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Articles by पेट्रीशिया रेबॉन

पुत्र के अनुगामी

संसार में सूरजमुखी पौधा लापरवाह/बेफिक्र रीति से अंकुरित होते हैं l मधुमक्खियाँ इन पौधों में परागन करती हैं, ये राजमार्गों के किनारे, पक्षियों को आकर्षित करते हैं, और खेतों, खलिहानों, और घास के मैदाओं में उगते हैं l फसल उगाने के लिए, हालाँकि, सूरजमुखी को अच्छी मिटटी की ज़रूरत होती है l किसानों की विवरण पुस्तिका के अनुसार, “जैविक पदार्थ या प्राकृतिक उर्वरक के साथ,” शुष्क, थोड़ी अम्लीय, पौष्टिक मिटटी, अंततः सूरजमुखी के स्वादिष्ट बीज, असली तेल, और सूरजमुखी उगानेवाले मेहनती किसानों के लिए जीविका उत्पन्न करते हैं l

हमें भी आत्मिक उन्नति के लिए “अच्छी भूमि” की ज़रूरत है (लूका 8:15) l जिस प्रकार यीशु ने एक बीज बोने वाले के दृष्टान्त में सिखाया, परमेश्वर का वचन पथरीली या कांटेदार भूमि में भी उग सकते हैं (देखें पद.6-7) l हालाँकि, यह केवल, “ईमानदार, उत्तम मन वाले लोगों के हृदय रूपी मिटटी में उगता है जो वचन को सुनकर उसे मन में संभाले रहते हैं, और धीरज से फल लाते हैं” (पद.15) l

सूरजमुखी के छोटे पौधे भी इसी प्रकार अपनी उन्नति में धीरज धरते हैं l पूरे दिन सूरज की चाल का अनुसरण करते हुए, वे प्रतिदिन सुर्यानुवर्तन(heliotropism) की प्रक्रिया में सूर्य की ओर उन्मुख होते हैं l पूर्ण विकसित पौधे भी उसी तरह इच्छित होते हैं l वे पूर्व की ओर स्थायी रूप से मुड़ जाते हैं, जिससे फूल का चेहरा गर्म होता है और इसके द्वारा परागन करनेवाली मधुमखियों का आना बढ़ जाता है l इस प्रकार बड़ा फसल मिलता है l

सूरजमुखी की देखभाल करनेवालों की तरह, हम भी वचन को पकड़े रहकर और उसके पुत्र का अनुकरण करके परमेश्वर के वचन की उन्नति के लिए एक समृद्ध माध्यम बन सकते हैं – हमें परिपक्व बनाने के लिए ईमानदारी और परमेश्वर के वचन के लिए उत्तम मन विकसित कर सकते हैं l काश हम पुत्र का अनुकरण करें और उन्नति करते जाएं l

ईर्ष्या का अंत

लोकप्रिय फ़्रांसिसी कलाकार एडगर दिगास अपने बैले नर्तकियों(ballerinas) के पेंटिंग के लिए विश्व भर में याद किए जाते हैं l उन्होंने अपने मित्र एवं कलात्मक विरोधी एडौर्ड मेनेट, एक और माहिर पेंटर के प्रति जो इर्ष्या प्रगट की वह कम प्रगट है l एडगर मेनेट के विषय कहते हैं, “जो कुछ वह करता है हमेशा ही तुरंत आरंभ कर देता है, जबकि मैं बेहद कोशिश करता हूँ और उसके बाद भी सही नहीं कर पाता हूँ l”

ईर्ष्या, एक विचित्र भाव है – जिसे प्रेरित पौलुस ने सबसे खराब लक्षणों की सूची में रखा है, “सब प्रकार के अधर्म, और दुष्टता, और लोभ, और वैरभाव और डाह, और हत्या, और झगड़े, और छल, और ईर्ष्या . . . और चुगलखो[री]” (रोमियों 1:29) l पौलुस लिखता है कि यह मूर्खतापूर्ण सोच का परिणाम है – परमेश्वर के स्थान पर मूर्तियों की उपासना करने का परिणाम (पद.28) l

लेखिका ख्रिसटीना फॉक्स कहती हैं कि जब विश्वासियों के मध्य ईर्ष्या बढ़ती है, यह इसलिए है “क्योंकि हमारे हृदय हमारे एकमात्र सच्चे प्रेम से फिर गए हैं l” उसने कहा, “हमारी ईर्ष्या में हम यीशु की ओर देखने के बजाए इस संसार के घटिया सुख के पीछे भाग रहे होते हैं l परिणाम, हम भूल गए हैं हम किसके हैं l”

फिर भी एक समाधान है l परमेश्वर की ओर लौट जाएँ l पौलुस ने लिखा, “अपने अंगों को . . . परमेश्वर को सौंपों” (रोमियों 6:13) – विशेषकर अपने कार्य और जीवन l अपने एक अन्य पत्री में पौलुस ने लिखा, “पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्ड करने का अवसर होगा” (गलतियों 6:4) l

परमेश्वर की आशीष के लिए धन्यवाद – केवल वस्तुएं नहीं, परन्तु उसके अनुग्रह की स्वतंत्रता के लिए l परमेश्वर द्वारा दिए गए अपने दानों को देखते हुए, हम पुनः संतोष प्राप्त करते हैं l

परमेश्वर के स्वरुप में

जब उसकी खुबसूरत भूरी त्वचा अपना रंग खोने लगी, वह युवती डर गयी, मानो वह विलुप्त हो रही हो या “खुद” को खो रही हो l भारी श्रृंगार(मेकअप) के साथ, उसने “मेरे दाग़ों” – को छिपा दिया जैसे कि वह उनको संबोधित करती थी, हलके रंग की त्वचा की चकतियाँ जो श्वेतकुष्ठ/विटिलिगो(vitiligo) की स्थिति के कारण होती है l यह त्वचा के रंगद्रव, मेलेनिन(melanin) का नष्ट होना है, जो त्वचा को उसकी रंग/रंगत देती है l

तब एक दिन, उसने खुद से पूछा : क्यों इसे छिपाना? परमेश्वर की सामर्थ्य पर निर्भर होकर स्वयं को स्वीकार करके, उसने भारी मेकअप करना छोड़ दी l जल्द ही वह अपने आत्म-विश्वास के लिए ध्यान आकर्षित करने लगी l आखिरकार वह श्वेतकुष्ठ/विटिलिगो(vitiligo) के साथ एक वैश्विक प्रसाधन सामग्री ब्रांड की प्रथम प्रवक्ता मॉडल बन गयी l

उसने एक टीवी मेज़बान(host) को बताया, “यह कितनी बड़ी आशीष है” और आगे कहा कि वह अपने विश्वास, परिवार, और मित्रों में ही प्रोत्साहन पाती है l

इस स्त्री की कहानी हमें स्मरण करने को आमंत्रित करती है कि हममें से हर एक परमेश्वर के स्वरुप में रचे गए हैं l “परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरुप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की” (उत्पत्ति 1:27) l चाहे हम बाहर से जैसा दिखाई दें, हम सब परमेश्वर के स्वरुप के धारक है l हम उसकी बनायी हुयी सृष्टि के रूप में, उसकी महिमा को प्रतिबिंबित करते हैं; औए हम यीशु के विश्वासी के रूप में संसार में उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए रूपान्तरित किये गए हैं l

क्या आप अपनी त्वचा से प्रेम करने में संघर्ष करते हैं?  आज, आईने में देखें और परमेश्वर के लिए मुस्कुराएँ l उसने आपको अपने ही स्वरुप में रचा है l

कभी भी अकेला नहीं

इंडोनेशिया के पासवानों के लिए एक बाइबल मार्गदर्शिका लिखते समय, मेरा एक लेखक मित्र उस देश के अपनापन की संस्कृति से मोहित हो गया l gotong royong – अर्थात् “आपसी सहायता” – इस मनोभाव का अभ्यास गाँवों में किया जाता है, जहां पड़ोसी मिलकर किसी की घर की छत मरम्मत करते हैं या एक पुल या पथ को पुनः बनाते…

खूबसूरती का आनंद उठाना

उस पेंटिंग ने आकाशदीप की तरह मेरी आँखों को आकर्षित कर लिया l एक बड़े सिटी हॉस्पिटल के लम्बे कोरिडोर/गलियारा में प्रगटित, उसके विविध रंगों के गहरे वर्तिका चित्र और नवाजो अमरीकी मूल प्रजाति की आकृतियाँ बहुत ही आकर्षक थीं जिन्हें मैं देखकर अचंभित हुयी और उन्हें घूरने लगी l “वह देखो,” मैंने अपने पति, डैन से कहा l

वे मेरे आगे चल रहे थे किन्तु रुक गए, दीवार पर दूसरी पेंटिंग्स को टालते हुए केवल एक को निहारने लगे l “खुबसूरत,” मैं फुसफुसायी l

जीवन में अनेक चीजें वास्तव में खुबसूरत हैं l प्राकृतिक परिदृश्य l उत्प्रेरित कारीगरी l परन्तु ऐसी ही एक बच्चे की मुस्कराहट है l एक मित्र का हेलो l एक रॉबिन चिड़िया का नीला अंडा l एक सीप का मजबूत आवरण l बोझ को दूर करने के लिए जो जीवन ला सकता है, “[परमेश्वर] ने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं” (सभोपदेशक 3:11) l  बाइबल के विद्वान समझाते हैं, ऐसी सुन्दरता में हमें – परमेश्वर के आनेवाले सिद्ध नियम की महिमा सहित - उसकी रचना की पूर्णता की एक झलक मिलती है l  

हम ऐसी पूर्णता की मात्र कल्पना कर सकते हैं, इसलिए परमेश्वर हमें जीवन की सुन्दरता के द्वारा एक पूर्वानुभव देता है l इस तरह से, परमेश्वर ने “मनुष्यों के मन में अनादि-अनंत काल का ज्ञान उत्पन्न किया है” (पद.11) l कभी कभी जीवन नीरस और निरर्थक दिखाई देता है l परन्तु परमेश्वर चिंतन के लिए सौभाग्य से सुन्दरता के क्षण देता है l

जिस पेंटिंग को मैं निहार रही थी, उसका कलाकार जिरार्ड कर्टिस डेलानो, उस बात को समझ चुका था l  “परमेश्वर ने मुझे सुन्दरता को रचने के लिए गुण [दिया था],” उसने एक बार कहा, “और यह वही है जो वह चाहता था मैं करूँ l”

ऐसी सुन्दरता को देखकर, हम किस प्रकार प्रत्युत्तर दे सकते हैं? हम ठहरकर उस महिमा का आनंद लेते हुए जो हमने पहले देखा है आनेवाले अनंत के लिए धन्यवाद दे सकते हैं l

परमेश्वर के द्वारा घिरे

एक व्यस्त एयरपोर्ट पर एक युवा माता अकेली संघर्ष कर रही थी। उसका बच्चा बुरी तरह से चिढ़ा हुआ था-वह चिल्ला रहा था, पैर पटक रहा था और वायुयान पर चढ़ने से मना कर रहा था। घबराई हुई और गर्भवती बोझ से दबी उस युवा महिला ने हार मान ली, वह अपने चेहरे को ढक कर निराशा में फ़र्श पर ही बैठ गई थी,और उसने सुबकना शुरू कर दिया था। 

अचानक ही सात महिला सहयात्रियों, सभी अजनबी, ने उस युवा महिला और उसके बच्चे के चारों ओर घेरा बना लिया और उनके साथ खाना पीना, पानी बाँटने लगे एक-दूसरे के गले लगने लगे और कुछ नर्सरी राईम्स भी गाने लगे। प्रेम से भरे उनके उस घेरे ने उस माता और बच्चे को शान्त कर दिया, जो फिर अपने वायुयान में चढ़ गए। वे महिलाएं फिर अपनी-अपनी सीट पर चली गईं, इस बात की परवाह कि उनके सहयोग ने एक युवा माता को बल प्रदान किया, जब उसे इसकी आवश्यकता थी।

यह भजन संहिता 125 के एक सुन्दर सत्य का उदाहरण प्रस्तुत करता है। “जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं” पद 2 बताता है, “उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से लेकर सर्वदा तक बना रहेगा।” यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि यरूशलेम कितनी हलचल वाला नगर था, जो वास्तव में पहाड़ों से घिरा था-जिनमें जैतून पर्वत और मौरियाह पर्वत शामिल थे।

उसी प्रकार परमेश्वर अपने लोगों को घेरे रखते हैं-हमारी आत्माओं का “सर्वदा” सहयोग और सुरक्षा करते हुए। इसलिए भजनकार लिखता है कि कठिन दिनों में “पर्वतों की ओर” आँखें लगाओ (भजन संहिता 121:1)। परमेश्वर प्रबल सहायता, स्थिर आशा और अनन्त प्रेम के साथ प्रतीक्षा करते हैं।

मिटा दिया है

जब उन्होंने पेन्सिल के लिखे हुए को मिटाने वाले (रबर) का आविष्कार किया, ब्रिटिश इंजीनियर एडवर्ड नैर्न इसकी जगह रोटी के टुकड़े को खोज रहे थे। 1770 में रोटी के टुकड़े पेपर पर लिखे हुए को मिटाने के लिए प्रयोग किए जाते थे। गलती से रबड़ के टुकड़े को उठा लेने से नैर्न ने देखा कि इसने रबड़ के छोटे टुकड़े छोड़ते हुए उनकी गलती को मिटा दिया था और उन रबड़ के टुकड़ों को भी हाथ से आसानी से साफ़ किया जा सकता था।

हमारे जीवन की सबसे बुरी गलतियाँ भी मिटाई जा सकती हैं। यह प्रभु-जीवन की रोटी है-जो उन्हें अपने जीवन के द्वारा साफ़ कर देते हैं, और हमें हमारे पापों को कभी फिर याद न रखने की प्रतिज्ञा प्रदान करते हैं। यशायाह कहता है “मैं वही हूँ जो अपने नाम के निमित्त तेरे अपराधों को मिटा देता हूँ और तेरे पापों को स्मरण न करूँगा।”

यह एक बेहतरीन हल प्रतीत होता है- और इसके हम योग्य भी नहीं हैं। अनेक लोगों के लिए यह विश्वास करना कठिन होता है कि हमारे अतीत के पापों को “सुबह की ओस के समान” मिटाया जा सकता है। क्या परमेश्वर, जो सबकुछ जानता है, उन्हें इतनी आसानी से भूल सकता है?

ठीक ऐसा ही परमेश्वर तब करता है जब हम यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं। हमारे पापों को क्षमा कर देने और “उन्हें याद न रखने” का चुनाव करने के द्वारा हमारा स्वर्गीय पिता हमें आगे बढ़ने के लिए आज़ाद कर देता है। पुराने पापों के द्वारा नीचा न देखने के द्वारा, हमें पाप के अवशेषों से आज़ाद और अभी और सर्वदा के लिए सेवा करने के लिए साफ़ कर दिया गया है। 

हाँ, हो सकता है कि परिणाम शेष रह जाएँ। परन्तु परमेश्वर पाप को हटा देते हैं, और हमारे साफ़ और नए जीवन के लिए उनके पास लौट आने के लिए आमन्त्रित करते हैं।

फिका की विचारधारा

मेरे घर के पास के एक नगर में फिका नामक एक कॉफ़ीहाउस है। यह एक स्वीडिश शब्द है जिसका अर्थ कॉफ़ी और पेस्ट्री के साथ, परिवार, सहकर्मियों या मित्रों के साथ थोड़ी देर ठहरना है। मैं स्वीडन से नहीं हूँ, फिर भी फिका की आत्मा एक बात का उल्लेख करती है, जो मुझे यीशु के बारे में बहुत पसन्द है-दूसरों के साथ खाने और आराम करने के लिए ठहरना।   

विद्वान बताते हैं कि यीशु का भोजन अनियमित नहीं था। थियोलॉजियन मार्क ग्लैनविल उन्हें इस्राएल के पर्वों और पुराना नियम में त्यौहार मनाने का एक “दूसरा स्तर” कहते हैं। मेज पर यीशु ने वह जीवन जिया , जिसकी इच्छा परमेश्वर ने इस्राएल के लिए की थी: “सम्पूर्ण संसार के लिए आनन्द, ख़ुशी, और न्याय का केन्द्र।”

5,000 को खिलाने से प्रभु भोज तक-यहाँ तक कि पुनरुत्थान के बाद दो विश्वासियों के साथ भोजन (लूका 24:30)-यीशु की मेज़ की सेवा हमें हमारी निरन्तर प्रयास करते रहने को रोकने और उस पर निर्भर होने के लिए आमन्त्रित करती है। वास्तव में, यीशु के साथ खाने तक उन दो विश्वासियों ने नहीं पहचाना कि वह प्रभु थे। “जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें (जीवित मसीह के प्रति) खुल गईं (पद 30-31) ।

हालही में फिका में एक मित्र के साथ बैठे गर्म चाकलेट और रोल्स का आनन्द लेते हुए, हम ने एक-दूसरे को यीशु की बातें करते हुए पाया। वह जीवन की रोटी है। प्रभु करे कि हम उसकी मेज़ पर जाएँ और उसे और अधिकता से प्राप्त करें।

परमेश्वर के द्वारा देख लिया गया

मेरे पहले चश्मे ने मेरी आँखों को एक साफ़ संसार के लिए खोल दिया था। मुझे निकट की वस्तुएँ साफ़ और स्पष्ट दिखाई देती हैं। परन्तु चश्मे के बिना कमरे से बाहर या कुछ दूरी पर चीज़ें धुंधली दिखाई देती हैं। बारह साल की आयु में, मेरे पहले चश्मे से ब्लैकबोर्ड पर शब्दों को, पेड़ पर छोटे-छोटे पत्तों को और सबसे अच्छा लोगों के चेहरों पर बड़ी मुस्कुराहट को देखकर आश्चर्यचकित हो गई थी।   

जब मैंने मित्रों का अभिनन्दन किया तो वे मेरी ओर पलट कर मुस्कुराए, तब मैंने सीख लिए कि दिखाई देना भी देखने की आशीष जितना ही बड़ा उपहार है।

दासी हाजिरा ने जान लिया था कि जैसे ही वह अपनी मालकिन सारै की दयाहीनता से भागी। हाजिरा अपनी संस्कृति में कुछ भी नहीं थी, वह गर्भवती थी अकेली थी और बिना सहायता और आशा के मरुभूमि में भाग रही थी। परमेश्वर को देख लेने के बदले में परमेश्वर के द्वारा देख लिए जाने पर वह सशक्त की गई थी। एक अनजान सिद्धांत के स्थान पर परमेश्वर उसके लिए वास्तविक बन गया इतना वास्तविक कि उसने परमेश्वर को एक नाम एल रोई दे दिया जिसका अर्थ है “तू एक ऐसा परमेश्वर है, जो मुझे देखता है।” उसने कहा, “अब मैंने उसे देख लिया है जो मुझे देखता है” (उत्पत्ति 16:13) ।  

हमारा देखने वाला परमेश्वर हम में से प्रत्येक को देखता है। जो अपने आप को अनदेखा, अकेला या नाचीज़ अनुभव करते हैं? परमेश्वर आपको और आपके भविष्य को देखता है। उसके बदले में परमेश्वर करे कि हम उसे हमारी अनन्त आशा, प्रोत्साहन, उद्धार और आनन्द-हमारे आज और हमारे कल के लिए-के रूप में देखें। देखने के इस अद्भुत उपहार, उस सच्चे और जीवित परमेश्वर को देखने के लिए आज हम उसकी स्तुति करें।