Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by एलिसा मॉर्गन

आनंदित धन्यवादी

मनोवैज्ञानिक रॉबर्ट एम्मन्स के एक अध्ययन ने स्वयंसेवकों को तीन समूहों में विभाजित किया, जिनमें से प्रत्येक ने पत्रिकाओं में साप्ताहिक प्रविष्टियां कीं। एक समूह ने पांच चीजें लिखीं जिनके लिए वे आभारी थे। एक ने पांच दैनिक परेशानियों का वर्णन किया। और एक नियंत्रण समूह ने उन पांच घटनाओं को लिखा जिन्होंने उन्हें छोटे रूप  से प्रभावित किया था। अध्ययन के परिणामों से पता चला कि कृतज्ञता समूह के लोग समग्र रूप से अपने जीवन के बारे में बेहतर महसूस करते थे, भविष्य के बारे में अधिक आशावादी थे, और स्वास्थ्य समस्याए कम थी ।

धन्यवाद देना हमारे जीवन को देखने के तरीके को बदलता है। धन्यवादी होना हमें और भी आनंदित बना है।

बाइबल में लंबे समय से परमेश्वर को धन्यवाद देने के लाभों की प्रशंसा की है, क्योंकि ऐसा करना हमें उसके चरित्र की याद दिलाता है। भजन संहिता बार-बार परमेश्वर के लोगों को धन्यवाद देने के लिए बुलाती है “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये,” (भजन 100:5) और उसके अटल प्रेम और अद्भुत कार्यों के लिए उसका धन्यवाद करने के लिए (107:8, 15, 21, 31) .

जैसे प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखे अपने पत्र को समाप्त किया—यह पत्र अपने आप में एक कलीसिया है जिन्होंने उसकी सहायता की थी के लिए एक प्रकार का धन्यवाद-पत्र था—उसने आभारी प्रार्थनाओं को परमेश्वर की शांति के साथ जोड़ा " जो सारी समझ से परे है" (4:7)। जब हम परमेश्वर और उसकी भलाई पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हम पाते हैं कि हम बिना किसी चिंता के, हर स्थिति में, धन्यवाद के साथ प्रार्थना कर सकते हैं। धन्यवाद देने से हमें एक ऐसी शांति मिलती है जो हमारे दिल और दिमाग की अद्भुत रूप से रक्षा करती है और हमारे जीवन को देखने के तरीके को बदल देती है। कृतज्ञता से भरा हृदय आनंद की भावना का पोषण करता है।

दीवाल में एक छेद

मेरे फूलों को कुछ खा रहा था। खिलने से एक दिन पहले, कलियों ने गर्व से अपना सिर उठा लिया था। अब वे बिना सिर के तना थे। मैंने अपने बाड़े के परिधि में छान-बिन की, और लकड़ी के बाड़ में खरगोश के आकार के एक छेद की खोज की। खरगोश प्यारे हैं, लेकिन यह अजीब जानवर फूलों से भरे बगीचे को कुछ ही मिनटों में चर सकते है। 

मैं आश्चर्य करता हूँ की हो सकता है मेरे जीवन में परमेश्वर के खिलते चरित्र को "घुसपैठियों" कुतर रही हो? नीतिवचन 25:28 कहता है, “वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह घेराव करके तोड़ दी गई हो.”। प्राचीन काल में शहर का दीवाल उसे शत्रुओं के आक्रमण से सुरक्षा देता था। दीवाल में एक छोट्टे से छेद का भी मतलब यह था की पूरा शहर हमले के लिए खुला था।

 बहुत सारे नीतिवचन संयम के बारे में है। बुद्धिमान मनुष्य ने लिखा “क्या तूने मधु पाया? तो जितना तेरे लिए ठीक हो उतना ही खाना.” (25:16)। संयम पवित्र आत्मा का फल है जो हमारा मार्गदर्शन, और अधीर, कड़वाहट, लालच होने, अन्य कीट जो घुसपैठ कर सकते हैं और हमारे जीवन में परमेश्वर के फसल को  नष्ट कर सकता है उससे सुरक्षा प्रदान करता है (देखे गलतियों 5:22-23)। संयम एक स्वस्थ मानसिकता है जो हमारे जीवनों के दीवालों में छिद्रों को देखता है और उसे ठीक करता है।

जब मैंने अपने जीवन के परिधि की जाँच की, कभी-कभी मैं कमजोर छिद्रों को देख सकता हूँ। एक ऐसी जगह जहां मैं बार-बार प्रलोभित होता हूं। अधीरता का एक जगह। ओह, कैसे मेरे जीवन में मुझे वैसे कीटों से सुरक्षित रखने के लिए परमेश्वर के स्वस्थ दिमाग के संयम की जरूरत है!

मोनस्ट्रो द गोल्डफिश

लेसी स्कॉट अपने स्थानीय पालतू जानवरों की दुकान पर थी जब टैंक के तल पर एक उदास मछली ने उसकी नज़र पकड़ी। उसकी शल्क काली पड़ गई थी और उसके शरीर पर घाव हो गए थे। लेसी ने दस साल की मछली को बचाया, उसका नाम "मॉन्स्ट्रो" रखा, और उसे एक "अस्पताल" टैंक में रखा, जहाँ हर दिन उसका पानी बदला जाता था। धीरे-धीरे, मॉन्स्ट्रो में सुधार आया, उसने तैरना शुरू किया, और आकार में बढ़ने लगा। उसके काले शल्क सुनहरे रंग में बदल गए। लेसी की प्रतिबद्ध देखभाल के कारण, मॉन्स्ट्रो नया बन गया !

लूका १० में, यीशु एक यात्री की कहानी बताता है जिसे पीटा गया, लूटा गया, और मृत अवस्था में छोड़ दिया गया। एक याजक और एक लेवी दोनों, उस आदमी की पीड़ा को नज़रअंदाज़ करते हुए वहाँ से गुज़र गए। परन्तु एक सामरी-एक तिरस्कृत लोगों के समूह का सदस्य-उसकी देखभाल करता है, यहाँ तक कि उसकी ज़रूरतों का भी पूरा दाम चुकाता है (लूका १०:३३-३५)। कहानी में सामरी को सच्चे "पड़ोसी" के रूप में घोषित करते हुए, यीशु ने अपने सुननेवालों को ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

लेसी ने एक मरती हुई सुनहरी मछली के लिए जो किया, वह हम अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों के लिए कर सकते हैं। बेघर, बेरोजगार, विकलांग और एकाकी "पड़ोसी" जिन्हें हम अपनी राह में पाते हैं। हम होने दे की उनकी उदासी को हमारी आँखे पकड़ सके और एक मित्रतापूर्ण चिंता हमारा उनके प्रति प्रतिउत्तर हो। एक दया से भरा अभिवादन। एक साझा भोजन। हथेली से हथेली में कुछ पैसे पहुँचाना। दूसरों को अपना प्रेम प्रदान करने के लिए परमेश्वर हमारा उपयोग कैसे कर सकता है, एक ऐसा प्रेम जो सभी चीजों को नया बना सकता है?

भोजन जो कहता है कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ

मैंने एक परिवार के जन्मदिन की सभा में भाग लिया जहाँ परिचारिका ने “पसंदीदा चीजों” की थीम को सजावट को,  उपहारों,  और भोजन में शामिल किया। क्योंकि बर्थडे गर्ल को पनीर और फल और रेड वेलवेट केक पसंद थे, परिचारिका ने पनीर को ग्रिल किया, फलों को काटा और उसके पसंदीदा केक का ऑर्डर दिया। पसंदीदा खाने की चीजें कहती हैं“ मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।”

बाइबल में भोजों, दावतों और त्योहारों के कई संदर्भ हैं, जो खाने के शारीरिक कार्य को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के उत्सव के साथ जोड़ते हैं। दावत देना इस्राएलियों द्वारा प्रचलित आराधना की बलिदान प्रणाली का एक हिस्सा था (गिनती 28:11–31)— फसह के साथ, सप्ताहों का त्योहार, और हर महीने चाँद का पर्व। और भजन संहिता 23:5 में परमेश्वर प्रचुर मात्रा में भोजन के साथ एक मेज तैयार करता है और प्याले दया और प्रेम से भरे हुए हैं। शायद भोजन और दाखरस की सबसे उत्तम जोड़ी जो कभी व्यक्त की गई थी वह उस समय, जब यीशु ने रोटी का एक टुकड़ा तोड़ा और एक कटोरे में दाखरस लिया, जो हमारे उद्धार के लिए क्रूस पर उसकी मृत्यु के उपहार को दर्शाता है। फिर उसने हमें “मेरी याद में ऐसा करने” के लिए चुनौती दी (लूका 22:19)।

आज जब आप भोजन करते हैं, तो उस परमेश्वर पर विचार करने के लिए कुछ समय निकालें, जिसने मुंह और पेट दोनों को बनाया और अपनी वफादारी के उत्सव में अपने प्रेम की भाषा के रूप में आपको भोजन प्रदान किया। हमारा एक ईश्वर है जो विश्वासियों के साथ दावत खाता है, हमारी महान आवश्यकता के साथ अपने पूर्ण प्रावधान को जोड़कर कहता है, “मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।”

 

फल पेड़ बेचता है

एक नर्सरी का मालिक आड़ू के पेड़ बेचने निकली। उसने विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार किया। क्या उसे सुंदर तरीके से पत्तेदार पौधों को टाट के बोरों में पंक्तिबद्ध करना चाहिए ? क्या उसे विकास के विभिन्न मौसमों में आड़ू के पेड़ों को चित्रित करते हुए एक रंगीन कैटलॉग बनाना चाहिए? आखिर में उसे एहसास हुआ कि वह क्या चीज़ है जो वास्तव में आड़ू का पेड़ बेचती है— यह आड़ू है जो उस पेड़ से पैदा होता है  मीठी महक, गहरा नारंगी रंग और चिकनी चमकीली त्वचा। आड़ू के पेड़ को बेचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि एक पका हुआ आड़ू तोड़ें, इसे तब तक काट कर खोलें जब तक कि रस आपके हाथ से नीचे न गिर जाए, और एक ग्राहक को एक टुकड़ा सौंप दें। जब वे फल का स्वाद लेते हैं, तो वे पेड़ चाहते हैं।

परमेश्वर अपने अनुयायियों में आत्मिक फल के आवरण में स्वयं को प्रकट करता है— प्रेम, आनंद, शांति, सहनशीलता (धैर्य), दया, भलाई, नम्रता, विश्वासयोग्यता, नम्रता और आत्म–संयम (गलातियों 5:22–23)। जब यीशु में विश्वासी ऐसे फल का प्रदर्शन करते हैं तो अन्य लोग भी उस फल को चाहते हैं, और इसलिएए उस फल के स्रोत की तलाश करेंगे जो इतना आकर्षक हो।

फल एक आंतरिक संबंध का बाहरी परिणाम है — हमारे जीवन में पवित्र आत्मा का प्रभाव। फल वह पहनावा है जो दूसरों को उस ईश्वर को जानने के लिए प्रेरित करता है जिसका हम प्रतिनिधित्व करते हैं। जैसे चमकीले आड़ू एक पेड़ की हरी पत्तियों में अलग से लगते हैं, आत्मा का फल भूख से मर रहे संसार के लिए घोषणा करता है,“यह रहा भोजन! यहां जीवन है! आओ और थकावट और निराशा से बाहर निकलने का रास्ता खोजें। आओ और परमेश्वर से मिलो!”

जीभ- प्रार्थना में बंधित

जब मेरे छोटे भाई की सर्जरी हुई, तो मैं चिंतित थी । मेरी माँ ने समझाया कि "जीभ-बंधक" (एंकिलोग्लोसिया/ankyloglossia) एक ऐसी अवस्था है जिसके साथ वह पैदा हुआ था और बिना मदद के, उसकी खाने और अंततः बोलने की क्षमता बाधित हो सकती थी। आज हम जीभ-बंधक शब्द का उपयोग यह वर्णित करने के लिए करते है कि हमारे पास शब्दों की घटी है या बोलने में शर्मिले हैं।

कभी-कभी प्रार्थना में बिना ये जाने कि क्या बोलना है हमारी जुबान बंधी रह सकती है। हमारी जीभ बार-बार एक ही आत्मिक कथन और दोहराए जाने वाले वाक्यांशों में बंधी होती है। हम अपनी भावनाओं को स्वर्ग की ओर ले जाते हैं, यह सोचते हुए कि क्या वे परमेश्वर के कानों तक पहुंचेंगे। हमारे विचार एक केंद्र-रहित राह पर भटकते रहते है ।

मसीह में पहली सदी के रोमी विश्वासियों को लिखते हुए, प्रेरित पौलुस हमे आमंत्रित करता है कि हम पवित्र आत्मा से सहायता पाए जब हम इस बात में संघर्ष करते है कि हमें किस प्रकार प्रार्थना करनी चाहिए। “आत्मा हमारी दुर्बलता में हमारी सहायता करता है। क्योंकि हम नहीं जानते कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए, परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर, जो बयान से बाहर हैं, हमारे लिये विनती करता है" (रोमियों 8:26)। यहां "सहायता" का संदर्भ भारी बोझ उठाने से है।  और "बिना शब्द कराहना" एक निवेदन करने वाली उपस्थिति को दिखाता  है जब पवित्रआत्मा हमारी आवश्यकताओं को परमेश्वर तक ले जाता है।

जब प्रार्थना में हमारी जीभ बंधी होती है, तो परमेश्वर का आत्मा हमारे भ्रम, दर्द और व्याकुलता को सही आकार देकर ऐसी सिद्ध प्रार्थना में बदलने में मदद करता है जो हमारे दिलों से परमेश्वर के कानों तक जाती है। वह सुनता है और उत्तर देता है, और हमारी आवयश्कता के अनुसार ठीक वैसी ही शान्ति हमें देता है जिसे हम स्वयं नहीं जानते होते जब तक कि हम उसे अपने लिए प्रार्थना करने को नहीं कहते।

ग्लानिहीन आँसू

"मुझे क्षमा करें," सीमा ने अपने बहते आँसुओं के लिए क्षमा माँगते हुए कहा। अपने पति की मृत्यु के बाद, उसने अपने किशोर बच्चों की देखभाल के लिए खुद को आगे बढ़ाया। जब चर्च के पुरुषों ने उनका मनोरंजन करने और उन्हें छुट्टी देने के लिए एक सप्ताहांत कैंपिंग सैर प्रदान किया, तो सीमा कृतज्ञता के साथ रोई, अपने आँसुओं के लिए बार-बार माफी माँगी।

हम में से बहुत से लोग अपने आंसुओं के लिए माफी क्यों मांगते हैं? शमौन, एक फरीसी, ने यीशु को भोजन पर आमंत्रित किया। भोजन के बीच में, जब यीशु मेज पर आराम से बैठे हुए थे, एक महिला जो एक पापी जीवन व्यतीत कर रही थी, इत्र का संगमरमर पात्र ले आई। “और उसके पांवों के पास, पीछे खड़ी होकर, रोती हुई, उसके पांवों को आंसुओं से भिगाने और अपने सिर के बालों से पोंछने लगी"(लूका 7:38)। बिना ग्लानि के, इस महिला ने खुलकर अपने प्यार का इजहार किया और फिर यीशु के पैरों को सुखाने के लिए अपने बालों को खोल दिया। यीशु के लिए आभार और प्रेम से उमड़कर, उसने अपने आंशुओं के बाद, सुगंधित चुंबन से भर दिया─कार्य जो जायज के विपरीत था लेकिन जो उस ठंडे मन के मेजबान से विपरीत था।

यीशु की प्रतिक्रिया? उसने उसके प्रेम की विपुल अभिव्यक्ति की प्रशंसा की और उसे "क्षमा किया हुआ" घोषित किया (पद 44-48)।

जब आँसुओं के अधिक बहने का डर होता है हम कृतज्ञता के उन आँसुओं को कुचलने के लिए प्रलोभित होते हैं l लेकिन परमेश्वर ने हमें भावनात्मक प्राणी बनाया है, और हम अपनी भावनाओं का उपयोग उसका सम्मान करने के लिए कर सकते हैं। लूका के सुसमाचार में स्त्री की तरह, आइए हम अपने अच्छे परमेश्वर के लिए अपने प्रेम को बिना किसी खेद के व्यक्त करें जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करता है और हमारी आभारी प्रतिक्रिया को स्वतंत्र रूप से स्वीकार करता है।

परमेश्वर का दाहिना हाथ

मैंने अपने बूढ़े कुत्ते, विल्सन को घास से बाहर निकालने में मदद की और इस प्रक्रिया में, मैंने सिर्फ एक मिनट के लिए अपने छोटे कुत्ते, कोच का पट्टा छोड़ दिया। जैसे ही मैं कोच की रस्सी लेने के लिए झुकी, उसने एक खरगोश को देखा। वह भाग गया, मेरे दाहिने हाथ से पट्टा छीन लिया और इस प्रक्रिया में मेरी अनामिका उंगली पूरी तरह मुड़ गयी। मैं घास पर गिर पड़ी और दर्द से कराह उठी।

तत्काल उपचार से लौटने और यह जानने के बाद कि मुझे सर्जरी की आवश्यकता है, मैंने परमेश्‍वर से मदद की भीख मांगी। "मैं एक लेखक हूँ! मैं कैसे टाइप करूंगी? मेरे दैनिक कर्तव्यों के बारे में क्या?" जैसा कि परमेश्वर कभी-कभी करता है, उसने मेरे दैनिक बाइबल पढ़ने से मुझसे बात की। “क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तेरा दहिना हाथ पकड़कर तुझ से कहता है, मत डर; मैं तेरी सहायता करूंगा" (यशायाह 41:13)। मैंने संदर्भ पर गौर किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि यहूदा में परमेश्वर के लोग, जिनसे यशायाह अपना संदेश कह रहा था, उसके साथ एक विशेष संबंध का आनंद लिया। उसने अपनी धार्मिक स्थिति के माध्यम से अपनी उपस्थिति, शक्ति और सहायता का वादा किया, जो उसके दाहिने हाथ के प्रतीक हैं (पद 10)। पवित्रशास्त्र में कहीं और, परमेश्वर के दाहिने हाथ का उपयोग उसके लोगों के लिए विजय प्राप्त करने के लिए किया जाता है (भजन संहिता 17:7; 98:1)।

मेरे ठीक होने के हफ्तों के दौरान, मैंने परमेश्वर से प्रोत्साहन का अनुभव किया क्योंकि मैंने अपने कंप्यूटर पर बोलना सीखा और अपने बाएं हाथ को घरेलू और संवारने के कार्यों में प्रशिक्षित किया। परमेश्वर के धर्मी दाहिने हाथ से लेकर हमारे टूटे और ज़रूरतमंद दाहिने हाथों तक, परमेश्वर हमारे साथ रहने और हमारी मदद करने का वादा करता है।

दुःख के लिए शब्दावली

जब मोहन और रेखा ने अपने एकलौते बच्चे को स्वर्ग को दे दिया, उन्होंने संघर्ष किया कि अब वे दोनों अपने को क्या संबोधित करेंगे । एक बच्चे को खो चुके माता-पिता का वर्णन करने के लिए हिंदी भाषा में कोई विशिष्ट शब्द नहीं है । पति के बिना पत्नी विधवा है । पत्नी के बिना पति विधुर होता है । माता-पिता के बिना एक बच्चा अनाथ होता है । एक माता-पिता, जिनके बच्चे की मृत्यु हो गयी है, पीड़ा की अपरिभाषित खाई है । 

गर्भपात/अकाल प्रसव(miscarriage) । शिशु की अचानक मृत्यु । आत्महत्या । बिमारी । दुर्घटना । मृत्यु एक बच्चे को इस संसार से छीन लेती है और उसके बाद उत्तरजीवी(surviving) माता-पिता की अभिव्यक्त पहचान छीन लेती है । 

फिर भी परमेश्वर खुद ऐसे विनाशकारी दुःख को समझता है क्योंकि उसका एकलौता पुत्र, यीशु ने, क्रूस पर मरते समय उसे पुकारा, “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूँ” (लूका 23:46) । यीशु के पृथ्वी पर के जन्म से पूर्व परमेश्वर पिता था और पिता ही बना रहा जब यीशु ने अपनी साँस को त्यागा । परमेश्वर पिता बना रहा जब उसके पुत्र का मृत शरीर कब्र में रखा गया । परमेश्वर आज भी अपने पुनरुथित पुत्र के पिता के रूप में जीवित है जो हर एक माता-पिता को आशा देता है कि एक बच्चा फिर से जीवित हो सकता है । 

आप स्वर्गिक पिता को क्या पुकारते हैं जो इस संसार के लिए अपने पुत्र को बलिदान करता है? आपके और मेरे लिए? पिता । अभी भी, पिता । जब दुःख की शब्दावली में हानि के दुःख को समझाने के लिए शब्द नहीं हैं, परमेश्वर हमारा पिता है और हमें अपने बच्चे संबोधित करता है (1 यूहन्ना 3:1) ।