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Articles by डेव ब्रेनन

भलाई

दो किशोरियों की कल्पना करें l एक मजबूत और स्वस्थ्य है l दूसरी असहाय l वह अपने व्हीलचेयर में जीवन की सामान्य भावनात्मक चुनौतियों के साथ अनेक शारीरिक तकलीफ और संघर्ष से भी जूझती है l 

किन्तु दोनों परस्पर संगति का आनंद लेती हुई खुश हैं l दो खुबसूरत किशोरियाँ-प्रत्येक दूसरे में मित्रता का खज़ाना देखती हैं l

यीशु ने अपना अधिक समय और ध्यान ऐसे लोगों में लगाया जो व्हीलचेयर में लड़की की तरह थे l आजीवन असक्तता अथवा शारीरिक विकलांगता वाले लोगों के साथ जिनको विभिन्न कारणों से नीचा देखा जाता था l वास्तव में, यीशु ने धार्मिक अगुओं की घृणा के पात्र “उनमें से” एक को उसे अभियंजित करने दिया (लूका 7:39) l  एक और अवसर पर, जब एक स्त्री ने समान क्रिया द्वारा प्रेम दर्शाया, यीशु ने उसके आलोचक से कहा, “उसे छोड़ दो; ..उस ने तो मेरे साथ भलाई की है” (मरकुस 14:6) l

परमेश्वर सबको समान महत्व देता है; उसकी नज़रों में सब बराबर हैं l वास्तव में, हम सभों को मसीह के प्रेम और क्षमा की घोर आवश्यकता है l उसके प्रेम ने उसे हमारे लिए क्रूस पर मरने को विवश किया l

हम भी यीशु की तरह प्रत्येक को देखें : और परमेश्वर के स्वरुप में रचित और उसके प्रेम के योग्य l मसीह के समान हम सब के साथ बराबरी का व्यवहार करें और उसकी तरह भलाई देखें l

हमें मालूम न था

एक स्थानीय कलीसिया के स्वयंसेवकों ने एक ठण्डी शाम को निम्न-आय वाले लोगों के भवन-समूहों में भोजन वितरण किया l एक स्त्री भोजन पाकर उल्लासित हुई l उसने अपनी खाली आलमारी दिखाकर उनसे कहा कि वे उसकी प्रार्थनाओं के उत्तर थे l

स्वयंसेवकों के चर्च लौटने पर एक महिला रोने लगी l “जब मैं छोटी थी,” उसने कहा, “वह महिला मेरी सन्डे स्कूल शिक्षिका थी l वह प्रत्येक रविवार चर्च आती है l हमें मालूम न था कि वह लगभग भूखी मर रही है!”

स्पष्तः: वे लोग चिंता करनेवाले लोग थे जो परस्पर बोझ उठाना चाहते थे, जैसे पौलुस गलातियों 6:2 में सलाह देता है l फिर भी उन्होंने स्त्रियों की ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दिया था-जिसको वे प्रति रविवार देखते हैं-और उसने अपनी ज़रूरतें नहीं बताई थी l यह हमारे लिए अपने चारों-ओर के प्रति और अभिज्ञ रहने की कोमल ताकीद हो सकती है और, जैसे पौलुस कहता है, “जहां तक, अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें, विशेष करके विश्वासी भाइयों के साथ” (6:10) l

एक साथ उपासना करनेवालों को परस्पर सहायता करने का अवसर है ताकि मसीह की देह में कोई सहायता विहीन न रहे l जब हम एक दूसरे को जानते और चिंता करते हैं, शायद हमें कभी नहीं कहना पड़ेगा, “हमें मालूम न था l”

यह कभी खाली नहीं होता

सेवा निवृत होनेवाली एक मित्र से उनके जीवन के अगले पड़ाव के विषय पूछने पर वह बोली, “मुझे निश्चित करना होगा कि मेरे पास पैसा हो l” अगले दिन अपने वित्तीय सलाहकार से बातचीत करते समय उसने मुझे समझाया किस तरह मैं पैसे के अभाव से बच सकता हूँ l निःसंदेह, हम अपने बाकी जीवन की ज़रूरतों के लिए श्रोत…

इवी का निर्णय

25 अमरीकी किशोर में इवी हाई स्कूल गायक-मण्डली में एक थी जिसने एक भिन्न संस्कृति और पीढ़ी के लोगों में गाने, साक्षी देने, और परमेश्वर का प्रेम प्रगट करने गई l  और इवी के लिए, उस दौरे का एक दिन विशेषकर यादगार और आनंदपूर्ण था l

उस दिन, गायक-मण्डली एक नर्सिंग-होम में गाने और आवासियों से मिलने गए l गाने…

परमेश्वर की बातें

हाल ही में, मेरा दामाद मेरी नातिन मैगी को समझाया कि परमेश्वर और हम परस्पर संवाद कर सकते हैं l इविंग के मैगी को बताने पर कि परमेश्वर हमसे कभी-कभी बाइबिल द्वारा बात करता है, वह हिचकिचायी : “अच्छा, उसने मुझसे कुछ नहीं कहा l मैंने परमेश्वर को कभी बात करते नहीं सुना l”

अनेक लोग मैगी से सहमत होंगे,…

कौन आपको देख रहा है?

रिओ दी जनेरियो शहर के चारों ओर से खिलाड़ियों को यीशु दिखाई देगा l ब्राजील शहर से बहुत ऊपर और 2,310 फीट ऊंचे कोरकोवादो पहाड़ पर 100 फीट ऊँची क्रिस्टो रे देनटोर (ख्रिस्त द रिडीमर) यीशु की प्रतिमा है l खुली बाहों के साथ, यह विशाल मूर्ति इस फैलते शहर के हर कोने से रात-दिन दिखाई देती है l

निगाहें…

सरल मार्ग?

अक्सर जीवन मार्ग कठिन है l इसलिए यदि हमारी अपेक्षा है कि परमेश्वर हमें सरल मार्ग देगा, मार्ग कठिन होने पर हम उसकी ओर अपनी पीठ करने की परीक्षा में पड़ सकते हैं l

यदि आपने कभी ऐसी कोशिश की है, इस्राएलियों के विषय विचारें l सैंकड़ों वर्षों के दासत्व पश्चात स्वतंत्रता मिलने पर वे प्रतिज्ञात देश की ओर चल…

आओ और आराम करो

मेरे बचपन में, हमारा परिवार हर महीने ओहायो से पशिचम वर्जिनिया मेरे नाना-नानी के पास मिलने जाता था l हर बार उनके फार्महाउस के दरवाजे पर पहुँचने पर, लेस्टर नानी, “आओ और विश्राम करो,” शब्दों से हमारा स्वागत् करती थीं l यह उनका हमें आराम देने और कुछ समय रहकर हाल के बातों से अवगत् होने का तरीका था l…

नाम से बुलाया गया

मैं कॉलेज लेखन कक्षा के अपने नए छात्रों के समूह का नाम पहले से जानता हूँ l मैं समय निकालकर छात्र नामावली से उनके नाम और तस्वीर से परिचित होता हूँ, इसलिए उनकी कक्षा में प्रवेश कर बोल सकता हूँ, “हेलो, जेसिका,” या “ट्रेवर स्वागत है l” मैं ऐसा करता हूँ क्योंकि मुझे ज्ञात है कि किसी को नाम से…