जब मेरी पत्नी और मैंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, हम पर बहुत अधिक कर्ज था जिसे हमें कम ब्याज दर के साथ देना ज़रूरी था l हमने स्थानीय बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया था लेकिन हमें अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि हम लम्बे समय से उस शहर में नहीं रहे थे या काम नहीं किये थे l कुछ दिनों बाद, जो कुछ मेरे साथ हुआ था मैंने अपने मित्र के साथ साझा किया जो हमारे चर्च में एक वृद्ध व्यक्ति था l “मैं यह बात अपनी पत्नी से कहना चाहूँगा,” उसने कहा l

कुछ घंटो बाद फोन की घंटी बजी l यह मेरा मित्र था: “मेरी पत्नी और मैं आपको व्याज मुक्त, आपकी ज़रूरत का पैसा उधार देना चाहेंगे,” उन्होंने प्रस्ताव रखा l मुझे नहीं पता था कि क्या कहूँ, इसलिए मैंने उत्तर दिया, “मैं आपसे यह नहीं मांग सकता l” “आप नहीं मांग रहे हैं!” मेरे मित्र ने ख़ुशी से उत्तर दिया l उन्होंने सहजता से हमें ऋण दिया, और मैंने और मेरी पत्नी ने जितनी जल्दी हो सकता था उसे वापस कर दिया l

मेरा मानना है कि ये मित्र परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम के कारण उदार थे l जैसा कि पवित्रशास्त्र हमें बताता है, “जो पुरुष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकदमे को जीतेगा” (भजन संहिता 112:5) l जो लोग परमेश्वर पर भरोसा करते हैं उनके पास “भरोसा रखने वाला” और “संभला हुआ” हृदय होता है (पद.7-8), यह समझते हुए कि वह उनके जीवन में हर अच्छी चीज़ का श्रोत है l

परमेश्वर हमारे प्रति उदार रहा है, उसने हमें जीवन और क्षमा दी है l आइये ज़रूरतमंद लोगों के साथ उनके प्यार और हमारे संसाधनों को साझा करने में उदार बने l जेम्स बैंक्स