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खुद को बचाने की कोशिश

कई साल पहले, न्यूयॉर्क शहर द्वारा "सुरक्षित रहें, रुके रहें " विज्ञापन अभियान शुरू किया गया जिसके द्वारा लोगों को शिक्षित किया जा सके कि कैसे वें लिफ्ट में फंसने पर शांत और सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों ने बताया कि फंसे हुए कुछ यात्रियों की तब मौत हो गई जब उन्होंने लिफ्ट के दरवाजे खोलने की कोशिश की या किसी अन्य माध्यम से बाहर निकलने का प्रयास किया। सबसे अच्छी कार्य योजना यह है कि मदद के लिए कॉल करने के लिए अलार्म बटन का उपयोग करें और आपातकालीन उत्तरदाताओं के आने की प्रतीक्षा करें।

प्रेरित पौलुस ने एक बहुत ही अलग प्रकार की बचाव योजना बताई - पाप के नीचे की ओर खिंचाव में फंसे लोगों की मदद करने के लिए। उसने इफिसियों को उनकी पूरी तरह से असहाय आत्मिक दशा की याद दिलाई - वास्तव में "[उनके] पापों में" . . मरी हुई दशा” (इफिसियों 2:1)। वे फंस गए थे, शैतान की आज्ञा मान रहे थे (पद 2), और परमेश्वर के प्रति समर्पण करने से इनकार कर रहे थे। इसके परिणामस्वरूप वें परमेश्वर के क्रोध के पात्र थे। लेकिन उसने उन्हें आत्मिक अंधकार में फंसा नहीं छोड़ा। और जो लोग यीशु पर विश्वास करते हैं, उनके लिए प्रेरित ने लिखा, "अनुग्रह से" . . बचा लिए गए हैं ” (पद 5, 8)। परमेश्वर की बचाव पहल की प्रतिक्रिया का परिणाम विश्वास होता है। और विश्वास का मतलब है कि हम खुद को बचाने की कोशिश करना छोड़ दें और अपने बचाव के लिए यीशु को पुकारें।

परमेश्वर के अनुग्रह से, पाप के जाल से बचाया जाना हमारे द्वारा नहीं शुरू किया गया। यह केवल यीशु के द्वारा से "परमेश्वर का दान" है (पद 8)। मर्विन विल्लियम्

खिलते रेगिस्तान

एक सदी पहले इथियोपिया के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से में हरे-भरे जंगल थे, लेकिन आज यह लगभग 4 प्रतिशत रह गया है। फसलों के लिए रकबा साफ़ रहते हुए पेड़ों की रक्षा करने में विफल होने से पारिस्थितिक संकट पैदा हो गया। हरे रंग के शेष छोटे-छोटे हिस्सों का अधिकांश हिस्सा चर्चों द्वारा संरक्षित है। सदियों से, स्थानीय इथियोपियाई रूढ़िवादी तेवाहिडो चर्चों ने बंजर जंगल के बीच में इन मरूद्यानों का पोषण किया है। यदि आप इसकी हवाई छविये देखें, तो आपको भूरे रेत से घिरे हरे-भरे द्वीप दिखाई देंगे। चर्च के अगुवे इस बात पर जोर देते हैं कि पेड़ों की देखभाल करना परमेश्वर की रचना के प्रबंधक के रूप में उनकी आज्ञाकारिता का हिस्सा है।

भविष्यवक्ता यशायाह ने इस्राएल को लिखा, जो एक मरू भूमि में रहते थे जहां नंगे रेगिस्तान और क्रूर सूखे का खतरा था। और यशायाह ने भविष्य की परमेश्वर की योजना का वर्णन किया, जहां “जंगल और सूखी भूमि आनन्दित होगी; जंगल आनन्दित और फूलेगा”(यशायाह 35:1)। परमेश्वर की यह मंशा है कि वह अपने लोगों को चंगा करे, लेकिन वह पृथ्वी को भी चंगा करना चाहता है। वह "नए आकाश और नई पृथ्वी का सृजन करेगा" (65:17)। परमेश्वर की नवीकृत दुनिया में, "रेगिस्तान फूलों से खिल उठेगा" (35:2)।

सृष्टि के प्रति परमेश्वर की देखभाल - जिसमें लोग भी शामिल हैं - हमें भी इसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित करती है। हम उसकी परम योजना के साथ तालमेल बिठाकर जी सकते हैं जो की एक चंगा और निरोग संसार है - उसकी सृष्टि के रखवाले बनकर। हम सभी प्रकार के रेगिस्तानों को जीवन और सुंदरता से भरपूर बनाने में परमेश्वर के साथ शामिल हो सकते हैं। विन् कोलियर

 

देखने वाली आँखें

जॉय अपने रिश्तेदार सैंडी के लिए चिंतित थी, जो वर्षों से शराब और मानसिक-स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहा था। जब वह सैंडी के अपार्टमेंट में गई, तो दरवाजे बंद थे और वह खाली लग रहा था। जैसे ही उसने और अन्य लोगों ने सैंडी को ढूँढने की योजना बनाई, जॉय ने प्रार्थना की, "परमेश्वर, मुझे वह देखने में मदद करें जो मैं नहीं देख पा रही हूँ।" जैसे ही वे जा रहे थे, जॉय ने पीछे मुड़कर सैंडी के अपार्टमेंट की ओर देखा और उसे पर्दे की हल्की सी हलचल दिखाई दी। उस क्षण, वह जान गयी की सैंडी जीवित है। हालाँकि उस तक पहुँचने के लिए आपातकालीन सहायता की आवश्यकता थी, लेकिन जॉय को प्रार्थना का उत्तर मिलने से खुशी हुई।

भविष्यवक्ता एलीशा परमेश्वर से उसकी वास्तविकता प्रकट करने के लिए कहने की शक्ति को जानता था। जब सीरियाई सेना ने उनके शहर को घेर लिया, एलीशा का सेवक डर से कांप उठा। हालाँकि, वह परमेश्वर का जन नहीं था, फिर भी परमेश्वर की सहायता से उसने अदृश्य की झलक देखी। एलीशा ने प्रार्थना की थी कि वह सेवक भी देखे, और "यहोवा ने उस सेवक की आंखें खोल दीं" और उसने "अग्निमय घोड़ों और रथों से भरी पहाड़ियां" देखीं (2 राजा 6:17)।

परमेश्वर ने एलीशा और उसके सेवक के लिए आत्मिक और भौतिक संसारो के बीच का पर्दा हटा दिया। जॉय का विश्वास करना कि परमेश्वर ने उसे पर्दे की छोटी सी झिलमिलाहट देखने में मदद की, उससे उसे आशा मिली। हम भी उससे हमारे आस-पास क्या हो रहा है, यह समझने के लिए आत्मिक दृष्टि पाने की प्रार्थना करे, चाहे हमारे प्रियजनों के साथ या हमारे समुदायों में। और हम भी उसके प्रेम, सत्य और करुणा के दूत बन सकते हैं। एमी बाउचर पाइ

 

हमारी आत्माओं को बचा लीजिए

तमिल संस्कृति में पत्तियाँ और पौधे विशेष रूप से उत्सवों के दौरान बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मेहमानों के स्वागत के लिए विवाह स्थलों के प्रवेश द्वार पर टिमटिमाती रोशनी से लदे केले के पेड़ लगाए जाते हैं। आम के पत्तों को आपस में जोड़कर दरवाजों को सजाया जाता है। केले के पत्तों का उपयोग रंगीन, विभिन्न प्रकार का भोजन परोसने के लिए प्लेट के रूप में किया जाता है। और नारियल के पत्तों का उपयोग सजावट के रूप में किया जाता है।

यहूदा में भी, ऐसा लगता है कि पत्तियों ने उनके उत्सव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब यीशु गधे पर सवार होकर यरूशलेम में दाखिल हुआ, तो फसह का पर्व चल रहा था। यह वह समय था जब दुनिया भर के यहूदी मिस्र से मिले छुटकारे का जश्न मनाने के लिए एकत्र होते थे। उत्सव और एकता के संकेत के रूप में खजूर की पत्तियों का उपयोग करना एक परंपरा थी। रोम के कठोर शासन के नीचे, यहूदी एक मसीह(Messiah) की लालसा रखते थे जो उन्हें एक बार फिर से बचाएगा जैसे मूसा ने बहुत पहले किया था। इसलिए, जब नासरत का आश्चर्यकर्म करनेवाला यीशु गधे पर सवार होकर आया, तो इसने आशा को प्रज्वलित किया (पद.37)। भीड़ खजूर की डालियाँ लेकर, लहराते हुए और “होसन्ना!” चिल्लाती हुई निकली l जिसका अर्थ है “हमें बचाओ” (मत्ती 21:8-9)। परमेश्वर ने सचमुच अपने पुत्र, आत्माओं के उद्धारकर्ता के द्वारा उनकी ‘आत्माओं को बचाने’ की इच्छा पूरी की।

हम अक्सर इस बात से अनजान होते हैं कि हमें किससे बचाये जाने की ज़रूरत है। हम सोच सकते हैं कि अगर हमारी वित्तीय, शारीरिक या भावनात्मक समस्याएँ हल हो जाती हैं, तो हम बच जाते हैं। लेकिन हमें जिस वास्तविक बचाव की ज़रूरत है, वह हमारी आत्माओं का है। यीशु हमें अपनी बचाने वाली सामर्थ्य और प्रेम दिखाने के लिए मनुष्य रूप में आया (लूका 19:10)। उन्होंने क्रूस पर अपने बलिदान के द्वारा हमारी आत्मा को बचाया, ताकि हमारे माध्यम से, वह दूसरों की आत्माओं को बचा सकें जिन्हें उद्धारकर्ता की ज़रूरत है। —रेबेका विजयन

 

प्रेमपूर्ण आज्ञाकारिता

हमारे विवाह समारोह के दौरान, हमारे पादरी ने मुझसे कहा, "क्या आप वादा करती है कि जब तक मृत्यु अलग न करे आप अपने पति से प्रेम करेंगी, उनका सम्मान करेंगी और उनकी आज्ञा मानेंगी?" अपने मंगेतर की ओर देखते हुए, मैं फुसफुसाई, "आज्ञा मानूंगी?" हमने अपना रिश्ता प्रेम और सम्मान पर बनाया है - अंध आज्ञाकारिता पर नहीं, जैसा की शादी की कसमे जता रहीं है। मेरे पति के पिता ने उस विस्मयकारी क्षण को फिल्म में कैद कर लिया जब मैंने आज्ञापालन शब्द को संसाधित किया और कहा, "मैं मानूंगी।"

इन वर्षों में, परमेश्वर ने मुझे दिखाया है कि आज्ञापालन शब्द के प्रति मेरे प्रतिरोध का, पति और पत्नी के बीच जो अविश्वसनीय रूप से पेचीदा रिश्ता है उससे कोई लेना-देना नहीं है। मेरी समझ से आज्ञापालन का अर्थ "वशीभूत" या "जबरन समर्पण" था, जिसका समर्थन पवित्रशास्त्र नहीं करता। बल्कि, बाइबल में आज्ञापालन शब्द उन कई तरीकों को व्यक्त करता है जिनसे हम परमेश्वर से प्रेम कर सकते हैं। जैसा कि मेरे पति और मैं अब शादी के तीस साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, पवित्र आत्मा की शक्ति के द्वारा से हम अभी भी यीशु और एक-दूसरे से प्रेम करना सीख रहे हैं।

जब यीशु ने कहा, "जो मेरी आज्ञाओं को मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है" (यूहन्ना 14:15), उन्होंने हमें दिखाया कि पवित्रशास्त्र का पालन करना उनके साथ निरंतर प्रेमपूर्ण और घनिष्ठ संबंध का परिणाम होगा (पद 16-21) । 

यीशु का प्रेम निःस्वार्थ, बिना शर्त है और कभी भी जबरदस्ती या अपमानजनक नहीं है। जैसे ही हम अपने सभी रिश्तों में उसका अनुसरण करते हैं और उसका सम्मान करते हैं, पवित्र आत्मा हमें उसके प्रति हमारी आज्ञाकारिता को विश्वास और आराधना के एक बुद्धिमान और प्रेमपूर्ण कार्य के रूप में देखने में मदद कर सकता है । सोचितल डिक्सॉन

 

खुशी के आंसू

एक सुबह घर से निकलते समय, डीन को कुछ दोस्त गुब्बारे लेकर इंतज़ार करते हुए मिले। उनका दोस्त जोश आगे बढ़ा। डीन को एक लिफाफा सौंपने से पहले उन्होंने कहा, "हमने आपकी कविताओं को एक प्रतियोगिता में शामिल किया था।" अंदर एक कार्ड था जिस पर लिखा था ''प्रथम पुरस्कार'' और जल्द ही हर कोई खुशी के आंसू रोने लगे। डीन के दोस्तों ने उसकी लेखन प्रतिभा की पुष्टि करते हुए एक सुंदर काम किया था।

खुशी के लिए रोना एक असत्याभास अनुभव है। आँसू आम तौर पर दर्द की प्रतिक्रिया होते हैं, खुशी के नहीं; और खुशी आम तौर पर हंसी के साथ व्यक्त की जाती है, आंसुओं के साथ नहीं। इतालवी मनोवैज्ञानिकों ने नोट किया है कि खुशी के आँसू गहरे व्यक्तिगत अर्थ के समय आते हैं - जैसे जब हम गहराई से प्रेम महसूस करते हैं या कोई बड़ा लक्ष्य प्राप्त करते हैं। इससे वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि खुशी के आंसू हमारे जीवन के अर्थ की ओर संकेत करते हैं।

मैं कल्पना करता हूं कि यीशु जहां भी गए वहां खुशी के आंसू फूट पड़े। कैसे हो सकता है कि उस जन्म से अंधे व्यक्ति के माता-पिता खुशी के आंसुओ के साथ न रोए होंगे जब यीशु ने उसे ठीक किया (यूहन्ना 9:1-9), या मरियम और मार्था जब उसने उनके भाई को मृत्यु से उठाया (11:38-44) ? जब परमेश्वर के लोगों को पुनर्स्थापित दुनिया में लाया जाएगा, तो “उनके चेहरे पर खुशी के आँसू बहेंगे,” परमेश्वर कहते हैं, “और मैं उन्हें बड़ी देखभाल के साथ घर ले आऊंगा” (यिर्मयाह 31:9 एनएलटी)।

यदि ख़ुशी के आँसू हमें हमारे जीवन का अर्थ बताते हैं, तो आने वाले उस महान दिन की कल्पना करें। जैसे ही हमारे चेहरे से आँसू बहेंगे, हम बिना किसी संदेह के जान लेंगे कि जीवन का अर्थ हमेशा उसके साथ घनिष्ठता से रहना रहा है।शेरिडन वॉयसे

विश्वास की विजय

चार साल के छोटे कैल्विन की नियमित स्वास्थ्य जांच में उसके शरीर पर कुछ अप्रत्याशित धब्बे दिखाई दिए। मुलाक़ात के दौरान, उसे कुछ टीके दिए गए, और इंजेक्शन वाली जगह को एक पट्टी से ढक दिया गया। घर पर, जब छोटे चिपकने वाले आवरण को हटाने का समय आया, तो केल्विन डर से रोने लगा। अपने बेटे को सांत्वना देने की कोशिश करते हुए, उसके पिता ने कहा, "केल्विन, तुम्हें पता है कि मैं तुम्हें चोट पहुँचाने के लिए कभी कुछ नहीं करूँगा।" उसके पिता चाहते थे कि उनका बेटा पट्टी हटने के डर से ज्यादा उन पर भरोसा करे।

असुविधा के कारण निर्बल हो जाने वालों में केवल चार साल के बच्चे अकेले नहीं हैं। सर्जरी, प्रियजनों से अलगाव, मानसिक या मनोवैज्ञानिक चुनौतियाँ—और भी बहुत कुछ—हमारे डर, आहें, रोने और कराहने को उत्तेजित करती हैं।

दाऊद के डर से भरे क्षणों में से एक वह था जब उसने ईर्ष्यालु राजा शाऊल से भागते समय खुद को पलिश्ती क्षेत्र में पाया। जब उसे पहचाना गया, तो वह चिंतित था कि उसके साथ क्या होगा (देखें 1 शमूएल 21:10-11): “दाऊद. . . गत के राजा आकीश से बहुत डर गया” (पद 12)। इस असहज स्थिति पर विचार करते हुए, दाऊद ने लिखा, “जिस समय मुझे डर लगेगा मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा। . . . मैं ने परमेश्‍वर पर भरोसा रखा है, मैं नहीं डरूंगा” (भजन संहिता संहिता 56:3-4)।

जब जीवन की असुविधाएँ हमारे डर को बढ़ा दें तो हमें क्या करना चाहिए? हम अपने स्वर्गीय पिता पर भरोसा रख सकते हैं।आर्थर जैक्सन

 

प्रार्थना मायने रखती है

"आगामी मस्तिष्क स्कैन के लिए प्रार्थना।" "कि मेरे बच्चे चर्च वापस आ जाये।" "डेव के लिए सांत्वना, जिसने अपनी पत्नी को खो दिया।" हमारी कार्ड मंत्रालय टीम को इस तरह के प्रार्थना अनुरोधों की एक साप्ताहिक सूची प्राप्त होती है ताकि हम प्रार्थना कर सकें और प्रत्येक व्यक्ति को एक हस्तलिखित नोट भेज सकें। अनुरोध बहुत अधिक होते हैं, और हमारे प्रयास छोटे और ध्यान न दिए जाने वाले लगते हैं। यह तब बदल गया जब मुझे हाल ही में शोक संतप्त पति डेव से उसकी प्रिय पत्नी की मृत्युलेख की एक कॉपी के साथ हार्दिक धन्यवाद कार्ड मिला। मुझे एक ताज़ा एहसास हुआ कि प्रार्थना मायने रखती है।

यीशु ने स्वंम नमूना दिया कि हमें दृढ़ता से, अक्सर और आशापूर्ण विश्वास के साथ प्रार्थना करनी चाहिए। पृथ्वी पर उनका समय सीमित था, लेकिन अकेले जाकर प्रार्थना करने को उन्होंने प्राथमिकता दी (मरकुस 1:35; 6:46; 14:32)।

सैकड़ों वर्ष पहले, इस्राएल के राजा हिजकिय्याह ने भी यह सबक सीखा था। उसे बताया गया था कि एक बीमारी जल्द ही उसकी जान ले लेगी (2 राजा 20:1)। संकट में और फूट-फूट कर रोते हुए, हिजकिय्याह ने "दीवार की ओर मुंह करके यहोवा से प्रार्थना की" (पद 2)। इस उदाहरण में, परमेश्वर की प्रतिक्रिया तत्काल थी। उसने हिजकिय्याह की बीमारी को ठीक किया, उसके जीवन में पंद्रह वर्ष जोड़े, और राज्य को एक शत्रु से बचाने का वादा किया (पद 5-6)। परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना का उत्तर इसलिए नहीं दिया क्योंकि हिजकिय्याह एक अच्छा जीवन जी रहा था, बल्कि "[अपने] सम्मान के लिए और [अपने] सेवक दाऊद के लिए" (पद 6 एनएलटी)। हो सकता है कि हमें हमेशा वह न मिले जो हम मांगते हैं, लेकिन हम निश्चिंत हो सकते हैं कि परमेश्वर हर प्रार्थना में और उसके माध्यम से काम कर रहा है।करेन पिम्पो

 

तैरता हुआ डाक-घर

क्या आपने कभी तैरता हुआ डाकघर देखा है? अगर नहीं देखा है, तो आप जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर जा सकते हैं। बर्फ से ढके हिमालय की पृष्ठभूमि में डल झील पर एक अनोखा “तैरता हुआ” डाकघर है जो वाकई अपनी तरह का अनूठा है। हालाँकि यह झील पर अकेला तैरता है, लेकिन यह वास्तव में अकेला नहीं है। यह भारतीय डाक सेवा के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है, जिसके देश भर में 1.5 लाख से ज़्यादा दफ़्तर हैं और यह दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है।

कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखते हुए, प्रेरित पौलुस उसके सदस्यों से आग्रह करता है कि वे खुद को एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि विश्वासियों के समुदाय के सदस्यों के रूप में सोचें। वह उन्हें अपने आध्यात्मिक वरदानों में विविधता को महत्व देने के लिए प्रोत्साहित करता है और उनसे इन अंतरों की सुंदरता को अपनाने के लिए विनती करता है (पद.4-5)। पौलुस चर्च को यह एहसास कराने में मदद करता है कि ये अंतर पवित्र आत्मा की एकजुट करने वाली सामर्थ्य (पद. 7) के कारण अच्छे हैं, जो हर एक का इस्तेमाल अपनी मर्ज़ी से करता है। अंत में, वह उन्हें समझाता है कि वे अकेले नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा हैं। और व्यक्तिगत लाभ की तलाश करने के बजाय, प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों के लाभ के लिए अपने वरदान का उपयोग करना चाहिए।

ऐसे संसार में जहाँ खुद को दूसरों से आगे रखना सामान्य माना जाता है, हमें जीवन के प्रति एक अलग दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा जाता है। हमें एक साथ काम करने के लिए कहा जाता है, यह महसूस करते हुए कि हमारे मतभेदों के बावजूद हम एक व्यापक समूह का हिस्सा हैं, अर्थात् परमेश्वर की कलीसिया। तैरते हुए डाकघर की तरह, हमारे वरदान, प्रतिभाएँ और योग्यताएँ अद्वितीय हैं। और जब उनका उपयोग पवित्र आत्मा की शक्ति के तहत किया जाता है, तो वे परमेश्वर के राज्य का निर्माण करने के लिए शक्तिशाली साधन बन सकते हैं। —रेबेका विजयन