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Articles by सिंडी हेस कैस्पर

हमारा सुरक्षित स्थान

मेरी पहली नौकरी एक फास्टफूड रेस्टोरेंट में थी l शनिवार की शाम को, एक व्यक्ति मेरे लिए इंतज़ार करते हुए मुझसे पूछता था कि मैं काम से कब छुट्टी पाऊँगी l इससे मैं असहज महसूस करती थी l विलम्ब होने पर वह चिप्स आर्डर करता था, फिर कोई पेय, ताकि होटल का प्रबंधक उस से बाहर जाने को न कह दे l यद्यपि मेरा घर निकट ही था, फिर भी मैं कुछ पार्किंग स्थलों से और एक रेतीले मैदान से होकर निकलने से डरती थी l आख़िरकार, मध्यरात्रि में, मैंने ऑफिस के अन्दर जाकर फ़ोन किया l

और जिस व्यक्ति ने फोन का उत्तर दिया वह थे मेरे पिता, जिन्होंने बिना दोबारा सोचे अपने गरम बिस्तर से उठकर पांच मिनट के अंतराल में मुझे घर ले जाने आ गए l

उस रात मेरे पिता का आकर मेरी मदद करने की निश्चयता मुझे भजन 91 में वर्णित आश्वासन की याद दिलाता है l हमारे भ्रमित, भयभीत अथवा ज़रूरत में होने पर हमारे स्वर्गिक पिता हमेशा हमारे साथ रहते हैं l वे कहते हैं : “जब वह मुझ को पुकारेंगे, तब मैं उनकी सुनूँगा” (भजन 91:15) l वह केवल एक स्थान  नहीं है जहाँ हम सुरक्षा के लिए जाते हैं l वह हमारा आश्रय है (पद.1) l वह हमारा गढ़ है जिस पर हम भरोसा कर सकते हैं (पद.2) l

भय, खतरा, अथवा अनिश्चितता में, हम परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर भरोसा कर सकते हैं कि जब हम उसे पुकारेंगे, वह हमारी सुनकर हमारी परेशानियों में हमारे साथ रहेगा (पद.14-15) l परमेश्वर हमारा सुरक्षित स्थान है l

एक साल में बाइबल

उम्र में बढ़ते समय मैं अपनी दो बहनों के साथ देवदार की लकड़ी से बनी एक बक्से पर जो मेरी माँ की थी बैठना पसंद करती थी l मेरी माँ ऊन से बने हमारे स्वेटरों को उसमें रखती थी और हाथ के बने काम जो मेरी दादी ने कढ़ाई अथवा क्रोशिया से बनाए थे l उसके लिए वह बक्सा महत्वपूर्ण था l वह देवदार लकड़ी पर भरोसा करती थी जिसकी तेज़ महक अन्दर के सामान को कीट आदि से बचा सकती थी l

संसार की अधिकतर वस्तुएं आसानी से कीट अथवा मोर्चे से खराब हो सकते हैं अथवा उनके चोरी होने का डर होता है l मत्ती 6 हमें सीमित जीवन-अवधि वाली वस्तुओं पर नहीं किन्तु अनंत  मूल्य वाले वस्तुओं पर विशेष ध्यान देने को प्रोत्साहित करता है l जब 57 वर्ष की उम्र में मेरी माँ की मृत्यु हुयी, उन्होंने अधिक सांसारिक वस्तुएं इकठ्ठा नहीं किया था, किन्तु मैं उस धन के विषय विचार करना चाहती हूँ जो उन्होंने स्वर्ग में इकट्ठा किया था (पद.19-20) l

मैं याद करती हूँ कि वह परमेश्वर को कितना अधिक प्यार करती थी और शांत तरीकों से उसकी सेवा करती थी : विश्वासयोग्यता से अपने परिवार की देखभाल, सन्डे स्कूल में बच्चों को पढ़ाना, पति द्वारा त्यागी गयी स्त्री से मित्रता निभाना, एक युवा माँ से सहानुभूति रखना जिसके बच्चे की मृत्यु हो चुकी थी l और वह प्रार्थना  भी करती थी . . . . अपनी दृष्टि खोने के बाद भी और व्हील चेयर तक सीमित होने पर भी,  वह दूसरों को प्यार और उनके लिए प्रार्थना करती रही l

जो हम इकठ्ठा करते हैं वह हमारे वास्तविक धन का माप नहीं है किन्तु हम क्या और किसमें अपना समय और मनोभाव निवेश करते हैं l हम सेवा और यीशु का अनुसरण करने के द्वारा कौन सा “धन” स्वर्ग में इकठ्ठा कर रहे हैं?

अभी के लिए अलविदा

विदा लेते समय मेरी पोती और मेरा नियम है, हम गले मिलकर 20 सेकिंड के लिए दहाड़ मार कर रोते हैं और अलग होने पर कहते हैं “फिर मिलेंगे” और लौट जाते हैं। हम सदा यह आशा करते हैं कि हम एक दूसरे से फिर मिलेंगे-जल्द ही।

परंतु कभी-कभी अपने प्यारों से बिछुड़ना कठिन होता है। पौलुस के इफिसुस के प्राचीनों से विदा लेने पर वे उसके गले लिपट कर उसे चूमने लगे...वे उस बात का शोक करते थे, जो उस ने कही थी, कि तुम मेरा मुंह फिर न देखोगे (प्रेरितों के काम 20:37–38)।

तथापि गहरा दुःख तब होता है जब हम मौत से अलग हो जाते हैं और इस जीवन में आखिरी बार अलविदा कहते हैं। यह कल्पना से भी बाहर है। हम शोक मनाते और रोते हैं। उन्हें दोबारा गले न लगा पाने के दिल तोड़ने वाले दुःख को हम झेलेंगे?

फिर भी...हम उन लोगों के समान शोक नहीं करते हैं जिनके पास कोई आशा नहीं है। पौलुस उनके लिए भविष्य में पुनर्मिलन के बारे में लिखते है जो "विश्वास करते हैं कि यीशु मरा और फिर जी भी उठा..और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। (1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18)। क्या पुनर्मिलन है! और हम सर्वदा यीशु के साथ रहेगें-यह एक शाश्वत आशा है।

सेवा करें और सेवा लें

मारिलिन कई हफ़्तों तक बीमार रही थी, और अनेक लोगों ने उसे इस कठिन समय में उत्साहित किया था l मैं उनकी नेकी का बदला कैसे दूँगी?  उसकी चिंता थी l तब एक दिन उसने एक लिखित प्रार्थना पढ़ी : “प्रार्थना करें कि [दूसरे] दीनता को बढ़ाएं, केवल सेवा करने के लिए नहीं, किन्तु सेवा लेने के लिए भी l” मारिलिन ने तुरंत महसूस किया कि बराबर करने की ज़रूरत नहीं, किन्तु केवल धन्यवादी होकर दूसरों को सेवा करने का आनंद अनुभव करने दें l

फिलिप्पिय्यों 4 में, पौलुस ने “[उसके] क्लेश में ... सहभागी” होनेवाले सभी को धन्यवाद दिया (पद.14) l वह सुसमाचार प्रचार करते समय और सिखाते समय लोगों की सहायता पर निर्भर था l वह समझ गया कि ज़रूरत के समय मिला उपहार केवल परमेश्वर के प्रेमी लोगों के प्रेम का प्रसार था : “[तुम्हारा उपहार] तो सुखदायक सुगंध, ग्रहण करने योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है” (पद.18) l

प्राप्त करनेवाला बनना सरल नहीं है-विशेषकर यदि आमतौर पर आप दूसरों को मदद करने में प्रथम रहे हैं l किन्तु दीनता से, हमारी ज़रूरत के समय हम परमेश्वर को अनेक माध्यमों से हमारी देखभाल करने की अनुमति दें l

पौलुस ने लिखा, “मेरा परमेश्वर ... तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा” (पद.19) l यह कुछ ऐसा था जो उसने क्लेश से पूर्ण जीवन में सीखा था l परमेश्वर विश्वासयोग्य है और उसका श्रोत असीमित है l

बढ़ने में समय

अपने शिशु कक्षा में प्रथम दिन, छोटी चारलोट से खुद को बनाने को कहा गया l उसकी तस्वीर में शरीर के लिए एक सरल गोला, एक अंडाकार सिर, और आँखें दो गोले थे l फिर अंतिम दिन उससे अपनी तस्वीर बनाने को कहा गया l इसमें रंगीन वस्त्र, एक मुस्कराते चेहरे के साथ स्पष्ट मुखाकृति, सुन्दर लाल रंग के लहराते बाल थे l स्कूल ने एक सरल कार्य द्वारा दर्शा दिया कि समय परिपक्वता के  स्तर में अंतर लाता है l

जबकि हम स्वीकार करते हैं कि बच्चों के परिपक्वता में समय लगता है, हम खुद के साथ अथवा सह विश्वासियों के धीमी आत्मिक विकास से अधीर हो जाते हैं l हम “आत्मा के फल” (गला. 5:22-23), देखकर आनंदित होते हैं, किन्तु पापमय चुनाव देखकर दुखित होते हैं l इब्रानियों का लेखक कलीसिया को लिखते हुए यह बात प्रगट करता है : “समय के विचार से तो तुम्हें गुरु हो जाना चाहिए था, तौभी यह आवश्यक हो गया है कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए” (इब्रा. 5:12) l

जब हम स्वयं यीशु के साथ निकटता में आगे बढ़ते हैं, हम परस्पर प्रार्थना करते हुए धीरज से परमेश्वर से प्रेम करनेवालों के साथ हो लें जो आत्मिक उन्नत्ति के लिए संघर्षरत हैं l “प्रेम में सच्चाई से चलते हुए,” हम परस्पर उत्साहित करें, ताकि हम साथ मिलकर “चलते हुए सब बातों में उसमें जो सिर है, अर्थात् मसीह में बढ़ते जाएँ (इफि.4:15) l

दैनिक प्रार्थना

गायक/गीतकार रोबर्ट हैमलेट ने “लेडी हु प्रेज़ फॉर मी” गीत अपनी माँ के सम्मान में लिखी जिन्होंने प्रति भोर अपने बेटों के बस स्टॉप जाने से पूर्व उनके लिए प्रार्थना की l हैमलेट की युवा माँ ने उसका गीत सुनकर, उसके साथ प्रार्थना करने का निश्चय किया l परिणाम आनंदित करने वाला था! उस बेटे के बाहर जाने से पूर्व, उसकी माँ ने उसके लिए प्रार्थना की l पाँच मिनट बाद वह अपने साथ कुछ और बच्चों को लेकर लौटा! उसकी माँ ने चकित होकर उससे पूछा कि क्या बात है l बेटे का उत्तर था, “इनकी माताएँ इनके लिए प्रार्थना नहीं करती हैं l”

इफिसियों की पत्री में, पौलुस “हर समय और हर प्रकार से ... प्रार्थना” करने को कहता है  (6:18) l परिवार में सबको परमेश्वर पर दैनिक भरोसा प्रगट करना चाहिए क्योंकि बच्चे अपने निकट के लोगों को विश्वास करते देखकर ही परमेश्वर पर भरोसा करना सीखते हैं (2 तीमु. 1:5) l बच्चों के लिए  और उनके साथ  प्रार्थना करना ही उनको प्रार्थना का परम महत्त्व सिखाने का अहम् तरीका है l यह उनके लिए विश्वास से परमेश्वर के पास व्यक्तिगत रूप से जाने का ज़रूरी कारण समझने का एक तरीका है l

जब हम परमेश्वर में “असली विश्वास” की शिक्षा प्रगट रूप से “[बच्चों] को ... देना आरम्भ करते हैं” (निति. 22:6; 2 तीमु. 1:5), हम उनको एक विशेष इनाम, भरोसे से देते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में हमेशा उपस्थित रहकर निरंतर प्रेम, मार्गदर्शन, और सुरक्षा देता है l

काश . . .

हमारे पार्किंग क्षेत्र से निकलते समय, मेरे पति ने कार धीमी कर दी ताकि एक युवा स्त्री अपनी साइकिल से आगे निकल जाए l टॉम ने उसे आगे जाने का इशारा किया और वह मुस्कुराकर, अपने हाथ हिलाते हुए आगे बढ़ गयी l कुछ ही क्षण बाद, एक SUV गाड़ी के चालक ने अपनी ओर का दरवाजा खोला, जिससे ठोकर खाकर वह युवा स्त्री सड़क के किनारे पटरी पर गिर गयी l उसके पाँव से खून बहने लगा, और वह अपनी टेढ़ी साइकिल को जांचती हुई रोने लगी l

बाद में, हमने उस दुर्घटना पर विचार किया : यदि हम उसे ठहरने को कहते ... काश वह चालक दरवाज़ा खोलने से पूर्व देख लेता l काश ... l परेशानियाँ हमें पूर्वानुमान लगाने के एक चक्र में उलझा देती है l काश मैं जान गया होता कि मेरा बच्चा किशोरों के साथ शराब पीने की लत में था . . . काश हमें कैंसर का पता पहले चल जाता . . . l

जब अचानक परेशानियाँ आती हैं, हम कभी-कभी परमेश्वर की भलाइयों पर प्रश्न उठाते हैं l हम मार्था और मरियम की तरह निराशा का भी अनुभव कर सकते हैं जब उनके भाई की मृत्यु हुई l ओह, काश यीशु तब आ गया होता जब उसने सुना था कि लाजर बीमार था! (यूहन्ना 11:21, 32) l

मार्था और मरियम की तरह, हम हमेशा समझ नहीं पाते क्यों हमारे पास परेशानियाँ आती हैं l किन्तु हम उस ज्ञान पर भरोसा कर सकते हैं कि परमेश्वर एक बड़ी भलाई के लिए अपने उद्देश्य पूरी कर रहा है l हर एक स्थिति में, हम अपने विश्वासयोग्य और प्रेमी परमेश्वर की बुद्धिमत्ता पर भरोसा कर सकते हैं l

श्रेय नहीं मिला?

1950 और 1960 के दशकों में, हॉलीवुड का संगीत लोकप्रिय था, और विशेषकर तीन नायिकाओं-ऑड्रे हैपबर्न, नेटेली वुड, और दबोरा केर-अपने दमदार अभिनय से अपने दर्शकों को उत्तेजित करीं l किन्तु इन नायिकाओं के अभिनय आकर्षण को बढ़ानेवाले असाधारण गीत थे l वास्तव में, उत्कृष्ट फिल्मों की सफलता का एक बड़ा हिस्सा दरअसल प्रमुख नायिकाओं की आवाज़ों को डब करनेवाली मामी निक्सन को जाता है, जिन्हें लम्बे समय तक अपनी योगदान के लिए श्रेय नहीं मिला l 

मसीह की देह में अधिक सार्वजानिक भूमिका निभाने वाले लोगों को विश्वासयोग्यता से अक्सर सहायता देनेवाले लोग हैं l पौलुस अपनी सेवकाई में ठीक ऐसे व्यक्तियों पर निर्भर था l  लिपिक के रूप में तिरतियुस ने पौलुस को अपनी ताकतवर लिखित  आवाज़ दी (रोमि. 16:22) l परोक्ष में इपफ्रास की निरंतर सेवा पौलुस और आरंभिक कलीसिया के मूलभूत बुनियाद थे (कुलु. 4:12-13) l थकित प्रेरित को सँभालने में लुदिया ने उदारता से अपना घर खोल दिया (प्रेरितों 16:15) l मसीह में इन सह-सेवकों की सहायता बिना पौलुस की सेवा असंभव थी (पद.7-18) l

 हमारे पास सदेव उच्च दृश्य भूमिकाएँ नहीं होंगी, किन्तु हम जानते हैं कि परमेश्वर की योजना के अनिवार्य भाग में हमारी आज्ञाकारी भूमिका से वह प्रसन्न होता है l जब हम “प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते [जाते हैं]” (1 कुरिं.15:58), हमारी सेवा परमेश्वर को महिमा देनेवाली और दूसरों को उसके निकट लानेवाली महत्वपूर्ण सेवा होगी (मत्ती 5:16) l

एक सिद्ध पिता

मेरे पिता ने एक बार मेरे सामने स्वीकार किया, “जब तुम उम्र में बढ़ रहे थे, मैं बहुत बार घर पर नहीं होता था l”

मुझे यह याद नहीं l अपनी पूर्ण-कालिक सेवा के अलावा, वे चर्च संगीत मण्डली की अगुवाई करने, और कभी-कभी पुरुषों के चार लोगों के गायन समूह के साथ एक-दो सप्ताह के लिए बाहर जाते थे l किन्तु वे मेरे समस्त ख़ास पलों में (और अनेक छोटे पलों में) उपस्थित रहते थे l

जैसे, आठ वर्ष की आयु में, मुझे एक दोपहर स्कूल में एक छोटी भूमिका निभानी थी l सभी माताएँ आयीं, किन्तु केवल मेरे पिता l अनेक छोटे तरीकों से, उन्होंने हम बच्चों को जताया कि हम उनके लिए विशेष हैं और वे हमसे प्यार करते हैं l और उन्होंने माँ के अंतिम दिनों में कोमलता से उनकी सेवा करके स्वार्थहीन प्रेम प्रगट किया l पिता सिद्ध नहीं हैं, किन्तु उन्होंने मुझे हमेशा मेरे स्वर्गिक पिता की अच्छी झलक प्रस्तुत की है l और आदर्श रूप से, एक मसीही पिता को ऐसा ही करना चाहिए l

कभी-कभी सांसारिक पिता अपने बच्चों को निराश करते अथवा पीड़ित करते हैं l किन्तु हमारा स्वर्गिक पिता “दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है” (भजन 103:8) l प्रेम करनेवाले पिता अपने बच्चों को ताड़ना, सुख, निर्देश देकर, और प्रावधान करके, हमारे सिद्ध स्वर्गिक पिता का नमूना प्रस्तुत करते हैं l