सबल और निर्बल
कॉलेज फुटबॉल में शायद सबसे हृदयस्पर्शी परंपरा आयोवा विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका में होती है l आयोवा के किन्निक स्टेडियम के बगल में स्थित स्टेड फैमिली चिल्ड्रेन हॉस्पिटल है, और हॉस्पिटल की सबसे ऊपरी मंजिल में फर्श से छत तक खिड़कियाँ हैं जो मैदान का शानदार दृश्य प्रस्तुत करती हैं l खेल के दिनों में, बीमार बच्चे और उनके परिवार नीचे की कार्यवाई देखने के लिए फर्श पर इकठ्ठा होते हैं, और पहली तिमाही के अंत में, कोच, एथलीट और हजारों प्रशंसक हॉस्पिटल की ओर मुड़कर हाथ हिलाते हैं l उन कुछ पलों में बच्चों की आँखों में चमक आ जाती है l खिलाड़ियों से खचाखच भरे स्टेडियम में और हज़ारों की संख्या में टीवी दर्शकों के सामने, खिलाडियों का रूककर अपना परवाह दिखाना शक्तिशाली है l
शास्त्र शक्तिशाली लोगों को (और हम सभी के पास किसी न किसी प्रकार की शक्ति है) निर्देशित करते हैं कि जो कमज़ोर हैं उनकी देखभाल करें, उन पर ध्यान दें जो संघर्ष कर रहे हैं, और उनकी देखभाल करें जिनके शरीर टूटे हुए हैं l हालाँकि, बहुत बार, हम उन लोगों की उपेक्षा करते हैं जिनपर ध्यान देने की ज़रूरत है (यहेजकेल 34:6) l नबी यहेजकेल ने इस्राएल के अगुओं को उनके स्वार्थी स्वभाव के लिए डांटा, उन लोगों की उपेक्षा करने के लिए जिन्हें सहायता की अति आवश्यकता थी l “हाय,” परमेश्वर ने यहेजकेल द्वारा कहा l “तुम ने बीमारों को बलवान न किया, न रोगियों को चंगा किया, न घायलों के घावों को बाँधा” (पद.2, 4) l
कितनी बार हमारी व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ, नेतृत्व दर्शन, या आर्थिक नीतियाँ संकट में पड़े लोगों के प्रति कम सम्मान प्रदर्शित करती हैं? परमेश्वर हमें एक अलग मार्ग दिखाता है, जहाँ शक्तिशाली लोग निर्बलों की परवाह करते हैं (पद.11-12) l
प्रार्थना और परिवर्तन
1982 में, पास्टर क्रिस्चियन फह्रेर ने जेर्मनी के, लेइप्ज़िग्स संत निकोलस चर्च में सोमवारीय प्रार्थना सभा शुरू किया। वर्षों के लिए वैश्विक हिंसा और अत्याचारी पूर्वी जर्मन शासन के दौरान परमेश्वर से शान्ति मांगने के लिए कुछ लोग इकट्ठा हुए। भले ही साम्यवादी अधिकारीयों ने कलीसिया को निकटता से देखा, लेकिन तब तक निफिक्र थे जब तक की उपस्थिति बढ़ न गया और फैलकर कलीसिया के दरवाजे के बाहर सामूहिक सभाएं न होने लगीं। 9 अक्टूबर, 1989 को सत्तर हज़ार प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए और शांतिपूर्वक विरोध किया। छह हजार पूर्वी जर्मन पुलिस किसी भी उकसावे का जवाब देने के लिए तैयार थी। हालाँकि, भीड़ शांतिपूर्ण रही और इतिहासकार इस दिन को एक महत्वपूर्ण क्षण मानते हैं। एक महीने बाद, बर्लिन की दीवार गिर गई। बड़े पैमाने पर बदलाव की शुरुआत प्रार्थना सभा से हुई।
जब हम परमेश्वर की ओर मुड़ते और उनके बुद्धि और सामर्थ्य पर निर्भर होना शुरू करते हैं, चीजे अक्सर बदलने और नया आकार लेने लगती है। इस्राएलियों की तरह जब हम “संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं,” हम उस एकमात्र परमेश्वर को पाते हैं जो हमारे सबसे विकट परिस्थितियों को भी गहराई से बदलने और हमारे सबसे पेचीदा सवालों का जवाब देने में सक्षम है (भजन संहिता 107:28)। “परमेश्वर आँधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं।” और "निर्जल देश को जल के सोते कर देता है।” (पद 29, 35)। वह एक जिनसे हम प्रार्थना करते है निराशा से आशा और बरबादी से सुंदरता लाता है।
परन्तु यह परमेश्वर है जो (अपने समय में—हमारे समय में नहीं) रूपान्तरण का कार्य करता है। प्रार्थना यह है कि परिवर्तनकारी कार्य जो वह कर रहा है उसमें हम किस तरह भाग लेते हैं ।
ईश्वर की अचूक यादगार
एक व्यक्ति के पास बिटकॉइन में $400 मिलियन से अधिक मुद्रा थी। लेकिन वह इसके एक प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका। अपने धन को जमा करने वाले उपकरण का पासवर्ड उससे खो गया था। और आपदा घटी — दस पासवर्ड से कोशिश करने के बाद, उपकरण अपने आप ही नष्ट हो गया। उसकी सम्पति (तकदीर)हमेशा के लिए खो गई। एक दशक तक, वह व्यक्ति बैचेन था, वह अपने जीवन को बदलने वाले निवेश पूँजी के पासवर्ड को याद करने की सख्त कोशिश कर रहा था। उसने आठ पासवर्ड आज़माए और आठ बार विफल रहा। 2021 में, वह बहुत दुखी हुआ कि उसके पास सिर्फ दो और मौके थे और फिर — सब कुछ धुएं में उड़ गया।
हम भूलने वाले (भुलक्कड़) लोग हैं। कभी–कभी हम छोटी चीजें भूल जाते हैं– हमने अपनी चाबियां कहां रखी हैं; और कभी–कभी हम बड़ी चीजें भूल जाते हैं एक पासवर्ड जो लाखों अनलॉक करता है। शुक्र है परमेश्वर हमारे जैसा नहीं है। वह उन चीजों या लोगों को कभी नहीं भूलता जो उसे प्रिय हैं। संकट के समय में इस्राएल को डर था कि परमेश्वर उन्हें भूल गया है। यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, यहोवा मुझे भूल गया है (यशायाह 49:14)। हालाँकि, यशायाह ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनका परमेश्वर हमेशा याद रखता है। क्या कोई माँ अपने दूध पीते बच्चे को भूल सकती है? वह पूछता है। बेशक, एक माँ अपने दूध पीते बच्चे को नहीं भूलेगी। फिर भी, भले ही एक माँ ऐसी मूर्खता करे, पर हम जानते हैं कि परमेश्वर हमें कभी नहीं भूलेगा (पद 15)।
परमेश्वर कहते हैं, “देख, मैंने तेरा चित्र अपनी हथेलियों पर खोद कर बनाया है।” (पद 16)। परमेश्वर ने हमारे नामों को अपने अस्तित्व में खोदा है। आइए हम याद रखें कि वह हमें भूल नहीं सकता है–जिनसे वह प्यार करता है।
जो केवल आत्मा ही कर सकती है
जुरगेन मोल्टमैन नाम के एक चौरानवे वर्षीय जर्मन धर्मशास्त्री द्वारा लिखित पवित्र आत्मा पर एक पुस्तक की चर्चा के दौरान, एक इन्टरव्यू लेने वाले ने उनसे पूछा: "आप पवित्र आत्मा को कैसे सक्रिय करते हैं? क्या हम एक गोली ले सकते हैं? क्या दवा कंपनियाँ [आत्मा प्रदान करती हैं]?" मोल्टमैन की घनी भौहें तन गईं। अपना सिर हिलाते हुए, वह ज़ोर से अंग्रेजी में जवाब देते हुए मुस्कुराया। "मैं क्या कर सकता हुँ? कुछ मत करो आत्मा की बाट जोहो, और आत्मा आ जाएगी।”
मोल्टमैन ने हमारी गलत धारणा पर प्रकाश डाला कि हमारी ऊर्जा और विशेषज्ञता चीजों को घटित करती है। अधिनियमों से पता चलता है कि प्रभु चीजों को घटित करता है। कलीसिया की शुरुआत में, इसका मानवीय रणनीति या प्रभावशाली नेतृत्व से कोई लेना-देना नहीं था। बल्कि, आत्मा "प्रचण्ड वायु के झोंके की नाई" भयभीत, असहाय, और हक्का-बक्का चेलों के कमरे में आयी (2:2)। इसके बाद, आत्मा ने उन लोगों को इकट्ठा करके सभी जातीय श्रेष्ठताओं को तोड़ दिया जो एक नए समुदाय में भिन्न थे। प्रभु उनके भीतर क्या कर रहा था यह देखकर शिष्य भी उतने ही हैरान रह गए जितने कि कोई भी हो सकता है। उन्होंने कुछ नहीं किया; "आत्मा ने उन्हें समर्थ दिया" (पद. 4)।
कलीसिया—और संसार में हमारा साझा कार्य—इससे परिभाषित नहीं होता कि हम क्या कर सकते हैं। हम पूरी तरह से उस पर निर्भर हैं जो केवल आत्मा कर सकता है करना। यह हमें निडर और शांत दोनों होने की अनुमति देता है। इस दिन, जिस दिन हम पिन्तेकुस्त मनाते हैं, हम आत्मा की प्रतीक्षा करें और प्रत्युत्तर दें।
मैं कौन हूँ?
1859 में, जोशुआ अब्राहम नॉर्टन ने खुद को अमेरिका का सम्राट घोषित किया। नॉर्टन ने सैन फ्रांसिस्को शिपिंग में अपना भाग्य बनाया और खो दिया था, लेकिन वह एक नई पहचान चाहते थे: अमेरिका का पहला सम्राट। जब सैन फ्रांसिस्को इवनिंग बुलेटिन ने "सम्राट" नॉर्टन की घोषणा को छापा, तो अधिकांश पाठक हंस पड़े। नॉर्टन ने समाज की बुराइयों को दूर करने के उद्देश्य से घोषणाएँ कीं, अपनी मुद्रा छापी, और यहाँ तक कि ब्रिटिश साम्राज्य की रानी विक्टोरिया को पत्र लिखकर उससे शादी करने और अपने राज्यों को एकजुट करने के लिए कहा। उन्होंने स्थानीय दर्जियों द्वारा डिजाइन की गई शाही सैन्य वर्दी पहनी थी। एक पर्यवेक्षक ने कहा कि नॉर्टन "हर इंच एक राजा" दिखते थे। लेकिन जाहिर है, वह नहीं था। हम जो हैं उसे चुनने के लिए हमें नहीं मिलता है।
हममें से बहुत से लोग यह जानने में वर्षों व्यतीत करते हैं कि हम कौन हैं और आश्चर्य करते हैं कि हमारे पास क्या मूल्य है। हम अपने आप को नाम देने या परिभाषित करने की कोशिश करते हैं, जब केवल परमेश्वर ही हमें सच में बता सकते हैं कि हम कौन हैं। और, शुक्र है, जब हम उसके पुत्र, यीशु में उद्धार प्राप्त करते हैं, तो वह हमें अपने पुत्र और पुत्रियाँ कहता है। "परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया," यूहन्ना लिखता है, "उसने उन्हें परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार दिया" (यूहन्ना 1:12)। और यह पहचान विशुद्ध रूप से एक उपहार है। हम उनके प्रिय “संतान हैं जो न प्राकृतिक वंश से पैदा हुए हैं, न मानव इच्छा से . . . परन्तु परमेश्वर के इच्छा से उत्पन्न हुए है” (पद. 13).
परमेश्वर हमें मसीह में हमारा नाम और हमारी पहचान देता है। हम प्रयास करना और दूसरों से अपनी तुलना करना बंद कर सकते हैं, क्योंकि वह हमें बताता है कि हम कौन हैं।
यीशु में घर पर
कई साल पहले, हम स्थानीय पशु आश्रय से जूनो नाम की एक वयस्क काली बिल्ली को घर लाये थे। सच कहूँ तो, मैं केवल हमारे चूहों की आबादी को कम करने में मदद चाहता था, लेकिन परिवार के बाकी सदस्य एक पालतू जानवर चाहते थे। आश्रय ने हमें इस बारे में सख्त निर्देश दिए कि पहले सप्ताह में भोजन की दिनचर्या कैसे स्थापित की जाए ताकि जूनो को पता चले कि हमारा घर उसका घर है, वह स्थान जहाँ का वो सदस्य है और जहाँ उसे हमेशा भोजन और सुरक्षा मिलेगी। इस तरह, भले ही जूनो कही भी घूमे, वह हमेशा घर वापस आ जाएगा।
यदि हम अपने सच्चे घर को नहीं जानते हैं, तो हम हमेशा भलाई, प्रेम और अर्थ की तलाश में व्यर्थ भटकने के लिए ललचाते रहेंगे। यदि हम अपने सच्चे जीवन को पाना चाहते हैं, तथापि, यीशु ने कहा, "मुझ में बने रहो" (यूहन्ना 15:4 ईएसवी)। बाइबिल के विद्वान फ्रेडरिक डेल ब्रूनर इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि कैसे बने रहना (एक समान शब्द, निवास की तरह) परिवार और घर की भावना पैदा करता है। इसलिए ब्रूनर ने यीशु के शब्दों का इस तरह अनुवाद किया: "मुझ में घर में रहो।"
इस विचार को घर तक पहुँचाने के लिए, यीशु ने दाखलता से जुड़ी शाखाओं का उदाहरण दिया। शाखाएँ, यदि वे जीना चाहती हैं, तो उन्हें हमेशा घर पर रहना होगा, जहाँ की वे हैं, वहाँ दृढ़ता से स्थिर (निरंतर) रहना।
हमारी समस्याओं को ठीक करने या हमें कुछ नया "ज्ञान" या उत्साहजनक भविष्य प्रदान करने के खोखले वादों के साथ कई आवाजें हमें बुलाती हैं। लेकिन अगर हमें सच में जीना है, तो हमें यीशु में बने रहना होगा। हमें घर में रहना होगा।
मजबूती से खत्म करना
103 की उम्र में, मन कौर नामक एक महिला पोलैंड में 2019 विश्व मास्टर्स एथलेटिक चैम्पियनशिप के दौरान भारत की सबसे उम्रदराज महिला एथलीट के रूप में प्रतिस्पर्धा की। उल्लेखनीय रूप से कौर ने चार स्पर्धाओं (भाला फेंक, गोला फेंक, 60 मीटर डैश और 200 मीटर दौड़) में स्वर्ण पदक जीते। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वह 2017 चैंपियनशिप में जितना तेज दौड़ी थी, उससे कहीं ज्यादा तेज दौड़ीं। अपनी दूसरी शताब्दी में दौड़ रही परदादी, कौर ने दिखाया कि मजबूती से खत्म कैसे करना है।
प्रेरित पौलुस ने एक छोटे शिष्य, तीमुथियुस को लिखा, कि वह अपने अंतिम वर्षों में कैसे प्रवेश करेगा। “.. मेरे कूच का समय आ पहुँचा है। ” पौलुस ने (2 तीमुथियुस 4:6) में लिखा। अपने जीवन पर विचार करते हुए, उसे विश्वास था कि वह मजबूती से खत्म कर रहा है। “मैं अच्छी कुश्ती लड़ चुका हूँ,” (v. 7)। वह इसलिये आश्वस्त नहीं था क्योंकि उसने अपनी प्रभावशाली उपलब्धियों की गणना की थी या अपने व्यापक प्रभाव का सर्वेक्षण किया था (भले ही वे विशाल थे)। बल्कि, वह जानता था कि उसने “विश्वास की रखवाली की है” (v. 7)। वह प्रेरित यीशु के प्रति वफादार रहा। दुखों और खुशियों के मध्य में, उसने उसका अनुसरण किया जिसने उसे विनाश होने से बचाया था। और वह जानता था कि यीशु एक “धर्म का वह मुकुट” के साथ तैयार खड़ा था (v. 8), उसके विश्वासयोग्य जीवन का आनंदमय समापन।
पौलुस कहता हैं कि यह ताज कुछ संभ्रांत लोगों के लिए नहीं बल्कि “उन सब के लिए भी जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं।” (v.8)। जैसे हम नए साल में प्रवेश करते हैं, हम याद रखें कि यीशु उत्सुकता से उन्हें ताज पहनाने के लिए खड़े है, जिन्होंने उससे प्यार किया है, और हम मजबूती से खत्म करने के लिए जी सके।
परमेश्वर को अपना भविष्य सौंपना
2010 में, लाज़लो हान्याज़(Laszlo Hanyecz) ने बिटकॉइन के साथ पहली खरीददारी की (एक डिजिटल मुद्रा जो तब एक पैसे के एक अंश के बराबर मूल्य की थी), दो पिज़्ज़ा के लिए 10,000 बिटकॉइन का भुगतान किया ($25 – तब लगभग 1,125 रुपये थे) l 2021 में, वर्ष के दौरान अपने उच्चतम मूल्य पर, उन बिटकॉइन की कीमत (लगभग 3,900 करोड़ रुपये) से अधिक होती l मूल्य के आसमान छूने से पहले, वह सिक्कों के साथ पिज़्ज़ा के लिए भुगतान करता रहा, उसने कुल 100,000 बिटकॉइन खर्च कियेl यदि वह उन बिटकॉइन को रखा होता, तो उनका मूल्य उसे अड़सठ गुना से अधिक मिला होता जो उसे अरबपति बना देता और उसे फ़ोर्ब्स की “दुनिया के सबसे अमीर लोगों” की सूची में डाल देता l यदि केवल उसे पता होता कि भविष्य में क्या आ रहा है l
बेशक, होन्याज़ संभवतः नहीं जान सकता था l हममें से कोई नहीं जान सकता था l भविष्य को समझने और नियंत्रित करने के हमारे प्रयासों के बावजूद, सभोपदेशक सच कहता है : “कोई मनुष्य नहीं जानता कि क्या होगा l (सभोपदेशक 10:14) l हममें से कुछ लोग खुद को यह सोचकर भ्रमित करते हैं कि हमें जितना जानना चाहिए हैं उससे अधिक जानते हैं, या इससे भी बदतर, कि हमारे पास किसी अन्य व्यक्ति के जीवन या भविष्य के बारे में कुछ विशेष अंतर्दृष्टि है l लेकिन जैसा सभोपदेशक स्पष्ट रूप से पूछता है : “कौन बता सकता है कि उसके बाद क्या होनेवाला है?” (पद.14) l कोई नहीं l
बाइबल एक बुद्धिमान और मूर्ख व्यक्ति की तुलना करती है, और दोनों के बीच कई विशिष्टताओं में से एक भविष्य के बारे में दीनता है (नीतिवचन 27:1) l एक बुद्धिमान व्यक्ति यह पहचानता है कि केवल परमेश्वर ही वास्तव में जानता है कि क्षितिज के पार क्या है जब वे निर्णय लेते हैं l लेकिन मूर्ख लोग उस ज्ञान का अनुमान लगाते हैं जो उनका है ही नहीं l हमें बुद्धि होनी चाहिए, कि हम अपना भविष्य उसे सौंप दें जो वास्तव में इसे जानता है l
एक अलग भविष्य की कल्पना
अमेरिका के छोटे से शहर नियोदेशा के तीन सौ मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों ने एक आश्चर्यजनक स्कूल असेंबली में प्रवेश किया। फिर वे यह सुनकर अविश्वास में बैठ गए कि उनके शहर से जुड़े एक दम्पति ने अगले पच्चीस वर्षों के लिए प्रत्येक नियोदेशा छात्र के लिए कॉलेज ट्यूशन का भुगतान करने का फैसला किया है। छात्र स्तब्ध, अति प्रसन्न और आँसुओ से भरे थे।
नियोदेशा आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित था, जिसका मतलब था कि कई परिवार इस बात को लेकर चिंतित थे कि कॉलेज के खर्चों को कैसे पूरा किया जाए। यह दान एक पीढ़ीगत परिस्थिति को बदलने वाला था, और दानदाताओं को यह आशा थी कि यह मौजूदा परिवारों को तो तुरंत प्रभावित करेगा ही, दूसरों को भी नियोदेशा में आने के लिए प्रोत्साहित करेगा। उनकी इस उदारता के द्वारा वे नई नौकरियों, नई जीवन शक्ति-शहर के प्रज्वलित होने की कल्पना कर रहे थे।
परमेश्वर ने चाहा कि उसके लोग न केवल अपनी मूल आवश्यकताओं की ओर ध्यान देकर बल्कि अपने संघर्षरत पड़ोसियों के लिए एक नए भविष्य की कल्पना करके भी उदार बनें। परमेश्वर के निर्देश स्पष्ट थे: "फिर यदि तेरा कोई भाईबन्धु कंगाल हो जाए, और उसकी दशा तेरे सामने तरस योग्य हो जाए, तो तू उसको सम्भालना;" (लैव्यव्यवस्था 25:35)। उदारता न केवल बुनियादी भौतिक जरूरतों को पूरा करने के बारे में थी, बल्कि इस बात पर भी विचार करने के बारे में थी कि एक समुदाय के रूप में उनके भविष्य के जीवन में एक साथ क्या आवश्यकता होगी। परमेश्वर ने कहा, "उसको सम्भालना; ...तेरे संग रहे। " (पद 35)।
देने का सबसे गहरा रूप एक अलग भविष्य की कल्पना करता है। परमेश्वर की विशाल, रचनात्मक उदारता हमें उस दिन की ओर प्रोत्साहित करती है जब हम सभी एक साथ पूर्णता और भरपूर जीवन जीएंगे।