क्या आपने कभी तैरता हुआ डाकघर देखा है? अगर नहीं देखा है, तो आप जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जा सकते हैं। बर्फ से ढके हिमालय की पृष्ठभूमि में डल झील पर एक अनोखा “तैरता हुआ” डाकघर है जो वाकई अपनी तरह का अनूठा है। हालाँकि यह झील पर अकेला तैरता है, लेकिन यह वास्तव में अकेला नहीं है। यह भारतीय डाक सेवा के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है, जिसके देश भर में 1.5 लाख से ज़्यादा दफ़्तर हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है।
कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखते हुए, प्रेरित पौलुस उसके सदस्यों से आग्रह करता है कि वे खुद को एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि विश्वासियों के समुदाय के सदस्यों के रूप में सोचें। वह उन्हें अपने आध्यात्मिक वरदानों में विविधता को महत्व देने के लिए प्रोत्साहित करता है और उनसे इन अंतरों की सुंदरता को अपनाने के लिए विनती करता है (पद.4-5)। पौलुस चर्च को यह एहसास कराने में मदद करता है कि ये अंतर पवित्र आत्मा की एकजुट करने वाली सामर्थ्य (पद. 7) के कारण अच्छे हैं, जो हर एक का इस्तेमाल अपनी मर्ज़ी से करता है। अंत में, वह उन्हें समझाता है कि वे अकेले नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हैं। और व्यक्तिगत लाभ की तलाश करने के बजाय, प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों के लाभ के लिए अपने वरदान का उपयोग करना चाहिए।
ऐसे संसार में जहाँ खुद को दूसरों से आगे रखना सामान्य माना जाता है, हमें जीवन के प्रति एक अलग दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा जाता है। हमें एक साथ काम करने के लिए कहा जाता है, यह महसूस करते हुए कि हमारे मतभेदों के बावजूद हम एक व्यापक समूह का हिस्सा हैं, अर्थात् परमेश्वर की कलीसिया। तैरते हुए डाकघर की तरह, हमारे वरदान, प्रतिभाएँ और योग्यताएँ अद्वितीय हैं। और जब उनका उपयोग पवित्र आत्मा की शक्ति के तहत किया जाता है, तो वे परमेश्वर के राज्य का निर्माण करने के लिए शक्तिशाली साधन बन सकते हैं। —रेबेका विजयन
परमेश्वर ने आपको कौन से वरदान दिए हैं? आप अपनी योग्यताओं
और वरदानों का उपयोग दूसरों के लाभ के लिए कैसे कर सकते हैं?
हे परमेश्वर, मेरे वरदानों के लिए धन्यवाद, मुझे उनका उपयोग दूसरों के लाभ
के लिए करने में मदद करें ताकि आपका राज्य मुझमें और मेरे द्वारा फैल सके।
