परमेश्वर से प्रश्न
यदि आपके किसी कार्य-दिवस में प्रभु एक सन्देश लेकर आपके पास आता, आप क्या करते? एक प्राचीन यहूदी, गिदोन के साथ ऐसा हुआ l “उसको यहोवा के दूत ने दर्शन दिया, ‘हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है l’” गिदोन मूक रह सकता था, किन्तु उसने कहा, “यदि यहोवा हमारे संग होता, तो हम पर यह सब विपत्ति क्यों पड़ती?” (न्या. 6:12-13) l मानो परमेश्वर ने अपने लोगों को त्याग दिया था, गिदोन जानना चाहता था l
परमेश्वर ने उस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया l गिदोन के सात वर्षों तक शत्रुओं का आक्रमण, भुखमरी और गुफाओं में छिपने के बाद, परमेश्वर ने हस्तक्षेप नहीं करने का कारण नहीं बताया l उसने इस्राएल के अतीत के पापों को न जताते हुए, उसको आशा दी l उसने कहा, “अपनी इसी शक्ति पर जा और तू इस्राएलियों को मिद्यानियों के हाथ से छुड़ाएगा l निश्चय मैं तेरे संग हूँ l (न्यायियों 6:14,16) l
क्या आपने कभी सोचा क्यों परमेश्वर ने आपके जीवन में दुःख आने दी? उस ख़ास प्रश्न के उत्तर के बदले, परमेश्वर आपको अपनी निकटता से आज संतुष्ट करके ताकीद देता है कि आप दुर्बलता में उसकी सामर्थ्य पर निर्भर हों l गिदोन के अंततः भरोसा करने पर कि परमेश्वर साथ था और मदद करेगा, उसने एक वेदी बनाकर उसको “यहोवा शालोम” नाम दिया (पद.24) l
इसमें शांति है कि हमारे हर काम और स्थान में, परमेश्वर साथ रहेगा l
क्रोध का विकल्प
एक दिन पर्थ, ऑस्ट्रेलिया में फिओन मुलहॉलैंड ने देखा कि उसकी कार नहीं थी l उसने जाना कि गलती से उसने निषिद्ध क्षेत्र में कार खड़ी कर दी थी इसलिए वह खींच ली गयी थी l स्थिति की जांच के बाद, अर्थात्, खींचकर ले जाने और पार्किंग जुर्माना 600 डॉलर देने के बाद, मुलहॉलैंड निराश हुआ, किन्तु उसने निर्णय लिया कि वह अपनी कार को छुड़ाने के लिए सम्बंधित व्यक्ति पर क्रोधित नहीं होगा l उसने क्रोध न दर्शाते हुए उस स्थिति के विषय एक हास्य कविता लिखकर गाड़ी-यार्ड के कार्यकर्त्ता को पढ़कर सुनाया l कार्यकर्त्ता ने कविता पसंद की, और संभवतः भद्दी बातचीत टल गयी l
नीतिवचन की पुस्तक सिखाती है, “मुक़दमें से हाथ उठाना, ... महिमा ठहरती है” (20:3) l झगड़ा वह घर्षण है जो या तो अन्दर ही अन्दर उबलती रहती है अथवा खुले में फूट जाती है जब दो लोग एक मत नहीं होते l
परमेश्वर ने दूसरों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से रहने के लिए संसाधन दिए हैं l उसका वचन आश्वस्त करता है कि क्रोध तो करो किन्तु पाप ने करो (इफि.4:26) l उसकी आत्मा हमें क्रोध की चिंगारियों को बुझाने की ताकत देता है जो हमें परेशान करनेवालों पर टूट पड़ने से हमें रोकती हैं l और उत्तेजित होने पर परमेश्वर ने हमें अनुसरण के लिए अपना उदाहरण दिया है (1 पतरस 2:23) l वह दयालु, अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है l
छोटा होता पियानो
लगातार तीन वर्षों तक मेरा बेटा पियानो वादन में भाग लिया l पिछले वर्ष, मैंने उसे मंच पर अपना पियानो सजाते देखा l उसने दो गानें बजाए और फिर मेरे निकट बैठकर मेरे कानों में फुसफुसाया, “माँ, इस वर्ष पियानो छोटा था l” मैं बोली, “नहीं, तुमने वही पियानो बजाया l तुम बड़े हो गए हो! तुम बढ़ गए हो l”
शारीरक उन्नति की तरह, आत्मिक उन्नत्ति, समय के साथ धीरे-धीरे होती है l यह निरंतर चलनेवाली प्रक्रिया है जिसमें यीशु की तरह बनना शामिल है, और हमारे मन के नए हो जाने से हम रूपांतरित होते हैं l
हमारे अन्दर पवित्र आत्मा के कार्य से, हम अपने जीवनों में पाप को पहचान जाते हैं l परमेश्वर की महिमा करने की इच्छा में, हम बदलना चाहते हैं l कभी-कभी हम सफल होते हैं, किन्तु दूसरे समयों में, हम प्रयास करते और हार जाते हैं l कुछ नहीं बदलते देखकर हम निरास होते हैं l हम पराजय को उन्नत्ति की कमी कहते हैं, जबकि अक्सर यह प्रक्रिया के मध्य में होने का प्रमाण है l
आत्मिक उन्नत्ति में पवित्र आत्मा, हमारे बदलने की इच्छा, और समय शामिल है l जीवन के किसी ख़ास बिंदु पर, हम मुड़कर देखेंगे कि हम उन्नत्ति किये हैं l परमेश्वर हमें यह विश्वास करने का भरोसा दे कि “जिसने [हम]में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फिलि. 1:6) l
क्रूस को याद रखें
मेरे चर्च में, वेदी के सामने एक बड़ा क्रूस है l यह मूल क्रूस का प्रतिक है जहाँ यीशु मरा था-हमारे पाप और उसकी पवित्रता का मिलन स्थान l परमेश्वर ने वहाँ पर हमारे मन, वचन और कर्म द्वारा किये गए प्रत्येक पाप के लिए अपने निर्दोष पुत्र को मृत्यु सहने दिया l क्रूस पर, यीशु ने उस कार्य को पूरा किया जो हमें मृत्यु से, जिसके लायक हम थे, बचा सकता था (रोमि.6:23) l
यीशु ने जो हमारे लिए सहा, क्रूस का दृश्य हमें उस पर विचार करने को विवश करता है l उसे कोड़े मारे गए और उस पर थूका गया l सिपाहियों ने उसके सिर पर मारा और घुटने टेक कर उसकी दिखावटी आराधना की l उससे उसकी मृत्यु के स्थान तक अपना क्रूस उठाने को कहा, किन्तु वह कोड़ों की मार से बहुत दुर्बल था l गुलगुता पर, उन्होंने उसे क्रूस पर लटके रहने के लिए उसके हाथों में कीलें ठोकर क्रूस को खड़ा कर दिया l क्रूस पर उसके घावों ने उसके देह का वजन सहा l छः घंटे बाद, यीशु ने अंतिम सांस ली (मरकुस 15:37) l एक सेनानायक यीशु की मृत्यु देखकर बोल पड़ा, “सचमुच यह मनुष्य, परमेश्वर का पुत्र था!” (पद.39) l
अगली बार जब आप क्रूस का चिन्ह देखें, विचार करें कि आपके लिए उसका अर्थ क्या है l परमेश्वर पुत्र दुःख उठाकर वहाँ मरा और उसके बाद अनंत जीवन संभव बनाने के लिए पुनरुथित हुआ l
प्रेम का प्रगटीकरण
श्रृंखलाबद्ध संकेत “मैं तुमसे प्रेम करता हूँ,” वेल्लैंड, ओंटारियो शहर में रहस्मय ढंग से दिखने पर स्थानीय संवाददाता मेरियन फ़र्थ पता लगाना चाही l परिणाम शून्य था l हफ़्तों बाद, नए संकेत में तिथि और समय के साथ एक स्थानीय पार्क का नाम दिखाई दिया l
फ़र्थ, निश्चित समय पर शहर के जिज्ञासु लोगों के संग पार्क पहुंची l वहां उसकी मुलाकात सूट पहने और चेहरा छिपाए हुए एक व्यक्ति से हुई l उसके आश्चर्य के विषय कल्पना करें जब उसने उसे फूलों का एक गुलदस्ता देकर विवाह प्रस्ताव रखा l रहस्यमय पुरुष उसका प्रेमी, रेयान सैंट डेनिस था l उसने खुशी से स्वीकार किया l
सैंट डेनिस का अपनी प्रेमिका के समक्ष प्रेम प्रदर्शन कुछ अजीब प्रतीत हो सकता है, किन्तु हमारे लिए परमेश्वर के प्रेम का प्रगटीकरण बेमेल नहीं था l “जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ” (1 यूहन्ना 4:9) l
यीशु, एक व्यक्ति की ओर से दूसरे को दिया गया एक गुलाब की तरह, मात्र प्रेम का एक प्रतीक नहीं है l वह दिव्य मानव है जिसने खुद ही अपना जीवन बलिदान किया ताकि उद्धार हेतु उस पर विश्वास करनेवाला परमेश्वर के साथ अनंत वाचा का सम्बन्ध बना सके l एक मसीही को “परमेश्वर के प्रेम से” कुछ भी “अलग [नहीं] कर” सकती है (रोमि. 8:39) l
आजमाया हुआ और पवित्र
एक साक्षात्कार में, गायिका और गीत लेखिका मेरेडिथ एंड्रूज ने सुसमाचार प्रचार, रचनात्मक कार्य, विवाह विषय, और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने में खुद को अभिभूत पाया l अपनी कठिनाई के विषय सोचकर, वह बोली, “मैंने महसूस किया कि परमेश्वर मुझे दमित प्रक्रिया द्वारा संशोधन ऋतू से गुज़ार रहा है l
अय्यूब अपनी जीविका, स्वास्थ्य, और परिवार खोकर अभिभूत हुआ l इससे भी बदतर, परमेश्वर का दैनिक उपासक होकर भी, उसने अहसास किया कि परमेश्वर सहायता हेतु उसके निवेदन नज़रन्दाज़ कर रहा है l परमेश्वर उसके जीवन के दृश्य में अनुपस्थित दिखाई दिया l अय्यूब ने दावा किया कि वह परमेश्वर को किसी भी दिशा में देख नहीं पा रहा है (अय्यूब 23:2-9) l
निराशा में, अय्यूब को क्षणिक स्पष्टता मिली l उसका विश्वास एक अँधेरे कमरे में मोमबत्ती की तरह टिमटिमाया l उसने कहा, “[परमेश्वर] जानता है कि मैं कैसी चाल चलता हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा मैं सोने के समान निकलूँगा” (पद.10) l मसीही आजमाए और शुद्ध किये जाते हैं जब परमेश्वर हमारे आत्मनिर्भरता, अहंकार, और सांसारिक ज्ञान को हटाने के लिए कठिनाई का उपयोग करता है l यदि इस प्रक्रिया में परमेश्वर शांत दिखाई दे और मदद की पुकार न सुने, वह हमें हमारे विश्वास में सामर्थी बनने का एक अवसर दे रहा होगा l
दुःख और समस्याएँ दीप्तिमान, चट्टान सा मजबूत चरित्र देती हैं जो जीवन की कठिनाई में परमेश्वर पर भरोसे से आती है l
आशीष की घाटी
फ़्रांसीसी कलाकार हेनरी मातिस्से के अनुसार उसके जीवन के अंतिम वर्षों के उसके कार्य उसका सही निरूपण थे l उन दिनों में उसने एक नयी शैली में रंग के स्थान पर कागज़ की सहायता से रंगीन, लम्बे तस्वीर बनाए l उसने इन तस्वीरों से अपने कमरे के दीवार सजाए l कैंसर से पीड़ित होने के कारण यह महत्वपूर्ण था क्योंकि वह ज्यादातर बिस्तर पर सीमित रहता था l
बीमारी, नौकरी खो देना, या कोई बड़ी मुसीबत कुछ उदहारण हैं जिसे कुछ लोग “घाटी में रहना,” कहते हैं, जहाँ खौफ की छाया रहती है l यहूदा के लोग आक्रामक सेना को आते देख ऐसा ही अनुभव किया (2 इतिहास 20:2-3) l उनके राजा ने प्रार्थना की, “यदि ... विपत्ति हम पर पड़े, तौभी हम ... तेरी दोहाई देंगे, और तू सुनकर बचाएगा” (पद.9) l परमेश्वर ने उत्तर दिया, “कल [अपने शत्रुओं का] सामना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा” (पद.17) l
यहूदा की सेना के युद्धभूमि में आने से पूर्व, उनके शत्रु अपना नाश कर डाले l परमेश्वर के लोगों ने तीन दिनों तक परित्यक्त सामग्री, कपड़े और महत्वपूर्ण वस्तुएँ इकट्ठे किये l उस स्थान को छोड़ने से पूर्व वे मिलकर परमेश्वर की प्रशंसा की और उस स्थान का नाम “बराका की तराई,” अर्थात् “आशीष” रखा l
परमेश्वर हमारे जीवनों के निम्नतम बिंदु में भी साथ रहता है l वह इन घाटियों में आशीष देता है l
जैसा प्रतीत नहीं होता
डॉन, दक्षिणी लानकशायर, स्कॉटलैंड के एक फार्म में रहनेवाला एक बार्डर कुली है l एक दिन उसका मालिक और वह, एक छोटे वाहन में कुछ पशुओं को देखने गए l टॉम, वाहन में ब्रेक लगाना भूलकर नीच उतार गया l डॉन, चालक के सीट पर बैठा था और वाहन सुरक्षित रुकने से पूर्व, ढलान पर और आगे दो पंक्तियों के यातायात में धीमी चलती गई l मोटर-चालकों को लगा जैसे कोई कुत्ता सुबह की सैर करने निकला है l बिल्कुल, बातें हमेशा जैसी होती हैं, वैसी दिखती नहीं l
ऐसा महसूस हो रहा था जैसे एलिशा और उसके सेवक को गिरफ्तार करके आराम के राजा के पास पहुंचाया जाएगा l राजा की सेना ने शहर को चारों ओर से घेर लिया था जहां एलिशा और उसका सेवक थे l सेवक का मानना था कि मृत्यु निकट है, किन्तु एलिशा ने कहा, “मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह [शत्रु] ... से अधिक हैं” (2 राजा 6:16) l एलिशा की प्रार्थना पश्चात, सेवक स्वर्गिक सेना को उनकी सुरक्षा के लिए अपना मोर्चा संभाले देखा l
स्थितियाँ जो आशाहीन दिखाई देती हैं हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी हमें दिखती हैं l जब हम अभिभूत और संख्या में थोड़े महसूस करते हैं, हम स्मरण रखें परमेश्वर हमारी ओर है l वह “अपने दूतों को [हमारे] निमित्त आज्ञा [देगा] [कि वह हमारी] रक्षा करें” (भजन 91:11) l
परमेश्वर के साथ एकाकी
चर्च के कमरे में जहाँ मैं मदद कर रही थी एक व्यस्त सुबह थी l करीब एक दर्जन बच्चे चहक और खेल रहे थे l गतिविधियों के कारण कमरा गर्म हो गया और मैंने दरवाजा खोल दी l एक छोटा बच्चा यह सोचकर बाहर निकलना चाहा कि कोई उसे नहीं देख रहा है l मैं चौंकी नहीं, कि वह सीधे अपने पापा की बांहों में गया l
उस बच्चे ने वही किया जो ज़रूरी है जब जीवन व्यस्त और अभिभूत करता है-वह अपने पापा के पास भागा l यीशु भी अपने पिता के साथ प्रार्थना का समय ढूंढ़ता था l कुछ लोग कहेंगे कि उसको कमज़ोर करनेवाली मानवीय ऊर्जा की कमी को वह इसी तरह पूरा करता था l मत्ती रचित सुसमाचार के अनुसार वह एकान्त स्थान में जा रहा था जब भीड़ उसके पीछे थी l उनकी ज़रूरतों को जानकार, यीशु ने आश्चर्यजनक रूप से उनको चंगा किया और भोजन खिलाया l उसके बाद, हालाँकि, वह “प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चला गया” (पद.23) l
यीशु ने बार-बार लोगों की मदद की, किन्तु खुद को थकित नहीं होने दिया और जल्दबाजी नहीं की l उसने प्रार्थना द्वारा परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध को मजबूत किया l आपके साथ कैसा है? क्या आप परमेश्वर की सामर्थ्य और पूर्णता प्राप्त करने हेतु उसके साथ समय बिताएंगे?