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Articles by सिंडी हेस कैस्पर

मसीह के चरित्र को दर्शाना

मेज पर दो चेहरे उभरे हुए थे—एक तेज़ क्रोध से बिगड़ा था, दूसरा भावनात्मक दर्द से विकृत था l पुराने मित्रों के पुनःमिलन में अभी-अभी चीख-पुकार मच गयी थी, जिसमें एक महिला दूसरी महिला को उसके विश्वासों के लिए डांट रही थी l विवाद तब तक जारी रहा जब तक कि पहली महिला रेस्टोरेंट से बाहर नहीं चली गयी, जिससे दूसरी हिल गयी और अपमानित हुयी l

क्या हम सचमुच ऐसे समय में रह रहे हैं जब विचारों में मतभेद बर्दाश् नहीं किया जा सकता? सिर्फ इसलिए कि दो लोग सहमत नहीं हो सकते इसका मतलब यह नहीं है कि उनमें से कोई भी बुरा है l जो वाणी कठोर या अडिग होती है वह कभी भी प्रेरक नहीं होती है, और मजबूत विचारों को शालीनता या करुणा पर हावी नहीं होना चाहिए l

रोमियों 12 “परस्पर आदर [कैसे करें]” और अन्य लोगों के साथ “एक सा मन [कैसे रखें] के लिए एक मार्गदर्शक है (पद.10,16) l यीशु ने संकेत दिया कि उस पर विश्वास करने वालों की पहचान करने वाली विशेषता एक दूसरे के प्रति हमारा प्रेम है (यूहन्ना 13:35) l जबकि अभिमान और क्रोध हमें आसानी से पटरी से उतार सकते हैं, वे उस प्रेम के बिल्कुल विपरीत हैं जो परमेश्वर चाहता है कि हम दूसरों को दिखाएँ l

जब हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो देते हैं तो दूसरों को दोष न देना एक चुनौती है, लेकिन ये शब्द “जहां तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो” हमें दिखाते हैं कि ऐसा जीवन जीने की जिम्मेदारी जो मसीह के चरित्र को प्रतिबिंबित करती है, किसी और तक स्थानांतरित नहीं हो सकती है (रोमियों 12:18) l यह हममें से हर एक के साथ निहित है जो उसका नाम धारण करता है l सिन्डी हैस कैस्पर

 

यीशु की आशा करना

मेरा मित्र पॉल अपने रेफ्रीजरेटर के मरम्मत के लिए तकनीशियन के आने का इंतजार कर रहा था जब उसने अपने फोन पर उपकरण कम्पनी से एक सन्देश देखा l इसमें लिखा था: “जीसस अपने रास्ते पर हैं और लगभग 11.35 बजे उनके पहुँचने की उम्मीद है l” पॉल को जल्द ही पता चला कि तकनीशियन का नाम वास्तव में जीसस था l

लेकिन हम परमेश्वर के पुत्र यीशु के आने की उम्मीद कब कर सकते हैं? जब वह दो हज़ार वर्ष पहले एक मनुष्य के रूप में आया और हमारे पापों का दण्ड भुगता, तो उसने कहा कि वह वापस आएगा—लेकिन केवल पिता ही उसकी वापसी का सटीक “दिन या घड़ी” जानता था (मत्ती 24:36) l यदि हमें पता चल जाए कि हमारा उद्धारकर्ता पृथ्वी पर वापस आ रहा है तो इससे हमारी दिन-प्रतिदिन की प्राथमिकताओं में क्या अंतर आ सकता है? (यूहन्ना 14:1-3)

यीशु हमें उसकी वापसी के लिए तैयार रहने के लिए आगाह किया: “जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा l उसने हमें याद दिलाया कि “जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा” (पद.42) l

यीशु मसीह की वापसी के दिन, हमें सचेत करने के लिए हमारे फोन पर कोई अलर्ट नहीं मिलेगा l तो, हमारे भीतर काम करने वाली आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा, आइये प्रत्येक दिन को अनंत काल के सन्दर्भ में जीएं, परमेश्वर की सेवा करें और उसके प्यार और आशा के सन्देश को दूसरों के साथ साझा करने के अवसर का हम लाभ उठाएं l सिन्डी हैस कैस्पर

 

पैरों का धोना . . . और बर्तन

चार्ली और जेन की शादी की पचासवीं सालगिरह पर, उन्होंने अपने बेटे जोन के साथ एक कैफे में नाश्ता किया। उस दिन, रेस्तरां में बहुत कम कर्मचारी थे, केवल एक प्रबंधक, रसोइया और एक किशोर लड़की थी जो परिचारिका, महिला वेटर और वेटर के सहायक के रूप में काम कर रही थी। जैसे ही उन्होंने अपना नाश्ता ख़त्म किया, चार्ली ने अपनी पत्नी और बेटे से कहा, "क्या अगले कुछ घंटों में आपके लिए कोई महत्वपूर्ण काम है?" उनके पास कुछ भी नहीं था l

इसलिए, मैनेजर की अनुमति से, चार्ली और जेन ने रेस्तरां के पीछे बर्तन धोना शुरू कर दिया, जबकि जोन ने अव्यवस्थित टेबलों को साफ करना शुरू कर दिया। जोन के अनुसार, उस दिन जो हुआ वह वास्तव में उतना असामान्य नहीं था। उनके माता-पिता ने हमेशा यीशु का उदाहरण पेश किया था जो "सेवा कराने नहीं, बल्कि सेवा करने आए था" (मरकुस 10:45)।

यूहन्ना 13 में, हम मसीह द्वारा अपने शिष्यों के साथ साझा किये गये अंतिम भोजन के बारे में पढ़ते हैं। उस रात, गुरु ने उनके गंदे पैर धोकर उन्हें विनम्र सेवा का सिद्धांत सिखाया (पद.14-15)। यदि वह एक दर्जन पुरुषों के पैर धोने का नीचा काम करने को तैयार था, तो उन्हें भी खुशी-खुशी दूसरों की सेवा करनी चाहिए।

हमारे सामने आने वाली सेवा का प्रत्येक मार्ग अलग-अलग दिख सकता है, लेकिन एक बात समान है : सेवा करने में बहुत आनंद है। सेवा के कार्यों के पीछे का उद्देश्य उनको करनेवालों की प्रशंसा करना नहीं है, बल्कि सारी स्तुति हमारे विनम्र, आत्म-त्यागी परमेश्वर की ओर निर्देशित करते हुए प्रेमपूर्वक दूसरों की सेवा करना है । सिंडी हेस कैस्पर

अंधकार और परमेश्‍वर की ज्योति

 

जब एलेन को कैंसर की गंभीर बीमारी का पता चला, तो वह और उसके पति चक जानते थे कि अब उसे यीशु के पास जाने में देर नहीं लगेगी। दोनों ने भजन संहिता 23 के वादे को संजोया कि जब वे अपने चौवन वर्षों के साथ की सबसे गहरी और सबसे कठिन घाटी से यात्रा करेंगे , तो परमेश्वर उनके साथ होंगे। उन्हें इस बात की उम्मीद थी कि एलेन यीशु से मिलने के लिए तैयार थी, उसने दशकों पहले ही उस पर अपना विश्वास रख लिया था।

अपनी पत्नी की स्मृति- आराधना सभा में, चक ने बताया कि वह अभी भी मृत्यु की “ घोर अन्धकार से भरी हुई तराई" से गुज़र रहा था (भजन संहिता 23:4 )। उसकी पत्नी का स्वर्ग में जीवन पहले ही शुरू हो चुका था। लेकिन " घोर अन्धकार से भरी हुई तराई " अभी भी उसके साथ  और उन लोगों के साथ थी जो एलेन से बहुत प्यार करते थे।   

जब हम “घोर अंधकार से भरी हुई तराई में” यात्रा करते हैं, तो हम अपने प्रकाश के स्रोत को कहाँ ढूँढ़ सकते हैं? प्रेरित यूहन्ना ने घोषणा किया की कि “परमेश्‍वर ज्योति है और उसमें कुछ भी अंधकार नहीं” (1 यूहन्ना 1:5)। और यूहन्ना 8:12 में, यीशु ने घोषणा की : “जगत की ज्योति मैं हूँ; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अंधकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।”

यीशु में विश्वासियों के रूप में, हम (उसकी) उपस्थिति की ज्योति में चलते हैं" (भजन संहिता 89:15)। हमारे परमेश्वर ने हमारे साथ रहने और हमारे प्रकाश का स्रोत बनने का वादा किया है, भले ही हम घोर अंधकार में से होकर गुज़रें। 

—सिंडी हेस कैस्पर

 

हिम्मत मत हारो

मुझे ऐसा समय याद नहीं है जब मेरी माँ डोरोथी अच्छी सेहत में थीं। कई वर्षों तक एक गंभीर मधुमेह रोग के कारण उनका  ब्लड शुगर अत्यधिक अनियमित था। परेशानियां बढ़ गई और उनकी क्षतिग्रस्त किडनी के लिए स्थायी डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी।   न्यूरोपैथी और टूटी हड्डियों के परिणामस्वरूप व्हीलचेयर का उपयोग करना पड़ा। और धीरे धीरे उनकी आंखों की रौशनी इतनी कम हो गई कि अन्धापन होने लगा। 
लेकिन जैसे-जैसे उनके शरीर ने काम करना बंद कर दिया, माँ का प्रार्थना जीवन और अधिक सशक्त हो गया। वह दूसरों के लिए परमेश्वर के प्रेम को जानने और अनुभव करने के लिए प्रार्थना करने में घंटों बिताती थी। पवित्रशास्त्र  के अनमोल वचन उन्हें और भी मधुर लगने लगे। इससे पहले कि उनकी आँखों की रोशनी कम हो जाए, उन्होंने अपनी बहन मार्जोरी को एक पत्र लिखा जिसमें 2 कुरिन्थियों 4 के शब्द शामिल थे: “इसलिए हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्व नष्ट होता जाता है तो भी हमारा भीतरी मनुष्यत्व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है” (पद 16)। 
प्रेरित पौलुस जानते थे कि "हिम्मत हारना" कितना आसान है। 2 कुरिन्थियों 11 में, वह अपने जीवन में खतरे, दर्द और अभाव के कष्ट  का वर्णन करते है - (पद- 23-29)। फिर भी उन्होंने उन "परेशानियों" को अस्थायी माना और जो हम देख सकते हैं सिर्फ उसके बारे में सोचने के लिए ही नहीं बल्कि जो हम नहीं देख सकते उसके बारे में भी सोचने के लिए हमें प्रोत्साहित किया - जो अनन्त है (4:17-18)।  
हमारे साथ जो कुछ भी हो रहा है उसके बावजूद, हमारे प्यारे पिता हर दिन हमारे आंतरिक नवीनीकरण को जारी रख रहे हैं। हमारे बीच उनकी मौजूदगी निश्चित है.' प्रार्थना के उपहार के माध्यम से, वह केवल एक सांस की दूरी पर है। और हमें मजबूत करने और हमें आशा और खुशी देने के उनके वादे सच्चे हैं।  
-सिंडी हैस कास्पर 

प्रतिज्ञा पूरी हुई

बचपन में मैं हर गर्मियों में अपने दादा-दादी के साथ एक हफ़्ते का मज़ा लेने के लिए दो सौ मील की यात्रा करता था। मुझे बाद में पता चला कि मैंने उन दो लोगों से कितनी ज्ञान की बातें सीखीं, जिन्हें मैं प्यार करता था। उनके जीवन के अनुभवों और परमेश्वर के साथ चलने से उन्हें ऐसे नज़रिए मिले, जिनकी कल्पना मेरा छोटा दिमाग अभी तक नहीं कर सकता था। परमेश्वर की वफ़ादारी के बारे में उनसे बातचीत ने मुझे आश्वस्त किया कि परमेश्वर भरोसेमंद है और वह अपना हर वादा पूरा करता है।   
जब एक स्वर्गदूत यीशु की माता, मरियम से मिलने आया तो उस समय पर वह एक किशोरी थी। जिब्राईल के द्वारा लाया गया वह अविश्वसनीय समाचार अभिभूत करने वाला रहा होगा, फिर भी उसने अनुग्रह के साथ उस कार्य को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया (लूका 1:38)। लेकिन शायद उनकी बुजुर्ग रिश्तेदार इलीशिबा से मुलाकात - जो एक चमत्कारी गर्भावस्था के बीच में थी (कुछ विद्वानों का मानना ​​है कि वह साठ साल की रही होगी) - उन्हें आराम मिला क्योंकि इलीशिबा ने जिब्राईल के शब्दों की उत्साहपूर्वक पुष्टि की कि वह प्रतिज्ञा किए गए बच्चे मसीहा की मां थीं। (पद 39-45)। 
जैसे-जैसे हम मसीह में बढ़ते और परिपक्व होते जाते हैं, जैसे मेरे दादा-दादी करते थे, वैसे-वैसे हम सीखते जाते हैं कि वह अपनी प्रतिज्ञाओं को पूरा करता है। उसने इलीशिबा और उसके पति जकर्याह के लिए एक संतान की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया (पद 57-58)। और वह पुत्र, अर्थात् यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, उस प्रतिज्ञा का अग्रदूत (संदेशवाहक) बना जो सैकड़ों वर्ष पहले की गई थी, अर्थात् वह प्रतिज्ञा जो मनुष्यजाति के भविष्य की दिशा को बदल देगी। प्रतिज्ञा किया हुआ मसीहा, अर्थात् संसार का उद्धारकर्ता, आ रहा है! (मत्ती 1:21–23) 
—सिंडी हैस कास्पर 

मौन के लिए जगह

यदि आप अमेरिका में, एक शांतिपूर्ण और सुनसान जगह ढूँढ रहें हैं, मिनियापोलिस, मिन्नेसोटा में एक कमरा है, जिसे आप पसंद करोगे। यह समस्त ध्वनि का 99.99 प्रतिशत सोख लेता है! ऑरफ़ील्ड प्रयोगशालाओं के विश्व प्रसिद्ध प्रतिध्वनि-मुक्त कक्ष को "पृथ्वी पर सबसे शांत स्थान" कहा गया है। जो लोग इस ध्वनि रहित स्थान का अनुभव करना चाहते हैं उन्हें शोर की कमी से विचलित होने से बचने के लिए बैठना आवश्यक है, और कोई भी कभी भी कमरे में पैंतालीस मिनट से अधिक नहीं बिता पाया है।    
हममें से बहुत कम लोगों को इतनी शांति की जरूरत होती है। फिर भी हम कभी-कभी शोर-शराबे और व्यस्त दुनिया में थोड़ी शांति की चाहत रखते हैं। यहां तक कि जो समाचार हम देखते हैं और जिस सोशल मीडिया का हम उपयोग करते हैं, वह एक प्रकार का कोलाहलपूर्ण "शोर" लाता है जो हमारा ध्यान आकर्षित करते है। इसका अधिकांश हिस्सा ऐसे शब्दों और तस्वीरों से भरा हुआ है जो नकारात्मक भावनाओं को उत्तेजित करता हैं। इसमें स्वयं को डुबाने से परमेश्वर की आवाज आसानी से दब सकती है। 
जब भविष्यवक्ता एलिय्याह होरेब पर्वत पर परमेश्वर से मिलने गया, तो उसने उसे बड़ी प्रचणड आन्धी, भूकंप या आग में नहीं पाया (1 राजा 19:11-12)। उसने तब पाया जब एलिय्याह ने "एक दबा हुआ धीमा शब्द "सुना, यह सुनते ही एलिरयाह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जाकर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ "सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर" से मिलने के लिए (पद 12-14)। 
हो सकता है कि आपकी आत्मा शांति के लिए तरस रही हो, लेकिन इससे भी अधिक - वह परमेश्वर की आवाज़ सुनने के लिए तरस रही हो। अपने जीवन में मौन के लिए जगह खोजें ताकि आप कभी भी परमेश्वर की "धीमी आवाज़" को सुनने से न चूकें (पद 12)। 
 

सब कुछ यीशु के लिए

जब जेफ चौदह साल का था, तो उसकी माँ उसे एक प्रसिद्ध गायक से मिलने ले गई। अपने दौर के कई संगीतकारों की तरह, बी. जे. थॉमस भी संगीत यात्राओं के दौरान एक आत्म-विनाशकारी जीवनशैली में फंस गए थे। लेकिन यह तब की बात है जब उनका और उनकी पत्नी का यीशु से परिचय नहीं हुआ था। जब वे मसीह में विश्वासी बन गए, तो उनके जीवन में आवश्यक रूप से परिवर्तन आ गया।  
संगीत समारोह की रात, गायक ने उत्साही भीड़ का मनोरंजन करना शुरू कर दिया। लेकिन अपने कुछ प्रसिद्ध गीतों का प्रदर्शन करने के बाद, दर्शकों में से एक व्यक्ति चिल्लाया, "अरे, यीशु के लिए एक गाना गाओ!" बिना किसी हिचकिचाहट के, बी. जे. ने जवाब दिया, "मैंने अभी-अभी यीशु के लिए चार गाने गाए हैं 
तब से कुछ दशक हो गए हैं, लेकिन जेफ को अभी भी वह पल याद है जब उन्हें एहसास हुआ कि हम जो कुछ भी करते हैं वह यीशु के लिए होना चाहिए - यहां तक ​​कि ऐसी चीजें जिन्हें कुछ लोग "गैर-धार्मिक" मान सकते हैं। 
हम जीवन में जो काम करते हैं, कभी-कभी उन्हें बाँटने के लालच में फंस जाते हैं।  हम बाइबल पढ़ते हैं। विश्वास में आने की अपनी कहानी साझा करते हैं। भजन गाते हैं। पवित्र काम करते हैं। लॉन की घास काटते हैं। दौड़ने जाते हैं। कोई देशी गाना गाते हैं। धर्मनिरपेक्ष काम करते हैं। कुलुस्सियों 3:16 हमें याद दिलाता है कि मसीह का संदेश हमारे भीतर रहता है जैसे कि शिक्षण, गायन और आभारी होना, लेकिन पद 17 इससे भी आगे जाता है। यह इस बात पर जोर देता है कि परमेश्वर के बच्चों के रूप में, " वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, ।" हम यह सब उसके लिए करते हैं। 
हम यह सब उसके लिए करते हैं। 
 

करना या नहीं करना

जब मैं छोटी लड़की थी, मेरे घर के पास एक पार्क में द्वितीय विश्व युद्ध का एक सेवामुक्त टैंक प्रदर्शित किया गया था l कई संकेतों ने वाहन पर चढ़ने के खतरे की चेतावनी दी, लेकिन मेरे कुछ मित्र तुरंत उस पर चढ़ गए l हममें से कुछ लोग हिचकिचाए, लेकिन आखिरकार हमने भी वही किया l एक लड़के ने वहां लगाये गए संकेतों(निर्देशों) की ओर इशारा करते हुए, मना कर दिया l एक वयस्क के निकट आते ही एक जल्दी से नीचे कूद गया l मौज-मस्ती करने के प्रलोभन ने नियमों का पालन करने की हमारी इच्छा को मात दे दी l 

हम सभी के भीतर बचकाना विद्रोह का हृदय छिपा है l हम नहीं चाहते कि कोई हमें बताए कि क्या हमें करना है या क्या नहीं करना है l फिर भी हम याकूब में पढ़ते हैं कि जब हम जानते हैं कि क्या सही है और हम उसे नहीं करते—तो वह पाप है (4:17) रोमियों में, प्रेरित पौलुस ने लिखा : “जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूँ, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता, वही किया करता हूँ l अतः यदि मैं वही करता हूँ जिस की इच्छा नहीं करता तो उसका करनेवाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझे में बसा हुआ है” (7:19-20) 

यीशु में विश्वासियों के रूप में, हम पाप के साथ अपने संघर्ष से व्याकुल हो सकते हैं l लेकिन अक्सर हम सही काम करने के लिए पूरी तरह से अपनी ताकत पर निर्भर होते हैं l एक दिन, जब यह जीवन समाप्त हो जाएगा,हम वास्तव में पापी आवेगों के असर के प्रति मृत हो जाएंगेl फिर भी तब तक के लिए, हम उसकी शक्ति पर भरोसा कर सकते हैं जिसकी मृत्यु और पुनरुत्थान ने पाप पर विजय प्राप्त की है l