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Articles by सिंडी हेस कैस्पर

एक सिद्ध पिता

मेरे पिता ने एक बार मेरे सामने स्वीकार किया, “जब तुम उम्र में बढ़ रहे थे, मैं बहुत बार घर पर नहीं होता था l”

मुझे यह याद नहीं l अपनी पूर्ण-कालिक सेवा के अलावा, वे चर्च संगीत मण्डली की अगुवाई करने, और कभी-कभी पुरुषों के चार लोगों के गायन समूह के साथ एक-दो सप्ताह के लिए बाहर जाते थे l किन्तु वे मेरे समस्त ख़ास पलों में (और अनेक छोटे पलों में) उपस्थित रहते थे l

जैसे, आठ वर्ष की आयु में, मुझे एक दोपहर स्कूल में एक छोटी भूमिका निभानी थी l सभी माताएँ आयीं, किन्तु केवल मेरे पिता l अनेक छोटे तरीकों से, उन्होंने हम बच्चों को जताया कि हम उनके लिए विशेष हैं और वे हमसे प्यार करते हैं l और उन्होंने माँ के अंतिम दिनों में कोमलता से उनकी सेवा करके स्वार्थहीन प्रेम प्रगट किया l पिता सिद्ध नहीं हैं, किन्तु उन्होंने मुझे हमेशा मेरे स्वर्गिक पिता की अच्छी झलक प्रस्तुत की है l और आदर्श रूप से, एक मसीही पिता को ऐसा ही करना चाहिए l

कभी-कभी सांसारिक पिता अपने बच्चों को निराश करते अथवा पीड़ित करते हैं l किन्तु हमारा स्वर्गिक पिता “दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है” (भजन 103:8) l प्रेम करनेवाले पिता अपने बच्चों को ताड़ना, सुख, निर्देश देकर, और प्रावधान करके, हमारे सिद्ध स्वर्गिक पिता का नमूना प्रस्तुत करते हैं l

हृदय की हालत

मैंने ध्यान दिया है कि मेरे पति आँखें बंद करके चर्च स्तुति समूह के साथ माउथ ऑर्गन पर गाना बजाते हैं l उनके अनुसार वे इससे केन्द्रित होकर बिना विकर्षण के सर्वोत्तम तरीके से बजा पाते हैं अर्थात् उनका माउथ ऑर्गन, संगीत, और सभी परमेश्वर की प्रशंसा करते हैं l

कुछ लोग सोचते हैं कि प्रार्थना में हमारी आँखें बंद होनी चाहिए l प्रार्थना कभी भी और कहीं भी करते समय, विशेषकर, चलते हुए, घास-फूस साफ़ करते और गाड़ी चलाते समय ऑंखें बंद रखना कठिन है!

परमेश्वर से बातें करते समय हमारे शरीर के ढंग के विषय कोई नियम नहीं है l सुलेमान ने अपने द्वारा निर्मित मंदिर के समर्पण के समय, घुटने टेककर “स्वर्ग की ओर हाथ [फैलाकर]” प्रार्थना किया (2 इतिहास 6:13-14) l घुटने टेकना (इफि. 3:14), खड़े होना (लूका 18:10-13), और मुँह के बल (मत्ती 26:39), प्रार्थना के सभी ढंग बाइबिल में हैं l

परमेश्वर के समक्ष घुटने टेकना अथवा खड़े होना, अपने हाथों को स्वर्ग की ओर उठाना अथवा परमेश्वर पर केन्द्रित होने के लिए अपनी आँखें बंद करना, अर्थात हमारे शरीर का ढंग नहीं, किन्तु हृदय की दशा विशेष है l हमारे हरेक कार्य “का मूल श्रोत वही है” (नीति. 4:23) l प्रार्थना करते समय, हमारे हृदय हमारे प्रेमी परमेश्वर के समक्ष इबादत, कृतज्ञता, और दीनता में झुक जाएँ, क्योंकि उसकी ऑंखें और उसके कान उसके लोगों की प्रार्थना की ओर लगी रहती हैं (2 इतिहास 6:40) l

जब सुबह होती है

जब हम म्युनिक के बाहर ग्रामीण विश्रामगृह में रात बिताने पहुंचे तो काफी रात हो चुकी थी l हम अपना बाल्कनी वाला आरामदायक कमरा पाकर खुश थे, यद्यपि एक कष्टकर कुहरे से अँधेरे में देखना असंभव था l किन्तु कुछ घंटे बाद सूर्योदय होने पर, धुंध फटने लगा l तब जो रात के समय बहुत छुपा हुआ था अब हम देख सकते थे-एक सम्पूर्ण रमणीय दृश्य-शांत और हरा-भरा चारागाह, घास चरती भेड़ें जिनके गलों में बजती छोटी घंटियाँ, और आकाश में सफ़ेद बादल जो और बड़ी, रोयेंदार भेड़ों की तरह दिखाई देती थीं!

कभी-कभी जीवन निराशा के भारी कुहरे से ढक जाता है l हमारी स्थिति अत्यधिक अंधकारमय दिखाई देने के कारण आशा जाती रहती है l किन्तु जैसे सूरज से कुहरा फट जाता है, परमेश्वर में हमारा विश्वास सन्देह का शंका हटा देता है l इब्रानियों 11 में विश्वास की परिभाषा “आशा की हुयी वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है” (पद.1) l परिच्छेद आगे हमें नूह का विश्वास याद दिलाता है, जो “दिखाई न देनेवाली बातों के विषय चेतावनी पाया,” फिर भी परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहा (पद.7) l और अब्राहम जो परमेश्वर के मार्गदर्शन में चला-यद्यपि वह अपना गंतव्य नहीं जानता था (पद.8) l

यद्यपि हमनें उसे नहीं देखा है और हर समय उसकी उपस्थिति का आभास नहीं करते हैं, परमेश्वर हमेशा उपस्थित रहता है और हमारे अंधकारमय रातों में भी लिए चलेगा l  

गलतियाँ हुईं

“गलतियाँ हुईं,” मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपनी कंपनी के गैरकानूनी कार्य में लिप्त होने पर चर्चा करते हुए कही l वह खिन्न था, फिर भी दोष को दूर ही रखा और अपनी गलती को उजागर नहीं किया l

कुछ “गलतियाँ” केवल गलतियाँ हैं : सड़क के गलत दिशा में गाड़ी चलाना, टाइमर सेट नहीं करना और भोजन जला देना, अपने चेकबुक देय राशि में गलत हिसाब लगाना l किन्तु वे सुविचारित कार्य जो सीमा से परे हैं-परमेश्वर उनको पाप  कहता है l परमेश्वर को आदम और हव्वा से उनकी आज्ञाकारिता के विषय प्रश्न करने पर, उन्होंने दूसरे को दोषी ठहराया (उत्प. 3:8-13) l हारून ने लोगों द्वारा निर्जन स्थान में सोने का बछड़ा बनाकर उसकी उपासना करने की जिम्मेदारी नहीं ली l वह मूसा से बोला, “जब [लोगों ने] मुझ को [सोना] दिया, मैं ने उन्हें आग में डाल दिया, तब यह बछड़ा निकल पड़ा” (निर्ग. 32:24) l

वह भी बुदबुदाया होगा, “गलतियाँ हुईं l”

कभी-कभी अपनी गलती मानने से सरल दूसरों पर दोष लगाना होता है l उसी के समान पाप को “केवल गलतियाँ” संबोधित करके उसका सही स्वभाव न स्वीकारना खतरनाक है l

किन्तु जिम्मेदारी लेने पर-पाप मानकर उसका अंगीकार करने पर-वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l हमारा परमेश्वर अपने बच्चों को क्षमा और आरोग्यता देता है l

प्रेम में बंद

जून 2015 में, पेरिस ने पोंट डेस आर्ट्स पैदल पुल से पैंतालिस टन ताले हटाए l  जोड़े प्रेम प्रसंग भाव के प्रदर्शन के तौर पर, तालों पर अपने नाम के प्रथमाक्षर उकेरकर पुल के जंगलों में लगाकर चाभी शेन नदी में फेंक देते हैं l

हजारों बार यह विधि दोहराई गई, पुल अधिक “प्रेम” का बोझ सहने को तैयार न था l आख़िरकार शहर अधिकारीयों ने, पुल की ताकत पर शंका करके, “प्रेम तालों” को हटा दिया l

तालों का अर्थ अनंत प्रेम प्रकट करना था, किन्तु मानवीय प्रेम स्थायी नहीं है l परम मित्र परस्पर धोखा देकर कभी मतभेद नहीं सुलझाते हैं l परिजन बहस करते  और क्षमा नहीं करते l पति-पत्नी एक दूसरे से अलग हो जाते हैं और भूल जाते हैं कि उन्होंने विवाह क्यों किया था l मानवीय प्रेम चंचल होता है l

एक प्रेम स्थिर और स्थायी है-परमेश्वर का प्रेम l “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!” भजन 106:1 की घोषणा है l परमेश्वर के प्रेम का विजयी और अनंत स्वभाव सम्पूर्ण बाइबिल में है l और इसका महानतम प्रमाण उसके पुत्र की मृत्यु है कि उसपर विश्वास करनेवालों को अनंत जीवन मिलेगा l और परमेश्वर के प्रेम से हमें कोई अलग नहीं कर सकता (रोमि. 8:38-39) l

सहविश्वसियों, हम परमेश्वर के प्रेम में हमेशा के लिए बंद  हैं l

प्रसिद्धि और विनम्रता

हममें से कितने प्रसिद्धि से आसक्त हैं-या तो खुद की प्रसिद्धि से अथवा प्रसिद्ध लोगों के जीवनों के विषय प्रत्येक जानकारी रखकर l अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक या फ़िल्मी दौरे l देर-रात्रि कार्यक्रम में उपस्थिति l ट्विटर पर लाखों प्रसंशक l

अमरीका में एक हाल ही के अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने इन्टरनेट पर छाए हुए एक विशेष विधि द्वारा प्रसिद्ध व्यक्तियों को श्रेणीबद्ध किया l यीशु इतिहास के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति के रूप में सर्वोत्तम रहा l

फिर भी यीशु में प्रसिद्धि की चिंता कभी नहीं थी l उसने पृथ्वी पर रहते हुए प्रसिद्धि नहीं चाही (मत्ती 9:30; यूहन्ना 6:5)-यद्यपि प्रसिद्धि ने उसको ढूंढ लिया जब गलील के क्षेत्र में उसके विषय खबर फ़ैल गई (मरकुस 1:28; लूका 4:37) l

जहाँ भी यीशु गया भीड़ उसके चारों ओर थी l उसके आश्चर्यकर्मों ने लोगों को उसकी ओर खींचा l किन्तु लोंगों द्वारा उसको राजा बनाने की अवस्था में, वह वहाँ से चला गया (यूहन्ना 6:15) l अपने पिता से संयुक्त उद्देश्य में, वह निरंतर पिता की इच्छा और समय की ओर उन्मुख हुआ (4:34; 8:29; 12:23) l “[वह] यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली” (फ़िलि. 2:8) l

प्रसिद्धि यीशु का लक्ष्य नहीं था l उसका उद्देश्य सरल था l परमेश्वर पुत्र के रूप में, वह विनम्रता, आज्ञाकारिता, और खुद से हमारे पापों के लिए अपने को बलिदान किया l

पीने योग्य पुस्तक

विश्व के हिस्सों में पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण, वाटर इज़ लाइफ नाम की संस्था ने “पीने योग्य पुस्तक” नाम का एक अद्भुत श्रोत विकसित किया है l पुस्तक के पन्नों पर चाँदी के सूक्ष्मकणों की परत चढ़ी हुई है जो 99.9 फीसदी हानिकारक जीवाणुओं को छान देता है! 4 पैसे का एक पृष्ठ 100 लीटर…

तैयारी करना

अंत्येष्टि गृह में ताबूत में अपने ससुर का शव देखते समय, उनके बेटे ने पिता की हथौड़ी उनके हाथों के नीचे रख दी l वर्षों बाद, मेरी सास की मृत्यु पर एक बच्चे ने बुनने की सलाई उनकी उंगलियों के नीचे रख दीं l ये खूबसूरत हाव-भाव हमें याद दिलाकर सुख दिए कि उन्होंने अपने जीवनों में इन साधनों का…

याद रखना ...

वृद्ध होने की एक कठिनाई मनोभ्रंश(Dementia) और अल्पावधि याददाश्त खोने का भय है l किन्तु मानसिक रोग Alzheimer विषय पर विशेषज्ञ डॉ. बेंजामिन मास्ट कुछ प्रोत्साहन देते हैं l उनके अनुसार रोगियों के मस्तिष्क अक्सर “इतने अभ्यस्त” और “आदि” होते हैं कि वे एक पुराना गीत सुनकर प्रत्येक शब्द के साथ गा सकते हैं l उनकी सलाह है कि वचन…

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ख़ामोशी

सहायता ट्रकों के गाँव की टूटी झोपड़ियां हटाते समय चूज़े भागने लगे l नंगे पाँव बच्चे घूरते रहे l बारिश से उजड़ी “सड़क” पर यातायात कम थी l

अचानक, काफिले ने दीवारों से घिरी मेयर का बड़ा मकान देखा जो खाली था l लोगों के पास बुनियादी ज़रूरतें नहीं थीं जबकि वह दूर शहर में आलिशान मकान में रहता था l

ऐसा अन्याय हमें क्रोधित करता है, जिससे परमेश्वर का नबी भी क्रोधित हुआ l व्यापक शोषण देखकर हबक्कूक ने कहा, “हे यहोवा, मैं कब तक तेरी दोहाई देता रहूँगा, और तू न सुनेगा?” (हबक्कूक 1:2) l किन्तु परमेश्वर ने ध्यान  देकर कहा, “हाय उस पर जो पराया धन छीन छीनकर धनवान हो जाता है? ... जो अपने घर के लिए अन्याय के लाभ का लोभी है” (2:6, 9) l न्याय निकट है!

हम दूसरों पर परमेश्वर का न्याय चाहते हैं, किन्तु हबक्कूक की एक मुख्य बात हमें रोकती है : “यहोवा अपने पवित्र मंदिर में है; समस्त पृथ्वी उसके सामने शांत रहे” (2:20) l समस्त  पृथ्वी l शोषित और उत्पीड़क l कभी-कभी परमेश्वर की प्रत्यक्ष खामोशी का उचित प्रतिउत्तर ... ख़ामोशी है!

ख़ामोशी क्यों? क्योंकि हम अपनी आत्मिक दरिद्रता नहीं देखते l हम ख़ामोशी में पवित्र परमेश्वर के सामने अपने पाप देख सकेंगे l   

हबक्कूक की तरह हम भी परमेश्वर पर भरोसा सीखें l हम उसके सब मार्ग नहीं जानते, किन्तु जानते हैं कि वह भला है l सब कुछ उसके नियंत्रण और समय में है l  

थोड़ा सुख बांटना

एक सहेली ने घर में बने मिट्टी के बर्तन भेजे l आते समय बहुमूल्य चीजें टूट गईं l एक कप के कुछ बड़े टुकड़े, और टुकड़े और मिट्टी की ढेर l

मेरे पति ने टुकड़ों को जोड़ दिया l मैंने इस जुड़े हुए खूबसूरत कप को सजा दिया l इस छिद्रित-जोड़े हुए मिट्टी के बर्तन समान, मेरे दाग़ भी प्रमाण हैं कि परमेश्वर मुझे कठिन समय से निकाला है, फिर भी मैं मजबूती से खड़ी हो सकती हूँ l सुख का वह प्याला याद दिलाता है कि मेरे जीवन में और मेरे जीवन के द्वारा परमेश्वर का काम दूसरों को उनके दुःख में सहायता पहुँचाती है l 

प्रेरित पौलुस परमेश्वर की प्रशंसा करता हैं क्योंकि वह “दया का पिता और सब प्रकार की शांति का परमेश्वर है” (2 कुरिं. 1:3) l प्रभु हमारे आजमाइशों और दुखों का उपयोग हमें अपने समान बनाने के लिए करता है l हमारे दुखों में उसकी सांत्वना से हम दूसरों को बताते हैं कि उसने हमारी ज़रूरतें कैसे पूरी की हैं (पद.4) l

मसीह के दुखों पर विचार करके, हम अपने दुखों में दृढ़ रहकर, भरोसेमंद हैं कि परमेश्वर हमारे अनुभवों से हमें और दूसरों को धीरजवंत धैर हेतु सामर्थी बनाता है (पद.5-7) l पौलुस की तरह, हम सुख पाते हैं कि प्रभु हमारे संघर्षों को अपनी महिमा के लिए उपयोग करता है l हम उसकी सांत्वना के भागीदार होकर पीड़ितों के लिए आश्वासन भरी आशा ला सकते हैं l

मुस्कराने का कारण

कार्यस्थल में उत्साहवर्धक शब्द अर्थपूर्ण होते हैं l कार्यकर्ताओं का परस्पर संवाद ग्राहक की संतुष्टि, कंपनी का लाभ, और सहकर्मी के मुल्यांकन को प्रभावित करता है l अध्ययन अनुसार  सबसे प्रभावशाली कार्य समूहों के सदस्य एक दूसरे को अस्वीकृति, असहमति, अथवा कटाक्ष के बदले छः गुना अधिक समर्थन देते हैं l

पौलुस ने अनुभव से संबंधों और परिणामों को आकार देने में शब्दों के महत्त्व को सीखा l दमिश्क के मार्ग पर मसीह से मुलाकात से पहले, उसके शब्द और कार्य यीशु के अनुयायियों को आतंकित करते थे l किन्तु थिस्सलुनीकियों को पत्री लिखने तक, उसके हृदय में परमेश्वर के काम से वह महान उत्साहित करनेवाला बन गया था l अब वह अपने नमूने से अपने पाठकों को परस्पर उत्साहित करने का आग्रह किया l चापलूसी से सावधान रहते हुए, उसने दूसरों को स्वीकार करने और मसीह की आत्मा को प्रतिबिंबित करना दिखाया l  

इस प्रक्रिया में, पौलुस अपने पाठकों को उत्साहवर्धन का श्रोत बताता है l उसने पाया कि अपने को परमेश्वर को सौंपने से, जो हमसे प्रयाप्त प्रेम करके क्रूस पर मरकर, हमें सुख देने, क्षमा करने और प्रेरित करने, और परस्पर प्रेम भरी चुनौती देने का कारण देता है (1 थिस्स. 5:10-11) l

पौलुस हमें बताता है कि परस्पर उत्साहित करना परस्पर परमेश्वर का धीरज और भलाई का स्वाद चखने का एक मार्ग है l