मुझे  उस चंगाई और मेल-मिलाप की फिर से याद दिलाई गयी जिसे यीशु ने अपने जन्म, मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा पृथ्वी पर लाया था l हमारे चर्च परिवार ने एक बाइबल अध्ययन किया जो आराधना, विवाह और न्याय को फिर से स्थापित करने पर केन्द्रित था l आखिरी सन्देश संसार में अन्याय को दूर करने के बारे में था, जिसकी शुरुआत हमारे दिलों में अन्याय को संबोधित करने और फिर से ठीक करने से हुयी थी l

प्रातःकाल आराधना के बाद, एक व्यक्ति सभागार के सामने मेरे पास आया और मुझसे उसे क्षमा करने के लिए कहा l शीघ्र, मेरा दिमाग उसके साथ हुयी बातचीत को परखा, यह याद करने की कोशिश किया कि क्या मैंने उसे ठेस पहुँचाने के लिए कुछ कहा या किया था l दिमाग में कुछ नहीं आया l मैंने पूछा, “मैंने क्या किया?” उसने मुझे बताया कि मैंने उसे ठेस पहुँचाने के लिए कुछ नहीं किया, बल्कि उसके दिल में कुछ था l

“जब आपको वरिष्ठ अध्यापन पास्टर के उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया था, तो मैंने आपको वोट नहीं दिया था l”

उसकी टिप्पणी कोई बड़ा रहस्योद्घाटन नहीं था l “मुझे भरोसा है कि बहुत से लोगों ने मुझे वोट नहीं दिया l” कभी-कभार ही व्यक्तियों को 100 प्रतिशत प्रतिज्ञान प्राप्त होता है; यह एक सेवकाई की स्थिति के लिए साक्षात्कार की प्रकृति है l हालाँकि, उन्होंने आगे जो कहा, उसने मुझे झकझोर कर रख दिया l

“आपको यह जानना होगा कि मैंने आपको वोट क्यों नहीं दिया l पूर्व में पूर्वाग्रहों के कारण, मैंने घृणा एवं विभिन्न जातियों के लोगों के विरुद्ध जातिवादी हृदय विकसित कर लिया l इसलिए, मैंने आपको वोट नहीं दिया क्योंकि आप अन्य जाति से हैं l” उसके गालों पर आँसू बहते हुए उसने पूछा, “क्या आप मुझे क्षमा कर देंगे?”

उसके अनुरोध के महत्व को अनुभव नहीं करते हुए, मैंने बेफिक्र होकर कहा कि यह कोई समस्या नहीं थी l उन्होंने मेरे कंधे पकड़ लिए और मेरी आँखों में देखा और कहा, “सुनिए! आप नहीं समझते हैं l मैं सचमुच में चाहता हूँ कि आप मुझे क्षमा करें क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरे बेटे के जीवन में पूर्वाग्रह का कबाड़ फ़ैल जाए l मैं गलत था l पिछले एक वर्ष में, परमेश्वर ने मेरे जीवन को प्रभावित करने के लिए आपका और आपके उपदेश का उपयोग किया है l”

मैंने उसे माफ़ कर दिया, और हम एक दूसरे की बाहों में रोते हुए काफी देर तक गले मिले l

अगले सप्ताह जब हमने श्रिंखला समाप्त की, तो लोगों ने साझा किया कि इसने उनके जीवनों को कैसे प्रभावित किया l वह व्यक्ति जिसने पिछले सप्ताह मुझसे संपर्क किया था, खड़ा हो गया और जो कुछ उसने मेरे साथ साझा किया, उसे मण्डली के साथ साझा किया l मण्डली अप्रत्याशित रूप से खड़ी हो गयी, और जश्न में ताली और सिटी बजाई l

यीशु एक दीवार तोड़ रहा था, और वह अपनी देह में एकता की रचना कर रहा था l

दो हज़ार वर्ष पूर्व, उसी मसीह ने─कुंवारी से जन्म लेकर, एक सिद्ध जीवन जीया, छुटकारे की मृत्यु सही, पुनरुत्थित हुआ─यहूदियों और गैर-यहूदियों के बीच की दीवार को तोड़ दिया, जो उन्हें वर्षों से अलग कर रखा था l यह दीवार एक भौतिक बाधा नहीं बल्कि एक आध्यत्मिक बाधा थी l आपसी कड़वाहट और धार्मिक शत्रुता ने यहूदियों और गैर-यहूदियों को अलग कर दिया था l

मैं सचमुच में चाहता हूँ कि आप मुझे क्षमा करें क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मेरे बेटे के जीवन में पूर्वाग्रह का कबाड़ फ़ैल जाए

लेकिन यीशु के देहधारण, पवित्र जीवन, तोड़ी हुयी देह, छुटकारे की मृत्यु के द्वारा, उसने उस दीवार को ढा दिया, जिससे यहूदियों और अन्यजातियों के लिए परमेश्वर और एक दूसरे के साथ मेल रखना संभव हो गया (कुलुस्सियों 3:11; गलतियों 3:28) l उन्होंने परमेश्वर के साथ और यीशु की देह में, कलीसिया में एक दूसरे के साथ शांति, संगत मित्रता का अनुभव किया l

परमेश्वर और एक दूसरे के प्रति हमारी शत्रुता को बुझाने के लिए मसीह संसार में आया l अपने देहधारण, मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा, यीशु ने पुराने शत्रुतापूर्ण खेमों से एक एकीकृत नए लोगों को रचा (यूहन्ना 17:20-21) l उसने न केवल व्यक्तियों और लोगों के बीच शांति लायी, बल्कि स्वयं मसीह हमारी शांति बना l यशायाह ने शांति के राजकुमार के आने की नबूवत की थी (यशायाह 9:6) l परमेश्वर और हमारे बीच शांति की ज़रूरत यीशु में विश्वास थी l

दो हज़ार वर्ष बाद, अभी भी, वह राजा हमें अलग करने वाली दीवारों को तोड़ रहा है, और अपनी देह की एकता में आमंत्रित कर रहा है l एक और उदाहरण में, जिस प्रकार यीशु ने यहूदियों और गैर-यहूदियों के बीच में किया, उसने 2009 में एक सम्मलेन में एक सामर्थी काम किया l एक शाम, चीनी विद्यार्थियों का एक समूह, ताइवानी विद्यार्थियों का एक समूह, और हांगकांग के विद्यार्थियों का एक समूह आराधना करने और विचार करने के लिए एक बड़े उत्सव हॉल में इकट्ठे हुए l हालाँकि, बड़े विभाजकों ने इन विद्यार्थियों को अलग किया था l ये विभाजक उस शत्रुता का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, जो ऐतिहासिक रूप से, एक दूसरे के प्रति थी; उन्होंने सोचा कि “अपने लोगों” के साथ उपासना करना सबसे अच्छा है l

प्रार्थना करते समय, चीनी विद्यार्थियों ने अहसास किया कि परमेश्वर उन्हें अन्य देशों को अपने साथ उपासना करने के लिए निमंत्रित करने के लिए कह रहा है l ताइवान और होंगकोंग के विद्यार्थियों ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया, विभाजक हटा दिए, और शक्तिशाली उपासना के समय के लिए चीनी विद्यार्थियों में सम्मिलित हो गए l उस क्षण में, शाब्दिक दीवारें हिल गयीं और इन विद्यार्थियों ने आराधना में आत्मा की एकता का अनुभव किया l

यीशु अभी भी शांति ला रहा है और हमें अलग करनेवाली दीवारों को तोड़ रहा है l क्रिसमस हमें याद दिलाता है कि मसीह शांति लाने के लिए आया था─उस प्रकार की शांति जो परमेश्वर और एक दूसरे के साथ हमारे सम्बन्ध को पुनर्स्थापित करती है l उसी में, सभी सांस्कृतिक मतभेद, शत्रुता और घृणा का मेल हो जाता है l

ऑस्ट्रेलियाई क्रिसमस

मुझे क्रिसमस मनाते हुए हमारे ऑस्ट्रेलियाई मित्रों की तस्व्रें देखना अच्छा लगता है l इसलिए नहीं कि उनके पास अधिक रचनात्मक सजावट या एक अलबेला पेड़ है, बल्कि इसलिए कि वे आमतौर पर समुद्र तट पर उत्सव मना रहे होते हैं! उत्तरी गोलार्ध में रहने वाले लोगों के लिए यह भूलना आसान है कि दक्षिणी गोलार्ध के देश अपने गर्मी के महीनों में क्रिसमस मनाते हैं l यह वह नहीं है जो क्रिसमस पर देखने की उम्मीद करता हूँ l

 

सबके लिए एक मेज

आनेवाली छुट्टी स्कॉट के लिए मनहूस लग रही थी l उसने सोचा कि वह बचे हुए भोजन को बस गर्म कर लेगा और अपना समय अकेले टीवी देखने में बिताएगा l एकांतवास से डरते हुए, स्कॉट ने अन्य अकेले लोगों को रात के खाने के लिए आमंत्रित करते हुए, पेपर में एक विज्ञापन डालने का फैसला किया l बारह से कम लोग नहीं आए! वह 1985 था, और तब से हर साल, स्कॉट ने उसी प्रकार का विज्ञापन दिया है, जिसमें 100 से अधिक लोगों का स्वागत किया गया है और अब एक स्थानीय चर्च भवन में इकठ्ठा हो रहे हैं l बेघर पडोसी, जिन्होंने अपने परिवार को खो दिया है, वे अजनबी जो घर नहीं जा सकते─स्कॉट सभी प्रकार के लोगों के लिए एक बड़ी मेज लगाता है l

संसार के लिए ख़ुशी

“खुश हो खुदावंद आया है (Joy to the World) ” मिफांग गाते गाते वाक्य के बीच में ही ठहर गयी और विवश होकर से सिसकने लगी क्योंकि उसकी माँ की दर्दनाक यादें उसके दिमाग में घर गयी थी l पिछले साल इसी समय, उसकी माँ ठीक उसके निकट खड़ी थी, वही गाना गा रही थी l लेकिन अब वह चली गयी थी, एक दुर्घटना से उसका जीवन दुखद रूप से समाप्त हो गया l मिफांग के लिए क्रिसमस फिर कभी पहले जैसा नहीं रहेगा l जश्न मानना मुश्किल था जब उसके पास केवल दुःख और शोक था l

क्रिसमस के समय स्वप्न देखना

इरविंग बर्लिन के लिए क्रिसमस ख़ुशी नहीं बल्कि दुःख था l “व्हाइट क्रिसमस(एक गीत)” के रचयिता ने क्रिसमस के दिन 1928 में अपने नवजात बेटे को खो दिया l उनका मधुर गीत, जो छुट्टी की खुशियों के बीते समय के लिए तरसता है, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बेतहाशा लोकप्रिय होने वाला था, जब विदेशों में सैनिक घर वापस जाकर क्रिसमस मनाने का सपना देख रहे थे l

 

तरोताजगी देने वाला उपहार

क्रिसमस से कुछ ही दिन पहले की बात है कि मेरी पत्नी कैरी बाज़ार में चेकआउट लाइन में खड़ी थी l उसके सामना एक युवा माँ ध्यान से अपने कार्ट(गाड़ी) की सामग्री का मूल्यांकन कर रही थी और धीरे-धीरे एक-एक करके सामान अलग कर रही थी l कैरी की आरंभिक अधीरता दया में बदल गयी क्योंकि उसने हटाए गए सामानों के बढ़ते ढेर निरीक्षण किया और महसूस किया कि महिला के पास उन्हें खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे l

 

क्रिसमस का सच्चा उपहार

“कभी-कभी मैं अकेला महसूस करती हूँ, और यह मुझे सोचने पर विवश करता है कि उन्हें यहाँ से कितना अकेले निकलना होगा l बात कर रही थी एस्टेरिया, एक विश्वास-आधारित समुदाय समूह की निदेशिका, जो क्रिसमस को एल कैंपामेंटो(El Campamento) तक लेकर आयी, जो अस्थायी तम्बू शहर है जहां नशे के आदि कई लोग रहते हैं l उसने ध्यान किया कि कैसे छुट्टियां सड़क पर रहने वालों के लिए कठिन हो सकती है l

 

असाधारण मिश्रित समूह

एक बच्चे के रूप में, मैंने हमेशा क्रिसमस की पूर्व संध्या को वर्ष के सबसे रोमांचक दिनों में से एक पाया l मुझे पता था कि सुबह उपहार होंगे, उस रात एक भोज होगा, और चर्च में एक कैंडल लाइट सहभागिता होगी l लेकिन यह इसलिए भी रोमांचक था क्योंकि मुझे कभी नहीं पता था कि हमारे घर पर रात के खाने के लिए कौन आ रहा है l मेरे माता-पिता उन लोगों को आमंत्रित करना पसंद करते थे जो अकेले थे या कहीं नहीं जा सकते थे और आकर हमारे साथ भोजन कर सकते थे l

 

मरियम जानती थी

चार वर्ष की कैटिलिन कमरे की बाकी सभी चीजों से बेखबर थी l लटके और लिपटे उपहारों के बारे में कोई विचार नहीं था l वह बस हमारे चरनी के दृश्य और उसके जन्म के पात्रों/चरित्रों के साथ खेलने के लिए संतुष्ट थी l मेरी रूचि कुछ और थी जो वह मरियम, यूसुफ़ और बच्चे को इधर-उधर ले जाने के दौरान कर रही थी : वह बार-बार गा रही थी “मरियम क्या तुम जानती थी?(Mary did you know?)─शब्द जो उसने दूसरों को गाते हुए सुना था l

 

आंसुओं में होकर

मैं परिवार से सैकड़ों मील दूर एक और क्रिसमस का सामना करने से डरती थी l अकेलेपन और निराशा ने असंतोष को उकसा दिया, जो मेरे मुँह से शिकायत के रूप में निकला जब मेरे पति ने सुझाव दिया कि हम छुट्टी की सजावट को खोल दें l जब मेरा दिल दुखित था तो मैं कैसे खुश हो सकती थी?

 

ओ इम्मानुएल आओ (O Come Emmanuel)

ऐसा लगता है कि हम शायद ही कभी अपने पसंदीदा क्रिसमस के पहले या दूसरे छंद से आगे जाते हैं l लेकिन, एक क्रिसमस भजन के शब्दों में गहराई से दबे हुए हैं─पद साथ में!─ऐसे शब्द हैं जो हमारे समय के साथ विशिष्ट रूप से मेल खाते हैं l “आओ, आओ इमैनुएल(O, O Come Emmanuel),” बारहवीं शताब्दी में लिखा गया, विनती करता है :

 

banner image

हम अविवाहित, और जोड़े और बच्चों वाला परिवार, साथ में क्रिसमस की पूर्व सांध्य पर यीशु के जन्म का जश्न मना रहे थे l बातचीत चलती रही, खाना बहुत स्वादिष्ट था, और हमें बर्तन धोने में भी मज़ा आ रहा था l कार्यवाहियों के बीच हम लूका के सुसमाचार से क्रिसमस की कहानी के माध्यम से पढ़ते हैं, जो मौसम के सबसे बड़े उपहार, यीशु पर आश्चर्य करते हैं l मसीह के कारण, हम जो पहले अजनबियों के समूह थे, अब बहन और भाई थे l

यीशु ने हमेशा अजनबी का स्वागत किया l यहाँ तक कि अपने जन्म के समय भी परमेश्वर ने चरवाहों को आने और नवजात शिशु की आराधना करने के लिए कहा थे : “उद्धारकर्ता─हाँ, मुक्तिदाता, प्रभु─आज दाऊद के नगर, बैतलहम में जन्म लिया है!” (लूका 2:11) l जिज्ञासु, विनम्र चवाहे बैतलहम की ओर लपके l और बच्चे को देखने के बाद, उन्होंने जाकर यीशु के उद्धारकर्ता के बारे में खुशखबरी फैलाई, और “और सब सुननेवालों ने उन बातों से जो गड़ेरियों ने उनसे कहीं आश्चर्य किया” (पद.18) l

मुक्तिदाता के रूप में, बालक यीशु बड़ा होकर वह व्यक्ति बना जो क्रूस पर मरा, एक सिद्ध बलिदान जो उसके पीछे चलने वालों के पापों को मिटा देता है l यीशु, पुत्र जो परमेश्वर है, ने अपने आप को एक गौशाले में जन्म लेने के लिए दीन किया और फिर स्वेच्छा से हमारे लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया l जब हम उसकी आराधना में उसके सामने झुकते हैं, जैसा कि चावाहों ने किया था, जैसा कि उन्होंने देखा और सुना था (पद.20) के लिए परमेश्वर की महिमा और स्तुति की (पद.20), वह हमें अपने परिवार का हिस्सा बनाता है l यीशु अपने विश्वव्यापी समुदाय में हमारा स्वागत करता है जिनका उपयोग परमेश्वर अपने प्रेम और प्रकाश को फैलाने के लिए करता है l

यदि आप इस क्रिसमस पर बहिष्कृत महसूस कर रहे हैं, तो जान लें कि यदि आप यीशु में विश्वास करते हैं, “परमेश्वर अकेले लोंगों को परिवारों में स्थान देता है” (भजन 68:6) l