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Articles by माइक विटमर

आपका नाम क्या है?

किसी ने कहा है हम अपने जीवन में तीन नाम से जाने जाते हैं : नाम जो हमारे माता-पिता हमें देते हैं, नाम जो दूसरे हमें देते हैं(हमारी ख्याति), और वह नाम जो हम खुद को देते हैं(हमारा चरित्र) l नाम जो दूसरे हमें देते हैं मायने रखता है, क्योंकि “बड़े धन से अच्छा नाम अधिक चाहते योग्य है, और सोने चांदी से दूसरों की प्रसन्नता उत्तम है” (नीतिवचन 22:1) l लेकिन जबकि ख्याति महत्वपूर्ण है, चरित्र अधिक मायने रखता है l 

एक और नाम है जो और भी अधिक महत्वपूर्ण है l यीशु ने पिरगमुन में मसीहियों से कहा कि यद्यपि उनकी ख्याति जिसके वे योग्य थे बुरी तरह से प्रभावित हुई थी, उसके पास उनके लिए जो लड़ाई लड़ेंगे और आजमाइश पर जय पाएँगे स्वर्ग में एक नया नाम आरक्षित है l “जो जय पाए . . . उसे एक श्वेत पत्थर . . . दूँगा; और उस पत्थर पर एक नाम लिखा हुआ होगा, जिसे उसके पानेवाले के सिवाय और कोई न जानेगा” (प्रकाशितवाक्य 2:17) l 

हम निश्चित नहीं हैं कि यीशु ने एक सफ़ेद पत्थर का वादा क्यों किया? क्या यह जीतने का पुरस्कार है? मसीह के सम्बन्ध में(messianic) जेवनार में शामिल होने का निमंत्रण? शायद यह उसके समान है जो किसी समय जूरी-सदस्य(पंच) रिहाई के लिए समर्थन करते थे l हम नहीं जानते हैं l जो भी है, परमेश्वर वादा करता है कि हमारा नया नाम हमारे शर्म को मिटा देगा (यशायाह 62:1-5) l 

हमारी ख्याति तार-तार हो सकती है, और हमारा चरित्र दुरुस्त नहीं होता प्रतीत हो सकता है l लेकिन आख़िरकार कोई भी नाम हमें परिभाषित नहीं करता है l यह नहीं है कि दूसरे आपको किस नाम से पुकारते हैं न ही यह मायने रखता है कि आप खुद को क्या पुकारते हैं l आप वह हैं जो यीशु आपको संबोधित करता है l अपने नए नाम में जीयें l 

यीशु में अटूट

लूई जैम्पेरिनी का सैन्य विमान युद्ध के दौरान समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें आठ लोगों की मृत्यु हो गयी l “लूई” और दो अन्य लोग जीवन बेड़ा पर कठिनाई से चढ़ने में सफल रहे l दो महीने तक समुद्र में इधर उधर  बहते रहे, शार्कों से बचते रहे, तूफानों को पार करने की कोशिश करते रहे, शत्रु की गोलियों से बचते रहे, और कच्ची मछली और चिड़ियों को पकड़कर खाते रहे l अंततः वे बहकर एक द्वीप पर पहुँच गए और तुरंत गिरफ्तार कर लिए गए l दो वर्षों तक लूई को पीटा गया, प्रताड़ित किया गया और उसने युद्ध बंदी के रूप में निर्दयता से काम किया l उसकी असाधारण कहानी अन्ब्रोकन(Unbroken) पुस्तक में बताई गई  है l

यिर्मयाह बाइबल अटूट चरित्रों में से एक है l उसने शत्रु के षड्यंत्रों को सहा (यिर्मयाह 11:18), उसे कोड़े मारे गए और काठ में जकड़ दिया गया (20:2), उसे पीटा गया और काल कोठरी में डाल दिया गया (37:15-16), और उसे एक दलदल वाले गड़हे में रस्सियों से उतार दिया गया (38:6) l वह इसलिए बच गया क्योंकि परमेश्वर ने उसके साथ रहने और उसे बचाने का वादा किया था (1:8) l परमेश्वर हमारे साथ भी समान वादा करता है : “मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूँगा” (इब्रानियों 13:5) l परमेश्वर ने यिर्मयाह को या हम को परेशानी से बचाने की प्रतिज्ञा नहीं की है, लेकिन उसने परेशानियों में से होकर ले जाने की प्रतिज्ञा की है l  

लूई ने परमेश्वर की सुरक्षा को पहचाना, और युद्ध के बाद अपना जीवन यीशु को दे दिया l उसने उसे कैद करनेवालों को क्षमा कर दिया और कुछ को मसीह के लिए जीत लिया l लूई ने समझ लिया कि यद्यपि हम समस्याओं से भाग नहीं सकते, मुझे उन्हें अकेले सहने की ज़रूरत नहीं है l जब हम यीशु के साथ उनका सामना करते हैं, हम अटूट हो जाते हैं l 

अपने शत्रु से प्रेम

इससे पहले कि वह मुझे देखे, मैं कमरे में निकल गया l मैं छिपने के लिए शर्मिंदा था, लेकिन मैं उसके साथ उस समय पेश नहीं आना चाहता था──या किसी भी समय l मैं उसे डांटना चाहता था, और उसे उसकी औकात बताना चाहता था l यद्यपि मैं उसके अतीत से चिढ़ गया था, यह भी संभव है कि मैंने उसे और अधिक परेशान किया हो! 

यहूदी और सामरी भी आपसी रिश्ते को खराब किया था l मिश्रित मूल के लोग और अपने अपने ईश्वरों की उपासना करने वाले होने के कारण, सामरियों ने──यहूदियों की दृष्टि में──गरिज्जीम पर्वत पर एक प्रतिद्वंदी धर्म आरम्भ करके यहूदी वंशावली और विश्वास को बिगाड़ दिया था (यूहन्ना 4:20) l वास्तव में, यहूदी इतना अधिक सामरियों को तुच्छ जानते थे कि वे अपने देश के अन्दर से सीधे मार्ग लेने के बजाय घूमकर लम्बा रास्ता तय करते थे l   

यीशु ने एक बेहतर मार्ग बताया l वह सभी लोगों के लिए उद्धार लेकर आया, जिसमें सामरी लोग भी शामिल थे l इसलिए वह पापी स्त्री और उसके नगर को जीवन जल देने के लिए सामरिया के बीच में से होकर गया (पद.4-42) l उसके शिष्यों के लिए उसके अंतिम शब्द उसके नमूना का अनुसरण करना था l उन्हें उसका सुसमाचार यरूशलेम से आरंभ करके और सामरिया में फैलते हुए जब तक वे “पृथ्वी के छोर तक” न पहुँच जाएँ तब तक सभी के साथ साझा करना था (प्रेरितों 1:8) l सामरिया अगले भुगौलिक दृश्य से कहीं अधिक था l वह मिशन/उद्देश्य का सबसे पीड़ादायक भाग था l शिष्यों को उन लोगों से प्रेम करने के लिए पूर्वाग्रह के जीवनकालों को दूर करना था, जिन्हें वे पसन्द नहीं करते थे l 

क्या यीशु हमारी शिकायतों से अधिक हमारे लिए मायने रखता है? सुनिश्चित करने का केवल एक ही तरीका है l अपने “सामरी” से प्यार करें l 

यीशु हमें पुनर्स्थापित करता है

यद्यपि अशोक ने कुछ गलत नहीं की थी, उत्पादन-लाइन से उसकी नौकरी छूट गयी l दूसरे विभाग में लापरवाही की वजह से उनके द्वारा निर्मित कारों में समस्या पैदा हो गई । कई दुर्घटनाओं की खबर के बाद, जागरूक ग्राहकों ने उनका ब्रांड खरीदना बंद कर दिया । कंपनी को अपने कर्मचारी कम करनी पड़ी, जिससे अशोक की नौकरी चली गयी l उसकी संपार्श्विक/जमानत क्षति (collateral damage) है, और यह उचित नहीं है । कभी नहीं है ।

इतिहास की पहली जमानत क्षति पहले पाप के तुरंत बाद हुयी । आदम और हव्वा अपने नंगेपन से शर्मिंदा थे, तो प्रभु ने उन्हें अनुग्रह से “चमड़े के अंगरखे” पहनाए (उत्पति 3:21) । यह कल्पना करना दर्दनाक है, लेकिन एक या अधिक जानवर जो बगीचे में हमेशा सुरक्षित रहते थे अब वध किए गए और उनका चमड़ा खींचा गया l 

बहुत कुछ आने वाला था l परमेश्वर ने इस्राएल से कहा, “प्रति दिन तू वर्ष भर का एक निर्दोष भेड़ का बच्चा यहोवा के होमबलि के लिये तैयार करना, यह प्रति भोर को तैयार किया जाए” (यहेजकेल 46:13) । हर l एक l दिन l मनुष्य के पाप के कारण कई हज़ार जानवर बलिदान किए जा चुके हैं l” 

हमारे पापों को ढकने के लिए उनकी मृत्यु आवश्यक थी, जब तक परमेश्वर का मेमना, यीशु, इसे हटाने नहीं आया (यूहन्ना 1:29 ) । इसे “जमानत मरम्मत”कहो। जैसे आदम का पाप हमें मारता है, इसलिये आखिरी आदम (मसीह) की आज्ञाकारिता उन सभी को जो उस पर विश्वास करते है पुनर्स्थापित करता हैं (रोमियों 5:17-19) । जमानत मरम्मत उचित नहीं है——वह यीशु के जीवन की लागत है——पर यह मुफ्त है। विश्वास में यीशु के पास पहुँचों और उस उद्धार को जो वह प्रदान करता है ग्रहण करो । और उसका धर्मी जीवन आपके लिए गिना जायेगा ।

आप कौन है?

हमारे विडियो सम्मेलन के अगुए ने कहा, “गुड मोर्निंग!” मैंने कहा “हेलो” पर मैं उनको नहीं देख रहा था । मैं अपने ही स्क्रीन पर अपनी ही छवि से विकर्षित हो गया था l क्या मैं ऐसा दिखता हूँ? कॉल पर मैंने दूसरों के मुस्कुराते हुए चेहरों को देखा l वह उनकी तरह ही दिखता है । तो हाँ, यह तो मैं ही हूँ l मुझे कुछ वजन कम करना होगा l और बाल कटवाना होगा ।

अपने मन में, फिरौन काफी महान् था l वह “जाति, जाति में . . . जवान सिंह . . . समुद्र के मगर के समान [था] (यहेजकेल 32:2) l परन्तु फिर उसने अपनी झलक परमेश्वर के परिपेक्ष्य में देखा । परमेश्वर ने कहा कि वह मुसीबत में था और वह उसके शव को जंगली जानवरों के सामने डाल [देगा], जिससे “बहुत सी जाति[याँ] . . . तेरे कारण विस्मित [होंगी], और . . . उनके [राजाओं के . . . तेरे कारण . . . रोएँ खड़े हो जाएंगे” (पद.10) l  फिरौन जितना सोचता था उससे वह कम प्रभावित हुआ l

हम सोच सकते है कि हम “आत्मिक रूप से सुंदर” है──जब तक कि हम अपने पाप को जैसे परमेश्वर देखता है नहीं देखते हैं l उसके पवित्र मापदंड की तुलना में “हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं” (यशायाह 64:6) l लेकिन परमेश्वर कुछ और भी देखता है, कुछ और भी ज्यादा सच्चा; वह यीशु को देखता है, और वह हमें यीशु में देखता है ।

आप कैसे हैं के बारे में हतोत्साहित महसूस कर रहे है? याद रखें कि आप कौन हैं यह नहीं है । यदि आपने यीशु में भरोसा किया है, तो आप यीशु में है, और उसकी पवित्रता आपको ढक देती है । आप अपनी कल्पना से भी ज्यादा सुन्दर है ।

मृत्यु क्षेत्र

2019 में,  एक पर्वतारोही ने माउंट एवरेस्ट के शिखर से अपना अंतिम सूर्योदय देखा l वह खतरनाक चढ़ाई से बच गया, लेकिन उच्च तुंगता(high altitude) ने उसके हृदय को सिकोड़ दिया,  और नीचे दुर्गम यात्रा पथ पर उसकी मृत्यु हो गयी l एक चिकित्सा विशेषज्ञ पर्वतारोहियों को चेतावनी देते हैं कि वे अपनी यात्रा के अंत के रूप में शिखर के विषय न सोचें l याद रखते हुए कि “वे मृत्यु क्षेत्र में हैं,” उन्हें शीघ्रता से ऊपर चढ़ना और नीचे उतरना पड़ता है l 

दाऊद ने अपनी खतरनाक चढ़ाई पर बच गया l उसने शेरों और भालुओं को मार डाला,  गोलियत को मार डाला,  शाऊल के भाले और सेना को चकमा दिया, और पहाड़ का राजा बनने के लिए पलिश्तियों और अम्मोनियों को पराजित किया l

लेकिन दाऊद भूल गया कि वह मृत्यु क्षेत्र में था l अपनी सफलता के चरम पर, “जहाँ जहाँ दाऊद जाता था वहां वहां यहोवा उसको जयवंत करता था” (2 शमूएल 8:6),  उसने व्यभिचार और हत्या की l उसकी शुरुआती गलती?  वह पर्वत छोटी पर ठहर गया l जब उसकी सेना नई चुनौतियों के लिए तैयार हुई,  तो वह “यरूशलेम में रह गया” (11:1) l दाऊद ने एक बार गोलियत से लड़ने के लिए स्वेच्छा से भाग लिया था;  अब वह अपनी जीत की प्रशंसा में सुस्ताया l

जब परमेश्वर के साथ-साथ, सभी लोग, कहते हैं कि आप विशेष हैं तो उस अवस्था में अपने आपे में रहना कठिन होता है (7:11-16) l लेकिन हमें रहना चाहिए l अगर हमें कुछ सफलता मिली है,  तो हम उचित रूप से उपलब्धि का जश्न मना सकते हैं और बधाई स्वीकार कर सकते हैं,  लेकिन हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए l हम मृत्यु क्षेत्र में हैं l पहाड़ से नीचे आइए l  विनम्रतापूर्वक घाटी में दूसरों की सेवा करें─परमेश्वर से आपके हृदय और आपके कदमों की रक्षा करने के लिए कहिये l

न्यूट्रल में होना

कार धुलाई में मुझसे आगे वाला व्यक्ति एक मिशन/विशेष कार्य पर था l वह जानबूझकर अपने पिकअप(छोटी वैन) के पीछे की ओर गया और रूकावट को हटा दिया,  ताकि यह उच्च शक्ति घूमने वाले सफाई ब्रशों के काम करने में कठिनाई उत्पन्न नहीं करेगा l उसने अटेंडेंट को भुगतान किया और फिर उसने स्वचालित ट्रक को उस स्थान से बाहर निकाला जहाँ पर उसने खड़ा किया था l अटेंडेंट चिल्लाया, “न्यूट्रल! न्यूट्रल!” लेकिन खिड़कियाँ बंद होने के कारण वह सुन नहीं सकता था l गाड़ी की खिड़कियाँ बंद थीं और वह व्यक्ति सुन नहीं सका l वह मात्र चार सेकेंडों में कार धुलाई के स्थान से बाहर निकल गया l उसका ट्रक मुश्किल से भीगा l

एलिय्याह भी एक मिशन पर था l वह बड़े पैमाने पर ईश्वर की सेवा में व्यस्त था l उसने बाल के नबियों को एक अलौकिक बल परीक्षा में हराया था,  जिसने उसे थका दिया था (देखें 1 राजा 18:16–39) l उसे अबाधित/न्यूट्रल में समय की ज़रूरत थी l परमेश्वर एलिय्याह को होरेब पर्वत पर ले गया,  जहाँ वह मूसा के सामने बहुत पहले प्रगट हुआ था l एक बार फिर परमेश्वर ने पहाड़ को हिला दिया l लेकिन वह चट्टान को तोड़नेवाली आंधी, भूकंप, या उग्र आग में नहीं था l इसके बजाय, परमेश्वर कोमल फुसफुसाहट में एलिय्याह के पास आया l “यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढाँका, और बाहर जाकर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ” परमेश्वर से मुलाकात करने के लिए (1 राजा 19:13) l

आप और मैं एक मिशन पर हैं l हम अपने जीवन को अपने उद्धारकर्ता के लिए बड़ी चीजों को पूरा करने के मुहीम में हैं l लेकिन अगर हम न्यूट्रल में नहीं आएँगे, हम जीवन में होकर निकल जाएंगे और पवित्र आत्मा की भरपूरी से वंचित हो जाएंगे l परमेश्वर फुसफुसाता है, “चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ” (भजन 46:10) l न्यूट्रल! न्यूट्रल!

खिड़कियाँ

हिमालय की तलहटी के पास, एक आगंतुक ने बिना खिड़कियों वाले घरों की एक पंक्ति को देखा l उनके मार्गदर्शक ने बताया कि कुछ ग्रामीणों को डर था कि जब वे सोते थे तो उनके घरों में राक्षस/दानव घुस सकते थे, इसलिए उन्होंने अभेद्य दीवारें बनायीं l  आप बता सकते हैं जब एक गृहस्वामी ने यीशु का अनुसरण करना शुरू किया क्योंकि उसने प्रकाश के अन्दर आने देने के लिए खिड़कियाँ लगा दीं l

एक समान गति बोधक हमारे अंदर आरंभ हो सकता है, हालांकि हम इसे उस तरह नहीं देख सकते हैं l हम डरावना, ध्रुवीकरण के समय में रहते हैं l शैतान और उसके अवदूत क्रोधी विभाजन पैदा करते हैं जो परिवारों और दोस्तों को विभाजित करते हैं l मुझे अक्सर अपनी दीवारों के पीछे छिपने का मन करता है l लेकिन यीशु चाहता है कि मैं एक खिड़की बनाऊं l

इस्राएल ने ऊंची दीवारों में शरण ली, लेकिन परमेश्वर ने कहा कि उनकी सुरक्षा उसके साथ है l वह स्वर्ग से राज्य करता है, और उसका वचन सभी पर शासन करता है (यशायाह 55:10-11) l अगर इस्राएल उसके पास लौट आएगा, तो ईश्वर उन पर “दया करेगा” (पद.7) और उन्हें संसार को आशीष देने के लिए अपने लोगों के रूप में पुनर्स्थापित करेगा (उत्पत्ति 12:1-3) l वह उन्हें उन्नत करेगा, अंततः उन्हें एक विजयी परेड/जुलूस में ले जाएगा l उनके उत्सव “से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा” (यशायाह 55:13) l

कभी-कभी दीवारें आवश्यक हैं l दीवारों के साथ खिड़कियाँ सबसे अच्छी हैं l वे संसार को दिखाती हैं कि हम भविष्य के लिए परमेश्वर पर भरोसा करते हैं l हमारे डर असली हैं l हमारा परमेश्वर उससे बड़ा है l खिड़कियाँ हमें यीशु की ओर खोलती हैं—“जगत की ज्योति” (यूहन्ना 8:12)—और दूसरों के लिए भी जिनको उसकी जरूरत है l

गॉट योर नोज़(Got your nose!)

“मूर्तियों की नाक क्यों टूटी हुई हैं?” यह पहला सवाल है जो आगंतुक ब्रुकलिन संग्रहालय में मिस्र की कला के अध्यक्ष, एडवर्ड से पूछते हैं l
एडवर्ड इसे सामान्य टूट-फुट पर दोष नहीं दे सकता हैं; यहां तक ​​कि दो आयामी चित्रित आकृतियों के नाक भी गायब हैं l वे अनुमान लगाते हैं कि इस तरह का विनाश जानबूझकर किया गया है l दुश्मनों का इरादा मिस्र के देवताओं को मारना था l ऐसा लगता है जैसे वे उनके साथ “गोट योर नोज़”(एक खेल) खेल रहे थे l आक्रमणकारी सेनाओं ने इन मूर्तियों के नाक तोड़ डाले जिससे वे सांस नहीं ले सकते थे l
सचमुच?बस इतने की ज़रूरत थी? इस तरह के देवताओं के साथ, फिरौन को पता होना चाहिए था कि वह मुसीबत में था l हाँ, उसके पास एक सेना और एक पूरे राष्ट्र की राज्यनिष्ठा थी l इब्री मूसा नामक डरपोक भगोड़े के नेतृत्व में थके हुए दास थे l लेकिन इस्राएल के पास जीवित परमेश्वर था, और फिरौन के देवता झूठा दावा करनेवाले थे l दस विपत्तियों के बाद, उनके काल्पनिक जीवन समाप्त हो गए l
इस्राएल ने अपनी जीत का जश्न अखमीरी रोटी के पर्व के साथ मनाया, जब उन्होंने एक हफ्ते तक बिना खमीर की रोटी खाई (निर्गमन 12:17; 13:7–9)l खमीर पाप का प्रतीक है, और परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग याद रखें कि उनका बचाया हुआ जीवन पूरी तरह से उसका है l
हमारा पिता मूर्तियों से कहता है, “तुम हार गए,” और अपने बच्चों से, “तुम्हें जीवन मिल गया l” उस परमेश्वर की सेवा करो जो तुम्हें सांस देता है, और उसके प्रेमी बाहों में विश्राम करो l