मेरी नानी की मृत्यु की सालगिरह पर, मैं और मेरे पति उनकी कब्र पर गए और उनकी कब्र के पास गुलाब के फूल रखे। मेरे पति उनसे कभी नहीं मिले थे। इसलिए, जब उन्होंने मुझसे उनके बारे में पूछा, तो मैंने उनके पसंदीदा भजन संहिता गाए, उनके विस्तृत क्रिसमस भोजन के बारे में बात की और मुस्कुराते हुए बताया कि उन्हें जंगली मशरूम की तलाश करना आता था । भले ही वे अब हमारे साथ शारीरिक रूप से नहीं थीं, लेकिन उनकी कब्र पर जाना और उनकी कहानियाँ साझा करना मेरे मन में उनके प्यार, जीवन और भोजन की यादों से भरा हुआ है । 

यीशु अपनी मृत्यु से पहले, अपने शिष्यों के साथ एक विस्तृत फसह का भोज साझा किया। उसने उनसे कहा कि वे जल्द ही दुःख उठाएंगे और मृत्यु सहेंगे (पद.15)। वास्तव में, उसकी गिरफ़्तारी उसी रात होगी (लूका 22:54)। इस स्थिति में, यीशु ने रोटी ली, परमेश्वर को धन्यवाद दिया, उसे तोड़ा और उन्हें देते हुए कहा, “यह मेरी देह है जो तुम्हारे लिए दी जाती है; मेरे स्मरण में यही किया करो” (पद.19)। उन्होंने उन्हें दाखरस का प्याला भी देते हुए कहा, “यह प्याला मेरे उस लहू में जो तुम्हारे लिए बहाया जाता है नई वाचा है”(पद.20)। 

अगले दिन यीशु को क्रूस पर चढ़ा दिया गया। तीन दिन बाद वह जी उठा और अंततः स्वर्ग लौट गया l फिर भी, आज, हम, जो उसके शिष्य हैं, उसकी याद में रोटी तोड़ते हैं और दाखरस साझा करते हैं क्योंकि यह यीशु द्वारा स्वयं स्थापित एक सुंदर स्मारक है और उसके फिर से आने का एक शाश्वत प्रतिज्ञा है (पद.15-18)। हम यीशु को शारीरिक रूप से देख या छू नहीं सकते, लेकिन हम जानते हैं कि वह जीवित हैं और हर दिन हमारे साथ हैं और हमें अपने प्रेम, जीवन और पोषण से भर रहा है l जब हम रोटी तोड़ते हैं, तो हमें यीशु के वादे को याद रखना चाहिए और उन्हें हमारे अंदर काम करने देना चाहिए, हमें भीतर से उनके जैसा बनने के लिए रूपांतरित होने देना चाहिए।—ऍन हरिकीर्तन