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Articles by पैटरिसीए रेबॉन

एक बड़ी बात

परिवार के एक सदस्य को दिसम्बर का किराया चुकाने के लिए सहायता की आवश्यकता थी। परन्तु उसके परिवार को वह विनती एक बोझ जैसी प्रतीत हुई—विशेष रूप से वर्ष के अन्त में अपने अनापेक्षित खर्चों के कारण। परन्तु उन्होंने अपनी बचत को निकाला और परमेश्वर की उपलब्धता के लिए धन्यवादी हुए—और अपने सम्बन्धी के आभार से भी आशीषित हुए।

उसने उन्हें एक धन्यवाद का कार्ड प्रदान किया जिसपर आभार के शब्द लिखे हुए थे। “तुम लोगों ने यह फिर से किया...भले कार्य करते हुए, इसे ऐसे निपटा दिया जैसे यह कोई बड़ी बात नहीं थी।”

दूसरों की सहायता करना एक बड़ी बात है, परन्तु परमेश्वर के लिए है। नबी यशायाह ने इस्राएल राष्ट्र का ध्यान इसी ओर किया। लोग उपवास रख रहे थे परन्तु फिर भी लड़ाई झगड़ा कर रहे थे। इसलिए नबी यशायाह ने कहा: “अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहनेवालों का जूआ तोड़कर उनको छुड़ा लेना... अपनी रोटी भूखों को बाँट देना, अनाथ और मारे–मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहिनाना, और अपने जातिभाइयों से अपने को न छिपाना?” (यशायाह 58:6-7)।

यशायाह कहता है कि इस प्रकार का बलिदान परमेश्वर के तेज को बांटता है, परन्तु यह हमारे टूटे होने को भी चंगा करता है (पद 8)। जिस प्रकार उस परिवार ने अपने सम्बन्धी की सहायता की, उन्होंने अपने खर्चों की और भी देखा, और देखा कि वे पूरे वर्ष किस प्रकार एक उत्तम प्रबन्ध कर सकते थे। उदार होने के लिए यह परमेश्वर की प्रतिज्ञा थी: “तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा।” (पद 8)। अन्त में, अपने सम्बन्धी को देने ने उन्हें और आशिषित किया। और परमेश्वर को? उसने तो पहले ही अपना सबकुछ दे दिया था--सप्रेम। 

अगुआ का अनुसरण

हमारे घर के ऊपर आसमान में तीन लड़ाकू जेट विमान शोर करते है – तीनों इतने निकट हैं कि एक दिखाई देते हैं l “वाह,” मैं अपने पति, डैन से बोली l वह मुझसे सहमत हुआ, “प्रभावशाली l” हम एक एयर फ़ोर्स बेस के निकट रहते हैं और ऐसे दृश्य सामान्य हैं l

हर समय जेट विमानों के उड़ने पर, हालाँकि, मेरे पास एक ही प्रश्न होता है : कैसे वे इतने निकट उड़ते हुए भी नियंत्रण में रहते हैं?  एक स्पष्ट कारण, दीनता है l इस बात पर भरोसा करके कि लीड पायलट सही गति और प्रक्षेपवक्र पर उड़ रहा रहा है, विंग पायलट निर्देशों को बदलने या अपने अगुआ के पथ पर सवाल करने की इच्छा को लीड पायलट की इच्छा के आधीन करते हैं l इसके बदले वे विन्यास में रहकर निकट से अनुसरण करते हैं l परिणाम? एक और शक्तिशाली टीम l

यीशु के अनुयायियों के लिए भिन्न बात नहीं है l वह कहता है, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आपे से इन्कार करे और प्रतिदिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले” (लूका 9:23) l

उसका मार्ग आत्म-समर्पण और पीड़ा उठाना था, जिसका अनुसरण करना कठिन हो सकता है l किन्तु उसके प्रभावशाली अनुयायी होने के लिए, हमें भी अपनी स्वार्थी इच्छाएँ अलग करने और प्रतिदिन आत्मिक बोझ उठाने के लिए नेवता दिया गया है अर्थात् खुद से अधिक दूसरों की सेवा, जैसे – जब हम निकटता से उसका अनुसरण करते हैं l

यह बहुत अच्छा दृश्य है , दीन होकर, परमेश्वर के साथ चलना है l उसके नेतृत्व में चलना, और निकट रहना, हम यीशु के साथ एक दिखाई दे सकते हैं l तब दूसरे हमें नहीं देख सकेंगे, वे उसे देखेंगे l इस प्रकार के दृश्य के लिए यह सरल शब्द है : “वाह!” 

मुक्तिदाता की अपेक्षा करें

मैकेनिक हमारी कार जो स्टार्ट नहीं हो रही थी, के समाधान के लिए बहुत युवा दिखाई दिया l मेरे पति, डैन, ने शक प्रगट करते हुए फुसफुसाया, “वह तो बच्चा है
l” उस युवा में उसका अविश्वास नासरत के कुड़कुड़ाहट की तरह महसूस हो रहा था जहाँ नगरवासियों ने शक किया कि यीशु कौन है l

यीशु द्वारा आराधनालय में शिक्षा देते वक्त उन्होंने पूछा, “क्या यह बढ़ई का बेटा नहीं?” (मत्ती 13:55) l वे उपहास करते हुए, सुनकर आश्चर्यचकित हुए कि जिसे वे जानते थे वह चंगाई और शिक्षा देता था l उन्होंने पूछा, “इसको यह ज्ञान और सामर्थ्य के काम कहाँ से मिले? (पद.54) l यीशु में भरोसा करने के बजाय, वे उस अधिकार से नाराज थे जो उसने प्रदर्शित किया (पद.15,58) l

इस प्रकार, हम भी विशेषकर अपने दैनिक जीवनों के परिचित और साधारण विवरणों में अपने उद्धारकर्ता की बुद्धि और सामर्थ्य में विश्वास करने में संघर्ष कर सकते हैं l उसकी सहायता की उम्मीद करने में नाकाम रहने के बाद, हम उसके जीवन रूपांतरण करने के आश्चर्य से चूक जा सकते हैं जो हमारे जीवन को बदल सकता है (पद.58) l

जैसे डैन, मेरा पति चाहता था, उसका मदद उसके सामने थी l अंततः उस युवा की सहायता स्वीकार करने के बाद, मेरे पति ने उसे हमारी पुरानी कार की बैटरी देखने दिया l केवल एक बोल्ट बदलने के बाद, मैकेनिक ने कार को कुछ ही क्षणों में स्टार्ट कर दिया- इंजन चालु हो गया और बत्तियां जलने लगीं l “वह तो क्रिसमस की तरह चमक उठा,” डैन बोला l

इसी प्रकार हम भी उम्मीद और अनुभव करते हैं कि मुक्तिदाता ताज़ा प्रकाश, जीवन और हमारे दैनिक यात्रा में अपने साथ मदद लेकर आएगा l

सहायता की माँग

एक लम्बे दिन के अंत में उसका ई-मेल मिला l सच में, मैंने उसे नहीं पढ़ा l मैं अतिरिक्त समय लेकर एक परिवार के सदस्य की गंभीर बिमारी में उसकी सहायता कर रही थी l इसलिए सामाजिक ध्यान भटकाव के लिए मेरे पास समय नहीं था l
अगली सुबह, हालाँकि, मैंने सहेली का ई-मेल पढ़ा : “क्या मैं किसी प्रकार तुम्हारी सहायता कर सकती हूँ?” शर्मिंदा होकर, मैं नहीं कहना चाही l उसके बाद एक सम्बी साँस लेकर ठहर गयी l मैंने ध्यान दिया कि उसका प्रश्न दिव्य भले ही न हो किन्तु परिचित था l
इसलिए कि यीशु ने पूछा था l यरीहो के मार्ग पर, पुकार रहे एक अंधे भिखारी की आवाज़ सुनकर, यीशु रूककर उस व्यक्ति, बर्तिमाई से उसी तरह का प्रश्न पूछा l क्या मैं तुम्हारी  सहायता कर सकता हूँ?  या जिस प्रकार यीशु ने कहा था, , “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?” (मरकुस 10:51) l
यह प्रश्न चकित करनेवाला है l यह प्रगट करता है कि चंगाई देनेवाला, यीशु हमारी मदद करना चाहता है l किन्तु सर्वप्रथम, हमें अपनी ज़रूरत दर्शाना होगा अर्थात् दीन कदम उठाना होगा l वह “पेशेवर” भिखारी आवश्यक्तामंद था, वास्तव में गरीब, अकेला, और संभवतः भूखा और त्यागा हुआ l किन्तु नया जीवन पाने की इच्छा से, उसने सरलता से अपनी मूल ज़रूरत यीशु को बता दी  l “रबी,” उसने कहा, “यह कि मैं देखने लगूं l”
एक अंधे के लिए यह एक ईमानदार निवेदन था l यीशु ने उसे तुरंत ठीक कर दिया l मेरी सहेली मुझसे ऐसी ही ईमानदारी चाहती थी l इसलिए मैंने उससे वादा किया कि मैं अपनी मूल ज़रूरत समझने के लिए प्रार्थना करुँगी, और इससे भी महत्वपूर्ण, कि मैं दीनता पूर्वक उसे बताऊंगी l क्या आप अपनी मूल आवश्यकता जानते हैं? जब आपका मित्र आपसे पूछे, तो उसे बता दीजिए l तब उसके बाद अपना निवेदन और भी ऊँचे पायदान पर ले जाइए l परमेश्वर को बता दीजिए l