सर्वदा उपस्थित उपस्थिति
2018 विश्व कप के दौरान, कोलम्बियाई फॉरवर्ड रेडमेल फाल्काओ ने पोलैंड के खिलाफ सातवें मिनट में गोल करके, एक जीत हासिल की l फाल्काओ का अंतर्राष्ट्रीय खेल में यह तीसवाँ प्रभावशाली गोल था, जिसने उसे अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक कोलम्बियाई खिलाड़ी द्वारा सबसे अधिक गोल करने का गौरव दिलाया l
फाल्काओ ने बार-बार एक अंक प्राप्त करने के बाद अपनी जर्सी को उठाकर कॉन ननकाएस्तारा सोलो : “यीशु के साथ आप कभी भी अकेले नहीं है” लिखे हुए शब्दों के साथ अपनी शर्ट को दिखाकर अक्सर अपने विश्वास को साझा करने के लिए फुटबॉल पिच पर अपनी सफलता का इस्तेमाल किया l
फाल्काओ का कथन हमें यीशु के आश्वासन पूर्ण प्रतिज्ञा की ओर इंगित करता है, “मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे संग हूँ” (मत्ती 28:20) l यह जानकार कि वह स्वर्ग लौटने वाला था, यीशु ने अपने चेलों को यह विश्वास दिलाया कि वह हमेशा अपनी आत्मा की उपस्थिति के द्वारा उनके साथ रहेगा, (पद.20); यूहन्ना 14:16-18) l मसीह की आत्मा उन्हें निकट और दूर के शहरों में यीशु के सन्देश को ले जाने के समय उन्हें आराम, मार्गदर्शन, संरक्षण देगी और सशक्त बनाएगी l जब वे अपरिचित स्थानों में तीव्र अकेलेपन के समयों का अनुभव करेंगे, तो मसीह के शब्द उनके कानों में गूंजेंगे, उनके साथ उसकी उपस्थिति की याद दिलाएगा l
कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कहाँ जाते हैं, चाहे वह घर के करीब हो या दूर, जैसा कि हम अज्ञात में यीशु का अनुसरण करते हैं, हम भी इसी वादे से बंध सकते हैं l यहाँ तक कि जब हम अकेलेपन की भावनाओं का अनुभव करते समय, यीशु से प्रार्थना करते हैं, हम यह जानकार कि वह हमारे साथ है हम आराम पा सकते हैं l
कभी न भुलाया गया
मेरे बच्चों द्वारा मुझे यह साबित करने के लिए कहा गया कि मैंने पियानो की मूल बातों में महारत हासिल करने में वर्षों का समय लगाया था, मैं बैठ कर सुर सी मेजर(scale C Major) बजाना आरम्भ कर दिया l मुझे दो दशकों में पियानो बजाने का मौका बहुत कब मिला, फिर भी मुझे आश्चर्य हुआ कि मुझे बजाना याद था! अपने को बहादुर महसूस करते हुए, मैं याद से एक के बाद सात भिन्न सुर बजाना आरम्भ कर दिया l मैं चकित हुयी! वर्षों के अभ्यास ने सुर और तकनीक को इतनी गहराई से मेरी ऊंगलियों के “स्मरण” में अंकित कर दिया थे कि वे तुरंत जान जातीं थी कि उन्हें क्या करना था l
कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता है l लेकिन परमेश्वर का अपने बच्चों के लिए प्यार हमारी किसी भी लुप्त होती याद की तुलना में कही अधिक गहराई से अंकित है – वास्तव में, परमेश्वर उन्हें भूल नहीं सकता है l यह वही है जो इस्राएलियों को सुनने की ज़रूरत थी जब निर्वासन ने उन्हें उसके द्वारा त्यागने का एहसास दिलाया था l (यशायाह 49:14) l यशायाह के द्वारा उसका प्रत्युतर ज़ाहिर था : “मैं तुझे नहीं भूल सकता” (पद.15) l अपने लोगों की देखभाल के लिए परमेश्वर का वादा अपने बच्चे के लिए एक माँ के प्यार से अधिक निश्चित था l
अपने न बदलनेवाले प्रेम के बारे में उन्हें आश्वस्त करने के लिए, उसने उन्हें अपनी प्रतिबद्धता की एक तस्वीर दी : “देख, मैंने तेरा चित्र अपने हथेलियों पर खोदकर बनाया है” (पद.16) l यह परमेश्वर की अपने बच्चों के प्रति निरंतर जागरूकता की एक सुन्दर छवि है; उनके नाम और चेहरे हमेशा उनके सामने हैं l
फिर भी आज, हम आसानी से अनदेखी और भूल महसूस कर सकते हैं l यह याद रखना कितना आरामदायक है कि हम परमेश्वर के हाथों में “उकेरे” गए हैं – हमेशा अपने पिता के द्वारा याद किये जाते हैं, देखभाल किये जाते है, और प्यार किये जाते हैं l
यह मैं हूँ(This Is Me)
प्रभावशाली गीत “दिस इज़ मी(This Is Me)” द ग्रेटेस्ट शोमैन में चित्रित एक अविश्वसनीय शो ट्यून है जो पी. टी. बर्मुम के जीवन और उसके चलते-फिरते सर्कस पर आधारित संगीतमय फिल्म है l फिल्म के गीत जिन्हें फिल्म में पात्रों ने गया सामजिक मानदंडों पर विफल होने के कारण मौखिक तानों और दुर्व्यवहार को सहा, जो शब्दों को विनाशकारी गोलियों और चाकुओं के रूप में वर्णन करते हैं जो दाग़ छोड़ जाते हैं l
गीत की लोकप्रियता इस बात की ओर इशारा करती है कि कितने लोग अदृश्य, किन्तु वास्तविक, घावों को झेलते हैं जो शब्दों के अस्त्रों के रूप में उपयोग द्वारा पैदा होते हैं l
याकूब ने हमारे शब्दों के संभावित खतरे को विनाशकारी और लम्बे समय तक चलनेवाले नुकसान का कारण समझते हुए, जीभ को “एक ऐसी बला” बताया “जो कभी रूकती ही नहीं, [और] प्राण नाशक विष से भरी हुयी है” (3:8) l आश्चर्यजनक मजबूत तुलना करके, याकूब ने विश्वासियों को अपने शब्दों की विशाल शक्ति को पहचानने की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया l इससे भी अधिक, उसने एक सांस द्वारा परमेश्वर की स्तुति करने और उसके बाद दूसरे के द्वारा परमेश्वर की छवि में सृष्ट लोगों को घायल करने की असंगति पर प्रकाश डाला (पद.9-10) l
गीत “दिस इज़ मी(This Is Me)” इसी तरह मौखिक हमलों के सत्य को चुनौती देते हुए बल देता है कि हम सब महान हैं – एक सच्चाई बाइबल जिसकी पुष्टि करती है l बाइबल हर एक मनुष्य की अद्वितीय गरिमा और खूबसूरती को स्थापित करती है, बाहरी दिखावे या किसी भी चीज़ के कारण नहीं जो हमने किया है, बल्कि इसलिए कि हममें से हर एक परमेश्वर द्वारा खूबसूरती से अभिकल्पित हैं – उसकी अनोखी कृतियाँ (भजन 139:14) l और एक दूसरे के लिए और एक दूसरे के विषय हमारे शब्दों में उस वास्तविकता को फिर से मजबूत करने की शक्ति है l
मैं हानि से नहीं डरूंगा
1957 में, मेल्बा पेटिलो बील्स “लिटिल रॉक नाइन(Little Rock Nine),” के एक सदस्य के रूप में चुनी गयी, जो नौ अफ्रीकन अमेरिकन विद्यार्थियों का एक समूह था जिन्होनें अरकंसास, लिटिल रॉक के सेंट्रल हाई स्कूल को सबसे पहले श्वेतों और अश्वेतों दोनों ही के लिए अनिवार्य कर दिया और जो पूर्व में केवल श्वेत लोगों के लिए था l अपने 2018 के वृतांत, आई विल नॉट फियर : माई स्टोरी ऑफ़ ए लाइफटाइम ऑफ़ बिल्डिंग फैथ अंडर फायर (I Will Not Fear: My Story of a Lifetime of Building Faith under Fire), में बील्स उस अन्याय और उत्पीड़न का एक मर्मस्पर्शी वर्णन करती है जिसका सामना वह पंद्रह वर्ष की छात्रा के रूप में प्रतिदिन संघर्ष करते हुए साहस के साथ करती थी l
परन्तु उसने परमेश्वर में अपने गहरे विश्वास के विषय भी लिखा l अपने सबसे अंधकारपूर्ण पलों में, जब भय ने उसे पूर्ण रूप से पराजित करना चाहा, बील्स ने बाइबल के लोकप्रिय पदों को दोहराया जो उसने बचपन में अपनी दादी से सीखे थे l उनको दोहराते समय, उसे अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति याद आई, और वचन ने उसे दृढ़ रहने के लिए साहस दिया l
बील्स अक्सर भजन 23 को दोहराती थी, “चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुयी तराई में होकर चलूँ, तौभी हानि से न [डरूंगी]; क्योंकि तू मेरे साथ रहता है” (पद.4) और इसे अंगीकार करके आराम पाती थी l उसकी दादी का प्रोत्साहन उसके कानों में गूंजता था और उसे आश्वासन देता था कि परमेश्वर “अति निकट है, और तुम केवल उससे ही सहायता मांग सकती हो l”
यद्यपि हमारी ख़ास स्थितियाँ भिन्न हो सकती हैं, कदाचित हम सब कठिन संघर्षों एवं अभिभूत करनेवाली स्थितियों को सहन करेंगे जो हमें भयभीत करके आसानी से हार मानने के लिए उत्प्रेरित करेंगी l आपका हृदय इस सच्चाई में उत्साहित हो कि परमेश्वर की सामर्थी उपस्थिति हमेशा हमारे साथ है l
सेवक का मन
रसोइया l कार्यक्रम आयोजक (Event Planner) l आहार विज्ञ(Nutritionist) l नर्स l ये कुछ एक जिम्मेदारियां हैं जो आधुनिक माताएं निभाती हैं l 2016 में, शोध के अनुमान के अनुसार माताएं सभवतः एक सप्ताह में बच्चे से सम्बंधित कार्य उन्सठ से छियानवे घंटे करती हैं l
माताएं हमेशा थकी होती हैं इसमें कोई आश्चर्य नहीं है! माँ होने का मतलब है बच्चों की देखभाल के लिए अत्यधिक समय और ऊर्जा खर्च करना, जिन्हें बहुत अधिक सयायता चाहिए जब वे संसार को जानना सीखते हैं l
जब मेरा दिन मुझे लम्बा महसूस होता है और मुझे ताकीद चाहिए कि दूसरों की देखभाल एक ईमानदार कोशिश है, मुझे बड़ी आशा मिलती है जब मैं यीशु को सेवा करनेवालों को अनुमोदित करते हुए देखती हूँ l
मरकुस रचित सुसमाचार में, शिष्य आपस में वाद-विवाद कर रहे थे कि उनमें बड़ा कौन है l
यीशु शांति से बैठकर उन्हें स्मरण दिलाया कि “यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने” (9:35) l उसके बाद उसने एक बालक को गोद में लेकर दूसरों की सेवा करने का महत्त्व दर्शाया, विशेषकर जो हममें सबसे अधिक असहाय हैं (पद.36-37) l
मसीह का प्रतिउत्तर उसके राज्य में महानता का पैमाना क्या होना चाहिए को पुनः स्थापित कर देता है l उसका मानक दूसरों की सेवा करने वाला हृदय है l और यीशु ने प्रतिज्ञा की है कि परमेश्वर की सामर्थी उपस्थिति सेवा करने का चुनाव करनेवालों के साथ रहेगी (पद.37) l
जब आपके पास अपने परिवार या समुदाय में सेवा करने के अवसर हैं, उत्साहित हो जाएं कि यीशु उस समय को और प्रयास को जो आप दूसरों की सेवा में लगाएंगे स्थायी महत्व देता है l
विजय जुलूस
2016 में जब शिकागो कब्स बेसबॉल टीम ने एक शताब्दी से अधिक समय में पहली बार विषय सीरीज जीत ली, चैंपियनशिप का जश्न मानाने के लिए पचास लाख लोग शहर के मध्य जुलूस में शामिल हुए l
विजय जुलूस कोई आधुनिक अविष्कार नहीं हैं l रोमी की जीत एक लोकप्रिय प्राचीन जुलूस थी, जिसमें विजयी सेनापति भीड़ वाले मार्गों में अपनी सेना और युद्धबंदियों के जुलूस की अगुवाई करते थे l
कदाचित इस प्रकार की जुलूस का चित्र पौलुस के मन में था जब उसने कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखते हुए परमेश्वर के विश्वासियों को “जय के उत्सव में लिए [फिरने]” के लिए धन्यवाद दिया (2 कुरिन्थियों 2:14) l यह मुझे चित्ताकर्षक लगता है कि इस चित्र में, मसीह के अनुयायी बंदी हैं l हालाँकि, विश्वासी के रूप में हम भागदारी करने के लिए विवश नहीं हैं, परन्तु इच्छुक “बंदी,” जो स्वेच्छापूर्वक विजयी, पुनरुत्थित मसीह की जुलूस का भाग हैं l मसीही के रूप में, हम जश्न मानते हैं कि मसीह की विजय द्वारा, वह अपना राज्य बना रहा है और अधोलोक की फाटकें उसपर प्रबल नहीं होंगी (मत्ती 16:18) l
जब हम क्रूस पर यीशु की विजय और स्वतंत्रता के विषय बात करते हैं जो वह विश्वासियों को देता है, हम “[उसके] ज्ञान की सुगन्ध” हर जगह फैलाते हैं (2 कुरिन्थियों 2:14) l और चाहे लोग सुगंध को उद्धार के आश्वासन के रूप में ग्रहण करें या अपनी हार की गंध माने, यह अदृश्य किन्तु शक्तिशाली सुगंध हर जगह उपस्थित है जहां हम जाते हैं l
जब हम मसीह का अनुसरण करते हैं, हम उसके पुनरुत्थान के विजय की घोषणा करते हैं, वह विजय जो संसार के लिए उद्धार को उपलब्ध करता है l
खूंटियों को गिराना
जब मैंने अपने मित्र इरिन के टखने पर टैटू देखा जिसमें बॉल फेंककर खूटियों का गिरना दर्शाया गया था तो मेरे मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुयी l इरिन को इस अद्वितीय टैटू को प्राप्त करने की प्रेरणा सारा ग्रोव्स के गीत “सेटिंग अप द पिन्स” को सुनकर मिली थी l यह दक्ष गीतकाव्य श्रोताओं को अपने दोहराए जानेवाले, दिनचर्या में आनंद खोजने के लिए उत्साहित करता है जो कभी-कभी अपने हाथों से बार-बार उन खूंटियों को पुनः खड़ा करने की तरह व्यर्थ महसूस होता है, केवल फिर से किसी के द्वारा पुनः गिराए जाने के लिए l
कपड़े धोना, भोजन बनाना, मैदान साफ़ करना l जीवन कामों से भरा हुआ है जिन्हें, एक बार पूरा करने के बाद, पुनः दोहराया जाना है – बार-बार l यह कोई नया संघर्ष नहीं है परन्तु एक पुरानी निराशा, जिसके साथ पुराने नियम के सभोपदेशक पुस्तक में भी जूझा गया था l यह पुस्तक लेखक द्वारा शिकायत करते हुए आरम्भ होता है कि दैनिक मानव जीवन न ख़त्म होने वाले चक्र की भांति व्यर्थ है (1:2-3), अर्थहीन भी, क्योंकि “जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा” (पद.9) l
फिर भी, मेरे मित्र की तरह, लेखक यह याद करके पुनः आनंद का भाव और अर्थ प्राप्त कर सका कि हमारी आखिरी तृप्ति “परमेश्वर का भय [मानना] और उसकी आज्ञाओं का पालन है” (12:13) l यह जानने से तसल्ली मिलती है कि परमेश्वर साधारण, कदाचित जीवन के नीरस पहलुओं को भी महत्त्व देता है और हमारी विश्वासयोग्यता को पुरुस्कृत करेगा (पद.14) l
आप निरंतर कौन सी “खुटियाँ” खड़ी कर रहे है? उन दिनों में जब दोहराए जानेवाले कार्य थकानेवाले महसूस हो, काश हम थोड़ा समय निकालकर हर एक कार्य को प्रेम के बलिदान के रूप में परमेश्वर को सौंपेंl
बाइबल का नुस्ख़ा
ग्रेग और एलिज़ाबेथ नियमित रूप से स्कूल जाने वाले अपने चार बच्चों के साथ “चुटकुलों की रात” रखते हैं l हर एक बच्चा अनेक चुटकुले लेकर खाने की मेज़ पर बताने के लिए आता है जो उसने सप्ताह के दौरान पढ़े हैं या सुने हैं (या खुद से बनाए है!) इस परंपरा ने मेज़ के आस-पास बांटे गए आमोद-प्रमोद के आनंददायक यादों को स्थापित किया है l ग्रेग और एलिज़ाबेथ ने अपने बच्चों के लिए हंसी को स्वास्थ्यवर्धक, कठिन दिनों में उनके मनोबल को ऊँचा करने वाला भी महसूस किया है l
भोजन की मेज़ के आस-पास आनंदायक बातचीत के लाभ को सी. एस. लेयुईस ने पहचाना था, जिसने लिखा, “सूर्य भोजन के समय एक हँसते हुए परिवार से अधिक किसी और पर इतना नहीं चमकता है l”
एक आनंदित हृदय को बुद्धि से पोषित करने का वर्णन नीतिवचन 17:22 में मिलता है, जहाँ हम पढ़ते हैं, “मन का आनंद अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियां सूख जाती हैं l” यह नीतिवचन स्वास्थ्य और चंगाई को प्रोत्साहित करने का एक “नुस्ख़ा” पेश करता है – हमारे हृदयों को आनंद से भरने की अनुमति देता है, एक औषधि जिसकी कीमत कम और परिणाम बहुत बड़ा है l
हम सब को बाइबल का यह नुस्ख़ा चाहिए l जब हम अपने बातचीत में आनंद को आने देते हैं, वह हमारे असहमति को सही परिपेक्ष्य में पहुंचता है l यह हमें स्कूल में एक तनावपूर्ण परीक्षा या एक कठिन दिन के कार्य के बावजूद भी शांति का अनुभव करने देता है l परिवार एवं मित्रों के बीच हँसी एक सुरक्षित स्थान बना सकता है जहां हम दोनों जानते एवं अनुभव करते हैं कि हम प्रेम किये गए हैं l
क्या आपको अपने जीवन में अपनी आत्मा के लिए और अधिक “अच्छी औषधि” को सम्मिलित करने की ज़रूरत है? स्मरण रखें, आपको बाइबल से एक आनंदित हृदय को विकसित करने का प्रोत्साहन मिलता है l
साफ़ धोए हुए
मैं विश्वास नहीं कर सकी l एक नीला जेल पेन मेरे सफ़ेद तौलिये में खुद को छिपा लिया था और केवल ड्रायर में तड़कने के लिए, वाशिंग मशीन में बच गया था l बदसूरत नीले दाग़ सभी जगह थे l मेरे सफ़ेद तौलिये ख़राब हो चुके थे l अत्यधिक ब्लीच(दाग़ हटाने का द्रव्य या पाउडर) भी उन गहरे दाग़ों को हटाने में असमर्थ थे l
जब मैं हिचकिचाते हुए उन तौलियों को फटे पुराने कपड़ों के ढेर में डाल रही थी, मैंने पुराने नियम में क्षति पहुंचाने वाले पाप के प्रभाव का वर्णन करने वाले यिर्मयाह नबी के विलाप को याद किया l परमेश्वर का तिरस्कार करने और मूरतों की ओर मुड़ने (यिर्मयाह 2:13) के द्वारा, यिर्मयाह ने घोषित किया कि इस्राएल के लोगों ने परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध में एक स्थायी दाग़ बना लिया था : “चाहे तू अपने को सज्जी से धोए और बहुत सा साबुन भी प्रयोग करे, तौभी तेरे अधर्म का धब्बा मेरे सामने बना रहेगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है” (पद.22) l अपने द्वारा की गयी हानि को ठीक करने में वे असमर्थ थे l
खुद से, अपने पाप का दाग़ हटाना संभव नहीं है l किन्तु यीशु ने वह कर दिया जो हम करने में असमर्थ थे l अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान की सामर्थ्य के द्वारा, वह “[विश्वासियों के] पापों को क्षमा” करता है (1 यूहन्ना 1:7) l
जब विश्वास करना कठिन हो, इस खुबसूरत सच्चाई को थामें रहें : यीशु पाप के हर एक हानि को पूरी रीति से हटा सकता है l परमेश्वर उसकी ओर लौटनेवाले हर इच्छित व्यक्ति के पाप के प्रभाव को धो देने के लिए तैयार है (पद.9) l हम मसीह के द्वारा, हर दिन को आज़ादी और आशा में जी सकते हैं l