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Articles by माइक विटमर

शायद मूर्तियाँ

सैम हर दिन दो बार अपना सेवानिवृत्ति खाता देखता है l उसने तीस साल तक बचत की, और एक बढ़ते शेयर बाजार के बढ़ने के साथ अंत में उसके पास रिटायर होने के लिए पर्याप्त है l जब तक स्टॉक डूबता नहीं है l इस डर से सैम को अपने बैलेंस(बाकी रकम) की चिंता रहती है l

यिर्मयाह ने इस बारे में चेतावनी दी : “हे यहूदा, जितने तेरे नगर हैं उतने ही तेरे देवता भी हैं; और यरूशलेम के निवासियों ने हर एक सड़क में उस लज्जापूर्ण बाल की वेदियाँ बनाकर उसके लिए धुप जलाया है” (11:13) l

यहूदा की मूर्तिपूजा उल्लेखनीय है l वे जानते थे कि प्रभु ही परमेश्वर था l वे किसी और की उपासना कैसे कर सकते थे? वे अपने होड़(bet) को सुरक्षित कर रहे थे l उन्हें भविष्य जीवन के लिए परमेश्वर की ज़रूरत थी, क्योंकि केवल सच्चा परमेश्वर ही उन्हें मृतकों में से जी उठा सकता था l लेकिन अब इसका क्या? गैर-यहूदी कथित ईश्वर स्वास्थ्य, धन और बहुतायत का वादा करते थे, इसलिए उनसे भी क्यों नहीं प्रार्थना की जाए, शायद?

क्या आप देख सकते हैं कि यहूदा की मूर्तिपूजा हमारी भी परीक्षा है? प्रतिभा, शिक्षा, और पैसा होना अच्छा है l लेकिन अगर हम सावधान नहीं होते हैं, तो हम अपना विश्वास उनके पास स्थानांतरित कर सकते हैं l हम जानते हैं कि हमारी मृत्यु के समय हमें परमेश्वर की आवश्यकता होगी, और हम उन्हें अभी हमें आशीष देने के लिए कहेंगे l लेकिन हम इन कमतर कथित ईश्वरों पर भी भरोसा करेंगे, शायद l

आपका भरोसा कहाँ है? बैक-अप(सहायक) भी तो मूर्तियाँ ही हैं l परमेश्वर के अनेक उपहारों के लिए धन्यवाद, और उसे बताएं कि आप उनमें से किसी पर भरोसा नहीं कर रहे हैं l आपका विश्वास सम्पूर्ण रूप से उस पर(परमेश्वर) है l

हटना

जब मेरे पास्टर ने हमारी कक्षा से यीशु के जीवन के बारे में एक कठिन सवाल पुछा, तो मेरे हाथ खड़े हो गए। मैंने उस कहानी को हाल ही में पढ़ी थी, इसलिए मैं इसे जानता था, और मेरी इच्छा थी कि कमरे में और भी जो लोग हैं उनको भी यह मालूम हो जाए कि मैं भी जानता था। आखिरकार, मैं एक बाइबल शिक्षक हूँ। उन सब के सामने असफल होना कितना लज्जाजनक होता! अब मैं शर्मिन्दिगी के भय से लज्जा महसूस की इसलिए मैंने अपना हाथ नीचे कर लिया। क्या मैं इतना असुरक्षित हूँ?
यूहन्ना बप्तिस्मा देनेवाला हमें और बेहतर मार्ग दिखाता है। जब उसके शिष्य शिकायत करने लगे कि लोग उसे छोड़कर यीशु का अनुसरण करने लगे हैं, यूहन्ना ने कहा कि वह यह सुनकर आनंदित है। वह केवल संदेशवाहक था। “मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूँ . . . कि वह बढ़े और मैं घटू” (3:28-30)। युहन्ना ने समझ लिया था कि उसके अस्तित्व का आशय यीशु था। वह ही है “जो ऊपर से आता है” और “सर्वोत्तम है” (पद.31)। – वह दिव्य पुत्र जिसने हम सब के लिए अपने आप को दे दिया और सम्पूर्ण महिमा और प्रसिद्धि उसे प्राप्त हो।
खुद की ओर किसी भी प्रकार का ध्यानाकर्षण हमें हमारे प्रभु से ध्यान भटकाता है और चूँकि वह हमारा एकमात्र उद्धारकर्ता है और संसार के लिए एकमात्र आशा है, जो भी श्रेय हम उससे चुराते हैं वह हमें नुक्सान पहुंचाता है।

चुनौती की ओर दौड़

डेविड ने उन युवकों का पीछा किया जो उसके निर्बल मित्र की बाइक चुरा रहे थे l उसके पास कोई योजना नहीं थी l वह केवल जानता था कि उसे वह बाइक वापस लाना ही है l वह चकित हुआ, तीनों चोर उसकी ओर देखे, बाइक छोड़ दिए, और वापस चले गए l डेविड को राहत राहत मिली और वह खुद से प्रभावित हुआ जब उसने बाइक उठाया और वापस मुड़ा l उसी समय उसने अपने मजबूत मित्र, संतोष को देखा, जो उसके निकट पीछे चल रहा था l 

एलिशा घबरा गया जब उसने अपने शहर को एक दुश्मन सेना से घिरा हुआ देखा l वह एलिशा के पास भागा, “अरे नहीं, स्वामी! हमें क्या करना चाहिए?” एलिशा ने उसे शांत रहने को कहा l “जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं l” तब परमेश्वर ने उसके सेवक की आँखें खोल दीं और उसने “एलिशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ” देखा (पद. 15-17) l 

यदि आप यीशु के पीछे चलने का यत्न करेंगे, तो आप अपने आप को कुछ खतरनाक स्थिति में पाएंगे l आप अपनी प्रतिष्ठा को जोखिम में डाल सकते हैं, और शायद अपनी सुरक्षा को भी, क्योंकि आपने सही करने का दृढ़ निश्चय किया है l आप यह सोचकर नींद खो सकते हैं कि इसका परिणाम क्या होगा l याद रखें, आप अकेले नहीं हैं l आपके सामने चुनौती से अधिक मजबूत या होशियार होने की ज़रूरत नहीं है l यीशु आपके साथ है, और उसकी शक्ति सभी विरोधियों से अधिक है l अपने आप से पौलुस के सवाल पूछें, “यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? (रोमियों 8:31) l वाकई, कौन? कोई नहीं l परमेश्वर के साथ अपनी चुनौती की ओर दौड़ें l 

मार्ग पर रहें

शाम होने लगी थी जब मैं मध्य चीन के पहाड़ों में कटे सोपानी दीवारों की चोटी के साथ-साथ ली बाओ के पीछे चला l मैं इस तरह के मार्ग पर पहले कभी नहीं चला था, और मैं एक से अधिक कदम आगे नहीं देख सकता था या हमारी बायीं ओर की धरती कितनी गहरी थी l मैं घूँट भरा और ली के अति निकट चला l मुझे नहीं पता था कि हम कहाँ जा रहे थे या इसमें कितना समय लगेगा, लेकिन मुझे अपने मित्र पर भरोसा था l

मैं थोमा के रूप में उसी स्थिति में था, शिष्य जो हमेशा आश्वास्त होने की ज़रूरत महसूस करता था l यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि उसे उनके लिए एक जगह तैयार करने के लिए जाना होगा और वे “वहाँ का मार्ग जानते [थे] कि [वह] कहाँ जा रहा [था]” (यूहन्ना 14:4) l थोमा ने एक तार्किक अनुवर्ती प्रश्न पूछा : “हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहाँ जा रहा है; तो मार्ग कैसे जानें?” (पद.5) l 

यीशु ने थोमा के संदेह को यह समझाते हुए शांत नहीं किया कि वह उन्हें कहाँ ले जा रहा था l उसने बस अपने शिष्य को आश्वात किया कि वह ही वहाँ का मार्ग है l और इतना ही पर्याप्त था l 

हमारे भविष्य को लेकर भी हमारे मन में प्रश्न हैं l हममें से कोई भी इस बात का विवरण नहीं जानता है कि आगे क्या है l जीवन उन घुमावों से भरा है जिन्हें हम आते देख नहीं सकते हैं l यह ठीक है l यह यीशु को जानने के लिए पर्याप्त है, जो “मार्ग और सत्य और जीवन है” (पद.6) l 

यीशु जानता है कि आगे क्या है l वह केवल चाहता है कि हम उसके अति निकट चलें l 

पवित्र आराधना

जोसफ ने एक चर्च की पासबानी की जो अपने कार्यक्रमों और मंचीय प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता था l वे बहुत अच्छे तरीके से किये जाते थे, फिर भी उन्हें चिंता थी कि चर्च की व्यस्तता एक व्यवसाय में बदल गयी थी l क्या चर्च सही कारणों से या अपनी गतिविधियों के कारण बढ़ रहा था? जोसफ पता लगाना चाहता था, इसलिए उसने एक साल के लिए सभी अतिरिक्त चर्च कार्यक्रमों को रद्द कर दिया l उनकी मण्डली एक जीवित मंदिर होने पर ध्यान केन्द्रित करने वाली थी जहाँ लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं l 

जोसफ का निर्णय अति लगता है, जब तक कि आपने ध्यान नहीं देते हैं कि यीशु मंदिर के बाहरी आंगन में प्रवेश किया l पवित्र स्थान जिसे साधारण प्रार्थनाओं से भरा होना चाहिए था, आराधना व्यवसाय का भंवर बन गया था l यहाँ से अपने कबूतर ले जाओ! परमेश्वर की आवश्यकता के अनुसार सफ़ेद सोसन!” यीशु ने व्यापारियों के चौकियाँ उलट दी और उन लोगों को रोक दिया जिन्होंने उनसे सामान ख़रीदा था l जो कुछ वे कर रहे थे, उस पर क्रोधित होकर, उसने यशायाह 56 और यिर्मयाह 7 को उद्धरित किया : “मेरा घर सब जातियों के लिए प्रार्थना का घर कहलाएगा पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है” (मरकुस 11:17) l अन्यजातियों का आँगन, बाहरी लोगों के लिए आराधना करने का स्थान, पैसे कमाने के लिए एक सांसारिक बाज़ार में बदल गया था l 

व्यापार में या व्यस्त रहने में कुछ गलत नहीं है l परन्तु यह चर्च का आशय नहीं है l हम परमेश्वर के जीवित मंदिर हैं, और हमारा मुख्य काम यीशु की आराधना करना है l जैसा कि यीशु ने किया था, हमें सभवतः किसी भी चौकी को उलटना ज़रूरी नहीं है, लेकिन वह हमें समान रूप से कुछ कठोर कार्य करने के लिए बुला रहा हो l 

स्तुति करें

जो नक़्शे के मध्य में स्थित है, आप आम तौर पर उसके द्वारा यह बता सकेंगे कि उसको  कहाँ खींचा गया था l हम सोचते हैं कि हमारा घर दुनिया का केंद्र है, इसलिए हम बीच में एक बिंदु डालते हैं और वहाँ से बाहर की ओर बढ़ते हैं l आसपास के शहर उत्तर से पचास मील की दूरी पर हो सकते हैं या दक्षिण में आधे दिन की ड्राइव पर, लेकिन इन सब का वर्णन हम कहाँ हैं के अनुसार किया जाता है l भजन पुराने नियम में परमेश्वर के सांसारिक घर से अपना “नक्शा” बनाते हैं, इसलिए बाइबल के भूगोल का केंद्र यरूशलेम है l 

भजन 48 यरूशलेम की प्रशंसा करने वाले कई भजनों में से एक है l यह “हमारे परमेश्वर” का “नगर” है . . . “ऊँचाई में सुन्दर और सारी पृथ्वी के हर्ष का कारण है” (पद.1-2) l क्योंकि “उसके महलों में परमेश्वर ऊंचा गढ़ . . . है,” वह “उसको सदा दृढ़ और स्थिर रखेगा” (पद.3,8) l परमेश्वर की ख्याति यरूशलेम के मंदिर में शुरू होती है और उसकी “स्तुति पृथ्वी की छोर तक होती है” (पद.9-10) l 

जब तक आप इसे यरूशलेम में नहीं पढ़ रहे हैं, आपका घर बाइबल के संसार के केंद्र में नहीं है l फिर भी आपका क्षेत्र बेहद मायने रखता है, क्योंकि जब तक उसकी स्तुति “पृथ्वी के छोर” (पद.10) तक नहीं पहुँच जाती, तब तक परमेश्वर आराम नहीं करेगा l क्या आप परमेश्वर के अपने लक्ष्य तक पहुँचने के तरीके का हिस्सा बनना चाहेंगे? प्रत्येक सप्ताह परमेश्वर के लोगों के साथ आराधना करें, और प्रत्येक दिन उसकी महिमा के लिए खुले तौर पर जीएँ l परमेश्वर का नाम “पृथ्वी की छोर तक” होता है जब हम जो हैं और जो हमारे पास है उसको समर्पित करते हैं l 

जा रहा है, जा रहा है, गया

शरारती कलाकार बैंक्सी ने एक और व्यवहारिक मजाक उड़ाया l लन्दन में सोथबी के नीलामी घर में उनकी पेंटिंग गर्ल विथ बैलून(Girl with Baloon) एक मिलियन पौंड में बिकी l नीलामी करनेवाले के “बिक गया,” चिल्लाने के कुछ ही क्षणों बाद एक अलार्म बजा और वह पेंटिंग फ्रेम के नीचे से फिसलकर आधा लटक गया l बैंक्सी ने अपनी बर्बाद कृति पर हाँफते हुए बोली लगाने वालों की एक तस्वीर को कैप्शन के साथ ट्वीट किया, “गोइंग, गोइंग, गॉन l” 

बैंक्सी ने धनवान का भी मज़ाक बनाने में आनंद उठाया, लेकिन उसे परेशान होने की ज़रूरत नहीं थी l धनवान के पास खुद के लिए अनेक मजाक हैं l परमेश्वर कहता है, “धनी होने के लिए परिश्रम न करना . . . क्या तू अपनी दृष्टि उस वस्तु पर लगाएगा, जो है ही नहीं? वह उकाब पक्षी के समान पंख लगाकर, निःसंदेह आकाश की ओर उड़ जाता है” (पद.4-5) l 

कुछ वस्तुएं धन/पैसे से कम सुरक्षित हैं l हम उसे अर्जित करने के लिए बहुत परिश्रम करते हैं, फिर भी उसे खो देने के अनेक तरीके हैं l निवेश गलत हो जाता है, मुद्रास्फीति में गिरावट आ जाती है, बिल आते हैं, चोर चोरी करते हैं, और आग और बाढ़ नष्ट करते हैं l यहाँ तक कि अगर हम अपना पैसा रख भी लेते हैं, तो भी समय जिसमें हमें इस खर्च करना है लगातार समाप्त होता जाता है l पलक झपकाएं, और आपका जीवन जा रहा है, जा रहा है, गया l 

क्या करें? बाद में परमेश्वर हमें कुछ पद बताता है : “यहोवा का भय मानते रहना l क्योंकि अंत में फल होगा, और तेरी आशा न टूटेगी” (पद.17-18) l यीशु में अपना जीवन निवेश करें; वह अकेले आपको हमेशा के लिए रखेगा l 

आपकी मंज़िल किधर है?

उत्तरी थाईलैंड में, बच्चों के फुटबॉल टीम ने एक गुफा का पता लगाने का फैसला किया l एक घंटे के बाद वे वापस जाने के लिए मुड़े तो पाया कि गुफा के द्वार पर पानी भर गया था l बढ़ते पानी ने उन्हें गुफा में दिन-ब-दिन और अन्दर धकेल दिया, जब तक कि वे दो मील (चार किलोमीटर) से अधिक गुफा के अन्दर फंस नहीं गए l जब उन्हें दो सप्ताह बाद वीरतापूर्वक बचाया गया, तो बहुतों को आश्चर्य हुआ कि वे इनती बुरी तरह से कैसे फंस गए l उत्तर : एक समय में एक कदम l 

इस्राएल में, नातान ने दाऊद का सामना अपने वफादार सिपाही, उरिय्याह को मारने के लिए किया l “[परमेश्वर के] मन के अनुसार” व्यक्ति किस प्रकार दोषी बना? एक समय में एक कदम l एक दोपहर में दाऊद शून्य से हत्या तक नहीं गया l उसने खुद को तैयार किया,  समय के साथ, एक बुरा निर्णय दूसरे को जन्म दिया l इसकी शुरुआत एक दूसरी झलक से हुई जो वासना के टकटकी में बदल गयी l उसने बतशेबा को बुलवाकर अपने राजसी शक्ति का दुरूपयोग किया, फिर उसके गर्भवती होने को ढांकने के लिए उसके पति को मोर्चे से घर बुलवाया l जब उरिय्याह अपने साथियों को युद्ध में छोड़कर अपनी पत्नी से मिलने से इनकार किया, दाऊद ने फैसला किया कि उसे मरना होगा l 

हम शायद हत्या के दोषी नहीं हो सकते हैं या अपनी खुद की बनायी हुयी गुफा में फंसे हुए नहीं हैं, लेकिन हम या तो यीशु की ओर बढ़ रहे हैं या मुसीबत की ओर l बड़ी समस्याएँ रातोंरात विकसित नहीं होती हैं l वे हमपर धीरे-धीरे टूटते हैं, एक समय में एक कदम l 

आप जिसके लायक हैं

अब एक निपुण लेखिका, कैटलिन ने उस अवसाद का वर्णन किया, जो उसने एक प्रहार से लड़ने के बाद किया था l भावनात्मक हिंसा ने उसके शारीरिक संघर्ष की तुलना में गहरा घाव बनाया था, क्योंकि उसने महसूस किया कि यह साबित होता है कि “मैं कितनी अप्रिय थी l मैं उस प्रकार की लड़की नहीं थी जिसे आप जानना चाहते l” उसने प्यार के अयोग्य महसूस किया, उस तरह का व्यक्ति जिसे दूसरे उपयोग करते हैं और एक ओर उछाल देते हैं l

परमेश्वर समझता है l उसने प्रेम से इस्राएल की चरवाही की, लेकिन जब उसने उनसे पूछा कि उसका मूल्य कितना है, “उन्होंने मेरी मजदूरी में चाँदी के तीस टुकड़े तौल दिए” (जकर्याह 11:12) l यह एक दास की कीमत थी; यदि उसकी अचानक मृत्यु हो जाती है तो स्वामियों को कितना लौटने की ज़रूरत थी (निर्गमन 21:32) l परमेश्वर को सबसे कम संभव मूल्य की पेशकश करने के लिए अपमानित किया गया था – तब उसने [व्यंग्यात्मक ढंग] में कहा, “यह क्या ही भारी दाम है जो उन्होंने मेरा ठहराया है?” (जकर्याह 11:13) l तब उसने जकर्याह से उस धन को फेंकवा दिया l

यीशु समझता है l वह केवल अपने मित्र द्वारा धोखा नहीं दिया गया था; उसे अवमानना के साथ धोखा दिया गया था l यहूदी अगुओं ने मसीह का तिरस्कार किया, इसलिए उन्होंने यहूदा को चाँदी के तीस टुकड़े दिए  – सबसे कम कीमत जो आप एक व्यक्ति पर लगा सकते हैं – और वह उसे ले गया (मत्ती 26:14-15; 27:9) l यहूदा ने यीशु के बारे में बहुत कम सोच था, उसने उसे लगभग कुछ भी नहीं में बेचा l