धीरज में सबक
बॉब सालेम के पास अपने नाक से या यूँ कहें कि चेहरे पर चम्मच लगाकर मूंगफली को पाइक पीक(Pike Peak—एक पर्वत चोटी) तक धकेलने की स्पीड रिकॉर्ड है l उन्होंने पर्यटकों की रुकावट से बचने के लिए रात में काम करते हुए सात दिनों में यह उपलब्धि हासिल की l बॉब इस स्टंट/stunt को पूरा करने वाले चौथे व्यक्ति है, यानी तीन अन्य बेहद धैर्यवान लोगों ने इसे किया है l
हम कह सकते हैं कि धैर्य की उनकी ज़रूरत स्वयं-प्रदत्त(self-inflicted) थी, लेकिन जीवन में अक्सर ऐसा नहीं होता है l यह आत्मा का फल है(गलातियों 5:22) और “सिद्ध . . . और किसी बात की घटी न होने वाले” बनने के लिए एक आवश्यक गुण है l जब आस-पास के सभी लोग पूरी तरह दहशत में हों तो धैर्यवान लोग स्थिर और शांत रहते हैं l वे चाहते हैं कि स्थिति अलग हो, लेकिन उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं है l वे बुद्धिमानी से कार्य करने के लिए ईश्वर पर भरोसा करते हुए मार्ग पर बने रहते हैं (पद.5) l
धैर्य के साथ समस्या यह है कि इसे सीखने का केवल एक ही तरीका है l याकूब कहता है, “तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है”(पद.3) l इस तरह का जांच बड़े और छोटे तरीकों से होता है l मैं इसे एक हवाई अड्डे से लिख रहा हूँ l मेरी रात के 11.00 बजे की उड़ान में 2.00 बजे तक का विलम्ब हुआ, फिर उड़ान रद्द कर दी गयी l एक रात बिना सोए रहने के बाद, मैं कॉफ़ी पी रहा हूँ और उम्मीद कर रहा हूँ कि किसी समय इसे घर पर बनाऊंगा l मुझे हवाई अड्डे पर नींद भरा पूरा दिन बर्बाद करना पसंद नहीं है, लेकिन मेरा प्यारा पिता मुझे धैर्य रखना सिखा रहा है l
मैं प्रार्थना करता हूँ कि आज का मेरा पाठ समाप्त हो जाए, लेकिन कौन जानता है? अगली उड़ान के लिए अतिरिक्त सूची की जांच करने का समय है l

यीशु के लिए दौड़ना
जब लोग 100 मीटर दौड़ के बारे में विचारते हैं, तो वर्तमान विश्व-रिकॉर्ड धारक उसेन बोल्ट(Usain Bolt) का ख्याल आ सकता है l लेकिन हम जूलिया “हरिकेन” हॉकिंस(Julia “Hurricane” Hawkins”) के बारे में नहीं भूल सकते हैं l 2021 में, जूलिया ने लुइसियाना सीनियर गेम्स(Louisiana Senior Games) में 100 मीटर दौड़ जीतने के लिए अन्य सभी धावकों से पहले समापन रेखा पार कर ली l उसका समय बोल्ट(Bolt) के 9.58 सेकंड से थोड़ा धीमा था—60 सेकंड से थोड़ा अधिक l लेकिन उनकी उम्र भी 105 वर्ष थी!
उस महिला के विषय पसंद करने लायक बहुत कुछ है जो इस उम्र में भी फर्राटा दौड़ रही है l और यीशु में विश्वासियों के बारे में पसंद करने लायक बहुत कुछ है जो उसे अपने लक्ष्य के रूप में लेकर दौड़ना कभी नहीं छोड़ते(इब्रानियों 12:1-2) l भजनकार जीवन के बाद के चरणों में विश्वासयोग्य लोगों के बारे में यह कहता है : “धर्मी लोग खजूर के पेड़ की तरह फूले फलेंगे . . . वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे”(भजन 92:12-14) l
पुराने विश्वासी जो इस प्रकार के मानक का पालन करते हैं, उन्हें प्रेरित पौलुस के तीतुस को लिखे पत्र में और निर्देश मिल सकते हैं l अनुभवी पुरूषों का “विश्वास और प्रेम और धीरज पक्का हो”(तीतुस 2:2), और बूढ़ी स्त्रियाँ “अच्छी बातें सिखानेवाली हों”(पद.3) l
पुराने विश्वासियों से दौड़ में भाग लेना बंद करने का कोई बुलावा नहीं है l शायद उस तरह नहीं जैसे जूलिया ट्रैक पर करती है लेकिन उन तरीकों से जो परमेश्वर का आदर करते हैं क्योंकि वह उन्हें ज़रूरी सामर्थ्य देता है l आइये हम सब उसकी और दूसरों की अच्छी सेवा करने की दौड़ में भाग लें l

पिछली सीट पर बाइबल
एंड्रू की वोक्सवैगेन(Volkswagen) कार रुक गयी, और सुरक्षा गार्ड सामने आ गए l उन्होंने प्रार्थना की जैसे उन्होंने अतीत में कई बार की थी : हे परमेश्वर जब आप पृथ्वी पर थे, तो आपने अंधी आँखों को देखने लायक बना दिया l अब, कृपया देखने वाली आँखों को अँधा कर दें l गार्डों ने कार की तलाशी ली और सामान में बाइबल के बारे में कुछ नहीं कहा l एंड्रू ने सीमा पार की और सामान लेकर उन तक पहुंचे जो बाइबल प्राप्त नहीं कर सकते थे l
एंड्रू वैन डेर बिज्ल, या ब्रदर एंड्रू(Brother Andrew), उस असंभव कार्य के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य पर भरोसा करते थे जिसके लिए परमेश्वर ने उन्हें बुलाया था—पवित्रशास्त्र को उन देशों में ले जाना जहाँ मसीहियत गैरकानूनी था l उन्होंने अपनी सीमित शिक्षा और धन की कमी पर जोर देते हुए कहा, “मैं एक साधारण व्यक्ति हूँ l” “मैंने जो किया, कोई भी कर सकता है l” आज उनकी संस्था, ओपन डोर्स इंटरनेशनल(Open Doors International), पूरे संसार में यीशु में सताए गए विश्वासियों की सेवा करती है l
जब यहूदा के राज्यपाल जरूब्बाबेल को यहूदियों के निर्वासन से लौटने के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण के असंभव कार्य का सामना करना पड़ा, तो वह निराश हो गया l लेकिन परमेश्वर ने उसे याद दिलाया कि वह मानवीय शक्ति या ताकत पर नहीं, बल्कि उसकी आत्मा पर भरोसा करे(जकर्याह 4:6) l उसने उसे नबी जकर्याह को निकट के जैतून के पेड़ों से तेल से आपूर्ति किये गए दीवट के एक दर्शन के द्वारा उत्साहित किया(पद.2-3) l जिस प्रकार तेल की लगातार आपूर्ति के कारण दीपक जल सकते थे, उसी प्रकार जरूब्बाबेल और इस्राएली उसकी सामर्थ्य की निरंतर आपूर्ति पर भरोसा करके परमेश्वर का कार्य कर सकते थे l
जब हम परमेश्वर पर निर्भर रहते हैं, आइये हम उस पर भरोसा करें और वही करें जो वह हमें करने के लिए कहता है l

परमेश्वर हमें देखता है
मिशिगन राज्य में 40 लाख पेड़ हैं, जिनमें से अधिकाँश सर्वाधिक मानकों के हिसाब से काफी सामान्य हैं l फिर भी राज्य एक वार्षिक “बिग ट्री हंट(Big Tree Hunt)” का आयोजन करता है, जो उन पेड़ों की पहचान करने के लिए एक प्रतियोगिता है जो सबसे पुराने और सबसे बड़े हैं, ऐसे पेड़ जिन्हें जीवित मील के पत्थर(landmark) के रूप में सम्मानित किया जा सकता है l प्रतियोगिता सामान्य पेड़ों को दूसरे स्तर पर ले जाती हैं : किसी भी जंगल के अन्दर एक पुरस्कार विजेता हो सकता है, बस ध्यान दिए जाने का इंतजार कर रहा है l
अधिकाँश लोगों के विपरीत, ईश्वर हमेशा सामान्य बातों पर ध्यान देता है l वह इस बात की परवाह करता है कि दूसरे क्या और किसकी अनदेखी करते हैं l राजा यारोबाम के शासनकाल के दौरान परमेश्वर ने आमोस नाम के एक आम आदमी को इस्राएल भेजा l आमोस ने अपने लोगों को बुराई से दूर रहने और न्याय की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित किया लेकिन उसे बहिस्कृत कर दिया गया और चुप रहने को कहा गया l “हे दर्शी, यहाँ से निकलकर यहूदा देश में भाग जा . . . और वहीँ भविष्यवाणी किया कर”(आमोस 7:12) l आमोस ने उत्तर दिया, “मैं न तो भविष्यद्वक्ता था, और न भविष्यद्वक्ता का बेटा; मैं तो गाय-बैल का चरवाहा, और गूलर के वृक्षों का छाँटनेवाला था l और यहोवा ने मुझे भेड़-बकरियों के पीछे पीछे फिरने से बुलाकर कहा, ‘जा, मेरी प्रजा इस्राएल से भविष्वाणी कर’” (पद.14-15) l
परमेश्वर ने आमोस को तब जाना और उस पर ध्यान दिया जब वह एक सामान्य चरवाहा था, जो भेड़-बकरियों और पेड़ों की देखभाल करता था l सैकड़ों साल बाद, यीशु ने देखा और अंजीर और गूलर के पेड़ों के पास साधारण नतनएल(यूहन्ना 1:48) और जक्कई(लूका 19:4-5) को बुलाया l इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कितना अस्पष्ट महसूस करते हैं, वह हमें देखता है, हमसे प्यार करता है और हमें अपने उद्देश्यों के लिए उपयोग करता है l

परमेश्वर हमारी कहानियों का उपयोग करता है
मैंने मेमोरी बॉक्स(memory box) खोली और एक छोटा, चांदी का ब्रोच(broach) निकाली, जो दस सप्ताह के अजन्मे बच्चे के पैरों के बिलकुल नाप और आकार का था l दस नन्हे पैर की उँगलियों को सहलाते हुए, मुझे अपनी पहली गर्भावस्था के नुकसान की याद आई और जो लोग कहते थे कि मैं “भाग्यशाली” थी, मैं “आशा से परे” थी l मुझे दुःख हुआ था, यह जानकार कि मेरे बच्चे के पैर उतने ही असली थे जितना कि एक समय मेरे गर्भ में धड़कने वाला हृदय l मैंने ईश्वर को मुझे निराशा से मुक्त करने और अपनी कहानी का उपयोग उन लोगों को सांत्वना देने के लिए किया जो एक बच्चे को खोने के बाद दुखी थे l मेरे गर्भपात के दो दशक से भी अधिक समय बाद, मेरे पति और मैंने उस खोए हुए बच्चे का नाम काई(Kai) रखा, जिसका कुछ भाषाओं में अर्थ है “आनंदित होना l” यद्यपि मैं अभी भी अपने नुकसान से दुखी हूँ, मैं अपने दिल को ठीक करने और दूसरों की मदद करने के लिए अपनी कहानी का उपयोग करने के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देती हूँ l
भजन 107 का लेखक परमेश्वर के स्थायी चरित्र पर आनंदित हुआ और उसने गाया : “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!”(पद.1) l उसने “यहोवा के छुड़ाए [हुओं]” से “ऐसा ही (अपनी कहानी कहने)” का निवेदन करता है, “उन कर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिए करता है, उसका धन्यवाद” करने को कहता है(पद.8) l उसने इस प्रतिज्ञा के साथ आशा की पेशकश की कि केवल ईश्वर ही “अभिलाषी जीव को संतुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है” (पद.9) l
कोई भी दुःख या कष्ट से बच नहीं सकता, यहाँ तक कि वे भी जिन्हें क्रूस पर मसीह के बलिदान के द्वारा छुटकारा मिला है l हम ईश्वर की दया का अनुभव कर सकते हैं जब वह हमारी कहानियों का उपयोग दूसरों को अपने उद्धारक प्रेम की ओर इशारा करने के लिए करता है l