Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by माँरविन विलियम्स

छुटकारा का अच्छा दिन

2006 से लोगों का एक समूह नए साल के आसपास एक असामान्य घटना का उत्सव मानता है l उसे छुटकारे का अच्छा दिन (Good Riddance Day) कहा जाता है l लतीनी अमरीकी परंपरा पर आधारित, व्यक्ति पिछले साल के अप्रिय, शर्मनाक यादों और बुरे मुद्दों को एक ओद्योगिक- शक्तिशाली कतरनी मशीन में डाल देते हैं l या कुछ एक बड़े हथौड़े से अपने छुटकारे की वस्तुओं को हटाते हैं l

भजन 103 का रचयिता लोगों को अप्रिय यादों से छुटकारा पाने के पार जाने की सलाह देता है l वह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर हमारे पापों से हमें छुड़ाता है l परमेश्वर के विशाल प्रेम प्रगट करने के प्रयास में, भजनकार शब्द चित्रों का उपयोग करता है l उसने परमेश्वर के प्रेम की विशालता की तुलना स्वर्ग और पृथ्वी के मध्य करता है (पद.11) l उसके बाद भजनकार स्थानिक शब्दों में उसकी क्षमा के विषय बातचीत करता है l जितनी दूरी पर सूर्योदय होता है से लेकर जहां सूर्यास्त होता है, प्रभु ने अपने लोगों के पापों को उतनी दूर कर दिया है (पद.12) l भजनकार की इच्छा थी कि परमेश्वर के लोग जाने कि उसका प्रेम और क्षमा अनंत और पूर्ण है l परमेश्वर ने अपने लोगों को पूर्ण क्षमा देकर उनके पापों की सामर्थ्य से उन्हें छुड़ाया है l

सुसमाचार! हमें छुटकारे के दिन के अनुभव के लिए नए साल तक इंतज़ार नहीं करना होगा l यीशु में विश्वास करके, जब हम अपने पापों को मानकर उनसे मन फिरा लेते हैं, वह उनसे छुटकारा देकर उन्हें समुद्र की गहराई में फेंक देता है l आज छुटकारा का अच्छा दिन हो सकता है!

उसने हमारे बोझ को उठाया

आश्चर्यजनक रूप से उपयोगिता/बिजली-पानी(Utility) का बड़ा बिल आना असाधारण बात नहीं है l किन्तु नार्थ कैरोलाइना की किरेन हिली जल शुल्क(बिल) देखकर अत्यधिक घबरा गया l सूचना में उसे 100 करोड़ डॉलर का भुगतान करने को कहा गया था! हिली आश्वास्त होकर कि उसने पिछले महीने इतना  अधिक  जल उपयोग नहीं किया था, मजाकिए तरीके से पूछा कि क्या वह किश्तों में इस बिल का भुगतान कर सकता है l
100 करोड़ डॉलर का कर्ज डरानेवाला बोझ हो सकता है, किन्तु वास्तविक और अथाह पाप का बोझ जो हम सब उठाए हुए हैं की तुलना में यह अत्यधिक छोटा है l अपने ही पापों के बोझ और उसके परिणाम को लिए चलना, आख़िरकार हमें दोष और लज्जा से थका हुआ महसूस कराता है l सच्चाई यह है कि हम इस बोझ को उठाने में असमर्थ हैं l
और हमें इसे उठाने की भी ज़रूरत नहीं है l जिस प्रकार पतरस विश्वासियों को स्मरण दिलाता है, केवल परमेश्वर का निर्दोष पुत्र, यीशु ही, हमारे पापों का भारी बोझ और उसका गंभीर परिणाम उठा सकता था (1 पतरस 2:24) l यीशु ने, अपने क्रूसित मृत्यु में, हमारे सब पापों को ले लिया और हमें क्षमा दिया l उसके हमारे बोझ को उठाने के कारण, हमें दण्ड का भागदार नहीं होना है जिसके हम योग्य हैं l
भय या दोष में अर्थात् “तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बापदादों से चला आता है” (1:18), में रहने की अपेक्षा, हम प्रेम और स्वतंत्रता के नए जीवन का आनंद ले सकते हैं (पद.22-23) l

मदद के लिए पुकार

2016 की लिफ्ट दुर्घटनाओं में पांच की मृत्यु और इक्यावन घायल हुए, न्यूयॉर्क शहर में लोगों की जगुरकता के लिए विज्ञापन निकले कि शांत और सुरक्षित कैसे रहें। दुर्घटना के दौरान खुद को बचाने की कोशिश करने वालों के साथ सबसे बुरा हुआ था। अधिकारियों के अनुसार ऐसे समय में बेहतर होगा, "फोन करें, शांत रहें, और प्रतीक्षा करें।"

खुद को बचाने की कोशिश करने की गलती पर पतरस ने उपदेश दियाI लूका, कुछ उल्लेखनीय घटनाओं का वर्णन करता है जिसमें मसीही विश्वासी अन्य भाषाओं में बोल रहे थे जिन्हें वे नहीं जानते थे (प्रेरितों के काम 2:1-12)। पतरस ने यहूदी भाई-बहनों को समझाया कि यह सब एक प्राचीन भविष्यवाणी (योएल 2:28-32) की पूर्ति थी-आत्मा का उंडेला जाना और उद्धार का दिन। उन लोगों में पवित्र आत्मा का वरदान साक्षात् दिख रहा था जिन्होंने पाप और उसके प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए यीशु को पुकाराI तब पतरस ने उन्हें बताया कि उद्धार सभी के लिए उपलब्ध है (21) हमारा परमेश्वर तक पहुंचना संभव है। व्यवस्था के पालन से नहीं वरन यीशु पर भरोसा करने और उन्हें प्रभु और मसीहा मानने द्वारा।           

हम खुद को पाप से नहीं बचा सकते। हमारे छुटकारे की एकमात्र आशा है कि हम यीशु को प्रभु और मसीहा मानकर उन पर भरोसा करें।

बरामदे में राहत

एक अत्यधिक गर्म दिन पर, आठ वर्षीय कारमाइन सुनिश्चित करना चाहता था कि  डाकिया आए तो उसे कुछ ठंडा पीने को मिले, इसलिए उन्होंने बरामदे में एक कूलर में स्पोर्ट्स ड्रिंक और पानी रख दिया। सुरक्षा कैमरे ने उसकी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड की: "ओह, पानी और गेटोरेड। परमेश्वर का शुक्र है; धन्यवाद!"

उसकी माँ कहती है, "कारमाइन डाकिये को ठण्डा पिलाकर तृप्त करना अपना कर्तव्य समझता है, चाहे वे घर पर न हों।"

यह कहानी हमारा दिल छूने के साथ यह याद दिलाती है कि कोई है जो, पौलुस के शब्दों में, “तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा”। यद्यपि पौलुस जेल में और भविष्य के प्रति अनिश्चित था, तो भी फिलिप्पी के मसीहियों के लिए आनन्दित था क्योंकि उनके धन के उपहारों के माध्यम से परमेश्वर ने उसकी जरूरतें पूरी कीं। फिलिप्पी कलीसिया धनी नहीं थी, परन्तु वे उदार थे, उन्होंने पौलुस और दूसरों को कंगालपन से निकाला (2 कुरिन्थियों 8:1-4)। जैसे फिलिप्पियों ने पौलुस को तृप्त किया, परमेश्वर भी अपने उस धन के... (फिलिप्पियों 4:19)।

परमेश्वर अक्सर आड़े माध्यमों के द्वारा सीधी सहायता भेजते हैं । वह दूसरों की सहायता से हमारी ज़रूरतों को पूरा करते हैं। जब हम उन पर भरोसा करते हैं, तो पौलुस के समान वह हमें भी सच्चे संतोष का भेद सिखाते हैं (पद 12-13)।

आत्मा के सामर्थ के द्वारा

दशरथ मांझी की कहानी हमें प्रेरणा देती है। उनकी पत्नी की मृत्यु इसलिए हो गई, क्योंकि वह उसे तत्काल चिकित्सा के लिए अस्पताल न लेजा सके, मांझी ने वह किया जो असंभव था। 22 वर्ष लगा कर उन्होंने पहाड़ में बड़ी जगह बनाई ताकि गांववासी स्थानीय अस्पताल पहुंचकर आवश्यक चिकित्सा और देखभाल पा सकें। भारत सरकार ने उनकी उपलब्धि के लिए उन्हें सम्मानित किया।

देश निकाले से लौटे जरूब्बाबेल को मंदिर का पुनर्निर्माण असंभव लगा होगा। लोग निराश थे, दुश्मनों के विरोध का सामना कर रहे थे, और उनके पास संसाधन या एक बड़ी सेना न थी। परमेश्वर ने जरूब्बाबेल के पास जकर्याह को भेजकर उसे याद दिलाया कि यह कार्य सेना, मानव बल या मानव निर्मित संसाधनों की बजाय उससे होगा जो इनसे अधिक बलवान है। यह आत्मा के बल से होगा (जकर्याह 4:6)। जरूब्बाबेल ने विश्वास किया कि मंदिर के पुनर्निर्माण और समुदाय को पुनःस्थापित करने के रास्ते में किसी भी कठिनाई के पहाड़ को परमेश्वर मैदान कर देंगे।

हमारे सामने “पहाड़” हो तो हम क्या करते हैं? इसके दो विकल्प होते हैं: अपने पर भरोसा रखें या आत्मा के बल पर। जब हम उनके बल पर भरोसा करेंगे, तो वह या तो पहाड़ को मैदान बना देंगें या हमें उस पर चढने का बल और सहनशीलता देंगे।

एक नया नाम

मार्क लैबरटन ने अपने लेख “Leading by Naming” में नाम की ताकत बताया l  उसने कहा, “केवल एक संगीतप्रेमी मित्र ने मुझे ‘संगीतप्रेमी’ पुकारा था जिसका प्रभाव अभी भी मुझ में है l मैंने वाद्य कभी नहीं बजाया और एकल गायक नहीं था l फिर भी .... मैंने महसूस किया कि लोग मुझे जानते हैं और मुझसे प्रेम करते हैं ... [उसने] मुझे देखकर पुष्टि की, और मेरे विषय सच्ची बात को सराहा l”

यीशु द्वारा शमौन को नया नाम देने पर संभवतः उसने भी ऐसा ही महसूस किया होगा l अन्द्रियास यीशु को मसीह मानकर, अपने भाई शमौन को  उसके पास लाया (यूहन्ना 1:41-42) l यीशु ने शमौन के भीतर गहरी सच्चाई को प्रमाणित कर सराहा l वास्तव में, यीशु ने उसके लिए परेशानी बनने वाली पराजय और जल्दबाज़ स्वभाव भी देखा l किन्तु उससे अधिक उसने शमौन को कलीसिया का संभावित अगुआ देखा l यीशु ने उसे कैफा अर्थात् चट्टान कहा-पतरस का आरामी नाम (यूहन्ना 1:42; देखें मत्ती 16:18) l

हमारे साथ भी ऐसा ही है l परमेश्वर हमारे अहंकार, क्रोध, और दूसरों के प्रति हममें प्रेमाभाव देखता है, किन्तु यह भी जानता है कि हम मसीह में हैं l वह हमें धर्मी और परमेश्वर से अपना मेल किये हुए (रोमियों 5:9-10); क्षमा प्राप्त, पवित्र, और प्रिय (कुलु. 2:13; 3:12); चुने हुए और विश्वासी (प्रका. 17:14) लोग पुकारता है l स्मरण रखें परमेश्वर हमें कैसे देखता है, और वह नाम हमें कैसे परिभाषित करता है l

आगे बढ़ते रहें

द अमेजिंग रेस  मेरा एक पसंदीदा टेलेविज़न कार्यक्रम है l इस रियलिटी शो में, दस जोड़ों को एक दूसरे देश में भेजा जाता है जहाँ उनको रेल, बस, कार, बाइक, और पैदल चलकर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक अगली चुनौती के लिए पहुंचना होता है l समापन बिंदु पर पहले पहुँचने वाले जोड़े को दस लाख डॉलर पुरस्कार मिलता है l

प्रेरित पौलुस मसीही जीवन की तुलना एक दौड़ से करके समापन रेखा तक नहीं पहुंचना स्वीकारता है l “उसने कहा, “हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ; परन्तु केवल यह एक काम करता हूँ कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर चौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊं” (फ़िलि. 3:13-14) l पौलुस मुड़कर पीछे नहीं देखा और अपने पिछले पराजयों को उसे दोष की भावना से दबाने नहीं दिया, न ही अपने वर्तमान सफलताओं से खुद को प्रयासशीन बनने दिया l वह यीशु की तरह और भी बनने के लिए लक्ष्य की ओर दौड़ता गया l

हम भी दौड़ में हैं l हमारी पिछली असफलताओं अथवा सफलताओं के बावजूद, हम आगे यीशु की तरह बनने के अपने अंतिम लक्ष्य की ओर दौड़ते रहें l हम किसी सांसारिक इनाम के लिए नहीं दौड़ रहे, किन्तु हमेशा उसका आनंद लेने के अंतिम लक्ष्य के लिए l

मिलकर कार्य करें

मेरी पत्नी शकरकंद, अजवाइन के पत्ते, मशरूम, गाजर, और प्याज को मिलाकर, धीमी आंच पर दम किया हुआ बेहतरीन माँसाहारी भोजन बनाती है l छः या साथ घंटे बाद घर खुशबु से भर जाता है, और पहला स्वाद बेहतरीन होता है l मेरे लिए यह फाएदेमंद है जब धीमी आंच पर समस्त सामग्री से ऐसा लाभ मिलता है जो अकेले प्राप्त नहीं किया जा सकता था l

जब पौलुस ने दुःख के सन्दर्भ में “सब ... मिलकर” वाक्यांश उपयोग किया, उसने उस शब्द का उपयोग किया जिससे शब्द सहक्रियता  मिलता है l उसने लिखा, “हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं : अर्थात् उन्हीं के लिए जो उसकी इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं” (रोमियों 8:28) l वह रोमियों को जताना चाहता था कि परमेश्वर उनके दुःख का कारण नहीं है, वह उनकी सर्वश्रेष्ठ भलाई के लिए, उनकी हर परिस्थिति को अपने दिव्य योजना के साथ सहयोग करने देगा l पौलुस द्वारा बताई गई भलाई स्वास्थ्य, धन, प्रसस्ती, या सफलता के अस्थायी आशीष नहीं थे, किन्तु “उसके पुत्र के  स्वरुप में” में बनना था (पद.29) l

हम धीरज धरें और भरोसा रखें क्योंकि हमारा स्वर्गिक पिता सब दुःख, बिमारी, बुराई को अपनी महिमा और हमारे आत्मिक भलाई के लिए उपयोग करेगा l वह हमें यीशु के समान बनाना चाहता है l