जब यीशु ठहर जाता है
बीमार बिल्ली कई दिनों तक मेरे कार्यस्थल के पास एक बक्से में छिपकर रोती रही l सड़क पर छोड़े गए इस बिल्ली के बच्चे पर वहां से गुजरने वाले कई लोगों का ध्यान नहीं गया—जब तक कि जुन नहीं आ गया l सड़क का सफाई करनेवाला व्यक्ति बिल्ली को घर ले गया, जहाँ वह दो कुत्तों के साथ रहता था, जो पहले आवारा थे l
जुन ने कहा, “मुझे उनकी परवाह है क्योंकि वे ऐसे प्राणी हैं जिन पर किसी का ध्यान नहीं जाता l” “मैं उनमें खुद को देखता हूँ l आखिरकार सफाई कर्मचारी पर किसी का ध्यान नहीं जाता l”
यीशु यरिहो के रास्ते यरूशलेम की ओर जा रहा था, एक दृष्टिहीन आदमी सड़क के किनारे भीख मांग रहा था l उस पर भी किसी का ध्यान नहीं गया l और विशेष रूप से इस दिन—जब भीड़ गुज़र रही थी और सभी की निगाहें यीशु मसीह पर टिकी थीं—कोई भी भिखारी की मदद करने के लिए नहीं रुका l
केवल यीशु l शोर मचाती भीड़ के बीच में, उसने भूले हुए आदमी की चीख सुनी l “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ,” मसीह ने पूछा, और उन्हें दिली उत्तर मिला, “हे प्रभु, यह कि मैं देखने लगूं l” यीशु ने कहा, “देखने लग; तेरे विश्वास ने तुझे अच्छा कर दिया है” (लूका 18:41-42) l
क्या हम कभी-कभी उपेक्षित महसूस करते हैं? क्या हमारी चीखें उन लोगों द्वारा दबा दी जाती हैं जो हमसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगते हैं? हमारा उद्धारकर्ता उन लोगों पर ध्यान देता है जिन पर दुनिया ध्यान देने की परवाह नहीं करती है l मदद के लिए उसे बुलाएं! जबकि अन्य लोग हमारी उपेक्षा कर सकते हैं, वह हमारे लिए रुकेगा l केरेन ह्वांग
मीठी नींद
सैल के दिमाग में बुरी यादें और आरोप लगाने वाले सन्देश भर गए l नींद उससे दूर थी क्योंकि उसके हृदय में डर भर गया था और उसकी त्वचा पर पसीना आ गया था l यह उसके बप्तिस्में से पहले की रात थी, और वह दुष्ट विचारों के आक्रमण को रोक नहीं सका l सैल को यीशु से मुक्ति मिल गयी थी और वह जानता था कि उसके पाप माफ़ कर दिए गए हैं, लेकिन आत्मिक लड़ाई जारी रही l तभी उसकी पत्नी ने उसका हाथ थाम लिया और उसके लिए प्रार्थना की l कुछ क्षण बाद, सैल के दिल में डर की जगह शांति ने ले ली l वह उठा और उसने वे शब्द लिखे जो वह बप्तिस्मा लेने से पहले साझा करेगा—कुछ ऐसा जो वह करने में सक्षम नहीं था l इसके बाद उसे मीठी नींद का अनुभव हुआ l
राजा दाऊद भी जानता था कि एक बेचैन रात कैसी महसूस होती है l अपने बेटे अबशालोम से भागना जो उसका सिंहासन चुराना चाहता था (2 शमुएल 15-17), वह जानता था कि “दस हज़ार मनुष्य . . . [उसके] विरुद्ध चारों ओर पांति बांधे खड़े” थे (भजन संहिता 3:6) l दाऊद ने विलाप करते हुए कहा, “मेरे सतानेवाले . . . बहुत हैं” (पद.1) l हालाँकि डर औए संदेह पर जीत हासिल की जा सकती थी, फिर भी उसने अपने “ढाल” यानि परमेश्वर को पुकारा (पद.3) l बाद में, उसने पाया कि वह “लेट सकता है और सो सकता है . . . क्योंकि यहोवा [उसे] संभालता है” (पद.5) l
जब भय और संघर्ष हमारे मन को जकड़ लेते हैं और आराम की जगह बेचैनी ले लेती है, तो परमेश्वर से प्रार्थना करने पर आशा मिलती है l हालाँकि हमें सैल और दाऊद की तरह तत्काल मीठी नींद का अनुभव नहीं हो सकता है, “शांति से [हम] लेट सकते हैं और . . .निश्चित [रह सकते हैं]”(4:8) l क्योंकि परमेश्वर हमारे साथ है और वह हमारा विश्राम होगा l टॉम फेल्टन
भाग्य नहीं, लेकिन मसीह
डिस्कवर पत्रिका बताती है कि सृष्टि में लगभग 700 क्विनटिलियन(7 के बाद 20 शून्य) ग्रह हैं, लेकिन पृथ्वी जैसा केवल एक ही है l खगोलभौतिकीविद्ए रिक जैक्रिसन ने कहा कि जीवन को बनाए रखने के लिए किसी ग्रह की आवश्यकताओं में से एक “गोल्डीलॉक्स” क्षेत्र में परिक्रमा करना है, जहाँ तापमान बिलकुल सही है, और पानी मौजूद हो सकता है l 700 क्विनटिलियन ग्रहों में से, पृथ्वी एक ऐसा ग्रह प्रतीत होता है जहाँ स्थितियाँ बिलकुल सही है l जैक्रिसन ने निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी को किसी तरह “काफी भाग्यशाली सफलता” मिली है l
पौलुस ने कुलुस्से के विश्वासियों को निश्चय दिया कि सृष्टि भाग् के कारण नहीं, बल्कि यीशु के कार्य के कारण अस्तित्व में है l प्रेरित मसीह को संसार के रचयिता के रूप में प्रस्तुत करता है : “क्योंकि उसी में सारी वस्तुओं की सृष्टि हुयी” (कुलुस्सियों 1:16) l न केवल यीशु संसार का शक्तिशाली निर्माता था, बल्कि पौलुस कहता है कि “सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं” (पद.17)—एक ऐसा संसार जो न बहुत गर्म है और न बहुत ठंडा, बल्कि एक ऐसा संसार जो मानव अस्तित्व के लिए बलकुल सही है l यीशु ने जो बनाया, वह अपनी सम्पूर्ण बुद्धि और अनवरत शक्ति से कायम है l
जब हम सृष्टि की सुन्दरता में भाग लेते हैं और उसका आनंद लेते हैं, आइए किस्मत की निरुद्देश्य गतिविधि की ओर इशारा न करें, बल्कि उद्देश्यपूर्ण, संप्रभु, शक्तिशाली और प्रेमपूर्ण व्यक्ति की ओर इशारा करें, जिसके पास “[परमेश्वर की] सभी पूर्णता” है (पद.19) l मार्विन विलियम्स
साथ में बेहतर
एक फोटोग्राफर ने स्टारलिंग(गहरे रंग का एक छोटा पक्षी) और उनके मनमोहक दृश्य, जिसे गुनगुनाना कहा जता है, की तस्वीरें खींचने में कई साल बिताए, जहाँ हज़ारों स्टारलिंग आकाश में तरल गति से उड़ते हैं l एक नियोजित, घूमती हुए लहर या नमूना/पैटर्न के बहुरूपदर्शक में बहते हुए एक विशाल, गहरे ब्रुशस्ट्रोक के नीचे बैठने जैसा है l डेनमार्क में, वे इस अस्फुट भाषा/गुनगुनाने वाले अनुभव को ब्लैक सन कहते हैं l सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि कैसे स्टारलिंग पक्षी सहज रूप से अपने निकटतम साथी का अनुसरण करते हैं, इतने करीब उड़ते हैं कि अगर कोई चूक जाए, तो उन्हें बड़े पैमाने पर आपदा का सामना करना पड़ेगा l हालाँकि, स्टारलिंग एक दूसरे की रक्षा के लिए अस्फुट भाषा का उपयोग करते हैं l जब एक बाज़ नीचे आता है, तो ये छोटे जीव सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं, शिकारी को पीछे छोड़ते हैं जो अकेले होने पर उन्हें आसानी से उठा ले जा सकता है l
हम अकेले होने की तुलना में एक साथ बेहतर हैं l सभोपदेशक कहता है, “एक से दो अच्छे हैं . . . क्योंकि यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा . . फिर यदि दो एक संग सोएँ तो वे गर्म रहेंगे” (4:9-11) l अकेले, हम अलग-थलग हैं और आसान शिकार हैं l हम दूसरों के आश्वासन या सुरक्षा के बिना असुरक्षित हैं l
लेकिन साथियों के साथ हम मदद देते और लेते हैं l सभोपदेशक कहता हैं, “यदि कोई अकेले पर प्रबल हो तो हो, परन्तु दो उसका सामना कर सकेंगे l जो डोरी तीन तागे से बटी हो वह जल्दी नहीं टूटती” (पद.12) l हम एक साथ बेहतर हैं क्योंकि परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है l विन कोलियर
अजनबी का स्वागत
एवरीथिंग सैड इज़ अनट्रू में, डैनिएल नेयरी ने अपनी माँ और बहन के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका में एक शरणार्थी शिविर के द्वारा उत्पीड़न से सुरक्षा तक की अपनी कष्टदायक फरार होने का वर्णन किया है l एक बुजुर्ग दम्पति उनके आर्थिक संरक्षक बनने के लिए सहमत हो गए, हालाँकि वे उन्हें नहीं जानते थे l वर्षों बाद भी, डैनिएल अभी भी इससे उबर नहीं पाया है l वे लिखते हैं, “क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं? पूरी तरह से दृष्टिहीन होकर, उन्होंने ऐसा किया l वे हमसे कभी मिले भी नहीं l और अगर हम ईमानदार नहीं निकले, तो उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ती l वह तो लगभग उतना ही बहादुर, दयालु और लापरवाह है जितना मैंने किसी भी व्यक्ति के बारे में सोच सकता हूँ l”
फिर भी उनसे चाहता है कि हम दूसरों के प्रति उस स्तर की चिंता रखें l उन्होंने इस्राएल से कहा कि वह विदेशियों के प्रति दयालु रहे l “उनसे अपने ही समान प्रेम रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे” (लैव्यव्यवस्था 19:34) l वह यीशु में विश्वास करने वाले गैर-यहूदी विश्वासियों को याद दिलाता है—अर्थात हम में से कई लोग—कि एक बार हम “मसीह से अलग” थे . . . प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में परमेश्वररहित थे” (इफिसियों 2:12) l इसलिए वह हम सभी पूर्व विदेशियों, चाहे यहूदी हो या यहूदी, को आदेश देता है कि हम “अतिथि-सत्कार करना न [भूलें]” (इब्रानियों 13:2) l
अब अपने स्वयं के परिवार के साथ बड़े होकर, डैनिएल जिम और जीन डॉसन की प्रशंसा करते हैं, “जो इतने मसीही थे कि उन्होंने शरणार्थियों के एक परिवार को अपने साथ तब तक रहने दिया जब तक कि उन्हें घर नहीं मिल गया l”
परमेश्वर अजनबी का स्वागत करता है और हमसे भी उनका स्वागत करने का आग्रह करता है l माइक विटनर
पद जो अधिकृत नहीं है
संडे स्कूल में भाग लेने के बाद, मैं घर जाने के लिए बस में चढ़ी। पीछे एक आदमी बैठा था जिसे मैंने दक्षिण भारत के एक प्रमुख कॉलेज के नए निदेशक के रूप में पहचाना। मैं उन्हें कॉलेज और स्कूल के विद्यार्थियों के बस में देखकर हैरान थी। उनके पद के ज़्यादातर लोगों के पास एक अलग कार और ड्राइवर होता है। इसलिए, मैंने उनसे पूछा, “आप बस से जा रहे हैं और कार में क्यों नहीं?” उन्होंने उत्तर दिया, “क्योंकि मैं हमेशा बस से यात्रा करता हैं।” उनके नए पद ने उनके सामान्य व्यवहार को नहीं बदला था। उन्होंने अपने पद के कारण खुद को हकदार महसूस नहीं होने दिया।
फिलिप्पी में चर्च को लिखे पत्र में, पौलुस विश्वासियों से विनम्र होने के लिए कहता है (पद.3)। वह कहता है कि उन्हें विरोध” या “झूठी बड़ाई”(पद 3) के साथ कुछ भी नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों में, उन्हें “मसीह यीशु का स्वभाव” रखना चाहिए (पद.5)। यीशु के पास सर्वोच्च पद है। वह “परमेश्वर के स्वरूप में” था, फिर भी उसने “परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा”(पद.6)। उसने जो कुछ भी उसका अधिकार था, उसे अलग रख दिया और हमारे हितों का ध्यान रखा। उसने “दास का स्वरूप” धारण किया, और अपने आप को दीन किया, और यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, मृत्यु भी सह ली(पद.7-8) l
जब हमें लगता है कि हम अपनी नौकरी, शिक्षा, उम्र या समाज में स्थिति के कारण एक निश्चित तरीके से व्यवहार किए जाने के लायक हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यीशु ने हमें दिखाया कि हमें अपनी उपाधियों और अधिकार की भावना को कैसे अलग रखना चाहिए। हालाँकि यह मुश्किल है, लेकिन हमें अपने फायदे के लिए जो कुछ भी हमारा है उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, हमें परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहते हुए साथी मनुष्यों के प्रति विनम्र होने की मानसिकता अपनानी चाहिए। ऍन हरिकीर्तन
परमेश्वर के खुले द्वार
एक बड़े शहर के पास मेरे नए स्कूल में, मार्गदर्शन परामर्शदाता ने मुझ पर एक नज़र डाली और मुझे सबसे कम प्रदर्शन करने वाली अंग्रेजी लेखन कक्षा में रखा l मैं अपने पिछले स्कूल से उत्कृष्ट इम्तहान प्राप्तांक, उत्कृष्ट अंक और यहाँ तक कि अपने लेखन के लिए श्रेष्ठ पुरस्कार के साथ पहुंची थी l मेरे नए स्कूल में “सर्वश्रेष्ठ” लेखन कक्षा का दरवाज़ा मेरे लिए बंद था, हालाँकि, जब परामर्शदाता ने निर्णय लिया कि मैं सही या तैयार नहीं थी l
प्राचीन फिलदिलफिया की कलीसिया को ऐसे मनमाने झटके समझ में आए होंगे l एक छोटा और साधारण कलीसिया, इसके शहर को हाल के वर्षों में भूकंप का सामना करना पड़ा जिससे स्थायी क्षति हुयी l इसके अतिरिक्त, उन्हें शैतानी विरोध का सामना करना पड़ा (प्रकाशितवाक्य 3:9) l इस तरह के उपेक्षित कलीसिया में “फिर भी थोड़ी ताकत थी,” जैसा कि पुनरुत्थित यीशु ने कहा, “तू ने मेरे वचन का पालन किया है और मेरे नाम का इनकार नहीं किया” (पद.8) l इसलिए, परमेश्वर ने उनके सामने “एक द्वार खोल रखा है, जिसे कोई बंद नहीं कर सकता” (पद.8) l वास्तव में, “[उसके] खोले हुए को कोई बंद नहीं कर सकता और बंद किये हुए को कोई खोल नहीं सकता” (पद.7) l
यह हमारी सेवा के प्रयासों के लिए सच है l कुछ दरवाजे नहीं खुलते l हालाँकि, परमेश्वर के लिए मेरे लेखन के साथ, उसने वास्तव में दरवाजे खोले हैं, जिससे इसे एक परामर्शदाता के बंद रवैये की परवाह किये बिना वैश्विक दर्शकों तक पहुँचने की अनुमति मिली है l बंद दरवाजे आपके लिए भी बाधा नहीं बनेंगे l “द्वार मैं हूँ,” यीशु ने कहा (यूहन्ना 10:9) l आइए उसके द्वारा खोले गए द्वारों में प्रवेश करें और उसका अनुसरण करें l पेट्रीशिया रेबॉन
परमेश्वर के बुद्धिमान उद्देश्य
भारत इतिहास से भरा पड़ा है l आप जहाँ भी जाते हैं, आप ऐतिहासिक शख्सियतों का सम्मान करने वाले स्मारक या उन स्मारक स्थलों को देखते हैं जहाँ महत्वपूर्ण घटनाएं घटी थीं l लेकिन इंग्लैंड के एक होटल में एक मजेदार सन्देश प्रदर्शित किया गया है l होटल के बाहर एक पुरानी पट्टिका पर एक सन्देश लिखा है, “इस स्थान पर, 5 सितम्बर, 1782 को, कुछ भी नहीं हुआ l”
कई बार हमें ऐसा लगता है कि हमारी प्रार्थनाओं को लेकर कुछ हो ही नहीं रहा है l हम प्रार्थना करते हैं और प्रार्थना करते हैं, अपनी याचिकाएं अपने पिता के पास इस उम्मीद से लाते हैं कि वह अभी जबाब देगा l भजन संहिताकार दाऊद ने ऐसी निराशा व्यक्त की जब उसने प्रार्थना की, “हे परमेश्वर, कब तक! क्या तू सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझसे छिपाए रहेगा? (भजन संहिता 13:1) l हम उन विचारों को सरलता से दोहरा सकते हैं: हे प्रभु, आपके उत्तर देने में कितना समय लगेगा?
हालाँकि, हमारा परमेश्वर न केवल अपनी बुद्धि में बल्कि समय में भी परिपूर्ण है l दाऊद यह कहने में समर्थ हुआ, “मैंने तो तेरी करुणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा” (पद.5) l सभोपदेशक 3:11 हमें याद दिलाता है, “[परमेश्वर ने] सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते हैं” सुन्दर शब्द का अर्थ है “उपयुक्त” या “प्रसन्नता का परमेश्वर l” परमेश्वर हमेशा हमारी प्रार्थनाओं का प्रत्युत्तर हमारी इच्छा अनुकूल नहीं देता, लेकिन वह हमेशा अपने बुद्धिमान उद्देश्यों को पूरा कर रहा है l हम इस बात पर विश्वास कर सकते हैं कि जब वह उत्तर देगा, तो वह सही, अच्छा और सुन्दर होगा l बिल क्राउडर
प्रार्थना हेतु प्रेरित किया गया
एक सहकर्मी ने मुझसे कहा कि हमारे मेनेजर की वजह से उसका प्रार्थना जीवन बेहतर हुआ है l मैं यह सोचकर प्रभावित हुयी कि हमारे कठिन अगुआ ने उसके साथ कुछ आध्यात्मिक बातें साझा की थीं और उसके प्रार्थना करने के तरीके को प्रभावित किया था l मैं गलत थी—कुछ इस तरह l मेरे सहकर्मी और सहेली ने समझाया : “हर बार जब मैं उसे आते हुए देखती हूँ, तो प्रार्थना करना शुरू कर देती हूँ l” उसके प्रार्थना करने के समय में सुधार हुआ था क्योंकि वह उसके साथ प्रत्येक बातचीत से पहले अधिक प्रार्थना करती थी l वह जानती थी कि उसके अपने प्रबंधक के साथ चुनौतीपूर्ण कार्य संबंधों में परमेश्वर की मदद चाहिए और इसलिए उसने उसे अधिक पुकारा l
कठिन समय और बातचीत के दौरान प्रार्थना करने की मेरी सहकर्मी का अभ्यास कुछ ऐसी है जिसे मैंने अपनाया है l यह 1 थिस्सलुनीकियों में पायी जाने वाली एक बाइबल अभ्यास भी है जब पौलुस यीशु में विश्वासियों को “निरंतर प्रार्थना करने” और “हर बात में धन्यवाद” करने की याद दिलाता है (1 थिस्सलुनीकियों 5:13) l चाहे हम किसी भी परिस्थिति का सामना करें, प्रार्थना हमेशा सर्वोत्तम अभ्यास है l यह हमें परमेश्वर से जोड़े रखता है और उसकी आत्मा को हमें निर्देशित करने के लिए आमंत्रित करता है (गलातियों 5:16) बजाय इसके कि हम अपनी मानवीय प्रवृत्तियों पर निर्भर रहें l यह हमें संघर्षों का सामना करने पर भी “आपस मैं मेलमिलाप से [रहने]” में मदद करता है (1 थिस्सलुनीकियों 5:13) l
जब परमेश्वर हमारी सहायता करता है, हम उसमें आनंदित हो सकते हैं, हर चीज़ के लिए प्रार्थना कर सकते हैं और अक्सर धन्वाद दे सकते हैं l और वे चीज़ें और भाइयों और बहनों के साथ और भी अधिक सद्भाव में रहने में मदर करेंगी l केटारा पैटन