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Articles by आदम अर होल्ज़

अवसर की ओर कदम बढ़ाना

आम व्यक्तियों के समान, पर्याप्त व्यायाम के लिए मैं भी संघर्ष करता हूँ। हाल ही में मुझे  एक पेडोमीटर मिला जो कदमों को गिनता है। अब सोफे से उठना कुछ और कदम चलने का अवसर लगता है। ऐसे काम करना जैसे बच्चे को पानी ला देना आदि ऐसे अवसर होते हैं जो बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने में मेरी सहायता करते हैं। उस अर्थ में, मेरे पैडोमीटर ने मेरी धारणा और मेरी प्रेरणा बदल दिए हैं। अब जितना संभव हो मैं कुछ और कदम चलने के अवसर ढूंढता हूँ।

हमारा मसीही जीवन क्या कुछ ऐसा ही नहीं है। प्रत्येक दिन में लोगों की सेवा करने और उनसे बातचीत करने के अवसर होते हैं, जैसा पौलुस कुलुस्सियों 4:5 में समझाते हैं। परंतु क्या मैं साधारण प्रतीत होने वाली बातचीत में उत्साहजनक व्यक्ति होने के अवसर पर ध्यान देता हूँ? चाहे परिवार से, सहकर्मियों से या किराने की दुकान में काम करने वाले एक क्लर्क से हो, प्रत्येक बातचीत में परमेश्वर कार्य कर सकते हैं-भले ही वह “छोटी सी” प्रतीत होने वाली बात क्यों न हो, जैसे किसी रेस्तरां में वेटर से उसका हाल चाल पूछना।

जब हम उन अवसरों के प्रति सचेत होंगे जिन्हें वे हमारी ओर भेजते हैं, तो कौन जाने कि परमेश्वर उन क्षणों में कैसे काम करेंगे।

प्रतिज्ञाएं, प्रतिज्ञाएं

मेरी बेटी और मैं "पिन्चर्स" खेल खेलते हैं। ऊपर चड़ते हुए मैं उसका पीछा करता हूँ और उसकी चुटकी काटता हूँ। मैं तभी पिंच कर सकता हूँ जब वह सीढ़ियों पर हो। ऊपर पहुंचते ही वह सुरक्षित होगी। जब वह खेलने के मूड में न हो और मैं उसे सीढ़ियों में पाऊँ तो कहती है, "पिंचर्स नहीं!" मैं कहता हूँ, "पिंचर्स नहीं! प्रॉमिस।"

ऐसी प्रतिज्ञा साधारण बात है। लेकिन जब मैंने जो कहा वह करता हूँ, तो उसे मेरे चरित्र की पहचान होती है। कथनी अनुसार करनी के मेरे गुण का उसे अनुभव और भरोसा होता है कि मेरा कहना काफ़ी है, कि वह मुझ पर भरोसा कर सकती है। यह एक छोटी बात है। लेकिन प्रतिज्ञाएं-या मुझे कहना चाहिए कि, उन्हें निभाना-संबंधों को जोड़ने की गोंद होती हैं। ये प्रेम और विश्वास की नींव बनाती हैं।

पतरस  ने लिखा कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं हमें "ईश्वरीय स्वभाव में सहभागी" बनाती हैं। (2 पतरस 1:4) परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर विश्वास कर, हमारे प्रति उनके ह्रदय को हम समझ पाते हैं। उनके वचन पर हमारा निर्भर होना उन्हें अपनी विश्वासयोगिता सिद्ध करने का अवसर देता है। मैं धन्यवादी हूँ कि बाइबिल उनकी प्रतिज्ञाओं से भरी है, जो याद दिलाती हैं कि "उसकी दया अमर है..."(विलापगीत 3:22-23)।

एक सेवक का दिल बढ़ाना

ऑफिस से घर लौटने पर मेरा "अन्य" काम करने का समय हो गया था। मेरी पत्नी और बच्चों के अभिवादन जल्द ही इन अनुरोधों में बदल गए, "डैड, रात के खाने के लिए क्या है"? "डैड, मेरे लिए आप पानी ला देंगे"? "डैड, हम फुटबॉल खेलें"?

मैं कुछ देर सुस्ताना चाहता था। उस समय परिवार की जरूरतों को पूरा करने का मन नहीं था। तभी मैंने एक थैंक-यू कार्ड देखा जो चर्च में मेरी पत्नी को किसी से मिला था। उसमें पानी का एक बर्तन, एक तौलिया, और मैले सैंडल का चित्र बना हुआ था और नीचे लूका 22:27 पद लिखा हुआ था:“मैं तुम्हारे बीच में सेवक की नाईं हूं।”

यीशु खोए हुओं को ढूंढ़ने... (लूका 19:10)। यदि यीशु अपने शिष्यों के लिए ऐसे काम करने को तैयार थे, जो सेवक करते थे-जैसे शिष्यों के पैर धोना जो निसन्देह रूप से मैले रहे होंगे (यूहन्ना 13:1-17)-तो मैं बिना शिकायत अपने बेटे को पानी लाकर दे सकता था। मुझे अहसास हुआ कि अपने परिवारवालों के अनुरोध मानना केवल एक दायित्व ही नहीं हैं लेकिन यीशु का सेवक का दिल और प्रेम दिखाने का अवसर भी हैं। उस व्यक्ति के समान बनने का अवसर जिसने हमारे लिए अपने जीवन को दे दिया और अपने शिष्यों की सेवा की।