क्रिसमस से पहले एक व्यस्त दिन, एक बूढ़ी औरत मेरे भीड़-भाड़ वाले पड़ोस के डाकघर के मेल काउंटर पर पहुंची। उसकी धीमी गति को देखकर, धैर्यवान डाक क्लर्क ने उसका अभिवादन किया, “अच्छा नमस्ते, युवा स्त्री!” उसका शब्द मित्रवत था, लेकिन कुछ लोग उन्हें इस तरह सुन सकते हैं कि “युवा होना” बेहतर है।
बाइबल हमें यह देखने के लिए प्रेरित करती है कि अधिक आयु हमारी आशा को प्रेरित कर सकता है। जब शिशु यीशु को अर्पण करने के लिए युसूफ और मरियम द्वारा मन्दिर में लाया जाता है (लूका 2:23; देखें निर्गमन 13:2, 12), दो वृद्ध विश्वासी बीच में अचानक अहम् स्थान लेते हैं।
क्रिसमस से पहले एक व्यस्त दिन पर, एक वृद्ध महिला मेरे भीड़ भरे पड़ोस के डाकघर में मेल काउंटर पर आई। उसकी धीमी गति को देखते हुए, धैर्यवान डाक क्लर्क ने उसका अभिवादन किया, “ नमस्ते, युवा महिला!” उसके शब्द दोस्ताना थे, लेकिन कुछ लोगों ने उन्हें यह कहते हुए सुना होगा कि “युवा” बेहतर है। बाइबल हमें यह देखने के लिए प्रेरित करती है कि वृद्धावस्था हमारी आशा को प्रेरित कर सकती है। जब शिशु यीशु को यूसुफ और मरियम द्वारा मंदिर में लाया जाता है, ताकि उसका अभिषेक किया जा सके (लूका 2:23; निर्गमन 13:2, 12 देखें), दो वृद्ध विश्वासी अचानक केंद्र में आ जाते हैं।
पहला, सिमोन—जो वर्षों से मसीहा को देखने का इंतजार कर रहा था— “ तो उस ने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा,” “हे स्वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्ति से विदा करता है। क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है।जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। (लूका 2:28-31) l
परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में आपने बुज़ुर्ग विश्वासियों से कौन सा पाठ सीखा है? उनकी आशा आपको कैसे प्रेरित करती है?फिर जब शिमोन मरियम और यूसुफ से बातें कर रहा था तो हन्नाह, एक “बहुत बूढ़ी” भविष्यद्वक्तिन आती है (पद.36)। एक विधवा जो सिर्फ सात साल विवाहित रही, वह चौरासी साल की उम्र तक भवन में ही रहती थी, भवन को कभी नहीं छोड़ा, वह “उपवास और प्रार्थना कर करके रात–दिन उपासना किया करती थी।” जब उसने यीशु को देखा, वह “उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उस बालक के विषय में बातें करने लगी।” (पद.37-38) और प्रभु की स्तुति करने लगी। ये दो आशा से भरपूर दास हमें याद दिलाते हैं कि हमें बड़ी आशा के साथ—परमेश्वर की प्रतीक्षा करना कभी बंद नहीं करनी चाहिए—भले ही हमारी उम्र कुछ भी क्यों न हो।
परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में आपने बुज़ुर्ग विश्वासियों से कौन सा पाठ सीखा है? उनकी आशा आपको कैसे प्रेरित करती है?
प्रिय विश्वासयोग्य पिता, जब हम आशा खो देते हैं, हमें आशापूर्वक आपका इंतजार करने की याद दिलाएं l