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Articles by टिम गस्टफसन

प्रेम का दूसरा पहलु

यीशु मसीह के समय रोमी सरायों की प्रतिष्ठा इतनी खराब थी कि रब्बी लोग उनमें मवेशियों को भी रखने की अनुमति नहीं देते था l ऐसी बुरी परिस्थितियों का सामना होने पर, मसीही यात्री आतिथ्य के लिए आमतौर पर अन्य विश्वासियों को ढूंढ़ते थे l

उन आरंभिक यात्रियों में झूठे शिक्षक होते थे जो इस बात से इनकार करते थे कि यीशु ही मसीहा/अभिषिक्त थे l इस वजह से 2 यूहन्ना की पत्री अपने पाठकों से कहता है कि आतिथ्य देने से इनकार करने का भी समय है l यूहना ने एक पिछली पत्री में कहा था कि ये झूठे शिक्षक “पिता और पुत्र का इनकार करनेवाले - ख्रीष्ट विरोधी थे” (1 यूहन्ना 2:22) l 2 यूहन्ना में उसने इस पर विस्तार से पाठकों को बताया कि जो यीशु को मानता है कि वह मसीहा है “उसके पास पिता भी है और पुत्र भी” (पद.9) l

फिर उसने चेतावनी दी, “यदि कोई तुम्हारे पास आए और यह शिक्षा न दे, उसे न तो घर आने दो और न नमस्कार करो” (पद.10) l झूठे सुसमाचार का प्रचार करनेवाले की पहुनाई करना वास्तव में लोगों को परमेश्वर से अलग रखने में मदद करेगा l

यूहन्ना की दूसरी पत्री हमें परमेश्वर के प्रेम का “दूसरा पहलु” दिखाता है l हम एक ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जो सभी का खुली बाहों से स्वागत करता है l लेकिन सच्चा प्यार उन लोगों को सक्षम नहीं करता जो धोखे से खुद को और दूसरों को धोखा देते हैं l परमेश्वर पश्चाताप के साथ आनेवालों के चारों ओर अपनी बाहें लपेटता है, लेकिन वह कभी भी  झूठ को गले नहीं लगाता है l

स्वर्ग में लावा(भूराल)

फुफकारने वाला लावा(lava) का धीरे-धीरे फैलनेवाला शिकंजा जो उष्णकटिबंधीय(tropical) वनस्पतियों के किनारों का खात्मा कर रहा है को छोड़कर, सब कुछ शांत है l अधिकाँश दिनों में वे इसे “स्वर्ग” कहते हैं l इस दिन, हालाँकि, हवाई के पुना जिला में उग्र दरार/फटन ने सभी को याद दिलाया कि परमेश्वर ने इन द्वीपों को बेहद शक्तिशाली ज्वालामुखीय शक्ति से रचा है l

प्राचीन इस्राएलियों को एक अदम्य शक्ति का सामना करना पड़ा l राजा दाऊद द्वारा वाचा के संदूक को पुनः अपने कब्जे में कर लेने पर (2 शमूएल 6:1-4), एक उत्सव मनाया जाने लगा (पद.5) – जब तक कि अचानक एक व्यक्ति की मृत्यु न हो गयी जब उसने संदूक को पकड़कर स्थिर करने के लिए उसे पकड़ा (पद.6-7) l

यह हमें सोचने के लिए भरमा सकता है कि परमेश्वर ज्वालामुखी की तरह अप्रत्याशित है, जैसे संभवतः वह रचने के साथ-साथ नष्ट भी करनेवाला है l हालाँकि, यह याद रखने में मदद करता है कि परमेश्वर ने इस्राएल को ख़ास निर्देश दिया था कि उसकी उपासना में  निर्धारित वस्तुओं को कैसे संभालना है (देखें गिनती 4) l इस्राएल को परमेश्वर के निकट आने का सौभाग्य प्राप्त था, लेकिन लापरवाही से उसके निकट आने पर उसकी उपस्थिति उनके लिए अत्यधिक अभिभूत करनेवाली थी l

इब्रानियों 12 “आग से प्रज्वलित पहाड़” की याद दिलाता है, जहाँ परमेश्वर ने मूसा को दस आज्ञाएँ दी थीं l उस पहाड़ ने सभी को भयभीत कर दिया (पद.18-21) l परन्तु लेखक उस दृश्य को इसके विपरीत लाता है : “तुम . . .  नयी वाचा के मध्यस्थ यीशु . . . के पास आए हो” (पद.22-24) l यीशु – परमेश्वर का एकलौता बेटा – ने हमारे लिए अपरिचित लेकिन फिर भी प्रेमी पिता के निकट जाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया l

केवल एक स्पर्श

यह सिर्फ एक स्पर्श था, परन्तु इससे कॉलिन को पूरी तरह फर्क पड़ा l जब उसकी छोटी टीम यीशु के विश्वासियों से विद्वेष रखनेवाले क्षेत्र में परोपकारी कार्य करने की तैयारी कर रही थी, उसका तनाव बढ़ने लगा l जब उसने अपनी चिंता अपने टीम सदस्य के साथ साझा किया, उसका मित्र ठहरकर, उसके कंधे पर अपना हाथ रखा, और उसके साथ कुछ एक उत्साहवर्धन शब्द साझा किए l कॉलिन पीछे मुड़कर उस संक्षिप्त स्पर्श को एक नए मोड़ के तौर पर देखता है, एक सरल सत्य का शक्तिशाली ताकीद कि परमेश्वर उसके साथ था l

युहन्ना, यीशु का निकट मित्र और शिष्य, को सुसमाचार सुनाने के कारण पतमुस टापू में निर्वासित कर दिया गया था, जब उसने “तुरही का सा बड़ा शब्द . . . सुना”(प्रकाशितवाक्य 1:10) l इस आरंभिक घटना के बाद स्वयं प्रभु ने दर्शन दिया, और युहन्ना “उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा l” परन्तु उस डरावने पल में, उसने आराम और साहस प्राप्त की l युहन्ना लिखता है, “उसने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर कहा, ‘मत दर; मैं प्रथम और अंतिम और जीवता हूँ’” (पद.17) l

परमेश्वर हमें नयी बातें दिखाने के लिए, हमें विस्तारित करने के लिए, हमारी उन्नति के लिए हमारे आरामदायक क्षेत्र से हमें बाहर निकालता है l परन्तु वह प्रत्येक स्थिति से गुजरने के लिए साहस और आराम भी देता है l वह हमारी परीक्षाओं में हमें अकेले नहीं छोड़ेगा l उसके नियंत्रण में सब कुछ है l वह हमें अपने हाथों में थामे रखता है l

पाखंडियों के लिए परमेश्वर का ह्रदय

“यदि मेरे समूह का कोई सदस्य ऐसा करता तो मैं अत्यधिक निराश हुआ होता,” एक क्रिकेट खिलाड़ी ने दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी के विषय कहा जिसने 2016 में एक मैच में बेईमानी की थी l परन्तु केवल दो वर्षों के बाद, वही खिलाड़ी लगभग  समान अपमान में पकड़ा गया l

कुछ बातें हमें पाखण्ड से अधिक क्रुद्ध करती हैं l परन्तु उत्पत्ति 38 में यहूदा की कहानी में, यहूदा के पाखंडी व्यवहार में घातक परिणाम थे l तामार से विवाह करने के शीघ्र बाद जब उसके दो पुत्रों की मृत्यु हो गयी, यहूदा ने चुपके से उसकी ज़रूरतों को पूरी करने की जिम्मेदारी छोड़ दी (पद.8-11) l निराशा में, तामार ने एक वेश्या का रूप धारण किया और यहूदा ने उसके साथ सम्बन्ध बनाए (पद.15-16) l

फिर भी जब यहूदा को पता चला कि उसकी बहू गर्भवती है, उसकी प्रतिक्रिया प्राणघाती थी l उसने मांग की, “उसको बाहर ले आओ कि वह जलाई जाए” (पद.24) l परन्तु तामार के पास प्रमाण था कि यहूदा ही पिता था (पद.25) l

यहूदा सच्चाई का इनकार कर सकता था l इसके बदले उसने अपना पाखण्ड स्वीकार किया, और यह कहते हुए, “वह तो मुझ से कम दोषी है,” उसकी देखभाल करने की अपनी जिम्मेदारी भी स्वीकार कर ली (पद.26) l

और परमेश्वर ने यहूदा और तामार की कहानी के इस काले अध्याय को हमारे उद्धार की अपनी कहानी में बुन दिया l तामार के बच्चे (पद.29-30) यीशु के पूर्वज बनने वाले थे (मत्ती 1:2-3) l

उत्पत्ति 38 बाइबल में क्यों है? एक कारण है क्योंकि यह हमारे पाखंडी मानवीय हृदयों की कहानी है – और परमेश्वर के प्रेमी, अनुग्रही, और करुणामयी हृदय की कहानी l

मैं कौन हूँ?

डेव अपने काम का आनंद लेता था, परन्तु काफी समय से वह कुछ और के प्रति खिंचाव महसूस कर रहा था l अब वह मिशन के कार्य में कदम रखकर अपने सपने को पूरा करना चाहता था l परन्तु, उसे असाधारण रूप से गंभीर शंका होने लगी थी l  

उसने अपने एक मित्र से कहा, “मैं इसके योग्य नहीं हूँ l मिशन बोर्ड मेरी वास्तविकता को नहीं जानती है l मैं बहुत अच्छा नहीं हूँ l”

डेव की संगति काफी अच्छी है l मूसा का नाम लीजिए और हम अगुवाई, सामर्थ्य, और दस आज्ञा के विषय सोचते हैं l हम भूल जाते हैं कि एक व्यक्ति की हत्या करने के बाद मूसा मरुभूमि में भाग गया था l हम भगोड़े के रूप में उसके चालीस वर्षों को नहीं देखते l हम उसके क्रोधित होने की समस्या और परमेश्वर को हाँ कहने की उसकी तीव्र हिचकिचाहट को नज़रअंदाज़ करते हैं l

जब परमेश्वर ने आगे बढ़ने के आदेश के साथ आह्वान किया (निर्गमन 3:1-10), मूसा ने मैं-बहुत-अच्छा-नहीं-हूँ वाला पत्ता फेंका l वह परमेश्वर के साथ एक लम्बा तर्क-वितर्क भी किया, और उससे पूछा : “मैं कौन हूँ?” (पद.11) l उसके बाद परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह कौन था : “मैं जो हूँ सो हूँ” (निर्गमन 3:14) l हमारे लिए उस रहस्यमय नाम को समझाना असंभव है क्योंकि हमारा अवर्णनीय परमेश्वर मूसा को अपनी अनंत उपस्थिति बता रहा रहा है l

अपनी निर्बलता को समझना स्वास्थ्यप्रद है l परन्तु यदि हम परमेश्वर को हमें उपयोग करने से रोकने के लिए उसको एक बहाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं हम उसका अपमान करते हैं l परमेश्वर बहुत अच्छा नहीं है, यही हम वास्तव में कहना चाह रहे हैं l

प्रश्न यह नहीं कि हम कौन हैं? प्रश्न यह है कि मैं हूँ कौन है?

कीमत जो भी हो

पॉल, एपोसल ऑफ़ क्राइस्ट(Paul, Apostle of Christ)) फिल्म कलीसिया के आरंभिक दिनों के सताव पर एक निर्भीक अवलोकन है l फिल्म के बाल कलाकार भी प्रगट करते हैं कि यीशु का अनुसरण करना कितना खतरनाक था l नेकनामियों में सूचीबद्ध इन भूमिकाओं पर विचार करें : स्त्री जिसे पीटा गया; पुरुष जिसे पीटा गया; मसीही पीड़ित व्यक्ति 1, 2, और 3 l

मसीह के साथ पहचान अक्सर एक ऊंची कीमत मांगती है l और संसार के अधिकतर भाग में, यीशु का अनुसरण करना अभी भी खतरनाक है l आज कलीसिया में अनेक लोग उस प्रकार के सताव से सम्बंधित हो सकते हैं l हालाँकि, हममें से कुछ एक, समय से पूर्व ही “सताए हुए” महसूस कर सकते हैं – जब भी हमारे विश्वास का उपहास होता है हम क्रोधित होते हैं या हम शंकित होते हैं कि हमारे विश्वास के कारण हमें पदोन्नति नहीं दी गयी l

जाहिर है, सामाजिक प्रतिष्ठा का त्याग और हमारे जीवन का बलिदान करने के बीच भारी अंतर है l वास्तविक रूप से, हालांकि, स्व-हित, वित्तीय स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति हमेशा गहन मानव प्रेरक रही है l हम इसे यीशु के कुछ आरंभिक विस्वासियों के कार्यों में देखते हैं l प्रेरित युहन्ना बताता है कि, यीशु के क्रूसीकरण से कुछ दिन पहले, यद्यपि अनेक इस्राएली अब तक उसका तिरस्कार कर रहे थे (युहन्ना 12:37), बहुत से “अधिकारियों में से बहुतों ने उस पर विस्वास किया” (पद.42) l हालाँकि, “[वे] प्रगट रूप में नहीं मानते थे . . . क्योंकि मनुष्यों की ओर से प्रशंसा उनको परमेश्वर की ओर से प्रशंसा की अपेक्षा अधिक प्रिय लगती थी” (पद. 42-43) l

आज भी हम मसीह में अपने विश्वास को छुपाए रखने के लिए सामाजिक तनाव का सामना करते हैं (और उससे भी अधिक) l कीमत कुछ भी हो, हम ऐसे समाज के रूप में एक साथ खड़े रहें जो मनुष्य की प्रशंसा से अधिक परमेश्वर के अनुमोदन के खोजी हों l

पुनः युद्ध में

बचपन में उसने अपने माता-पिता को निन्दीय शब्द कहे थे l वह नहीं जानती थी कि वे शब्द उनके साथ उसका अंतिम संवाद होगा l इस समय, वर्षों की सलाह के बाद, वह अपने को माफ़ नहीं कर पा रही है l दोष भावना और पछतावा उसके जीवन को पंगु बना दिए हैं l

हम सब दोष भावना के साथ जीते हैं – उनमें से कुछ बहुत भयानक हैं l परन्तु बाइबल हमें दोष से निकलने का एक मार्ग बताती है l आइए हम एक उदाहरण देखें l

जो राजा दाऊद ने किया उसपर चाशनी नहीं लगी हुयी है l यह वह समय था जब “राजा लोग युद्ध करने को निकला करते [थे]” परन्तु “दाऊद यरूशलेम में रह गया” (2 शमूएल 11:1) l युद्ध से दूर, उसने दूसरे व्यक्ति की पत्नी को चुराया और हत्या के द्वारा इस कृत्य को छिपाने की कोशिश की (पद.2-5, 14-15) l परमेश्वर ने दाऊद के अधोमुखी पतन को रोक दिया (12:1-13), परन्तु राजा अपने पाप के बोध के साथ अपना बाकी जीवन जीने वाला था l

जब दाऊद राख से उठ रहा था, उसका सेनापति, योआब उस युद्द को जीत रहा था जिसका नेत्रित्व दाऊद को करना चाहिए था (12:26) l योआब ने दाऊद को चुनौती दी, “अब रहे हुए लोगों को इकठ्ठा करके नगर के विरुद्ध छावनी डालकर उसे भी ले ले”(पद.28) l दाऊद आख़िरकार परमेश्वर द्वारा नियुक्त स्थान राष्ट्र और अपनी सेना का अगुवा बन गया (पद.29) l

हम अपने अतीत को हमें कुचलने देकर, परिणामस्वरूप परमेश्वर से कह रहे होते हैं कि उसका अनुग्रह पर्याप्त नहीं है l हमने क्या किया है की बजाए, हमारा पिता हमें अपनी सम्पूर्ण क्षमा देता है l दाऊद की तरह, हम भी युद्ध में पुनः वापसी के लिए प्रयाप्त अनुग्रह प्राप्त कर सकते हैं l

एक क्षण में

मैं एम्बुलेंस के अन्दर था और उसका फाटक बंद होने वाला था l बाहर, मेरा बेटा मेरी पत्नी से बात कर रहा था l अपने मस्तिष्काघात के धुंध में से, मैंने उसका नाम पुकारा l जैसे कि वह उस क्षण को याद करता है, मैंने धीरे से बोला था, “अपनी माँ से कह दो मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ l”

प्रत्यक्ष रूप से मैंने सोचा यह अलविदा है, और मैं उन शब्दों को जुदाई के शब्द मानना चाहता था l उस क्षण, वही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण था l

जब यीशु अपने सबसे अंधकारमय क्षण को सह रहा था, उसने केवल यह नहीं कहा वह हमसे प्रेम करता है; उसने इसे ख़ास तरीकों से प्रगट किया l उसने उन ठट्ठा करनेवाले सैनिकों को भी दिखाया जिन्होंने उसे उसी समय क्रूसित किया था : “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34) l उसने उसके साथ क्रूसित एक अपराधी को आशा दी : “आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा” (पद.43) l अंत के समय, उसने अपनी माता की ओर देखकर उससे कहा, “यह तेरा पुत्र है,” और अपने प्रिय मित्र यूहन्ना से बोला, “यह तेरी माता है” (यूहन्ना 19:26-27) l उसके बाद, जब उसकी मृत्यु हुयी, अपने पिता पर भरोसा यीशु के प्रेम का अंतिम कार्य था : “मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ” (लूका 23:46) l

यीशु ने अपने पिता के प्रति आज्ञाकारिता दर्शाने के उद्देश्य से – और हमारे लिए अपने प्रेम की गहराई प्रगट करने के लिए - क्रूस का चुनाव किया l बिलकुल अंत तक, उसने हमें अपना अनवरत प्रेम दिखाया l

एक चिह्न से कहीं अधिक

टीम के लिए इतिहास बनाने की कगार पर आयोवा विश्वविद्यालय के बास्केटबाल के सितारे जॉर्डन बोहेनन ने जानबूझकर फ्री थ्रो को छोड़ दिया जो स्कूल के पच्चीस साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ देता। कुछ दिनों बाद 1993 में आयोवा के क्रिस स्ट्रीट ने लगातार चौंतीस फ्री थ्रो लिए, परन्तु उन्होंने अपना जीवन एक कार-दुर्घटना में गवाँ दिया। बोहेनन ने उनके रिकॉर्ड को न तोड़कर स्ट्रीट की याद का सम्मान करने का चुनाव किया। 

बोहेनन ने अपनी बढ़ोत्तरी से महत्वपूर्ण बातों की एक तीव्र जागरुकता का प्रदर्शन किया। हम ऐसे ही मूल्य युवा योद्धा दाऊद के जीवन में भी देखते हैं। अपनी छिन्न-भिन्न सेना के साथ एक गुफ़ा में छिपे हुए, दाऊद को अपने गृह-नगर के कूएँ से पानी पीने की लालसा की, परन्तु उस स्थान पर भयानक फिलिश्तियों का कब्ज़ा था (2 शमूएल 23:14–15)।

साहस के एक स्तब्ध कर देने वाले कार्य में दाऊद के तीन योद्धा “पलिश्तियों की छावनी पर टूट पड़े” पानी भरा और उसे दाऊद के सामने ले आए। परन्तु दाऊद इसे पीने के लिए अपने पास नहीं ला पाया। परन्तु इसके स्थान पर उसने “यहोवा के सामने अर्घ करके उंडेला और कहा “क्या मैं उन मनुष्यों का लहू पीऊँ जो अपने प्राणों पर खेलकर गए थे?” ( पद 16–17)।

एक ऐसे संसार में जो उन लोगों को प्रतिफल देता है जो वह सबकुछ हड़प लेते हैं, जो वे हड़प सकते हैं फिर प्रेम और बलिदान के कार्य कितने शक्तिशाली हो सकते हैं! ऐसे कार्य मात्र चिह्नों से कहीं अधिक होते हैं।