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Articles by सिंडी हेस कैस्पर

काश . . .

हमारे पार्किंग क्षेत्र से निकलते समय, मेरे पति ने कार धीमी कर दी ताकि एक युवा स्त्री अपनी साइकिल से आगे निकल जाए l टॉम ने उसे आगे जाने का इशारा किया और वह मुस्कुराकर, अपने हाथ हिलाते हुए आगे बढ़ गयी l कुछ ही क्षण बाद, एक SUV गाड़ी के चालक ने अपनी ओर का दरवाजा खोला, जिससे ठोकर खाकर वह युवा स्त्री सड़क के किनारे पटरी पर गिर गयी l उसके पाँव से खून बहने लगा, और वह अपनी टेढ़ी साइकिल को जांचती हुई रोने लगी l

बाद में, हमने उस दुर्घटना पर विचार किया : यदि हम उसे ठहरने को कहते ... काश वह चालक दरवाज़ा खोलने से पूर्व देख लेता l काश ... l परेशानियाँ हमें पूर्वानुमान लगाने के एक चक्र में उलझा देती है l काश मैं जान गया होता कि मेरा बच्चा किशोरों के साथ शराब पीने की लत में था . . . काश हमें कैंसर का पता पहले चल जाता . . . l

जब अचानक परेशानियाँ आती हैं, हम कभी-कभी परमेश्वर की भलाइयों पर प्रश्न उठाते हैं l हम मार्था और मरियम की तरह निराशा का भी अनुभव कर सकते हैं जब उनके भाई की मृत्यु हुई l ओह, काश यीशु तब आ गया होता जब उसने सुना था कि लाजर बीमार था! (यूहन्ना 11:21, 32) l

मार्था और मरियम की तरह, हम हमेशा समझ नहीं पाते क्यों हमारे पास परेशानियाँ आती हैं l किन्तु हम उस ज्ञान पर भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर एक बड़ी भलाई के लिए अपने उद्देश्य पूरी कर रहा है l हर एक स्थिति में, हम अपने विश्वासयोग्य और प्रेमी परमेश्वर की बुद्धिमत्ता पर भरोसा कर सकते हैं l

श्रेय नहीं मिला?

1950 और 1960 के दशकों में, हॉलीवुड का संगीत लोकप्रिय था, और विशेषकर तीन नायिकाओं-ऑड्रे हैपबर्न, नेटेली वुड, और दबोरा केर-अपने दमदार अभिनय से अपने दर्शकों को उत्तेजित करीं l किन्तु इन नायिकाओं के अभिनय आकर्षण को बढ़ानेवाले असाधारण गीत थे l वास्तव में, उत्कृष्ट फिल्मों की सफलता का एक बड़ा हिस्सा दरअसल प्रमुख नायिकाओं की आवाज़ों को डब करनेवाली मामी निक्सन को जाता है, जिन्हें लम्बे समय तक अपनी योगदान के लिए श्रेय नहीं मिला l 

मसीह की देह में अधिक सार्वजानिक भूमिका निभाने वाले लोगों को विश्वासयोग्यता से अक्सर सहायता देनेवाले लोग हैं l पौलुस अपनी सेवकाई में ठीक ऐसे व्यक्तियों पर निर्भर था l  लिपिक के रूप में तिरतियुस ने पौलुस को अपनी ताकतवर लिखित  आवाज़ दी (रोमि. 16:22) l परोक्ष में इपफ्रास की निरंतर सेवा पौलुस और आरंभिक कलीसिया के मूलभूत बुनियाद थे (कुलु. 4:12-13) l थकित प्रेरित को सँभालने में लुदिया ने उदारता से अपना घर खोल दिया (प्रेरितों 16:15) l मसीह में इन सह-सेवकों की सहायता बिना पौलुस की सेवा असंभव थी (पद.7-18) l

 हमारे पास सदेव उच्च दृश्य भूमिकाएँ नहीं होंगी, किन्तु हम जानते हैं कि परमेश्वर की योजना के अनिवार्य भाग में हमारी आज्ञाकारी भूमिका से वह प्रसन्न होता है l जब हम “प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते [जाते हैं]” (1 कुरिं.15:58), हमारी सेवा परमेश्वर को महिमा देनेवाली और दूसरों को उसके निकट लानेवाली महत्वपूर्ण सेवा होगी (मत्ती 5:16) l

एक सिद्ध पिता

मेरे पिता ने एक बार मेरे सामने स्वीकार किया, “जब तुम उम्र में बढ़ रहे थे, मैं बहुत बार घर पर नहीं होता था l”

मुझे यह याद नहीं l अपनी पूर्ण-कालिक सेवा के अलावा, वे चर्च संगीत मण्डली की अगुवाई करने, और कभी-कभी पुरुषों के चार लोगों के गायन समूह के साथ एक-दो सप्ताह के लिए बाहर जाते थे l किन्तु वे मेरे समस्त ख़ास पलों में (और अनेक छोटे पलों में) उपस्थित रहते थे l

जैसे, आठ वर्ष की आयु में, मुझे एक दोपहर स्कूल में एक छोटी भूमिका निभानी थी l सभी माताएँ आयीं, किन्तु केवल मेरे पिता l अनेक छोटे तरीकों से, उन्होंने हम बच्चों को जताया कि हम उनके लिए विशेष हैं और वे हमसे प्यार करते हैं l और उन्होंने माँ के अंतिम दिनों में कोमलता से उनकी सेवा करके स्वार्थहीन प्रेम प्रगट किया l पिता सिद्ध नहीं हैं, किन्तु उन्होंने मुझे हमेशा मेरे स्वर्गिक पिता की अच्छी झलक प्रस्तुत की है l और आदर्श रूप से, एक मसीही पिता को ऐसा ही करना चाहिए l

कभी-कभी सांसारिक पिता अपने बच्चों को निराश करते अथवा पीड़ित करते हैं l किन्तु हमारा स्वर्गिक पिता “दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है” (भजन 103:8) l प्रेम करनेवाले पिता अपने बच्चों को ताड़ना, सुख, निर्देश देकर, और प्रावधान करके, हमारे सिद्ध स्वर्गिक पिता का नमूना प्रस्तुत करते हैं l

हृदय की हालत

मैंने ध्यान दिया है कि मेरे पति आँखें बंद करके चर्च स्तुति समूह के साथ माउथ ऑर्गन पर गाना बजाते हैं l उनके अनुसार वे इससे केन्द्रित होकर बिना विकर्षण के सर्वोत्तम तरीके से बजा पाते हैं अर्थात् उनका माउथ ऑर्गन, संगीत, और सभी परमेश्वर की प्रशंसा करते हैं l

कुछ लोग सोचते हैं कि प्रार्थना में हमारी आँखें बंद होनी चाहिए l प्रार्थना कभी भी और कहीं भी करते समय, विशेषकर, चलते हुए, घास-फूस साफ़ करते और गाड़ी चलाते समय ऑंखें बंद रखना कठिन है!

परमेश्वर से बातें करते समय हमारे शरीर के ढंग के विषय कोई नियम नहीं है l सुलेमान ने अपने द्वारा निर्मित मंदिर के समर्पण के समय, घुटने टेककर “स्वर्ग की ओर हाथ [फैलाकर]” प्रार्थना किया (2 इतिहास 6:13-14) l घुटने टेकना (इफि. 3:14), खड़े होना (लूका 18:10-13), और मुँह के बल (मत्ती 26:39), प्रार्थना के सभी ढंग बाइबिल में हैं l

परमेश्वर के समक्ष घुटने टेकना अथवा खड़े होना, अपने हाथों को स्वर्ग की ओर उठाना अथवा परमेश्वर पर केन्द्रित होने के लिए अपनी आँखें बंद करना, अर्थात हमारे शरीर का ढंग नहीं, किन्तु हृदय की दशा विशेष है l हमारे हरेक कार्य “का मूल श्रोत वही है” (नीति. 4:23) l प्रार्थना करते समय, हमारे हृदय हमारे प्रेमी परमेश्वर के समक्ष इबादत, कृतज्ञता, और दीनता में झुक जाएँ, क्योंकि उसकी ऑंखें और उसके कान उसके लोगों की प्रार्थना की ओर लगी रहती हैं (2 इतिहास 6:40) l

जब सुबह होती है

जब हम म्युनिक के बाहर ग्रामीण विश्रामगृह में रात बिताने पहुंचे तो काफी रात हो चुकी थी l हम अपना बाल्कनी वाला आरामदायक कमरा पाकर खुश थे, यद्यपि एक कष्टकर कुहरे से अँधेरे में देखना असंभव था l किन्तु कुछ घंटे बाद सूर्योदय होने पर, धुंध फटने लगा l तब जो रात के समय बहुत छुपा हुआ था अब हम देख सकते थे-एक सम्पूर्ण रमणीय दृश्य-शांत और हरा-भरा चारागाह, घास चरती भेड़ें जिनके गलों में बजती छोटी घंटियाँ, और आकाश में सफ़ेद बादल जो और बड़ी, रोयेंदार भेड़ों की तरह दिखाई देती थीं!

कभी-कभी जीवन निराशा के भारी कुहरे से ढक जाता है l हमारी स्थिति अत्यधिक अंधकारमय दिखाई देने के कारण आशा जाती रहती है l किन्तु जैसे सूरज से कुहरा फट जाता है, परमेश्वर में हमारा विश्वास सन्देह का शंका हटा देता है l इब्रानियों 11 में विश्वास की परिभाषा “आशा की हुयी वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है” (पद.1) l परिच्छेद आगे हमें नूह का विश्वास याद दिलाता है, जो “दिखाई न देनेवाली बातों के विषय चेतावनी पाया,” फिर भी परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहा (पद.7) l और अब्राहम जो परमेश्वर के मार्गदर्शन में चला-यद्यपि वह अपना गंतव्य नहीं जानता था (पद.8) l

यद्यपि हमनें उसे नहीं देखा है और हर समय उसकी उपस्थिति का आभास नहीं करते हैं, परमेश्वर हमेशा उपस्थित रहता है और हमारे अंधकारमय रातों में भी लिए चलेगा l  

गलतियाँ हुईं

“गलतियाँ हुईं,” मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अपनी कंपनी के गैरकानूनी कार्य में लिप्त होने पर चर्चा करते हुए कही l वह खिन्न था, फिर भी दोष को दूर ही रखा और अपनी गलती को उजागर नहीं किया l

कुछ “गलतियाँ” केवल गलतियाँ हैं : सड़क के गलत दिशा में गाड़ी चलाना, टाइमर सेट नहीं करना और भोजन जला देना, अपने चेकबुक देय राशि में गलत हिसाब लगाना l किन्तु वे सुविचारित कार्य जो सीमा से परे हैं-परमेश्वर उनको पाप  कहता है l परमेश्वर को आदम और हव्वा से उनकी आज्ञाकारिता के विषय प्रश्न करने पर, उन्होंने दूसरे को दोषी ठहराया (उत्प. 3:8-13) l हारून ने लोगों द्वारा निर्जन स्थान में सोने का बछड़ा बनाकर उसकी उपासना करने की जिम्मेदारी नहीं ली l वह मूसा से बोला, “जब [लोगों ने] मुझ को [सोना] दिया, मैं ने उन्हें आग में डाल दिया, तब यह बछड़ा निकल पड़ा” (निर्ग. 32:24) l

वह भी बुदबुदाया होगा, “गलतियाँ हुईं l”

कभी-कभी अपनी गलती मानने से सरल दूसरों पर दोष लगाना होता है l उसी के समान पाप को “केवल गलतियाँ” संबोधित करके उसका सही स्वभाव न स्वीकारना खतरनाक है l

किन्तु जिम्मेदारी लेने पर-पाप मानकर उसका अंगीकार करने पर-वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l हमारा परमेश्वर अपने बच्चों को क्षमा और आरोग्यता देता है l

प्रेम में बंद

जून 2015 में, पेरिस ने पोंट डेस आर्ट्स पैदल पुल से पैंतालिस टन ताले हटाए l  जोड़े प्रेम प्रसंग भाव के प्रदर्शन के तौर पर, तालों पर अपने नाम के प्रथमाक्षर उकेरकर पुल के जंगलों में लगाकर चाभी शेन नदी में फेंक देते हैं l

हजारों बार यह विधि दोहराई गई, पुल अधिक “प्रेम” का बोझ सहने को तैयार न था l आख़िरकार शहर अधिकारीयों ने, पुल की ताकत पर शंका करके, “प्रेम तालों” को हटा दिया l

तालों का अर्थ अनंत प्रेम प्रकट करना था, किन्तु मानवीय प्रेम स्थायी नहीं है l परम मित्र परस्पर धोखा देकर कभी मतभेद नहीं सुलझाते हैं l परिजन बहस करते  और क्षमा नहीं करते l पति-पत्नी एक दूसरे से अलग हो जाते हैं और भूल जाते हैं कि उन्होंने विवाह क्यों किया था l मानवीय प्रेम चंचल होता है l

एक प्रेम स्थिर और स्थायी है-परमेश्वर का प्रेम l “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!” भजन 106:1 की घोषणा है l परमेश्वर के प्रेम का विजयी और अनंत स्वभाव सम्पूर्ण बाइबिल में है l और इसका महानतम प्रमाण उसके पुत्र की मृत्यु है कि उसपर विश्वास करनेवालों को अनंत जीवन मिलेगा l और परमेश्वर के प्रेम से हमें कोई अलग नहीं कर सकता (रोमि. 8:38-39) l

सहविश्वसियों, हम परमेश्वर के प्रेम में हमेशा के लिए बंद  हैं l

प्रसिद्धि और विनम्रता

हममें से कितने प्रसिद्धि से आसक्त हैं-या तो खुद की प्रसिद्धि से अथवा प्रसिद्ध लोगों के जीवनों के विषय प्रत्येक जानकारी रखकर l अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक या फ़िल्मी दौरे l देर-रात्रि कार्यक्रम में उपस्थिति l ट्विटर पर लाखों प्रसंशक l

अमरीका में एक हाल ही के अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने इन्टरनेट पर छाए हुए एक विशेष विधि द्वारा प्रसिद्ध व्यक्तियों को श्रेणीबद्ध किया l यीशु इतिहास के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति के रूप में सर्वोत्तम रहा l

फिर भी यीशु में प्रसिद्धि की चिंता कभी नहीं थी l उसने पृथ्वी पर रहते हुए प्रसिद्धि नहीं चाही (मत्ती 9:30; यूहन्ना 6:5)-यद्यपि प्रसिद्धि ने उसको ढूंढ लिया जब गलील के क्षेत्र में उसके विषय खबर फ़ैल गई (मरकुस 1:28; लूका 4:37) l

जहाँ भी यीशु गया भीड़ उसके चारों ओर थी l उसके आश्चर्यकर्मों ने लोगों को उसकी ओर खींचा l किन्तु लोंगों द्वारा उसको राजा बनाने की अवस्था में, वह वहाँ से चला गया (यूहन्ना 6:15) l अपने पिता से संयुक्त उद्देश्य में, वह निरंतर पिता की इच्छा और समय की ओर उन्मुख हुआ (4:34; 8:29; 12:23) l “[वह] यहाँ तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु, हाँ, क्रूस की मृत्यु भी सह ली” (फ़िलि. 2:8) l

प्रसिद्धि यीशु का लक्ष्य नहीं था l उसका उद्देश्य सरल था l परमेश्वर पुत्र के रूप में, वह विनम्रता, आज्ञाकारिता, और खुद से हमारे पापों के लिए अपने को बलिदान किया l

पीने योग्य पुस्तक

विश्व के हिस्सों में पीने का साफ़ पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण, वाटर इज़ लाइफ नाम की संस्था ने “पीने योग्य पुस्तक” नाम का एक अद्भुत श्रोत विकसित किया है l पुस्तक के पन्नों पर चाँदी के सूक्ष्मकणों की परत चढ़ी हुई है जो 99.9 फीसदी हानिकारक जीवाणुओं को छान देता है! 4 पैसे का एक पृष्ठ 100 लीटर…

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दुःख से आनंद तक

केली की गर्भावस्था में परेशानी आ गयी, और डॉक्टर चिंतित हो गए l उसके

लम्बे प्रसव पीड़ा में, उन्होंने फुर्ती से सर्जरी (Cesarean section) करने का निर्णय लिया l  किन्तु कठिन समय में, केली अपना दर्द भूल गयी जब उसने अपने नवजात बेटे को अपनी गोद में उठाया l दर्द आनंद में बदल गया l

बाइबिल इस सच्चाई की पुष्टि करती है : “प्रसव के समय स्त्री को शोक होता है, क्योंकि उसकी दुःख की घड़ी आ पहुंची है, परन्तु जब वह बालक को जन्म दे चुकती है, तो इस आनंद से कि संसार में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती” (यूहन्ना 16:21) l यीशु ने इस बात पर बल देने के लिए अपने शिष्यों के साथ इस उदाहरण का उपयोग किया कि उसके शीघ्र जाने से उनको दुःख होगा, किन्तु जब वे उसे पुनः देखेंगे उनका मन फिर आनंद से भर जाएगा (पद.20-22) l

यीशु अपनी मृत्यु और जी उठने और उसके बाद आनेवाली बातों के विषय कह रहा था l उसके जी उठने के बाद, शिष्य आनंदित हुए, क्योंकि यीशु उनको छोड़कर स्वर्ग जाने से पूर्व चालीस दिनों तक उनके साथ रहा और उनको सिखाता रहा (प्रेरितों 1:3) l फिर भी यीशु उनको दुखित नहीं छोड़ा l पवित्र आत्मा उनको आनंद से भरने वाला था (यूहन्ना 16:7-15; प्रेरितों 13:52) l

यद्यपि हम लोगों ने यीशु को आमने-सामने नहीं देखा है, विश्वासी होने के कारण हमें भरोसा है कि एक दिन हम उसे देखेंगे l उस दिन, हम पृथ्वी पर का दुःख भूल जाएंगे l किन्तु उस समय तक, प्रभु ने हमें आनंद के बिना नहीं छोड़ा है l उसने हमें अपना पवित्र आत्मा दिया है (रोमि. 15:13; 1 पतरस 1:8-9) l

आप मूल हैं

परमेश्वर ने हममें से हर एक को मूल रूप में बनाया है l कोई भी पुरुष अथवा महिला खुद के द्वारा बनाए नहीं गए l कोई भी स्वयं से गुणवान, जानकार, या बुद्धिमान नहीं बनता l परमेश्वर ने ही हममें से हर एक को बनाया l उसने हमारे विषय सोचा और हमें अपने असीम प्रेम के कारण बनाया l

परमेश्वर ने आपका शरीर, दिमाग, और आत्मा बनाया l और वह अभी भी आप में अपना कार्य कर रहा है l वह अभी भी आपको बना रहा है l हमारी परिपक्वता ही उसका एकमात्र उद्देश्य है : “जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किये हैं, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फ़िलि. 1:6) l परमेश्वर आपको और सामर्थी, ताकतवर, पवित्र, और शांतिमय, और प्रेमी, कम स्वार्थी अर्थात् जैसा आप बनना चाहते थे वैसा ही बना रहा है l

“[परमेश्वर की] सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5) l परमेश्वर ने हमेशा आपसे प्रेम किया है (“हमेशा” दोनों ओर), और वह आपके साथ अंत तक विश्वासयोग्य रहेगा l

आपको ऐसा प्रेम मिला है जो सर्वदा तक रहेगा और एक परमेश्वर जो आपको कभी नहीं छोड़ेगा l यही आनंद करने का अच्छा कारण है और “जयजयकार के साथ उसके सम्मुख [आने का कारण भी]!” (पद 2) l

यदि आप गा नहीं सकते, केवल उसे ऊंची आवाज़ में पुकारें : “यहोवा का जयजयकार करो” (पद.1) l

शांतिमय घर की प्रतिज्ञा

65 करोड़ l वर्तमान में हमारे संसार में शरणार्थियों की संख्या इतनी है अर्थात् लोग जो लड़ाई और उत्पीड़न के कारण बेघर हो गए और यह संख्या पिछले समयों से कहीं अधिक है l संयुक्त राष्ट्र ने अगुओं से सिफारिश की है कि शरणार्थी स्वीकार किये जाएं ताकि हर एक बच्चा शिक्षा पा सके, हर एक व्यस्क को काम मिल सके, और हर एक परिवार के पास घर हो l

संकट में रह रहे शरणार्थियों के लिए घर बनाने का सपना मुझे परमेश्वर द्वारा यहूदा राष्ट्र को दी गयी प्रतिज्ञा याद दिलाती है जब अश्शूरी सेना ने उनके घरों को उजाड़ने की धमकी दी थी l परमेश्वर ने नबी मीका द्वारा अपने लोगों को चेतावनी दी कि वे अपना मंदिर और प्रिय नगर यरूशलेम खो देंगे l किन्तु परमेश्वर ने उनको हानि से परे एक सुन्दर भविष्य देने की भी प्रतिज्ञा की l

मीका ने कहा, “एक दिन आएगा जब परमेश्वर अपने लोगों को अपने निकट बुलाएगा l हिंसा का अंत होगा l हथियार खेती करने के औज़ार बन जाएंगे, और परमेश्वर की बात सुननेवाला हर एक व्यक्ति के पास एक शांतिमय घर होगा और उसके राज्य में एक फलवन्त जीवन (4:3-4) l

वर्तमान संसार में आज बहुतों के लिए, और शायद आपके लिए भी, एक सुरक्षित घर सच्चाई से अधिक एक सपना हो सकता है l किन्तु हम, सभी राष्ट्रों के लोगों के लिए एक घर सम्बन्धी परमेश्वर की उस पुरानी प्रतिज्ञा पर भरोसा कर सकते हैं, जब हम उन शांतिमय घरों के सच्चाई में बदलने के लिए कार्य कर रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं l