेरे चुने हुए यशूरून,” उसने कहा l “मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी संतान पर अपनी आशीष उंडेलूँगा” (पद.2-3) l यशायाह ने ध्यान दिया कि किस तरह उन वंशजों का प्रतिउत्तर पारिवारिक गर्व दर्शाएगा l कुछ लोग गर्व से कहेंगे, ‘मैं यहोवा का हूँ,’” उसने लिखा l “कुछ अपने हाथों पर प्रभु का नाम लिखेंगे” (पद.5) l

उसी तरह जैसे मेरे पिता ने मुझे स्वीकार किया, हठधर्मी इस्राएल परमेश्वर के ही थे l मेरा कोई भी व्यवहार मुझे उसके प्रेम से अलग नहीं कर सकता था l उसने मुझे हमारे स्वर्गिक पिता का हमसे प्रेम करने की झलक दी l

और सच्चाई में

वर्षों पूर्व, मैं एक ऐसे विवाह में शामिल हुआ जिसमें भिन्न देशों के दो लोगों का विवाह हुआ l संस्कृतियों का ऐसा मिलन खुबसूरत हो सकता है, किन्तु इस समारोह में मसीही परम्पराओं के साथ ऐसे विश्वास की रीति रिवाजों का समावेश था जिसमें अनेक देवताओं की उपासना शामिल थी l

नबी सपन्याह ने एक सच्चे परमेश्वर में विश्वास के साथ दूसरे धर्मों की मिलावट(जिसे कभी-कभी समन्वयता[syncretism] कहा जाता है) की स्पष्ट रूप से निंदा की l यहूदा के लोग एक सच्चे परमेश्वर की उपासना के साथ-साथ मोलेक देवता पर भी  भरोसा करते थे (स्पन्याह 1:5) l स्पन्याह उनके द्वारा मूर्तिपूजक संस्कृति को अपनाने का वर्णन करते हुए(पद.8) चेतावनी देता है कि इसके परिणाम स्वरुप परमेश्वर यहूदा के लोगों को उनके अपने देश से निर्वासित कर देगा l
इसके बावजूद भी परमेश्वर ने अपने लोगों से प्रेम करना नहीं छोड़ा l उसका न्याय यह प्रगट कर रहा था कि उनको उसकी ओर लौटना होगा l इसलिए स्पन्याह यहूदा के लोगों से कहता है “धर्म को ढूढों, नम्रता को ढूढों” (2:3) l उसके बाद परमेश्वर ने कोमल शब्दों में उनकी पूर्ण पुनर्स्थापन की प्रतिज्ञा की : “उसी समय मैं तुम्हें ले जाऊँगा, और उसी समय मैं तुम्हें इकठ्ठा करूँगा” (3:20) l
जिस विवाह में मैं शामिल हुआ था उसमें प्रगट धर्मों की मिलावट के उदहारण की निंदा करना सरल है l किन्तु वास्तविकता में, हम सभी  परमेश्वर की सच्चाई को हमारी संस्कृति की मान्यताओं के साथ सरलता से मिला देते हैं l हमें सच्चाई पर भरोसा और प्रेम के साथ खड़े रहने हेतु अपने विश्वास की जांच पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में और परमेश्वर के वचन की सत्यता के प्रकाश में करनी होगी l हमारा पिता हरेक को गले लगाता है जो आत्मा और सच्चाई से उसकी उपासना करता है (देखें यूहन्ना 23-24) l

अंतिम बुलाहट

हेलिकोप्टर पायलट के रूप में दो दशक तक अपने देश की सेवा करने के बाद, जेम्स अपने समुदाय में शिक्षक की सेवा करने हेतु अपने घर लौट आया l इसलिए कि उसे अभी भी हेलीकॉप्टरों की याद आती थी,  उसने एक स्थानीय हॉस्पिटल के साथ लोगों को खतरनाक स्थान से हटाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की सेवा करने लगा l वह काफी उम्र तक यह काम करता रहा l

अब उसे अलविदा कहने का समय आ चुका था l जब मित्रगण, परिजन, और वर्दी पहने सहकर्मी कब्रस्थान में सजग खड़े थे l एक सहकर्मी ने रेडियो पर अंतिम बार पुकारा l शीघ्र ही हवा में हेलीकॉप्टर बड़ी आवाज़ के साथ उस मेमोरियल बगीचे के ऊपर उड़ता हुआ  श्रद्धांजलि देते हुए हॉस्पिटल लौट गया l उपस्थित सेना के अधिकारी भी रो पड़े l

जब राजा शाऊल और उसका पुत्र योनातान युद्ध में मारे गए, दाऊद ने भी युगों के लिए “धनुष-गीत” नामक विलापगीत लिखा (2 शमूएल 1:17) l “हे इस्राएल, तेरा शिरोमणि तेरे ऊँचे स्थान पर मारा गया,” उसने गाया l “हाय, शूरवीर कैसे गिर पड़े हैं!” (पद.19) l योनातान दाऊद का घनिष्ठ मित्र और एक ही सेना के लिए लड़नेवाले योद्धा थे l और यद्यपि दाऊद और शाऊल शत्रु थे, दाऊद दोनों को सम्मान देता था l “उसने लिखा, “शाऊल के लिए रोओ . . . हे मेरे भाई योनातान, मैं तेरे कारण दुखित हूँ” (पद.24,26) l

सबसे अच्छे विदाई के क्षण भी बहुत कठिन होते हैं l किन्तु प्रभु पर भरोसा करनवालों के लिए, स्मरण कड़वा नहीं बल्कि बहुत मधुर होता है, क्योंकि वह हमेशा के लिए कभी नहीं होता l जिन्होंने दूसरों की सेवा की है उनका स्मरण कितना अच्छा है!

वो नहीं जो प्रतीत हो

“सुनो!” मेरी पत्नी ने मुझसे फोन पर बोलीl  “हमारे अहाते में एक बन्दर घुस आया है!” उसने फोन को रख दिया और मैंने बन्दर ही सुना l यह बहुत ही अजीब प्रतीत हो रहा था, क्योंकि जंगली बन्दर 2,000 मील दूर थे l

बाद में मेरे ससुर ने रहस्य खोल दी, “वह एक ख़ास प्रकार का उल्लू(Barred Owl) था l” वास्तविकता वह नहीं थी जो प्रतीत हो रही थी l

जब राजा सन्हेरिब की सेना ने यहूदा के राजा हिजकिय्याह को यरूशलेम की शहरपनाह के भीतर कैद कर दिया, अशूरों ने सोचा कि जीत उनकी है l सच्चाई भिन्न थी l यद्यपि अशूरों के क्षेत्र सेनापति ने मीठे शब्दों का उपयोग किया और परमेश्वर की ओर से बातें करने का ढोंग रचा, प्रभु का हाथ प्रभु के लोगों पर था l

“क्या मैं ने यहोवा के बिना कहे, इस स्थान को उजाड़ने के लिए चढ़ाई की है?” सेनापति ने पूछा (2 राजा 18:25) l यरूशलेम को हथियार डालने के लिए लुभाते समय, उसने यह भी कहा, “. . . तुम मरोगे नहीं, जीवित रहोगे” (पद.32) l

यह तो परमेश्वर के शब्द प्रतीत  हो रहे थे l किन्तु यशायाह नबी ने इस्राएलियों से प्रभु के वास्तविक शब्द कहे l परमेश्वर ने कहा, “[सन्हेरिब] इस नगर में प्रवेश करने, वरन् इस पर एक तीर भी मारने न पाएगा . . . मैं इस नगर की रक्षा करके इसे बचाऊंगा” (19:32-34; यशायाह 37:35) l उसी रात “यहोवा के दूत ने” अशूरों को नाश किया (पद.35) l

समय समय से, हमें मीठी बातें करनेवाले लोग मिलेंगे जो परमेश्वर की सामर्थ्य का इनकार करते हुए हमें “सलाह” देंगे l ये आवाज़ परमेश्वर की नहीं है l वह अपने वचन द्वारा बात करता है और पवित्र आत्मा द्वारा मार्गदर्शन देता है l उसका हाथ उसके अनुयायियों पर रहता है, और वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा l