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Articles by माइक विटमर

आपका गीत क्या है?

अधिकांश अमेरिकियों को 2015 तक, अलेक्जेंडर हैमिल्टन (एक अमेरिकी राजनेता और अमेरिका के संस्थापक पिता में से एक) के बारे में बहुत कम पता था, जब लिन-मैनुअल मिरांडा ने अपना हिट संगीत हैमिल्टन लिखा l अब अमेरिका के स्कूली बच्चे हैमिल्टन की कहानी को कंठस्थ कर चुके हैं l वे इसे बस में और अवकाश पर एक दूसरे को गाते हैं l

परमेश्वर संगीत की शक्ति को जानता है,  और उसने मूसा से कहा, “यह गीत लिख लो, और तू इसे इस्राएलियों को सिखाकर कंठस्थ करा देना” (व्यवस्थाविवरण 31:19) l परमेश्वर जानता था कि मूसा के चले जाने के काफी समय बाद,  जब वह इस्राएल को प्रतिज्ञात देश में पहुँचा चूका होगा, तो वे विद्रोह और दूसरे देवताओं की उपासना करेंगे l इसलिए उसने मूसा से कहा, “यह गीत इन पर साक्षी देगा, क्योंकि इनकी संतान इसको कभी भी नहीं भूलेगी” (पद.21) l  

गीतों को भूलना लगभग असंभव है,  इसलिए हम जो गाते हैं उसके बारे में चयनात्मक होना बुद्धिमानी है l कुछ गीत सिर्फ मनोरंजन के लिए हैं,  और यह ठीक है,  लेकिन हम उन गीतों से लाभ उठाते हैं जो यीशु में गर्व करते हैं और हमारे विश्वास को प्रोत्साहित करते हैं l उन तरीकों में से एक,  जिससे हम “अवसर को बहुमूल्य [बनाते हैं]” वह है जब हम “आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत [गाते हैं] l” इसलिए “अपने-अपने मन से प्रभु के सामने गाते और कीर्तन करते रहो” (देखें इफिसियों 5:15-19) l

गाने हमारे दिल की दिशा का सूचक हो सकते हैं l क्या शब्द यीशु के विषय बहुत कुछ कहते हैं?  क्या हम उन्हें पूरे दिल से गाते हैं?  हम जो गाते हैं वह हमारे विश्वास को प्रभावित करेगा, इसलिए बुद्धिमानी से चुनें और जोर से गाएं l

किसको मेरी ज़रूरत है?

वाशिंगटन,  डीसी के लिए एक रेड-आई उड़ान/red-eye flight(रात को प्रस्थान करके सुबह पहुँचने वाली उड़ान) पर,  राय(opinion) लेखक आर्थर ब्रूक्स ने एक बूढ़ी औरत को अपने पति को फुसफुसाते हुए सुना, “यह सच नहीं है कि अब किसी की तुम्हारी ज़रूरत नहीं है l” उस आदमी ने मरने की इच्छा के बारे में कुछ बुदबुदाया, और उसकी पत्नी ने कहा,  "ओह, यह कहना बंद करो ।" जब उड़ान समाप्त हो गई,  तो ब्रूक्स मुड़कर तुरंत आदमी को पहचान लिया । वह एक विश्व प्रसिद्ध नायक थे । अन्य यात्रियों ने उससे हाथ मिलाए,  और पायलट ने दशकों पहले प्रदर्शित साहस के लिए उसे धन्यवाद दिया । यह असाधारण योग्यता वाला व्यक्ति निराशा में कैसे डूब गया था?

नबी एलिय्याह ने बहादुरी से और अकेले दम पर 450 बाल नबियों को – या जैसा उसने सोचा -  हराया (1 राजा 18) l फिर भी वह वास्तव में अकेले नहीं किया था;  परमेश्वर वहाँ हमेशा उसके साथ था l लेकिन बाद में,  बिल्कुस अकेला महसूस करते हुए,  उसने परमेश्वर से अपनी मृत्यु मांगी l

परमेश्वर ने एलिय्याह की आत्मा को अपनी उपस्थिति में लाकर और उसे नए लोगों की सेवा देकर उसे उठाया l उसे जाकर "अराम का राजा होने के लिए हजाएल का, इस्राएल का राजा होने को . . . एहू का, और अपने स्थान पर नबी होने के लिए . . . एलीशा का अभिषेक [करना था]” (19:15-16) । नूतन उद्देश्य की स्फूर्ति से भरकर,  एलिय्याह ने अपने उत्तराधिकारी को पाया और उसको तैयार किया l

आपकी शानदार जीत पीछे के दर्पण में स्थित होंगी l आप महसूस कर सकते हैं कि आपका जीवन चरम पर है,  या ऐसा कभी हुआ ही नहीं । कोई बात नहीं । चारों ओर देखें l संघर्ष छोटे  लग सकते हैं,  दांव कम निपुण लग सकते हैं,  लेकिन फिर भी ऐसे लोग हैं जिन्हें आपकी ज़रूरत है । यीशु की खातिर उनकी अच्छी तरह से सेवा करें, और उनका महत्व होगा l वे आपके उद्देश्य हैं – यही वह कारण है जिससे आप अभी भी जीवित हैं l

आप किसको धारण किये हुए हैं?

अर्जेंटीना की महिला बास्केटबॉल टीम अपने टूर्नामेंट के खेल में गलत यूनिफार्म पहनकर आई थी । उनकी नेवी ब्लू जर्सी कोलंबिया की गहरी नीली जर्सी के लगभग समान थी,  और अतिथि टीम के रूप में उन्हें सफेद पहनना चाहिए था । प्रतिस्थापन यूनिफार्म खोजने और बदलने के लिए समय नहीं होने के कारण,  उन्हें खेल को छोड़ना पड़ा । भविष्य में,  अर्जेंटीना निश्चित रूप से दो बार जांच करेगा कि उन्होंने क्या पहना है ।

नबी जकर्याह के समय में, परमेश्वर ने उसे एक दर्शन दिया,  जिसमें महायाजक यहोशु परमेश्वर  के सामने बदबूदार,  गंदे कपड़े पहने हुए आया है । शैतान ने उपहास किया और इशारा किया । वह अयोग्य है! खेल खत्म! लेकिन बदलने का समय था । परमेश्वर ने शैतान को फटकार लगाई और उसने अपने दूत से यहोशू के मलिन कपड़ों को हटाने के लिए कहा । वह यहोशू की ओर मुड़ा,  “देख, मैंने तेरा अधर्म दूर किया है, और मैं तुझे सुन्दर वस्त्र पहिना देता हूँ” (जकर्याह 3:4) ।

हम आदम के पाप की बदबू को धारण किये हुए इस संसार में आए, जिस पर हम अपने पाप का तह लगाते हैं l यदि हम अपने गंदे कपड़ों में रहते हैं,  तो हम जीवन का खेल हार जाएंगे l  अगर हम अपने पाप से घृणा करते हैं और यीशु की ओर मुड़ते हैं,  तो वह हमें सिर से पैर तक खुद को और अपनी धार्मिकता को पहिनाएगा l यह जाँचने का समय है कि हम क्या धारण किये हुए हैं?

अंग्रेजी गीत “ख्रिस्त, दृढ़ चट्टान मेरा आधार(The Solid Rock) हमें जीतने का तरीका समझाता है l “वैभव के साथ वह आएगा, / साथ उसके मैं भी जाऊँगा, / उसकी धार्मिकता को पहने, / स्वर्ग के सिंहासन के दाहिने l”

उद्देश्य के साथ आराम

रमेश दूसरों को यीशु के बारे में बताना पसंद करता है । वह साहसपूर्वक सहकर्मियों के साथ बात करता है, और हर महीने एक सप्ताह के अंत में अपने गांव में घर-घर जाकर प्रचार करता है । उनका उत्साह लगनेवाला है - खासकर जब से उसने आराम और विश्राम करने के लिए समय निकालने का मूल्य सीखा है ।

रमेश हर सप्ताहांत और अधिकांश शाम सुसमाचार के प्रचार में बिताता था । जब वह बाहर रहता था, तो उसकी पत्नी और बच्चों ने उसे याद करते थे,, और जब वह आसपास था, तो उन्होंने उसे थका हुआ पाया । उसे हर मिनट और बातचीत को महत्वपूर्ण बनाना था l वह खेल या छोटी सी बात का आनंद नहीं ले सकता था । रमेश कस कर जकड़ा हुआ था l

वह अपनी पत्नी के ईमानदार शब्दों, दोस्तों की सलाह और कुछ हद तक पवित्रशास्त्र के अस्पष्ट परिच्छेदों द्वारा अपने असंतुलन के प्रति जागृत हो गया था । नीतिवचन 30 साधारण बातों का उल्लेख करता है, जैसे चींटियाँ, बिज्जू और टिड्डियाँ । यह आचार्यचकित करता है कि "छिपकली हाथ से पकड़ी तो जाती है, तौभी राजभवनों में रहती है”(पद.28) ।

रमेश सोच रहा था कि कुछ साधारण चीजों ने बाइबल में जगह कैसे पाया l छिपकलियों को रुककर ध्यान से देखना पड़ता है l किसी ने महल के चारों ओर एक छिपकली को देखा और सोचा कि यह दिलचस्प है, और कुछ और देखने के लिए रुक गया । शायद परमेश्वर ने इसे अपने वचन में शामिल किया ताकि हमें आराम के साथ काम को संतुलित करने के लिए याद दिलाया जा सके । हमें छिपकलियों के बारे में कल्पना करने के लिए घंटों चाहिये, अपने बच्चों के साथ एक पकड़ें, और बस परिवार और दोस्तों के साथ आराम करें । परमेश्वर हमें ज्ञान दे कि हमें कब काम करना, सेवा करना और आराम करना है!

यह किसके लिए है?

तस्वीर ने मुझे जोर से हंसाया । भीड़ मार्ग में खड़ी होकर झंडे लहराते हुए, और कंफ़ेद्दी(confetti) फेंकते हुए अपने राजनीतिक नेता की प्रतीक्षा कर रही थी l सड़क के बीच में एक आवारा पिल्ला टहलता हुआ, मुस्कुराता हुआ दिखाई दे रहा था मानो जयकार पूरी तरह से उसके लिए था । हाँ! प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन के किसी न किसी समय में खुश होता है, और उसे इस प्रकार दिखायी देना चाहिये l 

यह बहुत सुन्दर दिखता है जब एक पिल्ला “दिल जीत लेता है,” लेकिन दूसरे की प्रशंसा छीन लेना हमें नष्ट कर सकता है । डेविड यह जानता था, और उसने पानी पीने से इनकार कर दिया था जो उसके शक्तिशाली योद्धाओं ने पाने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डाल दिया था । उसने उत्कंठा से कहा था कि यदि कोई बेतलहेम में कुएं से कोई पानी लाएगा तो यह बहुत अच्छा होगा । उसके तीन सैनिक उसे वस्तुतः समझ लिए l उन्होंने दुश्मन की सीमा-रेखाओं को तोड़ दिया, पानी निकाला, और उसे वापस ले गए । दाऊद उनकी भक्ति से अभिभूत था, और उसे आगे बढ़ाना था l उसने पानी पीने से इनकार कर दिया, लेकिन “यहोवा के सामने अर्घ करके उँडेला” (2 शमूएल 23:16) ।

हम प्रशंसा और सम्मान का जवाब कैसे देते हैं, हमारे बारे में बहुत कुछ कहता है । जब प्रशंसा दूसरों की ओर निर्देशित होती है, विशेष रूप से परमेश्वर, रास्ते से दूर रहें l परेड हमारे लिए नहीं है । जब सम्मान हमारी ओर निदेशित किया जाता है, तो उस व्यक्ति को धन्यवाद दें और फिर यीशु को सम्पूर्ण महिमा देते हुए उस प्रशंसा को बढ़ाएँ । "पानी" हमारे लिए भी नहीं है । धन्यवाद दीजिए, फिर उसे परमेश्वर को अर्घ करके चढ़ाएँ l

कभी पर्याप्त नहीं

फ्रैंक बोरमन ने चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले पहले अंतरिक्ष मिशन की कमान संभाली । वह प्रभावित नहीं हुआ l दोनों तरफ से यात्रा में दो दिनों का समय लगा l फ्रैंक को गति-मिचली/रुग्णता(motion sickness) हो गई और उसको उलटी आ गयी l उन्होंने कहा कि तीस सेकंड के लिए वजन रहित होना अच्छा था । फिर उसे इसकी आदत हो गई । पास में उसने चंद्रमा को धूसर और गड्ढेदार पाया l उनके कर्मी दल ने धूसर बंजर भूमि की तस्वीरें लीं, फिर ऊब गए ।

फ्रैंक वहाँ गया जहाँ पहले कोई नहीं गया था । यह पर्याप्त नहीं था l यदि वह इस संसार के  बाहर के एक अनुभव से जल्दी थक गया, तो शायद हमें इस बात की अपेक्षा कम करनी चाहिए कि इसमें क्या निहित है । सभोपदेशक के शिक्षक ने देखा कि कोई भी सांसारिक अनुभव परम आनन्द प्रदान नहीं करता है । “न तो आँखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं” (1: 8) । हम परम आनंद के क्षणों को महसूस कर सकते हैं, लेकिन हमारा उत्साह जल्द ही मिट जाता है और हम अगले रोमांच की तलाश करते हैं ।

फ्रैंक के पास एक जीवनदायक क्षण था, जब उसने पृथ्वी को चंद्रमा के पीछे अंधेरे से उठते देखा । नीले और सफ़ेद घूमते हुए संगमरमर की तरह, हमारा संसार सूरज की रोशनी में चमकने लगा l इसी तरह, हमारी सच्ची खुशी पुत्र(Son) से आती है जो हम पर चमकता है l यीशु हमारा जीवन, अर्थ, प्रेम और सौंदर्य का एकमात्र अंतिम स्रोत है । हमारी गहरी संतुष्टि इस दुनिया से आती है । हमारी समस्या? हम चंद्रमा तक जा सकते हैं, फिर भी बहुत दूर नहीं जाते हैं l

मैं यहाँ कैसे पहुंचा?

तारा एयर कनाडा जेट विमान के अन्दर घोर अँधेरे में जागी l अभी भी अपनी सीट बेल्ट पहनी हुई, वह सो गई थी जबकि अन्य यात्री बाहर निकल गए और विमान को खड़ा कर दिया गया था l किसी ने उसे क्यों नहीं जगाया?  वह यहां कैसे पहुंची?  उसने अपने दिमाग के जालों को हटाया और याद करने की कोशिश की l

क्या आपने खुद को ऐसी जगह पाया है जिसकी आपने कभी उम्मीद नहीं की थी?  आप इस बीमारी से ग्रस्त होने के लिए बहुत छोटे हैं,  और यह लाइलाज है l आपकी अंतिम समीक्षा उत्कृष्ट थी;  आपके पद को क्यों समाप्त किया जा रहा है?  आप अपनी शादी के सबसे अच्छे वर्षों का आनंद ले रहे थे l अब आप एक अंशकालिक नौकरी के साथ एकल अभिभावक के रूप में फिर से शुरुआत कर रहे हैं l

मैं यहाँ कैसे पहुंचा?  अय्यूब ने “राख पर” (अय्यूब 2:8) बैठ कर सोचा होगा l कुछ ही समय में, उसने पूरी तौर से अपने बच्चों,  अपने धन और अपने स्वास्थ्य को खो दिया था l वह अनुमान नहीं लगा सकता था कि वह यहाँ कैसे पहुंचा;  वह सिर्फ इतना जानता था कि उसे याद रखना है l

अय्यूब ने अपने सृष्टिकर्ता को याद किया और कि वह कितना अच्छा था l उसने अपनी पत्नी से कहा, “क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दुःख न लें? अय्यूब को याद था कि वह इस अच्छे परमेश्वर पर विश्वासयोग्य होने के लिए उस पर भरोसा कर सकता था l और उसने खेद प्रगट किया l वह स्वर्ग पर चिल्लाया l और वह आशा में विलाप किया, “मुझे निश्चय है कि मेरा छुड़ानेवाला जीवित है,” और कि “मैं शरीर में होकर [उसका] दर्शन करूँगा” (19:25-26) l अय्यूब आशा को थामे रहा जब उसने याद किया कि कहानी किस प्रकार शुरू हुई और कैसे समाप्त होती है l

सामान्य से परे अनुग्रह

विजय एक कानूनी फर्म/कंपनी के लिए काम करता था, जो सुरेश की कंपनी को सलाह देती थी l वे मित्र बन गए – जब तक कि विजय ने कंपनी से लाखों रूपयों का गबन नहीं कर लिया l सुरेश आहत और क्रोधित हुआ जब उसे पता चला, लेकिन उसने मसीह में विश्वास रखने वाले अपने मालिक से बुद्धिमान परामर्श प्राप्त किया l उसके मालिक ने देखा कि विजन बहुत शर्मिंदा और पश्चातापी था, और उसने सुरेश को आरोप मुक्त करने और विजय को नौकरी देने की सलाह दी l “उसे एक उचित वेतन का भुगतान करें ताकि वह वापस कर सके l आपके पास कभी भी अधिक आभारी, वफादार कर्मचारी नहीं होगा l” सुरेश ने किया, और विजय वफादार हुआ l

राजा शाऊल के पोते मपिबोशेत ने कुछ भी गलत नहीं किया था, लेकिन जब दाऊद राजा बना, तब वह एक कठिन जगह पर था l अधिकाँश राजाओं ने राजवंशों को घात किया l लेकिन दाऊद राजा शाऊल के बेटे योनातान से प्यार करता था, और उसके जीवित बेटे को अपना मानता था (देखें 2 शमूएल 9:1-13) l उसकी कृपा से जीवन भर के लिए एक दोस्त को जीत लिया l मपिबोशेत ने आश्चर्य किया कि “मेरे पिता का समस्त घराना तेरी ओर से प्राण दंड के योग्य था; परन्तु तू ने अपने दास को अपनी मेज पर खाने वालों में गिना है” (19:28) l वह दाऊद के प्रति तब भी वफादार रहा जब दाऊद के पुत्र अबशालोम ने दाऊद को यरूशलेम से भगाया (2 शमूएल 16:1-4; 19:24-30) l

क्या आप जीवन भर के लिए एक वफादार मित्र चाहते हैं? कोई जो असाधारण है आपको उसके लिए कुछ असाधारण करने की ज़रूरत हो सकती है l जब सामान्य ज्ञान दंड का चुनाव करता है, तो आप अनुग्रह का चुनाव करें l उन्हें जवाबदेह ठहराएं, लेकिन अयोग्य लोगों को सही बनने का मौका दें l आप कभी भी अधिक आभारी, समर्पित दोस्त नहीं पा सकते हैं l सामान्य से परे, अनुग्रह के साथ सोचें l

शायद मूर्तियाँ

सैम हर दिन दो बार अपना सेवानिवृत्ति खाता देखता है l उसने तीस साल तक बचत की, और एक बढ़ते शेयर बाजार के बढ़ने के साथ अंत में उसके पास रिटायर होने के लिए पर्याप्त है l जब तक स्टॉक डूबता नहीं है l इस डर से सैम को अपने बैलेंस(बाकी रकम) की चिंता रहती है l

यिर्मयाह ने इस बारे में चेतावनी दी : “हे यहूदा, जितने तेरे नगर हैं उतने ही तेरे देवता भी हैं; और यरूशलेम के निवासियों ने हर एक सड़क में उस लज्जापूर्ण बाल की वेदियाँ बनाकर उसके लिए धुप जलाया है” (11:13) l

यहूदा की मूर्तिपूजा उल्लेखनीय है l वे जानते थे कि प्रभु ही परमेश्वर था l वे किसी और की उपासना कैसे कर सकते थे? वे अपने होड़(bet) को सुरक्षित कर रहे थे l उन्हें भविष्य जीवन के लिए परमेश्वर की ज़रूरत थी, क्योंकि केवल सच्चा परमेश्वर ही उन्हें मृतकों में से जी उठा सकता था l लेकिन अब इसका क्या? गैर-यहूदी कथित ईश्वर स्वास्थ्य, धन और बहुतायत का वादा करते थे, इसलिए उनसे भी क्यों नहीं प्रार्थना की जाए, शायद?

क्या आप देख सकते हैं कि यहूदा की मूर्तिपूजा हमारी भी परीक्षा है? प्रतिभा, शिक्षा, और पैसा होना अच्छा है l लेकिन अगर हम सावधान नहीं होते हैं, तो हम अपना विश्वास उनके पास स्थानांतरित कर सकते हैं l हम जानते हैं कि हमारी मृत्यु के समय हमें परमेश्वर की आवश्यकता होगी, और हम उन्हें अभी हमें आशीष देने के लिए कहेंगे l लेकिन हम इन कमतर कथित ईश्वरों पर भी भरोसा करेंगे, शायद l

आपका भरोसा कहाँ है? बैक-अप(सहायक) भी तो मूर्तियाँ ही हैं l परमेश्वर के अनेक उपहारों के लिए धन्यवाद, और उसे बताएं कि आप उनमें से किसी पर भरोसा नहीं कर रहे हैं l आपका विश्वास सम्पूर्ण रूप से उस पर(परमेश्वर) है l