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Articles by विन्न कॉलियर

परमेश्वर पर केन्द्रित दृष्टी

2011 में, जापान में भूकंप के कारण हुई फुकुशिमा दाइची परमाणु दुर्घटना में भारी मात्रा में विषाक्त पदार्थ निकले, और 150,000 से अधिक निवासियों को घर खाली करने के लिए मजबूर होना पड़ा।  एक स्थानीय निवासी ने कहा, "यह ऐसा है जैसे फुकुशिमा पर एक अदृश्य बर्फ गिरी हो और लगातार गिरती रही, जिससे पूरा इलाका ढक गया।" उच्च विकिरण (रेडीएशन) संयंत्र से मीलों दूर फसलों, मांस और "हॉट स्पॉट" में दिखाई दिया। जहरों से निपटने के लिए, स्थानीय लोगों ने सूरजमुखी के पौधे लगाना शुरू किया, ये वनस्पतियां विकिरण को अवशोषित (सोखना) करने के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने दो लाख से अधिक बीज बोए, और अब फुकुशिमा में लाखों सूरजमुखी खिलते हैं।

सूरजमुखी, परमेश्वर की योजना के माध्यम से संचालित होकर, कुछ हद तक यीशु के स्वयं के जगत संबंधी कार्य के समान कार्य करता है जिसका उद्देश्य पूरी दुनिया को ठीक करना है। मसीह ने "हमारे दर्द को अपने शरीर में ले लिया" और "हमारे कष्ट को सहन किया" (यशायाह 53:4)। उसने हमारी दुनिया की सभी बुराइयों, हिंसा और विषाक्त पदार्थों को अपने अस्तित्व में आत्मसात कर लिया - वे सभी तरीके जिनसे हम मनुष्य खुद को नष्ट करते हैं। उसने हमारी सारी गलतियाँ आत्मसात कर लीं। क्रूस पर, यीशु को "बेधा गया" - उसके गलत कार्यों के लिए नहीं, बल्कि "हमारे अपराधों" के लिए (पद 5)। और चूँकि वह हमारे पापों के लिए मर गया, हम पूर्ण हो सकते हैं। यह "कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। " (v. 5)।

मसीह हमें केवल दूर से ही क्षमा नहीं करता, वह हमारी सारी जहरीली बुराइयों को अपने ऊपर ले लेता है। यीशु यह सब आत्मसात कर लेते हैं। और फिर वह आत्मिक रूप से हमें ठीक करता है।

संत निक/Saint Nick

जिस व्यक्ति को हम संत निकोलस (संत निक/Saint Nick) के नाम से जानते हैं उनका जन्म ई. सन् 270 के आसपास एक धनी यूनानी परिवार में हुआ था। दुर्भाग्य से, जब वह छोटा था तब ही उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई, और वह अपने चाचा के साथ रहता था जो उससे प्यार करते थे और परमेश्वर का अनुसरण करना सिखाते थे। जब निकोलस एक युवा व्यक्ति थे, तो कहते है कि उन्होंने तीन बहनों के बारे में सुना, जिनके पास शादी के लिए दहेज नहीं था और जल्द ही वे निराश्रित हो जातीं। ज़रूरतमंदों को देने के बारे में यीशु की शिक्षा का पालन करने के इच्छा से, उसने अपनी विरासत से प्रत्येक बहन को सोने के सिक्कों से भरा थैला दिया। कुछ वर्षों में, निकोलस ने  अपना शेष धन गरीबों को खिलाने और दूसरों का देखभाल करने में दे दिया। अगले शताब्दियों में, निकोलस को उसके भव्य उदारता के लिए सम्मानित किया गया, और उन्होंने उस चरित्र को प्रेरित किया जिसे हम सांता क्लॉज़ के रूप में जानते हैं।

 

जबकि (क्रिसमस के) मौसम की चकाचौंध और विज्ञापन हमारे उत्सवों को खतरे में डाल सकता हैं, उपहार देने की परंपरा निकोलस से जुड़ा है। और उसकी उदारता यीशु के प्रति उसके भक्ति पर आधारित थी। निकोलस को पता था कि मसीह ने अकल्पनीय उदारता प्रदर्शित करके, सबसे गहरा उपहार लाया : परमेश्वर। यीशु “परमेश्‍वर हमारे साथ” है। और वह हमारे लिए जीवन का उपहार लाया। मृत्यु की दुनिया में, वह "अपने लोगों को उनके पापों से बचाता है" (v. 21)

 

जब हम यीशु पर विश्वास करते हैं, तो बलिदान स्वरूप उदारता सामने आती है। हम दूसरों के जरूरतों को पूरा करते हैं, और हम उनके लिए खुशी से प्रदान करते हैं जिस तरह परमेश्वर हमारे लिए प्रदान करता है। यह संत निक की कहानी है; लेकिन इससे कहीं अधिक, यह परमेश्वर की कहानी है।

चरवाहे की आवाज को पहचानना

जब मैं अमेरिका के एक खेत में रहने वाला लड़का था, तो मैं अपने सबसे अच्छे दोस्त के साथ घूमते हुए शानदार दोपहरें बिताता था। हम जंगलों में घूमते, घोड़ों की सवारी करते, दौड़ के मैदान में जाते और खलिहान में जाकर पशुपालक को घोड़ों पर काम करते देखते। लेकिन जब भी मैंने अपने पिताजी की सीटी सुनी— वह स्पष्ट ध्वनि हवा और अन्य सभी गड़गड़ाहटों को चीरती हुई— मैं सब काम छोड़ कर घर की ओर चला जाता था। संकेत अचूक था और मैं जानता था कि मेरे पिता मुझे बुला रहे हैं। दशकों बाद, मैं आज भी उस सीटी को पहचान लूँगा। 

यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि वह चरवाहा था, और वे भेड़ें थीं। "भेड़ें उसका[चरवाहा] शब्द सुनती हैं", उन्होंने कहा," वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।" (यूहन्ना 10:3) ऐसे समय में जब कई धर्मगुरु और शिक्षकों ने अपने अधिकार का दावा करके मसीह के शिष्यों को भ्रमित करने की कोशिश की, उन्होंने घोषणा की कि उनकी प्रेमपूर्ण आवाज अभी भी स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है, अन्य सभी से अधिक स्पष्ट। "भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं।"(पद 4)

आइए हम यीशु की आवाज़ सुनते समय सावधान रहें और इसे मूर्खतापूर्ण ढंग से अनदेखा करने से बचें, क्योंकि सच तो यह है: चरवाहा स्पष्ट बोलता है, और उसकी भेड़ें उसकी आवाज़ सुनती हैं। शायद बाइबल के कोई पद के माध्यम से, किसी विश्वासी मित्र के शब्दों के माध्यम से, या आत्मा की प्रेरणा के माध्यम से—यीशु बात करता हैं, और हम सुनते हैं।

बिना सोचे समझे खतरे की ओर आगे बढ़

1892 में, हैजा से पीड़ित एक निवासी ने गलती से यह बीमारी एल्बे नदी के माध्यम से जर्मनी की संपूर्ण जल आपूर्ति हैम्बर्ग तक फैला दी। कुछ ही हफ्तों में दस हजार नागरिक मर गये। आठ साल पहले, जर्मन सूक्ष्म जीवविज्ञानी (microbiologist) रॉबर्ट कॉख ने एक खोज की थी: हैजा पानी से होने वाली बीमारी है जो तेजी से फैलती है। कॉख के इस प्रकटन ने बड़े यूरोपीय शहरों के अधिकारियों को अपने पानी की सुरक्षा के लिए फिल्ट्रेशन प्रणाली (पानी साफ करने की एक विधि) में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। हालाँकि, हैम्बर्ग के अधिकारियों ने कुछ नहीं किया। लागतों का हवाला देते हुए और संदेहपूर्ण विज्ञान का आरोप लगाते हुए, उन्होंने स्पष्ट चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया, जबकि उनका शहर तबाही की ओर अग्रसर था।

नीतिवचन की किताब हममें से उन लोगों के बारे में बहुत कुछ कहती है जो मुसीबत देखते हैं फिर भी कोई कदम उठाने या काम करने से इनकार कर देते हैं। "बुद्धिमान व्यक्ति खतरे को पहले से ही भांप लेता है और सावधानी बरतता है।” (27:12)। जब परमेश्वर हमें आगे आने वाले खतरे को देखने में मदद करता है, तो खतरे को दूर करने के लिए कोई कदम उठाना या काम करना सही समझ है। हम समझदारी से रास्ता बदलते हैं। या हम उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली उचित सावधानियों के साथ स्वयं को तैयार करते हैं। लेकिन हम कुछ तो अवश्य ही करते हैं I कुछ न करना सरासर पागलपन है। हालाँकि, हम सभी चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ करने में विफल हो सकते हैं और आपदा की ओर बढ़ सकते हैं। "भोले लोग आगे बढ़े चले जाते और हानि उठाते है” (पद-12)।

पवित्रशास्त्र में और यीशु के जीवन के द्वारा, परमेश्वर हमें अनुसरण करने का मार्ग दिखाते हैं और हमें निश्चित रूप से आने वाली मुसीबतों के बारे में चेतावनी देते हैं। यदि हम मूर्ख हैं, तो हम बिना सोचे समझे खतरे की ओर आगे बढ़ सकते है या इसके बजाय, जब वह अपनी कृपा से हमारा नेतृत्व करता है, तो क्या हम उसकी बुद्धि पर ध्यान दे सकते हैं और अपना रास्ता बदल सकते हैं।

हमें जिस बुद्धि की आवश्यकता है

अपनी याद रहने वाली (अति महान)  पुस्तक द ग्रेट इन्फ्लुएंजा (The Great Influenza) में, जॉन एम. बैरी ने 1918 फ्लू महामारी की कहानी का वर्णन किया है। बैरी ने खुलासा किया कि कैसे स्वास्थ्य अधिकारियों ने सतर्क रहने के बजाय बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका जताई थी। उन्हें डर था कि प्रथम विश्व युद्ध, जिसमें सैकड़ों हजारों सैनिक खाइयों में ठूंस दिए गए और सीमाओं के पार चले गए, नए वायरस फैलाएंगे। लेकिन तबाही रोकने के लिए ये ज्ञान बेकार था. शक्तिशाली नेता युद्ध पर ज़ोर देते हुये बिना सोचे समझे हिंसा की ओर अग्रसर हो गये। और महामारी विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि महामारी में पांच करोड़ लोग मारे गए थे, जो युद्ध के नरसंहार में मारे गए लगभग दो करोड़ लोगों को और जोड़ते हैं।

हमने बार-बार साबित किया है कि हमारा मानवीय ज्ञान हमें बुराई से बचाने के लिए कभी भी पर्याप्त नहीं होगा (नीतिवचन 4:14-16)। हालाँकि हमने अपार ज्ञान अर्जित किया है और उल्लेखनीय अंतर्दृष्टियाँ (insights) प्रस्तुत की हैं, फिर भी हम एक-दूसरे को पहुँचाने वाली पीढ़ा को रोक नहीं सकते हैं। हम "दुष्टों के मार्ग" को नहीं रोक सकते, यह मूर्खतापूर्ण, दोहराने वाला मार्ग जो "गहन अंधकार" की ओर ले जाता है। हमारे सर्वोत्तम ज्ञान के बावजूद, हमें वास्तव में यह पता नहीं है कि "हम किस से ठोकर खाते है” (पद-19)।

इसलिए हमें "बुद्धि प्राप्त करनी चाहिए, समझ प्राप्त करनी चाहिए" (पद-5)। बुद्धि हमें सिखाती है कि ज्ञान के साथ क्या करना है। और सच्ची बुद्धि, यह बुद्धि जिसकी हमें अत्यंत आवश्यकता है, परमेश्वर से आती है। हमारा ज्ञान हमेशा कम पड़ता है, लेकिन उसकी बुद्धि वह प्रदान करती है जिसकी हमें आवश्यकता है।

सुंदर बहाली (पुनरुद्धार)

प्रसिद्ध कलाकार मकोतो फुजीमुरा ने अपनी अद्भुत पुस्तक आर्ट + फेथ: ए थियोलॉजी ऑफ मेकिंग में प्रसिद्ध कलाकार मकोतो फुजीमुरा किंत्सुगी के प्राचीन जापानी कला रूप का वर्णन करते हैं। इसमें कलाकार टूटे हुए मिट्टी के बर्तन (मूल रूप से चाय के बर्तन) के टुकड़ों को लाख के साथ जोड़कर दरारों में सोना भरता है। फुजीमुरा बताते हैं – “किंत्सुगी सिर्फ एक टूटे हुए बर्तन को ठीक या मरम्मत नहीं करता है, बल्कि यह तकनीक टूटे हुए मिट्टी के बर्तनों को पहले से भी अधिक सुंदर बना देती है।”  किन्त्सुगी की शुरुआत सदियों पहले हुई थी जब एक सेनापति का पसंदीदा कप टूट गया था और फिर जिसे खूबसूरती से बहाल किया गया था, और तब से यह एक कला बन गई जो अत्यधिक बेशकीमती और चाहने योग्य है। 

यशायाह ने परमेश्वर द्वारा संसार के साथ इस प्रकार की बहाली को कुशलतापूर्वक क्रियान्वित करने का वर्णन किया है। यद्यपि हम अपने विद्रोह के कारण बरबाद हो गए हैं और अपने स्वार्थ के कारण टूट गए हैं, परमेश्वर “नया आकाश और नई पृथ्वी” बनाने का वादा करता है (65:17)। वह न केवल पुरानी दुनिया की मरम्मत करने की योजना बना रहा है बल्कि इसे पूरी तरह से नया बनाने के लिए हमारी बर्बादी (खंडहरों)  को हटाकर एक ताज़ी सुंदरता से झिलमिलाती दुनिया को बनाने की योजना बना रहा है। यह नई रचना इतनी आश्चर्यजनक और शोभायमान होगी कि “पिछला कष्ट दूर हो जायेगा और पिछली बातें याद नहीं रहेंगी” (पद 16–17)। इस नई रचना के साथ, परमेश्वर हमारी गलतियों को छिपाने के लिए संघर्ष नहीं करेंगे, बल्कि अपनी रचनात्मक शक्ति को प्रकट करेंगे – शक्ति जिससे  बदसूरत चीजें सुंदर बन जाती हैं और मृत चीजें नए सिरे से सांस लेती हैं।

जब हम अपने टूटे हुए जीवन का सर्वेक्षण करते हैं, तो निराशा की कोई आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर अपनी सुंदर बहाली का कार्य कर रहा है।

परमेश्वर की महान गाथा

लाइफ मैगज़ीन के 12 जुलाई, 1968 के मुखपृष्ठ पर बियाफ्रा (नाइजीरिया में गृहयुद्ध के दौरान) के भूख से मर रहे बच्चों की भयानक तस्वीर प्रकाशित की गई थी। एक जवान लड़के ने परेशान होकर उस मैगज़ीन की एक प्रतिलिपि (कॉपी) पास्टर के पास ले जाकर पूछा, “क्या परमेश्वर को इस बारे में मालूम है?” उस पास्टर ने उत्तर दिया, “मैं जानता हूँ कि तुम इस बात को नहीं समझ सकते, परन्तु, हाँ, परमेश्वर को इस बारे में मालूम है।” इस पर वह लड़का यह कहते हुए बाहर चला गया कि उसे ऐसे परमेश्वर में कोई दिलचस्पी नहीं है।

ऐसे प्रश्न केवल बच्चों को ही नहीं बल्कि हम सभी को परेशान करते हैं। परमेश्वर के रहस्यमयी ज्ञान की पुष्टि के साथ-साथ, मैं इस बात की आशा करता हूँ कि काश उस लड़के ने उस महान गाथा के बारे में सुना होता जिसे परमेश्वर ने लिखना जारी रखा   है यहाँ तक कि बियाफ्रा जैसे स्थानों में भी।

यीशु ने अपने उन अनुयायियों के लिए इस कहानी को प्रकट किया, जिन्होंने यह मान लिया था कि कठिनाई से वह उनकी रक्षा करेगा। इसके बजाय मसीह ने उनसे कहा कि “इस संसार में तुम्हें क्लेश होता है।” हालाँकि, यीशु ने जिस बात की पेशकश की, वह उसकी यह प्रतिज्ञा थी कि ये बुराइयाँ अंत नहीं हैं। वास्तव में, उसने पहले से ही “संसार को जीत लिया है” (यूहन्ना 16:33)। और परमेश्वर के अंतिम अध्याय में, हर एक अन्याय को मिटा दिया जाएगा, हर एक दुःख ठीक हो जाएगा।

उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक की पुस्तकें हर अकल्पनीय बुराई को नष्ट करने, हर गलत बात को सही करने की परमेश्वर की कहानी को याद दिलाती  हैं। यह कहानी उस प्रेम करने वाले व्यक्ति को प्रस्तुत करती है जिसकी हममें अविवादित रुचि है। यीशु ने अपने चेलों से कहा कि “मैंने ये बातें तुम से इसलिए कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शांति मिले” (पद 33)। सम्भव है कि आज के समय में भी हम उसकी शांति और उपस्थिति में विश्राम करें।

यीशु हमारा भाई

ब्रिजर वॉकर केवल छह साल का था जब एक खतरनाक कुत्ता उसकी छोटी बहन पर झपट पड़ा l स्वभाविक रूप से, ब्रिजर कुत्ते के क्रूर हमले से उसे बचाने के लिए उसके सामने कूद गया l आपातकालीन देखभाल प्राप्त करने और उसके चेहरे पर नब्बे टाँके लगने के बाद, ब्रिजर ने बताया l “अगर किसी को मरना था, तो वह मैं था l” शुक्र है कि प्लास्टिक सर्जनों ने ब्रिजर के चेहरे को ठीक कर दिया l लेकिन उसका स्नेहमय प्यार, नए तस्वीरों से जाहिर होता है, जहाँ वह अपनी बहन को गले लगाते हुए दिखाई देता है, जो सदैव मजबूत बना हुआ है l

आदर्श रूप से, परिजन हम पर नज़र रखते हैं और हमारी देखभाल करते हैं l सच्चे भाई जब हम डरते हैं या अकेले होते हैं हमारे मुसीबत में आते हैं l वास्तव में, हमारे सबसे अच्छे भाई भी अपूर्ण हैं; कुछ हमें चोट भी पहुंचाते हैं l हालाँकि, हमारा एक भाई, यीशु हमेशा हमारी तरफ है l इब्रानियों हमें बताता है कि मसीह, विनम्र प्रेम के एक कार्य के रूप में, मानव परिवार में शामिल हो गया, हमारे “मांस और लहू” को साझा किया और, “सब बातों में अपने भाइयों के समान [बना]” (2:14,17) l परिणामस्वरूप, यीशु हमारा सबसे सच्चा भाई है, और वह हमें अपना “भाई [और बहन]” कहकर प्रसन्न होता है (पद.11) l

हम यीशु को अपने उद्धारकर्ता, मित्र और राजा के रूप में संदर्भित करते हैं—और इनमें से हर एक सत्य है l हालाँकि, यीशु हमारा भाई भी है जिसने हर मानवीय भय और प्रलोभन, हर निराशा या उदासी का अनुभव किया है l हमारा भाई हमेशा हमारे साथ खड़ा है l

सबल और निर्बल

कॉलेज फुटबॉल में शायद सबसे हृदयस्पर्शी परंपरा आयोवा विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका में होती है l आयोवा के किन्निक स्टेडियम के बगल में स्थित स्टेड फैमिली चिल्ड्रेन हॉस्पिटल है, और हॉस्पिटल की सबसे ऊपरी मंजिल में फर्श से छत तक खिड़कियाँ हैं जो मैदान का शानदार दृश्य प्रस्तुत करती हैं l खेल के दिनों में, बीमार बच्चे और उनके परिवार नीचे की कार्यवाई देखने के लिए फर्श पर इकठ्ठा होते हैं, और पहली तिमाही के अंत में, कोच, एथलीट और हजारों प्रशंसक हॉस्पिटल की ओर मुड़कर हाथ हिलाते हैं l उन कुछ पलों में बच्चों की आँखों में चमक आ जाती है l खिलाड़ियों से खचाखच भरे स्टेडियम में और हज़ारों की संख्या में टीवी दर्शकों के सामने, खिलाडियों का रूककर अपना परवाह दिखाना शक्तिशाली है l

शास्त्र शक्तिशाली लोगों को (और हम सभी के पास किसी न किसी प्रकार की शक्ति है) निर्देशित करते हैं कि जो कमज़ोर हैं उनकी देखभाल करें, उन पर ध्यान दें जो संघर्ष कर रहे हैं, और उनकी देखभाल करें जिनके शरीर टूटे हुए हैं l हालाँकि, बहुत बार, हम उन लोगों की उपेक्षा करते हैं जिनपर ध्यान देने की ज़रूरत है (यहेजकेल 34:6) l नबी यहेजकेल ने इस्राएल के अगुओं को उनके स्वार्थी स्वभाव के लिए डांटा, उन लोगों की उपेक्षा करने के लिए जिन्हें सहायता की अति आवश्यकता थी l “हाय,” परमेश्वर ने यहेजकेल द्वारा कहा l “तुम ने बीमारों को बलवान न किया, न रोगियों को चंगा किया, न घायलों के घावों को बाँधा” (पद.2, 4) l

कितनी बार हमारी व्यक्तिगत प्राथमिकताएँ, नेतृत्व दर्शन, या आर्थिक नीतियाँ संकट में पड़े लोगों के प्रति कम सम्मान प्रदर्शित करती हैं? परमेश्वर हमें एक अलग मार्ग दिखाता है, जहाँ शक्तिशाली लोग निर्बलों की परवाह करते हैं (पद.11-12) l