भूकंप के कारण दो मंजिलों के ढहे मलबे के नीचे फंसी पांच वर्षीय सीरियाई लड़की जिनान ने अपने आस पास के मलबे के बीच घिरे हुए अपने छोटे भाई की रक्षा करते हुए उसने बचाव दल को बुलाया, दिल तोड़ देने वाले शब्दों में कहा कि “मुझे यहाँ से बाहर निकालिए; मैं आपके लिए कुछ भी करूंगी, मैं आपकी दासी बन कर रहूंगी।
संपूर्ण भजन संहिता संहिता में संकट की पुकार पाई जाती हैं : “मैं ने सकेती में परमेश्वर को पुकारा ,परमेश्वर ने मेरी सुनकर, मुझे चौड़े स्थान पर पहुँचाया”(118:5)। हालाँकि शायद हम कभी भी भूकंप से ढही इमारतों के कुचले हुए भार का अनुभव नहीं करेंगे, हम सभी चुनौतीपूर्ण रोग, आर्थिक कठिनाई, भविष्य के बारे में अनिश्चितता, या रिश्तों को खोने पर दम घुटने वाली आशंकाओं को जानते हैं।
उन क्षणों में हम मुक्ति के लिए परमेश्वर के सामने समझौते का सौदा या सेवा-शर्त का प्रस्ताव रख सकते है। लेकिन परमेश्वर से मदद के लिए हमें उसे राज़ी करने की जरूरत नहीं है। वह उत्तर देने का वादा करता है, और हालांकि हम तुरंत अपनी स्थिति में राहत नहीं पाते है, फिर भी वह हमारी ओर से और हमारे साथ है। हमें मृत्यु सहित किसी भी अन्य खतरे से डरने की ज़रूरत नहीं है। हम भजन संहिताकार के साथ कह सकते हैं, “यहोवा मेरी ओर मेरे सहायकों में है; मैं अपने बैरियों पर दृष् कर संतुष्ट हूँगा” (पद- 7)।
हमें उतने प्रभावशाली या नाटकीय बचाव का वादा नहीं किया गया है जितना कि जिनान और उसके भाई ने अनुभव किया था, लेकिन हम अपने वफादार परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं, जो भजन संहिताकार को “चौड़े स्थान पर” ले आए (पद- 5)। वह हमारी स्थिति जानता है और वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, यहाँ तक कि मृत्यु में भी। मैट लुकास
जब आप संकट में थे तो परमेश्वर ने स्वयं को कैसे वफादार दिखाया है?
कठिन समय के दौरान आपने स उपस्थिति को कैसे पहचाना है?
स्वर्गीय पिता, मैं यह जानते हुए आपको पुकारता हूँ कि आप मुझे सुनते हैं।
वफादार और प्रेमपूर्ण बने रहने के लिए आपका धन्यवाद।
