“आज सुबह मुझे लगा कि मैं बहुत पैसे वाला हूँ; अब मुझे नहीं पता कि मेरे पास एक डॉलर है या नहीं।” भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति यूलिसिस एस. ग्रांट ने ये शब्द उस दिन कहे थे जब उनके एक व्यापारिक साझेदार ने उनके जीवन की सारी बचत ठग ली थी। महीनों बाद ग्रांट को लाइलाज (निरुपाय) कैंसर का पता चला। अपने परिवार के भरण-पोषण के बारे में चिंतित होकर उन्होंने लेखक मार्क ट्वेन से अपने संस्मरण प्रकाशित करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया, जिसे उन्होंने मरने से एक सप्ताह पहले पूरा किया।  
बाइबल हमें एक और व्यक्ति के बारे में बताती है जिसने गम्भीर कठिनाइयों का सामना किया था। याकूब ने विश्वास कर लिया था कि उसके पुत्र यूसुफ को किसी “जंगली पशु” के द्वारा “फाड़” डाला गया था (उत्पत्ति 37:33)। बाद में उसके पुत्र शिमोन को पराए देश में बंधुआ बना लिया गया, और याकूब को इस बात का डर था कि उसका पुत्र बिन्यामीन भी उससे ले लिया जाएगा। इनसे बहुत अधिक परेशान होकर ,वह चिल्ला उठा, “ये सब विपत्तियाँ मेरे ऊपर आ पड़ी हैं!” (42:36)। परन्तु ऐसा नहीं था। याकूब को मालूम नहीं था कि उसका पुत्र यूसुफ अभी भी जीवित है और परमेश्वर उसके परिवार को बहाल करने के लिए “पर्दे के पीछे” से काम कर रहा है। उनकी कहानी उदाहरण के साथ इस बात की व्याख्या करती है कि भले ही हम अपनी परिस्थितियों में उसका हाथ न देख पाएँ, पर उस समय भी परमेश्वर पर भरोसा किया जा सकता है।  
ग्रांट के संस्मरण एक बड़ी सफलता साबित हुए और उनके परिवार की अच्छी देखभाल हुई। यद्यपि वह इसे देखने के लिए जीवित नहीं रहे, परन्तु उनकी पत्नी ने यह देखा। हमारी दृष्टि सीमित है, परन्तु परमेश्वर की नहीं। और हमारी आशा के रूप में यीशु के साथ, “यदि परमेश्‍वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?” (रोमियों 8:31) आइए हम आज उस पर अपना भरोसा रखें। 
—जेम्स बैंक्स