मेरे माता-पिता के घर में, एक कलाकृति है जिसमें चरवाहे अपने झुंड की देखभाल करते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि यह एक पेंटिंग की तरह दिखता है, लेकिन यह कैनवास और पेंट के बजाय पूरी तरह से लकड़ी से बना है। वस्तुओं और पात्रों के रंग, गहराई और रूपरेखा को परिभाषित करने के लिए विभिन्न प्रकार की लकड़ी का उपयोग किया गया है। हमें बाद में पता चला कि इस तरह की कला को “मैसूर वुड इनले वर्क” कहा जाता है। जब भी मैं इसे देखती हूँ, मैं आशा से भर जाती हूँ क्योंकि यह मुझे याद दिलाता है कि परमेश्वर मेरा चरवाहा है। परमेश्वर इस कलाकृति का उपयोग मुझे अपनी उपस्थिति का दिलासा देने और आश्वस्त करने के लिए करता है। और मैं इस प्रेरित कार्य और उन लकड़ी के कारीगरों के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करती हूँ जिन्हें ऐसी रचनात्मकता दी गयी है।

परमेश्वर सदियों से कला और कलाकारों को प्रेरित करता रहा है l निर्गमन में, परमेश्वर ने मूसा को बताया कि मिलाप के तम्बू में चीज़ें कैसी दिखनी चाहिए (पद.6)। फिर उसने बसलेल और ओहोलीआब को उन वस्तुओं को बनाने का काम सौंपा जो आराधना में उपयोग की जानेवाली थीं, यह कहते हुए कि, “मैं बुलाता हूँ,” “मैं परिपूर्ण करता हूँ,” “मैं देता हूँ,” और “मैं परमेश्वर की आत्मा से भरता हूँ” (पद.2-6)। उसने उन्हें “सोने, चाँदी और पीतल में और जड़ने के लिए मणि काटने में, और लकड़ी पर नक्काशी का काम” करने के लिए बुद्धि और कौशल दिया (पद.4)। परमेश्वर ने लोगों को आराधना में अपने करीब लाने के लिए कलाकारों को चुना, प्रेरित किया और उनका इस्तेमाल किया। बसलेल और ओहोलीआब के मामले की तरह, हमारे कलात्मक वरदान हमें परमेश्वर की आत्मा द्वारा दी गई हैं। यह परमेश्वर ही है जिसने हमें चुना, हमें नियुक्त किया और हमें उसके लिए बनाने के लिए अपनी आत्मा से भर दिया। हम नहीं जानते कि यह किसकी मदद करता है। लेकिन अगर हम परमेश्वर के मार्गदर्शन और प्रेरणा के तहत बनाते हैं, तो वह इसका इस्तेमाल लोगों को आराम देने और उनके और हमारे जीवन को समृद्ध बनाने के लिए करेगा। —ऍन हरिकीर्तन