अपना दुःख व्यक्त करने के लिए, ऐली नाम की एक युवा लड़की ने लकड़ी के एक टुकड़े पर लिखा और उसे एक पार्क में रख दिया : “ईमानदारी से कहूँ तो, मैं दुखी हूँ l कोई भी कभी भी मेरे साथ घूमना नहीं चाहता, और मैंने उस एकमात्र व्यक्ति को खो दिया है जो मेरी बात सुनता है l मैं हर दिन रोती हूँ l” 

जब किसी को वह लकड़ी का टुकड़ा मिला, तो वह पार्क में फुटपाथ पर लिखने वाले चौक ले आयी और लोगों से ऐली के लिए अपने विचार लिखने के लिए कहा l पास के स्कूल के छात्रों द्वारा समर्थन के दर्जनों शब्द छोड़े गए : “हम आपसे प्रेम करते हैं l” “परमेश्वर आपसे प्यार करता है l” “तुम प्रिय हो l” स्कूल के प्राचार्य ने कहा, “यह एक छोटा सा तरीका है जिससे हम पहुँच सकते हैं और शायद [उसकी कमी] को भरने में मदद कर सकते हैं l वह हम सभी का प्रतिनिधित्व करती है क्योंकि किसी न किसी समय हम सभी को दुःख और पीड़ा का अनुभव होता है या होगा l”

वाक्यांश “तू प्रिय है” मुझे मूसा द्वारा अपने मरने से ठीक पहले बिन्यामीन के इस्राएली गोत्र को दिए गए एक सुन्दर आशीष की याद दिलाता है : “यहोवा के प्रिय को उस में सुरक्षित रहने दो” (व्यवस्थाविवरण 33:12) l मूसा परमेश्वर के लिए एक मजबूत अगुआ था, उसने शत्रु राष्ट्रों को हराया, दस आज्ञाएँ प्राप्त कीं और उन्हें परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए चुनौती दी l उसने उन्हें परमेश्वर के दृष्टिकोण के साथ छोड़ दिया l प्रिय शब्द का प्रयोग हमारे लिए भी किया जा सकता है, क्योंकि यीश ने कहा, “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया” (यूहन्ना 3:16) l 

जैसा कि परमेश्वर हमें इस सच्चाई पर सुरक्षित रूप से भरोसा करने में सहायता करता है कि यीशु में प्रत्येक विश्वासी “प्रिय” है, हम दूसरों से प्यार करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं जैसा कि ऐली के दोस्तों ने किया l एनी सिटास