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Articles by माइक विटमर

वह समझ गया

पास्टर वाट्सन जोन्स को साइकिल चलाना सीखना याद है l उसके पिता छोटे वाट्सन के साथ चल रहे थे जब उसने कुछ लड़कियों को पोर्च पर बैठे देखा l “डैडी, मैं समझ गया!” उसने कहा l उसने नहीं समझा था l उसने बहुत देर से पहचाना कि उसके पिता के स्थिर पकड़ के बिना उसने संतुलन करना नहीं सीखा था l जैसा कि उसकी सोच थी वह बड़ा नहीं हुआ था l

हमारे स्वर्गिक पिता हमारे लिए इच्छा रखते हैं कि हम बड़े हो जाएँ और “एक सिद्ध मनुष्य . . . बन जाएँ और मसीह के पूरे डील-डौल तक . . . बढ़ जाएँ” (इफिसियों 4:13) l लेकिन आध्यात्मिक परिपक्वता प्राकृतिक परिपक्वता से अलग है l माता-पिता अपने बच्चों को आत्मनिर्भर होने के लिए बढाते हैं, उस समय तक जब उनकी आवश्यकता नहीं होती l हमारे दिव्य पिता हमें प्रतिदिन और अधिक उसपर निर्भर होने के लिए हमारी परवरिश करता है l

पतरस अपनी पत्री को इस प्रतिज्ञा के साथ आरम्भ करता है कि “हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शांति तुम में बढती जाए” (2 पतरस 1:2; 3:18) l परिपक्व मसीही यीशु की अपनी ज़रूरत को सदैव महसूस करते हैं l

वाट्सन चेतावनी देते हैं, “हममें से कुछ लोग जीवन के हैंडल से यीशु के हाथों को हटाने में व्यस्त है l” जैसे कि हमें थामने के लिए, हमें उठाने के लिए, और जब हम लड़खड़ाते और विफल होते हैं, तब हमें उसके मजबूत हाथों की ज़रूरत नहीं है l हम मसीह पर अपनी निर्भरता से आगे नहीं बढ़ सकते हैं l हम उसके विषय अपने कृपा और ज्ञान की गहराई में केवल अपने जड़ों को डूबो कर बढ़ते हैं l

ऐसा जीवन जीएं मानो यीशु आनेवाला है

मैं लोक गायक टिम मैग्राव के गीत “लिव लाइक यू वर डाईंग(Live Like You Were Dying)” से प्रेरित हूँ  l उस गीत में वह ऐसे रोमांचक अनुभवों की सूची प्रस्तुत करता है जो एक व्यक्ति ने अपने स्वास्थ्य के विषय बुरी खबर सुनकर किया l उसने लोगों से प्रेम करना और उनको अधिक स्वतंत्र रूप से क्षमा करने का भी चुनाव किया और उनसे अधिक कोमलता से बातचीत भी करने लगा l गीत सिफारिश करता है कि हम अच्छी तरह जीवन व्यतीत करें, मानों यह जानते हुए कि हमारे जीवनों का अंत जल्द होने वाला है l

यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा समय सीमित है l हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि जो हमें आज करना है हम उसे कल के लिए न छोड़े, क्योंकि एक दिन आनेवाला कल नहीं होगा l यह विश्वासियों के लिए ख़ास तौर पर ज़रूरी है, जो विश्वास करते हैं कि यीशु किसी भी क्षण आ सकता है (शायद उसी क्षण जब आप इस वाक्य को पढ़ रहें हैं!) l यीशु हमसे तैयार रहने की विनती करता है, और उन पांच “कुवारियों” की तरह जीवन जीने के लिए मना करता है जो दूल्हे के लौटने पर तैयार नहीं थीं (मत्ती 25:6-10 l

परन्तु मैग्राव का गीत पूरी कहानी नहीं बताता है l हम यीशु से प्रेम करनेवालों के पास आनेवाले कल की कमी नहीं होगी l यीशु ने कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ; जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए तौभी जीएगा” (यूहन्ना 11:25-26) l उसमें हमारे जीवन का कभी अंत नहीं होता है l

इसलिए इस तरह न जीएं जैसे आपकी मृत्यु होने वाली है l क्योंकि आपकी मृत्यु नहीं होगी l इसके बदले, ऐसा जीवन व्यतीत करें मानो यीशु आनेवाला है l क्योंकि वह ज़रूर आनेवाला है!

चुस्त घेरा

एक सहपाठी ने मेरे परिवार को एक पंजीकृत कोल्ली(कुत्ते की प्रजाति) दिया जो अधिक उम्र के कारण प्रजनन करने में समर्थ नहीं रह गयी थी l हमें भी पता चला कि इस सुन्दर कुतिया ने, दुर्भाग्यवश, अपने जीवन का अधिक समय एक छोटे बाड़े में बितायी थी l वह केवल चुस्त घेरे में ही चल पाती थी l वह कोई वस्तु उठाने में असमर्थ थी और सीधी दिशा में दौड़ भी नहीं पाती थी l और खेलने के लिए एक बड़ा अहाता होने के बावजूद, वह सोचती थी वह बाड़े में बंद है l

आरंभिक मसीही, जिनमें से अधिकतर यहूदी थे, मूसा की व्यवस्था द्वारा घिरा हुआ जानते थे l यद्यपि व्यवस्था अच्छी थी और उन्हें पाप के प्रति दोषी ठहराकर यीशु के पास लाने के लिए थी (गलातियों 3:19-25), यह समय परमेश्वर के अनुग्रह और मसीह की स्वतंत्रता पर आधारित होकर अपने नए विश्वास को व्यवहार में लाने का था l और क्या अभी तक, वे वास्तव में स्वतंत्र थे?

हमारे पास भी वही समस्या हो सकती है l शायद सख्त नियम वाली कलीसिया में हमारी परवरिश हुयी है जिसने हमें चारो ओर से घेर रखा था l या हमारी परवरिश स्वतंत्रता प्रदान करने वाले परिवारों में हुयी है जो नियमों की सुरक्षा के लिए आतताई नहीं हैं l दोनों ही तरह से, मसीह की स्वतंत्रता अपनाने का समय है (गलातियों 5:1) l यीशु ने हमें प्रेम के कारण उसकी आज्ञा मानने के लिए (युहन्ना 14:21) और “प्रेम से एक दूसरे के दास [बनने]” के लिए (गलातियों 5:13) स्वतंत्र किया है l आनंद और प्रेम का एक पूरा क्षेत्र उनके लिए खुला है जो पहचानते हैं कि “यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे” (युहन्ना 8:36) l

लिंकन के पॉकेट में की वस्तुएँ

1865 में उस रात जब अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन को फोर्ड थिएटर में गोली मारी गयी, उनके पॉकेट में ये वस्तुएं थीं : उनका चश्मा, चश्मा साफ़ करनेवाला, एक पॉकेट चाकू, जेब घड़ी, रूमाल, चमड़े का बटुआ जिसमें पांच डॉलर का नोट, और अखबार के आठ कटिंग, जिसमें कई उनकी और उनकी राजनीति की तारीफ़ वाले थे l

मुझे आश्चर्य है कि राष्ट्रपति के पॉकेट में डॉलर क्यों था, परन्तु उत्साही खबरों के विषय मुझे थोड़ा शक है l सभी को उत्साह चाहिए, लिंकन के समान एक महान लीडर को भी! क्या आप उस प्राणघाती नाटक के कुछ क्षण पहले उन्हें देख सकते हैं, शायद वे अपनी पत्नी को वह ख़बर पढ़कर सुना रहे हों?

आप किसको जानते हैं जिसे उत्साह चाहिए? सभी को! अपने चारों ओर देखें l आप जहाँ तक दृष्टि दौड़ा सकते हैं, कोई भी व्यक्ति जैसे वे दिखाई देते हैं आत्मविश्वासी नहीं हैं l हम सब आत्म-संदेह से दूर पराजय, व्यंगात्मक टिप्पणी, अथवा अप्रिय हैं l

कितना अच्छा होता यदि हम सब परमेश्वर की आज्ञा मानते हुए “अपने पड़ोसी को उसकी भलाई के लिए पसंन [करते] कि उसकी उन्नति हो?” (रोमियों 15:2) l कितना अच्छा होता यदि हम केवल “मनभावने वचन” जो “प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं” बोलने को दृढ़ होते (नीतिवचन 16:24) l कितना अच्छा होता यदि हम इन शब्दों को लिख लेते, ताकि मित्र उन्हें बार-बार पढ़ पाते और उनका स्वाद ले पाते? तब हम सब के पॉकेट में (अथवा हमारे फोन में!) इस प्रकार के पत्र होते l और हम और भी यीशु के समान होते, जिसने “अपने आप को प्रसन्न नहीं किया” परन्तु परहित जीवन जीया (रोमियों 15:3 l

सब कुछ मुफ्त में

हेरोइन(मादक पदार्थ) की लत मार्मिक रूप से दुखद है l इसका उपयोग करनेवाले इसके प्रति रोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं, इस प्रकार मादक पदार्थ के उस ऊँचे स्तर के लिए उन्हें और अधिक नशा करना पड़ता है l जल्द ही वे जितना नशीला पदार्थ लेते हैं ये उनकी मृत्यु  के लिए पर्याप्त से अधिक होता है l जब नशेड़ी सुनते हैं कि कोई एकाएक अधिक नशा करने से मर गया है, ज़रूरी नहीं उनका पहला विचार डर होगा परन्तु “वह मुझे कहाँ मिल सकता है?”

सी.एस. ल्युईस अपनी पुस्तक स्क्रूटेप लेटर्स में परीक्षा की कला की शैतान की व्याख्या के प्रति अपने कल्पनाशील अवलोकन में इस गिरते बिगाड़ के विषय चेतावनी देते हैं l थोड़ी अभिलाषा के साथ आरम्भ करें – यदि संभव है तो परमेश्वर की अच्छी अभिलाषाओं में से एक से – और परमेश्वर ने जिस तरह निषेध किया है उस प्रकार से पेश करें l जब कोई व्यक्ति मुँह मारता है, उसे थोड़ा दें यद्यपि उसे अधिक पाने का प्रलोभन दें l “हमेशा कम होनेवाली अभिलाषा के लिए हमेशा बढ़नेवाली तृष्णा,” का प्रबंध करें, जब तक कि अंत में हमें “उस व्यक्ति की आत्मा न मिल जाए और उसके बदले उसे कुछ न दें l”

नीतिवचन 7 यौन पाप की परीक्षा के सम्बन्ध में इस विनाशक चक्र का वर्णन करता है l यौन परमेश्वर का अच्छा उपहार है, परन्तु जब हम विवाह के बाहर इसके आनंद को खोजते है हम “बैल” के जैसे होते हैं जो “कसाई-खाने को” जाता है (पद.22) l हमसे मजबूत लोगों ने हानिकारक शीर्ष बिन्दुओं को पाने का प्रयास करके खुद को बर्बाद किया है, इसलिए “सुनो” और “तेरा मन [गलत] मार्ग की ओर न फिरे” (पद.24-25) l पाप आकर्षक और लत लगाने वाला हो सकता है, परन्तु इसका अंत मृत्यु है (पद. 27) l परमेश्वर की सामर्थ्य में – पाप की परीक्षा से दूर रहकर, हम उसमें सच्चा आनंद और परिपूर्णता प्राप्त कर सकते हैं l

बुद्धिमान सहायता

जैसे ही मैंने लाल बत्ती पर अपनी कार रोकी, मैंने फिर से उसी व्यक्ति को सड़क के किनारे खड़ा देखा l वह गत्ते का एक साइनबोर्ड लिए हुए था : भोजन के लिए पैसे चाहिए l कोई भी सहायक हो सकता है l मैं अपना मूंह फेरकर गहरी सांस ली l क्या मैं ज़रुरात्मंदों की उपेक्षा करनेवाला व्यक्ति हूँ?

कुछ लोग ज़रूरतमंद होने का बहाना बनाते हैं परन्तु वास्तव में ठग होते हैं l दूसरों के पास वास्तविक ज़रूरतें होती हैं परन्तु विनाशकारी आदतों पर काबू पाने में कठिनाई महसूस करते हैं l सामाजिक कार्यकर्ता हमें बताते हैं कि अपने शहर की सहायता सेवाओं को धन देना बेहतर है l मैंने कठिनाई से इसे ग्रहण किया और गाड़ी तेज़ चलायी l मैंने अच्छा महसूस नहीं किया, परन्तु बुद्धिमानी से कार्य कर सकता था l

परमेश्वर हमें “आलसियों को चेतावनी [देने] भीरुओं को सांत्वना [देने] दुर्बलों को [सँभालने]’ की आज्ञा देता हैं (1 थिस्सलुनीकियों 5:14 HindiCL-BSI)) l इसे भलीभांति करने के लिए हमें जानना है कि कौन किस श्रेणी में आता है l यदि हम दुर्बलों अथवा कायरों को चेतावनी देते हैं, हम उनकी आत्मा को चूर-चूर कर देंगे; यदि हम आलसी की सहायता करेंगे, हम आलस को बढ़ावा देंगे l फलस्वरूप, हम निकट से पूरी मदद कर सकते हैं, जब हम प्रयाप्त रूप से व्यक्ति और उसकी ज़रूरतों को जान जाते हैं l

क्या परमेश्वर ने किसी की सहायता करने के लिए आपके हृदय पर बोझ डाला है? उत्कृष्ट! अब कार्य आरम्भ होता है l यह न समझें आप उस व्यक्ति की ज़रूरतें जानते हैं l उसे अपनी कहानी बताने को कहें, और आप सुनें l प्रार्थनापूर्वक बुद्धिमानी से मदद करें और केवल अच्छा महसूस करने के लिए नहीं l जब हम वास्तव में “सब से . . . भलाई ही की चेष्टा [करेंगे],” हम अधिक तत्परता से उस समय भी जब वे गिरेंगे “सब की ओर सहनशीलता [दिखा सकेंगे] (पद.14-15) l

आपकी प्रशस्ति

एक विश्वासी महिला के अंतिम संस्कार में उपस्थित होने के कारण मेरा हृदय भरा हुआ है l उसका जीवन असाधारण नहीं था l वह केवल अपने चर्च, पड़ोसी, और मित्रों के बीच में लोकप्रिय थी l परन्तु वह, उसके सात बच्चे, और 21 नाती-पोते यीशु से प्रेम करते थे l वह सरलता से हंसती थी, उदारतापूर्वक सेवा करती थी, और दूसरों के मन में लम्बे समय तक बस सकती थी l

सभोपदेशक कहता है, “भोज के घर जाने से शोक ही के घर जाना उत्तम है” (7:2) l “बुद्धिमान का मन शोक करनेवालों के घर की ओर लगा रहता है” क्योंकि हम वहाँ पर सबसे महत्वपूर्ण सबक सीखते हैं (7:4) l न्यू यॉर्क टाइम्स के स्तम्भ लेखक डेविड ब्रुक्स कहते हैं कि दो प्रकार के सद्गुण हैं : जो रिज्यूमे/आत्मकथा में अच्छे लगते हैं और दूसरा जो आप चाहेंगे कि आपके अंतिम संस्कार के समय आपके विषय कहे जाएँ l 

कभी-कभी ये मेल खाती हैं, यद्यपि अक्सर वे प्रतिस्पर्धा करती हुयी दिखाई पड़ती हैं l जब शंका हो, हमेशा अपनी अपनी प्रशस्ति/बड़ाई करनेवाले गुणों का चुनाव करें l

कफ़न में लिपटी महिला के पास कोई रिज्यूमे नहीं था, किन्तु उसके बच्चों ने गवाही दी कि “उन्होंने हमेशा नीतिवचन 31 का अभ्यास किया” और एक धर्मी स्त्री का जीवन जीया l उन्होंने उनको यीशु से प्रेम करने और दूसरों की देखभाल करने के लिए प्रेरित किया l जिस प्रकार पौलुस कहता है, “मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूँ” (1 कुरिन्थियों 11:1), इसलिए उपरोक्त पदों ने हमें अपनी माँ का अनुकरण करने के लिए चुनौती दी जैसे वह यीशु का अनुकरण करती थी l

आपके अंतिम संस्कार के समय क्या बोला जाएगा? आप क्या चाहेंगे कि बोली जाए? अपनी प्रशस्ति/बड़ाई के गुण विकसित करने में देर नहीं हुयी है l यीशु में विश्राम करें l उसका उद्धार हमें जो सबसे महत्वपूर्ण है के लिए जीने में स्वतंत्र करता है l

अकेलापन का मंत्री

अपने पति की मृत्यु के बाद, बेट्सी ने ज़्यादातर दिन अपने घर में टेलीविजन देखकर और अपने लिए चाय बनाकर व्यतीत किया है l वह अपने एकाकीपन में अकेले नहीं है l 90 लाख से अधिक ब्रिटेनवासियों(जनसंख्या का 15 फीसदी) का कहना है कि वे अक्सर या हमेशा अकेलापन का अनुभव करते हैं, और ग्रेट ब्रिटेन ने क्यों और कैसे सहायता की जा सकती है के लिए एकाकीपन का एक मंत्री नियुक्त किया है l

एकेलापन के कुछ कारण सबको पता हैं : अक्सर हम जड़ों को गहराई में ले जाने के लिए प्रयास करते हैं l हम भरोसा करते हैं कि हम अपनी चिंता कर सकते हैं, और हमारे पास बातचीत करने के लिए कारण नहीं है l हम तकनीक से अलग-थलग है – हममें से हर एक अपने खुद के अस्थिर चित्रपटों में मगन है l

मैं अकेलापन का अंधकारमय खतरा महसूस करता हूँ, और आप भी करते होंगे l इसीलिए हमें भी संगी विश्वासियों की आवश्यकता है l इब्रानियों हमें एक दूसरे के साथ नियमित रूप से इकठ्ठा होने के लिए उत्साहित करते हुए यीशु के बलिदान की अपनी गहरी परिचर्चा समाप्त करता है (10:25) l हम परमेश्वर का परिवार हैं, इसलिए हमें “भाईचारे की प्रीति” बनाए रखना है और “अतिथि-सत्कार करना नहीं भूलना [है] (13:1-2) l यदि हममें से हर एक प्रयास करेंगे, सभी लोग देखभाल का अनुभव करेंगे l

अकेले लोग संभतः हमारी दयालुता को लौटा नहीं पाएंगे, किन्तु हार मानने का यह कारण हो नहीं सकता है l यीशु ने हमें कभी नहीं छोड़ने की प्रतिज्ञा की है (13:5), और हम उसकी मित्रता का उपयोग दूसरों के लिए अपने प्रेम को बढ़ने के लिए कर सकते हैं l क्या आप अकेले हैं? आप परमेश्वर के परिवार की सेवा करने के लिए ढूँढ कौन से तरीके ढूँढ सकते हैं? आप जो मित्रता यीशु में करते हैं वो अनंत हैं, इस जीवन में और उसके बाद भी l

महत्वहीनों की सेवा

विडियो में एक व्यक्ति को अनियंत्रित आग के दौरान एक वयस्त मार्ग के पास घुटने टेके हुए दिखाया गया l वह हाथों से ताली बजाते हुए किसी चीज़ के आने के लिए निवेदन कर रहा था l वह क्या था? एक कुत्ता? कुछ क्षण बाद एक खरगोश कूदकर तस्वीर में आ गया l उस व्यक्ति ने उस डरे हुए खरगोश को उठाया और गति से दौड़कर उसे सुरक्षित स्थान में ले गया l

किस प्रकार एक छोटे चीज़ का बचाया जाना राष्ट्रीय खबर बन गया? इसीलिए l इनके समान सबसे निर्बल के प्रति करुणा दर्शाने के विषय कुछ प्रीतिकर है l सबसे छोटे प्राणी के लिए जगह बनाने के लिए एक बड़ा दिल चाहिए l

यीशु ने कहा स्वर्ग का राज्य एक व्यक्ति के समान है जिसने एक बड़े भोज का आयोजन किया और आने की इच्छा रखने वाले हर एक के लिए जगह बनायी l केवल प्रभावशाली लोगों के लिए नहीं परन्तु “कंगालों, टुन्डों, लंगड़ों और अन्धों” लिए (लूका 14:21) l मैं धन्यवादित हूँ कि परमेश्वर निर्बलों और कदाचित् महत्वहीन लोगों पर ध्यान देता है, क्योंकि अन्यथा मुझे कोई अवसर नहीं मिलता l पौलुस ने कहा, “परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है कि बलवानों को लज्जित करे; और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्छों को . . . चुन लिया . . .  ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के सामने घमण्ड न करने पाए” (1 कुरिन्थियों 1:27-29) l

मुझ जैसे छोटे व्यक्ति को बचाने के लिए परमेश्वर का हृदय कितना बड़ा होगा! प्रतिउत्तर में, मेरा हृदय कितना बड़ा हो गया है? मैं आसानी से बता सकता हूँ, मैं “महत्वपूर्ण व्यक्तियों”  को किस प्रकार प्रसन्न करता हूँ के द्वारा नहीं, किन्तु उन व्यक्तियों की सेवा करके जिन्हें समाज शायद अति महत्वहीन समझता है l