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Articles by कीला ओकोआ

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प्राचीन काल में, टूटी दीवारों वाला शहर खतरा और शर्म के साथ-साथ पराजित लोगों का चिन्ह होता था l इसी कारण यहूदियों ने यरूशलेम की दीवारों का पुनः निर्माण किया l कैसे? पास-पास रहकर कार्य करते हुए, जो नहेम्याह 3 में खूबसूरती से व्यक्त है l

पहली झलक में, अध्याय 3 पुनः निर्माण में किसने क्या किया का उबाऊ वर्णन महसूस हो सकता है l हालांकि, निकट अवलोकन स्पष्ट करता है कि लोग किस तरह एक दुसरे के निकट  रहकर कार्य किए l याजक लोग शासकों के निकट रहकर कार्य कर रहे थे l इत्र बनानेवालों के साथ-साथ सुनारों ने भी कार्य किया l निकट के शहरों के लोग भी सहायता करने आ गए l दूसरों ने अपने घरों के सामने मरम्मत की l जैसे, शल्लूम की बेटियों ने पुरुषों के साथ कार्य में सहयोग दिया (3:12), और तकोइयों की तरह, कुछ लोगों ने दो भागों की मरम्मत की (पद.5,27) l

इस अध्याय से दो  बातें स्पष्ट हो जाती हैं l पहली, एक सामूहिक कार्य के लिए सभी ने  साथ-साथ काम किया l दूसरी बात, दूसरों की तुलना में किसने कितना अधिक अथवा कम किया की जगह उस काम को पूर्ण करने के लिए सभी की सराहना की गयी है l

आज हम बिगड़े परिवार और टूटा समाज देखते हैं l किन्तु यीशु लोगों के जीवन को बदल कर  परमेश्वर के राज्य को बनाने आया था l हम लोगों को, यीशु में आशा और नया जीवन देकर अपने पड़ोस का पुनः निर्माण कर सकते हैं l हम सभी को कुछ करना ही है l इसलिए काम छोटा या बड़ा हो, हम साथ-साथ रहकर अपना उत्तरदायित्व पूरा करते रहें जिससे हम प्रेमी समाज की रचना कर पाएंगे जहाँ लोग यीशु से मिल सकेंगे l

हमारी आँखें खोल दीजिए

जब मैं पहली बार इस्तांबुल में अत्यधिक खुबसूरत चोरा चर्च देखने गयी, मैं चर्च के छत पर बनी यूनानी साम्राज्य के दिनों की भित्तिचित्रों और मोज़ाइक चित्रों को पहचाना जो बाइबल की कहानियाँ बता रहीं थीं l किन्तु मैं बहुत कुछ देखने से रह गयी l हलाकि, दूसरी बार, एक गाइड की सहायता से मैंने सभी विवरण जान लिए और तब अचानक पूरी बातें समझ में आ गयीं l जैसे, पहला गलियारा लूका रचित सुसमाचार में वर्णित यीशु का जीवन प्रदर्शित कर रहा था l

कभी-कभी बाइबल पढ़ते समय हम मौलिक कहानियों को समझते हैं, किन्तु उन कहानियों के बीच सम्बन्धों के विषय में भी समझना होगा जो बाइबल को एक कहानी में बांधती हैं? बिलकुल, हमारे पास बाइबल टिकाएं और अध्ययन करने के सहायक साधन हैं, किन्तु हमें एक गाइड चाहिए अर्थात् कोई जो हमारी आँखें खोल सके और हमें  परमेश्वर के लिखित प्रकाशन में अद्भुत बातें दिखा सके l पवित्र आत्मा हमारा गाइड है जो “सब बातें” समझाता है (यूहन्ना 14:26) l पौलुस कहता हैं कि वह “पवित्र आत्मा की सिखाई हुई बातों में आत्मिक बातें, आत्मिक बातों से मिला मिलकर सुनाते हैं” (1 कुरिं. 2:13) l  

बाइबल के लेखक द्वारा हमें उसमें की अद्भुत बातें बताना कितना अद्भुत है! परमेश्वर ने हमें केवल लिखित वचन और अपना प्रकाशन ही नहीं दिया है किन्तु वह उसे समझने और उससे सीखने में मदद करता है l  इसलिए हम भजनकार के साथ प्रार्थना करें, “मेरी आँखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूँ” (भजन 119:18) l

क्षितिज को निहारना

स्टीमर के चलते ही, मेरी बेटी की तबियत खराब होने लगी l वह पानी के जहाज में यात्रा के समय होने वाली पीड़ा(मतली) से प्रभावित होने लगी थी l मेरी तबियत भी खराब होने लगी थी l मैंने स्वयं को याद दिलाया, “क्षितिज की ओर टकटकी लगाए रहो l” नाविकों के अनुसार यह दृष्टिकोण की अनुभूति पुनः प्राप्त करने में सयायता करता है l

क्षितिज का रचयिता(अय्यूब 26:10) जानता है कि हम जीवन में कभी कभी भयभीत और बेचैन हो सकते हैं l हम दुरस्थ किन्तु अपने गंतव्य के स्थिर बिंदु की ओर टकटकी लगाकर पुनः दृष्टिकोण प्राप्त कर सकते हैं l

इब्रानियों का लेखक यह बात समझ चुका था l उसे अपने पाठकों में निराशा दिखाई दी l सताव ने अनेक को उनके घर से बेघर कर दिया था l इसलिए उसने उनको याद दिलाया कि दूसरे विश्वासी अत्यधिक पीड़ा सहते हुए बेघर हो गए थे l उन्होंने सब कुछ सह लिए क्योंकि वे कुछ बेहतर की आशा कर रहे थे l

निर्वासितों की तरह, ये पाठक भी उस नगर को, जिसका रचयिता परमेश्वर है, स्वर्गीय देश को, परमेश्वर जो नगर उनके लिए बनाया था, उसको  निहार सकते थे (इब्रानियों 11:10,14,16) l इस प्रकार अपने अंतिम संबोधन में, लेखक अपने पाठकों से परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं की ओर देखने को कहता है l “क्योंकि यहाँ हमारा कोई स्थायी नगर नहीं, वरन् हम एक आनेवाले नगर की खोज में हैं” (13:14) l

हमारे वर्तमान की समस्याएँ अस्थायी हैं l हम “पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं”(11:13), किन्तु परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं की क्षितिज को ताकने से हमें मापदण्ड मिल जाता है l

शांति का रहस्य

ग्रेस एक विशिष्ट महिला है। उसके बारे में सोचकर एक ही शब्द मन में आता है:शांति। जबसे मै उसे जानती हूँ, उसके मुख का शांत और स्थिर भाव शायद ही कभी बदला हो, तब भी नहीं जब दुर्लभ रोग के कारण उसके पति को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मैंने ग्रेस से उसकी शांति का रहस्य पूछा, तो उसने कहा, "यह कोई रहस्य नहीं है, यह एक व्यक्ति है। यह यीशु है जो मुझमें है। इस तूफान में भी जिस शांति का मैं अनुभव करती हूं उसे बताने का कोई और तरीका नही है"।

शांति का रहस्य यीशु मसीह के साथ संबंध में निहित है। वे हमारी शांति हैं। जब यीशु हमारे उद्धारकर्ता और परमेश्वर होते हैं,  और हम और अधिक उनके समान बनते हैं तो शांति एक वास्तविकता बन जाती है। बीमारी, आर्थिक कठिनाइयों या विपत्ति में भी शांति आश्वासन देती है कि हमारे प्राण परमेश्वर के हाथों में हैं (दानिय्येल 5:23) और हम भरोसा कर सकते हैं, कि अंत में सब बातें भलाई को उत्पन्न करेंगी।

क्या हमने उस शांति को अनुभव किया है जो तर्क और समझ से परे है? क्या हमें  निश्चय है कि परमेश्वर नियंत्रण में हैं?  पौलुस के शब्दों को आज मैं सबके लिए दोहराना चाहती हूं:”अब प्रभु जो शान्ति का...”(2 थिस्सलुनीकियों 3:16)।

मीठा और कड़वा

कुछ लोग कड़वा और कुछ मीठा चॉकलेट पसंद करते हैं। मध्य अमरिका के मायनों में इस का आनंद पेय के रूप में लिया जाता था और लोग इसमें मिर्च मिलाते थे। उन्हें यह “कड़वा पानी” पसंद था। वर्षों बाद यह स्पेन में प्रस्तुत हुआ, पर स्पेनियों को चॉकलेट मीठा पसंद था तो कड़वाहट कम करने के लिए उन्होंने इसमें चीनी और शहद मिलाई।

चॉकलेट के समान, दिन भी कड़वे या मीठे हो सकते हैं। ब्रदर लॉरेंस ने लिखा, “यदि हम जानते कि [परमेश्वर] हमें कितना प्रेम करते हैं, तो हम उनके हाथ से मीठा और कड़वा” समान रूप से लेने के लिए सदा तैयार रहते। मीठा और कड़वा समान रूप से स्वीकार करें? यह कठिन है! ब्रदर लॉरेंस किसकी बात कर रहे हैं? कुंजी परमेश्वर के चरित्र में मिलती है। भजनकार ने परमेश्वर से कहा, "तू भला है, और..." (भजन 119:68)।

चंगाई और औषधीय गुणों के लिए मायनों वासियों ने कड़वे चॉकलेट के महत्व को समझा। कड़वे दिनों का भी महत्व होता है। वह हमें हमारी कमजोरियों से अवगत कराते हैं और परमेश्वर पर निर्भर करने में हमारी सहायता करते हैं। भजनकार ने लिखा, “मुझे जो दुख हुआ...(पद 71)। परमेश्वर की भलाई का आश्वासन रखकर-आइये आज जीवन को, इसके भिन्न स्वाद समेत अपनाएं। हम कहें, "हे यहोवा, तू ने अपने वचन..."(पद 65)।

देखो और मौन रहो

"लुक ऐट हिम (उनकी ओर देखो)" गीत में, मैक्सिकन संगीतकार रूबेन सैटेलो ने क्रूस पे यीशु का वर्णन किया है। वह कहते हैं, यीशु को देखो और मौन रहो, क्योंकि क्रूस पे दिखाए यीशु के प्रेम के सामने वास्तव में कहने को कुछ नहीं है। सुसमाचार में वर्णित इस दृश्य की कल्पना हम विश्वास के द्वारा कर सकते हैं, क्रूस, लहू, कीलों, और पीड़ा की।

यीशु के अंतिम समय में “भीड़ जो यह देखने को इकट्ठी हुई..."(लूका 23:48-49)। तब सब मौन थे, केवल  एक सूबेदार बोला, "निश्चय यह मनुष्य धर्मी था। "(पद 47)।

उस महान प्रेम पर गीत और कविताएं लिखी गई हैं। वर्षों पूर्व, तबाही के बाद यरूशलेम की पीड़ा के बारे में यिर्मयाह ने लिखा था "क्या तुम्हें इस बात की कुछ भी चिन्ता नहीं?" (विलापगीत 1:12)। उन्हें लगा कि यरूशलेम की तुलना में कोई दुःख बड़ा नहीं था। यद्यपि, क्या यीशु की पीड़ा जैसी कोई पीड़ा हो सकती है?

हम सभी क्रूस के मार्ग से गुजर रहे हैं। क्या हम उनके प्रेम को देखेंगे? इस ईस्टर पर जब परमेश्वर के प्रति हमारे आभार को व्यक्त करने के लिए शब्द और गीत कम पड़ जाएँ हम कुछ समय लेकर यीशु की मृत्यु पर मनन करें और अपने मौन हृदय में उनपर अपनी गहरी भक्ति अर्पित करें।

विश्वासयोगी बने रहने का साहस

भय हडासा का निरंतर साथी है। हडासा,  फ़्रांसिन रिवर्स की पुस्तक,  अ वॉइस इन दी विंड की  नायिका है जो रोमी परिवार में दासी है और मसीह को मानने के कारण सताव से डरती है क्योंकि मसीहियों को तुच्छ समझा जाता, सूली पर चढ़ाया जाता या शेरों के अखाड़े में फेंक दिया जाता था। अपनी परीक्षा में सत्य का समाना करने का क्या उसमें साहस होगा?

उसकी स्वामिनी और रोमी अधिकारी के विरोध पर उसके दो विकल्प होते हैं: मसीह में अपने विश्वास त्याग दे या उसे अखाड़े में ले जाया जाए। पर जब वह यीशु के मसीह होने की घोषणा करती है, उसका डर दूर हो जाता है और मृत्यु सामने होने पर भी निडर हो जाती है।

बाइबिल बताती है कि कभी-कभी सही करने पर हम दुःख उठाएँगे-चाहे सुसमाचार को बांटना या ईश्वरीय जीवन जीना हो। हमें भयभीत ना होने (1 पतरस 3:14), वरन अपने मन में “मसीह को प्रभु जान कर पवित्र समझने” के लिए कहा गया है (15)। हडासा का मुख्य युद्ध उसके अपने मन में था। और अंततः जब उसने यीशु को चुना तो विश्वासयोगी बने रहने का उसे साहस मिल गया।

जब हम मसीह को आदर देंगे,  तब वह निडर होने विरोधों के बीच में भय पर विजय पाने में हमारी मदद करेंगे।

बर्फ़ के समान सफेद

पिछले दिसंबर माह में, मेरा परिवार और मैं पहाड़ों पर गए थे। पहली बार हम सभी ने इतनी शानदार बर्फ़ को देखा। सफेद लबादे से ढके खेतों को ध्यान से देखते हुए, मेरे पति ने यशायाह से उद्धृत किया, "तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों तौभी हिम की नाईं उजले हो जाएंगे" (यशायाह 1:18)।

हमारी तीन साल की बेटी ने पूछा, "क्या रंग लाल बुरा होता है?" वह जानती है कि पाप उन बातों को कहते हैं जिन्हें परमेश्वर पसंद नहीं करते हैं, परन्तु यह पद रंगों के बारे में बात नहीं है। यहाँ चमकदार लाल रंग का वर्णन है जो एक छोटे से कीड़े के अंडे से निकलता है। कपड़े को इस लाली में दो बार रंगा जाता हैa जिससे रंग पक्का हो जाए। न तो बारिश से और न ही धोकर इसे हटाया जा सके। पाप इसी के समान होता है। कोई मानव प्रयास इसे दूर नहीं कर सकता है। इसकी जड़ मन में होती है।

पाप को दिल से केवल परमेश्वर निकाल सकते हैं। जब हम वचन का अनुसरण करते हैं "मन फिराओ...कि तुम्हारे पाप मिट जाएं" (प्रेरितों के काम 3:19), परमेश्वर हमें क्षमा कर एक नया जीवन देते हैं। केवल यीशु के बलिदान के माध्यम से-एक निष्पाप दिल पाते हैं। क्या ही अद्भुत उपहार है!

जो याद रहती हैं

फुलचुसनी चिड़िया को अंग्रेजी में हमिंगबर्ड कहते हैं क्योंकि वह अपने पंख बहुत तीव्रता से फड़फड़ाती है l पुर्तगाली भाषा में इसे फुलचुसनी अथवा स्पेनी में “उड़ती मणि” कहते हैं l इस चिड़िया को मैं ब्युलू  पुकारता हूँ, अर्थात् “जो सदा याद रहे l

जी. के. चेस्टरन लिखते हैं, “इस संसार में कभी भी अजूबों की कमी नहीं होगी, किन्तु अजीब बातों की इच्छा बनी रहेगी l” फुलचुसनी उनमें से एक अजूबा है l इन छोटे प्राणियों में कौन सी बातें रोमांचित करनेवाली हैं? शायद उनका छोटा आकार(औसत दो से तीन इंच) अथवा उनके पंख जो एक सेकंड में 50 से 200 बार फड़फड़ाते हैं l

हम नहीं जानते कि भजन 104 किसने लिखा, किन्तु अवश्य ही वह प्रकृति की सुन्दरता से मोहित था l सृष्टि की अनेक अबिबो-गरीब बातें जैसे लबानोन के देवदार और जंगली गदहों का वर्णन करने के बाद, वह गीत गाता है, “यहोवा अपने काम से आनंदित होवे”(पद.31) l उसके बाद वह प्रार्थना करता है, “मेरा ध्यान करना उसको प्रिय लगे” (पद.34) l

प्रकृति में अनेक बातें याद रहने लायक हैं क्योंकि वे सुन्दर और सम्पूर्ण हैं l हम उन पर ध्यान करके किस तरह परमेश्वर को खुश कर सकते हैं? जब हम उसके कार्य पर विचार करते हैं और चकित करनेवाली बातों का पुनः अनुभव करते हैं, हम उन पर ध्यान दे सकते हैं, आनंदित हो सकते हैं और परमेश्वर को धन्यवाद दे सकते हैं l