पुत्र के प्रकाश को प्रतिबिंबित करना
मेरी मां से मेरा झगड़ा होने के बाद, उन्होंने मुझे घर से 1 घंटे की दूरी पर मिलने को सहमत हुई । जब मैं वहां पहुंचा, तो पता चला कि वह मेरे पहुंचने से पहले ही वहां से जा चुकी थी। मैंने गुस्से में, उन्हें एक संदेश लिखा। लेकिन जब मुझे लगा कि प्रभु मुझे प्यार से जवाब देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं तो मैंने इसमें संशोधन किया। । जब मेरी मां ने वह भिन्न तरीके से लिखा हुआ संदेश पढ़ा तो उन्होंने मुझे फोन किया। उन्होंने कहा, "तू बदल गया है" । परमेश्वर ने मेरे संदेश का इस्तेमाल मेरी माँ को यीशु के बारे में पूछने और अंततः उसे अपने निजी उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रेरित करने के लिए किया।
मत्ती 5 में यीशु ने अपने चेलों को जगत की ज्योति कहा (पद 14) फिर उसने कहा कि, “उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।”(पद16) जैसे ही हम यीशु को अपना उद्धारकर्ता करके स्वीकारते हैं तभी हम पवित्र आत्मा की सामर्थ्य को पा लेते हैं। वह हमें बदल देता है ताकि हम जहां भी जाएं, परमेश्वर की सच्चाई और प्रेम के चमकदार गवाह बन सकें।।
पवित्र आत्मा की सामर्थ्य द्वारा हम आशा और शांति की आनंदमय ज्योति बन कर चमक सके जो प्रतिदिन यीशु के प्रतिरूप में बदलता जाता है। ऐसे में हम जो भी भला काम करते हैं - वह धन्यवाद स्वरूप आराधना में बदलता जाता है जो दूसरों को आकर्षक लगती है और जीवंत विश्वास के रूप में देखी जा सकती है। पवित्र आत्मा को समर्पित होकर - पुत्र यीशु की ज्योति को प्रतिबिंबित करते हुए हम पिता को आदर पहुंचा सकते हैं।
सोचिल डिक्सन
प्रत्येक जन आराधना करता है
मैंने हाल ही में एथेंस, ग्रीस का दौरा किया। इसके प्राचीन अगोरा में घूमते हुए - वह बाज़ार जहाँ दार्शनिक पढ़ाते थे और एथेंस के लोग आराधना करते थे - मैंने अपोलो और ज़ीउस की वेदियाँ देखीं, जो सभी एक्रोपोलिस की छाया में थीं, जहाँ कभी देवी एथेना की एक मूर्ति खड़ी थी।
आज हम अपोलो या ज़ीउस के सामने नतमस्तक नहीं हो सकते, लेकिन समाज भी उतना ही धार्मिक है। उपन्यासकार डेविड फोस्टर वालेस ने कहा, "हर कोई पूजा करता है," और साथ ही चेतावनी दी: "अगर आप पैसे और चीज़ों की पूजा करते हैं... तो आपके पास कभी भी पर्याप्त नहीं होगा... अपने शरीर और सुंदरता की पूजा करें... और आप हमेशा बदसूरत महसूस करेंगे... अपनी बुद्धि की पूजा करें... [और] आप बेवकूफ़ महसूस करेंगे।" हमारे धर्मनिरपेक्ष युग के अपने देवता हैं, और वे अच्छे नहीं हैं ।
“एथेंस के निवासियों!” पौलुस ने अगोरा का दौरा करते हुए कहा, मैं देखता हूँ कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े माननेवाले हो (प्रेरितों 17:22)। प्रेरित ने सच्चे परमेश्वर को एक सृष्टिकर्ता परमेश्वर के रूप में बताया है(पद 24-26) जो अपने आप को प्रकट करना चाहता है (पद 27) और उसने यीशु मसीह के पुनरुत्थान द्वारा स्वयं को प्रकट किया(पद 31), यह परमेश्वर अपोलो और ज़ीउस की तरह मानव रचित नहीं है । पैसे, सुंदरता या बुद्धि के विपरीत, उसकी आराधना करने से हम बर्बाद नहीं होंगे।
हमारा "परमेश्वर" वह है जिस पर हम हमें उद्देश्य और सुरक्षा देने के लिए भरोसा रखते हैं। शुक्र है, जब हर सांसारिक परमेश्वर हमें विफल कर देता है, एकमात्र सच्चा परमेश्वर हमें मिलने के लिए तैयार होता है। (पद 27)
-शेरीडेन वोईसे
यीशु अनुकरण करने के योग्य है
रोनित एक धार्मिक लेकिन गैर मसीही परिवार से आती है। उनकी आत्मिक चर्चाएं बड़ी ही नीरस व सैद्धान्तिक होती थी। उसने बाइबल का अध्ययन करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे, लगातार, वह यीशु में मसीहा के रूप में विश्वास की ओर बढ़ती गई। रोनित उस निर्णायक क्षण का वर्णन करते हैं: "मैंने अपने दिल में एक स्पष्ट आवाज़ सुनी, जो कह रही थी 'तुमने बहुत कुछ सुन लिया है। तुमने बहुत कुछ देख लिया है। अब बस विश्वास करने का समय है।'" लेकिन रोनित को एक समस्या का सामना करना पड़ा: उसके पिता। "मेरे पिता ने इस तरह प्रतिक्रिया व्यक्त की जैसे माउंट वेसुवियस फट गया हो," वह याद करती हैं
जब यीशु इस पृथ्वी पर चलते थे तो उनके पीछे भीड़ चलती थी (लूका 14:25) हमें स्पष्ट रूप से पता नहीं है कि भीड़ क्या ढूंढ रही थी, परंतु यीशु चेलों की तलाश में था । और उसके लिए कीमत चुकानी पड़ती है । “यदि कोई मेरे पास आए, और अपने पिता और माता और पत्नी और बच्चों और भाइयों और बहिनों वरन् अपने प्राण को भी अप्रिय न जाने, तो वह मेरा चेला नहीं हो सकता", यीशु ने कहा (पद 26)। उसने एक गढ़ बनाने के विषय कहानी कही । "पहले बैठकर खर्च न जोड़े....? उसने पूछा (पद 28)। यीशु का मतलब अपने परिवार से घृणा करना नहीं था परंतु यह कहना चाह रहे थे कि इन सबसे बढ़कर हमें उसका चुनाव करना है । उन्होंने कहा, "तुम में से जो कोई अपना सब कुछ त्याग न दे, वह मेरा चेला नहीं हो सकता"(पद 33)।
रोनित अपने परिवार को बहुत प्रेम करती हैं फिर भी उसने कहा चाहे कितनी भी कीमत क्यों ना हो मैंने जान लिया है कि वह योग्य है। यीशु आपका मार्गदर्शन कर रहे हैं तो उनका अनुसरण करने के लिए आपको क्या त्यागने की आवश्यकता हो सकती है?
- टिम गुस्ताफ़सन