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दयापूर्ण कार्य

 

वह [तबीता] बहुत से भले भले काम और दान किया करती थी। प्रेरितों के काम 9:36

"एस्टेरा, तुम्हे हमारे मित्र…

अनाम दया

 

परन्तु जब तू दान करें, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बायां हाथ न जानने पाए…

निरंतर दया

 

एक दूसरे के प्रति कृपालु और करुणामय हो। इफिसियों 4:32

जब मैं बच्चा था तो मैं एल. फ्रैंक बॉम की…

इच्छानुरूप दया

 

मैं उन पर परमेश्वर की दया दिखाना चाहता हूं। 2 शमूएल 9:3

अपने बच्चों के साथ अकेले विमान में…

अनपेक्षित दया

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं, और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिए सृजे गए हैं। इफिसियों 2:10

मेरी…

विश्वास सुनने से आता है

जब पादरी बॉब को चोट लगी जिससे उनकी आवाज पर इसका असर हुआ, तो उन्होंने पंद्रह साल तक संकट और निराशा का सामना किया। उन्होने सोचा, कि एक पादरी जो बात नहीं कर सकता वह क्या करे? वह इस प्रश्न से जूझता रहा, उसने अपने दुःख और भ्रम को परमेश्वर के सामने उंडेल दिया। उन्होंनेबताया, “मैं केवल एक चीज करना जानता था – परमेश्वर के वचन की तलाश करना।” जैसे–जैसे उसने बाइबल पढ़ने में समय बिताया, परमेश्वर के लिए उसका प्यार बढ़ता गया— “मैंने अपना जीवन पवित्रशास्त्र में आत्मसात करने और उसमें डूबने के लिए समर्पित कर दिया है क्योंकि विश्वास सुनने से और सुनना परमेश्वर के वचन से आता है।”

रोमियों को लिखी प्रेरित पौलुस की पत्री में हम इस  वाक्यांश को  पाते हैं “विश्वास सुनने से आता है” । पौलुस अपने सभी साथी यहूदी लोगों से मसीह में विश्वास करने और बचाए जाने की लालसा रखता था रोमियों (10:9)। वे कैसे विश्वास करेंगे? उस विश्वास के द्वारा जो  वचन सुनने से — मसीह के वचन से (पद 17)।

पादरी बॉब मसीह के वचन को ग्रहण करना और उसमें विश्वास करना चाहते हैं, खासकर जब वह बाइबल पढ़ते हैं। वह दिन में केवल एक घंटे के लिए ही बोल सकते हैं और ऐसा करने पर उन्हें लगातार दर्द होता है, लेकिन वह पवित्रशास्त्र में अपने आप को डुबो देने के द्धारा  परमेश्वर से शांति और संतोष पाते रहते हैं । इसलिए हम भी भरोसा कर सकते हैं कि यीशु हमारे संघर्षों में खुद को हमारे सामने प्रकट करेंगे। जब हम उसका वचन सुनते हैं, चाहे हम किसी भी चुनौती का सामना करें, वह हमारे विश्वास को बढ़ाएगा।

धीरे धीरे (कदम दर कदम)

कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी एक दर्जन टीमों ने, जिनमें से हर एक में तीन लोग थे, चार पैरों वाली दौड़ के लिए तैयारी की । प्रत्येक बाहरी व्यक्ति को बीच के व्यक्ति के साथ, रंगीन कपड़े से उनके टखनों और घुटनों पर बांधा गया था,तीन लोगों के प्रत्येक समूह (तिकड़ी) ने समापन रेखा (फिनिश लाइन) पर अपनी आँखें लगा रखी थीं । सीटी बजने पर टीमें आगे बढ़ीं। उनमें से अधिकांश गिर गए और अपने पैर जमाने के लिए संघर्ष करने लगे। कुछ समूहों ने चलने के बजाय कूदना चुना। कुछ ने हार मान ली। लेकिन एक टीम ने अपनी शुरुआत में देरी की, अपनी योजना को पक्का किया, और आगे बढ़ते हुये आपस में बातें करते रहें । वे रास्ते में लड़खड़ाए लेकिन आगे बढ़ते रहे और जल्द ही सभी टीमों को पार कर गए। कदम दर कदम सहयोग करने की उनकी इच्छा ने उन्हें फिनिश लाइन को एक साथ पार करने में सक्षम बनाया।

यीशु में विश्वासियों के समुदाय के भीतर परमेश्वर के लिए जीना अक्सर उतना ही निराशाजनक लगता है जितना कि चार पैरों वाली दौड़ के दौरान आगे बढ़ने की कोशिश करना। हम अक्सर उन लोगों के साथ बातचीत करते समय लड़खड़ा जाते हैं जो हमसे अलग राय रखते हैं।

आने वाले जीवन के लिए स्वयं को एकता में संरेखित करने के लिए पतरस प्रार्थना, आतिथ्य, और अपने वरदानों का उपयोग करने की बात करता है । वह यीशु में विश्वासियों से आग्रह करता है कि “वे एक दूसरे से अधिक प्रेम रखें” (1 पतरस 4:8), बिना कुडकुडाये  एक दूसरे का अतिथि सत्कार  करें, और परमेश्वदर के अनुग्रह के विश्वानसयोग्य भण्डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगायें (पद 10)। जब हम ईश्वर से हमें संवाद करने और सहयोग करने में मदद करने के लिए कहते हैं, तो हम दुनिया को यह दिखाने में दौड़ का नेतृत्व कर सकते हैं कि  मतभेदों का आनन्द कैसे लिया जाये  और एकता में एक साथ रहा जाये। ।