जब मैं वर्षों पहले सेमिनरी में पढ़ रहा था, तो हमारे यहां साप्ताहिक चैपल आराधना सभा होती थी। एक सभा में, जब हम छात्र ” कितना महान, कितना महान” गा रहे थे, तो मैंने अपने तीन प्रिय प्रोफेसरों को उत्साह के साथ गाते हुए देखा। उनके चेहरों पर खुशी झलक रही थी, जो परमेश्वर में उनके विश्वास से ही संभव हुआ। वर्षों बाद, जब हर एक जानलेवा बीमारी से गुज़रा, यह विश्वास ही था जिसने उन्हें सहन करने और दूसरों को प्रोत्साहित करने में सक्षम बनाया।

आज, मेरे शिक्षकों के गायन की याद मुझे मेरी आजमाइशों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। मेरे लिए, वे उन लोगों की कई प्रेरक कहानियों में से कुछ हैं जो विश्वास के आधार पर जीते थे। वे इस बात की याद दिलाते हैं कि हम इब्रानियों 12:2-3 में लेखक के आह्वान का पालन कैसे कर सकते हैं ताकि हम अपनी आँखें यीशु पर केंद्रित कर सकें जो “जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था . . . क्रूस का दुख सहा”(पद.2)।

जब आजमाइशें—अत्याचार या जीवन की चुनौतियों से—चलते रहना कठिन हो जाता है, तो हमारे पास उन लोगों का उदाहरण है जिन्होंने परमेश्वर के वचनों पर और उसके वादों पर विश्वास किया । हम “वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से [दौड़ सकते हैं]” (पद.1), यह याद करते हुए कि यीशु—और जो हमसे पहले चले गए हैं—सहन करने में सक्षम थे। लेखक हमसे “उस पर ध्यान करने” का आग्रह करता है . . . ताकि [हम]निराश होकर हियाव न छोड़ दें”(पद.3)।

मेरे शिक्षक, जो अब स्वर्ग में खुश हैं, संभवतः कहेंगे : “विश्वास का जीवन इसके लायक है। चलते रहिये।” करेन ह्वांग