“अम्मा,” तमिल में माँ के लिए उपयोग होने वाला शब्द, एमी कारमाइकल की कब्र के पास एक पक्षी स्नानघर पर उकेरा गया है। तमिलनाडु के डोहनावुर में उनका मिशन स्कूल, मंदिर वेश्यावृत्ति में फंसी हज़ारों लड़कियों के लिए एक शरणस्थली बन गया। ऐसा कहा जाता है कि अपने शुरुआती वर्षों में, कई रातें वह साड़ी धारण करके, साइकिल चलाकर, सिर्फ़ एक छोटी लड़की को बचाने के लिए ढूंढती थी l 1931 में गिरने की एक गंभीर घटना के बाद जब वह बिस्तर पर ही सीमित हो गईं, तब भी उन्होंने दूसरों के ज़रिए इन बच्चों को बचाना जारी रखा। उन्होंने कई पत्र और किताबें लिखीं, जिनसे काम चलता रहा और स्कूल को वित्तीय सहायता मिली। जब बच्चों से पूछा गया कि उन्हें एमी की ओर क्या आकर्षित करता है, तो उन्होंने बस इतना कहा, “यह प्यार था। अम्मा हमसे प्यार करती थीं।”

कभी-कभी हमें याद दिलाने की ज़रूरत होती है कि प्यार सभी गुणों की जननी है। सच्चे प्यार का अनुभव मसीह में किया जा सकता है, क्योंकि वह प्यार का वास्तविक देह धारित रूप है (पद.8)। मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान में और उसके ज़रिए, हमारे लिए सच्चे प्यार का प्रदर्शन है। यीशु का प्यार शर्त के साथ नहीं था। उसने अयोग्य लोगों से भी प्रेम किया (पद.11)। जब हम प्रेम को उस तरह से देखते हैं जिस तरह से परमेश्वर हमसे प्रेम करता है, तो यह इसे प्रकट करने के तरीके के बारे में हमारा दृष्टिकोण बदल देता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि जब तक हम यीशु की तरह प्रेम नहीं करते हैं, हम परमेश्वर को सही मायने में नहीं जान सकते हैं (पद.7-8)।

पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर की स्वरूप में बनाया गया है (उत्पत्ति 1:27) और हम जिस किसी से भी मिलते हैं, उसे प्रेम की आवश्यकता होती है। हम, परमेश्वर की संतान के रूप में, उन लोगों को सच्चे, बेदाग प्रेम का अर्थ दिखाने के लिए सबसे अच्छी जगह पर हैं जो इसके लिए भूखे हैं। एमी की तरह जो डोहनावुर की दासी लड़कियों के लिए प्रेम की प्रतिमूर्ति बन गई, हम भी अपने हर कार्य, शब्द और कर्म में यीशु के वास्तविक प्रेम को मूर्त रूप दें सके। —रेबेका विजयन