अ-पो-ला-पी अक्खा, चीन में यून्नन प्रान्त के पहाड़ी श्रृंखला पर रहनेवाली एक पहाड़ी जनजाति का वृद्ध सदस्य है l हाल ही के एक मिशन दौरे पर मुलाकात के समय, अ-पो-ला-पी ने कहा कि वह भारी वर्षा के कारण साप्ताहिक बाइबिल अध्ययन में नहीं जा सका था l इसलिए उसने निवेदन किया, “क्या आप हमसे परमेश्वर का वचन बाँट सकते हैं?”
अ-पो-ला-पी पढ़ नहीं सकता, इसलिए उसके लिए साप्ताहिक सहभागिता ज़रूरी है l हमारे बाइबिल पढ़ते समय, उसने ध्यान से सुना l उसका इमानदार आचरण मुझे ताकीद दी कि जब हम प्रेरित वचन की कहानियों को ध्यान से सुनते हैं, हम प्रभु का आदर करते हैं l
व्यवस्थाविवरण 4 में, मूसा ने इस्राएलियों से नियम एवं विनियमों पर ध्यान देने को कहा जो वह उन्हें सिखा रहा था (पर.1) l उसने उनको ताकीद दी कि शिक्षा के पीछे श्रोत एवं प्रेरणा केवल परमेश्वर ही था, जिसने उनसे “आग के बीच में से …. बातें की l” मूसा ने कहा, “उसने तुम को अपनी वाचा के दसों वचन बताकर उनके मानने की आज्ञा दी” (पद.12) l
काश अ-पो-ला-पी की परमेश्वर का वचन सुनने की भूख हममें समान इच्छा उत्त्पन्न करे l जिस तरह पौलुस 2 तिमू.3:15-16 में याद दिलाता है, प्रेरित वचन हमारी भलाई एवं उन्नत्ति के लिए दिया गया है – उद्धार के लिए और परमेश्वर के मार्ग में बुद्धिमान बनाने हेतु l
