मैं बहुत छोटा था जब मैं एक हॉस्पिटल के शिशु सदन की खिड़की से झांककर पहली बार एक नवजात शिशु को देखा l अपनी अज्ञानता में, मैं उस नन्हे, झुर्रीदार,बिना बाल के, शंख के आकार के सिर वाले उस छोटे बच्चे को देखकर निराश हो गया था l हालाँकि, हमारे पास खड़ी बच्चे की माँ, सभी से पूछना बंद न कर सकी, “वह कितना खुबसूरत है न?” मुझे वह पल याद आ गया जब मैंने एक युवा पिता का वीडियो देखा जो अपनी बच्ची के लिए “यू आर सो ब्यूटीफुल” गाना गा रहा था। l अपने मंत्रमुग्ध डैडी के लिए—वह नन्ही बच्ची अब तक की रची गई सबसे खुबसूरत चीज़ थी l
क्या परमेश्वर भी हमें इसी तरह देखता है? इफिसियों 2:10 कहता है कि हम उसके “हम उसके बनाए हुए हैं; ”—उसकी श्रेष्ठ रचना l हम अपनी कमियों को जानते हैं , हमारे लिए यह स्वीकार करना कठिन हो सकता है कि वह हमसे कितना प्रेम करता है या यह विश्वास करना कि हम भी कभी उसके लिए मूल्यवान हो सकते हैं l परन्तु परमेश्वर हमसे इसलिए प्रेम नहीं करता क्योंकि हम उसके प्रेम के योग्य हैं (पद.3-4); वह हम से इसलिए प्रेम करता है क्योंकि वह स्वयं प्रेम है (1 यूहन्ना 4:8) l उसका प्रेम अनुग्रह का कारण है, और उसने इसकी गहराई को तब दिखाया जब, यीशु के बलिदान के द्वारा, उसने हमें उसमें जीवित किया जब हम अपने पापों में मरे हुए थे (इफिसियों 2:5,8) l
परमेश्वर का प्रेम अस्थिर नहीं है l यह स्थायी है l वह दोष युक्त को, टूटे हुओं को, जो निर्बल हैं और वह जो भारी भूल कर देते हैं उनसे भी प्रेम करता है l जब हम गिरते हैं, वह हमें उठाने के लिए वहां उपस्थित है l हम उसकी बहुमूल्य वस्तु हैं, और हम उसके लिए अति सुन्दर हैं l
यह जानने का क्या मतलब है कि “परमेश्वर प्रेम है”? आप परमेश्वर के आपके प्रति अनंत प्रेम की सच्चाई को कैसे स्वीकार कर सकते हैं जब आप इसके लायक नहीं हैं?
प्रिय पिता, मेरे प्रति आपके प्रेम के लिए धन्यवाद।