भारतीय संविधान की आधिकारिक प्रति केवल एक कानूनी पुस्तक नहीं है। यह कला का एक काम है, जो काले चमड़े से मढ़ा हुआ है और सोने से अलंकृत है। यह दस्तावेज़ कलात्मक महत्व रखता है क्योंकि इसे प्रेम बिहारी नारायण रायज़दा ने 15 से अधिक प्रकार की स्याही निब का उपयोग करके हाथ से लिखा था। उनकी सुंदर सुलेख संविधान के पन्नों को एक कालातीत सुन्दरता प्रदान करता है। शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा किए गए चित्रण इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं, जो पन्नों को सिंधु घाटी सभ्यता की कला से सजाते हैं और देश भर से विभिन्न आदिवासी कलाकृतियों को प्रदर्शित करते हैं। वर्तमान में हीलियम कक्ष में संरक्षित, यह भारतीय गणराज्य की सबसे क़ीमती संपत्तियों में से एक है।

संविधान की तरह, जो नागरिकों के रूप में हमारे लिए अमूल्य है, बाइबल मसीह में विश्वासियों के रूप में हमारे लिए एक क़ीमती संपत्ति है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये शब्द हमें सही मार्ग पर चलने में मदद करते हैं (पद.9)। यह उठाने के लिए बोझ नहीं है, बल्कि एक खुशी और आनंद है (पद.14-16)। भजन संहिताकार ने पवित्र शास्त्र की तुलना “सब प्रकार के धन”(पद.14) से की है, जिसके बारे में वह कहता है कि यह उसके हृदय में “रखी हुई है,” क्योंकि वह जानता है कि यह उसके दैनिक जीवन में कितना मूल्य जोड़ता है (पद.11)।

हमारी तेज़-रफ़्तार दुनिया में, परमेश्वर के वचन के साथ समय बिताना अक्सर एक ऐसा काम लगता है, जिसे टाला जा सकता है। लेकिन हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह एक ख़ज़ाना है। अक्सर जब हम कठिन निर्णयों का सामना करते हैं, तो यह परमेश्वर का वचन ही होता है जो हमें मार्गदर्शन, सांत्वना और फटकार देता है। जब हम पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में प्रतिदिन पवित्रशास्त्र को पढ़ते, मनन करते और उससे जुड़ते हैं, तो हम वास्तव में परमेश्वर के अपरिवर्तनीय वचन के ख़ज़ाने की सीमा को समझ पाएँगे। रेबेका विजयन