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Articles by टिम गस्टफसन

प्रबल उपाय

सजा हुआ औपचारिक धनुष और तरकश हमारे घर की दीवार पर वर्षों से लटका हुआ था। मुझे यह अपने पिता से विरासत में मिला था, जो उन्हें एक यादगारी के रूप में मिला जब हम प्रचारकों (मिशनरी) के रूप में एक जनजाति के बीच सेवा कर रहे थे।

फिर एक दिन वहाँ का एक मित्र हमसे मिलने आया। उसने धनुष को देखा तो उसके चेहरे पर एक अजीब सा भाव आया। बंधी हुई एक छोटी सी वस्तु की ओर इशारा करते हुए उसने कहा, "यह एक बुत है - एक जादूई आकर्षण। मुझे पता है कि इसमें कोई शक्ति नहीं है, लेकिन मैं इसे अपने घर में नहीं रखूंगा। जल्दी से हमने धनुष से वह जादुई आकर्षण काट दिया और उसे हटा दिया। हम नहीं चाहते थे कि हमारे घर में परमेश्वर के अलावा किसी भी और चीज की आराधना हो।

यरूशलेम में राजा योशिय्याह, अपने लोगों के लिए परमेश्वर की अपेक्षाओं के बारे में बहुत कम ज्ञान के साथ बड़ा हुआ। जब महायाजक ने लंबे समय से उपेक्षित मंदिर (2 राजा 22:8) में व्यवस्था की पुस्तक को फिर से खोजा, तो योशिय्याह इसे सुनना चाहता था। जैसे ही उसने सीखा कि परमेश्वर ने मूर्तिपूजा के बारे में क्या कहा था, उसने यहूदा को परमेश्वर की व्यवस्था के अनुपालन में लाने के लिए व्यापक परिवर्तन करने का आदेश दिया - केवल एक धनुष से एक आकर्षण काटने की तुलना में कहीं अधिक कठोर परिवर्तन (पड़ें 2 राजा 23:3-7)।

विश्वासियों के पास आज राजा योशिय्याह से कहीं अधिक है — बहुत, बहुत अधिक। हमें निर्देश देने के लिए हमारे पास पूरी बाइबल है। एक दूसरे की संगति है। और हमारे पास पवित्र आत्मा की महत्वपूर्ण परिपूर्णता है, जो चीजों को प्रकाश में लाती है, चाहे वह बड़ी हो या छोटी जिसे हम अन्यथा अनदेखा कर सकते हैं।

युक्तिकरण को अस्वीकार करना

एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी ने एक चालक से पूछा कि क्या वह जानती है कि उसने उसे क्यों रोका। "नहीं पता!" उसने हैरानी से कहा। "मैडम, आप गाड़ी चलाते समय मैसेज कर रही थीं," अधिकारी ने धीरे से उससे कहा। "नहीं, नहीं!" उसने सबूत के तौर पर अपना सेल फोन पकड़कर विरोध किया। "यह एक ईमेल है।"

ईमेल भेजने के लिए सेल फोन का उपयोग करने से हमें उस कानून से मुक्ति का रास्ता नहीं मिलता जो गाड़ी चलाते समय मैसेज करने को प्रतिबंधित करता है! कानून का उद्देश्य मैसेज करने से रोकना नहीं है; पर गाड़ी चलाते समय ध्यान को भटकने से रोकना है।

यीशु ने उन दिनों के धार्मिक अगुवों पर और भी बुरे चालाकी से बचाव के रास्ते निकालने का दोष लगाया। "तुम्हारे पास परमेश्वर की आज्ञाओं को दरकिनार करने का एक अच्छा तरीका है," उन्होंने सबूत के रूप में "अपने पिता और माता का आदर" करने की आज्ञा का हवाला देते हुए कहा (मरकुस 7:9-10)। धार्मिक भक्ति की आड़ में अपने पाखंडी चोगे के नीचे ये धनी अगुवे अपने परिवारों की उपेक्षा कर रहे थे। उन्होंने सरलता से अपने धन को "परमेश्वर को समर्पित" और तत्क्षण के रूप में घोषित किया, तथा बुढ़ापे में अपने माता और पिता की सहायता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यीशु तुरंत समस्या की जड़ पर पहुंचे। "आप अपनी परंपरा से परमेश्वर के वचन को अमान्य करते हैं," उन्होंने कहा (पद 13)। वे परमेश्वर का आदर नहीं कर रहे थे; वे अपने माता-पिता का अनादर कर रहे थे।

युक्तिकरण इतना सूक्ष्म हो सकता है। इसके साथ हम जिम्मेदारियों से बचते हैं, स्वार्थी व्यवहार की सफ़ाई देते हैं, और परमेश्वर की सीधी आज्ञाओं को अस्वीकार करते हैं। इससे तो हम केवल स्वयं को धोखा दे रहे हैं। यीशु हमें उसके पिता के भले निर्देशों का पालन करने के लिए हमारी स्वार्थी प्रवृति के बदले में आत्मा का मार्गदर्शन पाने का अवसर देते है।

दृष्टिकोण में बदलाव

1854 में, एक युवा रूसी आर्टिलरी (तोपखाने) अधिकारी ने युद्ध के मैदान में अपनी तोप के पहाड़ी स्थान के नीचे होने वाले नरसंहार को देखा। लियो टॉल्स्टॉय ने लिखा, “यह एक अजीब तरह का आनंद है, लोगों को एक दूसरे को मारते हुए देखना। और फिर भी हर सुबह और हर शाम मैं  देखने में घंटों बिताता हूं।”

टॉल्स्टॉय का दृष्टिकोण जल्द ही बदल गया। सेवस्तोपोल शहर में तबाही और पीड़ा को पहली बार देखने के बाद उन्होंने लिखा, “आप एक ही बार में सब कुछ समझते हैं, और आपने जो पहले देखा है, उसकी तुलना में काफी अलग, गोली चलने की उन आवाज़ों का महत्व जो आपने शहर में सुना था।”

भविष्यवक्ता योना एक बार नीनवे की तबाही को देखने के लिए एक पहाड़ी पर चढ़ गया था (योना 4:5)। उसने अभी अभी उस क्रूर शहर को परमेश्वर के मडराते हुये न्याय के बारे में चेतावनी दी थी। परन्तु नीनवे ने पश्चाताप किया, और योना निराश हुआ। हालाँकि, शहर फिर से बुराई में पड़ गया, और एक सदी बाद भविष्यवक्ता नहूम ने इसके विनाश का वर्णन किया। “उनके  सैनिकों की ढाल लाल है। उनकी वर्दियाँ सुर्ख लाल हैं। उनके रथ युद्ध के लिये पंक्तिबद्ध हो गये हैं और वे ऐसे चमक रहे हैं जैसे वे आग की लपटें हों। उनके घोड़े चल पड़ने को तत्पर हैं” (नहूम 2:3) ।

नीनवे के लगातार पाप के कारण परमेश्वर ने दंड भेजा। परन्तु उसने योना से कहा था “नीनवे में 120,000 से अधिक लोग आत्मिक अंधकार में जी रहे हैं। क्या मुझे इतने बड़े शहर के लिए खेद नहीं होना चाहिए? (योना 4:11)।

परमेश्वर का न्याय और प्रेम एक साथ चलते हैं। नहूम बुराई के परिणाम दिखाता है। योना हम में से सबसे बुरे लोगों के लिए भी परमेश्वर की गहरी करुणा को प्रकट करता है। परमेश्वर के दिल की इच्छा है कि हम पश्चाताप करें और उस करुणा को दूसरों तक पहुंचाएं।

 

ब्रह्मांड के साथ छेड़ छाड़

1980 के दशक की शुरुआत में, एक प्रमुख खगोलशास्त्री, जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता था, ने लिखा, “तथ्यों की एक सामान्य ज्ञान व्याख्या से पता चलता है कि एक सुपर बुद्धि ने भौतिकी के साथ साथ रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के साथ छेड़ छाड की  है।” इस वैज्ञानिक की नज़र में सबूतों से पता चलता है कि ब्रह्मांड में हम जो कुछ भी देखते हैं, उसे किसी चीज़ ने डिज़ाइन किया था। उन्होंने कहा, “प्रकृति में बोलने लायक कोई अंधी ताकत नहीं है।” दूसरे शब्दों में, हम जो कुछ भी देखते हैं वह ऐसा लगता है जैसे किसी ने इसकी योजना बनाई थी। और फिर भी, खगोलशास्त्री नास्तिक बना रहा।

3000 साल पहले, एक और बुद्धिमान व्यक्ति ने असमान देखा और एक अलग निष्कर्ष निकाला। “जब मैं आकाश को जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तारागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं, तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” दाऊद ने आश्चर्य किया (भजन संहिता 8:3–4) 

फिर भी परमेश्वर हमारी बहुत परवाह करता है।ब्रह्मांड अपने बुद्धिमान डिज़ाइनर की कहानी कहता है, वह उत्तम बुद्धि जिसने हमारे मन को बनाया और हमें उसके कामों पर  विचार करने के लिए यहाँ रखा। यीशु और उसकी सृष्टि  के द्वारा, परमेश्वर को  जाना जा सकता है। पौलुस ने लिखा, “वह तो (मसीह) सारी सृष्टि में पहिलौठा है, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं” (कुलिस्सियों 1:15–16)।

ब्रह्मांड के साथ वास्तव में छेड छाड की गई। बुद्धिमान डिज़ाइनर की पहचान वहाँ की खोज करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति द्वारा खोजी जा सकती है।

ऐसा नहीं

“मैं किसी भी प्रकार से नहीं चाहता था कि ऐसा हो,” एक व्यक्ति ने, अपने मित्र की सराहना करते हुए कहा जिसकी मृत्यु युवावस्था में हो गयी थी l उसके शब्दों ने मानवता के हृदय की स्थायी पुकार को मार्मिकता दी l मृत्यु हममें से हर एक को चौंकती है और आघात पहुंचती है l जो हो नहीं सकता हम उसे ज्यों का त्यों करने को तरसते हैं l 

यीशु की मृत्यु के बाद “ऐसा न हो” की चाहत उसके अनुयायियों की भावनाओं को अच्छी तरह दर्शाती है l सुसमाचार उन डरावने घंटों के विषय बहुत कम बताते हैं, लेकिन वे कुछ विश्वासयोग्य मित्रों की क्रियाओं का वर्णन ज़रूर करते हैं l 

एक धार्मिक अगुवा, युसूफ ने, जो गुप्त विश्वासी था (यूहन्ना19:38 को देखें), अचानक से हिम्मत जुटाकर पिलातूस से यीशु की देह मांग लिया(लूका 23:52)। क्षण भर के लिए सोच कर देखिए कि भयानक क्रुसीकरण से किसी मृत व्यक्ति को उतारकर दफ़नाने के लिए तैयार करना कितना कठिन रहा होगा (पद.53) l उन महिलाओं की भक्ति और दिलेरी देखिए जो यीशु मसीह के साथ उसके हर कदम पर यहां तक कि कब्र तक उसके साथ रहीं ( पद 55)। मृत्यु के सामने, कभी न मरनेवाला प्रेम!

ये अनुयायी पुनरुत्थान की अपेक्षा नहीं कर रहे थे; वे तो बहुत उदास थे। इस अध्याय का अंत बिना किसी आशा के साथ होता है, मात्र एक निराशा, “तब उन्होंने लौटकर [यीशु की देह पर लेप लगाने के लिए] सुगन्धित वस्तुएं और इत्र तैयार किया; और सब्त के दिन उन्होंने आज्ञा के अनुसार विश्राम किया” (पद.56) l 

वे कम ही जानते थे कि सब्त के बाद का विराम इतिहास के सबसे नाटकीय दृश्य का मंच तैयार कर रहा था l यीशु कल्पना से परे करने जा रहे थे l वह मृत्यु को ही “ऐसा नहीं है” करने जा रहे थे।

“और रात्री का समय था”

एली वीजे़ल का उपन्यास नाईट(Night) हमें यहूदियों के सत्यानाश(Holocaust) से स्पष्ट रूप से सामना कराता है l नाज़ी मृत्यु शिविरों में खुद के अनुभवों पर आधारित, विजेल का वृतांत बाइबल की निर्गमन की कहानी को पलटता है l जबकि पहले फसह के पर्व पर मूसा और इस्राएली लोग दासत्व से निकल गए (निर्गमन 12), वीजे़ल नाज़ी लोगों द्वारा फसह के पूर्व के बाद यहूदी अगुओं की गिरफ्तारी बताता है l 

कदाचित हम वीजेल और उसके दू:खद व्यंगोक्ति की आलोचना करें, विचार करें कि बाइबल में उसी प्रकार साजिश में मोड़ वर्णित है l फसह की रात, यीशु, परमेश्वर के लोगों को पीड़ा से मुक्त करना चाहता था, उसके स्थान पर अपने हत्यारों को उसे गिरफ्तार करने की अनुमति देता है l 

यूहन्ना हमें यीशु की गिरफ्तारी से पहले का वह पवित्र दृश्य उपलब्ध कराता है। जो उसके साथ होनेवाला था, उससे “आत्मा में व्याकुल” होकर उसने अंतिम भोज में अपने विश्वासघात की भविष्यवाणी की (यूहन्ना 13:21) l फिर अपने एक कार्य द्वारा जिसे शायद ही हम समझ सकते हैं, मसीह ने उसे गिरफ्तार करनेवाले को रोटी परोसी l वर्णन इस प्रकार है : “वह टुकड़ा लेकर तुरंत बाहर चला गया; और यह रात्री का समय था” (पद.30) l इतिहास का सबसे बड़ा अन्याय होने जा रहा था, फिर भी यीशु ने घोषणा की, “अब मनुष्य के पुत्र की महिमा हुयी है, और परमेश्वर की महिमा उसमें हुई है” (पद.31) l अब कुछ ही घंटों में चेले घबराहट, हार, और त्यागे जाने का अनुभव करेंगे l परंतु यीशु ने परमेश्वर की योजना को पूर्ण होते देखा जो उसी तरह पूरी होनी थी l 

जब ऐसा लगता है कि अंधकार जीतने वाली है, तो हम याद कर सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने अंधकारमय रात का सामना किया और उसे हराया। वह हमारे साथ चलता है l और रात सदैव नहीं रहेगी।

अतीत में खोया हुआ

अपने राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार और अपव्यय से परेशान होकर कोरिया के राजा योंगजो (1694-1776) ने चीजों को बदलने का फैसला किया। कूड़े करकट के साथ काम की वस्तु को फेंकने के एक उत्कृष्ट मामले में, उसने अत्यधिक भव्य सोने के धागे की कढ़ाई की पारंपरिक कला प्रतिबंधित कर दिया। जल्द ही, इसका परिणाम यह हुआ कि अद्वितीय सोने का धागा बनाने की तकनीक जल्द ही स्मृति से गायब हो गई।

2011 में, प्रोफेसर सिम येओन-ओके लंबे समय से खोई हुई परंपरा को पुनः प्राप्त करना चाहते थे। यह अंदाज़ा लगाते हुए कि सोने की पत्ती को कला बनाने के कागज पर चिपकाया गया होगा और फिर पतले धागों में हाथ से काटा होगा, वह एक प्राचीन कला रूप को पुनर्जीवित करते हुए इस प्रक्रिया को फिर से बनाने में सक्षम थी।

निर्गमन की पुस्तक में, हम निवास के निर्माण के लिए किए गए अत्यधिक उपायों के बारे में सीखते हैं—जिसमें हारून के याजकीय वस्त्र बनाने के लिए सोने का धागा भी शामिल है। कुशल कारीगरों ने "नीले, बैंजनी और लाल रंग के सूत और महीन मलमल बनाने के लिए सोने की पतली चादरें बनाई और धागों को काट डाला" (निर्गमन 39:3)। उस सभी उत्तम शिल्प कौशल का क्या हुआ? क्या वस्त्र खराब हो गए? क्या उन्हें अंततः लूट के रूप में ले जाया गया? क्या यह सब व्यर्थ था? बिल्कुल नहीं! सभी प्रयास किए गए क्योंकि परमेश्वर ने इसे करने के लिए विशिष्ट निर्देश दिए थे।

परमेश्वर ने हम में से प्रत्येक को भी कुछ करने के लिए दिया है। यह दयालुता का एक सरल कार्य हो सकता है—एक दूसरे की सेवा करके उसे वापस लौटाना। अंत में हमारे प्रयासों का क्या होगा, इसके बारे में हमें स्वयं की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है (1 कुरिन्थियों 15:48)। हमारे पिता के लिए किया गया कोई भी कार्य अनंत काल तक खींचा हुआ धागा बन जाता है।

सितारों की चुनौती

बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में, इतालवी कवि एफ. टी. मारिनेटी ने फ्यूचरिज्म की शुरुआत की, एक कलात्मक आंदोलन जिसने अतीत को खारिज कर दिया, सुंदरता के पारंपरिक विचारों का उपहास किया, और इसके बजाय मिशनरी  का महिमामंडन किया। 1909 में, मारिनेटी ने अपना भविष्यवाद का घोषणापत्र लिखा, जिसमें उन्होंने “महिलाओं के लिए अवमानना” की घोषणा की, “मुट्ठी से प्रहार” की प्रशंसा की और कहा, “हम युद्ध का महिमामंडन करना चाहते हैं।“ घोषणापत्र का निष्कर्ष है: “दुनिया के शिखर पर खड़े होकर हम एक बार फिर सितारों के लिए अपनी ढीठ चुनौती का शुभारंभ करते हैं!”

मारिनेटी के घोषणापत्र के पांच साल बाद, आधुनिक युद्ध शुरू हो गया। प्रथम विश्व युद्ध महिमा नहीं लाया। 1944 में मारिनेटी की खुद मृत्यु हो गई। सितारों ने, अभी भी जगह पर, कोई ध्यान नहीं दिया।

किंग डेविड ने सितारों का काव्यात्मक रूप से गाया लेकिन नाटकीय रूप से अलग दृष्टिकोण के साथ। उन्होंने लिखा, “जब मैं तुम्हारे आकाश पर, तुम्हारी उंगलियों के काम, चाँद और सितारों पर विचार करता हूँ, जिन्हें तुमने स्थापित किया है, तो मानव जाति क्या है कि तुम उनके प्रति सचेत हो, मनुष्य कि तुम उनकी परवाह करते हो?” (भजन 8:3-4)। दाऊद का प्रश्न अविश्वास का नहीं बल्कि विस्मयकारी नम्रता का है। वह जानता था कि इस विशाल ब्रह्मांड को बनाने वाले परमेश्वर वास्तव में हमारे प्रति सचेत हैं। वह हमारे बारे में हर विवरण को नोटिस करता है – अच्छा, बुरा, विनम्र, ढीठ।

सितारों को चुनौती देना व्यर्थ है। इसके बजाय, वे हमें चुनौती देते हैं कि हम अपने सिरजनहार की तारीफ करें।

हम जो चाहते हैं उसे प्राप्त करना

हारून बूर उत्सुकता से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से टाई-ब्रेकिंग वोट के परिणाम का इंतजार कर रहे थे। राष्ट्रपति पद के लिए 1800 की दौड़ में थॉमस जेफरसन के साथ गतिरोध में, बूर के पास यह विश्वास करने का कारण था कि सदन उन्हें विजेता घोषित करेगा। हालाँकि, वह हार गया, और उसकी आत्मा में कड़वाहट आ गई। अपनी उम्मीदवारी का समर्थन नहीं करने के लिए अलेक्जेंडर हैमिल्टन के खिलाफ शिकायतों का पोषण करते हुए, बूर ने चार साल से भी कम समय के बाद एक बंदूक द्वंद्वयुद्ध में हैमिल्टन को मार डाला। हत्या से नाराज, उसके देश ने उससे मुंह मोड़ लिया, और बूर एक बूढ़े व्यक्ति की मृत्यु हो गई।

राजनीतिक सत्ता के नाटक इतिहास का एक दुखद हिस्सा हैं। जब राजा दाऊद मृत्यु के निकट था, उसके पुत्र अदोनिय्याह ने दाऊद के सेनापति और एक प्रमुख याजक को राजा बनाने के लिए भर्ती किया (1 राजा 1:5–8)। परन्तु दाऊद ने सुलैमान को राजा के रूप में चुना था (v 17)। भविष्यवक्ता नातान की मदद से, विद्रोह को दबा दिया गया (v 11-53)। उसकी राहत के बावजूद, अदोनिय्याह ने सिंहासन को चुराने के लिए दूसरी बार साजिश रची, और सुलैमान ने उसे मार डाला (2:13-25)।

हममें से कितना इंसान वह चाहता है जो हमारा सही नहीं है! हम सत्ता, प्रतिष्ठा, या संपत्ति के लिए कितनी भी मेहनत क्यों न करें, यह कभी भी काफी नहीं होता है। हम हमेशा कुछ और चाहते हैं। यीशु से कितना अलग, जिसने “मृत्यु के आज्ञाकारी होकर, यहां तक ​​कि क्रूस पर की मृत्यु” के द्वारा अपने आप को दीन किया! (फिलिप्पियों 2:8)।

विडंबना यह है कि स्वार्थी रूप से अपनी महत्वाकांक्षाओं का पीछा करने से हमें कभी भी हमारी सच्ची, गहरी लालसा नहीं मिलती है। परिणाम को परमेश्वर पर छोड़ देना ही शांति और आनंद का एकमात्र मार्ग है।