मुझे हमेशा कुत्तों से डर लगता था। लेकिन जब मैं छोटी थी, तो हमारे पड़ोसी के पास एक जर्मन शेफर्ड कुत्ता था जिसे मैं प्यार करने लगी थी l यह सबसे विनम्र कुत्ता था जिसे मैंने जाना था। लेकिन एक दिन, यह आक्रामक हो गया, गुर्राया, झपट्टा मारा और लोगों को घर के एक कमरे में आने नहीं दिया l यह देखकर मैं फिर से डर गयी, मेरे पड़ोसी ने समझाया कि कुत्ता अपने बच्चों की रक्षा के लिए ऐसा व्यवहार कर रही है।

जब मैं होशे 13:8 पढ़ती हूँ तो मुझे यही याद आता है। परमेश्वर खुद की तुलना एक माँ रीछनी से करता है जो अपने बच्चों को खोज रही है। यह परमेश्वर के न्याय की एक भयंकर छवि है। परमेश्वर इस्राएल और एप्रैम से नाराज़ था क्योंकि वे घमंडी हो गए थे और वह सब भूल गए थे जो परमेश्वर ने उनके लिए किया था (पद.6)। परमेश्वर को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करने के बजाय, उन्होंने मूर्तियों की पूजा की, “पाप पर पाप” किया और यहाँ तक कि मानव बलि भी चढ़ाई (पद.1-4)। इस संदर्भ में, परमेश्वर ने कहा, “मैं बच्चे छीनी हुई रीछनी के समान बनकर उनको मिलूंगा, और उनके हृदय की झिल्ली को फाडूंगा” (पद.8)। परमेश्वर अपनी देखभाल में व्यक्तियों के लिए उत्साही है। एक माँ रीछनी की तरह, वह उनकी रक्षा करता है, उन्हें खिलाता है, उनकी देखभाल करता है और उनका नेतृत्व करता है (पद.4-8)।

जब हम कमज़ोर और असुरक्षित महसूस करते हैं, तो हम निश्चिंत हो सकते हैं कि परमेश्वर हमारे साथ होने वाले अन्याय को देखता है। वह मदद के लिए हमें देखता और हमारी पुकार सुनता है और हमारी रक्षा करने के लिए हस्तक्षेप करता है, जैसे एक माँ अपने बच्चे की रक्षा करती है। जीवन के कठिन और कठोर समय में, हम परमेश्वर की सुरक्षात्मक भुजाओं में सुरक्षित रह सकते हैं (पद.13-14)। आइए हम अपने जीवन में परमेश्वर के देखभाल करने वाले हस्तक्षेप के लिए उसके आभारी रहें (पद.9)। साथ ही, आइए हम परमेश्वर और उसके घर में प्रेम और न्याय की उसकी इच्छा का सम्मान करें (होशे 12:6)। परमेश्वर की सहायता प्राप्त करने के बाद, हम भी उन लोगों की रक्षा करने के लिए उठ खड़े हों जिन्हें हमारी ज़रूरत है। —ऍन हरिकीर्तन