शेबना का कब्र
तमिल राजनेता करुणानिधि चाहते थे कि उन्हें चेन्नई में मरीना समुद्र तट/Marina beach के पास उनके गुरु सीएन अन्नादुरैके बगल में दफनाया जाए, लेकिन वह नहीं चाहते थे कि उनका तर्कवादी(rationalist) विश्वास प्रणाली के अनुसार कोई धार्मिक संस्कार किया जाए l
हालाँकि एक विशाल स्मारक उनके विश्राम स्थल को चिह्हित करता है, लेकिन उनकी विश्वास प्रणाली ने उन्हें मानव अस्तित्व की सच्चाइयों से सीमित नहीं किया, जो कि जीवन और मृत्यु सच्चाई है l गंभीर सच्चाई यह है कि जीवन हमारे बिन, हमारे जाने के प्रति उदासीन होकर चलता रहता है l
यहूदा के इतिहास में एक कठिन समय के दौरान, शेबना, “राजघराने के पद पर नियुक्त भंडारी” ने मृत्यु के बाद अपनी विरासत सुनिश्चित करने के लिए अपने लिए एक कब्र बनवाई l परन्तु परमेश्वर ने, अपने नबी यशायाह के द्वारा, उससे कहा, “यहाँ तेरा कौन है कि तू ने अपनी कबर यहाँ खुदवायी है? तू अपनी कबर ऊंचे स्थान में खुदवाता और अपने रहने का स्थान चट्टान में खुदवाता है?(यशायाह 22:16) l नबी ने उससे कहा, “[परमेश्वर] तुझे मरोड़कर गेंद के समान लम्बे चौड़े देश में फेंक देगा . . . वहाँ तू मरेगा”(पद.18) l
शेबना बात से चूक गया था l मायने यह नहीं रखता कि हमें कहाँ दफनाया जाएगा; महत्वपूर्ण यह है कि हम किसकी सेवा करते हैं l जो लोग यीशु की सेवा करते हैं उन्हें यह असीम सांत्वना मिलती है: “जो मृतक प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्य हैं” (प्रकाशितवाक्य 14:13) l हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जो हमारे “प्रस्थान/मृत्यु” के प्रति कभी उदासीन नहीं रहता है l वह हमारे आगमन की आशा करता है और घर में हमारा स्वागत करता है! टिम गस्टफसन
यीशु में पुनर्जीवन
लियोनार्डो दा विंची को हम अनेक गुणों का, सर्वगुणसंपन्न व्यक्ति के रूप में जानते हैं। उनके बौद्धिक कौशल ने अध्ययन और कला के कई क्षेत्रों में प्रगति की। फिर भी लियोनार्डो ने “हमारे इन दुखद दिनों” का ज़िक्र किया और अफसोस जताया कि हम “लोगों के दिमाग में अपनी कोई भी यादें छोड़े बिना” ही मर जाते हैं।
लियोनार्डो ने कहा, “जब मैंने सोचा कि मैं जीना सीख रहा हूं, मैं मरना सीख रहा था।” उसने जितना सोचा होगा, वह उससे कहीं ज्यादा सच्चाई के करीब था। मरना सीखना ही जीवन का मार्ग है। यरूशलेम में यीशु के विजयी प्रवेश के बाद (जिसे हम अब पाम संडे (खजूरों का इतवार) के रूप में मनाते हैं; यहुन्ना 12:12-19 देखें), उन्होंने कहा, “जब तक गेहूँ का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है।परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है” (पद 24)। उन्होंने यह बात अपनी मृत्यु के बारे में कही, लेकिन हम सभी को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया: “जो अपने प्राण को प्रिय जानता है,वह उसे खो देता;और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है; वह अनंत जीवन के लिए उस की रक्षा करेगा” (पद 25)।
प्रेरित पौलुस ने बपतिस्मा के माध्यम से मसीह के साथ हमारे “गाड़े जाने” के बारे में लिखा, जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मृतकों में से जीवित हो गए, हमे भी जीने के लिए एक नया जीवन मिला। क्योंकि अगर उनकी मृत्यु में हम उनके साथ एक हुए हैं, तो निश्चय उनके पुनरुत्थान में भी उनके साथ एक होंगे (रोमियों 6:4-5)।
अपनी मृत्यु के माध्यम से, यीशु हमें पुनर्जन्म प्रदान करते हैं - पुनर्जागरण का वास्तविक अर्थ! उन्होंने अपने पिता के साथ अनन्त जीवन का मार्ग बनाया है। टिम गुस्टाफसन
आत्म-सम्मान बढ़ाना
मैगी की युवा सहेली चौंकानेवाले ढंग से तैयार होकर चर्च में आई l हालाँकि किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए था; वह एक वैश्या थी l मैगी की आगंतुक बेचैनी से अपनी सीट पर बैठकर, बार-बार अपनी बहुत छोटी स्कर्ट को खींचती हुयी अपनी बाहों को सचेतावस्था में अपने चारों ओर मोड़ रही थी l
“ओह, क्या तुम्हें ठण्ड लग रही है?” मैगी ने चतुराई से इस बात से ध्यान हटाते हुए पूछा कि उसने कैसे कपड़े पहने हैं l “यह! मेरा शॉल ले लो l”
मैगी ने दर्जनों लोगों को चर्च में आने के लिए आमंत्रित करके और उन्हें सहज महसूस कराने में मदद करके यीशु से परिचित कराया l सुसमाचार उसके लुभावने तरीकों के द्वारा चमकता था l वह सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करती थी l
जब धार्मिक अगुवों ने एक स्त्री को व्यभिचार के कठोर (और सटीक) आरोप के साथ यीशु के सामने घसीट लाए, तो मसीह ने उस पर तब तक ध्यान नहीं दिया जब तक कि उसने आरोप लगाने वालों को दूर नहीं किया l उन लोगों के जाने के बाद वह उसे डांट सकता था l इसके बजाय, उसने दो सरल प्रश्न पूछे : “वे कहाँ गए?” और “क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी?” (यूहन्ना 8:10) l निसंदेह, बाद वाले प्रश्न का उत्तर नहीं था l इसलिए यीशु ने उसे एक संक्षिप्त कथन में सुसमाचार दिया: “मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता l” और फिर निमंत्रण : “जा, और फिर पाप न करना” (पद.11) l
लोगों के प्रति वास्तविक प्रेम की सामर्थ्य को कम मन आंकिये—प्रेम का वह प्रकार जो निंदा करने से इंकार करता है, यहाँ तक कि यह हर किसी को गरिमा और क्षमा प्रदान करता है l टिम गस्टफसन
लोबान का अर्थ
आज एपिफेनी (अवतरण-दिवस—गैर-मसीहियों के लिए मसीह का प्रकटन)है, वह दिन जो गीत "हम तीन राजा पूरब की शान" में वर्णित घटना की याद दिलाता है, जब गैर-यहूदी बुद्धिमान लोग बालक यीशु से मुलाकात किये थे l फिर भी वे राजा नहीं थे, वे सुदूर पूर्व से नहीं थे (जैसा कि पूरब) का पहले मतलब था), और इसकी संभावना भी नहीं है कि वे तीन थे।
हालाँकि, उपहार तीन थे, और गीत प्रत्येक को मानता है। जब मजूसी बैतलहम पहुंचे, "[उन्होंने] अपना-अपना थैला खोलकर [यीशु को] सोना, लोबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाई" (मत्ती 2:11)। उपहार यीशु के मिशन(कार्य) का प्रतीक हैं। सोना राजा के रूप में उसकी भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। पवित्र-स्थान में जलाए गए धूप के साथ मिश्रित लोबान, उनके परमेश्वरत्व को दर्शाता है l गन्धरस, जिसका उपयोग शवों पर लेप लगाने के लिए किया जाता है, हमें ठहराव देता है।
गीत का चौथा पद कहता है, "मुर्र मैं लाया, मौत का निशान/ होगा वह, ग़मगीन परेशान/दुःख उठाके, खून बहा के, होगा वह कुर्बान।" हम कहानी में ऐसा कोई दृश्य नहीं लिखे होते, लेकिन परमेश्वर ने ऐसा किया। यीशु की मृत्यु हमारे उद्धार का केंद्र है। हेरोदेस ने यीशु को तब मारने का भी प्रयास किया जब वह बच्चा था (पद.13)।
गीत का अंतिम पद तीन विषयों को एक साथ जोड़ता है: "शाह खुदा क़ुरबानी वह भी/ शौकत, कुदरत, उल्फत उसकी l" यह क्रिसमस की कहानी को पूरा करता है, हमारी प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है : "कुल जहां में, और आसमान में ज़ाहिर हो जायेगीl" टिम गस्टफसन
पुत्र भी उदित होता है
अर्नेस्ट हेमिंग्वे के पहले समपूर्ण उपन्यास में अत्यधिक शराब पीने वाले दोस्तों को दिखाया गया है, जिन्होंने हाल ही में प्रथम विश्व युद्ध को झेला है। उनमें युद्ध की तबाही के शाब्दिक और लाक्षणिक रूप से घावों के निशान हैं जिसे वे सहन करते हैं और पार्टियों, भव्य साहसिक कार्यों और आसपास सोने के द्वारा इसका सामना करने की कोशिश करते हैं। दर्द के असर को कम करने के लिए हमेशा शराब होती है। कोई भी खुश नहीं है।
हेमिंग्वे की पुस्तक द सन आल्सो राइजेज का शीर्षक सीधे सभोपदेशक 1:5 से आता है। सभोपदेशक में, राजा सुलैमान स्वयं को "शिक्षक" (पद.1) के रूप में संदर्भित करता है। वह देखता है, "सब कुछ व्यर्थ है" (पद. 2) और पूछता है, "उन सब परिशम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?” (पद.3) l सुलैमान ने देखा कि सूर्य कैसे उगता और डूबता है, हवा इधर-उधर बहती है, नदियाँ कभी संतुष्ट न होने वाले समुद्र में बहती रहती हैं (पद.5-7)। अंततः, सब कुछ भुला दिया जाता है (पद.11)।
हेमिंग्वे और सभोपदेशक दोनों ही हमें केवल इस जीवन के लिए जीने की व्यर्थता से सामना कराते हैं। हालाँकि, सुलैमान ने अपनी पुस्तक में दिव्य के उज्ज्वल संकेत बुने हैं। वहाँ स्थिरता है—और वास्तविक आशा है। सभोपदेशक हमें वैसे ही दिखाता है जैसे हम वास्तव में हैं, लेकिन यह परमेश्व को भी वैसा ही दिखाता है जैसा वह है। सुलैमान ने कहा, "जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा" (3:14) और इसमें हमारी बड़ी आशा है। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने पुत्र, यीशु का उपहार दिया है।
परमेश्वर के बिना, हम एक अंतहीन, कभी संतुष्ट न होने वाले समुद्र में बह रहे हैं। उसके उदित पुत्र, यीशु के द्वारा, हमारा उसके साथ मेल हो गया है, और हमें अपना अर्थ, मूल्य और उद्देश्य पता चलता है।
टिम गुस्ताफसन
यीशु को समर्पित करना
1951 में, जोसेफ स्टालिन के डॉक्टर ने उन्हें अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपने काम का बोझ कम करने की सलाह दी। सोवियत संघ के शासक ने चिकित्सक पर जासूसी करने का आरोप लगाया और उसे गिरफ्तार करवा दिया। जिस अत्याचारी ने झूठ बोलकर इतने लोगों पर अत्याचार किया था, वह सच का सामना नहीं कर सका और - जैसा कि उसने कई बार किया था - उसने उस व्यक्ति को हटा दिया जिसने उसे तथ्य बताए थे। फिर भी सत्य की जीत हुई। 1953 में स्टालिन की मृत्यु हो गई।
यिर्मयाह भविष्यवक्ता, जिसे अपने भयानक भविष्यवाणियों के लिए गिरफ्तार किया गया और जंजीरों में रखा गया (यिर्मयाह 38:1–6; 40:1), यहूदा के राजा को ठीक-ठीक बताया कि यरूशलेम का क्या होगा। उसने राजा सिदकिय्याह से कहा, “जो कुछ मैं तुझसे कहता हूँ उसे यहोवा की बात समझकर मान ले” (38:20)। शहर के आसपास की सेना के सामने आत्मसमर्पण करने में विफल रहने से स्थिति और भी बदतर हो जाएगी। “तेरी सब स्त्रियाँ और बाल-बच्चे कसदियों के पास निकाल कर पहुँचाए जाएँगे,” यिर्मयाह ने चिताया “और तू भी कसदियों के हाथ से न बचेगा” (पद 23)। सिदकिय्याह उस सत्य पर कार्य करने में असफल रहा। आखिरकार बेबीलोनियों ने राजा को पकड़ लिया, उसके सभी बेटों को मार डाला, और शहर को जला दिया (अध्याय 39)।
एक मायने में, हर इंसान सिदकिय्याह की दुविधा का सामना करता है। हम पाप और घटिया विकल्पों के अपने स्वयं के जीवन की दीवारों में फँसे हुए हैं। अक्सर, हम उन लोगों से बचकर काम को बदतर बना देते हैं जो हमें हमारे बारे में सच्चाई बताते हैं । हमें केवल उसकी इच्छा के प्रति समर्पण करने की आवश्यकता है जिसने कहा, "मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।" (यूहन्ना 14:6)।
—टिम गुस्ताफसन
भाग्यशाली जूते
बहुत देर हो चुकी थी, टॉम ने अपने लड़ाकू जूतों के नीचे ठंडी “क्लिक” महसूस की। अचानक से वह बहुत तेजी से छलांग मार कर दूर हट गया। जमीन के नीचे छिपा हुआ घातक यन्त्र फटा नहीं। बाद में, विस्फोटक आयुध निपटान दल ने मौके से अस्सी पाउंड उच्च विस्फोटक बरामद किए। टॉम ने उन जूतों को तब तक पहना जब तक वे टूट नहीं गए। “मेरे भाग्यशाली जूते,” वह उन्हें “मेरे भाग्यशाली जूते,” बुलाता है।
टॉम ने शायद उन जूतों को सिर्फ़ अपने बाल-बाल बचने को याद करने के लिए उन जूतों पकड़ा होगा। लेकिन लोग अक्सर वस्तुओं को “भाग्यशाली” मानने या उन्हें अधिक आत्मिक लेबल “धन्य” देने के लिए प्रलोभित होते हैं। खतरा तब आता है जब हम किसी वस्तु को - यहाँ तक कि किसी प्रतीक को भी - परमेश्वर के आशीर्वाद के स्रोत के रूप में श्रेय देते हैं।
इस्राएलियों ने इसे कठिन तरीके से सीखा। पलिश्ती सेना ने उन्हें युद्ध में हरा दिया था। किसी ने "यहोवा की वाचा का संदूक" लेकर दोबारा लड़ने के बारे में सोचा (1 शमूएल 4:3)। यह एक अच्छा विचार प्रतीत हुआ (पद 6–9) आख़िरकार, वाचा का सन्दूक एक पवित्र वस्तु थी।
परन्तु इस्राएलियों का दृष्टिकोण गलत था। अपने आप में, सन्दूक उनके लिए कुछ भी नहीं ला सकता था। एक सच्चे परमेश्वर की उपस्थिति के बजाय किसी वस्तु में अपना विश्वास रखने से, इस्राएलियों को और भी बुरी हार का सामना करना पड़ा, और शत्रु ने सन्दूक पर कब्ज़ा कर लिया (पद 10–11)।
स्मृति चिन्ह जो हमें प्रार्थना करने या परमेश्वर की भलाई के लिए धन्यवाद देने की याद दिलाते हैं, ठीक हैं। लेकिन वे कभी आशीर्वाद का स्रोत नहीं है। वह परमेश्वर है - और केवल परमेश्वर ही है।
— टिम गुस्ताफसन
यीशु अनुकरण करने के योग्य है
रोनित एक धार्मिक लेकिन गैर मसीही परिवार से आती है। उनकी आत्मिक चर्चाएं बड़ी ही नीरस व सैद्धान्तिक होती थी। उसने बाइबल का अध्ययन करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, लगातार, वह यीशु में मसीहा के रूप में विश्वास की ओर बढ़ती गई। रोनित उस निर्णायक क्षण का वर्णन करते हैं: "मैंने अपने दिल में एक स्पष्ट आवाज़ सुनी, जो कह रही थी 'तुमने बहुत कुछ सुन लिया है। तुमने बहुत कुछ देख लिया है। अब बस विश्वास करने का समय है।'" लेकिन रोनित को एक समस्या का सामना करना पड़ा: उसके पिता। "मेरे पिता ने इस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त की जैसे माउंट वेसुवियस फट गया हो," वह याद करती हैं
जब यीशु इस पृथ्वी पर चलते थे तो उनके पीछे भीड़ चलती थी (लूका 14:25) हमें स्पष्ट रूप से पता नहीं है कि भीड़ क्या ढूंढ रही थी, परंतु यीशु चेलों की तलाश में था । और उसके लिए कीमत चुकानी पड़ती है । “यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्नी और बच्चों और भाइयों और बहिनों वरन् अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता", यीशु ने कहा (पद 26)। उसने एक गढ़ बनाने के विषय कहानी कही । "पहले बैठकर खर्च न जोड़े....? उसने पूछा (पद 28)। यीशु का मतलब अपने परिवार से घृणा करना नहीं था परंतु यह कहना चाह रहे थे कि इन सबसे बढ़कर हमें उसका चुनाव करना है । उन्होंने कहा, "तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्याग न दे, वह मेरा चेला नहीं हो सकता"(पद 33)।
रोनित अपने परिवार को बहुत प्रेम करती हैं फिर भी उसने कहा चाहे कितनी भी कीमत क्यों ना हो मैंने जान लिया है कि वह योग्य है। यीशु आपका मार्गदर्शन कर रहे हैं तो उनका अनुसरण करने के लिए आपको क्या त्यागने की आवश्यकता हो सकती है?
- टिम गुस्ताफ़सन
मैं कौन हूँ?
किज़ोम्बो बैठा कैम्प फयर(camp fire) देख रहा था और अपने जीवन के बहुत बड़े प्रश्नों पर विचार कर रहा था। मैंने क्या हासिल किया है? उसने सोचा। और बहुत ही जल्दी उसे उत्तर मिला: वास्तव में बहुत ज्यादा नहीं। वह अपनी जन्म भूमि पर वापस आ गया था, उस स्कूल में सेवा कर रहा था जिसे उसके पिता ने वर्षावन (rain forest) में शुरू किया था। वह अपने पिता की दो गृहयुद्धों से बचने की सशक्त कहानी भी लिखने की कोशिश कर रहा था। मैं यह सब करने की कोशिश करने वाला कौन होता हूं?
किज़ोम्बो की शंकाएँ मूसा की तरह लगती हैं। परमेश्वर ने हाल में मूसा को एक मिशन दिया था: "इसलिए मैं तुझे फ़िरौन के पास भेजता हूँ कि तू मेरी इसराएली प्रजा को मिस्र से निकल ले आए" (निर्गमन 3:10)। मूसा ने उत्तर दिया, "मैं कौन हूँ?" (पद-11) मूसा के कुछ कमजोर बहाने के बाद, परमेश्वर ने उससे पूछा, "तेरे हाथ में वह क्या है?" वह एक लाठी थी (4:2) परमेश्वर के निर्देश पर, मूसा ने उसे ज़मीन पर फेंक दिया। लाठी सांप बन गया. अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति के विरुद्ध, मूसा ने उसे उठाया। और फिर से, वह एक लाठी बन गयी (पद- 4)। परमेश्वर की शक्ति में, मूसा फिरौन का सामना कर सकता था। उसके हाथ में वस्तुतः मिस्र के "देवताओं" में से एक - एक साँप-था। मिस्र के देवता एक सच्चे परमेश्वर के लिए कोई ख़तरा नहीं थे।
किज़ोम्बो ने मूसा के बारे में सोचा, और उसे परमेश्वर का उत्तर महसूस हुआ: तुम्हारे पास मैं और मेरा वचन है। उसने उन दोस्तों के बारे में भी सोचा जिन्होंने उसे अपने पिता की कहानी लिखने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि अन्य लोग उसके जीवन में परमेश्वर की शक्ति के बारे में जान सकें। वह अकेला नहीं था। अपने आप में, हमारा सर्वोत्तम प्रयास भी अपर्याप्त हैं। लेकिन हम उस परमेश्वर की सेवा करते हैं जो कहता है, “निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा।" (3:12)।
-टिम गुस्ताफसन