कच्ची मछली और वर्षा का जल l तिमोथी नाम का एक ऑस्ट्रेलियाई नाविक तीन महीने तक केवल इन्हीं प्रावधानों पर जीवित रहा l तूफ़ान से क्षतिग्रस्त बेड़ा पर असहाय होकर, वह उम्मीद खो रहा था—प्रशांत महासागर में भूमि से 1,200 मील दूर डोल रहा था l लेकिन तभी मेक्सीकन मछली पकड़ने वाली नाव के चालाक दल ने उसकी अस्थिर नाव को देखा और उसे बचा लिया l बाद में, दुबले-पतले और मौसम से पीड़ित व्यक्ति ने कहा, “मेरी जान बचाने वाले कप्तान और मछली पकड़ने वाली कंपनी का, मैं बहुत आभारी हूँ!”

तिमोथी ने अपनी कटु अनुभव के बाद धन्यवाद दिया, लेकिन दानिय्येल भविष्यवक्ता ने संकट से पहले, उसके दौरान और बाद में एक धन्यवादी हृदय प्रकट किया l अन्य यहूदियों के साथ यहूदा से बेबीलोन में निर्वासित किये जाने के बाद(दानिय्येल 1:1-6), दानिय्येल शासन में आ गया लेकिन उसे अन्य अगुओं से धमकी मिली जो उसे मरवाना चाहते थे(6:1-7) l उसके शत्रुओं ने बेबीलोन के राजा से एक आदेश पर हस्ताक्षर करवाया कि जो कोई भी “किसी और . . . देवता से विनती करे, वह सिंहों की मांद में डाल दिया जाए”(पद.7) l सच्चे परमेश्वर से प्रेम करने और उसकी सेवा करने वाला दानिय्येल, क्या करता? “जैसा वह . . . अपने परमेश्वर के सामने घुटने टेककर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता [रहा]”(पद.10) l उसने धन्यवाद दिया, और अपने धन्यवादी हृदय को पुरुस्कृत किया गया क्योंकि परमेश्वर ने उसके जीवन को बचाया उसे सम्मान दिलाया(पद.26-28) l

जैसा कि प्रेरित पौलुस ने लिखा, परमेश्वर हमें “हर बात में धन्यवाद [करने]” में सहायता करें(1 थिस्सलुनीकियों 5:18) l चाहे हम किसी संकट का सामना कर रहे हों या अभी-अभी उसमें से निकले हों, एक धन्यवादी प्रतिक्रया उसका सम्मान करती है और हमारे विश्वास को बनाए रखने में मदद करती है l टॉम फेल्टन