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Articles by पेट्रीशिया रेबॉन

समय की गति कम करना

1840 के दशक में इलेक्ट्रिक घड़ी का आविष्कार होने के बाद से बहुत कुछ बदल गया है l हम अब स्मार्ट घड़ियों, स्मार्ट फोन और लैपटॉप पर समय देखते हैं जीवन की सम्पूर्ण गति तेज़ प्रतीत होती है – यहाँ तक कि हमारे “”इत्मीनान” से चलने की गति भी तेज़ होती जा रही है l यह विशेष रूप से शहरों में सच है और विद्वानों का कहना है कि यह स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है l एक अमेरिकी प्रोफेसर कहते हैं, “हम केवल तेजी से और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और जितनी जल्दी हो सके लोगों की ओर लौट रहे हैं l यह हमें सोचने को मजबूर कर रह है कि सब कुछ अभी होना चाहिए l”

बाइबल के भजनों का एक सबसे प्राचीन लेखक, मूसा, ने समय पर विचार किया l वह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर जीवन के समय को नियंत्रित करता है l “क्योंकि हज़ार वर्ष तेरी दृष्टि में ऐसे हैं जैसा कल का दिन जो बीत गया, या जैसे रात का एक पहर” (भजन 90:4) l 

इसलिए, समय प्रबंधन का रहस्य अधिक तेज या धीमी गति से आगे बढ़ना नहीं है l यह परमेश्वर में निवास करना है, उसके साथ अधिक समय बिताना है l तब हम एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाते है, लेकिन पहले उसके साथ – जिसने हमें बनाया (139:13) और जो हमारे उद्देश्य और योजनाएं जानता है (पद.16) l 

पृथ्वी पर हमारा समय हमेशा के लिए कायम नहीं रहेगा l फिर भी हम इसे बुद्धिमानी से प्रबंधित कर सकते हैं, घड़ी देखकर नहीं, बल्कि हर दिन परमेश्वर को देकर l जिस प्रकार मूसा कहता है, “हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान बन जाएँ” (भजन 90:12) l तब, परमेश्वर के साथ हम हमेशा समय पर, अब और हमेशा के लिए रहेंगे l 

वचन द्वारा मार्गदर्शित

लन्दन के बी बी सी में, पॉल आर्नोल्ड की पहली प्रसारण नौकरी रेडियो नाटकों में “चलने की आवाज़” लानी थी l जब अभिनेता चलने वाले किसी दृश्य के दौरान आलेख(script) से पढ़ते थे, तो स्टेज मेनेजर के रूप में पॉल अपने पैरों से उसके अनुकूल आवाज़े निकालते थे – सावधानीपूर्वक अभिनेता की आवाज़ और बोली जानेवाली पंक्तियों के साथ अपनी गति को मिलाकर l उन्होंने समझाया, “कहानी में प्रमुख चुनौती अभिनेता के अधीन होना था, इस तरह से हम दोनों एक साथ काम करते थे l”

इस तरह का एक दिव्य संस्करण भजन 119 के लेखक द्वारा तलाशा गया था, जो परमेश्वर के वचन के उपदेशों द्वारा जीने पर बल देता है l जैसा कि भजन 119:1 कहता है, “क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते हैं!” इस तरह परमेश्वर द्वारा मार्गदर्शित और उसके निर्देशों का अनुसरण करने से, हम शुद्ध रहते हैं (पद.9), नफरत पर जय पाते हैं (पद.23), और लालच से बचते हैं (पद.36) l वह हमें पाप का सामना करने की योग्यता (पद.61), परमेश्वर का भय मानने वाले मित्र (पद.63), और आनंद से जीने की योग्यता देगा (पद.111) l

धर्मविज्ञानी चार्ल्स ब्रिजेस ने पद.133 पर टिपण्णी की : “जब मैं इसलिए संसार में एक कदम रखता हूँ, तो मुझे पूछने दीजिए – क्या यह परमेश्वर के वचन में सुव्यवस्थित है, जो मसीह को मेरे सिद्ध नमूना के रूप में प्रदर्शित करता है?”

इस तरह चलते हुए, हम यीशु को संसार को दिखाते हैं l काश वह हमें उसके साथ इतनी निकटता से चलने में हमारी करे कि लोग हमारे जीवनों में हमारे अगुआ, मित्र और उद्धारकर्ता की झलक देखें!

परमेश्वर से पूछना

जब मेरे पति डैन को कैंसर का पता चला, मैं परमेश्वर से उन्हें चंगा करने के लिए आग्रह करने का “सही” तरीका नहीं खोज पाई l मेरे सीमित दृष्टि में, संसार में अन्य लोगों के पास भी ऐसी गंभीर समस्याएँ थी – युद्ध, अकाल, गरीबी, प्राकृतिक आपदाएं l तब एक दिन, हमारे प्रातःकाल की प्रार्थना में, मैंने अपने पति को दीनता से आग्रह करते सुना, “प्रिय प्रभु, कृपया मेरी बीमारी को ठीक कर दें l”

यह अत्यंत सरल परन्तु हृदय को छू जानेवाला अनुनय था कि उसने मुझे हर प्रार्थना अनुरोध को जटिल करने से रोकने के लिए याद दिलाया, क्योंकि परमेश्वर सहायता के लिए हमारे ईमानदार पुकार को पूरी तौर से सुनता है l जैसे दाऊद ने सरलता से पूछा, “लौट आ, हे यहोवा, और मेरे प्राण बचा; अपनी करुणा के निमित्त मेरा उद्धार कर” (भजन 6:4) l

यह वही है जो दाऊद ने आध्यात्मिक भ्रम और निराशा के समय में घोषित किया था l इस भजन में उसकी वास्तविक स्थिति को नहीं समझाया गया है l हालाँकि, उनकी ईमानदार दलीलें, परमेश्वर की मदद और बहाली की गहरी इच्छा दिखाती हैं l उसने लिखा, “मैं कराहते कराहते थक गया” (पद.6) l

फिर भी, पाप के साथ-साथ, दाऊद ने अपनी मर्यादा को नहीं छोड़ा, और यह उसे अपनी ज़रूरत के साथ परमेश्वर के पास जाने से रोक न सकी l इस प्रकार, परमेश्वर के उत्तर देने से पहले ही, दाऊद आनंदित हो गया, “यहोवा ने मेरे रोने का शब्द सुन लिया है . . . यहोवा मेरे प्रार्थना को ग्रहण भी करेगा” (पद.8-9) l

हमारे अपने भ्रम और अनिश्चितता के बावजूद, परमेश्वर अपने बच्चों की ईमानदार दलीलों को सुनता है और स्वीकार करता है l वह हमें सुनने के लिए तैयार है, खासकर जब हमें उसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है l

परदेशी से प्रेम करना

मेरे परिवार की एक सदस्या के एक अलग धर्म में परिवर्तित होने के बाद, मसीही मित्रों ने मुझे उसे यीशु के पास लौटने के लिए “मनाने” का आग्रह किया l मैंने खुद को पहली बार अपने परिवार की सदस्या से यीशु की तरह प्यार करने की कोशिश करते हुए पाया – सार्वजनिक स्थानों पर भी जहाँ कुछ लोगों ने “विदेशी-दिखने” वाले उसके वस्त्रों पर नाक भौं चढ़ाए l अन्य लोगों ने भी असभ्य टिप्पणियाँ की l “अपने घर जाओ!” एक व्यक्ति ने अपने ट्रक पर से उस पर चिल्लाया, नहीं जानते हुए या जाहिर तौर पर परवाह करते हुए कि वह पहले से ही “घर” पर है l

मूसा ने उन लोगों के प्रति व्यवहार करने का एक और कोमल तरीका सिखाया, जिनके वस्त्र या विश्वास अलग महसूस होते हैं l और दया के नियम सिखाते हुए, मूसा ने इस्राएल की संतानों को निर्देश दिया, “तुम परदेशी को न सताना और न उस पर अंधेर करना, क्योंकि मिस्र देश में तुम भी परदेशी थे” (निर्गमन 23:9) l यह अध्यादेश सभी परदेशियों, पूर्वाग्रह और दुर्व्यवहार के प्रति संवेदनशील लोगों के लिए परमेश्वर की चिंता व्यक्त करता है, और यह निर्गमन और लैव्यव्यवस्था 19:33 में दोहराया गया है l

इसलिए जब मैं अपने परिवार के सदस्य के साथ बात करने के लिए समय बिताती हूँ – एक रेस्टोरेंट में, एक पार्क में, एक साथ टहलने या बैठने और अपने सामने वाले पोर्च के नीचे – मैं सबसे पहले उसे उसी दया और सम्मान को दिखाने की तलाश करती हूँ जो अनुभव मैं चाहती हूँ l यह यीशु के मधुर प्रेम को उसे याद दिलाने का एक सबसे अच्छा तरीका है, उसको अस्वीकार करने के लिए उसका अपमान करके नहीं, बल्कि उसे प्यार करते हुए, जैसा कि वह हम सभी से प्यार करता है – अद्भुत अनुग्रह के साथ l

गीत से मजबूती मिली

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब फ़्रांसीसी ग्रामीणों ने यहूदी शरणार्थियों को नाज़ियो(Nazi) से छिपने में मदद की, कुछ लोगों ने अपने शहर के चारोंओर घने जंगल में गीत गाए – और इस प्रकार शरणार्थियों को सूचित किया कि छिपने के स्थान से बाहर निकलना सुरक्षित था l ली-शोमबॉन-शु-लिंग्यु(Le Chambon-sur-Lignon) शहर के बहादुर लोगों ने स्थानीय पासवान आंद्रे ट्रोक्मी और उनकी पत्नी, मैग्डा का युद्ध के समय यहूदियों को उनके “ला मोंटेगने प्रोतेसतान्ते (La Montagne Protestante) नामक असुरक्षित पठार पर शरण देने के आह्वान का उत्तर दिया था l उनका संगीतमय संकेत ग्रामीणों की बहादुरी का केवल एक चिन्ह बन गया जिसने 3,000 यहूदियों तक को लगभग निश्चित मृत्यु से बचाने में सहायता की l

एक और खतरनाक समय में, दाऊद ने गीत गाया जब उसके शत्रु शाऊल ने उसके घर पर रात्रिकालीन हत्यारे भेजे l संगीत का उसका उपयोग एक संकेत नहीं था; बल्कि, वह परमेश्वर के प्रति जो जसका शरणस्थान था एक गीत था l दाऊद आनंदित हुआ, “मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करुणा का जयजयकार करूंगा l क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है” (भजन 59:16) l

इस प्रकार का गीत गाना खतरे के समय “बहादुरी का अभिनय” नहीं था l इसके बदले, दाऊद का गीत गाना सर्वशक्तिमान परमेश्वर में उसके भरोसे को प्रगट करना था l “हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करुणामय परमेश्वर है” (पद.17) l

दाऊद की प्रशंसा, और ली-शोमबॉन(Le Chambon) में ग्रामीणों का गीत गाना, आज हमें परमेश्वर को धन्य कहने, जीवन की चिंताओं के बावजूद उसकी प्रशंसा करने के लिए निमंत्रण देता है l उसकी प्रेमी उपस्थिति अनुकूल होगी और हमारे हृदयों को सामर्थ्य मिलेगी l

मार्गदर्शक प्रकाश

वह रेस्टोरेंट एकांत में था परन्तु अँधेरा l हर एक मेज़ पर केवल एक छोटी मोमबत्ती टिमटिमा रही थी l प्रकाश लाने के लिए, भोजन करनेवाले अपनी व्यंजन-सूची पढ़ने के लिए अपने  स्मार्टफोन्स का उपयोग कर रहे थे, अपने साथ भोजन करनेवालों की ओर देखते थे और यह भी कि वे क्या खा रहे थे l

आख़िरकार, एक ग्राहक अपनी कुर्सी पीछे खिसकाकर उठा, वेटर के पास गया, और एक साधारण प्रश्न पुछा l “क्या आप बत्तियां जला सकते हैं?” तुरंत, ऊँचाई पर की एक तेज़ बत्ती जल गयी और कमरे में उच्च प्रशंसा ध्वनि सुनाई दी l परन्तु हंसी भी l और उल्लासपूर्ण बातचीत भी l और ढेर सारे धन्यवाद l मेरी सहेली के पति ने अपना फोन बंद कर दिया, अपने बरतनों को उठाया, और हममें से हर एक के लिए बोला l “और उजियाला हो! अब, हम भोजन करना आरम्भ करें!”

हमारी सूनी शाम स्विच के दबाने से उत्सव में बदल गयी l परन्तु सच्ची ज्योति के वास्तविक श्रोत को जानना कितना अधिक महत्वपूर्ण है l परमेश्वर स्वयं ही सृष्टि को बनाते समय पहले दिन चौकानेवाले शब्द उच्चारित किये, “उजियाला हो,” तो उजियाला हो गया (उत्पत्ति 1:3) l उसके बाद “परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है” (पद.4) l

प्रकाश हमारे लिए परमेश्वर के महान प्रेम को दर्शाता है l उसका प्रकाश हमें “जगत की ज्योति” यीशु की ओर इशारा करता है (युहन्ना 8:12), जो पाप के अंधकार से निकलने में हमारा मर्क्दर्शन करता है l प्रकाश में चलने से, हमें उसके पुत्र को महिमान्वित करनेवाला, जीवन का प्रकाशमान पथ मिलता है l वह संसार का सबसे प्रकाशमान उपहार है l जब वह चमकता है, हम उसके मार्ग पर चल सकें l

एक और मौका

हमारे पड़ोस के निकट दूसरा मौका साइकिल दूकान(Second Chance Bike Shop) पर, स्वयंसेवक अनुपयोगी साइकिलों की मरम्मत करके उन्हें ज़रूरतमंद बच्चों को उपहार स्वरुप देते हैं l दूकान के संस्थापक अर्नी क्लार्क ज़रूरतमंद व्यस्कों के साथ-साथ बेघर, निःशक्त, और सेवानिवृत सिपाहियों को भी साइकिल दान करते हैं जो असैनिक जीवन की ज़रूरतों से संघर्ष कर रहे होते हैं l केवल साइकिलों को ही दूसरा मौका नहीं मिलता परन्तु कभी-कभी इनको प्राप्त करनेवालों को भी नयी शुरुआत मिलती है l एक सेवानिवृत सिपाही अपनी नयी साइकिल से एक नौकरी के साक्षात्कार में गया l

दूसरा मौका किसी के जीवन को रूपान्तरित कर सकता है, विशेषकर जब दूसरा मौका परमेश्वर की ओर से मिलता है l मीका नबी ऐसे समय में इस तरह के अनुग्रह की सराहना करता है जब इस्राएल राष्ट्र घूसखोरी, बेईमानी, और दूसरे घिनौने पापों में घिसट रहा था l जिस प्रकार मीका दुखी हुआ, “भक्त लोग पृथ्वी पर से नष्ट हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा जन नहीं रहां” (मीका 7:2) l

परमेश्वर उचित रूप से बुराई को दण्डित करने वाला था, मीका यह जानता था l परन्तु प्रेमी होने के कारण, वह पश्चाताप करनेवालों को एक और मौका देने बाला था l इस प्रकार के प्रेम से दीन होकर, मीका पूछता है, “तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है जो अधर्म को क्षमा करे और अपने निज भाग के बचे हुओं के अपराध को ढाँप दे?” (पद.18) l

हम भी आनंदित हो सकते हैं कि यदि हम क्षमा मांग लेते हैं, परमेश्वर हमें हमारे पापों के कारण त्यागता नहीं है l जिस तरह मीका परमेश्वर के विषय घोषणा करता है, “वह फिर हम पर दया करेगा, और हमारे अधर्म के कामों को लताड़ डालेगा l तुम उनके सब पापों को गहिरे समुद्र में डाल देगा” (पद.19) l

परमेश्वर का प्रेम उसके खोजनेवालों को दूसरा मौका देता है l

कचरा से धन तक

बोगोटा के एक गरीब पड़ोस में एक ऊंची सड़क पर कबाड़ी का घर है l उसके विषय एक भी चीज़ विशेष नहीं है l फिर भी कोलोम्बिया की राजधानी में यह विनम्र मकान 25,000 पुस्तकों की एक मुफ्त पुस्तकालय है – अनावश्यक साहित्य जिसे जोस अल्बर्टो गुटीरेज़ ने अपने समुदाय के निर्धन बच्चों के साथ साझा करने के लिए इकठ्ठा किया है l

साप्ताहिक “पुस्तकालय समय” में स्थानीय बच्चे इस घर में इकठ्ठा होते हैं l हर एक कमरे में जाकर, जो पुस्तकों से भरे हुए हैं, बच्चे इस विनम्र घर को आदरणीय जोस के घर से अधिक मानते हैं – यह एक अमूल्य खज़ाना है l

मसीह के प्रत्येक विश्वासी के लिए भी यह सच है l हम सादी मिटटी से रचे गए हैं – जिसमें दोष/दरारें हैं और आसानी से टूट जाते हैं l परन्तु हम परमेश्वर के निवास हैं जिसमें समर्थ करनेवाला आत्मा रहता है, जो हमें दुखित, टूटे संसार में मसीह का सुसमाचार ले जाने के योग्य बनता है l यह साधारण, निर्बल लोगों के लिए बड़ा उत्तरदायित्व है l

“हमारे पास वह धन मिटटी के बरतनों में रखा है कि यह असीम सामर्थ्य हमारी ओर से नहीं, वरन् परमेश्वर ही की ओर से ठहरे” (2 कुरिन्थियों 4:7), प्रेरित पौलुस ने प्राचीन शहर कुरिन्थुस में अपनी मंडली से कहा l वे लोग अलग-अलग समुदाय से और उस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्से से थे, इसलिए पौलुस ने कहा, कि शायद उनमें से अनेक “अपने विषय . . . प्रचार करने” की परीक्षा में पड़े होंगे” (पद.5) l

इसके बदले, पौलुस ने कहा, उस अमूल्य व्यक्ति के विषय दूसरों को बताएं जो हमारे अन्दर रहता है l यह वही है और उसकी श्रेष्ठ सामर्थ्य है जो साधारण जीवनों को अमूल्य धन में परिवर्तित कर देता है l

पुत्र के अनुगामी

संसार में सूरजमुखी पौधा लापरवाह/बेफिक्र रीति से अंकुरित होते हैं l मधुमक्खियाँ इन पौधों में परागन करती हैं, ये राजमार्गों के किनारे, पक्षियों को आकर्षित करते हैं, और खेतों, खलिहानों, और घास के मैदाओं में उगते हैं l फसल उगाने के लिए, हालाँकि, सूरजमुखी को अच्छी मिटटी की ज़रूरत होती है l किसानों की विवरण पुस्तिका के अनुसार, “जैविक पदार्थ या प्राकृतिक उर्वरक के साथ,” शुष्क, थोड़ी अम्लीय, पौष्टिक मिटटी, अंततः सूरजमुखी के स्वादिष्ट बीज, असली तेल, और सूरजमुखी उगानेवाले मेहनती किसानों के लिए जीविका उत्पन्न करते हैं l

हमें भी आत्मिक उन्नति के लिए “अच्छी भूमि” की ज़रूरत है (लूका 8:15) l जिस प्रकार यीशु ने एक बीज बोने वाले के दृष्टान्त में सिखाया, परमेश्वर का वचन पथरीली या कांटेदार भूमि में भी उग सकते हैं (देखें पद.6-7) l हालाँकि, यह केवल, “ईमानदार, उत्तम मन वाले लोगों के हृदय रूपी मिटटी में उगता है जो वचन को सुनकर उसे मन में संभाले रहते हैं, और धीरज से फल लाते हैं” (पद.15) l

सूरजमुखी के छोटे पौधे भी इसी प्रकार अपनी उन्नति में धीरज धरते हैं l पूरे दिन सूरज की चाल का अनुसरण करते हुए, वे प्रतिदिन सुर्यानुवर्तन(heliotropism) की प्रक्रिया में सूर्य की ओर उन्मुख होते हैं l पूर्ण विकसित पौधे भी उसी तरह इच्छित होते हैं l वे पूर्व की ओर स्थायी रूप से मुड़ जाते हैं, जिससे फूल का चेहरा गर्म होता है और इसके द्वारा परागन करनेवाली मधुमखियों का आना बढ़ जाता है l इस प्रकार बड़ा फसल मिलता है l

सूरजमुखी की देखभाल करनेवालों की तरह, हम भी वचन को पकड़े रहकर और उसके पुत्र का अनुकरण करके परमेश्वर के वचन की उन्नति के लिए एक समृद्ध माध्यम बन सकते हैं – हमें परिपक्व बनाने के लिए ईमानदारी और परमेश्वर के वचन के लिए उत्तम मन विकसित कर सकते हैं l काश हम पुत्र का अनुकरण करें और उन्नति करते जाएं l