मेरा एक मित्र शहर आ रहा था l वह और उसकी दिनचर्या अत्यधिक व्यस्त थी , किन्तु इसके बाद भी, वह आधा घंटा का समय निकालकर मेरे परिवार के साथ रात्रि भोजन करने आया l हमने उसकी उपस्थिति का आनंद उठाया किन्तु अपनी थाली देखते हुए मैंने सोचा, “हमें उसके समय का चूर चार ही मिला l”

तब मैंने याद किया कितनी बार परमेश्वर को हमारे समय का चूर चार ही मिलता है-कभी-कभी सोने से पूर्व केवल अंतिम कुछ पल ही l

दानिय्येल बेबीलोन के प्राचीन राज्य में उच्च शासकीय अधिकारी था, और मैं मानती हूँ उसकी दिनचर्या व्यस्त थी l फिर भी, उसने परमेश्वर के साथ समय बिताने की आदत बनायी-तीन बार प्रार्थना, स्तुति, और उसके साथ संवाद l इससे उसका विश्वास विकसित हुआ जो सताव के समय भी नहीं डगमगाया (दानि.6 ) l

परमेश्वर हमारे साथ सम्बन्ध चाहता है l सुबह के समय हम उसको अपने दिन में आमंत्रित करें, और उसकी प्रशंसा करते हुए पुरे दिन के लिए उसकी सहायता मांगें l अन्य समय में हम उसकी विश्वासयोग्यता पर विचार करें l l प्रार्थना और वचन में परमेश्वर के साथ समय बिताते हुए, उसके साथ सम्बन्ध में बढ़ते हुए और भी उसके सामान बनना सीखते हैं l जब परमेश्वर के साथ समय हमारी प्रार्थमिकता बन जाती है, हम और भी उसकी संगति का आनंद लेने लगते हैं l