वह खाली को भरता है
मनोवैज्ञानिक ने पंद्रह वर्षीय लड़की की “काटनेवाले उपकरण(cutter device)” पर ध्यान दिया──एक लम्बी आस्तीन वाली टी-शर्ट उसकी हाथ पर आधी खिंची हुई थी जो आमतौर पर उन लोगों द्वारा उपयोग की जाती है जो खुद को नुक्सान पहुंचाते हैं । जब युवा लड़की ने अपने आस्तीन वापस खींच ली, तो लवीन यह देख कर घबरा गई कि लड़की ने अपनी भुजा के अगले हिस्से में “खाली” गोदने के लिए एक उस्तुरा का उपयोग किया था । वह दुखी थी, लेकिन आभारी भी कि वह किशोरी गंभीर सहायता पाना चाहती थी जिसकी उसे ज़रूरत थी ।
किशोरी कुछ प्रकार से कई लोगों का प्रतिनिधित्व करती है जिन्होंने अपने हृदयों पर “खाली” उकेर लिये हैं । यूहन्ना ने लिखा कि यीशु खाली को भरने और “बहुतायत” का जीवन देने आया (यूहन्ना 10:10) । परमेश्वर ने सम्पूर्ण जीवन की अभिलाषा हर एक मानव में डाला, और वह लोगों को उसके साथ एक प्यार भरे रिश्ते का अनुभव करने की लालसा रखता है । लेकिन उसने उन्हें यह भी चेतावनी दी कि “चोर” लोगों, चीजों और परिस्थितियों का उपयोग करके उनके जीवन को नाश करने का प्रयास करेगा (पद.1,10) । हर एक ने जीवन देने के जो दावे किये हैं खोटा और एक नकल होगा । इसकी विरुद्ध, यीशु वास्तविक──”अनंत जीवन” देता है और यह प्रतिज्ञा कि “कोई [हमें उसके] हाथ से छीन न लेगा” (पद.28) ।
केवल यीशु हमारे हृदयों के खाली स्थानों को जीवन से भर सकता है । यदि आप खाली महसूस कर रहे हैं, आज ही उसके पुकारिए । और यदि आप गंभीर संघर्षों का अनुभव कर रहे हैं, ईश्वरीय परामर्श प्राप्त कीजिये । अकेले मसीह जीवन देता है जो बहुतायत का और सम्पूर्ण है──उसमें पाया जानेवाला अर्थपूर्ण जीवन ।
व्यर्थ में आनंद की प्राप्ति
2010 में, ब्लॉग “आई लाइक बोरिंग थिंग्स,” के निर्माता जेम्स वार्ड ने, “बोरिंग कांफ्रेंस” नामक एक सम्मेलन शुरू किया । यह नीरस, सामान्य और अनदेखी का एक दिन का उत्सव है । अतीत में, वक्ताओं ने व्यर्थ शीर्षको को संबोधित किया, जैसे छींकने की आवाज़ आवाज़ जो विक्रय(vending) मशीन, और आवाज़ जो 1999 के इंकजेट प्रिंटर्स निकालती हैं । वार्ड जानते हैं कि शीर्षक उबाऊ हो सकते हैं, लेकिन वक्ता एक नीरस विषय लेकर रुचिकर, अर्थपूर्ण, और यहाँ तक कि उन्हें आनंदपूर्ण’ भी बना सकते हैं ।
कई सहस्त्राब्दी पहले, सबसे बुद्धिमान राजा, सुलैमान ने, आनंद के लिए व्यर्थ और नीरस में अपनी खोज शुरू की । उसने काम किया, पशुओं के झुण्ड खरीदे, धन कमाया, गायकों को इकठ्ठा किया, इमारतें बनवायीं (सभोपदेशक 2:4-9) । इनमें से कुछ एक प्रयास सम्मानजनक थे और कुछ नहीं थे । अंततः, अर्थ खोजने के अपने प्रयास में, राजा को नीरसता/ऊब के सिवा कुछ नहीं मिला (पद.11) । सुलैमान ने एक विश्वदृष्टि को बनाए रखा जो परमेश्वर को शामिल करने के लिए मानव अनुभव की सीमाओं से परे नहीं था । अंततः, हालाँकि, उसने महसूस किया कि वह नीरसता में आनंद केवल उस समय पाएगा जब वह परमेश्वर को याद करेगा और उसकी उपासना करेगा (12:1-7) ।
जब हम अपने को ऊबाऊपन के बवंडर में पाते हैं, आइये हम अपना दैनिक लघु सम्मलेन शुरू करें, जब हम “अपने सृजनहार को स्मरण” करते हैं (पद.1)──वह परमेश्वर जो व्यर्थ में अर्थ भर देता है । जब हम उसे स्मरण करते हैं और उसकी उपासना करते हैं, हम साधारण में अचरज, उबाऊ में कृतज्ञता, और जीवन में व्यर्थ प्रतीत होनेवाली अर्थहीन चीजों में आनंद पाएंगे ।
जीवन के लिए आरंभक की नियमावली
मेरी माँ की अचानक मृत्यु के बाद, मैं ब्लॉगिंग शुरू करने के लिए प्रेरित हुआ l मैं ऐसे पोस्ट लिखना चाहता था जो लोगों को पृथ्वी पर अपने जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों को बनाने के लिए उपयोग करने के लिए प्रेरित करें l इसलिए मैंने ब्लॉगिंग के लिए एक शुरूआती नियमावली की ओर रुख किया l मैंने सीखा कि किस पटल का उपयोग करना है, शीर्षकों का चयन कैसे करना है और सम्मोहक पोस्ट कैसे बनाना है l और 2016 में, मेरी पहली ब्लॉग पोस्ट का जन्म हुआ l
पौलुस ने एक “शुरूआती नियमावली” लिखा जो बताता है कि कैसे अनंत जीवन प्राप्त किया जा सकता है l रोमियों 6:16-18 में, वह इस तथ्य की कि हम परमेश्वर के प्रति विद्रोह में जन्म लिए थे(पापी) के साथ इस सत्य की तुलना करता है कि यीशु हमें हमारे “पाप से [छुड़ाने]” में मदद कर सकता है (पद.18) l इसके बाद पौलुस पाप का दास और परमेश्वर का दास होने और उसके जीवनदायक तरीकों के बीच अंतर का वर्णन करता है (पद.19-20) l वह यह कहते हुए आगे बढ़ता है कि “पाप की मजदूरी तो मृत्यु है परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनंत जीवन है” (पद.23) l मृत्यु का अर्थ परमेश्वर से हमेशा का अलगाव है l यह वह विनाशकारी परिणाम है जिसका सामना हम तब करते हैं जब हम मसीह का तिरस्कार करते हैं l लेकिन परमेश्वर ने यीशु में हमें एक उपहार दिया है──नया जीवन l यह इस प्रकार का जीवन है जो पृथ्वी पर आरम्भ होता है और स्वर्ग में उसके साथ हमेशा के लिए जारी रहता है l
पौलुस का आरम्भिक अनंत जीवन की नियमावली हमारे सामने दो चुनाव रखती है──पाप का चुनाव, जो मृत्यु की ओर ले जाती है, या यीशु के उपहार का चुनाव, जो अनंत जीवन तक पहुंचता है l आप उसके जीवन का उपहार स्वीकार करें, और यदि आपने पहले ही मसीह को स्वीकार कर लिया है, तो आप आज दूसरों के साथ इस उपहार को साझा कीजिये!
प्रेम का एक महान कार्य
एक राष्ट्रीय जंगल में, एक फफूंद जो सामान्यतः हनी मशरूम(honey mushroom) नाम से जाना जाता है 2,200 एकड़ में फैले पेड़ों के जड़ों द्वारा फैलता है, जिससे यह अब तक का सबसे बड़ा जीवित जीव बन गया है l यह वन में दो सहस्त्राब्दी तक “जूते के फीते के समान अपने काले-काले तंतु बुनकर” बढ़ते पेड़ों को मारता रहा है l उसके जूते के फीतों के समान तंतु, जो “तंतुजटा (rhizomorphs),” कहलाते हैं मिटटी में दस फीट की गहराई तक जाते हैं l और यद्यपि यह जीव आश्चर्यजनक रूप से बड़ा है, यह एक अति सूक्ष्म बीजाणु(microscopic spore) से आरम्भ हुआ था!
बाइबल हमें अनाज्ञाकारिता के एकलौते कार्य के बारे में बताती है जो व्यापक दंडाज्ञा का कारण बना और आज्ञाकारिता का एकलौता कार्य जिसने उसे पलट दिया l प्रेरित पौलुस ने दो व्यक्तियों──आदम और यीशु──की परस्पर तुलना की (रोमियों 5:14-15) l आदम के पाप ने “सब मनुष्यों में” (पद.12) दंडाज्ञा और मृत्यु लाया l अनाज्ञाकारिता के एक कार्य के द्वारा, सब लोग पापी हो गए और परमेश्वर के सामने दोषी हुए (पद.17) l लेकिन उसके पास मानवता के पाप की समस्या से पेश आने के लिए उपाय था l क्रूस पर यीशु के धार्मिकता के कार्य के द्वारा, परमेश्वर अनंत जीवन और अपने सामने सही आधार प्रदान करता है l मसीह के प्रेम और आज्ञाकारिता का एक कार्य आदम की अनाज्ञाकारिता के एक कार्य पर विजय प्राप्त करने के लिए पर्याप्त था──जिसने “सब मनुष्यों [को] जीवन [दिया] (पद.18) l
क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा, यीशु हर किसी को अनंत जीवन देता है जो उसमें विश्वास करता है l यदि आपने उसकी क्षमा और उद्धार को स्वीकार नहीं किया है, आज आप ऐसा कर सकते हैं l यदि आप पहले से विश्वासी है, जो उसने अपने प्रेम के महान कार्य के द्वारा आपके लिए किया है उसकी प्रशंसा करें!
किसे आपकी सहायता चाहिए?
क्लिफोर्ड विलियम्स को एक हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी l मौत की कतार से उसने अपने खिलाफ सबूतों पर पुनर्विचार करने के लिए व्यर्थ ही कदम उठाए l प्रत्येक याचिका का खंडन किया गया──बयालीस साल तक l तब वकील शेली तिबडो ने उनके मामले की जानकारी ली l उसने पाया कि न केवल विलियम्स को दोषी ठहराने के लिए कोई सबूत था, बल्कि यह कि दूसरे व्यक्ति ने अपराध कबुल कर लिया था l छिहत्तर साल की उम्र में, विलियम्स को आखिरकार छोड़ दिया गया और रिहा कर दिया गया l
भविष्यवक्ता यिर्मयाह और उरिय्याह भी गहरे संकट में थे l उन्होंने यहूदा से कहा था कि परमेश्वर अपने लोगों का न्याय करने की प्रतिज्ञा की है यदि वे पश्चाताप नहीं करते हैं (यिर्मयाह 26:12-13, 20) l इस सन्देश ने यहूदा के लोगों और अधिकारियों को नाराज़ कर दिया, जिन्होंने दोनों नबियों को मारने के लिए तलाश की l उरियाह के साथ वे सफल हुए l वह मिस्र भाग गया, लेकिन राजा का सामना करने के लिए वापस लाया गया, जिसने उसे “तलवार से मरवा [दिया]” (पद.23) l उन्होंने यिर्मयाह को क्यों नहीं मारा? कुछ हद तक क्योंकि अहिकाम यिर्मयाह की सहायता करने लगा,” “और वह लोगों के वश में वध होने के लिए नहीं दिया गया” (पद.24) l
हम शायद किसी को मौत का सामना करते हुए नहीं जानते हैं, लेकिन हम शायद किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो हमारे समर्थन का उपयोग कर सकता है l किसके अधिकारों को रौंदा जाता है? किसकी प्रतिभा को खारिज किया जाता है? किसकी आवाज नहीं सुनी जा रही है? तिबडो या अहिकाम की तरह बाहर निकलना जोखिम भरा हो सकता है, लेकिन यह इतना सही है l जब परमेश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है किसको ज़रूरत है कि हम उनके साथ खड़े हो?
आशा में इंतज़ार
अंग्रेजी फिल्म हची : ए डॉग्स टेल(एक कुत्ते की कहानी) में, एक कॉलेज के प्रोफेसर ने हची नाम के एक आवारा कुत्ते के साथ दोस्ती की l कुत्ते ने प्रोफेसर के काम से लौटने के लिए प्रतिदिन ट्रेन स्टेशन पर प्रतीक्षा करके अपनी वफादारी व्यक्त की l एक दिन, प्रोफेसर को एक घातक दौरा पड़ा l हची ने ट्रेन स्टेशन पर घंटों इंतजार किया, और अगले दस वर्षों के लिए वह हर दिन लौटा - अपने प्यारे मालिक का इंतजार में l
लूका शमौन नाम के एक व्यक्ति की कहानी बताता है जो अपने स्वामी (लूका 2:25) के आने का धैर्यपूर्वक इंतजार कर रहा था l पवित्र आत्मा ने शमौन को बताया कि वह तब तक मृत्यु को नहीं देखेगा जब तक कि वह मसीह(Messiah) को नहीं देख ले (पद.26) l परिणामस्वरूप, शमौन उस व्यक्ति की प्रतीक्षा करता रहा जो परमेश्वर के लोगों के लिए "उद्धार" प्रदान करेगा (पद.30) l जब मरियम और यूसुफ ने यीशु के साथ मंदिर में प्रवेश किया, तो पवित्र आत्मा शमौन को फुसफुसाया कि यह वही है! आखिरकार इंतजार खत्म हुआ! शमौन ने मसीह को अपनी बाहों में लिया – आशा, उद्धार, और सभी लोगों के लिए आराम (पद.28–32) l
यदि हम इंतज़ार के मौसम में खुद को पाते हैं, तो काश हम भविष्यवक्ता यशायाह के शब्दों को नए कानों से सुनें : “जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे” (यशायाह 40:31) l जब हम यीशु की वापसी का इंतजार कर रहे हैं, वह आशा और शक्ति प्रदान करता है जो हमें प्रत्येक नए दिन के लिए चाहिए l
सुबह की धुंध
एक सुबह मैं अपने घर के पास एक तालाब पर गयी l मैं एक पलटी हुई नाव पर बैठ गयी, सोचती हुई और एक कोमल पश्चिम हवा को पानी की सतह पर धुंध की एक परत का पीछा करते हुए देख रही थी । कोहरे की लड़ी चक्कर मार रहे थे और भँवर में घूम रहे थे l छोटे-छोटे "बवंडर" उठे और फिर खुद ही शांत हो गए l जल्द ही, बादलों के बीच से सूरज की रोशनी दिखाई दी और धुंध गायब हो गई ।
इस दृश्य ने मुझे सुकून दिया क्योंकि मैंने इसे एक पद के साथ जोड़ा जिसे मैंने अभी पढ़ा था : "मैंने तेरे अपराधों को काली घटा के समान और तेरे पापों को बादल के समान मिटा दिया है” (यशायाह 44:22) । मैं उन पापपूर्ण विचारों की एक श्रृंखला से खुद का ध्यान हटाने के लिए जिसमें मैं कई दिनों से फंसी हुई थी, उस स्थान पर गयी थी l हालाँकि मैं उन्हें कबूल कर रही थी, लेकिन मुझे आश्चर्य होने लगा कि क्या परमेश्वर मुझे माफ कर देगा जब मैंने उसी पाप को दोहराउंगी l
उस सुबह, मुझे पता था कि जवाब हां था । अपने भविष्यवक्ता यशायाह के माध्यम से, परमेश्वर ने इस्राएलियों पर अनुग्रह दिखाया जब वे मूर्ति पूजा की अविरत समस्या से जूझ रहे थे । यद्यपि उसने झूठे देवताओं का पीछा करना बंद करने के लिए कहा था, परमेश्वर ने खुद ही उन्हें वापस भी आमंत्रित किया, और कहा, “तू मेरा दास है, मैं ने तुझे रचा है . . . मैं तुझ को न भूलूंगा” (पद.21) l
मैं इस तरह क्षमा को पूरी तरह समझ नहीं सकती, लेकिन मैं समझती हूँ कि परमेश्वर का अनुग्रह ही एकमात्र ऐसी चीज है जो हमारे पाप को पूरी तरह से ख़त्म कर सकता है हमें उससे चंगा कर सकता है l मैं आभारी हूं कि उसका अनुग्रह उसी के समान अनंत और दिव्य है, जब भी हमें इसकी आवश्यकता होती है वह उपलब्ध है ।
फिर से मीठा
रूसी शादी के रीति-रिवाज सुंदरता और महत्व से भरे हुए हैं । ऐसा ही एक रिवाज स्वागत समारोह के दौरान होता है क्योंकि प्रबंधक जोड़े के सम्मान में मदिरा प्रस्तावित करता है । हर कोई अपने उठाए हुए गिलास से एक घूंट लेता है और फिर चिल्लाता है, “गोरको! गोरको!" मतलब “कड़वा! कड़वा!" जब मेहमान यह शब्द चिल्लाते हैं, नवविवाहित जोड़ा उठकर मदिरा को पुनः मीठा करने के लिये एक दूसरे को चुम्बन करते हैं l
यशायाह भविष्यवाणी करता है कि उजाड़, विध्वंस, और पृथ्वी पर अभिशाप (अध्याय 24) का कड़वा पेय एक नए स्वर्ग और नई पृथ्वी की प्यारी आशा को रास्ता देगा (अध्याय 25) । परमेश्वर स्वादिष्ट भोजन और बेहतरीन और मीठे पेय की दावत तैयार करेगा । यह सभी लोगों के लिए नित्य आशीर्वाद, परिपूर्णता और प्रबंध का भोज होगा (25:6) । अभी और है । धर्मी राजा के शासनकाल में, मौत समाप्त हो गया है, कड़वे आँसू पोंछे जा चुके हैं, और अपमान का कफन हटा दिया गया है (पद.7-8) । और उसके लोग आनन्दित होंगे क्योंकि जिस पर उन्होंने भरोसा किया था और जिसका इंतजार किया था वह उद्धार देगा और जीवन के कड़वे प्याले को फिर से मीठा कर देगा (पद.9) ।
एक दिन, हम मेमने के विवाह में यीशु के साथ होंगे l जब वह अपनी दुल्हन (कलीसिया) का घर में स्वागत करेगा, तो यशायाह 25 की प्रतिज्ञा पूरी होगी l जीवन जो एक समय कड़वा था एक बार फिर से मीठा बनाया जाएगा ।
वह हमें नहीं छोड़ेगा
जूलियो अमेरिका में जॉर्ज वाशिंगटन ब्रिज के पार साइकिल से जा रहा था – एक व्यस्त सड़क, जो न्यूयॉर्क शहर और न्यू जर्सी को जोड़ती है – जब उसे जीवन –या – मौत की स्थिति का सामना करना पड़ा l एक आदमी पुल के किनारे पर खड़ा नदी में कूदने की तैयारी कर रहा था l यह जानते हुए कि पुलिस समय पर नहीं आएगी, जुलियों ने त्वरित कार्यवाई की l वह याद करता है कि वह अपनी साइकिल से उतरा और अपनी बाहों को फैलाते हुए बोला : “ऐसा मत करो l हम तुमसे प्यार करते हैं l” फिर, एक लाठी लिए हुए चरवाहे की तरह, उसने उस परेशान आदमी को पकड़ लिया, और दूसरे राहगीर की मदद से उसे सुरक्षित बचा लिया l ख़बरों के मुताबिक, जुलियो उस आदमी को छोड़ना नहीं चाहता था, भले ही वह सुरक्षित था l
दो सहस्त्राब्दी पहले, एक जीवन-या-मृत्यु की स्थिति में, अच्छा चरवाहा, यीशु, ने कहा कि वह अपना जीवन उनको बचाने के लिए त्यागेगा जो उस पर विश्वास करेंगे और वह उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा l उसने संक्षेप में बताया कि वह अपने भेड़ों को कैसे आशीष देगा : वे व्यक्तिगत रूप से उसे जानेंगे, अनंत जीवन का उपहार पाएंगे, नाश नहीं होंगे, और उसकी देखभाल में सुरक्षित रहेंगे l यह सुरक्षा कमजोर और निर्बल भेड़ की क्षमता पर निर्भर नहीं करती है, लेकिन चरवाहा की पर्याप्तता पर जिसके “हाथ से [कोई भी उन्हें छीन] नहीं” सकेगा (यूहन्ना 10:28-29) l
जब हम व्याकुल थे और आशाहीन महसूस कर रहे थे, तो यीशु ने हमें बचाया; अब हम उसके साथ अपने सम्बन्ध में महफूज़ और सुरक्षित महसूस कर सकते हैं l वह हमसे प्यार करता है, हमें खोजता है, हमें ढूंढ़ लेता है, हमें बचाता है, और हमें कभी नहीं छोड़ने का वादा करता है l