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Articles by टिम गस्टफसन

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यह 1854 का समय था, और लन्दन में कोई चीज़ हज़ारों लोगों की जान ले रही थी l यह ख़राब हवा होगी, लोगों ने सोचा l और वास्तव में, जैसे ही अत्यधिक गंदगी से भरी हुयी थेम्स नदी पर बेमौसम गर्मी ने प्रभाव डाला, बदबू इतनी बढ़ गयी कि वह “द ग्रेट स्टिंक(The Great Stink) के नाम से जाना जाने लगा l 

लेकिन सबसे बुरी समस्या हवा की नहीं थी l डॉ. जॉन स्नो के शोध से पता चलता है कि दूषित पानी हैज़ा (कॉलरा/cholera) की महामारी का कारण था l 

हम मनुष्य लम्बे समय से एक और संकट से परिचित हैं—एक जिसकी बदबू ऊँचे स्वर्ग तक पहुँचती है l हम एक टूटे संसार में रहते हैं—और हम इस समस्या की गलत पहचान करने की ओर प्रवृत होते हैं, समस्या की जगह इसके लक्षणों का इलाज करते हैं l बुद्धिमान सामाजिक कार्यक्रम और नीतियाँ कुछ अच्छा करती हैं, लेकिन वे समाज की बुराइयों के मूल कारण को रोकने में लाचार हैं—वह है हमारा पापी हृदय!

जब यीशु ने कहा, “ऐसी कोई वस्तु नहीं जो मनुष्य में बाहर से समाकर उसे अशुद्ध करे,”वह शारीरिक बिमारियों का सन्दर्भ नहीं दे रहा था (मरकुस 7:15) l बल्कि, वह हममें से प्रत्येक की आध्यात्मिक स्थिति को प्रकट कर रहा था l हमारे भीतर छिपी हुयी बुराइयों की एक सूची बताते हुए (पद.21-22), उसने कहा “जो वस्तुएँ मनुष्य के भीतर से निकलती हैं, वे ही उसे अशुद्ध करती हैं,” (पद.15) l 

“देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ,” दाऊद ने लिखा (भजन 51:5) l उसका विलाप ऐसा है जिसे हम सब आवाज़ दे सकते हैं l हम सब आरम्भ से ही टूटे हुए हैं l इसलिय दाऊद प्रार्थना करता है, “हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर” (पद.10) l प्रतिदिन, हमें यीशु की आत्मा द्वारा सृजित एक नया हृदय चाहिए l 

लक्षणों का इलाज करने के बदले, हम यीशु को स्त्रोत को पवित्र करने दें l 

परमेश्वर बारीकियों में

राहुल और निशा के लिए यह सप्ताह काफी खराब रहा। राहुल के दौरे अचानक और बुरे हो गये, और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। महामारी के बीच, उनके चार छोटे बच्चे घर के अंदर बहुत अधिक समय बिताने के कारण व्यथित थे। उसके ऊपर, निशा बचे हुए किराने के सामान से एक अच्छा भोजन नहीं ले सकी। विचित्र रूप से, उस समय, उसे गाजर खाने की लालसा हुई।

एक घंटे बाद दरवाजे पर दस्तक हुई। वहाँ उनके मित्र अनीता और अभिषेक पूरे भोजन के साथ खड़े थे जो उसने परिवार के लिए तैयार किया था। गाजर सहित।

वे कहते हैं कि शैतान बारीकियों में है? नहीं। यहूदी लोगों के इतिहास में एक अद्भुत कहानी दिखाती है कि परमेश्वर बारीकियों में है। फिरौन ने आज्ञा दी थी, ".. इब्रियों के जितने बेटे उत्पन्न हो उन सभी को तुम नील नदी में डाल देना,.." (निर्गमन 1:22)। वह नरसंहार विकास एक उल्लेखनीय बारीकियों में बदल गया। मूसा की माँ ने वास्तव में एक रणनीति के साथ अपने बच्चे को नील नदी में "फेंका"। और फिरौन की बेटी नील नदी से उस बच्चे को छुड़ाती है जिसे परमेश्वर अपने लोगों को छुड़ाने के लिए प्रयोग करता है। वह मूसा की माँ को बच्चे को पालने के लिए पैसे भी देती है! (2:9)।

एक दिन इस नवेली यहूदी राष्ट्र से एक वादा किया हुआ बच्चा आएगा। उनकी कहानी अद्भुत विवरणों और दैवीय विडंबनाओं से भरपूर होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यीशु पाप की हमारी गुलामी से एक छुड़ौती प्रदान करेगा।

यहां तक कि—विशेष रूप से—अंधेरे समय में, परमेश्वर बारीकियों में है। जैसा कि निशा आपको बता सकती है, "परमेश्वर मेरे लिए गाजर लाए!"

छोटा बच्चा

एक साल से अधिक समय तक, उसका कानूनी नाम "छोटा बच्चा" था। एक सुरक्षा गार्ड द्वारा खोजा गया, जिसने उसकी रोने की आवाज़ सुनी, बेबी बॉय को छोड़ दिया गया था - कुछ घंटों का और केवल एक थैले में लपेटा गया - एक अस्पताल की पार्किंग में।

उसकी खोज के तुरंत बाद, सोशल सर्विसेज ने उन लोगों को बुलाया जो एक दिन उसके हमेशा के लिए परिवार बन जाएंगे। दंपति ने उसे लिया और उसे ग्रेसन कहा(यह उसका असली नाम नहीं)। अंत में, गोद लेने की प्रक्रिया पूरी हुई, और ग्रेसन का नाम आधिकारिक हो गया। आज आप एक आनंदमय बच्चे से मिल सकते हैं जो उत्सुकता से आपको बातचीत में लगा सकता है। आप कभी यह अनुमान नहीं लगा सकते कि उसे एक बार थैले में छोड़ दिया गया था।

अपने जीवन में काफी समय बाद, मूसा ने परमेश्वर के चरित्र और इस्राएल के लोगों के लिए उसने जो किया, उसकी समीक्षा की। मूसा ने उनसे कहा, " तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा।" (व्यवस्थाविवरण 10:15)। इस प्रेम का बहुत चौड़ा दायरा था। मूसा ने कहा, " अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशीयों से प्रेम करता है की उन्हें भोजन और वस्त्र देता है। " (पद 18)। “वही तुम्हारे स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है" (पद 21)।

चाहे वह गोद लेने के माध्यम से हो या केवल प्रेम और सेवा के माध्यम से, हम सभी को परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित करने के लिए बुलाया गया है। वह प्रेमी दम्पति हाथ और पैर बने जिसे परमेश्वर ने इस्तेमाल किया किसी ऐसे व्यक्ति तक अपने प्रेम को पहुँचाने के लिए जिस पर किसी का ध्यान नहीं गया हो और  लावारिस हो। हम उसके हाथ और पैर के रूप में भी सेवा कर सकते हैं।

असामान्य युग

एक मूर्तिपूजक के रूप में अपना अधिकांश जीवन जीने के बावजूद, रोमी सम्राट कॉन्सटेंटाइन (एडी 272-337) ने सुधारों को लागू किया जो मसीहियों के व्यवस्थित उत्पीड़न को रोका। उन्होंने पूरे इतिहास को ईसा पूर्व (मसीह से पहले) और एडी (एनो डोमिनि, या "प्रभु के वर्ष में") में विभाजित किया और हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले कैलेंडर को भी स्थापित किया।

इस प्रणाली को धर्मनिरपेक्ष बनाने के एक कदम ने लेबल को सीई (सामान्य युग) और ईसा पूर्व (सामान्य युग से पहले) में बदल दिया है। कुछ लोग इसे एक और उदाहरण के रूप में इंगित करते हैं की दुनिया ईश्वर को कैसे बाहर रखती है।

लेकिन परमेश्वर कही नहीं गये हैं। नाम के बावजूद, हमारा कैलेंडर अभी भी पृथ्वी पर यीशु के जीवन की वास्तविकता के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

बाइबल में, एस्तेर का किताब असामान्य है क्योंकि इसमें परमेश्वर का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। फिर भी यह जो कहानी बताती है वह परमेश्वर के छुटकारे में से एक है। अपनी मातृभूमि से निर्वासित, यहूदी लोग उसके प्रति उदासीन देश में रहते थे। एक शक्तिशाली सरकारी अधिकारी उन सब को मार डालना चाहता था (एस्तेर 3:8-9, 12-14)।  फिर भी एस्तेर रानी और उसके चाचा मोर्दकै के द्वारा, परमेश्वर ने अपने लोगों को छुड़ाया, एक कहानी जो आज भी पुरीम के यहूदी अवकाश में मनाई जाती है। (9:20-32)।

इस बात की परवाह किए बिना कि अब संसार की प्रतिक्रिया क्या है, यीशु ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने हमें एक असामान्य युग से परिचित कराया—एक सच्ची आशा और वादों से भरा हुआ। हमें बस इतना करना है कि हमें अपने चारों ओर देखना है। हम उसे देखेंगे।

जीवन भर का सिलसिला

शिबुमोन और एलिजाबेथ सपेरों के हाशिए पर रहने वाले समुदाय के जीवन को बदलने के लिए एक महान खोज के लिए केरल के हरे-भरे राज्य से दिल्ली के बाहरी इलाके में चले गए। उन्होंने मंडी गांव (दिल्ली और गुड़गांव की सीमा पर) के बच्चों को शिक्षित करने के लिए अपने जीवन के कार्यप्रणाली को बदल दिया। उन्होंने  ऐसा मार्ग चुना जिससे  लोग कम सफर करते है इस उम्मीद में कि एक दिन बच्चे अपने माता-पिता का पेशा न अपनाकर सभ्य जीवन जीएंगे।

यहोयादा नाम आसानी से पहचाना नहीं जाता है, फिर भी यह जीवन भर परमेश्वर के प्रति समर्पण का पर्याय है। उसने राजा योआश के शासनकाल के दौरान याजक के रूप में सेवा की, जिसने अधिकांश भाग के लिए अच्छी तरह से शासन किया - यहोयादा के लिए धन्यवाद।

जब योआश केवल सात वर्ष का था, तब यहोयादा उसे सही राजा के रूप में स्थापित करने में उत्प्रेरक था (२ राजा ११:१-१६)। लेकिन यह कोई सत्ता हथियाना नहीं था। योआश के राज्याभिषेक के समय, यहोयादा ने "यहोवा और राजा और प्रजा के बीच वाचा बाँधी कि वे यहोवा की प्रजा होंगे" (पद १७)। उसने अपने शब्द रखते हुए, अति आवश्यक सुधार लागू किए। "जब तक यहोयादा जीवित रहा, तब तक होमबलि यहोवा के भवन में नित्य चढ़ाए जाते थे" (२ इतिहास २४:१४)। अपने समर्पण के लिए, यहोयादा को  "राजाओं के साथ दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई" (पद १६)।

यूजीन पीटरसन ऐसे ईश्वर-केंद्रित जीवन को "एक ही दिशा में एक लंबी आज्ञाकारिता" कहते हैं। विडंबना यह है कि यह ऐसी आज्ञाकारिता है जो सबसे अलग खड़ी होती है ऐसे संसार में जो प्रसिद्धि, शक्ति और आत्म-पूर्ति पर झुका हुआ है।

इसमें एक साथ

जब कोविड -19 संकट आया तब  केली ब्रेन कैंसर से जूझ रही थी। फिर उसके दिल और फेफड़ों के आसपास तरल पदार्थ विकसित हो गया और उसे फिर से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। महामारी के कारण उसका परिवार नहीं आ सका। उसके पति, डेव ने कुछ करने की ठानी।

प्रियजनों को एक साथ इकट्ठा करते हुए, डेव ने उन्हें बड़े चिन्ह बनाने के लिए कहा जिनमें सन्देश लिखें हो। उन सब ने ऐसा ही किया। मास्क पहने हुए, बीस लोग अस्पताल के बाहर सड़क पर खड़े थे और सन्देश पकड़े हुए थे: "सबसे अच्छी माँ!" "लव यू।" "हम आपके साथ हैं।"एक नर्स की मदद से केली चौथी मंजिल की खिड़की तक पहुँची। उनके पति ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "हम केवल एक फेसमास्क और एक हाथ लहराते हुए देख पा रहे  थे, लेकिन यह एक सुंदर फेसमास्क और लहराता हुआ हाथ था।"

अपने जीवन के आखिरी दिनों में, प्रेरित पौलुस ने अकेलापन महसूस किया जब वह एक रोमी जेल में बंद था। उसने तीमुथियुस को लिखा, "जाड़ों से पहले आने का जतन करना" (2 तीमुथियुस 4:21)। फिर भी पौलुस पूरी तरह से अकेला नहीं था। उसने कहा, "मेरे पक्ष में तो प्रभु ने खड़े होकर मुझे शक्ति दी।” (पद 17)। और यह भी स्पष्ट है कि उसका अन्य विश्वासियों के साथ कुछ उत्साहजनक संपर्क था। उसने तीमुथियुस से कहा, "यूबुलुस, पूदेंस, लिनुस तथा क्लौदिया तथा और सभी भाईयों का तुझे नमस्कार पहुँचे।" (पद 21)।

हम समुदाय के लिए बनाए गए हैं, और जब हम संकट में होते हैं तो हम इसे सबसे अधिक उत्सुकता से महसूस करते हैं। आप किसी ऐसे व्यक्ति के लिए क्या कर सकते हैं जो आज पूरी तरह से अकेला महसूस कर रहा हो?

वाटिका का परमेश्वर

तब उस पुरूष और उसकी पत्नी ने यहोवा परमेश्वर का शब्द सुना, जब वह दिन की ठंडक में वाटिका में टहल रहा था। उत्पत्ति 3:8

कई साल पहले, नंदिता और उनके पति विशाल ने अपने उच्च वेतन वाली, तनावपूर्ण, आईटी नौकरियों को छोड़ने और एक सरल, तनाव मुक्त कृषि जीवन को अपनाने का सचेत निर्णय लिया। वे एक शांत पहाड़ी शहर में चले गए ताकि वे परमेश्वर और एक दूसरे के साथ समय बिता सकें। प्रकृति से घिरे हुए उन्होंने जीवन जीने के एक शांत तरीके का अनुभव किया– “वाटिका” में वापस जाने का एक तरीका।

अदन–वह (पैराडाइज़) स्वर्गलोक था जिसे परमेश्वर ने शुरू में हमारे लिए बनाया था। इस वाटिका में आदम और हव्वा नियमित रूप से परमेश्वर से मिलते थे, जब तक कि उन्होंने शैतान के साथ अपना समझौता नहीं किया (उत्पत्ति 3:6–7 देखें) । वह दिन अलग था। “तब आदम और उसकी पत्नी ने यहोवा परमेश्वर का शब्द सुना, जब वह दिन की ठंडक में चल रहा था, और वे वाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए” (पद 8)। जब परमेश्वर ने पूछा कि उन्होंने क्या किया है, तो आदम और हव्वा एक दूसरे पर दोष लगाने लगे। उनके इनकार के बावजूद, परमेश्वर ने उन्हें वहां नहीं छोड़ा। उसने आदम और उसकी पत्नी के लिए चमड़े के अगंरखे बनाए और उन्हें पहिना दिए (पद 21), एक बलिदान जो मृत्यु का संकेत देता था जो यीशु हमारे पापों को ढकने के लिए सहन करेगा।

परमेश्वर ने हमें अदन तक वापस जाने का रास्ता नहीं दिया। उसने हमें उसके साथ पुन: स्थापित संबंध में आगे बढ़ने का मार्ग दिया। हम उस वाटिका में नहीं लौट सकते। लेकिन हम वाटिका के परमेश्वर के पास लौट सकते हैं।

प्रबल उपाय

सजा हुआ औपचारिक धनुष और तरकश हमारे घर की दीवार पर वर्षों से लटका हुआ था। मुझे यह अपने पिता से विरासत में मिला था, जो उन्हें एक यादगारी के रूप में मिला जब हम प्रचारकों (मिशनरी) के रूप में एक जनजाति के बीच सेवा कर रहे थे।

फिर एक दिन वहाँ का एक मित्र हमसे मिलने आया। उसने धनुष को देखा तो उसके चेहरे पर एक अजीब सा भाव आया। बंधी हुई एक छोटी सी वस्तु की ओर इशारा करते हुए उसने कहा, "यह एक बुत है - एक जादूई आकर्षण। मुझे पता है कि इसमें कोई शक्ति नहीं है, लेकिन मैं इसे अपने घर में नहीं रखूंगा। जल्दी से हमने धनुष से वह जादुई आकर्षण काट दिया और उसे हटा दिया। हम नहीं चाहते थे कि हमारे घर में परमेश्वर के अलावा किसी भी और चीज की आराधना हो।

यरूशलेम में राजा योशिय्याह, अपने लोगों के लिए परमेश्वर की अपेक्षाओं के बारे में बहुत कम ज्ञान के साथ बड़ा हुआ। जब महायाजक ने लंबे समय से उपेक्षित मंदिर (2 राजा 22:8) में व्यवस्था की पुस्तक को फिर से खोजा, तो योशिय्याह इसे सुनना चाहता था। जैसे ही उसने सीखा कि परमेश्वर ने मूर्तिपूजा के बारे में क्या कहा था, उसने यहूदा को परमेश्वर की व्यवस्था के अनुपालन में लाने के लिए व्यापक परिवर्तन करने का आदेश दिया - केवल एक धनुष से एक आकर्षण काटने की तुलना में कहीं अधिक कठोर परिवर्तन (पड़ें 2 राजा 23:3-7)।

विश्वासियों के पास आज राजा योशिय्याह से कहीं अधिक है — बहुत, बहुत अधिक। हमें निर्देश देने के लिए हमारे पास पूरी बाइबल है। एक दूसरे की संगति है। और हमारे पास पवित्र आत्मा की महत्वपूर्ण परिपूर्णता है, जो चीजों को प्रकाश में लाती है, चाहे वह बड़ी हो या छोटी जिसे हम अन्यथा अनदेखा कर सकते हैं।

युक्तिकरण को अस्वीकार करना

एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने एक चालक से पूछा कि क्या वह जानती है कि उसने उसे क्यों रोका। "नहीं पता!" उसने हैरानी से कहा। "मैडम, आप गाड़ी चलाते समय मैसेज कर रही थीं," अधिकारी ने धीरे से उससे कहा। "नहीं, नहीं!" उसने सबूत के तौर पर अपना सेल फोन पकड़कर विरोध किया। "यह एक ईमेल है।"

ईमेल भेजने के लिए सेल फोन का उपयोग करने से हमें उस कानून से मुक्ति का रास्ता नहीं मिलता जो गाड़ी चलाते समय मैसेज करने को प्रतिबंधित करता है! कानून का उद्देश्य मैसेज करने से रोकना नहीं है; पर गाड़ी चलाते समय ध्यान को भटकने से रोकना है।

यीशु ने उन दिनों के धार्मिक अगुवों पर और भी बुरे चालाकी से बचाव के रास्ते निकालने का दोष लगाया। "तुम्हारे पास परमेश्वर की आज्ञाओं को दरकिनार करने का एक अच्छा तरीका है," उन्होंने सबूत के रूप में "अपने पिता और माता का आदर" करने की आज्ञा का हवाला देते हुए कहा (मरकुस 7:9-10)। धार्मिक भक्ति की आड़ में अपने पाखंडी चोगे के नीचे ये धनी अगुवे अपने परिवारों की उपेक्षा कर रहे थे। उन्होंने सरलता से अपने धन को "परमेश्वर को समर्पित" और तत्क्षण के रूप में घोषित किया, तथा बुढ़ापे में अपने माता और पिता की सहायता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यीशु तुरंत समस्या की जड़ पर पहुंचे। "आप अपनी परंपरा से परमेश्वर के वचन को अमान्य करते हैं," उन्होंने कहा (पद 13)। वे परमेश्वर का आदर नहीं कर रहे थे; वे अपने माता-पिता का अनादर कर रहे थे।

युक्तिकरण इतना सूक्ष्म हो सकता है। इसके साथ हम जिम्मेदारियों से बचते हैं, स्वार्थी व्यवहार की सफ़ाई देते हैं, और परमेश्वर की सीधी आज्ञाओं को अस्वीकार करते हैं। इससे तो हम केवल स्वयं को धोखा दे रहे हैं। यीशु हमें उसके पिता के भले निर्देशों का पालन करने के लिए हमारी स्वार्थी प्रवृति के बदले में आत्मा का मार्गदर्शन पाने का अवसर देते है।