“सोने जाने से पहले कृपया सामने का कमरा साफ कर देना”, मैंने अपनी एक बेटी से कहा। तुरंत उत्तर आया, “वह क्यों नहीं करती है?”

जब हमारी बेटियाँ छोटी थीं तब हमारे घर में ऐसा हल्का विरोध अक्सर होता था। मेरी प्रतिक्रिया हमेशा एक ही थी : “अपनी बहनों के बारे में चिंता मत करो; मैंने तुम से कहा है।”

यूहन्ना 21 में, हम शिष्यों के बीच इस मानवीय प्रवृत्ति को चित्रित होते हुए देखते हैं। पतरस द्वारा तीन बार उसका इन्कार किये जाने के बाद यीशु ने पतरस को बहाल कर दिया था (यूहन्ना 18:15-18, 25-27 देखें)। अब यीशु ने पतरस से कहा, मेरे पीछे हो ले! (21:19)—एक सरल लेकिन कठिन आदेश । यीशु ने समझाया कि पतरस मृत्यु तक उसका अनुसरण करेगा (पद.18-19)।

पतरस के पास यीशु के शब्दों को समझने का समय ही नहीं था, इससे पहले उसने उसके पीछे आते शिष्य के बारे में पूछा : “हे प्रभु, इस का क्या?” (पद.21) l यीशु ने उत्तर दिया, “यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या?” फिर उसने कहा, “तू मेरे पीछे हो ले।” (पद.22)।

कितनी बार हम पतरस की तरह होते हैं! हम दूसरों की विश्वास यात्राओं के बारे में सोचते हैं न कि परमेश्वर हमारे साथ क्या कर रहा है उसके बारे में । अपने जीवन के अंत में, जब यूहन्ना 21 में यीशु की मृत्यु की भविष्यवाणी बहुत करीब थी, पतरस ने मसीह के सरल आदेश को विस्तार से बताया : “आज्ञाकारी बालकों के समान अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो । पर जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो।”(1 पतरस 1:14-15)। यह हममें से प्रत्येक को यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए पर्याप्त है, न कि हमारे आस-पास के लोगों पर। मैट लूकस